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संकल्प, सेवा समर्पण और हौसले की कहानी है जव्हार का ये दिव्यांग विद्यालय

कोई ‘शिवाजी’ बनकर तलवार लहरा रहा था, तो कोई नरेंद्र मोदी बनकर नोटबंदी की घोषणा कर रहा था, तो कोई ‘मन समर्पित तन समर्पित ऐ वतन तेरे लिए’ जैसे राष्ट्रभक्ति से भरपूर गीत से अपने आपको राष्ट्र के लिए समर्पित करने के लिए मौजूद था, कोई ‘ऐ मेरे वतन के लोगों जरा याद करो कुर्बानी’ के माध्यम से देश के शहीदों का पुण्य स्मरण कर रहा था-मंच पर नैत्रहीन बालक-बालिकाओं की नृत्य और राष्ट्रभक्ति, संस्कारों, और हौसलों की उड़ान से ओतप्रोत ये कार्यक्रम उन बच्चों द्वारा प्रस्तुत किया जा रहा था जो शारीरिक विकलांगता के शिकार थे, लेकिन उनके आत्मविश्वास और जीवन जीने की ललक में कहीं कोई कमी नहीं थी और न ही अपनी शारीरिक कमजोरी को लेकर किसी से कोई शिकायत।

मुंबई से 200 किलोमीटर दूर सुदूर आदिवासी क्षेत्र में दिव्यांग बच्चों का एक ऐसा विद्यालय है जहाँ गरीब आदिवासियों के बच्चों को निःशुक्ल शिक्षा ही नहीं दी जाती है बल्कि उन्हें आत्म निर्भर बनाने के लिए कई प्रकल्प भी चलाए जा रहा हैं।

श्री गुरूदेव बहुउद्देश्यी सामिजक संस्था द्वारा संचालित इस इस विद्यालय के वार्षिकोत्सव में मुंबई से गए कारोबारियों और उद्योगपतियों ने जब इन बच्चों की प्रतिभा, आत्मिश्वास और निटति द्वारा किए गए क्रूर मजाक के बावजूद जीवन को मस्ती से जीने का जो हौसला देखा तो सभी इन बच्चों के जज़्बे के आगे नतमस्तक हो गए।

पालघर जिले के आदिवासी क्षेत्र जव्हार से लगे रायथला गाँव में दिव्यांग बच्चों के लिए एक ऐसा सर्वसुविधायुक्त विद्यालय मौजूद है इसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता है। इस विद्यालय में 60 मानसिक रूप से अविकसित और 60 नैत्रहीन बच्चों का शिक्षण-प्रशिक्षण किया जा रहा है।

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विद्यालय की नैत्रहीन प्राचार्य सुश्री मनीषाताई पाटिल ने अपने स्वरचित गीत से अतिथियों का स्वागत कर सबको भावविभोर कर दिया।

मुंबई से सटा जव्हार क्षेत्र मीडिया में कुपोषण से ग्रस्त बच्चों की मौत को लेकर सुर्खियों में रहता है। इस क्षेत्र में एक सेवा निवृत्त शिक्षिका प्रमिला ताई कोंकण ने शिक्षिका पद से सेवानिवृत्त होने के बाद पूरी जमापूँजी इस क्षेत्र के दिव्यांग बच्चों को पढ़ाने और उन्हें प्रशिक्षित करने के लिए समर्पित कर दी। इसके बाद कैसे एक भव्य विद्यालय अस्तित्व में आया इसकी एक अलग कहानी है।

इस आवासीय विद्यालय को इस विशाल आकार तक पहुँचाने में अहम भूमिका निभाने वाले श्री बिमल केड़िया ने बताया कि मुंबई से कुछ लोग प्रमिला ताई द्वारा निजी स्तर पर संचालित दिव्यांग बच्चों के विद्यालय को देखने आए थे तो स्थिति ऐसी थी कि वहाँ दो मिनट खडडा रहना भी मुश्किल था, लेकिन प्रमिला ताई अपनी समर्पित शिक्षिका सुनीता बेलदार सहित अन्य शिक्षिकाओं के माध्यम से जिस भाव से इन बच्चों की सेवा में लगी थी वह दृश्य आज भी आँखों में कौंध जाता है।

