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गमक के मंच पर आदिवासी कला और संस्कृति की धूम

भोपाल। मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग द्वारा मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय में आयोजित बहुविध कलानुशासनों की गतिविधियों एकाग्र ‘गमक’ श्रृंखला अंतर्गत आज आदिवासी लोककला एवं बोली विकास अकादमी द्वारा श्री जीवन दास और उनके साथियों, राजस्थान द्वारा तेरहताली नृत्य एवं डिंडोरी के श्री भद्दू सिंह उफडिया और उनके साथियों द्वारा बैगा जनजातीय नृत्य की प्रस्तुति दी गई।

प्रस्तुति की शुरुआत श्री जीवन दास और उनके साथियों ने गणेश वंदना से की, उसके पश्चात बाबा रामदेव के भजन- ‘हेलो म्हारो सामलो रणुजे एवं माता जी के भजन- लटिका करती आऊँ मेरी माँ’ के माध्यम से राजस्थान का पारम्‍परिक नृत्य तेरहताली प्रस्तुत किया और राजस्थान के प्रसिद्द नृत्य घूमर से अपनी प्रस्तुति को विराम दिया|

प्रस्तुति में – नृत्य में सुश्री सुमित्रा देवी, सुश्री अनीता देवी, सुश्री पायल, सुश्री रवीना एवं सुश्री ललिता ने नृत्य में और गायन में श्री पूरण दास, मंजीरे पर- श्री छगन दास एवं श्री राजुल दास एवं तम्बूरे पर- श्री जमुना राम ने संगत दी |

बैगा मध्यप्रदेश के डिण्डौरी जिले के चाड़ा के जंगलों में निवास करने वाली आदिम जनजाति है। बैगा के करमा, परघौनी, घोड़ी पैठाई और फाग प्रमुख नृत्य हैं। करमा नृत्य में बैगा अपने ‘कर्म’ को नृत्य-गीत के माध्यम से प्रस्तुत करते हैं। इसी कारण इस नृत्य-गीत को करमा कहा जाता है। विजयादशमी से वर्षा के प्रारंभ होने तक चलने वाला यह नृत्य बैगा युवक-युवतियाँ टोली बनाकर एक दूसरे के गाँव जाकर किया जाता है। घोड़ी पैठाई नृत्य दशहरे के दिन से शुरू होकर दिसंबर के अंत तक किया जाने वाला नृत्य है। सभी प्रकार के करमा मे नृत्य करने की शैली एक सी ही होती है सिर्फ गीत गाने मे अंतर होता है, उसके लय के उतार चढ़ाव के साथ ही ताल मिलाकर नृत्य किया जाता है।

प्रस्तुति में – श्री वैसाखू सिंह, श्री जेठू सिंह, श्री इतवारी सिंह, श्री चमरू सिंह, श्री तिहर सिंह, श्री बुधराम, श्री धर्मेन्द्र, श्री अर्जुन सिंह, श्री बिसन सिंह, सुश्री सुनीता बाई, सुश्री तिहरो बाई, सुश्री सुकरती बाई, सुश्री जानकी बाई एवं सुश्री श्यामकली बाई ने नृत्य में संगत दी।

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