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पंचमढ़ी में बनेगा देश का सबसे बड़ा प्राकृतिक स्वास्थ्य केंद्र

भागमभाग के जीवन और अत्यधिक तनाव से परेशान लोगों के लिए अच्छी खबर है। अब उन्हें मध्यप्रदेश के कश्मीर कहे जाने वाले पचमढ़ी के आसपास नेचर केयर सेंटर की सौगात मिलने वाली है। यहां देश का सबसे बड़ा नेचर केयर सेंटर बनाया जाएगा। यह सेंटर लगभग डेढ़ सौ एकड़ जमीन पर होगा। इसके लिए जमीन की तलाश जारी है। जमीन के मिलते ही सेंटर निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।

देश में इस समय 100 से अधिक नेचर केयर सेंटर हैं जहां नेचर तरीकों से तनाव और शारीरिक बीमारियों का इलाज किया जाता है। अब मध्यप्रदेश के पचमढ़ी के आसपास देश का सबसे बड़ा और अनेक थैरेपी प्रदाय करने वाला नेचर केयर सेंटर स्थापित जाएगा। सेंटर में सभी थैरेपी दी जाएंगी। अनेक शोधों के मुताबिक अधिकांश बीमारियों का कारण अत्याधिक तनाव है। इस तनाव को कम और दूर करने के लिए नेचर के नजदीक रहना सर्वत्ताम उपाय है।

इस सेंटर की खासियत यह होगी कि क्रीमीलेयर से लेकर लोअरलेयर तक के लोग इसका लाभ ले सकेंगे। मसलन हर वर्ग की पहुंच में यह सेंटर होगा। यहां इन वर्गो के लिए अलग-अलग सेक्शन बनाए जाएंगे, जहां शुल्क के मुताबिक थैरेपी और सुविधाएं दी जाएंगी। हालांकि स्वास्थ्य के अनुसार सभी को एक जैसी ही थैरेपी मुहैया होगी।

 

 

प्राकृतिक चिकित्सा में सर्वाधिक भूमिका वातावरण की है। जितना अच्छा वातावरण होगा उतनी जल्द ही स्वास्थ्य बेहतर होगा। पचमढ़ी की लोकेशन इसके लिए सबसे अच्छी है। यहां प्रकृति अपने खूबसूरत रूप में है। इसी प्राकृतिक खूबसूरती का सेंटर अपने यहां आने वाले लोगों को लाभ देगा।

 

अभियंगा हरबल मसाज, बेक एवं स्पाइन मसाज, हरबल कोलन थैरेपी, फुलमड बाथ, क्रोमो थैरेपी, हरबल स्टीम थैरेपी, रीफेलेक्सोलॉजी थैरेपी, डिटॉक्स थैरेपी, बॉडी स्कर्ब थैरेपी, म्यूजिक थैरेपी, अल्ट्रासाउंड थैरेपी, बैक्स थैरेपी सहित योगा, अंडरवाटर मसाज और अनेक मसाज और थैरेपी सेंटर में उपलब्ध होगी।

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दिग्विजय सिंह के बेटे की शादी बिहार के राजघराने में

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मध्‍य प्रदेश के पूर्व मुख्‍यमंत्री दिग्विजय सिंह के बेटे जयवर्धन सिंह की शादी बिहार के डुमरिया के पूर्व राजघराने के शत्रुंजय शाही की बेटी से तय हुई है। शत्रुंजय के पिता रणविजय शाही राजद के विधायक भी रह चुके हैं। जयवर्धन सिंह कांग्रेस के दिग्‍गज नेता और मध्‍य प्रदेश के पूर्व मुख्‍यमंत्री दिग्विजय सिंह के बेटे हैं। लड़की के पिता शत्रुंजय ने भी दिग्विजय सिंह के परिवार से रिश्ते की कोई औपचारिक पुष्टि की है।  

 

जयवर्धन का तिलक राघोगढ़ में ही होगा। जबकि शादी दिल्ली में होने की संभावना है। स्वागत समारोह भोपाल में होगा। 15 अप्रैल को तिलक समारोह और 21 अप्रैल को शादी होने की संभावना है। दिग्विजय सिंह के पुत्र जयवर्धन सिंह भी कांग्रेस के विधायक हैं। वे अपने पिता की परंपरागत सीट राघोगढ़ से ही चुनाव जीता है। दिग्विजय सिंह का ननिहाल बिहार में ही है।

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उज्जैन सिंहस्थ में आने वाले विदेशी पर्यटक घरों में ठहरेंगे

सिंहस्थ के दौरान उज्जैन आने वाले विदेशी सैलानियों को भारतीय संस्कृति, भारतीय परिवार और रहन-सहन से परिचित कराया जाएगा। इसके लिए मप्र पर्यटन विकास निगम विदेशी सैलानियों के ठहरने की सुविधा के लिए 'होम स्टे योजना शुरू कर रहा है। इसके तहत पर्यटकों को होटल, मोटल से अलग घरों में रहने की सुविधा प्रदान की जाएगी। पर्यटन विभाग योजना के लिए 10 से लेकर 100 घरों का चुनाव करेगा। इन घरों में पर्यटकों को उस परिवार के साथ वक्त गुजारने का मौका मिलेगा। उन्हें परिवार के साथ ही भोजन की व्यवस्था की जाएगी।