इसके बाद अचानक राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े सेवा इंटरनेशनल को लंदन में कार्यरत सेवा यूके से एक प्रस्ताव मिला कि वे दिव्यांगों के लिए संचालित किसी संस्थान को आर्थिक सहायता देना चाहते हैं। बिमल जी केड़िया ने इसके लिए 6 करोड़का एक प्रस्ताव सेला इंटरनेशनल यूके को भिजवा दिया। उन्होंन शर्त रखी कि अगर एक करोड़ रु. संस्था द्वरा जुटाया जाता है तो यूके सेवा इंटरनेशनल इसके लिए 5 करोड़ की मदद कर देगा। बिमलजी ने मुंबई के 16 उद्योगपतियों और व्यापारियों के सहयोग से एक करोड़ की राशि जुटाई तो लंदन से 5 करोड़ की सहायता मिल गई। जब ये विद्यालय बनकर तैयार हुआ तो लंदन से सांसद बॉब ब्लैकमैन खुद यहाँ आए और यहाँ की व्यवस्था देखकर प्रभावित हुए। इस विद्यालय के 6 बच्चों ने 10 वीं की परीक्षा भी पास की है। यहाँ बच्चों को ब्रेल लिपि में एबकस की शिक्षा भी जाती है।

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बिमलजी ने बताया कि इस संस्था को इस भव्य स्वरूप में पहुँचाने में लायंस क्लब जुहू और इसके सक्रिय सदस्य संजय खन्ना की महत्वपूर्ण भूमिका रही और इस कार्यक्रम में श्री खन्ना का पूरा परिवार मुंबई से आया था।

श्री संजय खन्ना के बेटे ने विद्यालय के दिवयांग बच्चों की गतिविधियों पर एक डॉक्यूमेंट्री भी बनाई जिसका प्रदर्शन मुंबई से गए मेहमानों के लिए किया गया।

इस कार्यक्रम में जब दिव्यांग बच्चों के माता-पिता ने अपने संस्मरण सुनाते हुए कहा कि हमारे जो बच्चे सरकारी स्कूलों में जाना पसंद नहीं करते थे आज वो जब छुट्टियों में घर आते हैं तो वापस स्कूल जाने की जिद करते हैं। एक दिव्यांग बच्चे के पिता जगदीश पाटिल ने कहा कि मेरा बच्चा सातवीं कक्षा तक सरकारी स्कूल में पढ़ा मगर वो अपना नाम तक लिखना नहीं सीख पाया, यहाँ आकर उसका एक नया जन्म हो गया। श्री हिमांशु राणे ने कहा कि एक अकेले दिव्यांग बच्चे को पालना कितना मुश्किल होता है ये दर्द उसेक माता-पिता ही समझ सकते हैं, लेकिन इस विद्यालय में हमारे दिव्यांग बच्चों को जिस ममता और अपनेपन से सिखाया-पढ़ाया जाता है उसका एहसास या तो बच्चे कर पाते हैं या हम। श्री दीपक चौधरी ने कहा कि मेरे बच्चे में यहाँ आने के बाद जो आत्मविश्वास और संस्कार आए हैं वो देखकर मुझे खुद हैरानी होती है और आनंद भी मिलता है।

समारोह में आए बिड़ला उद्योग समूह के वरिष्ठ अधिकारी श्री राकेश सिंह ने कहा कि ये संस्थान मानवीयता, संवेदनशीलता और समर्पण की एक मिसाल है। इस दुनिया में जहाँ लोग अपनो को ही भूल जाते हैं वहाँ गरीब परिवारों के दिव्यांग बच्चों की इतने अहोभाव से सेवा करना अपने आप में एक दुर्लभ अनुभव है।

श्री बिमल केड़िया ने बताया कि मुंबई के विले पार्ले स्थित हिदू देवालय मंडल द्वारा संचालित तीन मंदिरों के ट्रस्ट द्वारा विद्यालय के लिए अनाज की व्यवस्था की गई है।

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मुंबई के मालाड में रहने वाले 80 वर्षीय बुज़ुर्ग ठाकुर गुरूजी वेलकर अपने परिचित लोगों से संपर्क
कर उनसे 2-2 हजार रु. की सहायाता लेते हैं और अभी तक वे इसके लिए 8 लाख रु. दे चुके हैं।

एक बार बजाज ऑटोमोबाईल कंपनी के कुछ अधिकारी जव्हार क्षेत्र में पिक्निक पर आए और उन्होंने जब ये सर्वसुविधायुक्त विद्यालय देखा तो उन्होंने कंपनी की ओर से 15 लाख रू. की सहायता उपलब्ध करा दी।

मुंबई के रवि राठी और पारस पोरवाल ट्रस्ट ने 15 बच्चों के भरण पोषण और पढ़ाई की जिम्मेदारी ली है।

श्री बिमल केड़िया ने बताया कि आने वाले समय में इसे दिल्यांग बच्चों के लिए एक स्किल सेंटर के रूप में भी विकसित किया जाएगा।

इसकी संस्थापक सुश्री प्रमिला ताई कोंकण ने कहा कि हम चाहते हैं कि इस विद्यालय में पढ़ने वाले छात्रों को यहाँ से जाने के बाद भी हर तरह का सहयोग और मार्गदर्शन मिलता रहे ताकि जीवन में उन्हें किसी तरह की कठिनाईयों का सामना न करना पड़े।

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