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अच्छे कर्मों की प्रतियोगिता होना चाहिए : सुधा सागर जी

कोटा। अपनी जिंदगी का निणर्य स्वयं करें, जो कमजोर हैं वह निर्णय नहीं ले पाते, कलयुग में पुरूषों से ज्यादा व्रत, उपवास, पूजन, मंदिर जाना, अभिषेक महिलाएं करती हैं, पुरूषों को भी नियम लेकर पुण्यकर्म करने चाहिए। बेटा मंदिर जाता है, पिता नहीं जाता, पत्नी मंदिर जाती है पति नहीं जाता ऐसा नहीं होना चाहिए। बडों को छोटों के आगे झुकना पडेÞ ये गलत है। हमे अच्छे कर्मों में कम्पीटिशन करना चाहिए। अपनों से छोटों से धर्म में आगे होना चाहिए। चद्रोदय तीर्थ क्षेत्र चांदखेडी जैन मंदिर खानपुर में चल रहे मंगल प्रवचन में शनिवार को मुनि पुंगव सुधासागर महाराज ने ये बात कही। मुनिराज ने कहा कि बेटा पिता से कहे की आपको मंदिर जाना चाहिए, में आलू प्याज छोड रहा हूं, रात्रि भोजन छोड रहा हूं, दर्शन का नियम ले रहा हूं ऐसा नहीं होना चाहिए, पिता को उससे भी अधिक पुण्यकर्म करने चाहिए। उन्होंने कहा कि पत्नी दीक्षा ले और पति नहीं लेवे ये नहीं होना चाहिए। आर्यिका बनने के बाद पति उसके सामने कैसे झुकेगा, उन्होंने पति पत्नी के उदाहरण से वैराग्य के मूल को समझाया। उन्होंने कहा धर्म के क्षेत्र में पुरूषों को महिलाओं से आगे होना चाहिए। अपने लिए ना सही अपने बच्चों के
लिए बुराईयों को छोड़ना चाहिए, तभी बेटा, धार्मिक, सामाजिक, आचार विचार, शारीरिक व बुद्धिमान होगा। बेटे के जन्म से पहले पुण्यकर्मों का नियम लेना चाहिए।

सुधा सागर जी महाराज ने कहा कि आपके पास धन है और लोग ये कहें की पैसे के कारण बिगड गया, इसमें दोष आ गए तो धन का अपमान होगा, और यदि धन है और पुण्यकर्मों में लगाया जाए, मंदिर, पाठशाला, गौशाला, चिकित्सालय बनाए जाएं तो लोग कहेंगे धन है इसलिए बनाया है, यानि धन का मान बढ़ जाएगा। धन से अपने पुण्यकर्मों को बढ़ाया जाना चाहिए। जिनके पास धन नहीं है उनकी भावना होनी चाहिए। उन्होंने कहा नियम करों की मेरे पास आए धन को बदनाम नहीं होने दूंगा। उन्होंने कहा कि बडे होने का मान भी रखना चाहिए, कोई छोटा ये नहीं कह दे की आपमें ये दोष हैं इसे दूर करें। मुनियों को भी नियम लेना चाहिए की श्रावक की दृष्टि में छोटे नहीं हो जाएं। उन्होंने नेमीनाथ भगवान की कथा का भी वाचन किया। चांदखेड़ी मंदिर के अध्यक्ष हुकम जैन काका ने बताया कि चांदखेड़ी तीर्थ क्षेत्र में हो रहे मंगल प्रवचन के दौरान लोग अपनी बुराईयों का त्याग कर धर्म मार्ग पर चलने का नियम ले रहे हैं। मुनिश्री के संघ में मुनि महासागर, मुनि निष्कंपसागर, क्षुल्लक गंभीरसागर और धैर्यसागर महाराज चांदखेड़ी में विराजमान है, जो लोगों को जीवन के को सार्थक करने का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं।

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