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वैज्ञानिक कोविड-19 के प्रक्षेपवक्र को अंकित करने के लिए सूत्र मॉडल पर काम कर रहे हैं

हम वैज्ञानिक, जो कोविड-19 के प्रक्षेपवक्र को अंकित करने के लिए सूत्र मॉडल पर काम कर रहे हैं, हमारे गणितीय मॉडल की भविष्यवाणियों से संबंधित कुछ तथ्यों के बारे में स्पष्ट रूप से बताना चाहते हैं।खासकर जब से इनमें से कुछ भविष्यवाणियों को गलत ढंग सेसमझा और उद्धृत किया गयाहै, ऐसा करना जरूरी है। मीडिया के कुछ हिस्सों में आई हाल की रिपोर्ट से ऐसा लगता है कि सूत्र मॉडल पर काम करने वाले वैज्ञानिकों ने मार्च में दूसरी लहर के बारे में चेतायाथा, लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया गया। यह गलत है।राष्ट्रीय स्तर पर इस महामारी के खिलाफ प्रतिक्रिया को समन्वित करने वाले सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों में से एक ने 2 अप्रैल को बुलाई गई एक बैठक में हमसे इनपुट मांगे थे। हमने संकेत दिया कि सूत्रमॉडल ने अप्रैल के तीसरे सप्ताह तक दूसरी लहर के चरम पर पहुंचने की भविष्यवाणी की है और दैनिक मामलों की संख्या लगभग 1 लाख रहने की संभावना है। साफ तौर परइस मामले में सूत्र मॉडल की भविष्यवाणी नीचे दिए गए कारणों से गलत निकली।

हम वायरस के प्रसार की भविष्यवाणी करने के लिए एक गणितीय मॉडल पर काम कर रहे हैं। यहां यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि कोई भी गणितीय मॉडल केवल तभी कुछ निश्चितता के साथ भविष्य के बारे में भविष्यवाणी कर सकता है, जब वायरस का आयाम और इसकी प्रसार क्षमता समय के साथ पर्याप्त रूप से न बदले। गणितीय मॉडल बिना– दवा आधारितउपायों जैसे विभिन्न नीतिगत निर्णयों के अनुरूप वैकल्पिक परिदृश्यों की भविष्यवाणी करने की एक प्रक्रिया के बारे में भी बता सकते हैं। कोविड-19 के मामले में, यह बिल्कुल स्पष्ट है कि वायरस की प्रकृति बहुत तेजी से बदल रही है। ऐसीस्थिति में, कोविड-19 से जुड़ी किसी भी भविष्यवाणी में लगातार,कभी-कभी लगभग रोजाना,फेरबदल करके उसे दुरूस्त रखना चाहिए।

हम सरकार के साथ मिलकर काम कर रहे हैं और हमारे इनपुट को हमेशा सकारात्मक तरीके से लिया गया है। भले ही हम पूर्व में दूसरी लहर की सटीक प्रकृति का अनुमान नहीं लगा पाये, लेकिनहमने इस महामारी के भविष्य के प्रक्षेप वक्र का बेहतर तरीके से अनुमान लगाने के अपने प्रयासों को जारी रखा है।

मनिन्द्र अग्रवाल, प्रोफेसर, आईआईटी कानपुर;

माधुरी कनिटकर, डिप्टी चीफ, इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ;

एम. विद्यासागर, प्रोफेसर, आईआईटी हैदराबाद।

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