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शाहरुख खान के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश

मुंबई की जानी मानी एडवोकेट और सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती आभा सिंह की लगातार कानूनी लड़ाई का नतीजा ये रहा है कि बाल आयोग ने मुंबई पुलिस को शाहरुख खान के खिलाफ एपआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं।

उल्लेखनीय है कि शाहरुख खान ने वानखेड़े स्टेडियम में एक क्रिकेट मैच के दौरान बच्चों से� बदतमीजी की थी, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। इस पर श्रीमती आभा सिंह ने ये मामला अपने हाथ में लिया और आज बाल आयोग ने आईपीसी बाल एवं किशोर न्याय अधिनियम 2006 के तहत पुलिस को शाहरुख खान के खिलाफ एफआईर दर्ज करने के साथ ही इस बात के भी आदेश दिए हैं कि ये एफआईआर अभी तक दर्ज क्यों नहीं की गई।

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कृषि वि.वि.में एनएसएस प्रशिक्षकों को प्रशिक्षण देंगे डॉ.चन्द्रकुमार जैन

राजनांदगांव। संस्कारधानी के प्रखर वक्ता और राज्य अलंकरण से सम्मानित दिग्विजय कालेज के हिन्दी विभाग के प्राध्यापक डॉ.चन्द्रकुमार जैन, इंदिरा गांधी कृषि विश्व विद्यालय,रायपुर में राष्ट्रीय सेवा योजना के प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण कार्यक्रम में व्याख्यान देने आमंत्रित किये गए हैं। प्रशिक्षण कार्यक्रम का केन्द्रीय विषय है – सामाजिक सद्भाव, राष्ट्रीय एकता एवं मानवाधिकार। खेल एवं युवक कल्याण मंत्रालय, राष्ट्रीय सेवा योजना, राजीव गांधी राष्ट्रीय युवा विकास संस्थान, तमिलनाडु, राष्ट्रीय सेवा योजना,क्षेत्रीय केंद्र भोपाल एवं विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस पांच दिवसीय प्रशिक्षण के अंतर्गत डॉ.जैन 20 मार्च को अपने निर्धारित विषय – 'जीवन शैली, आतंरिक द्वंद्व एवं समाधान' पर व्याख्यान और राष्ट्रीय सेवा योजना अधिकारियों को प्रशिक्षण देंगे।  

प्रशिक्षण कार्यक्रम में डॉ.चन्द्रकुमार जैन सहित आमंत्रित प्रतिष्ठित वक्ताओं में हिन्दी ग्रन्थ अकादमी के संचालक एवं वरिष्ठ पत्रकार श्री रमेश नैयर, छत्तीसगढ़ बाल आयोग की अध्यक्ष श्रीमती शताब्दी पांडे, डॉ.समरेंद्र सिंह, डॉ. मो.इकबाल, डॉ.जी.के.श्रीवास्तव, डॉ,प्रीता लाल, श्री सुशील त्रिवेदी, श्री दीपक बिस्तुते, डॉ.आर.पी.अग्रवाल, डॉ. श्रीमती जया गांगुली और डॉ.शकील हुसैन शामिल हैं। दिग्विजय कालेज के प्राचार्य डॉ.आर.एन.सिंह ने इस राष्ट्रीय महत्व के विशिष्ट प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रशिक्षण देने के लिए आमंत्रण को महाविद्यालय के लिए विशेष गौरव का विषय निरूपित करते हुए प्रभावी सहभागिता हेतु डॉ.चन्द्रकुमार जैन को शुभकामनाएं दीं हैं।
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केदारनाथ यात्रा- फिर गुमराह कर रहे हैं उत्तराखंड के मुख्य सचिव

