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जर्मन तभी, जब जर्मनी में पढ़ाई जाएगी हिन्दी

केंद्रीय विद्यालयों में तीसरी भाषा के तौर पर जर्मन की पढ़ाई बंद करने के छह महीने बाद मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने इस महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जर्मनी यात्रा से पहले इस विवाद को सुलझाने की कोशिश की है। 

नए समझौते के तहत जर्मन को केंद्रीय विद्यालयों में वैकल्पिक विषय के तौर पर पढ़ाया जाएगा और इसके बदले में जर्मनी में समान संख्या में स्कूलों को हिंदी या किसी अन्य भारतीय भाषा की कक्षाएं शुरू करनी होंगी। मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि सरकार अगले कुछ दिनों में जर्मनी के वार्ताकारों से समझौते की नई शर्तों पर बात करेगी। इस समझौते पर विदेश मंत्रालय ने विचार किया है। 

नए सहमति पत्र (एमओयू) पर केंद्रीय विद्यालय संगठन और गोथ इंस्टिट्यूट की ओर से हस्ताक्षर किए जाएंगे। विदेश मंत्रालय ने पिछले वर्ष दिसंबर में मानव संसाधन विकास मंत्रालय से जर्मन भाषा विवाद को लेकर सभी मुद्दे सुलझाने के लिए कहा था क्योंकि इससे मोदी की जर्मनी यात्रा पर असर पड़ने की आशंका थी। मोदी को जर्मनी में होने वाले दुनिया के सबसे बड़ी इंडस्ट्रियल फेयर हनोवर में हिस्सा लेना है। भारत इस फेयर में चीफ गेस्ट है। इससे पहले अमेरिका और चीन पिछले वर्षों में फेयर के चीफ गेस्ट रह चुके हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) सरकार के मेक इन इंडिया प्रोग्राम के लिए इसे महत्वपूर्ण मान रहा है। 

इकनॉमिक टाइम्स ने 1 जनवरी को रिपोर्ट दी थी की तत्कालीन विदेश सचिव सुजाता सिंह ने एक दो पेज के पत्र में एचआरडी सेक्रेटरी आर भट्टाचार्य से जर्मन पक्ष से बात करने और मोदी की ओर से जर्मनी की चांसलर एंजेला मार्केल को पिछले वर्ष नवंबर में ब्रिस्बेन में दिए गए आश्वासन को पूरा करने को कहा था। इस पत्र में कहा गया था कि केंद्रीय विद्यालयों में जर्मन भाषा की पढ़ाई जारी रखने का तरीका खोजा जाए, लेकिन यह तीसरी भाषा के तौर पर नहीं होनी चाहिए। 

तीसरी भाषा के तौर पर जर्मन की पढ़ाई बंद करने और इसकी जगह संस्कृत को देने के सरकार के आदेश की निंदा हुई थी और इससे दोनों देशों के बीच राजनियक विवाद भी पैदा हो गया था। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने इस फैसले का पक्ष लेते हुए कहा था कि स्कूलों में तीसरी भाषा के तौर पर कोई विदेशी भाषा नहीं पढ़ाई जा सकती क्योंकि इससे राष्ट्रीय शिक्षा नीति में मौजूदा तीन भाषा के फॉर्म्युले का उल्लंघन होता है। मंत्रालय के एक सूत्र ने बताया, 'जर्मनी में बातचीत के दौरान यह विवाद उठ सकता है। हालांकि, एमओयू पर तुरंत साइन नहीं किए जाएंगे। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि यह मुद्दा सुलझ जाए और प्रधानमंत्री के आश्वासन पर सरकार खरी उतरे।' 

साभार- इकॉनामिक टाईम्स से 

पुलिस, ऐंबुलेंस, ब्लड बैंक के लिए अब 112 डायल करें

पुलिस, ऐंबुलेंस, ब्लड बैंक से जुड़ी इमरजेंसी सर्विसेज के लिए अब एक ही नंबर 112 डायल करने की जरूरत पड़ेगी। अब तक पुलिस इमरजेंसी के लिए नंबर 100, फायरब्रिगेड के लिए 101, ऐंबुलेंस के लिए 102, इमरजेंसी के लिए 108 नंबर हैं। महिलाओं के लिए इमरजेंसी नंबर 181 हाल में शुरू किया गया है।
 
टेलिकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) ने सिंगल इमरजेंसी नंबर 102 के लिए मंगलवार को सरकार को सिफारिश सौंप दी है। अब डिपार्टमेंट ऑफ टेलिकॉम को इस पर अंतिम फैसला लेना है। ट्राई ने सिंगल इमरजेंसी नंबर तय करने से पहले तमाम पक्षों सहित सुरक्षा एजेंसियों की भी राय ली थी। ट्राई ने अनुशंसा में अमेरिका और यूरोप का तर्क दिया है। अमेरिका में हर इमरजेंसी नंबर 911 और यूरोप के अधिकांश देशों में यह नंबर 112 है। ट्राई के मुताबिक, इसी तर्ज पर देश में भी एक ही नंबर की व्यवस्था की जा सकती है। ट्राई के मुताबिक, 112 लागू होने के बाद भी 101, 100 जैसे नंबरों को तुरंत समाप्त नहीं किया जाएगा और ये नंबर वैकल्पिक तौर पर चालू रहेंगे।

हिन्दी प्रदेशों में उत्पादों की जानकारी हिन्दी में क्यों नहीं

माननीय श्री शिवराज जी
मुख्यमंत्री 
मध्यप्रदेश शासन

तीसरी बार प्रदेश की  कमान संभालने के लिए बधाई और शुभकामना।

महोदय,

मैं और मेरे जैसे लाखों लोग अंग्रेजी की असहनीय अतिशयता के प्रभाव स्वरूप हो रही भारतीय भाषाओं की दुर्दशा और तदॄजनित सांस्कृतिक पतन से दुखी और चिंतित हैं।  इसे रोकने के लिए तत्काल कुछ किए जाने की महती आवश्यकता है।
अपने इस कार्यकाल में अपनी राजभाषा को उसका वास्तविक स्थान दिलाने की दिशा में भी कुछ ठोस काम हो तो यह प्रदेश के लिए एक स्थायी सौगात होगी। कुछ कदम तो तत्काल उठाए जा सकते हैं, जैसे:- १-आप स्वयं तो हस्ताक्षर हिन्दी में ही करते हैं।  आपके मंत्री मंडल के सभी सदस्य भी हस्ताक्षर हिन्दी या अन्य किसी देशी भाषा में ही करें और इस बात को सगर्व मीडिया में प्रचारित भी किया जाए।

२- सभी शासकीय/अर्धशासकीय/अशासकीय निकायों/संस्थानों के अधिकारी/कर्मचा‍रियों को आपके द्वारा अपने हस्ताक्षर हिन्दी में करने के लिए प्रेरित किया जाए। यह कार्य शासकीय आदेश या मीडिया या दोनों माध्यमों से किया जा सकता है। 
३-सभी शासकीय प्रारूप केवल हिन्दी में ही तैयार किए जाएं। सभी शासकीय कम्प्यूटर, लेपटॅाप, मोबाइल फोन, वेब साइट्स हिन्दी में ही संचालित हों। इससे हिन्दी न जानने वाले भी हिन्दी सीखने के लिए प्रेरित होंगे।
४- सभी शासकीय/अर्धशासकीय/अशाकीय निकायों/संस्थानों के नामपट केवल हिन्दी भाषा में ही बनें।
५-शासकीय आदेश या मीडिया के माध्यम से प्रदेश के दुकानदारों से दुकानों/संस्थानों के नामपट केवल हिन्दी में ही लगाने की अपील आपके द्वारा की जाए। इससे प्रदेश का चेहरा तो कम से कम अपना लगने लगेगा। अभी तो शहरों के बाजारों की भाषा देखकर ऐसा प्रतीत होता है जैसे हम पुन: गुलाम हो गए हैं।
६-आपसे पूर्व शासनकाल में एक शासकीय आदेश के द्वारा भारतीय अंकों को हठात् शासकीय प्रणाली से बाहर कर दिया गया। वह आदेश निरस्त कर भारतीय अंको को पुनर्जीवित किया जाए। जिस देश ने विश्व को अंकग‍णित दिया, शून्य और दशमलव की सौगातें दी, उस देश के अंक मरने तो नहीं चाहिए ना।
७-प्रदेश में राजभाषा विभाग को अधिक सशक्त और साधन संपन्न बनाया जाए।  प्रदेश के सभी शासकीय विभागों और प्रदेश स्थित सभी केन्द्रिय विभागों को राजभाषा विभाग के निर्देशों का पालन करने के लिए बाध्य किया जाए।
८-प्रदेश में हर स्तर पर शिक्षा का माध्यम हिन्दी ही हो जाए, अंग्रेजी केवल एक विषय के रूप में ही पढुाई जाए तो बहुत से बच्चे आत्महत्या करने से बचाए जा सकंगे।
 ९. मप्र में निर्मित होने वाले एवं बिकने वाले सभी उत्पादों पर उत्पाद की जानकारी, निर्माण तिथि, अवसान तिथि, उपयोग विधि की जानकारी हिन्दी में छापने का अनिवार्य नियम बनाया जाए.

