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शरजील इमाम और शाहीन बाग कैसे पैदा होते हैं….

क्या लगता है कि याकूब मेमन, अफ़ज़ल गुरु और बुरहान वानी का समर्थन कर चुके लोग शरजील इमाम को उसके हाल पर छोड़ देंगे? आगे का पूरा टाइमलाइन:
– आज बड़ी चालाकी से उसे “जेएनयू का छात्र” लिखा जा रहा है, “द वायर का पत्रकार” नहीं।
– एक-दो दिन में उसके लिए सहानुभूति पैदा करने का काम शुरू होगा, जिसके लिए यही छात्र शब्द बुनियाद बनेगा।
– बताया जाएगा कि वो तो चिकेन नेक पर चक्का जाम की बात कर रहा था।
– सेकुलर मीडिया उसके पक्ष में संपादकीय लिखेगा, संपादक ट्वीट करेंगे।
– बताया जाएगा कि जेएनयू के नकाबपोशों को तो पुलिस अब तक नहीं पकड़ पाई।
मानो कैंपस में मारपीट करना और असम को देश से अलग करना एक जैसा अपराध है।
– धीरे-धीरे उसे ब्रांड बनाया जाएगा। यूएन का ह्यूमन राइट्स कमीशन उसकी गिरफ़्तारी पर चिंता जताएगा।

– प्रियंका वाड्रा शरजील इमाम की माँ से मिलने जाएगी। उनसे लिपटकर फ़ोटो खिचवाएँगी।
– दीपिका पादुकोण पर बोल चुके रघुराम राजन अब शरजील का सपोर्ट करेंगे, ताकि पब्लिसिटी मिले।
– “विराट हिंदू” नाम के फ़ेसबुक अकाउंट से शरजील को ग़द्दार कहा जाएगा, जिसका स्क्रीनशॉट दिखाकर रवीश जी प्राइम टाइम करेंगे कि क्या भीड़ तय करेगी कि कौन ग़द्दार है।
– मेरठ में “हिंदू सेना” शरजील इमाम की गर्दन काटने पर 5 लाख रुपये इनाम घोषित करेगी। 3 दिन तक चैनलों पर ख़बर चलेगी।
– PFI कपिल सिब्बल के अकाउंट में 50-60 लाख रुपये भेजेगा, ताकि वो उसका मुकदमा लड़ें।
– मुक़दमा ट्रायल कोर्ट में नहीं, सीधे सुप्रीम कोर्ट में चलेगा।
– अदालत पर “जनभावनाओं” दबाव बनेगा और उसे ज़मानत पर रिहा कर दिया जाएगा।
– इसके बाद वो देशभर के चैनलों में नागरिक अधिकारों के प्रवक्ता के तौर पर बुलाया जाएगा।
– लिट्रेचर फ़ेस्टिवल में उसके सेशन में सबसे ज़्यादा भीड़ होगी। जहां बुर्के वालियां उसके साथ सेल्फ़ी खिचवाएँगी।
– धीरे-धीरे हिंदुओं को भी को लगने लगेगा कि स्टूडेंट ही तो है। ग़लती हो गई। क्या फ़र्क़ पड़ता है?

– अगली बार कोई तमिलनाडु, केरल, बंगाल को देश से तोड़ने की बात करेगा। हम चुप रहेंगे छोड़ो जाने दो… हमको क्या फ़र्क़ पड़ता है।

और किसी अदालत में किसी पर जब मुकदमा चलेगा तो ये दृश्य होगा

जज – तूने भारत तेरे टुकड़े होंगे का नारा लगाया था ?
कैदी – हां

जज – तुमने पाकिस्तान जिंदाबाद का नारा लगाया था ?
कैदी – हां

जज – तुमने राष्ट्र गान और राष्ट्रगीत का विरोध और अपमान किया ?
कैदी -हां

जज – तुमने आतंकवाद और नक्सलवाद का समर्थन किया था ?
कैदी – हां

जज – तुमने सेना .पुलिस के खिलाफ हथियार उठाने का समर्थन किया था ?
कैदी -हां

जज – तुमने सरकारी संपत्ती को नुकसान पहुंचाया था ?
कैदी – हां

जज – तुमने पाकिस्तान का झंडा लहराया था ?
कैदी – हां

जज – तुमने ऐसा क्यों किया, तुम्हे पता है इसकी सजा क्या है ?

कैदी – जी हां , मैंने ऐसा बहुत सोच समझ के किया है…. इसके पहले मै गुमनाम इंसान था, छोटी-छोटी चीजो के लिए तरसता था, लेकिन जब से ऐसा किया तभी से मैं माननीयो की श्रेणी में आ गया हूँ ।

राष्ट्रीय क्षेत्रीय पार्टियो के बड़े-बड़े नेता जैसे #राहुल_सोनिया_ लालू_ मायावती _ अखिलेश _ममता, पवार_ देवगोडा_ येचुरी_चौटाला_ अब्दुल्ला_ केजरीवाल मुझसे मिलने के लिए बेचैन है.

उनके दिन भर फोन आ रहे है, कोई न कोई रोज सुबह शाम मिलने आता है…. मेरे विचारधारा पर अच्छे अच्छे राजनैतिक विश्लेषक मंथन कर रहे है,

#रवीश कुमार _राजदीप_ बरखा_ प्रसून शेखर गुप्ता जैसे पत्रकार हमारी सराहना कर रहे है, मुझ पर प्रिंट मिडिया में लेख लिखे जा रहे है टी वी चैनलों पर मेरे ऊपर बहस चल रही है.

कल मै छोटी मोटी नौकरी के लिए परेशान था, आज बड़ी बड़ी पार्टियों से विधायकी सांसदी चुनाव लड़ने के ऑफर आ रहे है….. मेरे खाते में पता नहीं कहा से करोडो रूपये आ गए है……

जज – लेकिन यह राष्ट्रद्रोह है, तुम पर #राष्ट्रद्रोह का मुकदमा चल सकता है…..

कैदी – कोई दिक्कत नहीं….. देश के नामी वकील कपिल सिब्बल, मनुसंघवी, प्रशांत भूषण मेरी पैरवी करेंगे, याक़ूब मेमन कसाब और अफ़ज़ल के पक्ष में आधी रात तक कोर्ट खुलवाने वाले लोग मुझे बाहर निकाल लेंगे…. या फिर सजा मिलने में ही 20 साल लगेगा उसके बाद ऊपर के कोर्ट में चले जायेंगे….

मजाक में मत लिजीये…..

ऎसे ही हरकत से जिग्नेश, कन्हैया, उमर खालिद, हार्दिक, अल्पेश, ओवेसी, आजम और अजमल जैसे नेता पैदा हो गये हैं….

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