RUDRA PRAYAGक्‍या आप चार धाम यात्रा के लिए उत्‍तराखण्‍ड आने की सोच रहे हैं तो यह खबर आपके लिए हैं, सूबे के अपर मुख्य सचिव राकेश शर्मा ने केदारनाथ यात्रा तैयारियों का जायजा लिया। शायद तभी राज्‍य सरकार केदारनाथ यात्रा के बारे में ऑल इस गुड का संदेश दे रही है, ज्ञात हो कि यह वही राकेश शर्मा है जिन्‍होंने केदारनाथ आपदा की त्रासदी को कमतर आंक कर तत्‍कालीन मुख्‍यमंत्री को गुमराह किया था, जिससे उन्‍हें कुर्सी गंवानी पडी थी, – चन्‍द्रशेखर जोशी की एक्‍सक्‍लूसिव रिपोर्ट- # चारधाम यात्रा शुरू होने को कुछ ही माह का समय शेष� #हाईवे की स्थिति बेहद खराब #खाद्यान्न सामग्री ले जाना मुश्किल #भू धंसाव का दौर जारी #केदारनाथ आठ फीट तक बर्फ #सड़क की स्थिति ठीक नहीं #पैदल मार्ग खतरनाक होने के साथ ही खड़ी चढ़ाई #गौरीकुंड में वीरानी#आज भी यहां आपदा के मलबे से भरी दुकान #अभी तक कोई रोड मेप तैयार नहीं #आपदा के बाद� मार्ग कई स्थानों पर जानलेवा #आपदा के बीस माह� भी इस स्थान को ठीक करने के लिए कोई स्थाई समाधान नहीं #पचास करोड़ के कार्य केदारनाथ में होने हैं,� धन के अभाव से अभी शुरू नहीं #पहाड़ियों से हिमखंड का टूटने का सिलसिला शुरू #मुख्यमंत्री ने यात्रा शुरू होने से पूर्व रोपवे निर्माण करने की घोषणा की थी, लेकिन अभी तक कार्य भी शुरू नहीं� #बाढ़ सुरक्षा कार्यो के निर्माण में मानकों की अनदेखी # केदारनाथ में सिंचाई विभाग से किए जाने वाले सुरक्षा कार्य अभी शुरू नहीं� #कई गांवों के सम्पर्क मार्ग बंद # मरीजों का उपचार नहीं

मई 2015 से शुरू होने वालीRAKESH SHARMA 4DHAM केदारनाथ यात्रा इस बार गौरीकुंड के बजाय सोनप्रयाग से संचालित होगी। यात्रा शुरू होने में डेढ़ महीना ही शेष बचा है,� इस बार की चार धाम यात्रा यात्रियों के लिए मुसीबत बनने वाली है।� ‘गौरीकुंड की स्थिति जैसी आपदा के समय थी, वैसी आज भी है। गौरीकुंड की सुरक्षा के लिए अभी तक कोई ठोस प्रयास नहीं किए गए है। इसका असर यहां के लोगों को भुगतना पड़ रहा है। ‘सोनप्रयाग से लेकर गौरीकुंड तक हाईवे की स्थिति बेहद खराब है। ऐसे में खाद्यान्न सामग्री ले जाना मुश्किल हो गया है। यात्रा सीजन में यात्रियों के लिए भारी परेशानियां होगी।’

गौरीकुंड हाईवे पर स्थित सेमी जोन तीर्थयात्रियों और प्रशासन के लिए परेशानी का सबब बन सकता है। आपदा के बीस माह बाद भी इसके स्थाई समाधान के लिए कोई ठोस पहल नहीं की जा सकी है, जबकि इस स्थान पर भू धंसाव का दौर जारी है। वर्तमान में केदारनाथ आठ फीट तक बर्फ जमी है। बारिश होने पर यहां भारी वाहन फंस जाते हैं, जिससे घटों जाम की स्थिति पैदा हो जाती है।� रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड हाईवे पर सेमी गांव में आज भी सड़क की स्थिति ठीक नहीं है। दो साल पहले जून में मंदाकिनी नदी में आई बाढ़ से ऊखीमठ विकास खंड के सेमी गांव में नदी के कटाव से गांव के नीचे से पूरी पहाड़ी दरक गई थी। ग्रामीणों के आवासीय भवन जमीन में धंस गए थे। सेमी गांव के साथ ही गौरीकुंड हाईवे को खासा नुकसान पहुंचा था।� केदारनाथ आपदा के कारण पूर्व रूप से क्षतिग्रस्त हो चुके पैदल मार्ग को दुरूस्त तो किया गया, लेकिन लिनचौली से केदारनाथ बेस कैंप तक बनाया पैदल मार्ग खतरनाक होने के साथ ही खड़ी चढ़ाई का है। 2013 में 16-17 जून में आई आपदा से हुई तबाही केदारनाथ का मुख्य व सड़क मार्ग से जुड़ा अंतिम पड़ाव गौरीकुंड में वीरानी छाई हुई है। आज भी यहां आपदा के मलबे से भरी दुकानों को साफ देखा जा सकता है। इस मुख्य कारण गौरीकुंड तक सड़क मार्ग का सही न बन पाना है। साथ ही आपदा में यहां बने बस अडडा बाजार का बहने से यहां पर पुनर्निर्माण की जरूरत है, लेकिन इसके लिए अभी तक कोई रोड मेप तैयार नहीं हो सका है।