हमारे प्रदेश के सभी लोग मुख्यत:हिन्दी में ही व्यवहार करते हैं। यदि संसदीय चुनाव से पूर्व उपरोक्त उपायों पर अमल हो सका तो निश्चित ही इसका फायदा आपकी पार्टी को भी मिलेगा। आप राष्ट्रीय गौरव के प्रतीक बन जाएंगे। 

शीघ्र कार्यवाही की अपेक्षा के साथ

भवदीय
तुषार कोठारी
स्वभाषा अभियान
२०१-बी, गोपाल कृष्ण भवन, प्लाट -९८,
श्रीमद राजचंद्र मार्ग, तिलक रोड, घाटकोपर पूर्व, मुंबई -४०००७७.

सुविधा और सहूलियत की भेंट न चढ़े पॉलीथीन बंदिश की मुहिम – प्रो.जैन

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राजनांदगांव। लायंस डिस्ट्रिक्ट एजुकेशन चेयरमैन और रीडर्स क्लब के अध्यक्ष और छत्तीसगढ़ राज्य शिखर सम्मान से अलंकृत दिग्विजय कालेज के प्रोफ़ेसर डॉ.चन्द्रकुमार जैन ने कहा है कि पॉलिथीन छत्तीसगढ़ की ही नहीं, पूरे देश की एक गंभीर समस्या है। इसके खिलाफ अब छत्तीसगढ़ में भी मुहिम छिड़ चुकी है। इन दिनों इसके विरोध के स्वर और समझाइश के साथ दबिश की आवाज़ें सुनाई दे रही हैं। मीडिया ने भी लोगों को जगाने और सोचने-समझने की नई दिशा देने के लिए प्रभावी अभियान छेड़ रखा है। फिर भी डॉ.जैन का कहना है कि सुविधा का लोभ और सहूलियत की उम्मीद से लोगों के बाज़ आये बगैर पोलीथीन से मुक्ति एक चुनौती है। 

डॉ.जैन ने कहा कि महिलाएं कागज के बैग और लिफाफे बनाकर मुफ्त में बांट रही हैं ताकि लोगों में जागृति आए और वे पॉलिथीन के मोह को छोड़ें। जैसे-जैसे अभियान जोर पकड़ता जा रहा है, व्यापारी और अन्य कारोबारी भी इससे जुड़ते जा रहे हैं। लोग घरों में ही पेपर बैग बनाने लगे हैं। लेकिन फटाफट लेन-देन की गरज से कहें, पॉलिथीन का इस्तेमाल बंद नहीं हो सका है। लोग घर से खाली हाथ निकलने की आदी हो चुके हैं। लिहाज़ा, कपडे के थैले यानी झोला लेकर बाज़ार जाना शायद उन्हें गवारा नहीं है। इस मानसिकता को बदलना जरूरी है। 

