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श्री हरि शंकर वर्मा ने रेलवे बोर्ड के सदस्य (ऑपरेशंस एवं व्यवसाय विकास) का कार्यभार संभाला

श्री हरि शंकर वर्मा, 1987 बैच के आईआरटीएस अधिकारी, ने रेलवे बोर्ड के सदस्य (ऑपरेशंस एवं व्यवसाय विकास) और भारत सरकार के पदेन सचिव का पदभार संभाल लिया है। इस पद को संभालने से पहले वे रेलवे बोर्ड में महानिदेशक (सुरक्षा) के रूप में कार्यरत थे।

अपने शानदार करियर के दौरान श्री वर्मा ने भारतीय रेलवे में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया है, जिनमें शामिल हैं : अपर मंडल रेलवे प्रबंधक, मध्य रेलवे, मुंबई; मंडल रेलवे प्रबंधक, सलेम डिविजन, दक्षिण रेलवे; मुख्य यात्री यातायात प्रबंधक, मध्य रेलवे, मुंबई; प्रधान मुख्य ऑपरेशंस मैनेजर, हुबली, दक्षिण-पश्चिम रेलवे और महानिदेशक, भारतीय रेलवे परिवहन प्रबंधन संस्थान, लखनऊ। इन सभी पदों पर रहते हुए श्री वर्मा ने कई रिकॉर्ड/उपलब्धियां हासिल कीं।

भारतीय रेलवे के महानिदेशक (सुरक्षा) के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान भारतीय रेलवे के सुरक्षा रिकॉर्ड को नई ऊंचाइयों पर ले जाया गया। प्रक्रिया सुधार पर ध्यान केंद्रित करने के साथ ही बड़ी दुर्घटनाओं की संख्या में भारी कमी आई है।

श्री वर्मा को दो बार माननीय रेल मंत्री पुरस्कार और महाप्रबंधक स्तर पर कई पुरस्कार मिले हैं। उन्होंने सिंगापुर, मलेशिया और इटली से प्रबंधन का प्रशिक्षण प्राप्त किया है और उन्हें रेलवे यातायात एवं प्रबंधन के विशेषज्ञ के रूप में जाना जाता है।

वर्ष 2026-2027 के केंद्रीय बजट की मुख्‍य बातें

भाग – 1

केंद्रीय वित्‍त और कॉर्पोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारामन ने आज संसद में वर्ष 2026-27 के लिए केंद्रीय बजट प्रस्‍तुत किया। बजट की मुख्‍य बातें इस प्रकार हैं:-

कर्तव्‍य भवन में तैयार किया गया पहला बजट तीन कर्तव्‍यों से प्रेरित है:-

  1. पहला कर्तव्‍य – उत्‍पादकता और प्रतिस्‍पर्धा बढ़ाने  तथा वैश्विक उथल-पुथल के परिदृश्‍य में लचीलापन लाकर आर्थिक विकास को तेज करना और उसकी गति बनाए रखना
  2. दूसरा कर्तव्‍य- भारत की समृद्धि के पथ में सशक्‍त साझेदार बनाने के लिए लोगों की आकांक्षाएं पूरी करना और उनकी क्षमता बढ़ाना।
  3. तीसरा कर्तव्‍य – सरकार की सबका साथ, सबका विकास के दृष्टिकोण के अनुकूल- यह सुनिश्चित करना कि सार्थक भागीदारी के लिए प्रत्‍येक परिवार, समुदाय और क्षेत्र की संसाधनों, सुविधाओं और अवसरों तक पहुंच उपलब्‍ध हो।
  4. बजट अनुमान
  5. गैर ऋण प्राप्तियां  और कुल व्‍यय क्रमश: 36.5 लाख करोड और 53.5 लाख करोड रुपए रहने का अनुमान है। केंद्र की शुद्ध कर प्राप्तियां 28.7 लाख करोड रुपए रहने का अनुमान है।
  6. सकल बाजार उधारी 17.2 लाख करोड रुपए और दिनांकित प्रतिभूतियों से शुद्ध बाजार उधारी 11.7 लाख करोड रुपए रहने का अनुमान है।
  • गैर ऋण प्राप्तियों का संशोधित अनुमान 34 लाख करोड रुपए है जिसमें से केंद्र की शुद्ध कर प्राप्तियाँ 26.7 लाख करोड रुपए हैं।
  • कुल व्‍यय का संशोधित अनुमान 49.6 लाख करोड रुपए है जिसका पूंजी व्‍यय करीब 26.1 लाख करोड रुपए है।
  1. बजट अनुमान 2026-27 में राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
  2. वर्ष 2025-26  के बजट में संशोधित राजकोषीय घाटा 2025-26 के बजट अनुमान जीडीपी के 4.4 प्रतिशत के समान है।
  3. ऋण से जीडीपी अनुपात संशोधित अनुमान 2025-26 में जीडीपी के 56.1 प्रतिशत की तुलना में बजट अनुमान 2026-27 में जीडीपी का 55.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
  4. पहला कर्तव्‍य– आर्थिक विकास को तेज करना और बनाए रखना तथा छह हस्‍तक्षेपों का प्रस्‍ताव है
  • सात रणनीतिक और फ्रंटि‍यर क्षेत्रों में विनिर्माण
  1. बायोफार्मा शक्ति (ज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के जरिए स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल को बेहतर करने की रणनीति) की घोषणा। भारत को वैश्विक बायोफार्मा विनिर्माण केन्‍द्र के रूप में विकसित करने के उद्देश्‍य से अगले पांच वर्ष के लिए दस हजार करोड़ रुपये के आवंटन के साथ बायोफार्मा शक्ति का प्रस्‍ताव।
  • तीन नए राष्‍ट्रीय फार्मास्‍युटिकल शिक्षा और अनुसंधान संस्‍थानों (एन.आई.पी.ई.आर.) के निर्माण तथा सात मौजूदा संस्‍थानों के उन्‍नयन के लिए बायोफार्मा केन्द्रित नेटवर्क।
  • एक हजार से अधिक मान्‍यता प्राप्‍त इंडिया क्लिनिकल ट्रायल्‍स स्‍थलों का नेटवर्क बनाया जाएगा।
  1. उपकरण और सामग्री बनाने, फुलस्‍टेक इंडिया आई.पी. डिजाइन करने और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने के लिए इंडिया सेमीकंडक्‍टर मिशन 2.0 शुरू किया जाएगा।
  2. अप्रैल 2025 में आरंभ इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स कलपुर्जे विनिर्माण योजना को गति देने के लिए बजट बढ़ाकर चालीस हजार करोड़ रुपये करने का प्रस्‍ताव।
  3. खनन, प्रसंस्‍करण, अनुसंधान और विनिर्माण को प्रोत्‍साहन देने के लिए समर्पित दुर्लभ धातु गलियारों की स्‍थापना के उद्देश्‍य से खनिज समृद्ध ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु को सहायता देने का प्रस्‍ताव।
  4. घरेलू रसायन उत्‍पादन बढ़ाने और आयात पर निर्भरता घटाने के लिए कलस्‍टर आधारित बनाओ और चलाओ मॉडल के आधार पर तीन समर्पित कैमिकल पार्क स्‍थापित करने की योजना लाई जाएगी।
  5. पूंजी सामान क्षमता मजबूत करना
  6.  
  • डिजिटल रूप से सक्षम ऑटोमेटेड सर्विस ब्‍यूरो के रूप में दो स्‍थानों सी.पी.एस.ई. द्वारा हाईटेक टूल रूप स्‍थापित किए जाएंगे, जो उच्‍च गुणवत्‍ता के कलपुर्जों का बड़े पैमाने पर और कम लागत से स्‍थानीय स्‍तर पर डिजाइन, परीक्षण और विनिर्माण करेंगे।
  • उच्‍च मूल्‍य और प्रौद्योगिकी के लिहाज से उन्‍नत सी.आई.ई. के घरेलू विनिर्माण को मजबूत करने के लिए निर्माण संवर्धन और अवसंरचना उपकरण योजना(सी.आई.ई.) शुरू की जाएगी।
  • पांच वर्ष की अवधि में दस हजार करोड़ रुपये के बजट आवंटन के साथ कंटेनर विनिर्माण योजना लाने प्रस्‍ताव।
  1. वस्त्र क्षेत्र के लिए एकीकृत कार्यक्रम की घोषणा
  1. रेशम, ऊन और जूट जैसे प्राकृतिक फाइबर, मानवनिर्मित फाइबर और नए जमाने के फाइबर में आत्‍मनिर्भरता के लिए राष्‍ट्रीय फाइबर योजना।
  2. मशीनरी, प्रौद्योगिकी उन्‍नयन और साझा परीक्षण तथा प्रमाणन केन्‍द्रों के लिए पूंजी सहायता के साथ आधुनिक पारंपरिक क्‍लस्‍टरों के लिए वस्‍त्र विस्‍तार और रोजगार योजना।
  1. चैलेंज मोड में मेगा टेक्‍सटाइल पार्क स्‍थापित करने का प्रस्‍ताव
  2. खादी, हथकरघा और हस्‍तशिल्‍प की मजबूती के लिए महात्‍मा गांधी ग्राम स्‍वराज पहल शुरू करने का प्रस्‍ताव। इससे देश के बुनकरों, ग्राम उद्योगों, एक जिला-एक उत्‍पाद पहल और ग्रामीण युवाओं को लाभ होगा।
  3. इससे वैश्विक बाजार संपर्क, ब्रांडिंग करने में मदद मिलेगी और प्रशिक्षण, कौशल, गुणवत्‍ता और उत्‍पादन को समर्थन मिलेगा।

 

