तारीख- 4 मार्च…। जगह- UP विधानसभा। महाकुंभ में कारोबार का जिक्र करते हुए CM योगी ने कहा- ‘मैं एक नाविक परिवार की सक्सेस स्टोरी बता रहा हूं, जिनके पास 130 नौकाएं हैं। प्रयागराज महाकुंभ के 45 दिन में इन्होंने शुद्ध बचत 30 करोड़ रुपए की। यानी एक नाव से रोज 50 से 52 हजार रुपए इनकम थी।’
योगी ने जिस परिवार का जिक्र किया, उसकी पूरी कहानी क्या है? दैनिक भास्कर इसे जानने के लिए परिवार तक पहुंचा। परिवार के लोगों से बात की। सिलसिलेवार पढ़िए पूरी रिपोर्ट…
अरैल घाट के करीब शुकलावती देवी का घर प्रयागराज का नैनी इलाका, जो अरैल घाट के करीब है। यहीं पर शुकलावती देवी का घर है, जिनके बेटे पिंटू महरा और परिवार का जिक्र CM योगी ने सदन में किया। ये मूलतः निषाद परिवार से हैं। नदी आधारित कारोबार इनका पेशा है। शुकलावती के परिवार में दो बेटे पिंटू और सतीश हैं।
नाविक पिंटू महरा का घर सामान्य लोगों की तरह ही है। मौजूदा समय में मकान के ऊपरी फ्लोर में मजदूर निर्माण के काम में लगे हैं। मकान के आगे वाले हिस्से में लोगों की भीड़ उसे बधाई देने के लिए बैठी है।
प्रयागराज के पिंटू महरा के पास खुद की 70 नाव हैं। महाकुंभ में परिवार और साथियों की मिलाकर 130 नाव श्रद्धालुओं को संगम स्नान करा रही थीं।
यहां हमारी मुलाकात सबसे पहले पिंटू (40) की मां शुकलावती (71) से हुई। वे बताती हैं, जून 2018 में पति बच्चा महरा की मौत ने पूरे परिवार को अनाथ कर दिया। बच्चों के सिर से पिता का साया क्या उठा, परिवार की 2 जून की रोटी का सहारा छिन गया था, लेकिन आज बेटे की मेहनत ने सारे जख्म अपनी मेहनत और लगन से भर दिए हैं। यह कहते हुए उनकी आंख में आंसू छलक आ गए।
यह पिंटू महरा का घर है। इसमें निर्माण कार्य चल रहा है।
शुकलावती ने बताया, बेटे पिंटू ने पत्नी सुमन के जेवर गिरवी रखे। नाव तैयार करने के लिए रुपए कम पड़े तो मुझसे भी घर के कागज और जेवर मांगे। मैंने उससे कहा- ‘पागलपन न करो।’
डर था कि बेटे का कारोबार न चला तो सब लोग सड़क पर आ जाएंगे। लेकिन पिंटू मेहनत के साथ नाव तैयार करने के लिए रुपए जुटाता रहा। पहले सिर्फ चार नाव थीं, सितंबर 2024 में घर के कागज-जेवर गिरवी रख उसने धीरे-धीरे कर 70 नाव तैयार कर लीं।
पिंटू, भाई सतीश और मां शुकलावती पुराने दिन याद कर भावुक हो जाते हैं।
शुकलावती ने कहा, पूरे परिवार ने महाकुंभ में बहुत मेहनत की, गंगा मैया ने हमारी बात सुन ली। हमारा कारोबार चमका और लोगों का आशीर्वाद भी हमें मिला।
CM योगी ने जिस नाविक पिंटू का जिक्र किया, उसकी उम्र 40 साल है। हमने पिंटू से पूछा, महाकुंभ से पहले दिमाग में क्या चल रहा था? पिंटू ने बताया सूबे के मुख्यमंत्री ने जब साल 2019 का अर्धकुंभ कराया था, तभी से उसने प्लानिंग शुरू कर दी थी। जिस सरकार में अर्धकुंभ इतना शानदार व भव्य हो सकता है, उसमें महाकुंभ कितना भव्य-दिव्य होने वाला है।
पिंटू ने महाकुंभ की सरकारी तैयारियों के बीच अपने प्लान को तैयार कर उसे हकीकत की जमीन पर उतारने की तैयारी शुरू कर दी। महाकुंभ आते-आते पिंटू ने 70 नाव खुद से खरीदीं। 100 लोगों के कुनबे के युवाओं को संगठित कर कुल मिलाकर 130 के करीब नाव महाकुंभ के लिए संगम की त्रिवेणी में श्रद्धालुओं को पुण्य की डुबकी लगवाने उतारीं।
सितंबर 2024 तक पिंटू के पास सिर्फ तीन-चार नाव ही थीं। कुंभ से पहले उन्होंने 70 नावों की व्यवस्था कर ली।
मां ने दी सीख- श्रद्धालुओं को सताकर पैसे मत लेना मां शुकलावती ने पिंटू से कहा था, एक बात गांठ बांधकर रखा लो, गंगा मां के आंचल में उतरकर कारोबार करने जा रहे हो, कभी किसी श्रद्धालु को सताकर रुपए न लेना। पिंटू ने कहा- उसने मां की बात को जेहन में रखा।
अपने परिवार व नाविक साथियों की मदद से किला घाट, VVIP घाट, वोट क्लब, अरैल समेत कई अन्य घाट पर श्रद्धालुओं के लिए नाव चलाईं। सरकार ने जितने रुपए निर्धारित किए थे, उतने लेकर श्रद्धालुओं को संगम में डुबकी लगवाई। पिंटू के अलावा परिवार में पत्नी और बेटा-बेटी हैं। घर में स्कॉर्पियो गाड़ी है।
हमने पिंटू से उनके नाव के पूरे कारोबार के बारे में पूछा। पिंटू ने बताया, 1 नाव बनाने में 10 से 15 हजार रुपए खर्च किए। साथ ही 7 मोटर बोट खरीदने में 7 लाख रुपए खर्च किए। कुंभ से पहले उनके पास 12 नाव खुद की और परिवार के लोगों की मिलाकर 80 नाव थीं।
पिंटू से जब पूरी कमाई के बारे में पूछा गया तो उसने बताया कि 30 करोड़ उसने अकेले नहीं, पूरे कुनबे ने मिलकर कमाए हैं। उसने कितने कमाए? इस सवाल पर कहा कि अभी हिसाब नहीं किया। इतने रुपए का करेंगे क्या? इस सवाल पर कहा, सबसे पहले कर्ज चुकाएंगे, इसके बाद अन्य कारोबार में रुपए लगाएंगे। बच्चों की पढ़ाई को बेहतर करने का काम होगा। परिवार की सुख सुविधा पर खर्च करेंगे।