डॉ.जैन ने चिंताजनक हालात की चर्चा करते हुए कहा कि पहले हम जब खरीदारी के लिए झोला लेकर जाते थे, तब दुकानदार के पास कागज के लिफाफे या अखबार के टुकड़े होते थे जिनमें वह सामान डाल देता था। लेकिन अब हम पॉलिथीन मांगते हैं। घर जाकर यह पॉलिथीन चली जाती है कूड़ेदान में, पॉलिथीन मवेशी के पेट में जमा होने लगती है और इससे वे कुछ ही दिनों में मर जाती हैं। मंदिरों, ऐतिहासिक धरोहरों, पार्क, अभयारण्य, रैलियों, जुलूसों, शोभा यात्राओं आदि में धड़ल्ले से इसका उपयोग हो रहा है। शहरों की सुंदरता पर इससे ग्रहण लग रहा है। पॉलिथीन न केवल वर्तमान बल्कि भविष्य को भी नष्ट करने पर आमादा है। पॉलिथीन का उपयोग मनुष्य की आदत में शुमार हो गया है। लगातार इस्तेमाल के कारण आज हर व्यक्ति इसी पर निर्भर दिखाई दे रहा है।

डॉ.जैन ने बताया कि अब कि यह अच्छी बात है कि शहरों को सुंदर, स्वच्छ एवं प्रदूषण मुक्त बनाने का बीड़ा महिलाओं ने उठाया है। पेपर बैग बनाकर अभियान चलाया जा रहा है। आस-पास के दुकानदारों को मुफ्त में पेपर बैग भी दे रही हैं। उधर प्रदेश के स्कूलों में पॉलिथीन से पॉल्यूशन को सिलेबस में शामिल कर पढ़ाई का फैसला हाल ही में हुआ है। अब बिलासपुर यूनिवर्सिटी ने भी कॉलेजों के सिलेबस में इसे शामिल करने का निर्णय लिया है। पर्यावरण विषय में पॉलिथीन के दुष्प्रभाव और इससे दैनिक जीवन में क्या-क्या नुकसान होते हैं, यह पढ़ाया जाएगा। बोर्ड ऑफ स्टडीज से मंजूरी मिलते ही यह चैप्टर अगले सत्र से कॉलेजों में पढ़ाया जाने लगेगा। बावजूद इसके डॉ.जैन कहते हैं कि पढ़े हुए को जीने की आदत बनाने की ज़रुरत बनी रहेगी। सुविधा के आदी लोगों को पटरी पर लाना मुश्किल काम है। इसलिए,पोलीथीन पर प्रतिबन्ध को कारगर बनाने लिए सोच में बदलाव के साथ सतत मानिटरिंग जरूरी है। 

उठाये जाएँ ये कदम 
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डॉ.चन्द्रकुमार जैन ने कहा कि पर्यावरण की रक्षा के लिए पॉलीथीन पर लगाए जाने वाले प्रतिबंध तभी कारगर हो सकते हैं,जब उनके लिए  कुछ इस तरह कदम उठाए जाएं – पॉलीथीन निर्माण करने वाली फैक्ट्रियों पर कड़ी नजर रखी जाए, जिससे वे मानक के विपरीत इसका निर्माण न कर सकें, दुकानदारों को  विकल्‍प के रूप में जूट एवं कागज के बने थैले सस्‍ते दामों में और पर्याप्‍त मात्रा में नियमित रूप से उपलब्‍ध कराए जाएं, जूट एवं कागज से बने थैलों के निर्माण के लिए स्‍वयंसेवी संस्‍थाओं को प्रोत्‍साहन दिया जाए, प्‍लास्टिक के प्रयोग को निरूत्‍साहित करने के लिए स्‍कूल और कॉलेज स्‍तर पर जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएं, मानक के विपरीत पालीथिन का उत्‍पादन या व्‍यापार करने वालों के विरूद्ध सख्‍त कार्यवाही की जाए। सामजिक संगठनों के सहयोग से लगातार निगरानी से अच्छे नतीजे मिल सकते हैं बशर्ते जगाने वाले पहले खुद उसे अमल में लाएं। 
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स्वामीजी देते हैं पैगंबर का संदेश

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) में इस्लाम पर एक सेमिनार के दौरान एक अलग ही नजारा देखने को मिला। यहां एक तिलकधारी स्वामी लक्ष्मी शंकराचार्य पैगंबर मोहम्मद को शांतिदूत बताते हुए उनके संदेशों का मतलब समझा रहे थे। इस तरह से कोई हिंदू स्वामी पैगंबर मोहम्मद का संदेश देता नजर आए तो लोगों को चौंकना स्वाभाविक है।

