आप यहाँ है :

सिंहस्थ में संस्कृत की कक्षा में संस्कृत सीखने देश भर के छात्र आए

उज्जैन के सिंहस्थ मेले के पंडालों में एक पंडाल ऐसा है जहां आज की नई पीढ़ी को भारत की देवभाषा (संस्कृत), धर्म संस्कृति व संस्कार सिखाए जा रहे हैं। देवभाषा संस्कृत के महत्व के साथ उससे जुड़ी तमाम अहम जानकारियां 10 साल से लेकर 16 साल तक के बच्चों को दी जा रही है।
काशी के श्रीरामानंद विश्व हितकारिणी परिषद के स्वामी डॉ. रामकमल दास वेदांती महाराज के निर्देशन में चल रही इस पाठशाला में कई प्रदेशों से आए बच्चे देवभाषा का ज्ञान अर्जन कर रहे हैं। करीब 90 बच्चे यहां आए हैं जो परिषद के देश में बने चार अलग-अलग आश्रम में रहकर संस्कृत का ज्ञान लेते हैं। महाराज की इस पाठशाला में पुराने छात्रों के अलावा एक महीने में करीब 100 नए बच्चों को जनेऊ संस्कार कर दीक्षा दी जाएगी। पाठशाला के साथ प्रतिदिन सुबह एवं शाम के सत्र में रामकथा का आयोजन हो रहा है जिसमें शिष्यों के अलावा सैकड़ों भक्त शामिल हो रहे हैं। परिषद का वाराणसी में दो मथुरा, मप्र के विदिशा में एक आश्रम है जहां नई पीढ़ी को देवभाषा और धर्म की शिक्षा दी जा रही है।
धर्म विस्तार से जुड़े आयोजन भी हो रहे
परिषद के वाराणसी आश्रम के छात्र रामशरण दुबे कहते हैं, आज कल सभी लोग अंग्रेजी भाषा की तरफ दौड़ रहे हैं और उसके चलते हमारी देवभाषा संस्कृत को पूरी तरह भुला दिया है, ऐसे तो जल्द ही संस्कृत खत्म हो जाएगी। उन्होंने कहा सरकार भी इस भाषा के लिए विशेष प्रयास नहीं कर रही है। आधुनिकता के बीच हमें संस्कृत का वजूद बताना होगा।
12 साल के मनोज को बनना है आचार्य
उम्र महज 12 साल, माथे पर आकर्षक तिलक, केसरिया लिबाज और हर बात संस्कृत में कहने में सक्षम। गंजबसौदा में रहने वाले 12 साल के मनोज शर्मा को संस्कृत का प्रकांड पंडित बनने के बाद आचार्य की उपाधि हासिल करना है। पांचवीं तक सामान्य शिक्षा लेने के बाद अब वह संस्कृत की पहली कक्षा में है। पिता ओमप्रकाश ने ही उन्हें यहां भेजा है।
रामायण-गीता के श्लोक हैं कंठस्थ
सिंहस्थ में धर्म का महत्व समझने आए छत्तीसगढ़ के रामभजन तिवारी महज 10 साल के हैं लेकिन धर्म के प्रति रुझान देखते ही बनता है। भगवत गीता और रामायण के कई श्लोक कंठस्थ हैं। रामभजन कहते हैं सिंहस्थ में धर्म ज्ञान के लिए गुरुजी के साथ आया हूं और आगे भी संस्कृत भाषा के प्रचार और भारतीय संस्कृति के विस्तार के लिए काम करूंगा।

साभार- http://www.patrika.com/ से

image_pdfimage_print


Get in Touch

Back to Top