  1. लीगेसी औद्योगिक समूहों के पुनरुद्धार की योजना
  • अवसंरचना और प्रौद्योगिकी उन्‍नयन के जरिए लागत स्‍पर्धा और दक्षता में सुधार के लिए दो सौ लीगेसी औद्योगिक समूहों के पुनरुद्धार की योजना लाने का प्रस्‍ताव।
  1. चैंपियन एस.एम.ई. बनाना और सूक्ष्‍म उद्यमियों को समर्थन
  • एम.एस.एम.ई. को चैंपियनों के रूप में विकास करने में सहायता के लिए त्रिस्‍तरीय दृष्टिकोण- दस हजार करोड़ रुपये के आवंटन के साथ एस.एम.ई. ग्रोथ फंड शुरू करने का प्रस्‍ताव।
  • दो हजार करोड़ रुपये के आवंटन के साथ वर्ष 2021 में बनाए गए आत्‍मनिर्भर भारत फंड को समर्थन जारी रहेगा।
  • विशेष रूप से टीयर टू और टीयर थ्री शहरों में कॉर्पोरेट मित्र कार्डर विकसित करने के लिए आई.सी.ए.आई., आई.सी.एस.आई, आई.सी.एम.ए.आई. जैसे व्‍यवसायिक शिक्षा संस्‍थानों को सुविधा उपलब्‍ध कराई जाएगी।
  1. अवसंरचना को ठोस प्रोत्‍साहन
  • वित्‍त वर्ष 2026-27 में सार्वजनिक पूंजी व्‍यय बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये किया जाएगा।
  • ऋणदाताओं को आंशिक ऋण गारंटी उपलब्‍ध कराने के लिए अवसंरचना जोखिम गारंटी फंड स्‍थापित करने का प्रस्‍ताव।
  • समर्पित आर.ई.आई.टी. स्थापित करने के जरिए सी.पी.एस.ई. की महत्‍वपूर्ण रियल एस्‍टेट परिसंपत्तियों के पुनर्चक्रण की प्रक्रिया तेज करने का प्रस्‍ताव।
  • पूर्वी भारत में डानकूनी से पश्चिमी भारत के सूरत को जोड़ने के लिए नए समर्पित माल गलियारे बनाए जाएंगे।
  • जलचर और अंगुल जैसे खनिज समृद्ध और कलिंग नगर जैसे औद्योगिक केंद्रों को जोडने के लिए ओडिशा में एनडब्‍ल्‍यू-5 से शुरुआत के साथ अगले पांच वर्ष में 20 नए राष्‍ट्रीय जलमार्ग चालू किए जाएंगे।
  • अपेक्षित श्रम शक्ति के विकास के लिए क्षेत्रीय उत्‍कृष्‍टता केंद्रों के रूप में प्रशिक्षण संस्‍थान स्‍थापित किए जाएंगे।
  1. इनलैंड जलमार्गों और तटीय पोत परिहवन की हिस्‍सेदारी 6 प्रतिशत से बढाकर वर्ष 2047 तक 12 प्रतिशत करने के लिए तटीय कार्गो प्रोमोशन स्‍कीम आरंभ की जाएगी।
  • सी-प्‍लेन के स्‍वदेशी निर्माण के लिए प्रोत्‍साहन दिया जाएगा और लास्‍ट माइल तथा दूरदराज क्षेत्रों तक संपर्क बढ़ाया जाएगा और पर्यटन को प्रोत्‍साहन दिया जाएगा।
  • संचालन को समर्थन उपलब्‍ध कराने के लिए सी-प्‍लेन वी.जी.एफ. स्‍कीम शुरू की जाएगी।
  1.  
  2. दीर्घावधि ऊर्जा सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्‍चत करना।
  • कार्बन टैक्‍चर उपयोग और भंडारण (सी.सी.यू.एस.) प्रौद्योगिकियों के लिए अगले पांच वर्ष की अवधि के लिए 20 हजार करोड़ रुपये आवंटित करने की घोषणा।
  1. शहर आर्थिक क्षेत्रों का विकास
  • शहर आर्थिक क्षेत्र (सी.ई.आर.) के लिए पांच वर्षों की अवधि‍ के लिए पांच हजार करोड़ रुपये के आवंटन की घोषणा।
  • पर्यावरण अनुकूल टिकाउ यात्री प्रणाली को प्रोत्‍साहन देने के लिए मुम्‍बई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-बैंगलुरू, हैदराबाद-चेन्‍नई, चेन्‍नई-बैंगलुरू, दिल्‍ली-वाराणसी, वाराणसी-सिलिगुडी़ के बीच सात हाई स्‍पीड रेल कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे।
  • वित्‍तीय स्‍थि‍रता, समावेश और उपभोक्‍ता सुरक्षा के उपाय करते हुए भारत की आर्थिक वृद्धि के अगले चरण के साथ कदम-ताल मिलाते हुए बैंकिंग क्षेत्र की व्‍यापक समीक्षा के उद्देश्‍य से ‘’विकसित भारत के लिए बैंकिंग’’ पर उच्‍च-स्‍तरीय समिति गठित करने का प्रस्‍ताव।
  • पॉवर फाइनेंस कॉर्पोरेशन और ग्रामीण विद्युतीकरण निगम के पुनर्गठन का प्रस्‍ताव।
  • भारत की उभरती आर्थिक प्राथमिकताओं के अनुसार विदेशी निवेश के लिए अधिक समकालीन और उपयोक्‍ता अनुकूल रूपरेखा के लिए विदेश मुद्रा प्रबंधन (गैर-ऋण लिखत) नियमावली की व्‍यापक समीक्षा का प्रस्‍ताव।
  • बड़े शहरों द्वारा उच्‍च मूल्‍य के म्‍यूनिसिपल बॉण्‍ड जारी करने को प्रोत्‍साहन करने के लिए एक हजार करोड़ रुपये से अधिक का सिंगल बॉण्‍ड जारी करने पर सौ करोड़ रुपये का प्रोत्‍साहन देने का प्रस्‍ताव।
  1.  
  2. दूसरा कर्तव्‍य- लोगों की आकांक्षाएं पूरी करना और क्षमता बढ़ाना
  • विकसित भारत के मुख्य संचालक के रूप में सेवा क्षेत्र पर ध्‍यान केन्द्रित करने के लिए उपायों की सिफारिश करने हेतु उच्‍चाधिकार प्राप्‍त ‘शिक्षा से रोजगार एवं उद्यम’ स्‍थायी समिति के गठन का प्रस्‍ताव। यह फैसला भारत को वर्ष 2047 तक दस प्रतिशत की वैश्विक हिस्‍सेदारी के साथ अग्रणी बनाएगा।
  1. विकसित भारत के लिए पेशेवर लोग तैयार करने
  • संबद्ध स्‍वास्‍थ्‍य सेवा पेशवरों (ए.एच.पी.) के लिए मौजूदा संस्‍थानों का उन्‍नयन किया जाएगा  और निजी तथा सरकारी क्षेत्रों में नए ए.एच.पी. संस्‍थानों की स्‍थापना की जाएगी।
  • अगले पांच वर्ष में एक लाख ए.एच.पी. जोड़े जाएंगे।
  • वृद्धों की चिकित्‍सा और संबद्ध देखभाल सेवाओं को शामिल करते हुए मजबूत देखभाल सेवा परिवेश बनाया जाएगा। अगले कुछ वर्षों में डेढ़ लाख देखभाल सेवा प्रदाताओं को प्रशिक्षित किया जाएगा।
  1. आयुष
  2. तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्‍थान स्‍थापित किए जाएंगे
  • प्रमाणन परिवेश के उच्‍च मानकों के लिए आयुष फार्मेसी और औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं का उन्‍नयन करने तथा अधिक कुशल कार्मिक उपलब्‍ध कराने और पारंपरिक दवाओं के लिए साक्ष्‍य आधारित अनुसंधान, प्रशिक्षण और जागरुकता को बढ़ावा देने के लिए जामनगर में डब्‍ल्‍यू.एच.ओ. वैश्विक पारंपरिक चिकित्‍सा केन्‍द्र के उन्‍नयन का प्रस्‍ताव।
  1. पशुपालन
  • सरकार 20 हजार से अधिक पशु डॉक्‍टरों की उपलब्‍धता करेगी।
  • नि‍जी क्षेत्र में पशु रोग विशेषज्ञ और पैरा पशु शल्‍य महाविद्यालय, पशु अस्‍पताल, नैदानिक प्रयोगशालाओं और प्रजनन सुविधाओं के लिए ऋण संबद्ध पूंजी सब्सिडी सहायता योजना शुरू करने का प्रस्‍ताव।
  1. ऑरेंज इकोनॉमी
  • इंडियन इंस्‍टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्‍नोलॉजी, मुम्‍बई को 15 हजार माध्‍यमिक विद्यालयों और पांच सौ महाविद्यालयों में ए.वी.जी.सी. कंटेंट क्रिएटर लैब (सी.सी.एल.) स्‍थापित करने में सहायता प्रदान करने का प्रस्‍ताव।
  1. शिक्षा
  • सरकार बड़े औद्योगिक और लॉजिस्टिक कॉरीडोर के आसपास चुनौती मार्ग के माध्‍यम से पांच विश्‍वविद्यालय टाउनशिप का ‍निर्माण करने में राज्‍यों की सहायता करेगी।
  • वी.जी.एफ./पूंजीगत सहायता के माध्‍यम से प्रत्‍येक जिले में एक महिला छात्रावास की स्‍थापना की जाएगी।
  1. पर्यटन
  • मौजूदा राष्‍ट्रीय होटल प्रबंधन और केटरिंग प्रौद्योगिकी परिषद का उन्‍नयन करते हुए राष्‍ट्रीय आतिथ्‍य संस्‍थान की स्‍थापना का प्रस्‍ताव।
  • आई.आई.एम. के सहयोग से हाईब्रिड मोड में मानकीकृत, उच्‍च गुणवत्‍ता वाले 12 सप्‍ताह के प्रशिक्षण पाठ्यक्रम के जरिए 20 पर्यटन स्‍थलों में 10 हजार गाइडों के कौशल उन्‍नयन के लिए प्रायोगिक योजना शुरू की जाएगी।
  • सांस्कृतिक, आध्‍यात्मिक और विरासत महत्‍व वाले सभी स्‍थानों के डिजिटल दस्‍तावेज तैयार करने के लिए नेशनल डेस्टिनेशन डिजिटल नॉलेज ग्रिड की स्‍थापना की जाएगी।
  1.  
  2.  
  3.  
  4. विरासत और संस्‍कृति पर्यटन
  • लोथल, धौलावीरा, राखीगढ़ी, अदिचनाल्‍लूर, सारनाथ, हस्तिनापुर और लेह पैलेस जैसे 15 पुरातात्विक स्‍थलों को जीवंत और अनुभवजन्‍य सांस्‍कृतिक गंतव्‍य के रूप में विकसित करने का प्रस्‍ताव।
  1. खेल
  • अगले दशक में खेल-कूद के क्षेत्र में बदलाव लाने के लिए खेलो इंडिया मिशन शुरू करने का प्रस्‍ताव।
  1. तीसरा कर्तव्‍य- सबका साथ- सबका विकास के दृष्टिकोण के अनुरूप है और इसके लिए निम्‍नलिखित चार क्षेत्रों में लक्षित प्रयास करने की आवश्‍यकता है:-
  2. किसानों की आय बढ़ाना
  • किसानों की आय बढ़ाने के लिए मत्‍स्‍य पालन, पांच सौ जलाशयों और अमृत सरोवरों के एकीकृत विकास, पशुपालन,  उच्‍च मूल्‍य वाली कृषि को प्रोत्‍साहन दिया जाएगा।
  1. उच्‍च मूल्‍य कृषि
  2. सरकार उच्‍च मूल्‍य वाली फसलों की खेती समर्थन देगी जैसे:-
  • तटवर्ती इलाकों में नारियल, चंदन, कोको, काजू जैसे उच्‍च मूल्‍य वाली फसलों को सहायता प्रदान की जाएगी।
  • नारियल उत्‍पादन में प्रतिस्‍पर्धा बढ़ाने के लिए नारियल संवर्धन योजना का प्रस्‍ताव।
  • पूर्वोत्‍तर में अगर के पेड़ों और पर्वतीय क्षेत्रो में बादाम, अखरोट और खुमानी जैसे गिरीदार फलों को प्रोत्‍साहन दिया जाएगा।
  • वर्ष 2030 तक भारतीय काजू और कोको को प्रीमियम वैश्विक ब्रांड के रूप में बदलने के लिए, भारतीय काजू और कोको के लिए समर्पित कार्यक्रम का प्रस्‍ताव।
  1. भारत-विस्‍तार
  • केन्‍द्रीय बजट में भारत-विस्‍तार का प्रस्‍ताव, जो बहुभाषीय ए.आई. टूल है और जिसे ए.आई. प्रणाली सहित कृषि संबंधी प्रणालियों के लिए, आई.सी.ए.आर. पैकेज सहित एग्रीस्‍टैक पोर्टल के रूप में एकीकृत किया गया है।
  1. मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य और ट्रॉमा केयर के लिए प्रतिबद्धता
  • उत्‍तर भारत में मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य के लिए निमहंस-टू की स्थापना की जाएगी।
  • रांची और तेजपुर में राष्‍ट्रीय मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य संस्‍थानों का क्षेत्रीय शीर्ष संस्‍थानों के रूप में उन्‍नयन किया जाएगा।
  1. पूर्वोदय राज्‍यों और उत्‍तर-पूर्व क्षेत्र पर ध्‍यान
  • दुर्गापुर में बेहतर संपर्क नोड के साथ एकीकृत पूर्वी तट औद्योगिक गलियारे के विकास, 5 पूर्वोत्‍तर राज्‍यों में 5 पर्यटन स्‍थलों के निर्माण और 4000 ई-बसों के प्रावधान का प्रस्‍ताव।
  • अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, असम, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में बौद्ध सर्किट के विकास के लिए नई योजना।
  1. 16वां वित्‍त आयोग
  • सरकार ने 16वें वित्‍त आयोग की सिफारिश के अनुसार वित्‍त आयोग अनुदान के रूप में वित्‍त वर्ष 2026-27 के लिए राज्‍यों को 1.4 लाख करोड़ रुपये उपलब्‍ध कराए।
  1.  
  2. भाग-2
  3. प्रत्‍यक्ष कर
  4. नया आय कर अधिनियम
  • नया आय कर अधिनियम, 2025, दिनांक 01 अप्रैल, 2026 से प्रभावी हो जाएगा।
  • सरलीकृत आय कर नियमावली और प्रपत्रों को शीघ्र ही अधिसूचित कर दिया जाएगा। नए फॉर्म को इस तरह से डिजाइन किया गया है ताकि, आम नागरिक आसानी से उसका अनुपालन कर सके।
  1. जीवन जीने की सुगमता
  • किसी साधारण व्‍यक्ति को मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण द्वारा अधिनिर्णीत ब्‍याज को आय कर से छूट दी जाएगी और इस मद में स्रोत पर काटा गया कर देय नहीं होगा।
  1. टी.सी.एस. को तार्किक बनाना
  • विदेश यात्रा कार्यक्रम पैकेज की बिक्री पर टी.सी.एस. दर को बिना किसी राशि निर्धारण के मौजूदा 5 प्रतिशत और 20 प्रतिशत से कम करते हुए दो प्रतिशत करने का प्रस्‍ताव।
  • मानव श्रम आपूर्ति के लिए सरलीकृत टी.डी.एस. प्रावधानों से श्रम गहन कारोबारियों को लाभ होगा।
  • छोटे करदाताओं के लिए नई योजना का प्रस्‍ताव, जिसमें नियम आधारित स्‍वचालित प्रक्रिया से, कर-निर्धारण अधिकारी के समक्ष आवेदन दाखिल करने के स्‍थान पर कम अथवा शून्‍य कटौती प्रमाण-पत्र करना संभव हो सकेगा।
  • करदाताओं की सुविधा के लिए डिविडेंट, निवेश से प्रपत्र 15जी अथवा प्रपत्र 15एच स्‍वीकार करने के लिए सिंगल विंडो।
  • संशोधित रिटर्न के लिए समयसीमा मामूली शुल्‍क के भुगतान के साथ 31 दिसम्‍बर से बढ़ाकर 31 मार्च की गई।
  • कर रिटर्न फाइल करने के लिए अलग-अलग समय सीमा का प्रस्‍ताव।
  • किसी अनिवासी द्वारा अचल संपत्ति की बिक्री पर टी.डी.एस. की कटौती की जाने और टैन की आवश्‍यकता के बजाए निवासी क्रेता के पैन आधारित चालान के माध्‍यम से जमा कराए जा सकते हैं।
  • छोटे करदाताओं को अपनी विदेशी आय या संपत्ति की घोषणा के लिए एकमुश्‍त छह महीने की छूट की योजना।
  • जुर्माने और मुकद्दमेबाजी को तार्किक रूप देना।
  • आई.टी. आकलन और जुर्माने की कार्यवाही को सामान्‍य रूप से एकीकृत करने का प्रस्‍ताव है।
  • करदाताओं को अपनी पुन: आकलन कार्यवाही के बाद रिटर्न अपडेट कराने की अनुमति होगी।
  • आय का गलत विवरण देने पर अतिरिक्‍त आय कर के भुगतान के साथ छूट दी जा सकेगी।
  • आय कर अधिनियम के तहत मुकद्दमेबाजी की रूपरेखा को तार्किक बनाया गया है।
  1. सहकारिता
  • दूध, तिलहन, फल या सब्जियों की आपूर्ति में लगी प्राथमिक सहकारी संस्‍थाओं को पहले से उपलब्‍ध कटौती का विस्‍तार अब पशुचारे और बिनौले की आपूर्ति करने वालों तक भी किया गया है।
  • किसी अधिसूचित राष्‍ट्रीय सहकारी संघ द्वारा दिनांक 31 जनवरी 2026 तक कंपनियों में दिए गए उनके निवेश पर प्राप्‍त लाभांश आय पर तीन वर्ष की अवधि के लिए छूट देने का प्रस्‍ताव।
  1. भारत के विकास इंजन के रूप में आई.टी. क्षेत्र को सहायता
  • सॉफ्टवेयर विकास सेवाओं, आई.टी. समर्पित सेवाओं, ज्ञान प्रक्रिया आउटसोर्सिंग सेवाओं और सॉफ्टवेयर विकास से संबंधित सेवाएं 15.5 प्रतिशत के एक समान सेफ हार्बर मार्जिन के तहत आएंगी।
  • आई.टी. सेवाओं के लिए सेफ हार्बर प्राप्‍त करने की सीमा को तीन सौ करोड़ रुपये बढ़ाकर दो हजार करोड़ रुपये किया जा रहा है।
  • ए.पी.ए. में शामिल होने वाली कम्‍पनी को उपलब्‍ध संशोधित विवरणी की सुविधा उसकी संबद्ध संस्‍थाओं को भी प्रदान की जाएगी।
  1. वैश्विक व्‍यापार और निवेश आकर्षित करना
  • किसी ऐसी विदेशी कंपनी के लिए 2047 तक कर मे रियायत दी जाएगी, जो भारत से डाटा केन्‍द्र सेवाओं का उपयोग करके वैश्विक तौर पर क्‍लाउड सेवाएं प्रदान करती है।
  • यदि, डाटा सेंटर सेवाएं प्रदान करने वाली कंपनी संबंधित कंपनी है तो उसे लागत पर 15 प्रतिशत का सेफ हार्बर भी प्रदान किया जाएगा।
  1. कर प्रशासन
  • भारतीय लेखांकन मानक में ही आय परिकलन और प्रकटन मानकों के लिए अपेक्षाएं शामिल करने के हेतू कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय और केन्‍द्रीय प्रत्‍यक्ष कर बोर्ड की संयुक्‍त समिति गठित की जाएगी। वर्ष 2027-28 से आय परिकलन और प्रकटन मानकों पर आधारित प्रथक लेखांकन अपेक्षाओं को समाप्‍त कर दिया जाएगा।
  1.  
  2. अन्‍य कर प्रस्‍ताव
  • बायबैक के कराधान में परिवर्तन को इसलिए लाया गया कि प्रवर्तकों द्वारा बायबैक रूट का अनुचित उपयोग रोका जा सके। कॉरपोरेट प्रवर्तकों के लिए प्रभावी कराधान 22 प्रतिशत और गैर-कॉरपोरेट के लिए 30 प्रतिशत होगा।
  • एल्‍कोहल युक्‍त लिकर, स्‍क्रैप और खनिजों के विक्रेताओं के लिए टीसीएस दरों को तर्कसंगत बनाते हुए 2 प्रतिशत किया जाएगा और तेंदु पत्‍ते पर 5 प्रतिशत की दर को घटाकर दो प्रतिशत किया जाएगा।
  • वायदा सौदों पर ऑप्‍शन प्रीमियम और ऑप्‍शन कार्यकलाप दोनों पर एसटीटी की मौजूदा 0.1 प्रतिशत और 0.125 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत कर लगेगा।
  • मैट को अंतिम कर बनाए जाने का प्रस्‍ताव है, इसलिए 01 अप्रैल, 2026 से कोई और क्रेडिट संचय नहीं होगा। इस परिवर्तन के अनुरूप 15 प्रतिशत की मौजूदा मैट दर को कम करके 14 प्रतिशत किया जा रहा है।
  1. अप्रत्‍यक्ष कर :
  2. शुल्‍क सरलीकरण
  3. समुद्रीचमड़ा और वस्त्र उत्पाद
  • निर्यात हेतु सी-फूड उत्पादों के प्रसंस्करण हेतु इस्तेमाल किए गए विशेष घटकों के कर मुक्त निर्यात की सीमा को एफओबी वैल्यू के मौजूदा 1 प्रतिशत से बढ़ाकर 3 प्रतिशत किया जाएगा।
  • चमड़ा अथवा सिंथेटिक फूटवियर के निर्यात के लिए उपलब्ध कर मुक्त निर्यात, उसके विशेष उत्पादों के लिए भी अनुमत होगा।

ऊर्जा संक्रमण एवं सुरक्षा :

  • बैटरियों के लिए लीथियम-आयन सेलों के निर्माण हेतु इस्तेमाल में आने वाली पूंजीगत सामग्रियों के लिए मूलभूत सीमाशुल्क की छूट का विस्तार।
  • सोलर ग्लास के निर्माण में इस्तेमाल हेतु सोडियम एंटीमोनेट के आयात पर मूलभूत सीमाशूल्क से छूट मिलेगी।

न्यूक्लियर पावर:

  • न्यूक्लियर पावर परियोजनाओं के लिए आवश्यक सामग्रियों के आयात पर मौजूदा मूल-भूत सीमा शुल्क का वर्ष 2035 तक विस्तार किया जाएगा।

महत्वपूर्ण खनिज:

  • महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण के लिए आवश्यक पूंजीगत सामग्रियों के आयात के लिए मूल-भूत सीमा शुल्क में छूट दी जाएगी।

 

बायोगैस मिश्रित सीएनजी:

  • बायोगैस मिश्रित सीएनजी पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क के भुगतान की गणना के समय बायोगैस के पूरे मूल्य पर छूट दी जाएगी।

असैनिक एवं रक्षा विमानन:

  • असैनिक, प्रशिक्षण एवं अन्य विमानों के निर्माण के लिए आवश्यक कलपुर्जों पर मूलभूत सीमाशुल्क में छूट दी जाएगी।
  • रक्षा क्षेत्र की ईकाइयों द्वारा रख-रखाव, मरम्मत अथवा अन्य आवश्यकताओं में इस्तेमाल किए जाने वाले विमान के पुर्जों के निर्माण हेतु आयात किए जाने वाले कच्चे माल पर मूलभूत सीमाशुल्क में छूट दी जाएगी।

इलैक्ट्रॉनिक्स:

  • माइक्रोवेब ओवन के निर्माण में इस्तेमाल किए जाने वाले विशेष पुर्जों पर मूलभूत सीमाशुल्क में छूट दी जाएगी।

विशेष आर्थिक क्षेत्र:

  • विशेष आर्थिक क्षेत्रों से लेकर घरेलू टैरिफ क्षेत्र में पात्र विनिर्माण संयंत्रों द्वारा विक्रय की सुविधा हेतु एक विशेष एकबारगी उपाए का प्रस्ताव किया गया है, जिसके लिए रियायती दरों का प्रस्ताव किया गया है। ऐसे विक्रय की मात्रा उनके निर्यात के निर्धारित अनुपात तक सीमित होगी।

जीवन की सुगमता:

  • व्यक्तिगत इस्तेमाल के लिए आयात की जाने वाली सभी कर योग्य सामग्रियों पर टैरिफ दर को 20 प्रतिशत के घटाकर 10 प्रतिशत किया जाएगा।
  • 17 दवाओं/औषधियों पर मूलभूत सीमाशूल्क में छूट दी जाएगी।
  1. अतिरिक्त असाध्य रोगों के लिए दवाओं/औषधियों के व्यक्तिगत निर्यात को कर मुक्त किया जाएगा।
  2.  

सीमा-शुल्क सरलीकरण प्रक्रिया

वस्तुओं के सुगम और त्वरित संचालन में कम से कम हस्तक्षेप

विश्वास आधारित प्रणालियां

  • एईओ के रूप में परिचित टियर 2 और टियर 3 प्राधिकृत आर्थिक प्रचालकों के लिए शुल्क स्थगन अवधि को 15 दिन से बढ़ाकर 30 दिन किया गया है। पात्र विनिर्माणकर्ता और आयातकों के लिए भी समान शुल्क स्थगन सुविधा का प्रस्ताव।
  • सीमा शुल्कों पर बाध्यकारी अग्रिम नियम की वैधता अवधि को 3 वर्ष से बढ़ाकर 5 वर्ष किया गया।
  • कार्गों के समाशोधन के लिए अधिमान्य व्यवहार हेतु एईओ प्रमाणन का लाभ लेने के लिए सरकारी एजेंसियों को प्रोत्साहित किया जाएगा।
  • जिन वस्तुओं के आयात के लिए किसी अनुपालन की आवश्यकता नहीं है, विश्वस्त आयातक द्वारा प्रवेश बिल दायर करने और वस्तुओं के आगमन पर सीमा-शुल्क को उनके समाशोधन औपचारिकताएं पूरी करने के लिए अपने आप सूचना मिल जाएगी।
  • सीमा-शुल्क भंडारण,ऱ स्व-प्रकटन, इलेक्ट्रॉनिक ट्रैकिंग और जोखिम आधारित लेखा-परीक्षा के साथ एक भंडार संचालक केंद्रित प्रणाली में बदला जाएगा।

 

व्यापर सुगमता

  • विभिन्न सरकारी एजेंसियों से कार्गों समाशोधन के लिए अनुमोदन प्रक्रिया को इस वित्त वर्ष के अंत तक एकल और परस्पर जुड़े डिजिटल विंडो के माध्यम से निर्बाध बनाया जाएगा।
  • खाद्य, औषधि, पौध, पशु और अन्य वन्य जीव उत्पादों, जो निषिद्ध कार्गों का 70 प्रतिशत होता है, के समाशोधन शामिल प्रक्रियाओं को अप्रैल 2026 तक संचालन रूप दिया जाएगा।
  • जिन वस्तुओं के लिए कोई अनुपालन आवश्यकता नहीं है, उन वस्तुओं को आयातक द्वारा ऑनलाइन पंजीकरण पूरा करने के तत्काल बाद समाशोधित किया जाएगा।
  • सभी सीमा-शुल्क प्रक्रियाओं के लिए एकल, एकीकृत और मापनीय प्लेटफॉर्म के रूप में सीमा-शुल्क एकीकृत प्रणाली 2 वर्षों में शुरु की जाएगी।
  • गैर-सन्निविष्ट स्कैनिंग और उन्नत इमेजिंग तथा जोखिम आकलन हेतु एआई प्रौद्योगिकी उपयोग सभी प्रमुख पत्तनों में कंटेनर को स्कैन करने के उद्देश्य से चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा।

 

निर्यात के नए अवसर

  • विशेष आर्थिक क्षेत्र अथवा बीच समुद्र में मछ्ली पकड़ने वाले भारतीय नौकाओं द्वारा पकड़ी गई मछली को शुल्क मुक्त किया जाएगा। विदेशी पत्तन पर ऐसी मछली के उतराई को निर्यात वस्तु के रूप में माना जाएगा।
  • ई-कॉमर्स के माध्यम से वैश्विक बाजार में पहुंच के लिए भारत के छोटे व्यवसाय, कारीगरों और स्टार्टअप की आकांक्षाओं को सहायता प्रदान करने के लिए कुरियर निर्यात प्रति खेप 10 लाक रुपए की वर्तमान मूल्य सीमा को पूरी तरफ से हटाया जाएगा।
  • अंतरराष्ट्रीय यात्रा के दौरान सामान निकासी से जुड़े प्रावधानों के संशोधन का प्रस्ताव किया गया है। संशोधित नियमों से वर्तमान समय की यात्रा संबंधी वास्तविकताओं के अनुरूप शुल्क मुक्त भत्ते में वृद्धि होगी।
  1. सभी बकायों का भुगतान करके विवादों का समाधान चाहने वाले ईमानदार करदाता अतिरिक्त राशि का भुगतान करके अपने मामले बंद कर सकेंगे।

केंद्रीय बजट 2026-27 का सारांश

युवा शक्ति संचालित बजट गरीब, शोषित व वंचित समुदायों पर विशेष ध्यान के सरकार के संकल्प पर जोर देता है