हिंदू-मुस्लिम जन एकता मंच के संस्थापक स्वामी लक्ष्मी शंकराचार्य ने इस्लाम को समझने के लिए 10 बार कुरान पढ़ा है। कारण है इस्लाम को बेहतर तरीके समझकर मोहम्मद साहब और इस्लाम के बारे में फैले कुछ मिथकों को दूर करने की कोशिश।

गौरतलब है कि इस्लाम के प्रचार में जुटे शंकराचार्य के अनुसार, वे लंबे समय तक इस्लाम को आतंकवाद से जोड़कर ही देखते थे। उन्होंने 'हिस्ट्री ऑफ इस्लामिक टेरेरिज्म' नाम की एक किताब भी लिखी थी और इसमें उन्होंने कुरान की कुछ सूराओं को हिंसा से भी जोड़ दिया था।

 

उनके अनुसार, जब वे 'इस्लाम के कारण खतरे में अमेरिका' नामक किताब पर काम कर रहे थे, तब इस्लाम को लेकर उनकी धारणा में बुनियादी परिवर्तन आया। उन्होंने पैगंबर मोहम्मद साहब के बारे में बारीकी से पढ़ा और पाया कि वह शांति दूत थे और हमेशा शांति के लिए खड़े रहे। उन्होंने बताया कि जिन सूराओं को मैंने हिंसा से जोड़ा था, उसका आतंक से कोई लेना-देना नहीं था। इसकी जानकारी मुझे कुरान को बार-बार पढ़ने के बाद हुई।

 

साभार- दैनिक नईदुनिया से 

गायों के संरक्षण के लिए संघ का 18 बिंदुओं वाला एजेंडा

'जब आप गाय के 100 ग्राम घी से लैंप जलाते हैं, तो पूरे पर्यावरण को ताजा ऑक्सीजन मिलती है। भारतीय गाय की यह ताकत है।' यह कहना है आरएसएस की इकाई अखिल भारतीय गो सेवा के अध्यक्ष शंकर लाल का। अपने इस बयान के जरिये वह विज्ञान को भी झुठलाने की कोशिश में नजर आते हैं, जिसके तहत ऑर्गेनिक चीजों को जलाने में ऑक्सीजन की खपत होती है और इससे कार्बन डाईऑक्साइड निकलती है। लाल ने कहा कि आने वाले वर्षों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का 'बीमारी मुक्त भारत, कर्ज मुक्त भारत' का नारा काफी अहम होगा और इसके लिए गाय अहम जरिया होगी। राष्ट्रीय सेवा संगम की सोमवार को हुई बैठक में यह फैसला लिया गया।
 
संघ ने गायों की सुरक्षा के लिए अपने सहयोगी सभी एनजीओ के लिए 18 पॉइंट्स का अजेंडा तैयार किया है। इसके तहत गाय आधारित खेती और इससे जुड़े कामों को बढ़ाने के लिए प्लान तैयार करना, कैदियों को सुधारने के लिए जेलों में गायों के लिए शेड बनाना, स्कूलों में गायों पर स्कॉलरशिप परीक्षा, गाय विज्ञान पर स्टडी के लिए रिसर्च लैब और यूनिवर्सिटी, हर राज्य में गाय अभयारण्य बनाने जैसी बातें शामिल हैं। साथ ही, गायों के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए मंदिरों में हर हफ्ते गऊ कथा के आयोजन का भी प्रस्ताव है।
 
शंकर लाल ने कहा, 'अपराध मुक्त भारत के लिए भी यह जरूरी है कि हमारे बच्चे सिर्फ भारतीय गाय का दूध पीएं क्योंकि इससे वे सात्विक बनेंगे। जर्सी गाय और भैंसों का दूध पीने से उनके मन में खराब बातें आती हैं, जिससे वे अपराधी बन जाते हैं।' शंकर लाल का बयान हाइब्रिड नस्ल की गायों को लेकर संघ नेताओं की राय को भी दर्शाता है। उन्होंने कहा, 'इस तरह की गायों के दूध से हमारी सेहत को नुकसान पहुंच रहा है। साथ ही, हमारी गायें कम से कम 17 बार बच्चा दे सकती हैं, जबकि हाइब्रिड गायें सिर्फ 7 बार बच्चा देती हैं। हमें निश्चित तौर पर देसी नस्ल के गायों को बढ़ावा देना चाहिए।'
 
