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भारत और अमेरिका के मध्य हुआ ऐतिहासिक समझौता, झूमा बाजार भारत ने फिर दिखाया सामर्थ्य

भारत और अमेरिका के मध्य अप्रैल 2025 से प्रारंभ हुआ टैरिफ वॉर अब समझौते के साथ समापन की ओर अग्रसर हो रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प की ओर से भारत पर टैरिफ घटाने के ऐलान के साथ ही शेयर बाजार में उछल आया और निवेशकों के चेहरे खिल उठे। डॉलर के मुकाबले रुपए में भी मजबूती दिखी।

यूरोपियन यूनियन के 27 सदस्य देशों के साथ भारत के मुक्त व्यापार समझौते के बाद से अनुमान लगाया जा रहा था कि अमेरिका दबाव में आ गया है और उसे भारत की व्यापार चिंताओं के सम्मान करना ही पड़ेगा और अंतत: ऐसा हुआ भी। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर कहा कि यह मेरे लिए सम्मान की बात है कि प्रधानमंत्री मोदी ने हमसे बात की ।वह मेरे सबसे अच्छे दोस्तों में से एक हैं और अपने देश के शक्तिशाली नेता हैं। हमने एक नहीं कई मुद्दों पर बात की जिसमें व्यापार और रूस -यूक्रेन युद्ध को समाप्त करना भी शामिल था। मोदी के लिए दोस्ती और उनके सम्मान के चलते और उनकी मांग पर तत्काल प्रभाव से हम अमेरिका और भारत के बीच एक व्यापार समझौते पर सहमत हुए हैं, जिसमें अमेरिका भारत पर लगाए गए टैरिफ को 25 से घटाकर 18 प्रतिशत कर रहा है। भारत के साथ हमारा अद्भुत संबंध आगे और मजबूत होगा। जैसे ही सोशल मीडिया पर अमेरिकी राष्ट्रपति का बयान आया वैसे ही भारत में भी हलचल तीव्र हो गई। एन डी ए संसदीय दल की बैठक में अमेरिका के साथ हो रहे समझौते पर प्रधानंमत्री मोदी ने कहा कि हमने बहुत समय तक धैर्य रखा जिसका परिणाम हम सभी के सामने है । अमेरिका की ओर से की गई इस घोषणा से दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्रों के बीच व्यापारिक तनाव को कम करने में सहायता मिलेगी।

भारत सर्वाधिक लाभ में- भारत और अमेरिका के बीच जो व्यापार समझौता हुआ है उसका सर्वाधिक लाभ भारत को ही मिलने जा रहा है। ट्रंप की भारत को लेकर की गए इस बड़ी टैरिफ घोषणा के बाद भारत अब इस मामले में पडोसी अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले से अधिक लाभ मे आ गया है । चीन और पाकिस्तान की तुलना में भी भारत पर अब कम टैरिफ है।इंडोनेशिया, बांग्लादेश और वियतनाम भारत से अधिक टैरिफ वाले देश बन चुके हैं। वर्तमान समय में बांग्लादेश और वियतनाम पर 20, मलेशिया, कंबोडिया, थाईलैंड और पाकिस्तान पर 19 प्रतिशत अमेरिकी टैरिफ लगा हुआ है । समाचार यह भी है कि अब भारत भी अमेरिकी वस्तुओं पर टैरिफ और गैर टैरिफ बाधाओं को कम करने के लिए प्रतिबद्ध है । कहा जा रहा है कि इसे संभावित रूप से शून्य तक ले जाया जा सकता है। यह भारत की वर्तमान व्यापार नीति में बाजार पहुंच के सबसे बड़े बदलावो में से एक है। जैसे ही भारत अमेरिकी उत्पादों के लिए अपने बाजार खोलेगा कई अमेरिकी वस्तुएं भारतीय उपभोक्ताओं के लिए काफी सस्ती हो जाएंगी।

भारतीय बाजार में लैपटॉप, गैजेट्स और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण की कीमतें कम हो सकती हैं।घरेलू उपकरणों की पहुंच आसान हो जाएगी।निर्यात के मोर्चे पर भी भारत को बहुत लाभ होने जा रहा है।अमेरिका से टैरिफ कम हो जाने के बाद हमारे टैक्स्टाइल, आभूषण और रत्न निर्यात पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इन सेक्टर्स के अलावा भारत का चमड़ा और फुटवियर उद्योग अमेरिका को हर वर्ष 1.18 अरब, केमिकल उद्योग 2.34 अरब और इलेंक्टिक और मशीनरी उद्योग 9 अरब डॉलर का निर्यात करता है।

विश्लेषकों का अनुमान है कि भारत और अमेरिका के मध्य द्विपक्षीय व्यापार अगले कुछ वर्षों में 500 अरब डॉलर की ओर 5 गुना गति से बढ़ेगा ओैर नए व्यापार समझौते से भारी आर्थिक लाभ प्राप्त होंगे।अमेरिका के साथ डील फाइनल हो जाने के कारण अब एक नई सप्लाई चेन मिल गई है जिसका लाभ भी भारत को मिलेगा।

भारत -अमेरिका व्यापार समझौते के बाद भारत की जीडीपी वृद्धि बढ़कर 6.9 प्रतिशत हो सकती है। टैरिफ कटौती से भारत की आर्थिक वृद्धि निवेश, वातावरण और वाह्य संतुलन को समर्थन मिलेगा। गोल्डमैन एक्स का मानना है कि अगर यह टैरिफ लागू रहता है तो इससे भारत की अर्थव्यवस्था को व्यापक लाभ होगा। अब ट्रेड पॉलिसी को लेकर अनिश्चितता कम हो जाएगी । उद्योग जगत इसे भरोसा बढ़ाने वाला कदम मान रहा है ओैर एफआईआई की वापसी से बाजारों में सकारात्मक वातावरण बनने की संभावना बताई जा रही है।

भारत और अमेरिका के मध्य हुआ समझौता इंगित करता है कि अब पूरी दुनिया भारत में व्यापार के माध्यम से निवेश के नए अवसर खोज रही है। यह समझौता न सिर्फ भारत की विकास आकांक्षाओं को गति देगा बल्कि देश को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी और नवाचार का केंद्र बनाने के लक्ष्य को भी मजबूती देगा। भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत विकास पथ पर है और यह डील विकास को अतिरिक्त गति देगी। यह कदम भारत -अमेरिका आर्थिक संबंधों में भरोसा बढ़ाने वाला है और विकसित भारत – 2047 के विजन के अनुरूप दिख रहा है। इस समझौते के लागू हो जाने के बाद अब निवेश और रोजगार के नए अवसर भी सामने आयेंगे।

प्रेषक – मृत्युंजय दीक्षित

फोन नं. – 9198571540

 