अब चारधाम यात्रा शुरू होने को कुछ ही माह का समय शेष बचा हुआ है। इस बार चारधाम यात्रा के दौरान सेमी गांव में बना स्लाइडिंग जोन प्रशासन और तीर्थयात्रियों के लिए मुसीबतों भरा हो सकता है। आपदा के बीस माह से ज्यादा का समय बीतने के बाद भी इस स्थान को ठीक करने के लिए कोई स्थाई समाधान नहीं किया गया है। बारिश होते ही यहां पर जमीन दलदल का रुप ले ले रही है। इससे आवाजाही करने वाले भारी वाहन बीच हाईवे पर ही फंस जाते हैं। अभी तक करीब एक दर्जन से अधिक वाहन यहां फंस चुके हैं। इससे जब-तब घंटों जाम की स्थिति बन जाती है।� यात्रा के दौरान केदारनाथ पहुंचने वाले शिव भक्तों को इस बार भी लिनचौली की खड़ी चढ़ाई से पार कर ही केदारपुरी पहुंचना होगा। चढ़ाई को देखते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री ने यात्रा शुरू होने से पूर्व रोपवे निर्माण करने की घोषणा की थी, लेकिन अभी तक कार्य भी शुरू नहीं हो सका है। लिनचौली से केदारनाथ की दूरी करीब पांच किमी है। इस बार भी भक्तों को खड़ी चढ़ाई पार कर बाबा के दर्शन करने पड़ेंगे। �

गौरीकुंड से केदारनाथ तक का पंद्रह किमी का सफर देश विदेश से भोले बाबा के दर्शन को आने वालों भक्तों के लिए किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं होता। खड़ी चढ़ाई का यह सफर काफी कठिन होता है। घोड़े, खच्चर भी इसी मार्ग से गुजरते हैं, लेकिन कई स्थानों पर मार्ग संकरा होने से स्थिति काफी खतरनाक हो जाती है। कई यात्री पैदल मार्ग पर घोडे़, खच्चरों की आवाजाही के दौरान टक्कर से घायल भी हो जाते हैं। आपदा के बाद यह मार्ग कई स्थानों पर जानलेवा बना हुआ है। मार्ग पर कई स्थानों पर नीचे की ओर रेलिंग तक नहीं बनी है, जो कि दुर्घटना का कारण भी बन जाता है।� मुख्य डेंजर जोन- गौरीकुंड घोड़ा पड़ाव, घिनुरपाणी, जंगलचट्टी, भीमबलि, लिनचोली, केदारनाथ बेस कैंप से पहले पचास करोड़ के कार्य केदारनाथ में होने हैं, उन्हें धन के अभाव से अभी शुरू नहीं किया गया है।� केदारनाथ मार्ग पर उच्च हिमालय से हिमखंड टूटने लगे हैं। चटक धूप के बाद लिनचौली में पहाड़ियों से हिमखंड का टूटने का सिलसिला शुरू हो गया है। गत फरवरी माह में भी हिमखंड टूटने से भीमबली में पैदल मार्ग पर बना पुल पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है।
केदारनाथ के पुराने घोड़ा पड़ाव में जीएमवीएन का अतिथि गृह समेत कई भवन पूर्व में हिमखंड टूटने से क्षतिग्रस्त होते रहे हैं। इस वर्ष भी भीम बली का पैदल पुल हिमखंड से क्षतिग्रस्त हो चुका है। इस वर्ष भारी बर्फबारी से केदारनाथ की खड़ी चट्टानों से हिमखंड टूटने का खतरा अधिक बढ़ गया है।

लिनचोली से केदारनाथ तक का पूरा क्षेत्र हिमखंड टूटने की दृष्टि से काफी खतरनाक है। लिनचोली में भी हिमखंड टूटने लगे हैं, हालांकि इससे अभी कोई नुकसान नहीं पहुंचा है, लेकिन लिनचोली में बने प्रीफेब्रिकेट हट समेत पैदल रास्ते को इससे खतरा बना हुआ है। लोक निर्माण विभाग अधिशासी अभियंता गुप्तकाशी केएस नेगी का कहना है कि पूरे केदारनाथ पैदल मार्ग पर हिमखंड का खतरा है। लोक निर्माण विभाग पैदल मार्ग पर प्रत्येक वर्ष पुलों का हटा देता है, ताकि हिमखंड से इनको नुकसान न पहुंचे।