आरएसएस हर राज्य में गाय अभयारण्य की भी मांग कर रहा है, जहां देसी नस्लों वाली गायों का संरक्षण किया जा सके। लाल ने बताया, 'मध्य प्रदेश में 5,000 से भी ज्यादा गायें इस अभयारण्य का हिस्सा हैं। गुजरात में भी इस तरह के प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं।' संघ ने देशभर में गायों से जुड़ी स्टडी का भी आंकड़ा पेश किया। उन्होंने कहा कि पिछले 60 साल में गायों की संख्या 70 करोड़ से घटकर 15 करोड़ हो गई है। गायों से जुड़े संघ के अभियान की एक और अहम बात जेलों में गायों के लिए शेड बनाना है, जहां कैदी काम करेंगे।
 
'गाय ज्ञान परीक्षा' का कॉन्सेप्ट राजस्थान से आया है, जहां स्टूडेंट्स गाय की उपयोगिता और इसकी सुरक्षा की जरूरत के बारे में लिखते हैं। गायों के संरक्षण से जुड़े संघ के नेता अभिनव शर्मा ने बताया, 'इस साल 3 लाख से भी ज्यादा स्टूडेंट्स ने यह टेस्ट दिया। बच्चे अगर गायों का संरक्षण सीख लेते हैं, तो वे परिवारों पर भी असर डालते हैं और जिम्मेदार बन जाते हैं।' संघ के सह-सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने भी गायों के संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि यह पूरे समुदाय की जिम्मेदारी है। उन्होंने नियमित तौर पर गो संगम की जरूरत बताई, जहां गायों के संरक्षण के लिए उठाए गए कदमों के बारे में जायजा लिया जा सके।
साभार- इकॉनामिक टाईम्स से

रेल्वे की नई पहल, अब गाड़ियों में होंगे बॉयो शौचालय

रेलवे में एक अन्य अहम पहल अंजाम दी जा रही है। यह है पुरानी शैली के शौचालयों की जगह बायो शौचालय का इस्तेमाल। एक दशक पहले भारतीय रेल और रक्षा शोध एवं विकास संस्थान ने यात्री डिब्बों में बायो शौचालय लगाने की योजना पर काम करना शुरू किया था। सन 2011 में इसका परीक्षण किया गया और नए डिब्बों में इसे लगाने का काम भी शुरू कर दिया गया। अब करीब 17,000 डिब्बों में ऐसे शौचालय लगाए जा चुके हैं। अगले पांच सालों में सभी यात्री ट्रेनों में इनका प्रयोग शुरू होना है।
 
ये शौचालय न केवल स्वास्थ्य की दृष्टिï से बेहतर होते हैं बल्कि इनकी वजह से रेल पटरियों की भी सुरक्षा होगी जो पुरानी शैली के शौचालयों की वजह से खराब होती थीं। रेलवे वर्ष 2020-22 तक पुरानी शैली के शौचालयों को पूरी तरह चलन से बाहर करना चाहती है। इतना ही नहीं यह स्वच्छ भारत अभियान की दिशा में भी एक अहम कदम साबित हो सकता है।

वाइ.एफ.एल.ओ. द्वारा महिलाओं का सम्मान

नई दिल्ली; हमारे समाज एवम् समुदाय में महिलाओं की उपलब्धियों व योगदान मनाने के कई माध्यम हैं, जिनमें से एक है उनके योगदान का सम्मान। ऐसे सम्मान महिलाओं को आगे बढ़ने हेतु प्रोत्साहित करने के साथ-साथ उन्हें विशिष्ट होने व पुरूषों के समकक्ष उनके द्वारा की जाने वाली दुगनी मेहनत का भी अहसास कराते हैं।

महिलाओं द्वारा समाज में अपने-अपने क्षेत्रों में दिये गये योगदान को सम्मानित करने के लिए यंग फिक्की लेड़ीज़ आॅर्गनाईजेशन की चेयरपर्सन श्रीमति अवर्णा जैन ने इस वर्ष किये जा रहे विभिन्न कार्यों के बीच युवा महिलाओं को प्रोत्साहित करने वाली महिलाओं हेतु वाई.एफ.एल.ओ. यंग वूमन अवार्ड्स की शुरूआत की है। यह अवार्ड राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त हैं और स्थानीय समुदायों में संगीत, कला, साहित्य, खेल, संस्कृति और लोकसेवा के क्षेत्र में महिलाओं की उपलब्धियों की ओर ध्यान केन्द्रित करना है।