संस्कृति में सिरमौर राजस्थान पर संभागीय निबंध प्रतियोगिता

कोटा। संस्कृति में सिरमौर राजस्थान पर कोटा संभाग स्तरीय निबंध प्रतियोगिता का आयोजन केसर काव्य मंच कोटा एवं संस्कृति, साहित्य,मीडिया फोरम कोटा का संयुक्त में किया जाएगा। केसर काव्य मंच की संस्थापक अध्यक्ष डॉ. प्रीति मीणा ने बताया कि राजस्थान दिवस 30 मार्च के उपलक्ष्य में आयोजित प्रतियोगिता में हाड़ोती का कोई भी इच्छुक प्रतियोगी भाग ले सकता है। निबंध शब्द सीमा नौ सौ से एक हजार शब्द रखी गई है और टाइप किया गया निबंध
व्हाट्सअप नंबर 9413350242 पर 28 फरवरी तक भेज सकते हैं।

सह संयोजक डॉ. वैदेही गौतम ने बताया विजेताओं प्रथम को 1500 रूपये, द्वितीय को 1000 रूपये, तृतीय को 800 रुपए, चतुर्थ को 500 रुपए, पंचम को 300 रुपए तथा पांच प्रोत्साहन को 150 रूपये नकद प्रमाणपत्र सहित पुरस्कृत किया जाएगा।

पाटोत्सव ब्रजभाषा समारोह 8, 9 फरवरी को नाथद्वारा में

उपनिषद में वैचारिक मंथन, 103 साहित्यकार, पत्रकार ,विद्यार्थियों का सम्मान होगा

नाथद्वारा । साहित्य मंडल श्रीनाथद्वारा की ओर से आगामी 8 एवं 9 फरवरी 26 को नाथद्वारा के भगवती प्रसाद देवपुरा प्रेक्षागृह में दो दिवसीय पाटोत्सव ब्रजभाषा समारोह का आयोजन किया जाएगा। संस्था के प्रधानमंत्री श्याम प्रकाश देवपुरा ने बताया कि समारोह के विभिन्न सत्रों में उपनिषद में विद्वानों द्वारा विभिन्न विषयों पर व्याख्यानों के साथ विचार मंथन किया जाएगा। बृज भाषा कवि सम्मेलन, पुस्तकों के लोकार्पण के साथ – साथ 103 साहित्यकारों, पत्रकारों और प्रतिभावान विद्यार्थियों को अलंकरणों और मानद उपाधियों से विभूषित कर सम्मानित किया जाएगा।

श्याम देवपुरा ने बताया कि दो सत्रों में आयोजित ब्रजभाषा उपनिषद में भक्त कवि कुंभनदास के काव्य में दर्शन पर वृंदावन के गोपालकृष्ण दुबे, भक्त कवि सूरदास के काव्य में दर्शन पर वृंदावन के ब्रजभूषण चतुर्वेदी ‘दीपक’, भक्त कवि गोविंददास के काव्य में दर्शन पर भरतपुर के हरिओम ‘हरि’ तथा भक्त कवि नंददास के काव्य में दर्शन पर
राया – मथुरा की श्रीमती संतोष ‘ऋचा’ अपना व्याख्यान देंगे। उपनिषद के दूसरे सत्र में भक्त कवि छीत स्वामी के काव्य में दर्शन पर भरतपुर के सुरेश कुमार शर्मा, भक्त कवि परमानंददास के काव्य में दर्शन पर कासगंज के श्रीकृष्ण शरद, भक्त कवि चतुर्भुज दास के काव्य में दर्शन पर भरतपुर के नरेन्द्र निर्मल तथा भक्त श्रीकृष्णदास के काव्य में दर्शन पर कोटा के सत्येन्द्र यादव व्याख्यान देंगे। साथ ही समस्यापूर्ति कार्यक्रम में आमंत्रित साहित्यकारों द्वारा कवित एवं सवैया पर चर्चा की जाएगी।

उन्होंने बताया कि भरतपुर के हरिओम हरि ,नरेंद्र निर्मल तथा डीग के सुरेन्द्र सार्थक एवं राया के अंजीव रावत को बृज ग़ज़ल श्री की उपाधि से विभूषित किया जाएगा। बीकानेर के चेतन स्वामी एवं सेलम के एम. श्रीधर को साहित्य मर्मज्ञ की मानद उपाधि के साथ पांच हजार रुपए से सम्मानित किया जाएगा। दिल्ली की भावना शुक्ल को हिंदी साहित्य शिरोमणि एवं आगरा के रमेश पंडित को बृज भाषा मनीषी की उपाधि से विभूषित एवं तीन हजार एक सौ रूपये से सम्मानित किया जाएगा।

श्याम देवपुरा ने बताया कि रविपुरोहित बीकानेर, देवी कारफरमा कोलकाता, डॉ. सुरेश वशिष्ठ गुरुग्राम, डॉ. मंजरी पाण्डेय वाराणसी, बसंत सिंह सोलंकी उदयपुर, डॉ. विजय लक्ष्मी अल्मोड़ा, डॉ. रामकुमार घोटड़ सादुलपुर को भगवती प्रसाद देवपुरा स्मृति सम्मान तथा हिंदी साहित्य विभूषण की मानद उपाधि, डॉ. गुलाबचंद एन पटेल गांधीनगर, प.रामेश्वर दयाल महेरे शूकरक्षेत्र सिरोंज को समाज सेवा मर्मज्ञ मानद उपाधि एवं अमित गोयल राया को रक्तदान वीर मानद उपाधि एवं दो हजार एक सौ रूपये राशि से सम्मानित किया जाएगा। राजेंद्र प्रसाद शान्तेय झालावाड़, आनंद शर्मा दिल्ली, डॉ. महामाया प्रसाद चौबीस उदयपुर, माताप्रसाद शुक्ल ग्वालियर, डॉ. गिरी गिरिवर कोटा, अक्षयलता शर्मा जयपुर को हिंदी साहित्य मनीषी, शिवदान सिंह राणावत उदयपुर, ऋतु चतुर्वेदी भीलवाड़ा, डॉ. छगनराज राव दीप एवं डॉ. दीपा परिहार दीप्ति जोधपुर को हिंदी काव्य मनीषी अलंकरण से सम्मानित किया जाएगा। इनके अलावा राजेंद्र केशोरिया,देवकी केशोरिया मथुरा, कृष्ण कुमार सेनी दौसा, डॉ. देवराज शर्मा पाली, नंदकिशोर काबरा उदयपुर एवं सुश्री उमा शर्मा मथुरा को समाज सेवा कला सेवा रत्न से सम्मानित किया जाएगा।

समारोह में पत्रकारिता सेवा में लगे नाथद्वारा , ककरोली, राजसमंद क्षेत्र के 38 पत्रकारों को पत्रकार श्री की मानद उपाधि से सम्मानित किया जाएगा। इनमें पत्रकार गिरीश पालीवाल, दर्पण पालीवाल, गिरीराज सोनी, निलेश पालीवाल, अरविंद मुखिया, सुधीर पुरोहित, चेतन उपाध्याय, मयंक सनाढ्य, अब्दुल समद ‘राहीं’, दरियाव सिंह गोरवा,
प्रमोद जोशी, गोविन्द त्रिपाठी, तरूण सोनी, चिराग माहेश्वरी, जगदीश सोनी, नवीन सनाढ्य, भूपेश दुर्गावत, जगदीशचन्द्र कपूर, सत्यदेव उपाध्याय, अशोक त्रिपाठी, रामकिशन सोनी, महेश शर्मा, मनीष पुरोहित, शेखर पालीवाल, दिनेश श्रोत्रिय, तरूण दवे, सुरेशचन्द्र भाट, जुजर हुसैन, जगदीश पालीवाल, नरेन्द्र पालीवाल ‘राजूभाई’, महेश पालीवाल, तुलसीदास सनाढ्य, हेमत कुमार पालीवाल ‘जोनू’, शशि महाकाली, राहुल कपूर, कुलदीप शर्मा, दिनेश माली एवं परेश पण्ड्‌या को सम्मानित किया जाएगा।
प्रतिवर्ष की भांति इस बार भी समारोह में विभिन्न परीक्षाओं में प्रतिभावान विद्यार्थियों को विद्यार्थी रत्न से सम्मानित किया जाएगा।