सरकार करोड़ों की राशि खर्च कर सुरक्षा दीवारों का निर्माण तो करा रही है, लेकिन घटिया गुणवत्ता के चलते यह पीड़ितों के दर्द को कम करने के बजाय बढ़ाने का काम कर रहे हैं। विगत वर्ष 2013 में आई केदारनाथ आपदा ने केदारनाथ से रुद्रप्रयाग तक ऐसा कोहराम मचाया था, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता है। नदी किनारे बने आवासीय भवन बड़ी संख्या में आपदा की भेंट चढ़ गए थे। कई स्थानों पर मंदाकिनी नदी के कटान से आवासीय भवनों को खतरा पैदा हो गया था। खतरे को देखते हुए सरकार ने इन स्थानों को चिह्नित कर यहां बाढ़ सुरक्षा कार्यो को स्वीकृति दी थी। आपदा के बाद रुद्रप्रयाग से केदारनाथ तक बाढ़ सुरक्षा कार्य शुरू किए हैं। इन कार्यो में घटिया गुणवत्ता की शिकायतें भी आती रही हैं। सिंचाई विभाग की विजयनगर में बनाई गई सुरक्षा दीवार हल्की बारिश के बाद टूट गई। दीवार का निर्माण कार्य पूर्ण होने से पहले इसमें दरार पड़नी शुरू हो गई थी। इससे पूर्व भी तिलवाड़ा में बाढ़ सुरक्षा कार्यो के निर्माण में मानकों की अनदेखी का आरोप भी सामने आया।

आपदा के बाद जिले में बाढ़ सुरक्षा कार्यो के लिए शासन से धनराशि अवमुक्त होने में हो रही देरी का असर बाढ़ सुरक्षा कार्यो पर पड़ रहा है। कार्य 75 फीसदी होने के बावजूद धनराशि मात्र तीस फीसदी ही उपलब्ध हो पाई है। ऐसे में जो काम हुए भी उसकी गुणवत्ता पर भी सवाल उठने लगे हैं।
विगत वर्ष 2013 में आई केदारनाथ आपदा से जिले को नदी किनारे वाले क्षेत्रों में भारी नुकसान पहुंचा था। नदी तट पर बने सैकड़ों आशियाने भी आपदा की भेंट चढ़ गए थे। केदारनाथ से रुद्रप्रयाग तक नदी से सटे आवासीय भवनों की सुरक्षा को लेकर शासन ने बाढ़ सुरक्षा कार्य विभिन्न विभागों के माध्यम से करवाए जा रहे हैं। सिंचाई विभाग ने रुद्रप्रयाग-केदारनाथ तक अधिकांश स्थानों पर बाढ़ सुरक्षा कार्यो को शुरू तो कराया, लेकिन कई स्थानों पर घटिया गुणवत्ता की शिकायतें भी सामने आई। हल्की बारिश होने के बाद विजयनगर में तो सुरक्षा दीवार ढह गई। बाढ़ सुरक्षा कार्यो के लिए शासन ने सौ करोड़ स्वीकृत किए थे, लेकिन अभी तक पूरी धनराशि उपलब्ध न होने से कई दिक्कतें सामने आ रही है। इससे बाढ़ सुरक्षा कार्यो की गुणवत्ता पर भी इसका असर पड़ रहा है। जिले में 100 करोड़ से अधिक रुपये के बाढ़ सुरक्षा कार्य किए जा रहे, लेकिन कार्यो के लिए अभी तक मात्र तीस फीसदी धनराशि ही उपलब्ध हो पाई है। इससे ठेकेदारों का भुगतान न होने से वह भी परेशान हैं। केदारनाथ में सिंचाई विभाग से किए जाने वाले सुरक्षा कार्य अभी शुरू नहीं हो पाए हैं। वहां अधिक बर्फबारी के चलते मई महीने के बाद ही कार्य शुरू होने की उम्मीद है।

इन स्थानों पर चल रहे कार्य-
रुद्रप्रयाग, तिलवाड़ा, अगस्त्यमुनि, सिल्ली, विजयनगर, गंगानगर, कुंड, बेडूबगड, कालीमठ, भैंसारी, रामपुर, सोनप्रयाग, राऊलैंक, लमगौंडी आदि।
वही दूसरी ओर केदारनाथ में अधिक बर्फबारी का असर दिखने लगा है। मंदिर के सामने बने बद्री-केदार मंदिर समिति के एक भवन की छत अधिक बर्फबारी से टूट गई। इससे काफी सामान भी बर्बाद हुआ है।

केदारनाथ में भारी बर्फबारी के चलते भवनों के ऊपर छतों में कई फीट ऊंची बर्फ की परत जमी हुई है, जो भवनों के लिए खतरा बनी हैं। बुधवार रात्रि बद्रीकेदार मंदिर समिति के भंडार गृह की छत टूट गई, जिससे यहां रखा कुछ सामान खराब हो गया, जबकि अन्य सामग्री को निम ने मंदिर समिति के ही प्रवचन हॉल में शिफ्ट कर दिया।