असाधारण कौशल, नेतृत्व और सलाह पर केन्द्रित इन अवार्ड्स हेतु श्रीमति अवर्णा जैन द्वारा दिल्ली के पंचतारा होटल द ललित में एक समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर माननीय बिजली, कोयला और नवीकरणीय ऊर्जा राज्यमंत्री श्री पीयूष गोयल बतौर मुख्यातिथि उपस्थित थे। उनके अतिरिक्त फिक्की की अध्यक्ष श्रीमति ज्योत्सना सूरी, कमेटी सदस्य आदि भी मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन जानी-मानी एंकर शिवानी पसरीचा ने किया। 

मौके पर अपने स्वागत सम्बोधन में श्रीमति अवर्णा जैन ने कहा कि महिलाओं को उनके योगदान हेतु सम्मानित करना मेरे लिए गौरवपूर्ण अवसर है। यह वह महिलायें हैं जो अपनी लगन, कौशल और दृढ़ता के आधार पर समाज में खासा योगदान दे रही हैं। यहां सम्मानित हर महिला ने अपने क्षेत्र में असीम योगदान दिया है जिसकी कल्पना करना मुश्किल है। यह पुरस्कार शांति, न्याय, स्वतंत्रता और गरिमा को बढ़ावा देने की उपलब्धियों पर आधारित हैं।

श्री पीयूष गोयल ने कहा कि किसी भी क्षेत्र में जब व्यक्ति को प्रोत्साहन मिलता है तो वह और उत्कृष्ट कार्य करने में सक्षम रहता है। महिलाओं का समाज में खासा योगदान है और इन अवार्ड्स के माध्यम से सम्मान निश्चित रूप से इनकी हौंसला अफजाई करने के साथ-साथ आगे बढ़ने हेतु प्रेरित करेगा। 

मौके पर सम्मानित की गई महिलाओं में रुचिका मेहता (मीडिया), कनिका कपूर (गायिका), भावना रेड्डी (कला), विभा कल्होत्रा (दृश्य कला), बिनालक्ष्मी नेपरम (समाज सेवा), स्टूडियो पेटीकोट – देवयानी मल्होत्रा व दिव्या सहाय (फैशन), अनुजा चैहान (साहित्य), नेहा किरपाल (उद्योगिका), ऋतु रानी (खेल), रेखा पुरी (वूमन इंस्पीरेटर) और अभिनय हेतु श्रद्धा कपूर आदि शामिल रहे। 

समारोह के दौरान ग्लैमर की दुनिया में धूम मचा रही दो युवा हस्तियों श्रद्धा कपूर और गायिका कनिका कपूर ने अपने गायन कौशल से उपस्थित मेहमानों व अन्य की जमकर वाह-वाही लूटी। कनिका कपूर ने वाइ.एफ.एल.ओ. व इस समारोह से जुड़े सभी लोगों का शुक्रिया अदा किया और इस अवार्ड को एक यादगार सौगात बताते हुए भावुक हो गयी, इस दौरान उन्होंने अपने लोकप्रिय गीत बेबीडाॅल की दो लाइन भी सुनाईं। वहीं श्रद्धा कपूर ने अपने शुरूआती कैरियर की स्ट्रगल और लगातार मेहनत के आधार पर सफलता की बात कही। और ऐसे सम्मान को प्रोत्साहन हेतु अच्छी पहल बताया। उन्होंने अपनी फिल्म का गीत ‘तेरी गलियां’ भी गुनगुनाया।

वाई.एफ.एल.ओ. (यंग फिक्की लेड़ीज़ आॅर्गनाईजेशन) प्रतिष्ठित राष्ट्रीय संगठन फिक्की (वाणिज्य और उद्योग की भारतीय चैंबर के संघ) की एक विशेष महिला शाखा है। संगठन का लक्ष्य भारत में समाज के विभिन्न तबके भर में विभिन्न स्तरों पर महिलाओं का सशक्तिकरण है। युवा भारत की आशाओं, इच्छाओं और आकांक्षाओं को संबोधित करने के लिए इसकी शुरूआत की गई थी। श्रीमति अवर्णा जैन वाइ.एफ.एल.ओ. की अध्यक्ष हैं, जो अभी तक की सबसे युवा अध्यक्ष हैं। 