इनमें डॉ. फाल्गुन पुरोहित, गौरी चौधरी, करण बागोरा, हार्दिक जोशी,मानस बागोरा, महेश माली, मयंक जोशी, ललिता वैरागी, मनन बोहरा, तितीक्षा माली, श्रीजीका सोनी, ऋषिराज सिंह, वैष्णवी परिहार, एंजल गुर्जर, गायत्री भाटिया ,आरूषी दुर्गावत , अनुकृति नैनवा , माद्री सिंह एवं पोषिता माली को सम्मानित किया जाएगा।

बाहर से सम्मान प्राप्त करने के किए आने वालों के लिए पूर्व सूचना पर आवास और भोजन की निशुल्क व्यवस्था साहित्य मंडल द्वारा की जाएगी।

प्रेषक
डॉ. प्रभात कुमार सिंघल
लेखक एवं पत्रकार, कोटा

देलवाड़ा जैन मंदिर को यूनेस्को विश्व धरोहर घोषित करने मांग

राज्यसभा सांसद डांगी ने सदन में उठाया मुद्दा, बताया अद्वितीय स्थापत्य कला

राज्यसभा सांसद नीरज डांगी ने देलवाड़ा जैन मंदिरों को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित करने की मांग की है। उन्होंने राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान मंगलवार (3 फरवरी 2026) को यह मुद्दा उठाया। इस दौरान सांसद डांगी ने बताया कि राजस्थान के सिरोही जिले में माउंट आबू की अरावली पर्वत श्रृंखला की चोटी पर स्थित ये मंदिर भारतीय प्राचीन स्थापत्य कला, अद्वितीय संगमरमर शिल्पकला और सांस्कृतिक उत्कृष्टता के अनुपम उदाहरण हैं

कांग्रेस नेता व राज्य सभा सदस्य डांगी ने सदन को देलवाड़ा जैन मंदिरों के प्राचीन इतिहास की जानकारी देते हुए बताया कि इनका निर्माण 11वीं से 13वीं शताब्दी के मध्य हुआ था। यहां 5 श्वेतांबर जैन मंदिर हैं, जिनमें ‘विमलवसहि’ और ‘लूणवसहि’ विशेष रूप से कलात्मक और विशिष्ट हैं। अन्य प्रमुख मंदिरों में महावीर स्वामी मंदिर, पीतलहर मंदिर और पार्श्वनाथ मंदिर शामिल हैं।

हर साल लाखों श्रद्धालु और पर्यटक आते है मंदिर परिसर में उपलब्ध शिलालेखों के अनुसार, वर्ष 1031 ईस्वी में 1500 शिल्पियों और 1200 श्रमिकों ने 14 वर्षों के अथक प्रयासों से इन मंदिरों का निर्माण किया था। श्वेत संगमरमर से निर्मित इन मंदिरों पर 18.53 करोड़ रुपए की लागत आई थी। इनकी छतों, गुंबदों और तोरणद्वारों पर की गई अलंकृत नक्काशी और नायाब शिल्पकला हर साल लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करती है।

जैन तीर्थंकरों की 57 देहरियों में है मूर्तियां स्थापित डांगी ने बताया कि मंदिर में जैन तीर्थंकरों की 57 देहरियों में मूर्तियां स्थापित हैं। इनमें भगवान ऋषभदेव के अतिरिक्त मां सरस्वती, लक्ष्मीजी, अंबाजी के साथ नृसिंह अवतार के हिरण्यकश्यप वध, श्रीकृष्ण द्वारा कालिया दमन और शेषनाग की शैय्या की मूर्तियां भी शामिल हैं। इन मंदिरों में जैन संस्कृति के साथ-साथ उस युग की लोक संस्कृति, नृत्य-नाट्य कला के अद्भुत और चित्ताकर्षक शिल्प-चित्र भी अंकित हैं।

सांसद डांगी ने शिल्प सौंदर्य की सूक्ष्मता, कोमलता और अलंकरण की विशिष्टता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि गुंबदों की छतों पर स्फटिक बिंदुओं की भांति झूमते कलात्मक पिंड, मेहराबों का बारीक अलंकरण और शिलापट्टों पर उत्कीर्ण पशु, पक्षियों, वृक्षों, लताओं तथा पुष्पों की आकृतियां अलौकिक आनंद की अनुभूति प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि यहां की वास्तुकला और शिल्प कौशल अद्वितीय हैं, जिसकी मिसाल विश्व में कहीं नहीं मिलती।

साहित्यकार डॉ दिलीप धींग ने जानकारी देते हुए बताया कि भारत सरकार के डाक विभाग द्वारा देलवाड़ा मंदिर पर 14 अक्टूबर 2009 को बहुरंगी स्मारक डाक टिकट पाँच रुपए के मूल्य वर्ग का जारी हुआ है । राजस्थान समग्र जैन युवा परिषद् के अध्यक्ष जिनेंद्र जैन ने सांसद सदस्य डांगी के इस प्रयास का स्वागत करते हुए उन्हें जैन समाज की और से धन्यवाद ज्ञापित किया।

नारी शक्ति महिला सशक्तिकरण: 5 साल में करोड़ों के टर्नओवर का अवसर

इंदौर। लुनिया विनायक ग्रुप ऑफ कंपनीज़ द्वारा संचालित “नारी शक्ति महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम” महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मजबूत पहल है। इस योजना से जुड़कर महिलाएं नियमित आय के साथ 5 वर्षों में करोड़ों रुपये के टर्नओवर वाला स्वयं का व्यवसाय खड़ा कर सकती हैं।

कार्यक्रम के अंतर्गत महिलाओं को गृह उद्योग से उद्यमिता की ओर ले जाया जाएगा। इसमें फूड इंडस्ट्री, हैंडिक्राफ्ट, वुडन क्राफ्ट, स्मॉल स्किल फार्मिंग एवं बी-फार्मिंग जैसे रोजगारोन्मुख उद्योग शामिल हैं।

लुनिया विनायक ग्रुप महिलाओं को न्यूनतम निवेश में LLP रजिस्ट्रेशन, आवश्यक मशीनरी, कच्चा माल, कार्य प्रशिक्षण तथा तैयार उत्पादों की बाय-बैक सुविधा उपलब्ध कराएगा। उद्योग 0% लॉस और 0% वेस्टेज मॉडल पर संचालित होगा, साथ ही सभी सरकारी कंप्लायंस की जिम्मेदारी भी ग्रुप द्वारा ली जाएगी।