कर्तव्य भवन में तैयार किया गया पहला बजट, जो तीन कर्तव्यों से प्रेरित है

पहला कर्तव्य है आर्थिक वृद्धि को तेज करना व बनाए रखना

दूसरा कर्तव्य है लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करना और उनकी क्षमता का निर्माण करना

तीसरा कर्तव्य सबका साथ सबका विकास के विज़न से जुड़ा है

नया आयकर अधिनियम, 2025; अप्रैल, 2026 से प्रभावी होगा, सरलीकृत आयकर नियम और फॉर्म जल्द ही अधिसूचित किए जाएगे

जुर्माना और अभियोजन को युक्तिसंगत बनाने के लिए प्रक्रियाओं की गुणत्मकता को कम करना जरूरी

कुछ प्राथमिक सहकारी समितियों को प्राप्त रियायत को पशु खाद्य और कपास बीच तक विस्तारित किया जाएगा

15.5 प्रतिशत साझा सेफ हार्बर मार्जिन के साथ सूचना प्रौद्योगिकी सेवाओं की एकल श्रेणी

आईटी सेवाओं के लिए सेफ हार्बर सुविधा हेतु 300 करोड़ रुपये की सीमा को बढ़ाकर 2000 करोड़ रुपये किया गया

विदेशी क्लाउड सेवा प्रदात्ता को 2047 तक टैक्स हॉलीडे दिया जाएगा

अनुमान आधार पर टैक्स देने वाले सभी अप्रवासियों को न्यूनतम वैकल्पिक टैक्स से छूट

कर निर्धारण वर्ष 2027-28 से आईसीडीएस पर आधारित पृथक लेखा जरूरत को समाप्त करने के लिए मंत्रालय इंडएएस को संशोधित करने हेतु संयुक्त समिति का गठन करेगा

वायदा सौदों पर एसटीटी को वर्तमान के 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत किया जाएगा

बैटरी के लिथियम आयन सेल के निर्माण में उपयोग किए जाने वाले पूंजीगत वस्तओं को प्राप्त मूल सीमा शुल्क छूट को विस्तार दिया जाएगा

महत्वपूर्ण खनिज के प्रसंस्करण के लिए आवश्यक पूंजीगत वस्तु के आयात के सीमा शुल्क पर छूट दी जाएगी

व्यक्तिगत उपयोग के लिए आयात की जाने वाली वस्तुओं पर लगने वाले टैरिफ दर को 20 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत किया जाएगा

17 औषधियों या दवाओं पर मूल सीमा शुल्क से छूट दी जाएगी

बायोफॉर्मा शक्ति, जिसका कुल परिव्यय 10,000 करोड़ रुपये है बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर्स के घरेलू उत्पादन के लिए इको-सिस्टम का निर्माण करेगी

भविष्य के चैम्पियन के रूप में एमएसएमई बनाने के लिए 10,000 करोड़ रुपये के एसएमई विकास निधि का प्रस्ताव

सार्वजनिक पूंजीगत व्यय को बीई-2025-26 के 11.2 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर वित्त वर्ष 2026-27 में 12.2 लाख करोड़ रुपये किया गया

पर्यावरण की दृष्टि से सतत यात्री प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए शहरों के बीच सात उच्च गति रेल गलियारे ‘वृद्धि परिवहन सम्पर्क’ के रूप में विकसित किए जाएंगे

भारतीय रचना प्रौद्योगिकी संस्थान, मुंबई 15,000 उच्च माध्यमिक विद्यालयों तथा 500 कॉलेजों में एवीजीसी कंटेट निर्माण लैब की स्थापना करेगा

उच्च शिक्षा और एसटीईएम संस्थानों में छात्राओं की चुनौतियों का समाधान करने के लिए प्रत्येक जिले में लड़कियों के लिए एक छात्रावास का निर्माण किया जाएगा

सरकार ने घोषणा करते हुए कहा कि आईआईएम की साझेदारी में, हाईब्रिड मोड में एक मानक, उच्च गुणवत्ता वाले 12-सप्ताह प्रशिक्षण पाठ्यक्रम के माध्यम से 20 पर्यटन स्थलों में 10,000 गाइड के कौशल का उन्नयन किया जाएगा

खेलो इंडिया मिशन अगले दशक में खेल क्षेत्र को परिवर्तित कर देगा

एक बहु-भाषी एआई उपकरण के रूप में भारत-विस्तार कृषि पोर्टलों और कृषि तौर-तरीकों पर आईसीएआर पैकेज को एआई प्रणालियों के साथ एकीकृत करेगा

विदेशी यात्रा पैकेज पर वर्तमान के 5 प्रतिशत और 20 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत किया गया है

सीमा शुल्क भंडार गृह रूपरेखा का बदलाव भंडार गृह संचालक केन्द्रित प्रणाली के किया जाएगा, जिसमें स्व-घोषणा, इलेक्ट्रॉनिक निगरानी और जोखिम आधारित लेखा की व्यवस्था होगी

वित्त वर्ष के अंत तक विभिन्न सरकारी एजेंसियों से कार्गो निकासी मंजूरियों को एकल और आपस में जुड़े डिजिटल विंडो के जरिए निर्बाध रूप से प्रसंस्कृत किया जाएगा

केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने आज संसद में केंद्रीय बजट 2026-27 पेश किया।

भाग-क

 

वित्त मंत्री ने कहा कि माघ पूर्णिमा के पवित्र अवसर और गुरु रविदास की जन्म जयंती के मौके पर कर्तव्य भवन में तैयार हुआ यह पहला बजट 3 कर्तव्यों से प्रेरित हैः

पहला कर्तव्य है- उत्पादकता और प्रतिस्पर्धा को बढ़ाते हुए तथा उथल-पुथल भरी वैश्विक स्थिति के प्रति सहनीयता का निर्माण करके आर्थिक वृद्धि को तेज करना तथा इसे बनाए रखना ।

दूसरा कर्तव्य है- लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करना और उनके क्षमता का निर्माण करना; भारत की समृद्धि के मार्ग में उन्हें मजबूत भागीदार बनाना।

तीसरा कर्तव्य सबका साथ-सबका विकास के विज़न से जुड़ा है। यह सुनिश्चित करेगा कि प्रत्येक परिवार, समुदाय, क्षेत्र के पास संसाधनों, सुविधाओं तथा सार्थक भागीदारी के लिए अवसरों तक पहुंच की सुविधा हो।

युवा शक्ति संचालित बजट, जो गरीब, शोषित और वंचित समुदायों के प्रति सरकार के संकल्प पर जोर देता है, पेश करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि देश विकसित भारत हासिल करने की दिशा में विश्वास से भरे कदम उठाता रहेगा, समावेश के साथ महत्वाकांक्षा का संतुलन करेगा। बढ़ते व्यापार और पूंजी की जरूरतों के साथ एक बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था के रूप में भारत को वैश्विक बाजारों के साथ मजबूती से एकीकृत होना चाहिए, निर्यात में वृद्धि करनी चाहिए तथा लम्बी अवधि के स्थिर निवेश को आकर्षित करना चाहिए।

उन्होंने उल्लेख किया कि देश बाहरी वातावरण का सामना कर रहा है, जिसमें व्यापार और बहु-पक्षवाद को नुकसान हुआ है तथा संसाधनों और आपूर्ति श्रृंखलाओं तक पहुंच में बाधाएं आई है। नई तकनीकें निर्माण प्रणालियों में बदलाव ला रही है, जबकि जल, ऊर्जा तथा महत्वपूर्ण खनिजों की मांग तेजी से बढ़ रही है।

वित्त मंत्री ने कहा कि 2025 के स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद, 350 से ज्यादा सुधारों की शुरूआत की गई है। इनमें जीएसटी सरलीकरण, श्रम संहिताओं की अधिसूचना, अनिवार्य गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों का युक्तिकरण शामिल है। उच्च स्तरीय समितियां गठित की गई है और इसके साथ नियम समाप्त करने तथा अनिपालन जरूरतों को कम करने के लिए केन्द्र सरकार राज्यों के साथ मिलकर काम कर रही है।

पहला कर्तव्य आर्थिक वृद्धि को तेज करना व बनाए रखना है। पहले कर्तव्य के तहत छह क्षेत्रों में हस्तक्षेप कार्यक्रमों का प्रस्ताव दिया गया है।

  1. 7 रणनीतिक और सीमा क्षेत्रों में विनिर्माण का विस्तार करना
  2. विरासत औद्योगिक क्षेत्रों का पुनर्निर्माण करना
  3. चैम्पियन एमएसएमई बनाना
  4. अवसंरचना पर सशक्त बल देना
  5. लम्बी अवधि की ऊर्जा सुरक्षा और स्थिरता को सुनिश्चित करना
  6. नगर आर्थिक क्षेत्र विकसित करना

 

वैश्विक बायोफॉर्मा निर्माण केन्द्र के रूप में भारत को विकसित करने के लिए बायोफॉर्मा शक्ति, जिसका कुल परिव्यय 10,000 करोड़ रुपये है, बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर्स के घरेलू उत्पादन के लिए अगले पांच वर्षों में इको-सिस्टम का निर्माण करेगी। रणनीति में शामिल है- तीन नए राष्ट्रीय औषधि शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (एनआईपीईआर) और सात वर्तमान संस्थानों के उन्नयन के साथ बायोफॉर्मा पर केन्द्रित नेटवर्क। यह 1000 मान्यता प्राप्त भारत क्लिनिक जांच स्थलों के एक नेटवर्क का निर्माण करेगा। वैश्विक मानक हासिल करने तथा एक समर्पित वैज्ञानिक समीक्षा कैडर व विशेषज्ञों के माध्यम से समयावधि मंजूर करने के लिए केन्द्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन को मजबूत किया जाएगा।

श्रम गहन वस्त्र क्षेत्र के लिए, पांच उपभागों के साथ एकीकृत कार्यक्रम का प्रस्ताव किया गया हैः

रेशम, ऊन और जूट जैसे प्राकृतिक फाइबर, मानव निर्मित फाइबर और नए युग के फाइबरों में आत्मनिर्भरता के लिए राष्ट्रीय फाइबर योजना; मशीनरी, प्रौद्योगिकी उन्नयन और सामान्य परीक्षण एवं प्रमाणन केन्द्रों के लिए पूंजीगत सहायता के साथ पारम्परिक क्लस्टरों के आधुनिकीकरण के लिए वस्त्र विस्तार एवं रोजगार योजना; मौजूदा योजनाओं को एकीकृत एवं सुदृढ़ करने और बुनकरों एवं कारीगरों के लिए लक्षित सहायता सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय हथकरघा एवं हस्तशिल्प कार्यक्रम; वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी और टिकाऊ वस्त्र और परिधानों को बढ़ावा देने के लिए टेक्स-इको पहल; उद्योग जगत और शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से वस्त्र कौशल इको-सिस्टम के आधुनिकीकरण और उन्नयन के लिए समर्थ 2.0 ।

विकास के प्रमुख इंजन के रूप में एमएसएमई को मान्यता देते हुए, 10,000 करोड़ रुपये के एसएमई विकास निधि का प्रस्ताव दिया गया है ताकि भविष्य के चैम्पियनों का निर्माण किया जा सके और निर्धारित विशेषताओं के आधार पर उद्योगों को प्रोत्साहन दिया जा सके।

वित्त मंत्री ने कहा कि सार्वजनिक पूंजीगत व्यय में गुणात्मक वृद्धि हुई है जो वित्त वर्ष 2014-15 के 2 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर बीई 2025-26 में 11.2 लाख करोड़ रुपये हो गई है। उन्होंने प्रस्ताव दिया कि इस गति को बनाए रखने के लिए वित्त वर्ष 2026-27 में इसे बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये किया जाएगा।

कार्गो के पर्यावरण रूप से टिकाऊ आवाजाही को बढ़ावा देने के लिए वित्त मंत्री ने नए समर्पित फ्रेट कॉरिडोर का प्रस्ताव दिया, जो पूर्व में दानकुनी को पश्चिम के सूरत से जोड़ेगा; अगले पांच वर्षों में 20 नए राष्ट्रीय जलमार्गों (एनडब्ल्यू) का संचालन प्रारंभ होगा। इसकी शुरूआत ओड़िशा में एनडब्ल्यू 5 से की जाएगी, जो खनिज की प्रचुरता वाले क्षेत्र तालचर और अंगुल व कलिंग नगर जैसै औद्योगिक केन्द्र को पारादीप और घामरा पत्तनों से जोड़ेगा। आवश्यक कार्यबल के विकास के लिए क्षेत्रीय उत्कृष्टता केंद्रों के रुप में प्रशिक्षण संस्थानों की स्थापना की जाएगी।

 

इस बजट का लक्ष्य शहरी आर्थिक क्षेत्रों के विशिष्ट विकास कारकों के आधार पर, शहरी आर्थिक क्षेत्रों (सीईआर) का मानचित्रण करके समूहों की आर्थिक स्थिति का उपयोग करने के लिए शहरों की क्षमता को और अधिक बढ़ाना है। सुधार-सह-परिणाम आधारित वित्तपोषण तंत्र से चुनौती मोड के माध्यम से उनकी योजनाओं को लागू करने में प्रति सीईआर 5 हजार करोड़ रुपये का आवंटन का प्रस्ताव दिया गया है।

पर्यावरणीय रूप से सतत् यात्री प्रणालियों को बढ़ावा देने के लिए, हम शहरों के बीच विकास संयोजक के रूप में सात उच्च-गति रेल कॉरीडोर विकसित किए जाएंगे-

  1. मुंबई-पुणे
  2. पुणे-हैदराबाद
  3. हैदराबाद-बेंगलुरु
  4. हैदराबाद-चेन्नई
  5. चेन्नई-बेंगलुरु
  6. दिल्ली-वाराणसी
  7. वाराणसी-सिलीगुड़ी।

 

वित्त मंत्री ने कहा कि दूसरा कर्तव्य आकांक्षाओं को पूरा करना और क्षमता निर्माण करना है। सरकार के सतत् और सुधार उन्मुख प्रयासों के जरिए 25 करोड़ व्यक्ति गरीबी की रेखा से ऊपर उठ गए है।

चिकित्सा पर्यटन सेवाओं के लिए भारत को एक वैश्वक केन्द्र के रूप में बढ़ावा देने के लिए वित्त मंत्री ने राज्यों को सहायता देने के लिए एक योजना का प्रस्ताव दिया, जिसके तहत राज्य निजी क्षेत्र के सहयोग से पांच क्षेत्रीय चिकित्सा केन्द्र स्थापित कर सकते है। यह केन्द्र एकीकृत स्वास्थ्य देखभाल भवन के रूप में कार्य करेंगे, जिनमें चिकित्सा, शिक्षा और शोध करने की सुविधाएं मौजूद होगी। इन केन्द्रों में आयुष केन्द्र, चिकित्सा केन्द्र, पर्यटन केन्द्र एवं स्वास्थ्य जांच, बाद के देखभाल और पुनर्वास की अवसंरचना होंगी। यह केन्द्र डॉक्टर और एएचपी के साथ-साथ स्वास्थ्य पेशेवरों के लिए विभिन्न नौकरियों का विकल्प प्रस्तुत करेगे।

पशु चिकित्सा पेशेवरों की संख्या 20,000 तक करने के लिए ऋण से जुड़े पूंजीगत सब्सिडी का प्रस्ताव दिया गया है ताकि निजी क्षेत्र में पशु चिकित्सा और पारावेट कॉलेज, वेटेनरी, पशु चिकित्सालय, जांच प्रयोगशाला, प्रजनन सुविधा की स्थापना के लिए समर्थन दिया जा सके।

भारत का एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट, गेमिंग और कॉमिक्स (एवीजीसी) क्षेत्र एक बढ़ता हुआ उद्योग है। अनुमान है कि 2030 तक इस क्षेत्र में 20 लाख पेशेवरों की जरूरत होगी। वित्त मंत्री ने भारतीय रचना प्रौद्योगिकी संस्थान, मुंबई को समर्थन देने का प्रस्ताव दिया, ताकि संस्थान 15,000 उच्च माध्यमिक विद्यालयों तथा 500 कॉलेजों में एवीजीसी कंटेट निर्माण लैब की स्थापना कर सके।

उच्च शिक्षा एसटीईएम संस्थानों में अध्ययन और प्रयोगशाला कार्य की लम्बी अवधि छात्राओं के लिए चुनौती पैदा करती है। वीजीएफ/पूंजीगत समर्थन के जरिए प्रत्येक जिले में लड़कियों के लिए एक छात्रावास की स्थापना की जाएगी।

वित्त मंत्री ने वर्तमान के राष्ट्रीय होटल प्रबंधन और केटररिंग प्रौद्योगिकी परिषद का उन्नयन करके राष्ट्रिय आतिथ्य संस्थान की स्थापना करने का प्रस्ताव रखा। यह शिक्षा जगत, उद्योग जगत और सरकार के बीच एक सेतु के रूप में कार्य करेगा। उन्होंने आगे 20 पर्यटनों स्थलों में 10,000 गाइडों के कौशल का उन्नयन करने के लिए एक पायलट योजना का प्रस्ताव रखा। इसके लिए भारतीय प्रबंधन संस्थान के साथ साझेदारी में हाईब्रिड मोड में 12 सप्ताह के एक मानक उच्च गुणवत्ता वाला प्रशिक्षण पाठ्यक्रम के जरिए गाइडों को प्रशिक्षित किया जाएगा।

खेलो इंडिया कार्यक्रम के जरिए खेल प्रतिभाओं को मार्गदर्शन व सहायता प्रदान करने के कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए वित्त मंत्री ने अगले दशक में खेल क्षेत्र को परिवर्तित करने के लिए खेलो इंडिया मिशन के शुभारंभ का प्रस्ताव रखा।। यह मिशन निम्न सुविधाएं प्रदान करेगा। क.) प्रशिक्षण केन्द्रों के समर्थन से प्रतिभा विकास के लिए एकीकृत तरीका ख.) कोच और सहायककर्मियों का प्रणालीगत विकास ग.) खेल विज्ञान और प्रौद्योगिकी का एकीकरण घ.) खेल संस्कृति को बढ़ावा देने तथा मंच प्रदान करने के लिए प्रतियोगिताएं और लीग ड.) प्रशिक्षण और प्रतियोगिता के लिए खेल अवसंरचना का विकास।

 

वित्त मंत्री ने कहा कि बजट का तीसरा कर्तव्‍य जो सबका साथ, सबका विकास के दृष्टिकोण के अनुरूप है, यह सुनिश्चित करता है कि किसानों की आय में वृद्धि हो, दिव्‍यांगजन सशक्‍त बनें, मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य और ट्रॉमा केयर तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए कमजोर समूहों का सशक्तिकरण हो,  विकास और रोजगार के अवसरों में तेजी लाकर पूर्वोदय राज्‍यों और पूर्वोत्तर क्षेत्र की ओर ध्‍यान केंद्रित हो।

वित्त मंत्री ने एक भाषीय टूल – भारत विस्‍तार (कृषि संसाधनों तक पहुंच के लिए वर्चुअल एकीकृत प्रणाली)  – का प्रस्‍ताव किया जो एक बहुभाषीय एआई टूल है और जिसे एआई प्रणाली सहित कृषि संबंधी प्रणालियों के लिए आईसीएआर पैकेज सहित एग्रीस्‍टैक पोर्टल के रूप में एकीकृत किया गया है। इससे कृषि उत्‍पादकता में वृद्धि होगी, किसानों को उचित निर्णय लेने में सक्षम बनाएगा और अनुकूल परामर्श सहायता प्रदान करते हुए जोखिम को कम करेगा।