इस बीच, मौसम साफ होते ही केदारनाथ में पुनर्निर्माण कार्य शुरू हो गए हैं। नेहरू पर्वतारोहण संस्थान के मजदूरों ने घाट निर्माण की प्रक्रिया तेज कर दी है। केदारनाथ में सभी भवनों की छतों से बर्फ हटाई जा रही है। रास्तों से भी बर्फ हटा दी गई है। वहीं एटीवी वाहन को जोड़ने के लिए इंजीनियरों की टीम भी केदारनाथ पहुंची। यह वाहन केदारपुरी में बर्फ में आसानी से चलते हैं। निम इसका प्रयोग करता है।

11 मार्च 2015 को बर्फबारी जिले के सीमांत गांव तोषी, त्रिजुगीनारायण, गौंडार, रांसी, बक्सीर, चौमासी मार्च महीने में भी बर्फबारी का दंश झेल रहे हैं। बर्फबारी अधिक होने से कई गांवों के सम्पर्क मार्ग बंद हो गए है। ऊखीमठ-चोपता-मंडल मोटरमार्ग लंबे समय से बंद है। बर्फबारी से सोनप्रयाग- त्रियुगीनारायण मोटरमार्ग भी बंद है। इन सीमांत गांवों में से तोषी, रासी में विद्युत आपूर्ति ठप है। इससे ग्रामीणों की समस्या और बढ़ गई है। मौसम ठीक होने का इंतजार यहां के ग्रामीण कर रहे हैं। रांसी के पूर्व प्रधान राम सिंह का कहना है कि गांव से बाहर जाने के रास्ते बर्फ से ढके हुए हैं। ऐसे में गांव में ही ग्रामीण कैद हैं। यदि शीघ्र मौसम ठीक नहीं हुआ तो आवश्यक सामग्री की किल्लत पैदा हो जाएगा। तोषी के ग्रामीण सुन्दर सिंह ने बताया कि गांव में विद्युत व्यवस्था भी बर्फबारी के बाद ठप पड़ी है। इससे समस्या ओर अधिक बढ़ गई है।

रुद्रप्रयाग में धनपुर क्षेत्र को जोड़ने वाला रैंतोली-जसोली मोटरमार्ग विगत ढाई सप्ताह से बंद है। ऐसे में क्षेत्र में बुनियादी व्यवस्थाएं चरमराने के साथ ही बीमार लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

धनपुर क्षेत्र के करीब एक दर्जन से अधिक गांवों को जोड़ने वाले मोटरमार्ग पर इन दिनों चौड़ीकरण का काम चल रहा है जिसके चलते मार्ग इन दिनों रैंतोली से पंचभैया खाल तक अवरुद्ध है। बीरों गांव से लेकर पीड़ा गांव तक मोटरमार्ग बंद चल रहा है। मोटरमार्ग अवरुद्ध होने से वाहनों की आवाजाही बंद हो गई है। बंद पड़े मोटरमार्ग से सबसे ज्यादा परेशानी क्षेत्र के बीमार लोगों पर पड़ रहा है। विगत दो सप्ताह ग्वाड़, चिनग्वाड़, मोलखंडी समेत क्षेत्र में बच्चे, महिला व पुरुष बुखार से पीड़ित हैं। क्षेत्र के ग्वाड़ थापली स्थित चिकित्सालय में मरीजों का उपचार नहीं हो पा रहा है। बीमार लोग पैदल चलने में असमर्थ हैं, ऐसे में मरीजों को उपचार के लिए पालकी के जरिए करीब आठ किमी दूर जिला चिकित्सालय पहुंचाया जा रहा है। क्षेत्र को जोड़ने वाला एकमात्र मोटरमार्ग बंद होने से क्षेत्र में जरूरी बुनियादी सुविधाओं का टोटा बन गया है, जबकि लोली, बीरों, ग्वाड, पीड़ा, च्वीथ, पंचभैयाखाल, चिन्गवाड, खरणपाणी, पटोती, थपलधार आदि गांवों के लोग अपने लिए बुनियादी सामग्री को पीठ पर लादकर ही पैदल आवाजाही कर रहे है।