ग्रुप के अनुसार, प्रत्येक महिला अपने उद्योग के माध्यम से 10 से 50 लोगों को रोजगार दे सकेगी। यदि 10,000 महिलाएं जुड़ती हैं, तो लगभग 5 लाख रोजगार सृजन संभव होगा।

पीनटबटरजेली ने लॉन्च किया नया मार्केटप्लेस; 2028 तक स्कॉलरशिप के लिए दिया जाएगा कमीशन

डलास, टेक्सास। कम्युनिटी-संचालित डिजिटल पहल, पीनटबटरजेली (PJELLY) ने आज एक कॉमर्स-ड्रिवन मार्केटप्लेस (व्यापारिक मंच) के लॉन्च की घोषणा की है। इस मंच को विशेष रूप से इस तरह डिज़ाइन किया गया है कि इससे होने वाली कमाई का एक हिस्सा स्कॉलरशिप फंडिंग के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। यह पहल एक स्ट्रक्चर्ड कमीशन मॉडल पर आधारित है।

 

इस नए मार्केटप्लेस के जरिए उपयोगकर्ता स्टैंडर्ड ‘एफिलिएट लिंक्स’ का उपयोग करके थर्ड-पार्टी उत्पादों और सेवाओं तक पहुंच प्राप्त कर सकेंगे। मार्केटप्लेस की गतिविधियों से प्राप्त होने वाला कमीशन, प्रोजेक्ट की सार्वजनिक आवंटन नीति के तहत स्कॉलरशिप फंड में जमा किया जाएगा। यह नीति 2028 तक लागू रहेगी। खास बात यह है कि इस मार्केटप्लेस को बिना किसी अतिरिक्त परिचालन लागत के विस्तार (scale) करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिसका अर्थ है कि जैसे-जैसे प्लेटफॉर्म का उपयोग बढ़ेगा, स्कॉलरशिप की राशि भी उसी अनुपात में बढ़ती जाएगी। यह मार्केटप्लेस अब लाइव है और दुनिया भर में उपलब्ध है। शुरुआत में इसमें कंज्यूमर गुड्स, टेक्नोलॉजी, किताबें और शैक्षणिक सामग्री जैसी श्रेणियां शामिल की गई हैं।

परिचालन स्वतंत्रता (Operational Independence)

यह मार्केटप्लेस एक ‘क्यूरेटेड पोर्टल’ के रूप में कार्य करता है, जो छात्रों को टेक्नोलॉजी, शैक्षणिक संसाधनों और जीवनशैली से जुड़ी आवश्यक वस्तुओं के विविध इकोसिस्टम तक पहुंचने की अनुमति देता है। यद्यपि यह मार्केटप्लेस विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त ब्रांडों तक पहुंच प्रदान करता है, लेकिन यह व्यापक इकोसिस्टम से स्वतंत्र रूप से कार्य करता है। इसमें प्रदर्शित थर्ड-पार्टी रिटेल विक्रेताओं के साथ कोई औपचारिक विज्ञापन समझौता (endorsement) या संयुक्त उद्यम (joint venture) नहीं है।

मार्केटप्लेस में भाग लेना पूरी तरह से वैकल्पिक है, और प्लेटफॉर्म के अन्य हिस्सों का उपयोग करने के लिए कोई भी खरीदारी करना अनिवार्य नहीं है। कमर्शियल फंडिंग के अलावा, यह प्लेटफॉर्म ‘पीयर-टू-पीयर’ (P2P) स्कॉलरशिप योगदान का भी समर्थन करता है, जिससे कम्युनिटी के सदस्य सीधे किसी छात्र या स्कॉलरशिप पहल के लिए फंड दे सकते हैं।

शिक्षा तक पहुंच में मदद

आवंटित स्कॉलरशिप फंड का उपयोग पात्र छात्र शैक्षणिक सामग्री, जैसे कि किताबें आदि खरीदने के लिए कर सकते हैं, जो प्लेटफॉर्म के एफिलिएट मार्केटप्लेस के जरिए उपलब्ध थर्ड-पार्टी विक्रेताओं से ली जा सकेंगी।

प्रोजेक्ट के एक प्रतिनिधि ने कहा, “यह लॉन्च प्लेटफॉर्म की गतिविधियों को एक निश्चित सामाजिक उद्देश्य के साथ जोड़ने का एक सोचा-समझा प्रयास है। मार्केटप्लेस से मिलने वाले कमीशन को स्कॉलरशिप के लिए आवंटित करके और वैकल्पिक पीयर-टू-पीयर योगदान का समर्थन करके, हम प्लेटफॉर्म के माध्यम से शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई रास्ते तैयार कर रहे हैं।”

प्रोजेक्ट ने बताया कि स्कॉलरशिप की पात्रता, आवंटन प्रक्रियाओं और भविष्य के प्लेटफॉर्म विकास से संबंधित अतिरिक्त जानकारी आगामी घोषणाओं में साझा की जाएगी।

पीनटबटरजेली (PJELLY) के बारे में

पीनटबटरजेली (PJELLY) एक कम्युनिटी-संचालित डिजिटल पहल है जो सामाजिक प्रभाव के उद्देश्यों, जैसे शिक्षा तक पहुंच और भूखमरी राहत (hunger relief) से जुड़े प्रयासों पर केंद्रित है। यह प्रोजेक्ट स्वतंत्र रूप से संचालित होता है और स्टैंडर्ड एफिलिएट कार्यक्रमों के माध्यम से प्रदर्शित किसी भी थर्ड-पार्टी ब्रांड से संबद्ध या उनके द्वारा समर्थित नहीं है। पीनटबटरजेली, वेरिटास नेटवर्क होल्डिंग्स (Veritas Network Holdings) का एक ब्रांड और ट्रेडमार्क है।

महत्वपूर्ण सूचना: यह प्रेस विज्ञप्ति केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और यह कोई प्रस्ताव, आग्रह या निवेश की सिफारिश नहीं है।

भारत के लिए अस्वीकरण (DISCLAIMER FOR INDIA): “क्रिप्टो उत्पाद और एनएफटी (NFTs) अनियंत्रित हैं और अत्यधिक जोखिम भरे हो सकते हैं। ऐसे लेन-देन से होने वाले किसी भी नुकसान के लिए कोई विनियामक सहारा (regulatory recourse) उपलब्ध नहीं हो सकता है।”

मीडिया संपर्क: PeanutButterJelly Communications ईमेल: information@peanutbutterjelly.io

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स्रोत: वेरिटास नेटवर्क होल्डिंग्स

श्री सहर्ष बाजपाई ने पश्चिम रेलवे के प्रमुख मुख्य कार्मिक अधिकारी का पदभार ग्रहण किया

मुंबई। भारतीय रेल कार्मिक सेवा (IRPS) के 1999 बैच के वरिष्‍ठ अधिकारी श्री सहर्ष बाजपाई ने मंगलवार, 03 फ़रवरी 2026 को पश्चिम रेलवे के प्रमुख मुख्य कार्मिक अधिकारी का पदभार ग्रहण किया।