लखपति दीदी कार्यक्रम की सफलता को आगे बढ़ाते हुए,  संवर्धित और नवाचार वित्तपोषण के माध्‍यम से क्‍लस्‍टर स्‍तरीय संगठनों के भीतर सामुदायिक स्‍वामित्‍व वाले खुदरा आउटलेट के रूप में स्‍व-सहायता उद्यम (शी) मार्ट स्‍थापित किए जाएंगे।

वित्त मंत्री ने मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य और ट्रॉमा केयर पर सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए निमहांस-2 की स्‍थापना की घोषणा की और रांची तथा तेजपुर में राष्‍ट्रीय मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य संस्‍थानों को शीर्ष क्षेत्रीय  संस्‍थानों के रूप में अपग्रेड करने की बात कही।

वित्त मंत्री ने दुर्गापुर में बेहतर संपर्क नोड के साथ एकीकृत पूर्वी तट औद्योगिक कॉरीडोर के विकास, 5 पूर्वोदय राज्‍यों में 5 पर्यटन स्‍थलों के निर्माण और 4000 ई-बसों के प्रावधान का प्रस्‍ताव रखा। उन्‍होंने अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, असम, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में बौद्ध सर्किट के विकास हेतु एक योजना का प्रस्‍ताव रखा। इस योजना में मंदिरों और मठों का संरक्षण, तीर्थस्‍थल भाषांतरण केंद्र, संपर्क एवं तीर्थ यात्रियों की सुविधाएं शामिल होंगी।

राजकोषीय समेकन

ऋण से जीडीपी अनुपात संशोधित अनुमान 2025-26 में जीडीपी के 56.1 प्रतिशत की तुलना में, बजट अनुमान 2026-27 में जीडीपी के 55.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है। गिरता हुआ ऋण और जीडीपी अनुपात धीरे-धीरे ब्‍याज भुगतान पर व्‍यय को कम करके प्राथमिक क्षेत्र के व्‍यय के लिए संसाधनों को मुक्‍त करेगा। संशोधित अनुमान 2025-26 में, राजकोषीय घाटे का अनुमान जीडीपी के 4.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है जो 2025-26 के बजट अनुमान के बराबर है। ऋण समेकन की नई राजकोषीय दूरदर्शिता के अनुरूप, बजट अनुमान 2026-27 में राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

 

संशोधित अनुमान 2025-26

गैर-ऋण प्राप्तियों का  संशोधित अनुमान 34 लाख करोड़ रुपये है। जिनमें से केंद्र की निवल कर प्राप्तियां 26.7 लाख करोड़ रुपये है। कुल व्‍यय का संशोधित अनुमान 49.6 लाख करोड़ रुपये है जिनमें से पूंजीगत व्‍यय लगभग 11 लाख करोड़ रुपये है।

बजट अनुमान 2026-27

वर्ष 2026-27 में गैर-ऋण प्राप्तियां और कुल व्‍यय का अनुमान क्रमश: 36.5 लाख करोड़ रुपये और 53.5 लाख करोड़ रुपये है। केंद्र की निवल कर प्राप्तियों का अनुमान 28.7 लाख करोड़ रुपये है। राजकोषीय घाटे के वित्तपोषण हेतु, दिनांकित प्रतिभूतियों से निवल बाजार उधारी का अनुमान 11.7 लाख करोड़ रुपये है। शेष वित्तपोषण छोटी बचतों और अन्‍य स्रोतों से आने की संभावना है। सकल बाजार उधारी का अनुमान 17.2 लाख करोड़ रुपये है।

 

भाग-ख

प्रत्यक्ष कर

प्रत्यक्ष करों में आम बजट 2026-2027 में कई नए सुधार प्रस्तावित हैं। नया आयकर अधिनियम 2025 अप्रैल, 2026 से प्रभावी होगा। इसके अतिरिक्त, सरलीकृत आयकर नियमावली और प्रपत्रों को शीघ्र ही अधिसूचित कर दिया जाएगा। प्रपत्रों को इस प्रकार पुनः डिजाइन किया गया है कि आम नागरिक इसे बिना किसी कठिनाई के इसका अनुपालन कर सके।

टीसीएस दरों में कटौती भी प्रस्तावित है। विदेश यात्रा कार्यक्रम पैकेज की बिक्री पर बिना किसी राशि निर्धारण के मौजूदा 5 प्रतिशत और 20 प्रतिशत से कम करते हुए 2 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके अतिरिक्त, शिक्षा प्राप्त करने और चिकित्सा उद्देश्यों के के लिए उदारीकृत धनप्रेषण योजना (एलआरएस) के अतंर्गत टीसीएस दर को 5 प्रतिशत से कम करके 2 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा गया है।

कार्यबल सेवाओं की आपूर्ति को टीडीएस के प्रयोजनार्थ विशिष्ट रूप से संविदाकारों को भुगतान के दायरे में लाने का प्रस्ताव है। इन सेवाओं पर टीडीएस की दर 1 प्रतिशत अथवा 2 प्रतिशत मात्र होगी। छोटे करदाताओं के लिए एक योजना का प्रस्ताव है जिसमें नियम आधारित स्वचालित प्रक्रिया से, कर निर्धारण अधिकारी के समक्ष आवेदन दाखिल करने के स्थान पर कम अथवा शून्य कटौती प्रमाण-पत्र प्राप्त करना संभव हो सकेगा। इसके अतिरिक्त, एक सांकेतिक शुल्क के भुगतान पर विवरणियों को संशोधित करने के लिए उपलब्ध समय को 31 दिसम्बर से 31 मार्च तक बढ़ाने का प्रस्ताव किया गया है। इसके अतिरिक्त, कर विवरणियों को दाखिल करने के लिए अगल-अलग समय-सीमा रखने का भी प्रस्ताव है।

छात्रों, युवाओं पेशेवरों, तकनीकी कर्मचारियों, अन्यत्र चले गए अनिवासी भारतीयों और ऐसे अन्य छोटे करदाताओं की व्यावहारिक समस्याओं को दूर करने के लिए, इन करदाताओं के लिए एक निश्चित आकार के नीचे आय अथवा परिसंपत्ति को प्रकट करने के लिए 6 माह की विदेशी परिसंपत्ति प्रकटीकरण योजना शुरू करने का प्रस्ताव है।

दंड और अभियोजन को युक्तिसंगत बनाना

दंड और अभियोजन को युक्तिसंगत बनाने के लिए आम बजट 2026-27 में  कार्यवाहियों की विविधता कम करने का प्रस्ताव रखा गया है। कर निर्धारण एवं दंड कार्यवाहियों को एक सामान्य आदेश के माध्यम से एकीकृत किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, पूर्व-भुगतान की मात्रा 20 प्रतिशत से कम करके 10 प्रतिशत की जाएगी और इसकी गणना केवल मुख्य क्रमांक पर होती रहेगी। मुक्दमेबाजी को कम करने के लिए एक अतिरिक्त उपाय के रूप में करदाता को संगत वर्ष के लिए लागू दर के अतिरिक्त 10 प्रतिशत कर दर के साथ विवरणी को पुनर्निर्धारण कार्यवाहियों के पश्चात भी अद्यतन करने की अनुमति दी जाएगी।

बजट में कम कर की सूचना एवं गलत सूचना देने के मामलों में, दंड और अभियोजन से उन्मुक्ति प्रावधान को विस्तारित करने का प्रस्ताव है। ऐसे मामलों में करदाता को देय कर और ब्याज के अलावा अतिरिक्त आयकर के रुप में कर राशि के 100 प्रतिशत का भुगतान करना अपेक्षित होगा। इसके अतिरिक्त आयकर अधिनियम के अतंर्गत अभियोजन ढ़ांचे को युक्तिसंगत बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। लेखा बहियों और दस्तावेजों को प्रस्तुत न करना तथा वस्तु रुप में भुगतान के मामले में टीडीएस का भुगतान करने की आवश्यकता अपराध नहीं होगी। 20 लाख रुपये से कम के सकल मूल्य वाली अचल विदेशी परिसम्पत्ति का गैर-प्रकटीकरण करने पर फिलहाल कोई दंड नहीं है। दिनांक 01.10.2024 की पुरानी तिथि से प्रभावी उनको अभियोजन से उन्मुक्ति का प्रस्ताव रखा गया है।

सहकारिता

श्रीमती निर्मला सीतारमण ने आज संसद में अपने बजट भाषण में कहा कि, अपने सदस्यों द्वारा जुटाए या उत्पादित दुग्ध, तिलहन, फल अथवा सब्जियों की आपूर्ति में संलग्न प्राथमिक सहकारी समितियों के लिए कटौती की पहले से ही अनुमति है, अब उनके सदस्यों के लिए उत्पादित पशु चारा और कपास के लिए बीज की आपूर्ति को इस कटौती में शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया है। नई कर व्यवस्था के अंतर्गत अंतर-सहकारी समिति लाभांश आय को इसके सदस्यों में आगे संवितरण की सीमा तक कटौती के रूप में अनुमति दिए जाने का प्रस्ताव है। किसी अधिसूचित राष्ट्रीय सहकारी संघ द्वारा दिनांक 31.01.2026 तक कंपनियों में किए गए उनके निवेश पर प्राप्त लाभांश आय पर 3 वर्ष की अवधि के लिए छूट देने का भी प्रस्ताव है। यह छूट केवल तभी प्रदान की जाएगी जब उक्त लाभांश को इसके सदस्य सहकारी समितियों में आगे वितरण किया जाएगा।

भारत के विकास इंजन के रूप में आईटी क्षेत्र को सहायता

भारत की विकास यात्रा में आईटी सेक्टर के महत्व को रेखांकित करते हुए बजट में सॉफ्टवेयर विकास सेवाओं, आईटी समर्पित सेवाओं, ज्ञान प्रक्रिया आउटसोर्सिंग सेवाओं और सॉफ्टवेयर विकास से संबंधित संविदागत अनुसंधान और विकास सेवाओं को उन पर लागू 15.5 प्रतिशत के एक समान सेफ हार्बर मार्जिन के साथ सूचना प्रौद्योगिकी सेवाओं की एकल श्रेणी के अंतर्गत सम्मिलित किए जाने का प्रस्ताव है। इसके अतिरिक्त, आईटी सेवाओं के लिए सेफ हार्बर प्राप्त करने की सीमा को 300 करोड़ रुपये से पर्याप्त रुप से बढ़ाकर 2000 करोड़ रुपये किए जाने का प्रस्ताव है। आईटी सेवाओं के लिए सेफ हार्बर का अनुमोदन एक स्वचालित नियम आधारित प्रक्रिया द्वारा किया जाएगा और एक बार किसी आईटी कम्पनी द्वारा इसके लिए आवेदन करने पर कंपनी की इच्छानुसार इसी सेफ हार्बर को 5 वर्षों की अवधि के लिए जारी रखा जा सकता है।

अग्रिम मूल्य निर्धारण करार (एपीए) करने की इच्छुक आईटी सेवा कंपनियों के लिए आईटी सेवाओं हेतु एकपक्षीय एपीए प्रक्रिया को तेज करने का प्रस्ताव किया गया है, जिसे दो वर्ष की अवधि के भीतर पूरा करने का प्रयास किया जाएगा। करदाताओं के अनुरोध पर 2 वर्ष की अवधि को आगे 6 महीने के लिए बढ़ाया जा सकता है। एपीए में शामिल होने वाली कंपनी को उपलब्ध संशोधित विवरणी की सुविधा उसकी संबद्ध संस्थाओं को भी प्रदान किए जाने का प्रस्ताव है।

वैश्विक व्यापार और निवेश आकर्षित करना

संसद में आम बजट 2026-27 प्रस्तुत करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि ऐसी विदेशी कंपनी के लिए वर्ष 2047 तक कर रियायत प्रदान करने का प्रस्ताव है जो भारत से डाटा केन्द्र सेवाओं का उपयोग करके वैश्विक स्तर पर क्लाउड सेवाएं प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि यदि डाटा सेंटर सेवाएं प्रदान करने वाली कंपनी एक संबंधित कंपनी है तो, उस लागत पर 15 प्रतिशत का सेफ हार्बर प्रदान का भी प्रस्ताव रखा गया है। इसके अतिरिक्त, इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण के लिए इनवॉयस बैल्यू के 2 प्रतिशत के प्रॉफिट मार्जिन पर किसी बांडेड वेयरहाउस में कंपोनेंट वेयरहाउस के लिए अनिवासियों को सेफ हार्बर प्रदान करने का प्रस्ताव है। लगभग 0.7 प्रतिशत का परिणामी कर प्रतिस्पर्धी क्षेत्राधिकार के मुकाबले काफी कम होगा।

भारत में टोल विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए ऐसे किसी अनिवासी को आयकर से 5 वर्षों के लिए छूट प्रदान करने का प्रस्ताव रखा गया है जो बॉन्डेड क्षेत्र में किसी टोल विनिर्माता को पूंजीगत वस्तुएं, उपकरण अथवा टूलिंग उपलब्ध कराता  है। वैश्विक प्रतिभा के विशाल पूल को भारत में लम्बी अवधि के लिए काम करने हेतु प्रोत्साहित करने के लिए अधिसूचित योजनाओं के अतंर्गत 5 वर्षों की प्रवास अवधि के लिए अनिवासी विशेषज्ञ की वैश्विक (गैर-भारत स्रोत) आय के लिए छूट प्रदान करने का प्रस्ताव है। इसके अतिरिक्त उन सभी अनिवासियों को न्यूनतम वैकल्पिक कर (एमएटी) से छूट प्रदान की जाएगी, जो अनुमानित आधार पर कर का भुगतान करते हैं।

 

कर प्रशासन

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सिविल और रक्षा विमानन क्षेत्र में सिविलियन, प्रशिक्षण और अन्य एयरक्राफ्ट के विनिर्माण के लिए अपेक्षित घटकों और पुर्जों पर मूल सीमा शुल्क में छूट दी जाएगी और रक्षा क्षेत्र इकाइयों द्वारा अनुरक्षण, मरम्मत अथवा ओवरहॉल जरूरतों में प्रयोग किए जाने वाले विमानों के पुर्जों के विनिर्माण के लिए आयातित कच्चे माल पर मूल सीमा शुल्क में छूट प्रदान की जाएगी।

इसके अलावा विशेष एक बारगी उपाय के रूप में विशेष आर्थिक क्षेत्र में पात्र विनिर्माण इकाइयों द्वारा रियायती शुल्क दरों पर घरेलू प्रशुल्क क्षेत्र (डीटीए) को बिक्री की सुविधा प्रदान करने की पेशकश की गई  है।

जीवन जीने की सुगमता बढ़ाने के लिए वित्त मंत्री ने कहा कि निजी उपयोग के लिए सभी शुल्क योग्य आयातित वस्तुओं पर प्रशुल्क दर को 20 प्रतिशत से कम करते हुए 10 प्रतिशत किया जाएगा। 17 औषधियों अथवा दवाओं पर मूल सीमा शुल्क में छूट दी जाएगी। उपचार में प्रयुक्त औषधियों, दवाओं और विशेष चिकित्सा प्रयोजन खाद्य (एफएसएमपी)  के निजी आयातों पर शुल्क से छूट के प्रायोजनार्थ 7 अतिरिक्त असाधारण रोगों को जोड़ा जाएगा।

सीमा शुल्क प्रक्रिया

वस्तुओं के सुगम और त्वरित संचलन के लिए सीमा शुल्क प्रक्रियाओं में कम से कम हस्तक्षेप होगा। इसके अलावा टियर 2 और टियर 3 प्राधिकृत प्रचालकों जिन्हें एईओ कहा जाता है, के लिए शुल्क स्थगन अवधि को 15 दिन से बढ़ाकर 30 दिन किया जाएगा। पात्र विनिर्माताओं – आयातकों को भी यही सुविधा प्रदान की जाएगी। सीमा शुल्कों पर बाध्यकारी अग्रिम नियम की वैधता अवधि को वर्तमान 3 वर्ष  से बढ़ाकर 5 वर्ष किये जाने  का प्रस्ताव है। सरकारी एजेंसियों को उनके कार्गो के समाशोधन में अधिमान्य व्यवहार हेतु एईओ प्रत्यायन का लाभ लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

बजट में सीमा शुल्क भंडारण फ्रेमवर्क को स्व-प्रकटन, इलेक्ट्रॉनिक  ट्रेकिंग और जोखिम आधारित लेखा परीक्षा के साथ भंडार संचालक – केंद्रित प्रणाली में बदला जाएगा।

व्यापार करने की सुगमता

व्यापार करने की सुगमता के लिए विविध प्रकार के कदम उठाए गए हैं। उदाहरण के लिए विभिन्न सरकारी एजेंसियों से कार्गों समाशोधन के लिए अपेक्षित अनुमोदनों की प्रक्रिया को इस वित्त वर्ष के अंत तक एकल और परस्पर जुड़े हुए डिजिटल विंडो के माध्यम से निर्बाध बनाया जाएगा। जिन वस्तुओं के लिए किसी अनुपालन की अपेक्षा नहीं है, उन वस्तुओं को आयातक द्वारा ऑनलाइन पंजीकरण पूरा करने के तत्काल बाद सीमा शुल्क द्वारा समाशोधित किया जाएगा। सभी सीमा शुल्क प्रक्रियाओं के लिए एकल, एकीकृत और मापनीय प्लेटफॉर्म के रूप में सीमा शुल्क एकीकृत प्रणाली (सीआईएस) 2 वर्षों में शुरू की जाएगी।  इसके अलावा गैर सन्निविष्ट स्कैनिंग और उन्नत इमेजिंग तथा जोखिम आकलन हेतु एआई प्रौद्योगिकी का उपयोग सभी प्रमुख पत्तनों में प्रत्येक कंटेनर को स्केन करने के उद्देश्य से चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा।

केंद्रीय बजट 2026-27 विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) में अथवा बीच समुद्र में मछली पकड़ने वाली भारतीय नौकाओं द्वारा पकड़ी गई मछली को शुल्क मुक्त बनाता है। विदेशी पत्तन पर ऐसी मछली की उतराई को निर्यात की वस्तु के रूप में माना जाएगा। बजट भारत के छोटे व्यवसायों, कारीगरों और स्टार्ट-अप की अकांक्षाओं में सहायता प्रदान करने के लिए कुरियर निर्यातों पर प्रति खेप 10 लाख रुपए की वर्तमान मूल्य सीमा को पूरी तरह हटाने की भी पेशकश करता है।

अंतर्राष्ट्रीय यात्रा के दौरान सामान की निकासी को शासित करने वाले प्रावधानों में संशोधन किया जाएगा। संशोधित नियमों से वर्तमान समय की यात्रा संबंधी वास्तविकताओं के अनुरूप शुल्क मुक्त भत्ते में वृद्धि होगी। इसके अलावा सभी बकायों का भुगतान करके विवादों का निपटान करने के इच्छुक ईमानदार करदाता दंड के बदले अतिरिक्त राशि का भुगतान करके अपने मामलों को बंद करने में सक्षम होंगे।

अजित पवार को भावनात्मक भाजपाई भावांजली या सियासत का कोई संकेत?