असल में, सिंहस्थ के दौरान देश-विदेश से पांच करोड़ श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। इनमें कई लाख विदेशी पर्यटक शामिल होंगे। उज्जैन में चूंकि होटल और मोटल की कमी है। एेसे में मप्र पर्यटन विकास निगम ने पर्यटकों ठहराने के लिए नई योजना तैयार की है। इसके तहत पर्यटकों को लोगों के घरों में ठहरने की सुविधा दी जाएगी।

उज्जैन में होटलों की कमी को पूरा करने के लिए पर्यटकों को पारिवारिक संस्कार और भारतीय संस्कृति से परिचित कराया जाएगा। इसके लिए उन्हें लोगों के घरों में ठहराएंगे। पर्यटक परिवार के साथ रहकर यहां के रहन-सहन, खान-पान, संयुक्त परिवार के मूल्यों के बारे में जान सकेंगे। इससे होटल की कमी को पूरा करने के साथ ही भारतीय संस्कृति का प्रचार-प्रसार भी कर सकेंगे। यहां के धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराया जाएगा। उन्हें सिंहस्थ के महत्व के बारे में विस्तार से बताया जाएगा। यहां की पूजा-अर्चना और सामाजिक व्यवस्थाओं के बारे में जान सकेंगे।

होम स्टे से विदेशी पर्यटकों को सिंहस्थ के दौरान उज्जैन में ज्यादा दिन रोक पाएंगे। साथ ही होटलों की कमी को पूरा किया जा सकेगा। इसके लिए हम 10 से 100 घरों को चुनेंगे। इन घरों में ठहरने के लिए सैलानियों को पूरी सुविधा दी जाएगी। उनके खानपान का इंतजाम भी परिवार के साथ किया जाएगा। इस योजना केलिए परिवारों से मिलेंगे और उन्हें राजी किया जाएगा। परिवारों को इसके लिए पर्यटन विभाग की तरफ से भुगतान भी किया जाएगा।

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वैज्ञानिक ने मोदीजी को सलाह दी, विभाग ने उसके खिलाफ जाँच बिठा दी

नए न्यूक्लियर कॉम्प्लेक्स पर मोदी को सुझाव देकर हैदराबाद में काम करने वाले वरिष्ठ वैज्ञानिक पशुपति राव बुरे फंस गए हैं। उन्होंने राजस्थान के कोटा में एक न्यूक्लियर फसिलिटी बनाने के बारे में पीएम के ऑफिशल पोर्टल (pmindia.gov.in) पर सुझाव दिए थे। पीएमओ के तहत काम करने वाला डिपार्टमेंट ऑफ एटॉमिक एनर्जी (डीएई) अब उनके पीछे पड़ गया है। पीएमओ ने इस मामले में ई-मेल किए गए प्रश्नों का जवाब नहीं दिया। राव ने भी इस बारे में कुछ नहीं कहा।

 

क्या है मामला? राव ने 28 सितंबर, 2014 को pmindia.gov.in पर सुझाव भेजे थे। यह पोर्टल अपने आइडिया शेयर करने और पीएम से अपनी बात कहने के लिए बनाया गया है। राव ने नए न्यूक्लियर कॉम्प्लेक्स से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर अपनी राय भेजी थी, लेकिन पीएमओ ने उसे राव के एम्प्लॉयर डीएई के पास 'शिकायत' के रूप में भेज दिया और फिर इस वर्ष 21 जनवरी को राव को ईमेल से बताया कि उनकी शिकायत का निपटारा कर दिया गया है।

 

डीएई को भेजे गए पत्र में पीएमओ ने राव का नाम और पद भी बता दिया था। इससे उनकी पूरी पहचान उनके सीनियर्स को पता चल गई।

 

बाद में डीएई ने राव से स्पष्टीकरण मांगने शुरू किए। डीएई के कुछ अधिकारियों ने बताया है कि राव को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। कुछ वर्ष पहले डिफेंस रिसर्च ऐंड डिवेलपमेंट ऑर्गनाइजेशन में भ्रष्टाचार का खुलासा करने का दावा करने वाले विसलब्लोअर प्रभु डंडरियाल ने इस वर्ष 27 जनवरी को पीएमओ में राव के मामले को लेकर एक आरटीआई दाखिल की थी।

 

डंडरियाल ने पीएमओ से उन गाइडलाइंस के बारे में पूछा था, जिनका पालन वह सरकारी अधिकारियों से 'संवेदनशील' कम्युनिकेशन के बारे में करता है।

 

कोटा प्रॉजेक्ट के बारे में राव ने लागत घटाने के लिए तकनीकी ब्योरे के अलावा यह प्रस्ताव भी दिया था कि प्रॉजेक्ट की समीक्षा के लिए एक स्वतंत्र टीम बनाई जाए। एनएफसी के डेप्युटी चीफ ऐग्जिक्युटिव एस. गोवर्द्धन राव ने कहा है कि वह (राव) स्टाफ मेंबर हैं। इसे स्टाफ की शिकायत के रूप में देखा जा रहा है।

