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जल संचयन संकल्प सत्याग्रह: साझा संकट: साझी अपील

बदलती जलवायु तथा वैश्विक व स्थानीय कारणों से भारत में सूखे की मार लगातार बढ़ती जा रही है। खेती, सेहत, उद्योग, सकल घरेलु उत्पाद और प्रति व्यक्ति आय से लेकर सामाजिक सौहार्द और गरीब-वंचित समाज की भूख-प्यास तक इसकी चपेट में आये हैं। भारत के 11 राज्यों में इस वर्ष के सूखे को लेकर त्राहि-त्राहि अभी थमी नहीं है। हालात ये हैं कि देश के जिस राज्य में एक समय तक सबसे ज्यादा बांध बने, सबसे ज्यादा नहरें बनी; सिंचाई का सबसे ज्यादा बजट गया, हमारे उसी महाराष्ट्र में आज सूखे का सबसे व्यापक और भयानक दुष्प्रभाव है। नौबत यह है कि लोग प्यास और लू से मरने को विवश हैं। पानी ढोने के काम में टेªनों को लगाना पङा है। पानी पाने को लेकर मारामारी इतनी है कि पानी वितरण के समय लातूर में ’पानी का कफ़र्यू’ घोषित करना पङ रहा है। बंुदेलखण्ड, गदक, मराठवाङा आदि में हालात लगातार बिगङ रहे हैं। आगे ऐसा न हो, इसकी तैयारी ज़रूरी है।

मौसम विभाग ने आगामी चौमासे में 106 फीसदी बारिश का अनुमान व्यक्त किया है। जरूरी है कि जब बारिश आये, तो उसे पकङकर धरती के पेट में बिठाने के लिए हमारे जल संचयन ढांचे पूरी तरह तैयार हों। उपयोग का अनुशासन हो। संकट साझा है; अतः समाधान भी साझा ही करना होगा।

दलित-वंचित समुदाय की जिंदगी की बेहतरी के लिए पानी के काम को जरूरी मानते हुए कभी स्वयं श्री बाबा साहब ने कोंकण के महाङ से दलित जलाधिकार हेतु संघर्ष शुरु किया था। इस दृष्टि से आज 14 अप्रैल, 2016 को बाबा साहब अंबेडकर जयंती पर पानी, प्रकृति, अन्य जीवों व इंसानी जरूरतों के प्रति संवेदनशील 130 साथी संगठनों की ओर से हम भारतवर्ष के समस्त नागरिकों यानी ग्रामीणों, किसानों, शहरी बाशिंदों, उद्योगपतियों, व्यापारियों,, इंजीनियरों, सामाजिक संगठनों, प्रशासनिक इकाइयों, राज्य व केन्द्र की सरकारों से करबद्ध अपील करते हैं कि

1. हम सभी कुछ समय के लिए शेष सभी संघषों, मतभेदों और भेदभावों को भूल जायें। पानी का संकट हम में से हरेक की निजी जिंदगी को प्रभावित करने वाला है। अपने संकट के लिए यह किसी और की तरफ ताकने का वक्त नहीं है। वक्त है कि हम सभी 15 जून, 2016 से पूर्व अपने आसपास के सभी मौजूदा जलसंचयन ढांचों की गाद मुक्ति, कचरा मुक्ति तथा पालांे की मरम्मत करने के लिए श्रम आधारित काम में पूरी एकजुटता और संकल्प के साथ लग जायें। हम 130 साथी संगठनों ने अपने-अपने कार्यक्षेत्र में आज से ही शुरु कर दिया है। आपसे अपील हेै कि आप भी शुरु करें; संकल्पित हों।

2. अपील है कि ग्रामीण और किसान अपने निजी जलसंरचनाओं को दुरुस्त करने के काम में लगें। पंचायतें सामुदायिक ढंाचों की जिम्मेदारी उठायें। उद्योग, शैक्षणिक संस्थान, शहरी नागरिक…सभी अपने-अपने परिसर में वर्षा जल संजोने करने की तैयारी में लग जायें; प्रशासन, सभी सरकारी इमारतों में वर्षा जल संचयन तथा प्रशासनिक अधिकार के जल संचयन ढांचों दुरुस्ती की समयबद्ध तैयारी में जी-जान से जुट जायें। युवा, खासकर निगरानी व एक ऊर्जावान श्रम सहयोगी की भूमिका में आगे आयें।

3. चूंकि समाधान के लिए हम सभी को आंदोलित होने की जरूरत है। अतः सभी राज्य सरकारों के मुख्यमंत्रियों और भारत सरकार की प्रधानमंत्री जी से मेरी विशेष अपील है कि वे इसे अपने-अपने स्तर पर समयबद्ध ’जल संचयन संकल्प आंदोलन’ के रूप में घोषित करें। सभी मंत्रालयों को इस आंदोलन से जोङें; उनकी भूमिका के लिए उन्हे सक्रिय करें। अपील है कि जलसंचयन ढांचों की मरम्मत के लिए जहां जिस संसाधन, बाधा मुक्ति की जरूरत हो, वहां वैसा किया जाना सुनिश्चित करें।

4. भारत के समस्त नागरिकों से हमारी यह भी अपील है कि यदि 30 अप्रैल, 2016 तक पंचायतें, स्थानीय निकाय, प्रशासन और शासन उनके अधिकार के जलसंचयन ढांचों को दुरुस्त करने का काम शुरु नहीं करती हैं, तो 31 अप्रैल, 2016 को आप अपने-अपने इलाके के ऐसे स्थानीय ढांचों की सूची बनायें; सार्वजनिक करें; हमें भी भेजें। खासकर युवा इसका जिम्मा लें।

5. एक मई, 2016 श्रम दिवस है; श्रम की शक्ति का आभास कराने वाली एक महत्वपूर्ण तिथि। हमारी अपील है इस तिथि विशेष पर स्थानीय नागरिक, समुदाय व नागरिक संगठन एकजुट होकर सामुदायिक व शासकीय अधिकार के ऐसे जल संचयन ढांचों को अपने अधिकार में लें और उन पर श्रम आधारित जल संचयन संकल्प सत्याग्रह करें। स्थानीय समुदाय के साथ मिलकर महाराष्ट्र के जिला-लातूर के नागरिक संगठनों ने तय किया है कि यदि आवश्यता हुई. तो वे एक मई, 2016 को लातूर में श्रम आधारित जल संचयन संकल्प सत्याग्रह करेंगे।

यदि फिर भी संबंधित स्थानीय, प्रशासन व शासन उन संचयन ढांचों पर न स्वयं काम करs और न स्थानीय समुदाय को करने दे, तो सत्य, अहिंसा और शंति के संकल्प के साथ पांच मई, 2016 के लिए दिल्ली कूच करें। हमने अपने लिए ऐसा करना तय किया है। दिल्ली जाना पङा, तो वहां हम सिर्फ जल संचयन की नहीं, पूरी जल सुरक्षा अधिनियम की मांग करेंगे। फिर याचना नहीं, असली आज़ादी का आंदोलन होगा। तैयारी करें।

पानी, प्रकृति, अन्य जीवों तथा मानव समाज के प्रति संवेदनशील 130 संगठनों की ओर से अपीलकर्ता

जलपुरुष राजेन्द्र सिंह पी. व्ही. राजागोपाल
(अध्यक्ष, राष्ट्रीय जलबिरादरी ) (संस्थापक, एकता परिषद)
[email protected] [email protected]
9414066765 9993592421

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