सियासत में कोई भी काम यूं ही नहीं होता। यहां हर कदम अगले कदम की तैयारी होता है और हर पहल भविष्य की किसी संभावना का संकेत। राजनीति में घटनाओं को उनके सतही अर्थों से नहीं, बल्कि उनके निहितार्थों से पढ़ा जाता है। इसी परंपरा में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता के निधन पर अजित पवार को दी गई बीजेपी की श्रद्धांजलि का त्वरित और प्रभावशाली विज्ञापन आज सियासी हलकों में गहन चर्चा का विषय है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी गहरे शोक में है। पार्टी के नेता और कार्यकर्ता अपने वरिष्ठ नेता के असामयिक निधन से गमगीन। यह स्वाभाविक है कि पार्टी अपने नेता को श्रद्धांजलि दे। यह भी स्वाभाविक है कि सरकार, जिसमें वह नेता शामिल रहे हैं, आधिकारिक तौर पर शोक प्रकट करे। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में जो बात असाधारण है, वह है, बीजेपी की महाराष्ट्र इकाई द्वारा प्रकाशित फ्रंट का फुल-पेज श्रद्धांजलि विज्ञापन। अजित पवार मौजूदा सरकार का हिस्सा थे। यह विज्ञापन अगर महाराष्ट्र सरकार की ओर से दिया जाता, तो इसे समूचे महाराष्ट्र की ओर से दी गई श्रद्धांजलि माना जाता। लेकिन यहां विज्ञापन सरकार का नहीं, बल्कि पार्टी का है, बीजेपी का है। वह भी कोई छोटा, औपचारिक शोक संदेश नहीं, बल्कि करोड़ों रुपये खर्च कर प्रमुख समाचार पत्रों के मुखपृष्ठों पर प्रकाशित प्रभावशाली विज्ञापन। यह तथ्य ही इस पूरे घटनाक्रम को सामान्य से अचानक असामान्य बना देता है।

 

भारतीय राजनीति में आम तौर पर शोक संदेशों की भी एक अलिखित मर्यादा और परंपरा रही है। विरोधी दल के नेता के निधन पर संवेदना व्यक्त की जाती है, ट्वीट होते हैं, बयान आते हैं, और विज्ञापन भी। लेकिन किसी अन्य दल के नेता के लिए इतने व्यापक, त्वरित और तात्कालिक तरीके से बेहद महंगे श्रद्धांजलि विज्ञापन, वह भी सीधे पार्टी की ओर से, यह दृश्य बेहद दुर्लभ है। अगर इतिहास में झांका जाए, तो ऐसे उदाहरण बहुत कम मिलते हैं। 2014 में आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एनटी रामाराव के परिवार या 2018 में अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर सभी दलों ने व्यापक श्रद्धांजलि दी थी, लेकिन तब वाजपेयी एक सर्वस्वीकृत राष्ट्रीय नेता थे और देश के प्रधानमंत्री भी रहे थे। वहां सरकार और पार्टी के बीच की रेखा लगभग मिट चुकी थी। इसी तरह, 2022 में मुलायम सिंह यादव के निधन पर भी उत्तर प्रदेश में कई दलों ने बड़े स्तर पर शोक प्रकट किया, लेकिन किसी एक पार्टी द्वारा दूसरे दल के नेता के लिए इतने त्वरित और खर्चीले मुखपृष्ठीय विज्ञापन देखने को नहीं मिले। यही कारण है कि इस श्रद्धांजलि की तात्कालिकता और व्यापकता को लेकर कांग्रेस, शिवसेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और स्वयं बीजेपी के भीतर भी सियासी मायने तलाशे जा रहे हैं। सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह केवल संवेदना है, या इसके पीछे कोई सियासी संदेश छिपा है?

 

महाराष्ट्र की राजनीति वैसे भी गठबंधन, टूट-फूट और पुनर्संयोजन की प्रयोगशाला रही है। शिवसेना के टूटने से लेकर कांग्रेस के फूटने तक। एनसीपी के विभाजन, अजीत पवार का सत्ता में आने और शरद पवार का अलग खेमे में जाने की राजनीतिक घटनाओं के बीच बीजेपी की हर रणनीति को दीर्घकालिक चश्मे से देखा जाता है। ऐसे में यह श्रद्धांजलि विज्ञापन केवल शोक व्यक्त करने का माध्यम नहीं रह जाता, बल्कि संभावित सियासी संकेत का रूप ले लेता है। कुछ विश्लेषक इसे एनसीपी के अजित पवार गुट के प्रति बीजेपी की सार्वजनिक स्वीकृति और अपनत्व के प्रदर्शन के रूप में देख रहे हैं। कुछ इसे भविष्य के लिए रिश्तों को और मजबूत करने का संदेश मान रहे हैं। वहीं, कुछ का कहना है कि यह शरद पवार गुट को यह जताने का तरीका भी हो सकता है कि सत्ता, संसाधन और सियासत किसके साथ खड़े हैं।

 

वैसे भी, राजनीति में संवेदनाओं की सांसें और रणनीतियों के राज अक्सर एक-दूसरे में घुले होते हैं। माना कि अजीत पवार के प्रति यह श्रद्धांजलि सच्चे शोक की अभिव्यक्ति है, मगर इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि यह सियासी गणित का एक सोचा-समझा नया अध्याय शुरू करने की कोशिश भी। इसीलिए महाराष्ट्र की सियासत में इस असामान्य श्रद्धांजलि को लंबे वक्त तक याद रखा जाएगा, लेकिन इसके वास्तविक मायने आने वाले कुछ ही दिनों में अधिक स्पष्ट हो जाएंगे, यह भी तय है। बीजेपी की राजनीति हमेशा रणनीतिक प्रतीकों, सुदीर्घ संकेतों और व्यापक संदेशों पर आधारित रही है। चाहे वह किसी कार्यक्रम में मंच साझा करने का तरीका हो या किसी नेता के प्रति सार्वजनिक सम्मान का प्रदर्शन। बीजेपी के हर कदम में अपनी टाइमिंग और अपने संदर्भ होते हैं। जिनको समझना, राजनीति के जानकारों के लिए भी आसान भले ही ना हो, लेकिन मुश्किल तो कतई नहीं है। इसी संदर्भ में अजीत पवार को यह श्रद्धांजलि विज्ञापन भले ही, भावनात्मक भाजपाई भावांजली हो, मगर रणनीतिक ज्यादा लगता है, यही सच है। और हां, अंत में एक बात यह भी कि राजनीति में बीजेपी वह सब कुछ कर जाती है, जो बाकी राजनीतिक पार्टियां सोच भी नहीं पाती। क्योंकि बीजेपी सियासत, सत्ता और सम्हले रहने के अलावा और कुछ नहीं सोचती। जो कि सही भी है, समयानुकूल भी और सत्ता में बने रहने के लिए सबसे जरूरी भी।

 

(लेखक राजनीतिक विश्लेषक हैं)

कम सामान, ज़्यादा आराम

(प्रोफेसर अच्युत सामंत पूरी दुनिया में एक ऐसे अनोखे  व्यक्तित्व हैं जिन्होंने अभावों, संघर्षों के बीच रहकर भी समाज को शिक्षा देने का संकल्प लिया और ओड़िशा के भुवनेश्वर में   उनके द्वारा स्थापित  ‘किस’ और ‘कीट’ यूनिवर्सिटी दुनिया में एक ऐसी मिसाल है, जिसकी कार्यप्रणाली देखने और समझने के लिए दुनिया भर से राष्ट्राध्यक्षों से लेकर शिक्षाविद और समाजशास्त्री आते हैं, और ये देखकर हैरान रह जाते हैं कि इस विश्वविद्यालय में 70 हजार निर्धन आदिवासी बच्चों के लिए निःशुल्क अध्ययन सुविधा तो है ही उनके रहने और उनको रोजगार से जोड़ने की भी अद्भुत व्यवस्था है।  जो काम सरकारें अपने लाखों कर्माचारियों और करोड़ों  के बजट में नहीं कर सकती वो  काम एक अकेला व्यक्ति कर रहा है।  एक व्यक्ति समाज में कितना बड़ा क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है, अच्युत सामंत  उसके जीते जागते प्रमाण हैं) 

यह कैसा शाश्वत सत्य है कि जीवन में, हम सभी सफलता, शांति और खुशी के लिए प्रयास करते हैं। हम बाहरी और आंतरिक, दोनों तरह की स्थिरता और आराम प्राप्त करना चाहते हैं। लेकिन अक्सर हम इस मूलभूत सत्य को नज़रअंदाज़ कर देते हैं कि हम जितना कम सामान ढोते हैं, उतना ही ज़्यादा आराम का अनुभव करते हैं। यह सिर्फ़ भौतिक सामान की बात नहीं है। यह भावनात्मक, मानसिक, आध्यात्मिक और भौतिक सामान की बात है। हमारा बोझ जितना हल्का होगा, हमारी यात्रा उतनी ही सुगम होगी। यह सिद्धांत जीवन के हर क्षेत्र और पड़ाव पर लागू होता है। हमें बस थोड़ा रुककर विचार करने और यह समझने की ज़रूरत है कि कैसे अनावश्यक बोझ, चाहे वह शारीरिक हो या अपराधबोध, अहंकार, पछतावा या आसक्ति, हमें धीमा कर देता है, हमारी ऊर्जा को खत्म कर देता है और हमारी दृष्टि को धुंधला कर देता है।

आइए, सबसे पहले उस सबसे बुनियादी छवि से शुरुआत करें जो हम रोज़ देखते हैं- स्कूल जाने वाला बच्चा। जब एक छोटा बच्चा अपनी पढ़ाई का सफ़र शुरू करता है, तो वह जिज्ञासा, मासूमियत और खुशी से भरा होता है। लेकिन जल्द ही, स्कूल बैग का वज़न बढ़ जाता है, शारीरिक वज़न, उम्मीदें, दबाव और तुलनाएँ। नर्सरी का बच्चा सिर्फ़ ज़रूरी चीज़ें ही ढोता है, जैसे रंगीन किताबें, कहानियाँ, खेल-कूद की गतिविधियाँ। लेकिन जैसे-जैसे वे बड़ी कक्षाओं में पहुँचते हैं, उनका बैग भारी होता जाता है, जो इस बात का प्रतीक है कि ज़िंदगी उन पर ज़रूरत से ज़्यादा बोझ डालने लगती है। जब बच्चा कम सामान ढोता है, तो वह ज़्यादा आज़ाद महसूस करता है। वह तेज़ी से चलता है। वह ज़्यादा स्पष्टता से सोचता है। वह अपनी यात्रा का आनंद लेता है। लेकिन जब वह बोझ से दबा होता है, तो उसका उत्साह कम हो जाता है, उसकी पीठ में दर्द होने लगता है और उसकी खुशी फीकी पड़ जाती है। यही बात बड़ों, पेशेवरों, नेताओं और जीवन की राह पर चलने वाले हर व्यक्ति पर लागू होती है।

जब भी हम यात्रा करते हैं, हमें एहसास होता है कि कम सामान लेकर चलना कितना आसान होता है। ज़्यादा सामान, ज़्यादा दर्द। जो लोग हल्के सामान के साथ यात्रा करते हैं, वे तेज़ी से पहुँचते हैं, बेहतर ढंग से ढलते हैं, और इस बात की कम चिंता करते हैं कि वे क्या खो सकते हैं। इसी तरह, जीवन में, हम सभी एक जगह से दूसरी जगह, एक दौर से दूसरे दौर में जाने वाले यात्री हैं। कुछ घर बदलते हैं। कुछ नौकरी बदलते हैं। कुछ शहर बदलते हैं, और कुछ एक रिश्ते से दूसरे रिश्ते में बदलते हैं। हर बदलाव में, जो लोग कम भावनात्मक और मानसिक बोझ ढोते हैं, वे बेहतर ढंग से समायोजित होते हैं। जब हम पिछली गलतियों, टूटे रिश्तों, शिकायतों या अतीत के गौरव से चिपके रहते हैं, तो हम खुद को वर्तमान को अपनाने या भविष्य की तैयारी करने से रोकते हैं। जैसा कि दार्शनिक सेनेका ने एक बार कहा था, “जो सर्वत्र है, वह कहीं नहीं है।” अतीत के दुखों और भविष्य के डर के बीच बँटा हुआ व्यक्ति कभी भी वर्तमान में पूरी तरह से नहीं जी पाता। इसलिए, क्षमा दूसरों और खुद के प्रति सबसे बड़ा बोझ हटाने वाला बन जाता है। जब हम क्षमा करते हैं तो हम अनावश्यक को त्याग देते हैं। हम खुद को मुक्त करते हैं।

आध्यात्मिक और दार्शनिक दृष्टिकोण से, कम बोझ का विचार लगभग सभी धार्मिक परंपराओं का केंद्रबिंदु है। भगवद् गीता में, भगवान कृष्ण अर्जुन को आसक्ति रहित, अहंकार रहित और फल की आशा रहित कर्म करने के लिए कहते हैं। यही कम बोझ है। बौद्ध धर्म में, आत्मज्ञान के मार्ग के लिए इच्छाओं और आसक्तियों का त्याग आवश्यक है। यही कम बोझ है। जैन धर्म में, त्याग और अतिसूक्ष्मवाद आध्यात्मिक प्रगति के साधन हैं। फिर से, कम बोझ। इस्लाम में भी, पैगंबर मुहम्मद ने कहा, “दुनिया से अलग हो जाओ, और अल्लाह तुमसे प्रेम करेगा।” इस्लाम में आध्यात्मिक मार्ग, संपत्ति या पद के मोह की तुलना में सादगी (ज़ुहद), विनम्रता और ईश्वरीय विधान में विश्वास को महत्व देता है। फिर से, कम बोझ। ईसाई परंपरा में भी, रेगिस्तान के पादरियों और मनीषियों की शिक्षाएँ आंतरिक मौन, एकांत और सांसारिक विकर्षणों से वैराग्य पर ज़ोर देती हैं। फिर से, कम बोझ। प्रत्येक परंपरा में, आध्यात्मिक प्रगति के मार्ग के लिए हमें कुछ त्यागना होगा और अधिक संग्रह नहीं करना होगा। महात्मा गांधी ने इस दर्शन को अपने दैनिक जीवन में अपनाया। अपरिग्रह में उनका विश्वास केवल भौतिक वस्तुओं तक सीमित नहीं था। यह अहंकार, घमंड और लालच को त्यागने के बारे में था। उन्होंने एक प्रसिद्ध उक्ति कही थी, “दुनिया में हर किसी की ज़रूरत के लिए पर्याप्त है, लेकिन हर किसी के लालच के लिए पर्याप्त नहीं है।”

इस संदर्भ में जब हम बोझ की बात करते हैं तो हमारा क्या मतलब होता है?
• भावनात्मक: आक्रोश, क्रोध, अनसुलझा आघात
• मानसिक: अति-विचार, अपराधबोध, आत्म-संदेह
• भौतिक: संचय, अनावश्यक संपत्ति
• आध्यात्मिक अहंकार, अभिमान, निर्णय, धार्मिकता

जितना अधिक हम इन्हें ढोते हैं, उतना ही हम शांति से दूर होते जाते हैं। जो व्यक्ति छोड़ना सीख जाता है, वह हल्का, मुक्त और जीवन और उसकी अनिश्चितताओं के साथ अधिक सहज हो जाता है।

सच मानिए,मैंने संघर्ष, जिम्मेदारी और चुनौतियों से भरा जीवन अबतक जिया है। बचपन से लेकर जनसेवा के अपने सफर तक, मैंने घोर गरीबी और सफलता की ऊँचाइयों, दोनों को देखा है।सबसे अधिक तो मैंने ईष्या को देखा है,अनुभव किया है,झेला है लेकिन इन सबके बावजूद, मैंने कम ढोने, अधिक देने के सरल सिद्धांत को अपनाया है। आज भी, बड़े संस्थानों और संगठनों का नेतृत्व करने के बावजूद, मैं कम या बिल्कुल भी बोझ न रखकर अपने निजी जीवन को सरल रखने का प्रयास करता हूँ। मैं अनावश्यक भौतिकवाद से बचता हूँ, जल्दी माफ़ कर देता हूँ, और असफलताओं पर ज़्यादा देर तक विचार नहीं करने की कोशिश करता हूँ। यही मेरे लिए अधिक आराम का मार्ग है। यह मानसिक शांति के बारे में है। यह रात में चैन की नींद सोने और त्वचा में प्राकृतिक चमक बनाए रखने के बारे में है। यह निर्णय लेने में स्पष्टता के बारे में है। जब आपका हृदय क्रोध या ईर्ष्या से घिरा नहीं होता, और आपका मन संदेह या अति-विश्लेषण से भारी नहीं होता, तो आप बेहतर काम करते हैं, बेहतर जीवन जीते हैं और बेहतर जीवन जीते हैं।

आज की दुनिया में, सफलता को अक्सर धन, वैभव,पद- प्रतिष्ठा और यहाँ तक कि अनुयायियों के संचय के साथ जोड़ा जाता है। लेकिन सच्ची सफलता सरलीकरण में निहित है। हम जितना अधिक संचय करते हैं, उतना ही अधिक खोने का डर होता है। जितना अधिक हम डरते हैं, उतना ही अधिक चिंतित होते हैं। महामारी ने हमें यह सच्चाई कठोर लेकिन स्पष्ट रूप से सिखाई। जब सब कुछ बंद हो गया, तो हमें एहसास हुआ कि जीवित रहने के लिए हमें वास्तव में कितनी कम चीज़ों की आवश्यकता है। यह हमारी अलमारी, लग्ज़री कारें या टीवी स्क्रीन नहीं थीं जिन्होंने हमें शांति दी, बल्कि स्वास्थ्य, परिवार और आंतरिक शक्ति थी। नेतृत्व में भी, सबसे प्रभावी नेता वे होते हैं

जो दूसरों को दूसरों को सौंपते हैं, भरोसा करते हैं और अपने अहंकार पर नियंत्रण रखते हैं। वे सूक्ष्म प्रबंधन नहीं करते। वे हर बोझ अकेले नहीं उठाते। वे टीमें बनाते हैं, दूसरों को सशक्त बनाते हैं, और नियंत्रण छोड़ देते हैं। इससे बोझ कम होता है।

अंततः, जीवन की यात्रा जन्म और मृत्यु के बीच है। और बीच में सब कुछ गतिमान है – निरंतर, अप्रत्याशित और अस्थायी। हम इस दुनिया में खाली हाथ आते हैं। और हम वैसे ही चले जाते हैं। बीच में हम जो कुछ भी इकट्ठा करते हैं वह केवल अस्थायी बोझ है। जो बचता है वह यह है कि हमने कैसे जिया। क्या हमने खुशी से जिया? क्या हमने क्षमा किया? क्या हमने उन चीजों को छोड़ दिया जो अब हमारे काम की नहीं थीं? क्या हमने अपना बोझ हल्का किया? यदि हाँ, तो हमारी यात्रा आरामदायक थी। शांतिपूर्ण। आध्यात्मिक। आज, मैं प्रत्येक पाठक को प्रोत्साहित करता हूँ, नैतिक निर्देश के रूप में नहीं, बल्कि इन प्रश्नों की जाँच करने के लिए एक हार्दिक निमंत्रण के रूप में। आप पाएँगे कि रास्ता साफ़ हो गया है। और आपका हृदय अंततः सुकून महसूस करता है। यही शांति की कुंजी है, क्षमा का मूल है, और एक अच्छे जीवन का रहस्य है। आइए हम सब अपने-अपने तरीके से कम बोझ उठाने का प्रयास करें, ताकि हम अधिक जी सकें,प्रसन्नता के साथ जी सकें।

इस साल दिसंबर तक कुल 81 शुभ विवाह मुहुर्त

फरवरी 2026 से शुक्र के उदय होने के साथ ही शादियों का शुभ मुहूर्त (Vivah Shubh Muhurat 2026) शुरू हो गया है, जो 12 अक्टूबर 2026 तक जारी रहेगा। हिंदू पंचांग के अनुसार 2026 में कुल 81 विवाह के शुभ दिन हैं, जिसमें 5 फरवरी से विशेष मांगलिक अनुष्ठान की शुरुआत हो रही है।

