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पाकिस्तान के हिंदुओं की जान का दुश्मन है मियाँ मिठ्ठू

पाकिस्तान के हिन्दुओं के लिए एक दरगाह का संचालक ‘मियां मिट्ठू’आतंक का पर्याय बन चुका है। फिल्म ‘शोले’ के गब्बर सिंह की तरह ‘मियां मिट्ठू’ का नाम लेते ही हिन्दू परिवार डर से बुरी तरह सिहर जाते हैं। इसलिए वहां के हिन्दुओं की हमेशा यही कोशिश यही रहती है कि वे किसी तरह उसके सामने न आएं।

कहने को ‘मियां मिट्ठू’ सूफी है, लेकिन असल में वह पाखंडी, अय्याश और दुराचारी है। हिन्दुओं को प्रताडि़त करना, साम्प्रदायिक दंगे भड़काना, हिन्दुओं के धर्मस्थलों और उनकी संपत्ति को नुकसान पहुंचाना, हिन्दू लड़के-लड़कियों का अपहरण, उनका कन्वर्जन और मानव तस्करी इस शख्स की फितरत में शुमार है। उस पर इससे संबंधित दर्जनों मुकदमे भी दर्ज हैं। फिलहाल वह हिन्दुओं के धरना-प्रदर्शन और विदेशी दबावों पर ऐसे ही एक मामले में जेल की हवा खा रहा है। लेकिन उसके जेल में होने के बावजूद हिन्दू समुदाय के बीच उसका खौफ आज भी तारी हुआ है। इस ढपोरशंखी सूफी फकीर के बेटे, सगे-संबंधी और गिरोह के गुर्गे बराबर सक्रिय हैं। ‘मियां मिट्ठू’ और उसके गिरोह से आजिज आकर हाल में पाकिस्तान मुस्लिम लीग के इकलौते हिन्दू सांसद खील दास को कौमी असेंबली में कहना पड़ा, ”पाकिस्तान के हिन्दू कब तक अत्याचार सहते रहेंगे? हमें कब तक अपनी लाशें उठानी होंगी? हमारी बहू-बेटियां कब तक असुरक्षित रहेंगी ?” खील दास के अनुसार बीते चार माह में 30अल्पसंख्यक लड़कियों का अपहरण कर कन्वर्जन कराया गया, जिनमें अधिकतर हिन्दू हैं।

सियासी रसूख
दरअसल तमाम संगीन आरापों के बावजूद ‘मियां मिट्ठू’ का इसलिए कोई कुछ नहीं बिगाड़ पाता, क्योंकि उसे पाकिस्तान के विभिन्न सियासी दलों का समर्थन प्राप्त है। वह सत्तारूढ़ पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी का वरिष्ठ नेता है और प्रधानमंत्री इमरान खान और सेना प्रमुख कमर वहीद बाजवा से उसके घनिष्ठ संबंध हैं। सेना के शिविरों में वह नियमित हथियार चलाने का प्रशिक्षण लेता है।

सुनियोजित दंगा
पाकिस्तान के कारोबारी जिलों कराची, हैदराबाद, घोटकी और उमरकोट के मुकाबले सिंध प्रांत में सबसे ज्यादा हिन्दू रहते हैं और उनकी स्थिति भी अच्छी है। लेकिन ‘मियां मिट्ठू’ के आतंक से कई हिन्दू परिवार सिंध छोड़ चुके हैं। घोटकी में भरचुंडी शरीफ की चर्चित दरगाह है। अब्दुल हक उर्फ मियां मिट्ठू इसी दरगाह का संचालक है। इसके अनुयायी सिंध ही नहीं, पूरे पाकिस्तान में हैं जो उसके एक इशारे पर मरने-मारने को उतारू हो जाते हैं।

‘मियां मिट्ठू’ पर सुनियोजित तरीके से कुछ दिन पहले सिंध के कई शहरों में दंगे भड़काने का आरोप है। दंगों में उसके गुर्गों ने मंदिरों में तोड़फोड की और हिन्दुओं की संपत्तियों की नुकसान पहुंचाया। दंगारोधी सुरक्षा बल रेंजर्स की मौजूदगी में हिन्दुओं पर जुल्म ढाए गए और सिंध पब्लिक हाई स्कूल के प्रिंसिपल नौतन दास, जिन पर ईश निंदा का आरोप था, के साथ मारपीट की गई। एक पाकिस्तानी बुशरा गौहर ने ट्वीट किया, ”मियां मिट्ठू के रसूख का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसने सुनियोजित साजिश के तहत दंगा शांत कराने गए सांसद अली वजीर, मोहसिन डावर, खार कमर को ही गिरफ्तार करवाकर जेल भिजवा दिया। बाद में हिन्दुओं ने एकजुटता दिखाते हुए जगह-जगह प्रदर्शन किए तब जाकर सिंध प्रांत की सरकार ने ‘मियां मिट्ठू’ को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार होने के बाद भी उसने यही कहा कि इस्लाम की सेवा के लिए वह कुछ भी करने और सहने के लिए तैयार है।