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जानलेवा है पेरासिटामल

ज्यादातर लोग आम बीमारियों पर दर्द निवारक दवाएं लेते हैं, जिनमें सामान्य बुखार से लेकर तेज बुखार, बदनदर्द, हरारत की बीमारी को ठीक करने के लिए पैरासीटामॉल का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन हाल ही में हुए एक शोध से पता चला है कि पैरासीटामॉल का अत्यधिक सेवन दिल और लिबर पर विपरीत प्रभाव डालता है, जिससे अधिकांश लोगों का लीवर खराब हो जाता है।

 

 

इसके लगातार सेवन से काक्स 2 एन्जाइम को शरीर में काम करने से रोकता है, जो सीधा लीवर पर विपरीत असर डालता है।  एक जानकारी के अनुसार ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने लगभग छह लाख से ज्यादा मरीजों पर परीक्षण शोध कर निष्कर्ष निकला है कि हृदयघात के साथ साथ रक्तस्त्रव व उदर में छाले भी इससे संभव हैं। नियमित रूप से लंबे समय तक पैरासीटामॉल सेवन से 60 प्रतिशत से ज्यादा मरीज आकस्मिक मौत के शिकार होते हैं।

 

पैरासीटामॉल की टेबलेट अत्यधिक मात्र में नहीं लेना चाहिए। इससे इनका सीधा असर लिबर पर होता है, इसलिए बिना चिकित्सक की अनुमति के इस तरह की पेनकिलर नहीं लेना चाहिए।

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मंत्रीजी को लूट लिया चलती गाड़ी में

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मध्यप्रदेश के वित्त मंत्री जयंत मलैया और उनकी पत्नी सुधा मलैया के साथ हथियारबंद बदमाशों ने ट्रेन में लूटपाट की। मथुरा के कोसीकला के पास गुरुवार तड़के बदमाशों ने बंदूक की नोक पर दक्षिण एक्सप्रेस के फर्स्ट एसी कोच में इस घटना को अंजाम दिया। मलैया इस बारे में रेल मंत्री सुरेश प्रभु से बात करने के लिए लोकसभा पहुंच गए। निजामुद्दीन जीआरपी थाने में घटना की रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।

 

जयंत मलैया ने बताया कि मथुरा स्टेशन के पास कुछ हथियारबंद नकाबपोश उनके कोच में घुसे। उन्होंने समूचे कोच में लूटपाट की। मुझे जान से मारने की धमकी दे कर हीरे की अंगूठी, पत्नी के जेवरात व करीब 56 हजार रुपए नकद छीन लिए। बाद में जंजीर खींच कर भाग गए।

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मुंबई के म्यूनिसिपल स्कूलों में भगवत गीता

मुंबई के सभी म्यूनिसिपल स्कूलों में भगवत गीता पढ़ाई जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक, ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि बच्चे लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित कर सकें और उन्हें आध्यात्मिकता का ज्ञान हो। म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन ऑफ ग्रेटर मुंबई के डिप्टी कमिश्नर रामदास भाऊसाहब ने कहा कि हम भगवत गीता की शिक्षा बच्चों को देंगे ताकि वे आत्मनिर्भर और फैसले लेने में मजबूत बन सकें।

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रेल्वे से ज्यादा तेज है चोरी का सॉफ्टवेअर

आम आदमी सुबह के समय वयस्त रूटों पर ट्रेन के टिकट क्यों नहीं बुक करावा पाते थे? इस बात का खुलासा रेलवे ने कर दिया है। रेलवे की मानें तो अब सुबह के समय व्यस्तम रूटों के ट्रेन ‌टिकट बुक करने में लोगों को ज्यादा दिक्कत नहीं होगी।

 

इंडियन एक्सप्रेस की स्टोरी के मुताबिक रेलवे ने वह कारण पकड़ लिया है जिसकी वजह से हजारों लोग सुबह टिकट नहीं बुक करवा पाते थे। टिकट बुक करवाने वाले लोगों ने ‌शिकायत की थी कि सुबह आठ बजे काउंटर पर पहुंचने के बाद भी उनके टिकट बुक नहीं होते हैं।

 

रेलवे ने आंतरिक जांच करने के बाद यह बात पकड़ी कि रेलवे की ‌टिकट बुकिंग सेवा शुरू होने के एक मिनट के भीतर ही टिकट दलाल 4,000 टिकटों पर अपना कब्जा जमा लेते हैं। आंतरिक जांच में पता चला कि दलाल लोग पैसेंजर रिजर्वेशन सॉफ्टवेयर का फायदा उठा रहे थे। पैसेंजर रिजर्वेशन सॉफ्टवेयर के जरिए एक दिन पहले ही‌ किसी और ट्रेन में टिकट बुक करवाके अपनी जानकारी दे देते थे।