इससे पूर्व श्री बाजपाई भारतीय रेल में विभिन्न महत्वपूर्ण प्रशासनिक एवं कार्मिक संबंधी पदों पर कार्य कर चुके हैं। आपने उत्तर पूर्वोत्तर रेलवे, मध्य रेल तथा महाराष्ट्र मेट्रो में प्रमुख भूमिकाओं का निर्वहन किया है। आपके द्वारा संभाले गए उल्लेखनीय पदों में वरिष्ठ मंडल कार्मिक अधिकारी, पुणे; अध्यक्ष, रेलवे भर्ती प्रकोष्‍ठ, मध्य रेल; उप मुख्य कार्मिक अधिकारी; अतिरिक्त मंडल रेल प्रबंधक, पुणे; महा मेट्रो में महाप्रबंधक (मानव संसाधन); तथा मध्य रेल में प्रमुख मुख्य कार्मिक अधिकारी शामिल हैं।

श्री सहर्ष बाजपाई ने नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर से लोक प्रशासन में स्नातकोत्तर (MPA) की डिग्री प्राप्त की है। आपको मानव संसाधन प्रबंधन, कार्मिक प्रशासन तथा नीति निर्माण के क्षेत्र में व्यापक अनुभव प्राप्त है। अपने करियर के दौरान आप मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली (HRMS) को सुदृढ़ करने, कार्मिक प्रशासन में सुधार लाने तथा कर्मचारी-केंद्रित शासन पद्धतियों को बढ़ावा देने में सक्रिय रूप से जुड़े रहे हैं।

फील्ड इकाइयों एवं मुख्यालय स्तर पर आपके व्यापक अनुभव ने आपको कार्मिक प्रबंधन के प्रति संतुलित एवं व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने में सक्षम बनाया है। श्री बाजपाई ने INSEAD, सिंगापुर; ICLIF, मलेशिया; KOTI, दक्षिण कोरिया; तथा SWJTU, चीन जैसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भी भाग लिया है।

सोशल मीडिया कंपनियों का छलावा, आपके ही सवालों और जानकारियों को आपके खिलाफ प्रयोग करने का षड़यंत्र

यह संपादकीय लेख E295: इंजीनियरिंग लीडर्स के लिए संचार नामक श्रृंखला का हिस्सा है। इस पाठ्यक्रम में, इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री प्राप्त करने वाले छात्रों को एक ऐसे विषय को प्रस्तुत करने की चुनौती दी गई थी जो उन्हें रुचिकर लगे और जिसे तकनीकी और गैर-तकनीकी पाठकों के व्यापक समूह तक पहुँचाना था। यह एक राय का लेख है, इसलिए यहाँ व्यक्त किए गए विचार न तो यूसी बर्कले और न ही फंग इंस्टीट्यूट के हैं और न ही उनके द्वारा समर्थित हैं।

आपने आखिरी बार कब किसी ऐसे व्यक्ति से बात की थी जिसके राजनीतिक विचार आपसे भिन्न हों? क्या उन बातचीत में किसी ने भी विवादित “तथ्य” का ज़िक्र किया? क्या आपने अपने किसी परिचित को अपने राजनीतिक विचारों पर और अधिक दृढ़ होते देखा है?

ब्राउन विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्रियों द्वारा 2020 में किए गए एक अध्ययन के अनुसार , संयुक्त राज्य अमेरिका अन्य प्रमुख लोकतांत्रिक देशों की तुलना में अधिक तेज़ी से राजनीतिक रूप से ध्रुवीकृत हो रहा है। इसका एक कारण पिछले दशक में इंटरनेट और सोशल मीडिया का बढ़ता प्रभाव है। हाल के वर्षों में, सोशल मीडिया साइटें उपयोगकर्ताओं की भागीदारी और ऐप पर बिताए गए समय को बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किए गए अनुशंसा एल्गोरिदम का उपयोग करने लगी हैं। दुर्भाग्य से, इन एल्गोरिदम के कुछ दुष्प्रभावों में सूचनात्मक प्रतिध्वनि कक्ष, गलत सूचनाओं का प्रसार, या उपयोगकर्ताओं को अत्यधिक चरम, संभावित रूप से हानिकारक विचारधाराओं वाले समुदायों से परिचित कराना शामिल है। ये कारक पिछले दशक में मीडिया और सरकार के प्रति राष्ट्रीय अविश्वास में वृद्धि, घरेलू आतंकवाद में वृद्धि और अमेरिका के भीतर राजनीतिक ध्रुवीकरण में वृद्धि में योगदान करते हैं।

अधिकांश सोशल मीडिया साइटें आपके ब्राउज़िंग इतिहास से डेटा एकत्र करती हैं ताकि एल्गोरिदम के माध्यम से साइटों पर आपके अनुभव को अधिक व्यक्तिगत बनाया जा सके। वे अनुशंसा और पूर्वानुमान एल्गोरिदम का उपयोग करके उन पृष्ठों का सुझाव देते हैं जो आपको पसंद आ सकते हैं, यह इस आधार पर होता है कि क्या आप कोई विशिष्ट नेटफ्लिक्स शो देखते हैं, आप इंस्टाग्राम पर किसे फॉलो करते हैं, या आपने Google पर क्या खोजा है। हालांकि इस प्रकार के एल्गोरिदम उपयोगकर्ता अनुभव को अनुकूलित करने में मदद करते हैं, लेकिन इनके संचालन और आधुनिक सूचना उपभोग पर इनके प्रभावों को लेकर कई नैतिक बहसें हुई हैं।

प्यू रिसर्च सेंटर के एक लेख में , लेखक रेनी और एंडरसन ने इस बात पर गहराई से विचार किया है कि कैसे एल्गोरिदम ऐसे प्रतिध्वनि कक्ष बनाते हैं जिनके परिणामस्वरूप लोगों के बीच बड़े राजनीतिक विभाजन पैदा होते हैं, क्योंकि वे अलग-अलग राजनीतिक विचारों वाले लोगों से बातचीत करने में असमर्थ हो जाते हैं। लेखकों का कहना है कि इसका कारण यह है कि एल्गोरिदम “कॉर्पोरेट डेटा संग्राहकों द्वारा निर्मित फ़िल्टर बुलबुले और साइलो बनाते हैं; वे लोगों को विचारों और विश्वसनीय सूचनाओं की व्यापक श्रृंखला तक पहुँचने से रोकते हैं और आकस्मिक खोजों को समाप्त कर देते हैं।” हम न केवल एक राष्ट्र के रूप में राजनीतिक रूप से अधिक विभाजित हो रहे हैं, बल्कि कुछ लोग अपने विश्वासों में इतने कट्टरपंथी हो रहे हैं कि नफरत फैलाने वाले समूहों और घरेलू आतंकवाद में भाग लेने वाले लोगों की संख्या में वृद्धि हुई है, इस हद तक कि घरेलू आतंकवाद के शोधकर्ता और अनुभवी सुरक्षा अधिकारी भी बेहद चिंतित हो गए हैं ।

