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पहले रामलीला नाम हटाओ तभी फिल्म दिखाओ, उच्च न्यायालय का आदेश

मप्र हाईकोर्ट ने गोलियों की रासलीला रामलीला शीर्षक से प्रदर्शित हो रही फिल्म को चुनौती देने वाले मामले को गंभीरता से लिया। एक्टिंग चीफ जस्टिस केके लाहोटी और जस्टिस सुभाष काकड़े की युगलपीठ ने अपने अंतरिम आदेश में कहा है कि आगामी आदेश तक फिल्म रिलीज न करें यदि शुक्रवार 15 नवंबर को निर्धारित तिथि पर फिल्म रिलीज करना है तो रामलीला शब्द हटाना होगा। युगलपीठ ने मामले में फिल्म के निर्माता व निर्देशक संजय लीला भंसाली, इरोज प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ किशोर कुमार व अभिनेता रणवीर सिंह व अभिनेत्री दीपिका पादुकोण को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिये है। युगलपीठ ने मामले की अगली सुनवाई 22 नवंबर को नियत की है।

 

इस मामले अधिवक्ता अमित कुमार साहू व अधिवक्ता आनंद चावला की ओर से दायर किया गया है। जिसमें कहा गया है कि संजय लीला भंसाली ने गोलियों की रासलीली-रामलीला नामक फिल्म बनाई है जो कि भारत के सांस्कारिक मूल्यों व हिंदू भावना को ठेस पहुंचाने वाली है। याचिका में यह भी कहा गया है कि रामलीला देश से लेकर विदेशो तक में लोकप्रिय है, यूनेस्को ने जिसे विश्व की सांस्कृतिक धरोहरो में शामिल किया है। केन्द्र सरकार के सांस्कृतिक विभाग ने रामलीला के दो भागो में वृत्तचित्र तैयार किये है।

मामले की सुनवाई दौरान युगलपीठ को सेंसर बोर्ड की ओर से बताया गया कि उन्होंने आवेदक के अभ्यावेदन 8 नवंबर को कर दिया है। फिल्म से रामलीला का कोई सारोकार नही है, फिल्म रोमियो व जूलियट की कहानी पर आधारित है। सुनवाई पश्चात् न्यायालय ने उक्त निर्देश दिये है।

 

सुनवाई के दौरान आवेदकों ने अपना पक्ष खुद रखा, जबकि अनावेदक राज्य सरकार की ओर से उप शासकीय अधिवक्ता स्वप्निल गांगुली और भारत सरकार की ओर से अधिवक्ता अभय पाण्डेय हाजिर हुए। उभय पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद युगलपीठ ने अपने अंतरिम आदेश में कहा-'भले ही सेन्सर बोर्ड की परीक्षण समिति ने फिल्म देखकर अपनी रिपोर्ट दी, लेकिन फिल्म का नाम रामलीला रखने से यही लगता है कि वह भगवान राम के जीवन से जुड़ी हुई है, जबकि हकीकत में ऐसा नहीं है।'

फिल्म के बारे में अपनी राय देते हुए युगलपीठ ने कहा-'फिल्म के नाम में रामलीला शब्द का इस्तेमाल करने से उन लोगों की भावनाएं बुरी तरह प्रभावित होंगी, जिनकी आस्था भगवान राम से जुड़ी हुई है। इस नाम से दर्शकों के मन में संशय पैदा होगा और वे फिल्म देखने जरूर जाएंगे।

इतना ही नहीं, रामलीला एक धार्मिक व महत्वपूर्ण शब्द है और उसके नाम का उपयोग रोमियो और जूलिएट की कहानी पर आधारित फिल्म के लिए नहीं किया जा सकता। अब सेन्सर बोर्ड ने फिल्म को रिलीज करने की इजाजत दे दी है। ऐसे में यही उचित होगा कि फिल्म का प्रदर्शन नाम बदल कर किया जाए। इस मत के साथ युगलपीठ ने कहा कि यदि अनावेदक फिल्म का नाम बदल रहे तो वे नवंबर को फिल्म रिलीज कर सकते हैं और यदि ऐसा नहीं होता तो अगली सुनवाई तक रामलीला के नाम पर फिल्म का प्रदर्शन न किया जाए।

फिल्म रामलीला पर आज युगलपीठ में विशेष सुनवाई होगी। जिसमें भारत के पूर्व एडिशनल सॉलीसीटर जनरल विवेक तन्खा एवं केन्द्रीय संचार मंत्री कपिल सिब्बल के बेटे अमित सिब्बल पैरवी करेंगे।

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