हिमानी शिवपुरी के खिलाफ धोखाधड़डी का मामला

न्यायालय के  आदेश पर फिल्म व टेलीविजन अभिनेत्री हिमानी शिवपुरी के खिलाफ इन्दौर की विजय नगर पुलिस ने धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है। आरोप है, इंदौर के फिल्म निर्माता से पांच लाख रुपए लेकर हिमानी ने दो फिल्मों की शूटिंग से इनकार कर दिया था।
 
विजय नगर पुलिस के मुताबिक, मोहम्मद अली निवासी विजय नगर ने हिमानी शिवपुरी (40) निवासी ओबेराय सेप्रेलेंडर, अंधेरी ईस्ट (मुंबई) के खिलाफ कोर्ट में याचिका लगाई थी। अली का आरोप है, 22 मार्च 2011 को हिमानी ने साइनाइड और तड़पन नाम की दो फिल्मों में काम करने का एग्रीमेंट किया।
 
बतौर एडवांस तीन किस्तों में पांच लाख रुपए दिए गए। आठ दिन तक शूटिंग हुई। बाद में हिमानी ने साइनाइड की शूटिंग पर आना बंद कर दिया। इसके बाद तड़पन की शूटिंग भी नहीं की। टीआई छत्रपालसिंह सोलंकी ने बताया, केस दर्ज कर मामले की जांच कर रहे हैं। गिरफ्तारी करने पुलिस टीम मुंबई जाएगी। 

पीयूष शर्मा को ज़ी में बड़ी जिम्मेदारी

जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज ने अपनी टीम के संचालन के लिए पीयूष शर्मा को नियुक्त किया है। उन्हें इंडिया और एपीएसी  के न्यू इनीशिएटिव का सीईओ बनाया गया है। शर्मा टीवी, वेब, मोबाइल और ऑन-डिमांड स्ट्रीमिंग सर्विस समेत कई मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रोग्रामिंग व कंटेंट दिखाने वाले जी के न्यू इनीशिएटिव का नेतृत्व करेंगे।

पीयूष शर्मा की नियुक्ति पर जी एंटरटेनमेंट के एमडी व सीईओ पुनीत गोयनका ने कहा, ‘पीयूष बिजनेस के बारे में नए सिरे से सोचने और नए बिजनेस मॉडल का निर्माण करने की क्षमता के लिए उद्योग में जाने जाते हैं। हम उभरते बाजारों में कंटेंट पर विशेष ध्यान दे रहे हैं और हमें विश्वास है कि पीयूष की प्रतिभा और अनुभव से हमें हमारे लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद मिलेगी।’

वहीं शर्मा ने कहा, ‘India और APAC दोनों ही संपन्न बाजार हैं और जी में प्रतिभाशाली टीम के साथ जुड़कर मैं आश्वस्त हूं कि हम इन बाजारों में कारोबार को मजबूत बनाने के अलावा और बड़े कैनवास पर लाभदायक और बड़े अवसर पैदा करने में सक्षम होंगे।

इससे पहले शर्मा एक जर्मन बहुराष्ट्रीय कपंनी बुर्डा इंटरनेशनल के साथ भारत परिचालन के सीईओ के रूप में सेवारत थे। बुर्डा इंटरनेशनल 18 बाजारों में 300 से अधिक उपभोक्ता पत्रिका ब्रैंड चलाती है। शर्मा को देश में दुनिया की अंतरराष्ट्रीय मीडिया ब्रैंडों में से कुछ के लाइसेंस संस्करण लाने का और सफल बिजनेस की केस स्टडिज बनाने का श्रेय दिया जाता है। उन्होंने स्पोर्ट्स इलस्ट्रेटेड, ट्रैवेल + लेज़र, बैटर होम्स एंड गार्ड्स और मैक्सिम जैसे ब्रैंडों के निर्माण में मदद की है।