यह जानकारी सिस्टम में फीड हो जाती थी। अगले दिन टिकट बुक करवाते समय दलाल सिर्फ अपनी ट्रेन की जानकारी देते थे और उनकी सारी जानकारी खुद-ब-खुद अपडेट हो जाती थी। इसके बाद कुछ ही सेकेंड में उनका टिकट बुक हो जाता था।

 

इस सुविधा का फायदा उठाकर दलाल राजधानी, दुरंतो और अन्य लंबी दूरी की बढ़िया ट्रेन में टिकट बुक करवा लेते थे। उनको टिकट बुक करवाने में कुछ ही सेकेंड लगते थे, क्योंकि उनकी जानकारी पहले से ही सिस्टम में फीड होती थी।

 

रेलवे बोर्ड के सदस्य (ट्रैफिक) अजय शुक्ला ने बताया कि अब इस सुविधा को शुरूआती एक घंटे के लिए बंद कर दिया गया है। रेलवे ने यह जांच तब शुरू की जब उसे पता चला कि इस तरह से बहुत ज्यादा टिकट बुक किए जा रहे हैं।

 

रेल मंत्रालय ने इशारा किया है कि इस तरह के घोटाले को बुकिंग क्लर्क और अंदर के लोगों की मिलीभगत से किया जाता था। मंत्रालय ने सुनिश्चित किया है कि अब ऐसे लोगों को पकड़ा जाएगा।

 

साभार- अमर उजाला से

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शुक्रवार का प्रकाशन फिर शुरु होगा

शुक्रवार नाम की पत्रिका आगामी मई माह से बाजार में आ जाएगी। इसके नए प्रकाशक कलम मीडिया प्राइवेट लिमिटेड हैं और संपादक हैं अंबरीश कुमार। इसे र सिकंदराबाद के व्यवसायी जेबी सिंह ने खरीद लिया है। ।  अबी ये पत्रिका पाक्षिक होगी और कुछ समय बाद साप्ताहिक हो जाएगी।

इसके संपादक अंबरीश कुमार पच्चीस साल तक एक्सप्रेस समूह से जुड़े रहे हैं। उन्होंने जनसत्ता और इंडियन एक्सप्रेस दोनों अखबारों में काम किया है। जनसत्ता का छतीसगढ़ संस्करण उन्होंने ही लॉन्च किया था। पत्रिका में हिंदी पट्टी के साथ पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत की राजनैतिक कवरेज के साथ जन आंदोलन, पर्यावरण, साहित्य, संस्कृति आदि पर खास जोर रहेगा। बिहार के चुनाव की विशेष कवरेज की तैयारी भी की जा रही है।

अंबरीश कुमार के अनुसार, पत्रिका से विभिन्न अंचलों से न सिर्फ पत्रकारों, बल्कि सामाजिक, राजनैतिक कार्यकर्त्तोओं, पर्यावरणविदों, विद्यार्थियों, शिक्षकों, अधिकारियों, किसानों और लेखकों को जोड़ा जा रहा है। समाज तेजी से बदल रहा है और पत्र पत्रिकाओं के परंपरागत ढांचे टूट रहे हैं। हम इस पत्रिका के लिए सभी के सुझावों को आमंत्रित करते हैं। सुझाव उनकी ईमेल आईडी ambrish2000kumar@gmail.com पर भेज सकते हैं।

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कांस्य पदक विजेता प्रतीति व्यास का सम्मान

उदयपुर 19 मार्च , राष्ट्रीय अंतर विश्व विद्यालयी कयाकिंग एवं केनोइंग प्रतियोगिता में  काँस्य पदक विजेता उदयपुर शहर निवासी प्रतीति व्यास का  राजस्थान कयाकिंग एवं केनोइंग संघ द्वारा फतह सागर की पाल पर एक भव्य समारोह में शहर की पूर्व मेयर रजनी डांगी,महाराज जयसिंह डूंगरपुर एवं डॉ मोहन सिंह मेहता मेमोरियल ट्रस्ट के अध्यक्ष विजय एस  मेहता द्वारा सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर रजनी डांगी ने कहा कि शहर की प्रतिभाये जब आगे आती है तो इससे शहर का नाम विश्व पटल पर स्मरण किया जाता है।डांगी ने कहा की कयाकिंग में राजस्थान के इतिहास में यह पहला पदक है।

 कयाकिंग व केनोइंग संघ के उपाध्यक्ष चन्द्र गुप्त सिंह ने कहा  महज दो वर्ष पूर्व प्रारम्भ की गयी कयाकिंग में राष्ट्रिय स्तर पर पदक प्राप्त करना शहर के लिए गौरव पूर्ण उपलब्धि है।