शुभ मुहूर्त: फरवरी से जुलाई 2026 के बीच लगभग 63 दिनों के लिए विवाह योग्य हैं, इसके बाद नवंबर-दिसंबर में 18 दिन मिलेंगे।

12 दिसंबर 2025 की रात 2.10 बजे शुक्र तारा अस्त हुआ था, इसी कारण जनवरी में पूरे महीने तक विवाह पूरी तरह वर्जित रहे।

वैदिक ज्योतिष में, शुभ तिथि का चयन नक्षत्रों (चंद्र नक्षत्रों) से प्रभावित होता है जो जोड़े को आजीवन आनंद प्रदान करते हैं। रोहिणी, मघा, उत्तराफाल्गुनी, हस्त और स्वाति विवाह के लिए बहुत शुभ हैं। 2025 में, विवाह के लिए सबसे शुभ दिन इन नक्षत्रों के अंतर्गत आते हैं, जो एक समृद्ध और भाग्यशाली विवाह के लिए आदर्श समय प्रदान करने के लिए सटीक तिथियों (चंद्र दिनों) और ग्रहों की स्थिति के साथ मेल खाते हैं।

24 फरवरी से 3 मार्च तक होलाष्टक है। इसमें विवाह वर्जित है। 14 मार्च से 13 अप्रैल तक खरमास रहेगा। इस अवधि में सूर्य मीन राशि में गोचर करेंगे। सूर्य के मीन राशि में रहने पर गुरु का प्रभाव क्षीण होता है इसलिए मांगलिक कार्य वर्जित रहते हैं। 13 अप्रैल के बाद सूर्य मेष राशि में प्रवेश करेंगे जिसके बाद विवाह व मंगल कार्य शुरू होंगेे। पुरुषोतम मास या अधिकमास 17 से 15 जून तक होगा, इसमें भी विवाह वर्जित होते हैं।

गुरु को जीवन में स्थिरता और विवेक का कारक माना गया है, जबकि शुक्र प्रेम, दांपत्य और भौतिक सुखों का प्रतिनिधि ग्रह है। इन दोनों का उदय अवस्था में होना विवाह के लिए अनिवार्य होता है। विवाह तिथि का चयन केवल दिन देखकर नहीं, बल्कि वार, नक्षत्र, योग, लग्न और वर-वधू की कुंडली के आधार पर किया जाता है।

सर्वोच्च न्यायालय की वाट्सप और मेटा को फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (3 फरवरी 2026) को वाट्सऐप (WhatsApp) और मेटा (Meta) की प्राइवेसी पॉलिसी को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने साफ कह दिया कि भारत के लोगों के निजी डेटा के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। चीफ जस्टिस सूर्याकांत की अगुवाई वाली बेंच ने कंपनी से पूछा कि वह भारतीय ग्राहकों की जानकारी दूसरी कंपनियों के साथ कैसे और क्यों साझा कर रही है? कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि आप देश के संविधान का मजाक उड़ा रहे हैं और डेटा चुराना आपका धंधा बन गया है।

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्याकांत ने वाट्सऐप की प्राइवेसी पॉलिसी की भाषा पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कंपनी के वकीलों से पूछा, “क्या बिहार या तमिलनाडु के किसी दूर-दराज गाँव में रहने वाला व्यक्ति आपकी इस मुश्किल भाषा को समझ पाएगा? सड़क पर फल बेचने वाली एक गरीब महिला या घर में काम करने वाली बाई क्या आपकी शर्तों को समझ सकती है?”

CJI ने आगे कहा कि आपकी पॉलिसी की भाषा इतनी चालाकी से लिखी गई है कि हम में से कुछ लोग भी उसे नहीं समझ पाते। उन्होंने कहा कि पॉलिसी साधारण ग्राहकों के नजरिए से होनी चाहिए। कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा, “आपने करोड़ों लोगों का डेटा ले लिया होगा। यह निजी जानकारी की चोरी करने का एक शालीन तरीका है। हम इसे इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं देंगे।”

‘डेटा साझा करना या वाट्सऐप छोड़ना- ये कोई विकल्प नहीं, एकाधिकार है’

जब वाट्सऐप की ओर से कहा गया कि ग्राहकों के पास पॉलिसी से बाहर निकलने (Opt-out) का विकल्प है, तो CJI सूर्याकांत ने इसे ‘मजाक’ बताया। उन्होंने कहा, “मार्केट में आपका पूरा एकाधिकार (Monopoly) है और आप कह रहे हैं कि आप विकल्प दे रहे हैं? आपका विकल्प यह है कि या तो वाट्सऐप छोड़ दो या हम डेटा साझा करेंगे। लोग इस सिस्टम के आदी हो चुके हैं और वे मजबूर हैं।”

CJI ने टिप्पणी की कि आप देश की प्राइवेसी के अधिकार के साथ खिलवाड़ नहीं कर सकते। उन्होंने कहा, “आज फेसबुक ने आपको खरीदा है, कल फेसबुक को कोई और खरीद लेगा और आप डेटा ट्रांसफर कर देंगे। आप इस देश के संविधानवाद का मजाक बना रहे हैं।”

Behaviroual डेटा और विज्ञापन का खेल: CJI ने साझा किया अपना अनुभव

जस्टिस बागची ने इस बात पर जोर दिया कि कोर्ट यह देखना चाहता है कि लोगों के व्यवहार (Behaviour) और रुझानों का विश्लेषण करके डेटा को कैसे ‘किराए’ पर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि डेटा के हर छोटे हिस्से की एक कीमत है और मेटा इसका इस्तेमाल ऑनलाइन विज्ञापनों में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए कर रहा है।

इस पर CJI सूर्यकांत ने अपना निजी अनुभव साझा करते हुए कहा, “अगर वाट्सऐप पर किसी डॉक्टर को मैसेज भेजा जाए कि तबीयत ठीक नहीं है और डॉक्टर कुछ दवाएँ लिख दे, तो तुरंत ही मुझे वैसे ही विज्ञापन आने लगते हैं। 5-10 मिनट के भीतर ईमेल और यूट्यूब पर उन दवाओं के मैसेज मिलने शुरू हो जाते हैं। यह कैसे हो रहा है?”

अदालत ने माँगा हलफनामा, मंत्रालय को बनाया पक्षकार

कंपनियों की दलीलों के बीच सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी कहा कि हमारा निजी डेटा न केवल बेचा जा रहा है, बल्कि उसका व्यावसायिक शोषण भी हो रहा है। कोर्ट ने अंततः मेटा और वाट्सऐप को अपना पक्ष रखते हुए हलफनामा दाखिल करने के लिए अगले सोमवार (9 फरवरी 2026) तक का समय दिया है। साथ ही, कोर्ट ने इस मामले में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को भी पक्षकार बनाया है।

अदालत ने स्पष्ट संदेश दिया कि कंपनियों के व्यावसायिक हित भारतीयों के मौलिक अधिकारों की कीमत पर नहीं हो सकते। यह पूरा मामला भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) द्वारा लगाए गए 213.14 करोड़ रुपए के जुर्माने से जुड़ा है, जिसे CCI ने वाट्सऐप की दबंगई और प्राइवेसी पॉलिसी के दुरुपयोग के कारण लगाया था।

श्रीलंका में भगवान बुद्ध के पवित्र देवनिमोरि अवशेषों की प्रदर्शनी

पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी 04 से 11 फरवरी, 2026 तक गंगारामया मंदिर, कोलंबो में आयोजित की जाएगी

गुजरात के राज्यपाल श्री आचार्य देवव्रत और गुजरात के उपमुख्यमंत्री श्री हर्ष संघवी भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे

पीआईबी दिल्ली द्वारा 02 फरवरी 2026 को 5:50 पीएम पर जारी

प्रविष्टि तिथि: 02 FEB 2026 5:50PM by PIB Delhi

अप्रैल 2025 में भारत के प्रधानमंत्री की श्रीलंका यात्रा के दौरान व्यक्त किए गए दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए, भारत श्रीलंका में भगवान बुद्ध के पवित्र देवनिमोरि अवशेषों की प्रदर्शनी के माध्यम से आध्यात्मिक पहुंच और सांस्कृतिक कूटनीति की एक महत्वपूर्ण पहल करने जा रहे है।

वर्तमान में वडोदरा के महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय में प्रतिष्ठित ये पवित्र अवशेष, 4 से 10 फरवरी 2026 तक सार्वजनिक दर्शन के लिए कोलंबो ले जाए जाएंगे, और 11 फरवरी 2026 को उनकी वापसी निर्धारित है।

यह पवित्र यात्रा बौद्ध धर्म की जन्मस्थली के रूप में भारत के स्थायी सभ्यतागत उत्तरदायित्व को रेखांकित करती है और भारत तथा श्रीलंका के बीच गहरे आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और जन-जन के संबंधों की पुष्टि करती है।

 

इन पवित्र अवशेषों के साथ गुजरात के राज्यपाल श्री आचार्य देवव्रत और गुजरात के उपमुख्यमंत्री श्री हर्ष संघवी के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल जाएगा, जिसमें वरिष्ठ भिक्षु और अधिकारी भी शामिल होंगे।

निर्धारित प्रोटोकॉल और अवशेषों को दी जाने वाली पवित्रता के अनुरूप, वे भारतीय वायु सेना के एक विशेष विमान से पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ यात्रा करेंगे। यह उस श्रद्धा को दर्शाता है जिसके साथ भारत अपनी पवित्र विरासत को संजोए हुए है।

यह प्रतिनिधिमंडल कोलंबो में औपचारिक, धार्मिक और आधिकारिक कार्यक्रमों में भाग लेगा। इनमें प्रदर्शनी का औपचारिक उद्घाटन और भारत की बौद्ध विरासत एवं समकालीन सांस्कृतिक जुड़ाव को उजागर करने वाली अन्य संबंधित प्रदर्शनियाँ शामिल होंगी।

 

पवित्र अवशेषों को कोलंबो के प्रतिष्ठित गंगारामया मंदिर में सार्वजनिक दर्शन के लिए स्थापित किया जाएगा, जो देश के सबसे प्रतिष्ठित और आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण बौद्ध संस्थानों में से एक है। उन्नीसवीं सदी के अंत में श्रद्धेय हिक्कादुवे श्री सुमंगला नायक थेरा द्वारा स्थापित यह मंदिर पूजा, शिक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के एक प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित हुआ है, जो इस प्रदर्शनी के लिए एक उपयुक्त और गरिमामय वातावरण प्रदान करता है।

एक ऐसा राष्ट्र जहाँ बौद्ध धर्म वहाँ के सांस्कृतिक लोकाचार, इतिहास और दैनिक जीवन को आकार देता है, वहां इस प्रदर्शनी के श्रीलंका के श्रद्धालुओं के बीच गहराई से गूंजने और दोनों देशों की साझा बौद्ध विरासत को और अधिक सुदृढ़ करने की उम्मीद है।

 

देवनिमोरि अवशेष गुजरात के अरावली जिले में शामलाजी के निकट स्थित देवनिमोरि पुरातात्विक स्थल से प्राप्त हुए हैं, जो अत्यधिक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व का स्थान है। पहली बार 1957 में प्रख्यात पुरातत्वविद् प्रो. एस. एन. चौधरी द्वारा इस स्थल की खोज की गई थी।

उत्खनन (खुदाई) के दौरान यहाँ महत्वपूर्ण बौद्ध संरचनाएं और अवशेष मिले, जो साझा युग की शुरुआती शताब्दियों में पश्चिमी भारत में बौद्ध धर्म के फलने-फूलने के जीवंत प्रमाण हैं। ये अवशेष न केवल एक अमूल्य पुरातात्विक खजाना हैं, बल्कि भगवान बुद्ध की शाश्वत शिक्षाओं—शांति, करुणा और सद्भाव—के जीवंत प्रतीक भी हैं।

देवनिमोरि स्तूप के भीतर आधार से 24 फीट की ऊंचाई पर मिली यह अवशेष मंजूषा (relic casket) हरे रंग के शिस्ट पत्थर (green schist) से बनी है। इस पर ब्राह्मी लिपि और संस्कृत भाषा में शिलालेख अंकित है, जिस पर लिखा है: “दशबल शरीर निलय” — अर्थात भगवान बुद्ध के शारीरिक अवशेषों का निवास स्थान।

इस मंजूषा के भीतर एक तांबे का बक्सा है, जिसमें पवित्र भस्म (राख) के साथ जैविक पदार्थ, रेशमी कपड़ा और मनके रखे हुए हैं। यह मंजूषा तीन भागों से बनी है:

मुख्य भाग : आधार 6.8 इंच, ऊंचाई 2.9 इंच, और लेज का व्यास 4 इंच, ढक्कन : व्यास 6.7 इंच, मोटाई 1.05 इंच, और ऊंचाई 0.7 इंच।

नाब: गोलाकार शीर्ष के साथ, जिसकी ऊंचाई 0.66 इंच और व्यास 1.1 इंच है।

तांबे के उस बक्से का ऊपरी हिस्सा और आधार समतल था, जिसके किनारे पर एक स्लिप-ऑन ढक्कन लगा हुआ था। इस बक्से के भीतर रेशमी कपड़ा, चांदी-तांबे की सोने की परत वाली एक बोतल, पवित्र भस्म युक्त जैविक सामग्री और आवरण के रूप में उपयोग की गई काली मिट्टी मिली थी।

सुराही के आकार की वह छोटी सोने की परत वाली बोतल सैगर बेस, बेलनाकार शरीर और स्क्रू-टाइप ढक्कन वाली संकरी गर्दन से युक्त थी।

पवित्र अवशेषों को अब एक डेसिकेटर में रखा गया है। इसे एयरटाइट कांच के भीतर सील किया गया है ताकि अंदर रखी वस्तुओं को और अधिक खराब होने से बचाया जा सके। अवशेषों को सोने की परत वाली चांदी-तांबे की बोतल और रेशमी कपड़े के साथ काटन बेस पर रखा गया है, ताकि उनका बेहतर संरक्षण सुनिश्चित हो सके।

 

अपने आध्यात्मिक महत्व से परे, श्रीलंका में पवित्र देवनिमोरि अवशेषों की यह प्रदर्शनी भारत की सांस्कृतिक कूटनीति को आगे बढ़ाकर और उसकी जन-केंद्रित विदेश नीति को सुदृढ़ करके एक महत्वपूर्ण राजनयिक उद्देश्य को पूरा करती है। श्रीलंका के साथ अपनी सबसे पवित्र बौद्ध विरासत को साझा करके, भारत साझा विश्वास, इतिहास और मूल्यों पर टिके द्विपक्षीय संबंधों की सभ्यतागत नींव को रेखांकित करता है।

यह प्रदर्शनी ‘सॉफ्ट पावर’ के एक शक्तिशाली माध्यम के रूप में कार्य करती है, जो आपसी विश्वास को बढ़ाने, जन-जन के बीच गहरे संबंधों को बढ़ावा देने और औपचारिक राजनयिक प्रयासों को एक गहन सांस्कृतिक एवं भावनात्मक गरिमा प्रदान करने में सहायक है। यह वैश्विक बौद्ध विरासत के एक जिम्मेदार संरक्षक के रूप में भारत की भूमिका की पुष्टि करती है और हिंद महासागर के पड़ोसी देशों में क्षेत्रीय सद्भाव को मजबूत करती है। साथ ही, यह दक्षिण एशिया में शांति, स्थिरता और सहकारी सह-अस्तित्व के भारत के दृष्टिकोण में श्रीलंका के एक महत्वपूर्ण भागीदार होने के स्थान को भी सुदृढ़ करती है।

 

श्रीलंका में होने वाली यह आगामी प्रदर्शनी दुनिया के साथ अपनी बौद्ध विरासत साझा करने की भारत की पुरानी परंपरा को और आगे बढ़ाती है। हाल के वर्षों में, भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों को थाईलैंड, मंगोलिया, वियतनाम, रूसी संघ और भूटान जैसे देशों में सफलतापूर्वक प्रदर्शित किया गया है, जिसने लाखों भक्तों को आकर्षित किया है और जन-जन के बीच संबंधों को मजबूत किया है।

श्रीलंका की यह प्रदर्शनी पवित्र पिपरहवा रत्न अवशेषों की हालिया और बहुचर्चित स्वदेश वापसी के बाद आयोजित हो रही है, जिसे प्रधानमंत्री ने एक अमूल्य राष्ट्रीय धरोहर की “घर वापसी” के रूप में सराहा था।

इस प्रदर्शनी के माध्यम से, भारत एक बार फिर बुद्ध धम्म के सार्वभौमिक संदेश—अहिंसा, करुणा और सह-अस्तित्व—को प्रसारित कर रहा है, और साथ ही सांस्कृतिक कूटनीति एवं वैश्विक सद्भाव के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि कर रहा है।

श्रीलंका के लिए देवनिमोरि अवशेषों की यह यात्रा शांति के एक शक्तिशाली प्रतीक, साझा आध्यात्मिक विरासत के उत्सव और भारत एवं श्रीलंका के बीच उस विशेष तथा स्थायी मित्रता के प्रमाण के रूप में खड़ी है, जो सदियों पुराने सभ्यतागत संबंधों और आपसी सम्मान में निहित है।

संस्कृति मंत्रालय, इटली के वेनिस में 61वें अंतर्राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी – ला बिएनाले डि वेनेज़िया में भारत का पवेलियन

यह पवेलियन भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर (NMACC) और सेरेन्डिपिटी आर्ट्स फाउंडेशन के साथ साझेदारी में प्रस्तुत किया जाएगा

 

इंडिया पवेलियन ने ला बिएनाले डि वेनेज़िया के 61वें इंटरनेशनल आर्ट एग्ज़िबिशन में अपनी भागीदारी की डिटेल्स की घोषणा की है, जिसमें ग्रुप एग्ज़िबिशन, ‘जियोग्राफ़ीज़ ऑफ़ डिस्टेंस: रिमेंबरिंग होम’ शामिल है। संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार से प्रस्तुत और डॉ. अमीन जाफ़र की ओर से क्यूरेट किया गया यह एग्ज़िबिशन दुनिया के मंच पर एक महत्वपूर्ण क्षण में देश की सांस्कृतिक गहराई को दिखाएगा। इंडिया पविलियन 2019 के बाद पहली बार नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर और सेरेन्डिपिटी आर्ट्स फ़ाउंडेशन, जो भारत के दो प्रमुख मल्टी-डिसिप्लिनरी सांस्कृतिक संस्थान हैं, के साथ साझेदारी में वेनिस लौट रहा है।

केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि ला बिएनाले डि वेनेज़िया में भारत की वापसी गर्व का क्षण है और सांस्कृतिक आत्मविश्वास का प्रतीक है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हमारा राष्ट्रीय पवेलियन एक समकालीन भारत को दिखाएगा जो अपनी सभ्यतागत स्मृति में गहराई से जुड़ा हुआ है और साथ ही आज की दुनिया से पूरी तरह जुड़ा हुआ है। केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि इस पविलियन के माध्यम से, भारत हमारी सांस्कृतिक विविधता की ताकत, हमारे रचनात्मक समुदायों की जीवंतता और वैश्विक मंच पर हमारे राष्ट्र को कैसे देखा और समझा जाता है, इसमें कला और संस्कृति की भूमिका की पुष्टि करता है।

