Tuesday, April 16, 2024
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Homeप्रेस विज्ञप्तिअंतराष्ट्रीय महिला दिवस पर 11 मातृ शक्तियों का सम्मान

अंतराष्ट्रीय महिला दिवस पर 11 मातृ शक्तियों का सम्मान

कोटा। राजकीय सार्वजनिक मण्डल पुस्तकालय कोटा मे अंतराष्ट्रीय महिला दिवस पर “महिलाओ की शिक्षा, अधिकार एवं सामाजिक सरोकार” विषय पर महिला विमर्श एवं “जियो तो ऐसे जियो” पुस्तक का लोकार्पण कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता डॉ रेणु गुप्ता वरिष्ठ चर्म रोग एवं सौंदर्य विशेषज्ञ, मुख्य अतिथि डॉ पुरवा अग्रवाल नियंत्रक (वित्त) कोटा विश्वविधालय कोटा, विशिष्ट अतिथि डॉ मनीषा शर्मा प्रोफेसर (हिन्दी), श्यामा शर्मा साहित्यकार, डॉ संगीता देव, डॉ कृष्णा कुमारी, डॉ प्रज्ञा गौतम, स्नेहलता शर्मा, डॉ निशा गुप्ता थे। गेस्ट ऑफ ऑनर ख्यातनाम साहित्यकार जितेंद्र निर्मोही एवं रामेश्वर शर्मा “रामू भैया” रहे। मंच संचालन डॉ शशि जैन ने किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के चित्र पर तिलक पूजा, माल्यार्पण एवं सरस्वती वंदना के साथ किया गया। इसके बाद विभिन्न क्षेत्रों मे विशिष्ट योगदान के लिए 11 मातृ शक्ति का सम्मान किया गया जिन्हे मोती की माला, शाल एवं पुस्तक भेंट की गई।

उद्घाटन भाषण मे संभागीय पुस्तकालय अध्यक्ष डॉ दीपक कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि -स्त्री सभी स्वरूप में भारतीय ज्ञान परम्परा के अनुसार वंदनीय, पूजनीय और अनुकरणीय मानी गई है। शास्त्रों में उल्लेखित सभी आधारों पर स्त्री के पूजन या सम्मान को सर्वोपरि रखा गया है, शक्ति स्वरूपा की आराधना को पर्वाधिराज के रूप में स्वीकार किया गया है।

इस अवसर पर डॉ प्रभात सिंघल द्वारा लिखित एवं डॉ शशि जैन द्वारा संपादित पुस्तक“जियो तो ऐसे जियो” का लोकार्पण कार्यक्रम मे पधारी सभी अतिथियों ने किया।

इस अवसर पर वरिष्ठ समीक्षक वियजी जोशी ने कहा कि – इस कृति का शीर्षक ही इसका परिचय देने में सक्षम है इस माने में कि जीवन तो सभी अपने-अपने स्वभावानुरूप अपनी आवश्यकता और अपेक्षानुरूप जीते हैं और जी रहे हैं तथापि इस कृति का उद्घोष कि ‘जियो तो ऐसे जीयो’ अपने अन्तर्निहित नाद में आमन्त्रित और अभिमन्त्रित करता है कि अपने भीतर के स्वर को तनिक अपने चिंतन की ताल से समन्वित कर जुगलबन्दी का अवसर तो प्रदान करो। तब स्वयं ही अनुभूत करोगे कि कैसे यह जुगलबन्दी आपके नैसर्गिक तत्वों को झंकृत कर जीवन जीने के कौशल को विकसित करने का मार्ग प्रशस्त करती है।

मुख्य अतिथि डॉ पुरवा अग्रवाल ने कहा कि लैंगिक समानता के लिए आवश्यक हे कि बेटियों को आत्मनिर्भर बनाए।

अध्यक्षता कर रही डॉ रेणु गुप्ता ने कहा कि- भारत की नारी पृथ्वी पर किसी की तुलना में न तो हीन है, न दीन है। सम्पूर्ण जगत में उसकी अमर कीर्ति युगों-युगों तक कभी लुप्त नहीं होगी यानी सदैव बनी रहेगी।

इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि श्यामा शर्मा, डॉ कृष्णा कुमारी ने महिला अधिकारो को समर्पित कविताए प्रस्तुत की। अंत मे डॉ प्रभात सिंघल ने आभार व्यक्त करते हुये कहा कि – अगले अंतराष्ट्रीय महिला दिवस पर केवल महिलाओ को समर्पित पुस्तक “जियो तो ऐसे जियो” लाएँगे ।

डॉ सिंघल ने कहा कि यह पुस्तक- “जियो तो ऐसे जियो” में ऐसे सृजनधर्मियों पर आलेख हैं जो सामाजिक परिवेश में व्याप्त संचेतनाओं को अपनी सकारात्मकता के साथ उजागर कर समाज के समक्ष रचनात्मक रूप से व्यक्त करते हुए एक दिशा प्रदान कर रहे हैं जिनका व्यक्तित्व एवं कृतित्व स्वतः ही कृति के शीर्षक को अन्तर्ध्वनित करता है कि- “जियो तो ऐसे जियो…।”

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