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नॉर्वे में हुआ पहला अंतर्राष्ट्रीय जेल रेडियो सम्मेलन, वर्तिका नंदा ने किया भारत का प्रतिनिधित्व

“नमस्ते! मैं हूं वर्तिका नंदा। मैं एक भारतीय हूं और यह है – तिनका तिनका जेल रेडियो- जेलों में इंद्रधनुष बनाने की कोशिश। ”

इन शब्दों के साथ भारत की प्रमुख जेल सुधारक और मीडिया शिक्षक डॉ. वर्तिका नंदा ने भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए 15 जून, 2022 को ओस्लो, नॉर्वे में पहले अंतर्राष्ट्रीय जेल रेडियो सम्मेलन में अपनी बात रखी। नॉर्वेजियन सुधार सेवाओं के निदेशालय के सहयोग से प्रिजन रेडियो एसोसिएशन द्वारा आयोजित सम्मेलन 20 से अधिक देशों के प्रतिभागियों को एक साथ लाने वाला एक ऐतिहासिक कार्यक्रम था। इसका उद्देश्य जेलों के मानवीकरण और कैदियों के पुनर्वास में जेल रेडियो की क्षमता पर वैश्विक ज्ञान और अनुभव-साझाकरण की सुविधा प्रदान करना था।

भारत में प्रिजन रेडियो की कहानी

वर्तिका नन्दा की 30 मिनट की विशेष और विस्तृत प्रस्तुति में भारत में जेल रेडियो का अवलोकन और उनके गैर-लाभकारी संगठन, तिनका तिनका फाउंडेशन द्वारा आगरा और देहरादून की जिला जेलों के साथ-साथ हरियाणा की 8 जेलों में लागू जेल रेडियो की पहल का विवरण शामिल था। तिनका तिनका फाउंडेशन की संस्थापक डॉ. वर्तिका नंदा ने अब तक देशभऱ में 100 से अधिक कैदियों को रेडियो जॉकी के तौर पर प्रशिक्षित किया है। जेल रेडियो प्रशिक्षण और इसके कार्यान्वयन के दौरान तिनका तिनका ने लगभग एक दर्जन गाने जारी किए हैं, कोरोना के दौरान बंदियों को मानिसक सहारा दिया, उनके परिवारों को हौसला दिया और जेल के माहौल में सृजनात्मकता और सकारात्मकता भरने का मुश्किल काम किया।

नंदा ने अपने ‘जेल सुधारों के तिनका मॉडल’ के बारे में एक व्यापक दृष्टिकोण भी दिया, जो जेल के कैदियों को मुख्यधारा के साथ एकीकृत करने के लिए मीडिया की शक्ति और रचनात्मकता का उपयोग करता है। उन्होंने अपने प्रयासों में सरकारी अधिकारियों से मिले समर्थन का सम्मानपूर्वक जिक्र किया। भारत में जेल रेडियो के अंतर्निहित दर्शन की व्याख्या करते हुए नंदा ने समाज के समग्र प्रगतिशील विकास के लिए सलाखों के पीछे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के महत्व पर जोर दिया। डॉ. नंदा ने इस बात पर प्रकाश डाला कि तिनका तिनका जेल रेडियो की मदद से जेलों में बंदियों के जीवन के बारे में बाहरी दुनिया को जागरूक करने की कोशिश कर रहा है। बिना किसी आर्थिक सहयोग के जेल का यह रेडियो तिनका मॉडल ऑफ प्रिजन रिफॉर्म पर आधारित है और पूरी दुनिया का अपनी तरह का पहला सुनियोजित रेडियो लाने में सक्रिय है। इसके तहत तिनका तिनक जेलों में लाइब्रेरी की स्थापना करवाने में भी सक्रिय है। जिला जेल, पानीपत में ऐसी ही एक विशेष लाइब्रेरी को 2021 में स्थापित किया गया था.

अनुभवों का संगम

दो दिवसीय सम्मेलन में ओस्लो जेल का दौरा शामिल था और उसमें जेल रेडियो परियोजना का अध्ययन करने का अवसर प्रदान किया गया था। जेल दौरे को विशेष रूप से नॉर्वेजियन जेलों द्वारा अपनाई गई सर्वोत्तम प्रथाओं को समझने में मदद करने के लिए डिजाइन किया गया था। प्रतिभागियों ने जेल रेडियो परियोजनाओं से संबंधित रसद, सीमाओं, दायरे और अवसरों पर भी अपने विचार साझा किए। प्रतिभागियों के बीच एक आम सहमति थी कि जेल रेडियो दुनिया भर में लोकतांत्रिक मूल्यों और स्वतंत्रता को मजबूत कर सकता है।

तिनका तिनका फाउंडेशन और डॉ. वर्तिका नंदा

तिनका तिनका जेल सुधारक और मीडिया शिक्षिका डॉ. वर्तिका नंदा के दिमाग की उपज है, जो दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी श्रीराम कॉलेज में पत्रकारिता विभाग की प्रमुख हैं। उन्हें 2014 में भारत के राष्ट्रपति से स्त्री शक्ति पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। जेलों पर उनके काम को दो बार लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में जगह मिली है। जेलों पर उनके काम पर 2018 में भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा संज्ञान लिया गया था। “भारतीय जेलों में महिला कैदियों और उनके बच्चों की स्थिति का अध्ययन और उनकी संचार आवश्यकताओं का अध्ययन” पर उनके हालिया शोध को आईसीएसएसआर द्वारा मान्यता मिली है और इसे शोध की दृष्टि से उत्तम माना गया है।

इससे पहले तिनका तिनका फाउंडेशन ने 2019 में जिला जेल, आगरा में जेल रेडियो शुरू किया था। हरियाणा में जेल रेडियो का विकास जेल सुधार के तिनका तिनका मॉडल पर चल रहे एक अध्ययन का हिस्सा है। यूटयूब पर प्रसारित उनके बनाए तिनका तिनका पॉडकास्ट जेलों पर भारत का इकलौता पॉडकास्ट है। तिनका तिनका की टैगलाइन है- जेलों में इंद्रधनुष बनाने की कोशिश। हर साल तिनका तिनका फाउंडेशन बंदियों और जेल कर्मचारियों को तिनका तिनका इंडिया अवार्ड प्रदान करके प्रोत्साहित भी करता है। जेल सुधार के लिए बंदियों और स्टाफ को दिया जाने वाला यह इकलौता पुरस्कार है।

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