संस्कृति मंत्रालय के सचिव श्री विवेक अग्रवाल ने कहा कि इंडिया पवेलियन ऐसे कलाकारों को एक साथ लाता है जिनकी कला समकालीन भारत की बदलती वास्तविकताओं को दिखाती है। श्री अग्रवाल ने कहा कि अलग-अलग क्षेत्रों और मटेरियल परंपराओं में काम करते हुए, ये कलाकार बहुत ही व्यक्तिगत और इनोवेटिव तरीकों से भारत की वैश्विक आवाज़ को सामने रखते हैं। उन्होंने आगे कहा कि उनका काम दिखाता है कि कैसे भारत की क्रिएटिव प्रतिभा बदलती दुनिया में यादों, जगह और बदलाव के सवालों से सार्थक रूप से जुड़ी हुई है।

श्रीमती ईशा अंबानी ने नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर की ओर से कहा कि नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर को संस्कृति मंत्रालय के साथ मिलकर बिएनेल में भारत के नेशनल पविलियन को पेश करते हुए खुशी हो रही है, जिसमें हमारे कुछ सबसे प्रभावशाली कलाकार शामिल हैं। उनके काम की समृद्धि और विविधता समकालीन भारत की जटिलताओं और रचनात्मक महत्वाकांक्षा को दर्शाती है, साथ ही हमारे देश की शाश्वत परंपराओं का जश्न मनाती है। यह प्रोजेक्ट कला और संस्कृति के लिए हमारे विजन को रेखांकित करता है ताकि एक वैश्विक संवाद को बढ़ावा दिया जा सके जो सीमाओं से परे हो, और भारत और दुनिया की सर्वश्रेष्ठ चीज़ों को एक साथ लाए।

सभी पाँच भाग लेने वाले भारतीय कलाकार – अलवर बालासुब्रमण्यम (बाला), सुमाक्षी सिंह, रंजनी शेट्टार, असीम वकीफ़ और स्कार्मा सोनम ताशी – उन मटेरियल कल्चर परंपराओं का इस्तेमाल करते हैं जो हज़ारों सालों से चली आ रही हैं, ताकि घर के विचार से एक भावनात्मक जुड़ाव पैदा किया जा सके। कलाकारों की अलग-अलग भौगोलिक पृष्ठभूमि, अनुभव और अभ्यास के बावजूद, वे सभी अपने काम को बनाने और पेश करने में भारत की पारंपरिक ऑर्गेनिक चीज़ों का इस्तेमाल करने में एकजुट हैं।

जियोग्राफ़ीज़ ऑफ़ डिस्टेंस: रिमेंबरिंग होम यह बताएगा कि कैसे, जिनकी ज़िंदगी बदलाव या दूरी से बनती है, उनके लिए घर एक तय जगह से ज़्यादा एक पोर्टेबल स्थिति बन जाता है: कुछ यादें, कुछ चीज़ें, कुछ रीति-रिवाज, कुछ पर्सनल माइथोलॉजी। यह प्रदर्शनी भारत में तेज़ी से हो रहे बदलाव के एक पल को दिखाती है, क्योंकि शहर हॉरिजॉन्टल और वर्टिकल दोनों तरह से बढ़ रहे हैं, जिससे आस-पड़ोस अभूतपूर्व गति से बदल रहे हैं। आज भारतीय पहले से कहीं ज़्यादा मोबाइल हैं, दोनों ही एक ऐसे देश में जो आर्थिक उछाल के दौर से गुज़र रहा है और एक दिखाई देने वाले और मुखर ग्लोबल डायस्पोरा के रूप में। दुनिया की आबादी का लगभग 20 प्रतिशत होने के बावजूद, भारतीय अपनी जड़ों और संस्कृति से गहराई से जुड़े हुए हैं। जैसे-जैसे कभी जानी-पहचानी भौतिक जगहें बदलती और नई होती हैं, हमें यह सोचने के लिए कहा जाता है कि क्या घर एक जगह है या भावनाओं और यादों की एक अभिव्यक्ति है।

पूरी प्रदर्शनी में, ‘घर’ के तत्व टूटे हुए, हवा में लटके हुए, मचान पर बने हुए, या कमज़ोर दिखाई देते हैं, क्योंकि कलाकार उस जगह के लिए लालसा और गहरे जुड़ाव की भावना को तलाशते हैं जिससे हम जुड़े हुए हैं। हर कलाकार भारत के बदलाव, गतिशीलता और ग्लोबल डायस्पोरा पर विचार करता है। प्रदर्शनी में शामिल कलाकार भारत में कला के क्षेत्र में सबसे आगे रहने वाले कई क्षेत्रों और पीढ़ियों के कलाकारों का प्रतिनिधित्व करते हैं:

  • अलवर बालासुब्रमण्यम (बाला) ग्रामीण तमिलनाडु में एक स्टूडियो से काम करते हैं, जिनका काम प्राकृतिक दुनिया और उनके घर के आसपास के लैंडस्केप के साथ एक करीबी बातचीत से उभरता है, जिसे वे उस इलाके की मिट्टी और चिकनी मिट्टी से बनाते हैं जहाँ वे रहते हैं।
  • सुमाक्षी सिंह नई दिल्ली की एक कलाकार हैं जो कढ़ाई वाले धागे से अलौकिक इंस्टॉलेशन बनाती हैं, जो यादों को ही एक आर्किटेक्चरल माध्यम में बदल देती हैं।

  • रंजनी शेट्टार मूर्तिकला के कामों के ज़रिए भारत की प्राचीन शिल्प परंपराओं को तलाशती हैं जो गुरुत्वाकर्षण को चुनौती देते हुए दिखाई देते हैं। कर्नाटक में काम करते हुए, वह प्राकृतिक सामग्रियों को पूरी तरह से हाथ से ऑर्गेनिक फूलों के रूपों में बदलती हैं, जो एक तैयार काम के धीरे-धीरे सामने आने और उसकी छिपी हुई संभावनाओं को दिखाता है।
  • आर्किटेक्ट के तौर पर ट्रेनिंग पाए असीम वक़ीफ़, अपनी मूर्तिकला इंस्टॉलेशन के लिए ऑर्गेनिक और फेंके हुए मटीरियल का इस्तेमाल करते हैं, और पब्लिक स्पेस में कंजम्पशन और सस्टेनेबिलिटी के मुद्दों को उठाते हैं। उनका काम दर्शकों को सिर्फ़ देखने के बजाय उनके स्ट्रक्चर में हिस्सा लेने और उन्हें एक्टिवेट करने के लिए इनवाइट करता है।
  • स्कार्मा सोनम ताशी अपने काम में अपने होमटाउन लद्दाख के लैंडस्केप और आर्किटेक्चर को दिखाते हैं, वे ऑर्गेनिक रीसायकल मटीरियल और पेपर माशे जैसी पारंपरिक तकनीकों का इस्तेमाल करके प्राकृतिक दुनिया की नाजुकता को दिखाते हैं, और इकोलॉजी और सांस्कृतिक संरक्षण के बारे में सवाल उठाते हैं।

इस प्रदर्शनी को डॉ. अमीन जाफ़र ने क्यूरेट किया है, जिन्होंने यह प्रोजेक्ट ला बिएनाले डि वेनेज़िया की थीम, इन माइनर कीज़ के जवाब में तैयार किया है, जिसे दिवंगत क्यूरेटर कोयो कौओह ने सोचा था।

भारत वेनिस में एक तमाशे के तौर पर नहीं, बल्कि आत्मविश्वास से भरी एक फुसफुसाहट के रूप में आता है। संगीत, मूवमेंट और फुसफुसाहट के ज़रिए, इंडिया पवेलियन ऐसे पल भर के दखल पैदा करता है जो शहर की रोज़ाना की लय में घुल जाते हैं – सुबह पुल पर दिखाई देते हैं, शाम को गूंजते हैं, दोपहर की रोशनी में साकार होते हैं। इंडिया पविलियन की एक मुख्य बात बिएनाले के दौरान संगीत, परफॉर्मेंस, कविता और बातचीत का एक क्यूरेटेड प्रोग्राम होगा।

सेरेंडिपिटी आर्ट्स के फाउंडर पैट्रन श्री सुनील कांत मुंजाल ने कहा: “सेरेंडिपिटी आर्ट्स जीने, साझा और गतिशील कलात्मक अभ्यास के लिए प्लेटफॉर्म बनाता है। ला बिएनाले डि वेनेज़िया में इंडिया पवेलियन इस फिलॉसफी को ग्लोबल स्टेज पर ले जाता है। विज़ुअल आर्ट्स प्रोग्राम के साथ-साथ, हमारी भागीदारी परफॉर्मेंस और पार्टिसिपेशन के ज़रिए पवेलियन को एक्टिव करेगी, और दर्शकों को यादों, जगह और अपनेपन के विचारों से कई रूपों में जुड़ने के लिए इनवाइट करेगी। यह कोलैबोरेशन सेरेंडिपिटी के इस विश्वास को दिखाता है कि भारत की सांस्कृतिक अभिव्यक्ति तब सबसे ज़्यादा पावरफुल होती है जब यह इंटरडिसिप्लिनरी हो और बातचीत के लिए खुली हो।”

अल थानी कलेक्शन के क्यूरेटर और डायरेक्टर डॉ. अमीन जाफ़र ने कहा: “61वीं इंटरनेशनल आर्ट एग्ज़िबिशन, जिसकी थीम ‘इन माइनर कीज़’ है, दूरी की बारीकियों और घर की यादों की स्थायी शक्ति को समझने का एक मार्मिक मौका देती है। इंडिया पवेलियन ऐसे कलाकारों को एक साथ लाता है जिनके काम लगातार बदलते दुनिया के अनुभव को दिखाते हैं। यह पवेलियन घर को एक तय फिजिकल जगह के तौर पर नहीं, बल्कि खुद के अंदर ले जाए जाने वाले एक इमोशनल स्पेस, संस्कृति, पर्सनल माइथोलॉजी और भावनाओं के भंडार के तौर पर देखता है। भारतीय सभ्यता से जुड़ी चीज़ों का इस्तेमाल करके, चुने हुए कलाकार घर की नाज़ुक प्रकृति पर एक अनोखा ध्यान लगाते हैं, जो पर्सनल और यूनिवर्सल दोनों है, शांत और पक्का है। इस काम के ज़रिए, हमारे कलाकार एक साथ मिलकर एक सामूहिक भारतीय आवाज़ बनाते हैं जो इस बिएनेल के लिए कोयो कुओह के विज़न से मेल खाती है।

हम भारतीयों को विदेशी गणित पढ़ाकर हमें हमारे सरल भारतीय गणित से दूर कर दिया गया

क्या आपको स्कूल में गणित कठिन लगता था? क्या आपके बच्चे को भी लगता है? यदि हाँ, तो इसका समाधान क्या है: शिक्षक बदलें या बच्चा बदलें? गणित की कठिनाइयों के लिए शिक्षक या बच्चे को दोष देना एक आम लेकिन गलत तर्क है। वास्तव में, शिक्षकों या छात्रों की समस्याएँ सभी विषयों को समान रूप से प्रभावित करती हैं, न कि केवल गणित को। सही समाधान गणित को बदलना है। यह असंभव लगता है। लोग भोलेपन से मानते हैं कि गणित सार्वभौमिक है। वास्तव में, आज माध्यमिक विद्यालय से आगे जो गणित पढ़ाया जाता है, उसे औपचारिक गणित कहा जाता है; इसकी शुरुआत केवल 20 वीं शताब्दी में डेविड हिल्बर्ट और बर्ट्रेंड रसेल के साथ हुई थी। यह उस सामान्य गणित से भिन्न है जिसे लोग हजारों वर्षों से दुनिया भर में करते आ रहे हैं और आज भी बालवाड़ी में करते हैं।

औपचारिक गणित गणित की कठिनाई को बहुत बढ़ा देता है, लेकिन इसके व्यावहारिक मूल्य में कोई वृद्धि नहीं करता। गणित का व्यावहारिक मूल्य सामान्य गणित में प्रयुक्त कुशल गणना तकनीकों से आता है, न कि जटिल औपचारिक प्रमाणों से। उदाहरण के लिए, 1+1=2 के प्रमाण के लिए व्हाइटहेड और रसेल को अपनी पुस्तक प्रिंसिपिया में 368 पृष्ठों के जटिल प्रतीकात्मकता का उपयोग करना पड़ा । वह प्रमाण किसी किराने की दुकान में बोझ बन जाता है। इसके विपरीत, सामान्य गणित आसान है। एक सेब और एक सेब मिलकर दो सेब होते हैं, जैसा कि ज्यादातर लोग बचपन में सीखते हैं। तो क्या हमें सभी स्तरों पर सामान्य गणित पर वापस लौट जाना चाहिए?

अब हमारे स्कूल की पाठ्यपुस्तकें औपचारिक गणित के शिक्षण को इस प्रकार उचित ठहराती हैं। एनसीईआरटी 1 (या विभिन्न राज्यों) की कक्षा 9 की गणित की पाठ्यपुस्तक में यूक्लिड नामक एक प्राचीन यूनानी विद्वान की कहानी बताई गई है, जिन्होंने निगमनात्मक तर्क का उपयोग करके सबसे पहले गणित को “व्यवस्थित” रूप से हल किया था। पाठ्यपुस्तक में आगे कहा गया है कि मिस्र, भारत, इराक, चीन और दक्षिण अमेरिका के अन्य सभी विद्वान ऐसा करने में असफल रहे। इसमें बच्चों को यूक्लिड की छवि एक श्वेत व्यक्ति के रूप में दिखाई गई है। इस कहानी के आधार पर, छात्रों को बताया जाता है कि हमें “यूक्लिड” का अनुकरण करके गणित करना चाहिए, जिन्हें “वास्तविक” गणित (अर्थात औपचारिक गणित) का जनक मानकर महिमामंडित किया जाता है।

यह कहानी सामान्य गणित को हीन बताती है। लेकिन औपचारिक गणित की कथित श्रेष्ठता को साबित करने के लिए कोई ठोस तर्क नहीं दिया गया है, बस एक कहानी है। क्या बच्चे इसकी जाँच करते हैं? नहीं; लेकिन कहानी झूठी है। इसकी असत्यता को उजागर करने के लिए, मैंने यूक्लिड के बारे में किसी भी ठोस (प्राथमिक) प्रमाण के लिए 2 लाख रुपये का पुरस्कार घोषित किया है। यह पुरस्कार कई वर्षों से अनुत्तरित है। क्यों? विशेषज्ञों को पता है कि ” यूक्लिड” के लिए कोई प्रमाण नहीं है और इसके विपरीत कई प्रमाण मौजूद हैं ।

हमारे अपने “विशेषज्ञ”—वे लोग जिन्होंने एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकें लिखीं—चुनौती दिए जाने पर सबूत पेश करने में असमर्थ हैं। उन्हें या तो अपनी गलतियाँ स्वीकार करनी चाहिए, या सार्वजनिक रूप से अपने दावों का बचाव करना चाहिए, लेकिन वे दोनों में से कुछ भी नहीं करते। चूंकि हम पूरी तरह से ऐसे “विशेषज्ञों” पर निर्भर हैं, इसलिए हम गलत पाठ्यपुस्तकों से ही पढ़ते रहते हैं! हालांकि, इसमें शामिल निहित स्वार्थ केवल “विशेषज्ञों” के अहंकार या अपनी नौकरी बचाने की इच्छा से कहीं अधिक गहरे हैं। इसलिए, “यूक्लिड” की कहानी को सार्वजनिक रूप से चुनौती देने या औपचारिक गणित के संबंधित दर्शन को चुनौती देने के प्रयासों को अक्सर दबा दिया जाता है।

सेंसरशिप के एक उदाहरण के तौर पर, मैंने एक लेख लिखा, “गणित को उपनिवेशवाद से मुक्त करने के लिए, इसके झूठे इतिहास और गलत दर्शन का सामना करें”। यह लेख अक्टूबर 2016 में द कन्वर्सेशन (वैश्विक संस्करण) में प्रकाशित हुआ था। इस लेख ने हलचल मचा दी। यह वायरल हो गया और लगभग 17,000 हिट्स (60% अमेरिका और अफ्रीका में) दर्ज किए, इससे पहले कि दक्षिण अफ्रीका के संपादक ने इसे अचानक हटा दिया। अगर लेख में कुछ गलत था, तो द कन्वर्सेशन को सार्वजनिक रूप से सुधार प्रकाशित करना चाहिए था। कोई भी वास्तविक त्रुटि नहीं बता सका। इसलिए, इस लेख को हटाने का औचित्य निजी तौर पर इस कमजोर संपादकीय आधार पर दिया गया कि मैंने अपने ही काम, जैसे कि अपनी किताब, का हवाला दिया था। 3 भारत में भी, इस लेख को पहले द वायर और स्क्रॉल दोनों ने पुनः प्रकाशित किया और फिर हटा दिया , हालांकि द वायर ने माफी के साथ लेख को वापस प्रकाशित करके सराहनीय काम किया। वर्तमान में, वह सेंसर किया गया लेख मेरे ब्लॉग 4 , द वायर 5 और साइंस2.0 पर उपलब्ध है । 6 इसे हाल ही में एक अन्य सहकर्मी-समीक्षित जर्नल लेख के हिस्से के रूप में पूरी तरह से पुन: प्रस्तुत किया गया था, 7 इसलिए, फिर से, इसमें कुछ भी स्पष्ट रूप से गलत नहीं था।

तो, इसे प्रतिबंधित क्यों किया गया? गणित के शिक्षण में झूठे मिथक और प्रतिबंध इतने आवश्यक क्यों हैं?

