ताजा सामाचार

आप यहाँ है :

सर्वोच्च न्यायालय ने कहा, केंद्र सरकार वकीलों की फीस पर नियंत्रण लगाए

सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों की बढ़ती फीस पर चिंता व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार से कहा है कि वह कानून लाकर वकीलों की बढ़ती फीस नियंत्रित करे. टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक शीर्ष अदालत ने कहा कि वकीलों के ज्यादा से ज्यादा फीस मांगने के चलते गरीब लोगों को न्याय मिलना मुश्किल हो गया है. न्यायमूर्ति आदर्श के गोयल और न्यायमूर्ति यूयू ललित की बेंच ने सर्वोच्च न्यायालय के कई फैसलों और लॉ कमीशन की रिपोर्टों का जिक्र किया और कहा कि समय आ गया है कि सरकार हस्तक्षेप करे और वकालत के पेशे में नैतिकता बनाए रखने के लिए कानून बनाए.

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से यह सुनिश्चित करने कहा कि पैसे की कमी की वजह से गरीब लोग योग्य वकीलों की कानूनी सहायता से वंचित न हों. बेंच ने वकीलों द्वारा अपने मुवक्किलों से अदालती फैसले से जुड़े आर्थिक लाभ में से हिससा मांगने के चलन की भी निंदा की. कोर्ट ने कहा कि ऐसा करने वाले वकीलों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए. बेंच ने ध्यान दिलाते हुए कहा कि लॉ कमीशन ने वकीलों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए एक नियामक व्यवस्था बनाने की सिफारिश की थी. वकीलों की फीस को न्याय में बाधा बताते हुए कमीशन ने कहा था कि यह संसद का कर्तव्य है कि वह वकालत के पेशे के तहत दी जाने वाली सेवाओं की फीस निर्धारित करे. 1988 में अपनी 131वीं रिपोर्ट पेश करते हुए कमीशन ने यह बात कही थी.

उधर, अपनी 266वीं रिपोर्ट में कमीशन ने कहा था कि वकीलों के अनैतिक आचरण से लंबित पड़े मामलों की संख्या बढ़ती है. कमीशन के मुताबिक वकीलों की गैर-जरूरी हड़तालों से काम के दिनों का काफी नुकसान होता है. इसकी वजह से अदालतों की कार्रवाई रोकनी पड़ती है और मामलों को जल्दी निपटाने में बाधा आती है. उसने बार काउंसिल ऑफ इंडिया में बदलाव करने का भी सुझाव दिया था. लेकिन बीते सालों में केंद्र सरकार ऐसा कोई कानून नहीं ला पाई जिससे वकालत के पेशे को नियंत्रित किया जा सके. सुप्रीम कोर्ट ने उम्मीद जताई है कि सरकार में मौजूद अधिकारी इस मुद्दे पर ध्यान देंगे और जरूरी बदलाव लाएंगे.

Print Friendly, PDF & Email


Leave a Reply
 

Your email address will not be published. Required fields are marked (*)

You may use these HTML tags and attributes: <a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <s> <strike> <strong>

सम्बंधित लेख
 

ईमेल सबस्क्रिप्शन

PHOTOS

VIDEOS

Back to Top