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इस लायब्रेरी में किताब नहीं आदमी को पढ़ते हैं लोग

शेरो-शायरी या कविताओं में इंसानों को किताब की मानिंद देखने-समझने की बात खूब प्रचलित है. लेकिन अब यह विचार साहित्य से निकलकर जमीन पर भी आ चुका है. हैदराबाद में कुछ लोगों ऐसी ही ‘इंसानी किताबों’ की एक ‘ह्यूमन लाइब्रेरी’ शुरू की है. इसके आयोजनों में शिरकत करके आप अपनी मनपसंद ‘इंसानी किताब’ ले सकते हैं, यानी कि उसके साथ कुछ वक्त बिता सकते हैं और उन मुद्दों पर बात कर सकते हैं जिनमें उसे महारत हासिल है. ह्यूमन लाइब्रेरी का विचार भले अतिआधुनिक लगता हो लेकिन यह हमारी सभ्यता की – ज्ञान बांटने पर बढ़ता है, की परंपरा से ही निकला लगता है. यहां हर वो इंसान किताब बन सकता है जिसके पास सुनाने को दिलचस्प अनुभव हों

हैदराबाद में इस ह्यूमन लाइब्रेरी के संचालन के पीछे मुख्य भूमिका हर्षद फड़ की है. अन्नपूर्णा यूनिवर्सिटी में मास कम्यूनिकेशन के छात्र हर्षद बताते हैं कि इस लाइब्रेरी को शुरू हुए एक महीना ही हुआ है. वे जानकारी देते हैं कि हैदराबाद से पहले 2016 में आईआईएम इंदौर के कैंपस भी ह्यूमन लाइब्रेरी से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए गए थे और तब पहली बार देश में इस तरह का कोई आयोजन हुआ था.

दुनिया में पहली ह्यूमन लाइब्रेरी साल 2000 में डेनमार्क में शुरू हुई थी. तब वहां के एक युवा रोनी एबेरगेल ने अपने भाई और दोस्तों के साथ मिलकर इस विचार को मूर्त रूप दिया था. इसका मकसद था – ‘इंसानी किताबों’ के अनुभव का इस्तेमाल एक बेहतर दुनिया बनाने में करना. धीरे-धीरे यह विचार इतना लोकप्रिय हुआ कि दुनिया में कई जगहों पर ह्यूमन लाइब्रेरियां बनने लगीं. ऑस्ट्रेलिया ऐसा पहला देश है जहां एक स्थायी ह्यूमन लाइब्रेरी है.

हैदराबाद की ह्यूमन लाइब्रेरी में क्या, कैसे होता है?

हर्षद अपने कॉलेज के दोस्तों के साथ ह्यूमन लाइब्रेरी से जुड़े कार्यक्रम आयोजित करते हैं. इनमें लोग अपनी पसंद की ‘इंसानी किताब’ चुन सकते हैं और उसके साथ 30 मिनट तक बातचीत कर सकते हैं. यहां हर वो इंसान किताब बन सकता है जिसके पास कुछ दिलचस्प अनुभव या किस्से-कहानियां सुनाने को हों और इनके विषय इस ह्यूमन लाइब्रेरी द्वारा तय दायरों में हों.

बीते मार्च में जब इस ह्यूमन लाइब्रेरी की शुरुआत हुई तो सिर्फ 10 ‘इंसानी किताबें’ यहां मौजूद थीं. हर्षद को उम्मीद है कि समय के साथ इनमें बढोत्तरी होगी. इस लाइब्रेरी में घरेलू हिंसा से बच निकलने के अनुभव बताने वाली एक ‘इंसानी किताब’ है, तो एक ऐसी ही दूसरी किताब बताती है कि आत्ममुग्धता का वह स्तर कैसा होता है जहां लोग खुद से नफरत करने लगते हैं. हर्षद की ये दो पसंदीदा ‘इंसानी किताबें’ हैं. वे इसकी वजह बताते हैं, ‘ये दोनों किताबें आप में साहस का संचार करती हैं और आपके भीतर मौजूद अजनबीयत को दूर करती हैं.’

अपने अनुभव साझा करने वालों के लिए ये भावुक कर देने वाल पल हो सकते हैं. हर्षद के मुताबिक, ‘हर एक रीडिंग सेशन के बाद हम इंसानी किताब से पूछते हैं कि उन्हें कैसा लग रहा है और क्या वे अपनी और कहानी साझा करने के लिए भावनात्मक तौर पर तैयार हैं?’ 30 मिनट के रीडिंग सेशन में आप सिर्फ अनुभव सुनते ही नहीं, बल्कि इस पर सवाल जवाब भी कर सकते हैं.

इस ह्यूमन लाइब्रेरी की एक ‘इंसानी किताब’ एंडी सिल्विया समलैंगिक अधिकार कार्यकर्ता हैं. वे यहां के अनुभव साझा करती हैं, ‘किसी अनजान व्यक्ति से निजी जिंदगी की कहानियां साझा करना कुछ हद तक असहज करने वाला अनुभव रहा. लेकिन इस दौरान बहुत कुछ सीखने को भी मिला क्योंकि अपनी कहानी को आप हर बार एक अलग तरीके से सुनाते हैं. यह तब और महत्वपूर्ण हो जाता है जब आपको पता चलता है कि कोई रीडर आपकी कहानी दोबारा सुनना चाहता है.’

ह्यूमन लाइब्रेरी की सबसे खास बात है कि यहां पाठक ‘इंसानी किताब’ के मार्फत अपने पूर्वाग्रहों से सीधे दो-चार होते हैं और उस मुद्दे पर अपनी समझ को साफ करते हैं जिसके बारे में उन्हें कुछ भी गहराई से पता नहीं था.

साभार- https://satyagrah.scroll.in/ से

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