इसका उत्तर तीन अप्रिय तथ्यों से जुड़ा है। पहला, गणित पढ़ाने का यह तरीका औपनिवेशिक शिक्षा के माध्यम से हम तक पहुंचा, जो 19 वीं शताब्दी में जब पहली बार भारत में आई तो पूरी तरह से चर्च आधारित शिक्षा थी : न केवल मिशन स्कूल, बल्कि ऑक्सफोर्ड और कैम्ब्रिज जैसे सभी प्रारंभिक पश्चिमी विश्वविद्यालय चर्च द्वारा स्थापित किए गए थे, और तब तक पूरी तरह से उसके नियंत्रण में रहे।

दूसरा, यूक्लिड की ज्यामिति करने की कथित तौर पर “श्रेष्ठ” विधि सदियों तक चर्च के पाठ्यक्रम का हिस्सा रही । क्यों? क्योंकि यह पाठ्यक्रम मिशनरियों को तैयार करने के लिए बनाया गया था। भावी मिशनरियों को दूसरों को समझाने की क्षमता सिखाई जाती थी: उन्हें ईसाई धर्मग्रंथों को अस्वीकार करने वालों को समझाने के लिए तर्क का उपयोग करना सिखाया जाता था। इसलिए, चर्च ने गणित का उपयोग तर्क सिखाने के लिए किया, न कि व्यावहारिक गणना सिखाने के लिए।

तीसरा और सबसे कम ज्ञात तथ्य यह है: “तर्क” शब्द में एक पेचीदा दोहरा अर्थ निहित है। यह तर्क करने के सामान्य तरीकों को संदर्भित नहीं करता, जैसा कि लोग आसानी से मान लेते हैं। बल्कि यह चर्च द्वारा विकसित तर्क के एक विशेष तरीके को संदर्भित करता है, जिसका उद्देश्य उसके “तर्क के धर्मशास्त्र” (जिसे उसने धर्मयुद्धों के दौरान अपनाया था) का समर्थन करना था। संक्षेप में, चर्च ने तर्क को अनुभवजन्य तथ्यों से अलग कर दिया । ऐसा करने का उसके पास ठोस कारण था। अनुभवजन्य तथ्य चर्च के सिद्धांतों के विपरीत हैं: ईश्वर, स्वर्ग, नरक, पुनरुत्थान, कुंवारी जन्म जैसी धारणाएँ सभी अनुभवजन्य तथ्यों के विपरीत हैं। अपने अनुभव-विरोधी सिद्धांतों का बचाव करने के लिए, चर्च ने अनुभवजन्य प्रमाणों को निम्नतर घोषित कर दिया। उसने घोषणा की कि तर्क पर आधारित, लेकिन तथ्यों से अलग, “शुद्ध निगमनात्मक प्रमाण” अचूक और “श्रेष्ठ” हैं। तर्क का यह चर्च सिद्धांत ठीक वही है जिसे हमारे स्कूली पाठ “यूक्लिड” और उसके “श्रेष्ठ” निगमनात्मक प्रमाणों की कहानी के माध्यम से बढ़ावा देते हैं। संयोगवश, वह कहानी चर्च के सिद्धांतों से संबंध को छिपाने का भी काम करती है।

चर्च ने ‘ एलिमेंट्स’ नामक पुस्तक को पाठ्यपुस्तक के रूप में इस्तेमाल किया, इसलिए इसके लेखक का धर्मशास्त्रीय रूप से सही होना आवश्यक था, और चर्च केवल प्रारंभिक यूनानियों को ही अपना “मित्र” मानता था। अतः, पुस्तक के लेखक को एक अज्ञात प्रारंभिक यूनानी घोषित किया गया। चर्च ने कभी किसी अश्वेत या महिला को पोप नियुक्त नहीं किया, और यदि वह ‘एलिमेंट्स’ की वास्तविक लेखिका को एक विधर्मी अश्वेत महिला के रूप में स्वीकार करता, जिसका बलात्कार कर चर्च में बेरहमी से हत्या कर दी गई थी, जैसा कि मैंने अपने प्रतिबंधित लेख में दावा किया था, तो चर्च की घोर बदनामी होती। साइंस 2.0 ने मेरे लेख का शीर्षक बदलकर “क्या यूक्लिड एक अश्वेत महिला थी?” कर दिया, लेकिन उसमें विधर्मी होने के कारण उसकी लिंचिंग का ज़िक्र नहीं जोड़ा।

चर्च ने मूल ग्रंथ ‘ एलिमेंट्स ‘ की घोर “पुनर्व्याख्या” करके उसका उपयोग किया। यह झूठा दावा किया गया कि इस ग्रंथ में विशुद्ध निगमनात्मक प्रमाण हैं, जो चर्च के उस धर्मशास्त्र के अनुरूप हैं जिसमें अनुभवजन्य तथ्यों से अलग तर्क का उपयोग किया जाता है। यह दावा, जिसे हमारे स्कूली पाठों में बार-बार दोहराया गया है, तथ्यों के घोर विपरीत है। वास्तविकता यह है कि ‘ एलिमेंट्स’ ग्रंथ में पहले प्रस्ताव से लेकर अंतिम प्रस्ताव तक एक भी ऐसा विशुद्ध निगमनात्मक प्रमाण नहीं है। विडंबना यह है कि यह स्वयं दर्शाता है कि निगमनात्मक प्रमाण कितने त्रुटिपूर्ण होते हैं—सदियों तक, अमान्य निगमनात्मक प्रमाणों को सभी पश्चिमी विद्वानों द्वारा गलत तरीके से मान्य मान लिया गया। जब 20 वीं शताब्दी की शुरुआत में इस सत्य को स्वीकार किया गया, तो पश्चिमी गौरव को उसके चरम पर होने के समय टूटने से बचाने के लिए एक त्वरित विकल्प का आविष्कार करना पड़ा।

20 वीं शताब्दी के आरंभ में पश्चिम द्वारा आविष्कृत “यूक्लिडियन” गणित का विकल्प हिल्बर्ट और रसेल का औपचारिक गणित था। रसेल का 1+1=2 का प्रमाण इतना जटिल इसलिए है क्योंकि इसमें यह सिद्ध करना संभव नहीं है कि एक सेब और एक सेब मिलकर दो सेब होते हैं। औपचारिक गणित धार्मिक सिद्धांतों का अनुकरण करता है; यह इस विश्वास पर आधारित है कि अनुभवजन्य प्रमाणों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने से सत्य का कोई “श्रेष्ठ” रूप प्राप्त होता है, इसलिए यह अनुभवजन्य प्रमाणों के उपयोग को प्रतिबंधित करता है।

यह धारणा सरासर बेबुनियाद है। वास्तव में, तथ्यों से अलग तर्क का इस्तेमाल किसी भी बेतुकी बात को साबित करने के लिए किया जा सकता है। इसे समझाने के लिए, मैंने अपने प्रतिबंधित लेख में सींग वाले खरगोश का उदाहरण दिया था। (1) सभी जानवरों के दो सींग होते हैं। (2) खरगोश एक जानवर है, इसलिए, (3) खरगोश के दो सींग होते हैं। बेशक, निष्कर्ष बेतुका है, और आधार वाक्य (1) भी। लेकिन हम यह केवल एक अनुभवजन्य तथ्य के रूप में जानते हैं; यदि अनुभवजन्य तथ्यों के सभी संदर्भों पर प्रतिबंध लगा दिया जाए, तो हमारे पास आधार वाक्य (1) की सत्यता या असत्यता जानने का कोई तरीका नहीं है। जैसा कि रसेल ने कहा था, औपचारिक गणित में हम “किसी भी परिकल्पना को लेते हैं जो मनोरंजक लगती है, और उसके परिणामों का अनुमान लगाते हैं”, 8 और मैं इस परिकल्पना से स्पष्ट रूप से मनोरंजक हूं कि सभी जानवरों के दो सींग होते हैं, और खरगोशों के लिए इसके अनुमानित परिणाम। यह विशुद्ध तर्क पर आधारित निष्कर्षों को दर्शाता है जिन्हें चर्च अचूक बताकर महिमामंडित करता है।

अन्य लोगों ने अनुभवजन्य प्रमाण के साथ-साथ तर्क का भी अलग-अलग तरीके से उपयोग किया। उदाहरण के लिए, भारत में दर्शनशास्त्र के सभी पारंपरिक स्कूलों ने अनुभवजन्य ( प्रत्यक्ष ) को प्रमाण के प्राथमिक साधन के रूप में स्वीकार किया। यह बात शूल्ब सूत्र ( धारा 9 ) के समय से ही पारंपरिक भारतीय गणित (सामान्य गणित) के लिए भी सत्य थी।

अब, रूढ़िवादी सोच वाले और उपनिवेशवादी मानसिकता वाले लोग अक्सर अनुभवजन्य प्रमाणों को तर्क के खंडन के साथ जोड़कर देखते हैं। लेकिन यह सच नहीं है: विज्ञान की तरह, भारतीय दर्शन की अधिकांश प्रणालियाँ और पारंपरिक भारतीय गणित, अनुभवजन्य प्रमाणों और तर्क दोनों को स्वीकार करते थे । एकमात्र अपवाद लोकायत या जन दार्शनिक थे, जिन्होंने अनुभवजन्य तथ्यों पर आधारित न होने वाले अनुमानों के प्रति आगाह किया था। भेड़िये के पंजों का उनका उदाहरण ऊपर दिए गए सींग वाले खरगोश के उदाहरण के समान है: भेड़िये के पदचिह्न देखकर, शहर के लोगों ने अनुमान लगाया कि आसपास कोई भेड़िया है। वास्तव में, ये पदचिह्न एक मनुष्य द्वारा ठोस अनुभवजन्य तथ्यों पर आधारित न होने वाले अनुमानों की मूर्खता को प्रदर्शित करने के लिए बनाए गए थे।

लेकिन यह मूर्खतापूर्ण धारणा कि अनुभवजन्य तथ्यों से बचने से सत्य का उच्चतर रूप प्राप्त होता है, आज भी हम सिखाते हैं। माध्यमिक विद्यालय की शुरुआत में ही बच्चों को औपचारिक गणित और अनुभवजन्य तथ्यों से बचने की शिक्षा इस प्रकार दी जाती है: एनसीईआरटी की कक्षा 6 की पाठ्यपुस्तक में कहा गया है कि एक ज्यामितीय बिंदु अदृश्य होता है। इसमें यह भी कहा गया है कि एक बिंदु किसी स्थान का निर्धारण करता है। हाल ही में आयोजित दो कार्यशालाओं में, मैंने कई स्कूली गणित शिक्षकों और छात्रों से पूछा कि वे कैसे जानते हैं कि एक बिंदु किस स्थान का निर्धारण करता है, जबकि बिंदु अदृश्य है। उनके पास कोई उत्तर नहीं था। लेकिन उन्होंने अपनी अज्ञानता को ईमानदारी से स्वीकार किया, उन उपनिवेशित बुद्धिजीवियों और “विशेषज्ञों” के विपरीत जो अदृश्य बिंदुओं के सिद्धांत का बचाव ठीक उसी तरह करते हैं जैसे दरबारी सम्राट के अदृश्य नए वस्त्रों का बचाव करते थे।

बहुत से लोग कहते हैं कि गणित कठिन है क्योंकि यह अमूर्त है। यह गलत है। ‘कुत्ता’ शब्द एक अमूर्त अवधारणा है, क्योंकि कुत्ते अलग-अलग आकार और आकृति के होते हैं। लेकिन बच्चों को ‘कुत्ता’ जैसी अमूर्त अवधारणा को समझने में कोई कठिनाई नहीं होती, क्योंकि वे आसानी से कुत्ते की ओर इशारा कर सकते हैं। इसी प्रकार, बच्चों को ‘बिंदु’ जैसी अमूर्त अवधारणा को समझने में कोई कठिनाई नहीं होती, हालांकि बिंदु विभिन्न आकारों, आकृतियों और रंगों में पाए जाते हैं। लेकिन एक अदृश्य बिंदु ऐसी अमूर्त अवधारणा नहीं है: क्योंकि किसी बिंदु की ओर इशारा नहीं किया जा सकता। न ही किसी अन्य घटना से अदृश्य बिंदुओं के अस्तित्व का अनुमान लगाया जा सकता है, जिस तरह से किसी बुलबुला कक्ष में इलेक्ट्रॉनों की पटरियों से या धुएं से आग का अनुमान लगाया जा सकता है। आज स्कूलों में जिस प्रकार से ज्यामितीय बिंदु पढ़ाया जाता है, वह विशुद्ध रूप से तत्वमीमांसा है; इसका कोई वास्तविक अस्तित्व नहीं है। लोग दुर्भाग्यवश अवास्तविक चीजों के बारे में चर्च की तत्वमीमांसा को अमूर्त अवधारणा के साथ मिला देते हैं।

इसके अलावा, एनसीईआरटी की छठी कक्षा की पाठ्यपुस्तक में रेखा को अदृश्य बताया गया है । इसलिए मैंने शिक्षकों और छात्रों से पूछा कि वे इस अभिधारणा को कैसे सिद्ध कर सकते हैं कि किन्हीं दो बिंदुओं से ठीक एक सीधी रेखा गुजरती है। उनके पास फिर से कोई उत्तर नहीं था। मैंने उन्हें यह भी दिखाया कि किन्हीं दो वास्तविक बिंदुओं को कई सीधी दिखने वाली रेखाओं से जोड़ा जा सकता है, इसलिए यह अभिधारणा अनुभव पर आधारित नहीं है, बल्कि पूरी तरह से पश्चिमी मान्यता पर आधारित है।

चर्च की वह रणनीति जिसमें छात्रों को काल्पनिक विषयों के बारे में पढ़ाया जाता है, उन्हें सामान्य ज्ञान त्यागने और पश्चिमी सिद्धांतों पर निर्भर रहने के लिए मजबूर करती है। अंततः, औपनिवेशिक शिक्षा द्वारा 1+1=2 के सिद्धांत का एकमात्र “कारण” यही दिया जाता है कि पियानो जैसे किसी पश्चिमी विद्वान ने इसे मान्यता दी थी! जो लोग इस शिक्षा का विरोध करते हैं और स्वयं समझने का प्रयास करते हैं, वे ही गणित को कठिन पाते हैं और उसे छोड़ देते हैं।

लेकिन पाठ यहीं पर रुकता नहीं है। अदृश्य बिंदुओं के इस बेतुके सिद्धांत को तीन साल तक बच्चे के दिमाग में बिठाने के बाद, एनसीईआरटी की कक्षा 9 की पाठ्यपुस्तक एक और बेतुकी बात जोड़ देती है। इसमें कहा गया है कि बिंदु को दूसरे शब्दों में भी परिभाषित नहीं किया जा सकता। (यही बात रेखा और समतल पर भी लागू होती है।) इसे इस प्रकार समझाया गया है: यदि कोई कहता है कि “बिंदु वह है जिसका कोई भाग नहीं होता”, तो उसे “भाग” को परिभाषित करना होगा, और इसी तरह यह सिलसिला चलता रहेगा।

कुत्ते या बिंदु के मामले में ऐसी अनंत प्रतिगमन प्रक्रिया उत्पन्न नहीं होती, क्योंकि बिंदुओं के कई उदाहरणों को इंगित करके प्रतिगमन प्रक्रिया को समाप्त किया जा सकता है। अनंत प्रतिगमन का कारण अनुभवजन्य तथ्यों से बचने के चर्च के सिद्धांत का प्रचार करने की इच्छा है। यह उद्देश्य छिपा हुआ है और एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तक में इसे कभी स्पष्ट नहीं किया गया है। यहां तक कि चर्च के सिद्धांत से सीधा संबंध भी “यूक्लिड” की झूठी कहानियों से अस्पष्ट कर दिया गया है।

यूक्लिड और अनुभवजन्य तथ्यों के बहिष्कार का मामला अपेक्षाकृत सरल है। लेकिन यदि उपनिवेशित दिमाग दो शताब्दियों में भी इन सरल युक्तियों को नहीं समझ पाए हैं, तो वे इसमें निहित अधिक जटिल युक्तियों को कभी नहीं समझ पाएंगे। चर्च ने “शिक्षा” के माध्यम से उन्हें हमेशा के लिए मूर्ख बना दिया होगा। इस प्रकार, एक बार जब छात्रों को गणित को विशुद्ध तत्वमीमांसा के रूप में देखने के लिए अभ्यस्त कर दिया जाता है, तो अनंतता की तत्वमीमांसा हर स्तर पर उभर आती है: एक रेखा में अनंत बिंदु, एक समतल में अनंत रेखाएँ इत्यादि। मैं दोहराता हूँ कि इस अनंतता की तत्वमीमांसा का कोई व्यावहारिक मूल्य नहीं है: एक कंप्यूटर अनंतता की किसी भी तत्वमीमांसा को नहीं संभाल सकता, लेकिन गणित के अधिकांश व्यावहारिक अनुप्रयोग, जैसे मंगल ग्रह पर रॉकेट भेजना, कंप्यूटर का उपयोग करके ही पूरे किए जाते हैं।

अनंत की एक अनूठी अवधारणा को मानना एक आम गलती है, लेकिन मैं यहाँ इस बात की विस्तृत व्याख्या नहीं करूँगा कि गणित (विशेषकर कैलकुलस) में अनंत की एक विशेष तत्वमीमांसा हमें शाश्वतता के चर्च सिद्धांतों को विज्ञान के भाग के रूप में स्वीकार करने के लिए कैसे विवश करती है। 10 इस प्रकार, यूरोपीय लोगों द्वारा भारतीय कैलकुलस में जोड़ी गई तत्वमीमांसा भौतिकी में समय को एक रेखा के समान बना देती है, जैसा कि मूल (निकेन काल के बाद के) चर्च सिद्धांत द्वारा प्रतिपादित किया गया है। यही वह जादू है जिसके द्वारा गणित में तत्वमीमांसा वैज्ञानिक “सत्य” का निर्धारण करती है। गणित से अनभिज्ञ लोगों को इसे समझाना कठिन है जो यह सोचकर भ्रमित हो जाते हैं कि “प्रकृति के नियमों” में विश्वास विज्ञान से संबंधित है, हालाँकि यह स्पष्ट रूप से एक चर्च सिद्धांत है जिसे एक्विनास ने सुम्मा थियोलॉजिका में प्रतिपादित किया है ।

हमें गणित पढ़ाने के तरीके में बदलाव लाना चाहिए और सामान्य गणित को केवल उसके व्यावहारिक महत्व के लिए पढ़ाना चाहिए। निश्चित रूप से हमें इसे स्कूली स्तर पर लागू करना चाहिए, ताकि लाखों छात्र जो पढ़ाई बीच में ही छोड़ देते हैं, उन्हें लाभ हो सके। उन्हें अदृश्य बिंदुओं और रेखाओं के सिद्धांत के बारे में जानने की कोई आवश्यकता नहीं है। औपनिवेशिक शिक्षा का उद्देश्य लोगों को पश्चिमी सत्ता के अधीन रहना सिखाना था, लेकिन मैं एक ऐसी नई पीढ़ी का सपना देखता हूँ जो उन बेड़ियों से मुक्त हो जो हमारे कई “शिक्षाविदों” के औपनिवेशिक मानसिकता को जकड़ कर रखती हैं।

लेकिन त्रासदी यह है कि व्यवस्था को बदला नहीं जा सकता। छात्र इसे बदल नहीं सकते। पाठ गलत होने पर भी, उन्हें असफल होने के डर से इसे सुनाने के लिए विवश किया जाता है। शिक्षक इसे बदल नहीं सकते, उन्हें पाठ से ही पढ़ाना पड़ता है अन्यथा उनकी नौकरी जाने का खतरा रहता है। सरकार—मंत्री और नौकरशाह—इसे बदलने का जोखिम नहीं उठाएंगे क्योंकि वे अज्ञानी हैं और कुछ गलत होने पर उपहास और सत्ता खोने से डरते हैं। “विशेषज्ञों” का इसमें स्वार्थ निहित है, इसलिए वे इसे नहीं बदलेंगे। वे सार्वजनिक रूप से इस विषय पर चर्चा करने से भी इनकार करते हैं।

गणित में मिथकों और रूढ़ियों को संरक्षित रखने के लिए सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत मौजूद है। चर्च द्वारा अपनाई गई यह सेंसरशिप प्रणाली उन उपनिवेशित मानसिकता वाले लोगों (बुद्धिजीवियों, पत्रकारों आदि) के लिए स्वाभाविक है, जिन्हें व्यवस्था द्वारा ही विचारधारा से प्रभावित किया गया है। ठोस आलोचना के एक अंश का भी सामना करने में असमर्थ, वे इसका दुरुपयोग, उपहास, अस्वीकृति और सेंसरशिप करते हैं। यह सेंसरशिप वफादार पहरेदारों द्वारा की जाती है जो गणित के दर्शन और चर्च के धर्मशास्त्र दोनों से अनभिज्ञ हैं। अंधों के इस देश में, दो आँखों वाला व्यक्ति भी अंधा हो जाता है क्योंकि औपनिवेशिक रूप से शिक्षित बुद्धिजीवियों को ज्योतिष से कहीं अधिक खतरनाक कई सूक्ष्म अंधविश्वास सिखाए गए हैं।

चर्च इसी तरह जनमानस के व्यवहार को नियंत्रित करता है—सामूहिक अंधविश्वासों के माध्यम से—जिन्हें उसने गणित और विज्ञान में गुप्त रूप से शामिल कर लिया है ताकि वे अंधविश्वास विश्वसनीय बन सकें। सेंसरशिप इस रणनीति का समर्थन करती है। एकमात्र आशा यही है कि आज सोवेटो की झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले लोग वह बात समझते हैं जो अन्य जगहों के उपनिवेशित बुद्धिजीवी नहीं समझते, कि औपनिवेशिक शिक्षा गणित और विज्ञान के अंश।

साभार- https://kafila.online/ से