Friday, June 14, 2024
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लन्दन के बीच में बसा हुआ है छोटा भारत : अल्पर्टन

लन्दन शहर में कई इलाक़े ऐसे भी हैं कि अगर आपको अंग्रेज़ी बिलकुल भी नहीं आती फिर भी आप बिना किसी दिक़्क़त के पूरी उम्र गुज़ार सकते हैं . ऐसा ही एक गुजराती बाहुल्य इलाक़ा अल्पर्टन है . यह सेंट्रल लंदन के क़रीब वेम्बले स्टेडियम और एरीना से लगभग जुड़ा हुआ है. वेम्बले स्टेडियम से तो सभी परिचित हैं क्योंकि यहाँ फुटबॉल के खेल से लेकर विशाल भव्य संगीत कार्यक्रम तक होते रहते हैं.

अल्पर्टन अंडरग्राउंड स्टेशन से लेकर यूनियन रोड तक लंबाई में फैला हुआ है . दूल्हा दुल्हन की ड्रेस, साफ़ , कलगी , पगड़ी , साड़ी , सलवार सूट , भारतीय ज़ेवरात , सप्तपदी का पूरा सामान सभी कुछ मिलता है कोई आश्चर्य नहीं कि भारतीय मूल का कोई व्यक्ति लन्दन के किसी भी इलाक़े में रहता हो लेकिन देसी क़िस्म की ख़रीदारी के लिए यहाँ ज़रूर आता है .

यह इलाक़ा गुजराती बहुल कैसे बना इसकी रोचक कहानी है . पहले जमाने में जिन भारतीयों को अंग्रेज अपनी अन्य कालोनियों में काम के लिए ले के जाते थे उनके पास ब्रिटिश पासपोर्ट होता था . पूर्वी अफ़्रीका में वो चाहे केन्या, नाइजीरिया हो युगांडा या फिर अन्य छोटे बड़े देश , वहाँ पर गुजरातियों ने अपनी लगन और मेहनत से बड़े बड़े व्यवसाय खड़े किए , उनकी यह संपन्नता स्थानीय लोगों को रास न आई . धीरे धीरे ऐसे लोगों ने ब्रिटेन आने की शुरुआत कर दी , वे आ के इस इलाक़े में बसे , यहीं पर व्यवसाय करने शुरू किए . आज उनकी सफलता की कहानियाँ अल्पर्टन में फैली हुई है.

गुजरात से पूर्वी अफ़्रीका और वहाँ से ब्रिटेन , देस बदले , वेश बदले अगर नहीं बदला तो उनका ख़ान पान , इस लिए अल्पर्टन में आपको सारे क़िस्म के गुजराती फरसान और मिठाई मिल जाएंगी. खमण, पात्रा, खाकरा , गाठिया, दाबेली, जलेबी, फ़ाफड़ा, समोसा , डोसा , इडली तो मिलते ही हैं , केन्या से आये गुजरातियों ने केनियाई बाल्टी मिक्स भी विकसित किया है जो दालमोठ जैसा ही है लेकिन तीखा ज़्यादा है . रोड साइड पर आपको कटिंग चाय , नारियल पानी , गन्ने का रस भी मिल जाएगा . पिछले दिनों केशर और हापुस आम भी फुटपाथ पर भारत की ही तरह आवाज़ लगा कर बेचे जा रहे थे.

अब मैं आपको एक और कारण बताता हूँ जिसके कारण केवल भारतीय ही नहीं फ़िरंगी लोग भी अल्पर्टन आते हैं वो है सकोनी की चाट . सकोनी की शुरुआत सन् पिचासी में एक जूस की रेहड़ी के रूप में शुरू हुई थी आज यह बेहतरीन रेस्टोरेंट में बदल चुका है और इसकी चाट पूरे लन्दन में मशहूर हो चुकी है . इनके कई आइटम में अफ़्रीकी तड़का भी मिलेगा , उदाहरण के लिए इनकी सिग्नेचर डिश गार्लिक चिली मोगो है जिसमें कसावा को उबाल कर गार्लिक और चिली के साथ साटे कर दिया जाता है . और बहुत बढ़िया भजिया खानी हो तो मारू से बेहतर कोई जगह नहीं, कई क़िस्म के गर्म गर्म भजिये और साथ ही धनिए की चटनी , जीभ से ले कर आत्मा तक तृप्त हो जाएगी . ईलिंग रोड के आख़िरी सिरे पर गाना है , यह रेस्टोरेंट छोटा सा है लेकिन यह श्रीलंकन खाने के लिए काफी जाना जाता है .

इस रविवार के भ्रमण में लायब्रेरी परिसर में चा शा में जाना हुआ , यह रेस्टॉरेंट बड़ी नफ़ासत से कुल्लहड़ में चाय देता है जो उत्तरी भारत के रोड साइड ढाबों की याद दिलाती है , हाँ इसके लिए जेब ज़रा ज़्यादा ढीली करनी पड़ती है , एक चाय साढ़े तीन सौ की है . अच्छे भारतीय परिधान और भोजन के साथ ही अल्पर्टन धार्मिक उन्नयन की भी व्यवस्था है . स्टेशन से बहुत क़रीब श्री वल्लभ निधि मंदिर है , इसकी भव्य इमारत भारत के किसी भी बड़े से बड़े मंदिर को टक्कर देती दिखती है , हिंदुओं के लगभग सभी देवी देवताओं के छोटे छोटे मंदिर यहाँ मौजूद हैं . यूनियन रोड पर एक शिव मंदिर है यह बल्लभ निधि मंदिर से अपेक्षाकृत छोटा है लेकिन यहाँ दक्षिण भारत के सभी प्रभुख मंदिरों के शिखर की अनुकृतियाँ हैं और उनके नीचे उन मंदिरों के विग्रह हैं. इस लिए यहाँ खूब भीड़ रहती है . शिव मंदिर से सटी हुई ग्रैंड मस्जिद भी है .
अल्पर्टन में सभी कुछ मिल सकता है लेकिन कार पार्किंग मिलना सच में चुनौती है . हाँ , नियमित रूप से आने वाले अपने वाहन बल्लभ निधि मंदिर के परिसर में पार्क कर देते हैं .

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