एल्गोरिदम कॉर्पोरेट डेटा संग्राहकों द्वारा आकार दिए गए फ़िल्टर बुलबुले और साइलो बनाते हैं; वे लोगों को विचारों और विश्वसनीय जानकारी की एक विस्तृत श्रृंखला के संपर्क में आने से रोकते हैं और आकस्मिक खोजों को समाप्त करते हैं।

TikTok ऐप पर किए गए एक हालिया अध्ययन से पता चला है कि कैसे कोई उपयोगकर्ता बहुत कम समय में और सीमित मात्रा में सामग्री के आधार पर कट्टरपंथी बन सकता है। इस अध्ययन का सबसे महत्वपूर्ण परिणाम ट्रांसफोबिक सामग्री के साथ जुड़ने का प्रभाव था। जब कोई उपयोगकर्ता केवल ट्रांसफोबिक सामग्री के साथ इंटरैक्ट करने लगा, तो TikTok एल्गोरिदम ने तेजी से दक्षिणपंथी वीडियो अनुशंसाओं की संख्या और विविधता बढ़ा दी। टीम ने अनुशंसा एल्गोरिदम के आधार पर होमपेज पर मौजूद “फॉर-यू पेज” में दिखाए गए लगभग 450 वीडियो का विश्लेषण किया। हालांकि उन्होंने केवल ट्रांसफोबिक सामग्री के साथ इंटरैक्ट किया, फिर भी उन्होंने पाया कि “फॉर-यू पेज” तेजी से स्त्री द्वेष, नस्लवाद, श्वेत वर्चस्ववादी विश्वास, यहूदी-विरोध, षड्यंत्र, घृणा के प्रतीक और अन्य आम तौर पर घृणित या हिंसक वीडियो से भर गया। इन TikTok वीडियो की औसत लंबाई 20 सेकंड है, जिसका अर्थ है कि 450 वीडियो देखने के बाद उपयोगकर्ता ने ऐप पर लगभग दो घंटे बिताए हैं। सैद्धांतिक रूप से, कोई उपयोगकर्ता तीन घंटे से भी कम समय में राजनीतिक रूप से कट्टरपंथी बन सकता है। विडंबना यह है कि ट्रांसफोबिक सामग्री को साइट पर प्रतिबंधित किया जाना चाहिए क्योंकि यह टिकटॉक के व्यवहार संबंधी दिशानिर्देशों का उल्लंघन करती है।

मेटा, जो न केवल अपने मूल नाम वाले ऐप फेसबुक बल्कि इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप और कई अन्य ऐप्स की भी मालिक कंपनी है, सोशल मीडिया के क्षेत्र में व्यापक पहुंच रखती है। पिछले पांच वर्षों में, मेटा को अपने एल्गोरिदम, गोपनीयता और उपभोक्ता डेटा के उपयोग से संबंधित कई अन्य आरोपों का सामना करना पड़ा है। 2016 के राष्ट्रपति चुनाव के समय के आसपास, मेटा (उस समय फेसबुक) ने एक अध्ययन किया जिसमें पाया गया कि उसके एल्गोरिदम चरमपंथी सामग्री के उपयोग में भारी वृद्धि के लिए जिम्मेदार थे। विशेष रूप से, अनुशंसा टूल के कारण सभी चरमपंथी समूहों में शामिल होने वालों में से 64% शामिल हुए। इनमें से अधिकांश चरमपंथी समूहों में शामिल होने वाले “ग्रुप्स यू शुड जॉइन” फीचर और “डिस्कवर” पेज के एल्गोरिदम का परिणाम थे। फेसबुक की अनुशंसा प्रणालियों और चरमपंथी समूहों में वृद्धि के बीच का संबंध हमारे वर्तमान राजनीतिक विभाजन के लिए एक गंभीर मुद्दा है।

अक्टूबर 2021 में, मेटा के कई कर्मचारियों ने मुखबिर बनकर कंपनी के भीतर मौजूद कई गंभीर नैतिक समस्याओं का खुलासा करने वाले आंतरिक दस्तावेज़ जारी किए। “द फेसबुक पेपर्स” के नाम से जाने जाने वाले इन दस्तावेज़ों से पता चलता है कि सोशल मीडिया की दिग्गज कंपनी अपने प्लेटफॉर्म और एल्गोरिदम के कारण उत्पन्न वैश्विक मुद्दों पर किस प्रकार बारीकी से नज़र रख रही थी। इसके अलावा, इन दस्तावेज़ों में इस बात का भी प्रमाण शामिल था कि चुनाव समाप्त होते ही कंपनी ने 2020 में गलत सूचनाओं के प्रसार को रोकने के लिए लागू किए गए उपायों को हटा दिया था। यह कंपनी अपने एल्गोरिदम की कार्यप्रणाली, डेटा माइनिंग की पहुंच और अपनी लापरवाही (चाहे अनजाने में हो या जानबूझकर) के प्रभाव से भली-भांति परिचित है, फिर भी वे इस तथ्य को शायद ही कभी स्वीकार करते हैं कि उनके प्लेटफॉर्म बड़ी मात्रा में गलत सूचनाओं के प्रसार को बढ़ावा देते हैं। इसके बजाय, वे समाज को लाभ पहुंचाने और कंपनी के लक्ष्यों को लाभ पहुंचाने के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करते हैं; अक्सर वे कंपनी के लक्ष्यों को ही चुनते हैं।

मैंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और वेबसाइटों पर चरमपंथी राजनीतिक विचारों और समूहों के पनपने और फैलने के तरीकों के बारे में बात की है, जिसका एक कारण उनके अनुशंसा और पूर्वानुमान एल्गोरिदम का डिज़ाइन है। इन प्लेटफॉर्मों को चलाने वाली कंपनियां अपनी जानबूझकर की गई लापरवाही के परिणामों से पूरी तरह अवगत हैं, फिर भी उन्होंने इन ऐप्स और एल्गोरिदम के डिज़ाइन में सुधार के लिए बहुत कम प्रयास किए हैं। चूंकि सोशल मीडिया रोजमर्रा की जिंदगी के कई पहलुओं से गहराई से जुड़ गया है, इसलिए सूचना के स्रोत के रूप में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों का उपयोग पूरी तरह से बंद करना लगभग असंभव होगा। इसके बजाय, इन कंपनियों द्वारा हमारे डेटा और इन साइटों पर प्रसारित होने वाली जानकारी को संभालने के तरीके के बारे में अधिक सार्वजनिक जागरूकता और पारदर्शिता होनी चाहिए, और जनता को नुकसान से बचाने के लिए अधिक कानून बनाए जाने चाहिए। इस बीच, उपयोगकर्ताओं को अपने व्यक्तिगत जीवन और समाज में सोशल मीडिया के कई संभावित खतरनाक प्रभावों के बारे में जागरूक होना चाहिए।

इन कंपनियों द्वारा हमारे डेटा को संभालने के तरीके, इन साइटों पर प्रसारित होने वाली जानकारी और जनता को नुकसान से बचाने के लिए और अधिक कानून बनाने के बारे में अधिक सार्वजनिक जागरूकता और पारदर्शिता होनी चाहिए।