ईश निंदा का झूठा आरोप
सच्चाई यह है कि ‘मियां मिट्ठू’ नौतन दास को सबक सिखाना चाहता था। समरीना हाशमी नामक एक पाकिस्तानी ने ट्विटर पर स्कूल के उस छात्र की उस फेसबुक पोस्ट को साझा किया है, जिसमें उसने स्वीकार किया है कि पाठ याद नहीं करने पर प्रिंसिपल ने फटकार लगाई। लेकिन सहपाठियों के उकसाने पर उसने पैगंबर मुहम्मद की निंदा की झूठी कहानी गढ़कर घरवालों को सुनाई। इसके बाद उसके पिता अब्दुल अजीज राजपूत ने प्रिंसिपल के विरुद्ध ईश निंदा की शिकायत दर्ज करा दी। उधर कथित सूफी के गुर्गों ने स्थानीय लोगों को दंगे के लिए उकसाया। बाद में घटना से जुड़े कई वीडियो वायरल हुए, जिनमें ‘मियां मिट्ठू’ दंगास्थल पर खड़ा दिख रहा है। पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए लड़ने वाली पत्रकार असद चंदियो कहती हैं कि ‘मियां मिट्ठू’ का गिरोह लंबे समय से नौतन दास को घेरना चाहता था। ईश निंदा के बहाने उसे यह मौका मिल गया। ‘घोटकी हिंसा एक टे्रलर’ शीर्षक से अपनी रिपोर्ट में असद चंदियो लिखती हैं कि इस घटना के बहाने ‘मियां मिट्ठू’ नौतन दास को यह संदेश देना चाहता था कि अपने खिलाफ उठने वाली वाली आवाज को वह इसी तरह से दबाएगा।

स्कूल के प्रिंसिपल से बदला
कुछ समय पहले सिंध के मतियारी जिले के हाला कस्बे की एक हिन्दू लड़की मोनिका का अपहरण कर लिया गया था। मोनिका को ‘मियां मिट्ठू’ के घर ले जाया गया, लेकिन वह किसी तरह वहां से भागकर नौतन दास के पास पहुंच गई। नौतन दास की मदद से मोनिका और उसका परिवार हाला छोड़कर दूसरे शहर चला गया। नौतन दास से इसी का बदला लिया गया, क्योंकि इस जल्लाद के चंगुल में फंसने के बाद हिन्दू लड़कियां किसी भी सूरत में बच नहीं पाती। ऐसे ही एक मामले में ‘मियां मिट्ठू’ और उसके गुर्गे अदालत में नंगा नाच कर चुके हैं।

हिन्दू बच्चियों का अपहरण
‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2012 में मिट्ठू गिरोह ने रिंकल कुमारी नामक एक हिन्दू लड़की को उसके घर से उठाया। इस्लाम कबूलवाने के बाद उसका यौन शोषण किया गया। फिर नवेद शाह नामक एक युवक से उसका निकाह करा दिया गया। रिंकल के शिक्षक पिता ने अदालत में आरोप लगाया कि ‘मियां मिट्ठू’ के नेतृत्व में उसका गिरोह अल्पसंख्यकों की बहन-बेटियों को जबरदस्ती उठाकर ले जाता है। फिर उन्हें अपने घर में रखता है और उनका यौन शोषण करता है और बाद में उनका निकाह किसी मुस्लिम से करा देता है।

इस गिरोह ने कई हिन्दू बच्चियों को उठाया है, जिनका आज तक पता नहीं चला। आशंका जताई जा रही है कि इन्हें दूसरे देशों में बेच दिया गया। इसके बाद मियां मिट्ठू और उसके गुर्गों ने नंदलाल को अदालत परिसर में ही इतना पीटा कि वह डरकर लाहौर भाग गए और वहां एक गुरुद्वारे में रहने लगे। इस घटना पर बीबीसी को दिए गए अपने साक्षात्कार में ‘मियां मिट्ठू’ ने पूरी ढिठाई से कहा कि वह किसी का जबरन कन्वर्जन नहीं कराता, बल्कि उन्हें इस्लाम अपनाने के लिए प्रेरित करता है।