 फतेहसागर पर आयोजित कार्यक्रम में प्रतीति ने विस्वास दिलाया कि आनेवाले समय में वे स्वर्ण पदक की उम्मीद अपनी मेहनत  से करेंगी।

 इस अवसर पर उपस्थित अतिथियों ने वरिष्ठ उपाध्यक्ष दिलीप सिंह का  कयाकिंग खेल को उदयपुर लाने एवं स्थापित करने व प्रशिक्षण की सुविधाये झुटाने में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए सफा बांध कर सम्मान किया गया। टीम के कोच कुलदीपक पालीवाल का भी माल्यार्पण कर अभिनन्दन किया गया। इस अवसर पर प्रतीति के माता पिता को भी सम्मानित लिया गया।

झील मित्र संस्थान के तेज शंकर पालीवाल ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि  उदयपुर में वाटर स्पोर्ट्स की  सम्भावनाये है ।  कार्यक्रम का संचालन  नन्द किशोर शर्मा ने किया।

 

प्रेषक

चन्द्रगुप्त सिंह चौहान

राजस्थान कयाकिंग एसोसिएसन , उदयपुर

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पढ़ाने के साथ पढ़ने की लगन की मिसाल डॉ.जैन ने हासिल की नवीं उपाधि

राजनांदगाँव। शासकीय दिग्विजय महाविद्यालय के राष्ट्रपति सम्मानित प्रोफ़ेसर डॉ.चन्द्रकुमार जैन ने हिंदी, अंग्रेजी, समाजशास्त्र, दर्शनशास्त्र, लोक प्रशासन जैसे पांच विषयों में एम.ए. और विज्ञान व विधि स्नातक और पीएचडी मिलाकर पंडित रविशंकर विश्वविद्यालय रायपुर से कुल आठ उपाधियाँ हासिल करने के अलावा सूचना के अधिकार पर भी कार्मिक, पेंशन एवं जन शिकायत निवारण विभाग, भारत सरकार का विशेष कोर्स पूर्ण कर लिया है। उच्च शिक्षा की राजकीय सेवा में लोक सेवा आयोग से चयनित होकर लगभग दो दशक पूरे कर रहे डॉ .जैन ने पढने-लिखने और बोलने की कला में अपनी गहरी पकड़ और दिलचस्पी के चलते यह उपलब्धि  हासिल कर एक मिसाल कायम की है। बहुआयामी गतिविधियों में सतत रचनात्मक सहभागिता करते हुए यह गौरव अर्जित कर डॉ.जैन नई पीढ़ी और व्यावसायिकों के लिए प्रेरक लगन का उदाहरण प्रस्तुत किया है।

उल्लेखनीय है कि दिग्विजय कालेज के हिन्दी विभाग में अध्यापन कर रहे डॉ .जैन ने ज्यादातर उपाधियाँ अपनी मातृ संस्था दिग्विजय कालेज में इससे पहले सेवारत रहकर अथवा स्वाध्याय  के माध्यम से प्राप्त कीं। वे सबसे पहले अपने विद्यार्थी जीवन में नियमित छात्र के रूप में दिग्विजय कालेज से ही गणित स्नातक हुए और बाद में पांच विषय में स्नातकोत्तर कोर्स किया। यहीं रहकर डॉ .जैन ने आचार्य विद्यासागर जी महाराज के भारतीय ज्ञानपीठ से प्रकाशित बहुचर्चित व कालजयी महाकाव्य मूकमाटी पर शोध कर डाक्टर आफ फिलासफी की उपाधि अर्जित की और उसका यश देश के कोने-कोने तक पहुंचाने का सिलसिला आज भी जारी रखा है।  

डॉ .जैन का मत है कि आज का दौर बहुविषयक, बहु अनुशासनिक ( मल्टी डिस्प्लीनरी ) ज्ञान और अनुभव की मांग करता है। अब प्राध्यापक का किसी एक विषय के ज्ञान तक सीमित रहना न तो उचित है न ही उपयोगी। इसके आलावा भाषाओं के साथ-साथ प्रभावी सम्प्रेषण क्षमता और विविध विषयों की जानकारी का संगम यदि हो जाये तो शिक्षण कर्म अधिक रोचक और प्रभावी बन सकता है। इससे शिक्षक के व्यक्तित्व के साथ-साथ विद्यार्थियों के व्यक्तित्व का भी विकास होता है। डॉ .जैन ने आगे भी पढने की पक्की धुन पर और भी कुछ नया कर दिखाने की मंशा ज़ाहिर की है।
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