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इस सोलर चूल्हे से दो मिनट में तैयार होती है बाटी

‘दो मिनट में मैगी तैयार’ होने का प्रचार तो आपने खूब देखा होगा, खाया भी होगा, लेकिन एक वैज्ञानिक ने ऐसी तकनीकी तैयार कर दी है जिसके बाद आपको बाटी भी दो मिनट में तैयार मिलेगी। वह भी धूएं और कालिख से रहित, यानी पूरी तरह स्वास्थ्यवर्धक।
कैसे तैयार होती है बाटी

उत्तर भारत के उत्तर प्रदेश और बिहार में हर मौके पर बड़े ही चाव के साथ खाई जाने वाली बाटी, जिसे कुछ क्षेत्रों में लिट्टी भी कहा जाता है, चने के सत्तू का मसाला आटे की लोई के अंदर भरकर कोयले या उपले की आग में मध्यम आंच पर देर तक पकाकर बनाया जाता है। उसके बाद इसे देशी घी में डुबोकर बैंगन के भरते के साथ खाया जाता है। बाटी बनाने के कई अन्य तरीके भी क्षेत्रीय विविधता के साथ देखे जा सकते हैं।

पारंपरिक विधि से बाटी बनाने में काफी समय लगता है। वहीं अगर शादी-विवाह जैसे अवसर पर, जहां काफी लोगों के लिए भोजन बनाया जाता है, यह काफी समय और श्रम लेने वाला कार्य हो जाता है।

बाटी सिर्फ उत्तर भारत में ही नहीं, देश के सभी हिस्सों तक पहुंच गया है। रोजगार के सिलसिले में उत्तर भारतीयों के देश के अन्य राज्यों में पलायन करने से उनके साथ-साथ बाटी भी देश के सभी हिस्सों तक पहुंच गया है। यही कारण है कि लोगों की मांग होने के कारण अब सड़कों पर ठेलों से लेकर होटलों तक में बाटी बिकने लगी है।

इस सोलर मशीन से एक दिन में बनेगी एक हजार बाटी

दिल्ली आईआईटी और कानपुर आईआईटी से शिक्षा प्राप्त कर चुके साइंटिस्ट डॉ. एके सिंह ने एक ऐसी सोलर मशीन तैयार कर दी है जो बेहद कम लागत में भारी संख्या में बाटी तैयार कर देती है। डॉ. सिंह का दावा है कि इस मशीन से सिर्फ दो मिनट के अंदर एक बाटी को पकाया जा सकता है। सोलर पैनल से बैटरी को पूरा चार्ज करने के बाद एक मशीन से प्रतिदिन एक हजार बाटी तक बनाई जा सकती है। सिंह के मुताबिक लगभग चार से पांच घंटे में सोलर मशीन पूरी तरह चार्ज हो जाती है। चार्जिंग के बाद मशीन को रात के समय भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

होती है कोयले की बचत

सोलर मशीन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसकी खरीद के बाद ईंधन के रुप में कोई खर्च नहीं होता। मशीन को डिजाइन करने वाले वैज्ञानिक डॉ. एके सिंह के मुताबिक इस तकनीकी से बाटी बनाने पर प्रतिदिन दस किलो तक कोयले की बचत होती है, यानी सिर्फ ईंधन के रुप में पांच सौ रुपये तक की बचत होती है। इसके अलावा इस तकनीकी से पर्यावरण को भी कोई नुकसान नहीं होता है।

कितनी है लागत

डॉ. एके सिंह ने बताया कि उनकी यह मशीन 1.25 लाख रुपये से लेकर 2.50 लाख रुपये तक की कीमत में आती है। अलग-अलग जरुरत के हिसाब से इसे डिजाइन किया गया है। सिंह के मुताबिक जो युवा रोजगार के रुप में इसे अपनाना चाहते हैं, वे महज छोटी सी लागत के बाद एक अच्छी आय कर सकते हैं।

पिज्जा भी पका सकती है मशीन

डॉ. एके सिंह के मुताबिक यह सोलर मशीन बहुउद्देश्यीय सोच के साथ बनाई गई है। इस मशीन से बाटी, पिज्जा या उसके जैसी कोई भी अन्य चीज पकाई जा सकती है। उन्होंने इस मशीन को दक्षिण अफ्रीका के गरीब देशों में प्रचारित करने का भी प्रयास किया है।

साभार- अमर उजाला से



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