एक न्यूज वेबसाइट के अनुसार, बीते पांच वर्षों में ‘मियां मिट्ठू’ 117 हिन्दू लड़कियों का कन्वर्जन कराने के बाद मुस्लिम युवकों से उनका निकाह करा चुका है। एक सिंधी पत्रकार इब्राहिम कुंभार की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल एक 11 वर्षीया हिन्दू लड़की मोनिका कुमारी का अपहरण कर लिया गया। नाबालिग होने के कारण अदालत के हस्तक्षेप के बाद उसे छुड़ा लिया गया। इसी तरह रवीना (13 वर्ष), रीना (15 वर्ष), लता कुमारी और आशा कुमारी भी ‘मियां मिट्ठू’ का शिकार बन चुकी हैं। हाल ही में घोटकी स्थित एक डेंटल कॉलेज की छात्रा चांदनी कॉलेज छात्रावास में मृत पाई गई थी जिसे लेकर आज भी पाकिस्तान के कई शहरों में हिन्दू आंदोलनरत हैं। आरोप है कि चांदनी पर कन्वर्जन के लिए दबाव था। वह नहीं मानी तो उसकी हत्या कर दी गई और फिर उसे आत्महत्या का रूप देने का प्रयास किया गया। हिन्दुओं को शक है कि इसमें भी प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से मियां मिट्ठू का हाथ है। एक माह पहले उसने डॉ. लता का अपहरण कर उसका निकाह एक मुस्लिम युवक से करा दिया था।

मानव तस्करी से कमाई
इस शैतान की गिनती देश के धनकुबेरों में भी होती है। वह लंबी-चौड़ी हवेली में पूरी शानो-शौकत से रहता है। पाकिस्तान के हिन्दू यह सवाल उठाते हैं कि एक दरगाह संचालक के पास इतनी धन-संपत्ति कहां से आई? उनका आरोप है कि यह शख्स उनके समुदाय के लड़के-लड़कियों का सौदा करके अपनी संपत्ति में इजाफा कर रहा है। हालांकि हिन्दुओं द्वारा लगाए गए इन गंभीर आरोपों की जांच अब तक किसी सरकार ने नहीं कराई है। इस ढोंगी फकीर के अनुयायियों की तादाद काफी है, इसलिए मुल्क के अधिकांश राजनीतिक दल उससे समर्थन लेते हैं, ताकि सिंध में उनकी सियासी गतिविधियां चलती रहे। ऊपर से सियासत में भी उसकी अच्छी पैठ है।

सियासत और सेना की शह
‘मियां मिट्ठू’2008 से 2013 तक कौमी असेंबली का सदस्य रह चुका है। जब वह इस्लाम और अल्लाह के नाम पर मुसलमानों को खुश करने के लिए हिन्दुओं को प्रताडि़त करने लगा तो सिंध प्रांत के मतदाताओं ने उसे अर्श से लाकर फर्श पर पटक दिया। नतीजा, बाद के चुनावों में उसे लगातार मुंह की खानी पड़ी।

 

 

इमरान खान के साथ ‘मियां मिट्ठू’
हिन्दुओं को प्रताडि़त करने पर उपजे विवाद के कारण 2013 के चुनाव में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी ने उससे टिकट वापस ले लिया था। तब उसने निर्दलीय चुनाव लड़ा, लेकिन केवल 96 वोट मिलेे। इस करारी हार के बाद 2015 में ‘मियां मिट्ठू’ इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) में शामिल हो गया और जल्द ही उसकी गिनती पार्टी के बड़े नेताओं में होने लगी। पीटीआई में शामिल होने के दिन उसने भारी भीड़ जुटाकर इमरान खान के सामने शक्ति प्रदर्शन किया था। पीटीआई ने घोटकी जिले के एनए-204 से उसे टिकट दिया, लेकिन खराब छवि के कारण गठबंधन ने इसका विरोध किया तो उसे चुनाव लड़ने से रोक दिया गया। इमरान के सत्ता में आने के बाद से उसे प्रधानमंत्री और सेना प्रमुख के आसपास देखा जाने लगा। घोटकी में पन्नू अकिल के पास जहां यह रहता है, उससे 30-40 किलोमीटर दूरी पर ही एक विशाल सैन्य छावनी है। इसी छावनी के फायरिंग रेंज में वह अक्सर सैन्य अभ्यास करता है। हिन्दू आशंका जताते हैं कि यह शख्य सेना की शह पर अल्पसंख्यकों पर अत्याचार कर रहा है। उसके पास वैध और अवैध हथियारों का भारी जखीरा है। उस पर 117 आपराधिक मामले भी दर्ज हैं।

(लेखक पायनियर, हरियाणा संस्करण के संपादक हैं।)

साभार- साप्ताहिक पाञ्चजन्य से

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