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संघ प्रमुख ने बताया कि उनको सोशल मीडिया पर रहने की ज़रुरत क्यों नहीं

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का कहना है कि वे कभी भी फेसबुक या ट्विटर अकाउंट नहीं बनाएंगे. इसकी वजह बताते हुए उन्होंने कहा कि, सोशल मीडिया पर अकाउंट बनाना आपको अहंकारी और आत्म-केंद्रित बना सकता है. हालांकि, उन्होंने ये भी कहा कि संगठनों द्वारा सोशल मीडिया के इस्तेमाल करने में कोई बुराई नहीं है.

आरएसएस प्रमुख ने कहा कि, ‘निजी स्तर पर खुद के प्रमोशन करने का एक सिमित महत्व है, हालांकि, संगठन के स्तर पर इसका काफी फायदा है. यही वजह है कि ट्विटर और फेसबुक पर आरएसएस का अकाउंट है और मेरा नहीं. मेरा कभी अकाउंट बनेगा भी नहीं. मोहन भागवत ने ये बातें आरएसएस के मुखपत्र ऑर्गनाइजर को दिए एक साक्षात्कार के दौरान कही.’

गौरतलब है कि 2014 में बीजेपी को मिली जीत में सबसे बड़ी भूमिका सोशल मीडिया की ही मानी गई थी. इसके बाद से ही अन्य पार्टियों ने भी सोशल मीडिया को अपने प्रचार-प्रसार के लिए एक बड़ा जरिया बनाना शुरू कर दिया. हालांकि, इस दौरान बीजेपी पर अपने सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए भ्रामक जानकारियां देने का भी आरोप लगा.

मोहन भागवत ने माना कि सोशल मीडिया पर राजनीतिक पार्टियों को अकाउंट बनाने से फायदा मिलता है लेकिन उन्होंने ये भी कहा कि इन मंच का इस्तेमाल काफी सावधानी से करना चाहिए. भागवत ने कहा, ‘ये उपयोगी उपकरण हैं और उनका उपयोगिता के अनुसार इस्तेमाल किया जाना चाहिए. राजनीति से जुड़े लोगों को इससे फायदा भी मिलता है लेकिन इसका इस्तेमाल काफी सावधानी से करना चाहिए. हमें टेक्नॉलॉजी का गुलाम नहीं बनना चाहिए. हमें इसका सीमित इस्तेमाल करना चाहिए.’

सोशल मीडिया पर खुद का अकाउंट बनाने पर बात करते हुए उन्होंने इसकी किसी भी संभावना से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि, ‘सोशल मीडिया आपको अहंकारी और आत्म-केंद्रित बना सकता है. सोशल मीडिया का मतलब है सिर्फ मेरा. मुझे हर चीज पर अपने विचार रखने होंगे. इसके अलावा सोशल मीडिया पर पोस्ट अक्सर, विशेषकर उनके स्वर और संदर्भ के मामले में गलत तरीके से पेश की जाती है. जो सोशल मीडिया से दूर रहने की एक और वजह है.’

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