साभार- https://funginstitute.berkeley.edu/ से

‘संघ के 100 वर्षों की यात्राः मुंबई में 7 व 8 फरवरी ‘नए क्षितिज’ कार्यक्रम में डॉ. मोहन भागवत संबोधित करेंगे

मुंबई: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख श्री सुनील आंबेकर ने पत्रकार वार्ता में “संघ की 100 वर्षों की यात्रा: नया क्षितिज” शीर्षक से होने वाले दो दिवसीय कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि आरएसएस के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में 7 और 8 फरवरी 2026 को नेहरू सेंटर ऑडिटोरियम, वर्ली, मुंबई में सरसंघचालक डॉ. मोहनजी भागवत जी की उपस्थिति में आयोजित किया जाएगा।

आरएसएस के शताब्दी वर्ष के अंतर्गत इससे पूर्व दिल्ली, बेंगलुरु और कोलकाता में इसी प्रकार की व्याख्यान श्रृंखलाएं सफलतापूर्वक आयोजित की जा चुकी हैं। मुंबई का यह कार्यक्रम देशव्यापी इस व्याख्यान श्रृंखला का समापन कार्यक्रम होगा। श्री आंबेकर ने बताया कि पूर्व आयोजनों में प्राप्त जनसहभागिता और प्रतिक्रिया अत्यंत उत्साहवर्धक रही है।

मुंबई कार्यक्रम में दो दिनों में कुल चार सत्र आयोजित किए जाएंगे। शुक्रवार, 7 फरवरी को दो सत्र अपराह्न 3:30 बजे से सायं 7:30 बजे तक होंगे, जबकि शनिवार, 8 फरवरी को दो सत्र प्रातः 9:30 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक आयोजित किए जाएंगे।

सरसंघचालक डॉ. मोहनजी भागवत जी मुख्य उद्बोधन देंगे। दूसरे दिन एक संवादात्मक प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित होगा, जिसमें आमंत्रित प्रतिभागियों द्वारा प्रस्तुत प्रश्नों एवं विचारों पर वे अपने विचार व्यक्त करेंगे।

श्री आंबेकर ने बताया कि संघ “पंच परिवर्तन” की अवधारणा पर विशेष बल दे रहा है— परिवार प्रबोधन, सामाजिक समरसता, नागरिक शिष्टाचार, स्वबोध तथा पर्यावरण संरक्षण। उन्होंने बताया कि परम पूजनीय सरसंघचालक जी इन पांच आयामों पर विस्तार से प्रकाश डालेंगे तथा राष्ट्रीय और सामाजिक महत्व के समसामयिक विषयों पर भी अपने विचार साझा करेंगे।

उन्होंने बताया कि संघ शताब्दी वर्ष के अंतर्गत दिल्ली, बेंगलुरु और कोलकाता में इसी प्रकार की व्याख्यानमालाएं पहले ही आयोजित हो चुकी हैं, और मुंबई में होने वाली यह व्याख्यानमाला इस श्रृंखला की अंतिम कड़ी होगी। पिछली सभी व्याख्यानमालाओं को मिला गया प्रतिसाद अत्यंत उत्साहवर्धक रहा है। वरळी स्थित नेहरू सेंटर सभागार में ७ और ८ फरवरी को कुल ४ सत्रों का आयोजन किया गया है। पहले दिन दोपहर ३:३० से शाम ७:३० बजे तक २ सत्र होंगे, जबकि दूसरे दिन सुबह ९:३० से दोपहर १:३० बजे तक २ सत्र आयोजित होंगे। पहले दिन परम पूज्यनीय सरसंघचालक का उद्बोधन होगा, जबकि दूसरे दिन प्रश्नोत्तर सत्र होगा। इस सत्र में परम पूज्यनीय सरसंघचालक उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों की शंकाओं का निरसन करेंगे।

अपने उद्बोधन में परम पूज्यनीय सरसंघचालक विशेष रूप से पंच परिवर्तन की अवधारणा पर प्रकाश डालेंगे। साथ ही स्थानीय स्तर पर स्वयंसेवकों द्वारा किए जा रहे कार्य को भी उपस्थित जनों के समक्ष प्रस्तुत करेंगे।

निमंत्रित व्यक्तियों को कुल १० श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है, जिसमें अर्थव्यवस्था, न्यायपालिका, प्रशासन, कला, खेल, धर्म, राजनीति, कॉर्पोरेट क्षेत्र, सिनेमा तथा अन्य क्षेत्रों के गणमान्य व्यक्ति शामिल होंगे। इस कार्यक्रम की तैयारियां पिछले चार महीनों से चल रही हैं। मुंबई और आसपास के क्षेत्रों से लगभग १२०० गणमान्य व्यक्तियों को निमंत्रित किया गया है, जिनमें से ८०० से ९०० के बीच उपस्थित रहने की संभावना है।

श्री सुनीलजी आंबेकर ने मुंबई में ९० वर्ष पहले शुरू हुए संघ कार्य की यात्रा का संक्षिप्त परिचय दिया। साथ ही देशव्यापी चल रहे गृह संपर्क अभियान की जानकारी भी दी। महाराष्ट्र में अक्टूबर माह से गृह संपर्क अभियान प्रारंभ हुआ है। इसी प्रकार मंडल स्तर पर हिंदू सम्मेलनों तथा सामाजिक सद्भाव बैठकों का आयोजन किया जा रहा है।

पत्रकार वार्ता में कोंकण प्रांत के संघचालक श्री अर्जुन चांदेकर भी उपस्थित थे।

विस्तृत जानकारी के लिए संपर्क करें:

आकाशजी शाह: +९१ ९७७३६ १६२७७
संदीपजी पाटील: +९१ ९७४३२ ३२६१३

यह विकासमुखी बजट हैः डॉ. अश्वनी महाजन

स्वदेशी जागरण मंच, 1 फरवरी, 2026 को वित्त मंत्री द्वारा पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026-27 का स्वागत करता है। इसमें कोई शक नहीं है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के टैरिफ की वजह से वैश्विक चुनौतियों और अनिश्चित वैश्विक बाज़ार के बावजूद; और बड़ी आर्थिक ताकतों द्वारा ज़रूरी मिनरल, सेमीकंडक्टर और कई दूसरी चीज़ों की सप्लाई सहित ग्लोबल वैल्यू चेन को हथियार बनाने की कोशिशों के बावजूद, भारतीय अर्थव्यवस्था काफी अच्छी हालत में है, और लगातार चौथे साल दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था बन गई है। गिरता रुपया, लगातार व्यापार और भुगतान शेष घाटा, और बढ़ते सार्वजनिक निवेश के साथ निजी निवेश बढ़ने की संभावना के बारे में अनिश्चितता ने वित्त मंत्री के लिए कई चिंताएँ खड़ी कीं हैं, जिनमें से कुछ को आर्थिक सर्वेक्षण में भी बताया गया है। ऐसा लगता है कि बजट में नीति की बड़ी दिशा साफ़ है, कि भारत न सिर्फ़ खुद को वैश्विक उथल-पुथल से बचाने की कोशिश करेगा, बल्कि मैन्युफैक्चरिंग को मज़बूत करके अर्थव्यवस्था को आगे भी ले जाएगा, सिर्फ़ मज़बूती के लिए नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक अहम खिलाड़ी बनने के लिए भी।

सेमीकंडक्टर, रेयर अर्थ मटीरियल, इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट, केमिकल और कैपिटल गुड्स समेत सात रणनीतिक क्षेत्रों को समर्थन और मज़बूत करने के बजट प्रस्ताव एक अच्छा कदम है, जिसका मकसद आत्मनिर्भर भारत बनाना है। लंबे समय से, भारत इन सामानों की सप्लाई के लिए दूसरे देशों, खासकर चीन पर निर्भर रहा है। बजट में इस मुद्दे को सुलझाने की कोशिश की गई है, और इन क्षेत्रों में उत्पादन बढ़ाने की रणनीति बनाई गई है। इससे न सिर्फ़ चीन पर हमारी निर्भरता कम होगी, बल्कि अर्थव्यवस्था को बड़ी ताकतों द्वारा शोषण से भी बचाया जा सकेगा, जो ग्लोबल वैल्यू चेन को हथियार बनाने की कोशिश कर रही हैं। सिर्फ़ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया रेयर अर्थ मटीरियल की आपूर्ति को लेकर चीन के नखरे झेल रही है। ऐसा नहीं है कि भारत में रेयर अर्थ मटीरियल की कमी है, बल्कि हमारे पास इन ज़रूरी मिनरल के खनन, प्रसंस्करण और मैन्युफैक्चरिंग में क्षमता की कमी है। बजट में ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे खनिजों के धनी राज्यों में डेडिकेटेड रेयर अर्थ कॉरिडोर बनाने और उनकी खनन, प्रसंस्करण, रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने में मदद का प्रावधान एक अच्छा कदम है।

देश में कंटेनरों की भारी कमी और चीन पर भारी निर्भरता को देखते हुए, बड़े बजट के साथ दुनिया भर में मुकाबला करने वाला कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम बनाने की घोषणा एक बड़ा कदम है।

मैन्युफैक्चरिंग को एक और बड़ा बढ़ावा बायो-फार्मास्युटिकल्स में मिला है। यह ध्यान देने वाली बात है कि बायोफार्मास्युटिकल्स, जिसमें बायोसिमिलर भी शामिल हैं, कैंसर, डायबिटीज, हाइपरटेंशन, किडनी की बीमारी और कई दूसरी नॉन-कम्युनिकेबल बीमारियों (एनसीडी) के इलाज में क्रांति ला सकते हैं, जिससे न केवल बीमारी का बोझ कम हो सकता है, बल्कि स्वास्थ्य पर होने वाला खर्च भी काफी कम हो सकता है।

श्रम प्रधान टेक्सटाइल सेक्टर के लिए एक व्यापक प्लान बजट में एक बड़ा कदम है। इसके अलावा, ‘महात्मा गांधी ग्राम स्वराज’ पहल की शुरुआत से खादी और हैंडलूम को मजबूती मिलेगी। इसके अलावा, सूक्ष्म लघु लघु और मध्यम उद्यमों(एमएसएमई ) को समर्थन करने के लिए 10,000 रुपये का आवंटन भी एक स्वागत योग्य कदम है।

बजट में पूंजीगत ख़र्च (कैपेक्स) को बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव है, जिसमें प्रभावी कैपेक्स जीडीपी का 4.4 प्रतिशत होगा, जो न सिर्फ अब तक का सबसे ज़्यादा है, बल्कि राजकोषीय घाटे से भी ज़्यादा है। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ, और हम कह सकते हैं कि सरकार उपभोग के लिए नहीं, बल्कि असल में इंफ्रास्ट्रक्चर और दूसरी पूंजीगत परिसंपत्तियाँ बनाने के लिए उधार ले रही है।

नए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और 20 नए अब राष्ट्रीय जलमार्ग हमारे इंफ्रास्ट्रक्चर को काफी बढ़ावा दे सकते हैं।

प्रस्तावों का एक और ज़रूरी हिस्सा विकसित भारत के लिए पेशेवर तैयार करना है। स्वास्थ्य क्षेत्र में, अगले पांच सालों में 100,000 सहायक स्वास्थ्य पेशेवर, 1.5 लाख केयरगिवर्स, और 20,000 वेटेरिनरी पेशेवरों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। ये कुछ ऐसी पहलें हैं, जो कौशल के अंतराल को दूर करने के लिए ज़रूरी हैं, और हमारे युवाओं की रोज़गार प्राप्त करने की क्षमता को बेहतर बनाने में बहुत मदद कर सकती हैं।

किसानों की आमदनी बढ़ाने के मकसद से, बजट में मत्स्ययन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए 500 जलाशयों और अमृत सरोवरों का एकीकृत विकास, तटीय इलाकों में फिशरीज़ वैल्यू चेन को मज़बूत करना, स्टार्टअप्स और महिला ग्रुप्स को फिश फार्मर्स प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन्स (एफपीओ) से जोड़ना, क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी प्रोग्राम लागू करना, और लाइवस्टॉक फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन्स जैसे उद्यमिता विकास कार्यक्रमों के माध्यम से पशुपालन क्षेत्र को समर्थन करना शामिल है। लाइवस्टॉक उद्यमों को आधुनिक बनाने और डेयरी और पोल्ट्री के लिए एकीकृत मूल्य शृंखला विकसित करने की भी योजना है।

इसके अलावा, तटीय इलाकों में नारियल, चंदन, कोको और काजू जैसी फसलों के साथ उच्च मूल्य कृषि को बढ़ावा दिया जाएगा। पहाड़ी इलाकों में बादाम, अखरोट और पाइन नट्स जैसे उत्पाद भी गांव की आमदनी बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

हमने देखा है कि 7.4 प्रतिशत की ग्रोथ रेट, 2 प्रतिशत से कम महंगाई और लगातार घटता राजकोषीय घाटा, यह दिखाता है कि अर्थव्यवस्था काफ़ी मज़बूत स्थिति में है। हालांकि, गिरता रुपया, वैश्विक उथल-पुथल, टैरिफ और वैल्यू चेन के हथियार बनने जैसी चुनौतियाँ बनी हुई हैं, जिन्हें केंद्रीय बजट 2026-27 में सुलझाने की कोशिश की गई है। बजट में राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 4.4 प्रतिशत (संशोधित अनुमान) से घटाकर 4.3 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। इससे महंगाई को नियंत्रण में रहने का एक और कारण मिलता है।

कुल मिलाकर, यह बजट मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और रोज़गार में बढ़ोतरी को बढ़ावा देता हुआ, कौशल अंतराल को भरता हुआ लगता है। यह गांवों और किसानों को मज़बूत बनाते हुए महंगाई को कंट्रोल करने और उच्च मूल्य कृषि और खाद्य प्रसंस्करण के ज़रिए आमदनी बढ़ाने की भी कोशिश करता है।

डॉ अश्वनी महाजन
राष्ट्रीय सह संयोजक
स्वदेशी जागरण मंच
धर्मक्षेत्र, सेक्टर-8, आर.के.पुरम,
नई दिल्ली।
वेब: www.swadeshionline.in