 

साभार- इकॉनामिक टाईम्स से

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अपनी माँ के नाम बने सभागृह को जब्ती से बचाने आगे नहीं आई लता मंगेशकर

 स्वर सम्राज्ञी लता मंगेशकर की मां को समर्पित 'माई मंगेशकर सभागार' को जब्ती से बचाने के लिए भले ही स्वर कोकिला आगे नहीं आईं, लेकिन मराठी समाज के लोगों ने एक ही दिन में 20 लाख रुपए इकठ्ठा कर 'समाज की शान को परवान चढ़ाने का फैसला लिया। इस तरह बकाया एक करोड़ चुकाने के लिए अब तक 57 लाख जुटाए जा चुके हैं। 'मराठी समाज" संस्था 15 साल के लिए सांस्कृतिक गतिविधियों का मास्टर प्लान भी बनाएगी।

 

गौरतलब है कि मराठी समाज, इंदूर द्वारा निर्मित माई मंगेशकर सभागार पर 'छत्रपति सहकारी साख संस्था" द्वारा 1 करोड़ 1 लाख रुपए बकाया होने का दावा किया गया है। इसके विरुद्ध समाज ने अपील की है। जिसकी सुनवाई 16 अप्रैल को होगी। इसमें रिजर्व बैंक के नियमानुसार ब्याज गणना करने की गुजारिश की गई है।

 

जस्टिस पीडी मूळे, अध्यक्ष, मराठी समाज इंदूर  ने कहा कि लता मंगेशकर द्वारा वादा न पूरा किए जाने के कारण यह स्थिति बनी है। हमारी पूरी कोशिश है मराठी समाज की अस्मिता के साथ इंदौर कलाप्रेमियों की प्रतिष्ठा पर आंच न आने दी जाए।

 

महाराष्ट्र समाज इन्दौर के सचिव चंद्रकांत पराडकर के अनुसार महाराष्ट्र ब्राम्हण सभा ने 5 लाख, पारनेरकर ट्रस्ट ने 5 लाख, पीडी मूळे ने 2 लाख, वैशाली पिंगळे ने 2 लाख, सुधाकर एकतारे ने 1 लाख, घोड़गांवकर परिवार ने 1 लाख और बलवंत वाखळे (सागर) ने 1 लाख की सहयोग राशि प्रदान की।

 

इसके अलावा भी कई लोगों ने 11 से 51 हजार रु. की सहयोग राशि दी। अभियान के तहत अब तक 57 लाख एकत्र की जा चुके हैं। शेष राशि समाज द्वारा एक महीने के भीतर एकत्र कर ली जाएगी। इसके लिए कई प्रतिष्ठित व्यक्तियों और संस्थाओं ने आश्वस्त किया है।

 

 

34 लाख का लोन हुआ करोड़ के पार

2000 में शुरू हुआ निर्माण कार्य, लता मंगेशकर ने किया था कार्यक्रम पेश करने का वादा

2011 से शुरू हुआ कार्यक्रमों का सिलसिला

700 दर्शकों की बैठक क्षमता

12000 स्क्वेयर फीट में बना है सभागार

34 लाख लोन, छत्रपति सहकारी साख संस्था से दिसंबर 2003 में लिया

01 करोड़ से ऊपर चुकाना बकाया

16 अप्रैल को कोर्ट में अगली सुनवाई

 

इन्दौर के दैनिक  नईदुनिया में 'माई मंगेशकर सभागार' की खबर (इंटरनेट पर) पढ़कर कई एनआरआईज ने मदद की पेशकश की है। मुंबई के भी कई धनाढ्य लोगों ने मदद के लिए हाथ बढ़ाया है।

 

इस बीच इंदौरियों ने सहयोग राशि एकत्र करने का सिलसिला दूसरे दिन भी जारी रखा। सामाजिक, राजनीतिक तमाम स्तरों पर मसले को समुचित हल के लिए कवायद नए सिरे से शुरू की गई हैं। ख्यात गायक सुरेश वाडकर का कंसर्ट आयोजित करने की भी कोशिश की जा रही है। कई स्थानीय कलाकारों ने भी चैरिटी प्रोग्राम पेश करने का वादा किया है। समाज की गरिमा बचाने के लिए मराठी समाज का हर छोटा-बड़ा कार्यकर्ता अपने तई तमाम प्रयास कर रहा है।

 

मराठी समाज इंदूर की कार्यकारिणी सदस्य रंजना ठाकुर के मुताबिक उन्हें यूएस में रहने वाले संजीव निवोस्कर ने फोन पर बताया कि माई मंगेशकर को लेकर बन रही परिस्थितियों के मद्देनजर उनके कई मित्रों ने हरसंभव मदद की पेशकश की है। उधर, मुंबई में भी खबर का असर हुआ है। वहां के कई व्यापारियों ने भी सहयोग की पहल की है।

 

इंदौर को 10 हिस्सों में बांटकरहर एरिया के 10-10 लोगों की लिस्ट बनाकर उनसे सहयोग के लिए कार्यकारिणी के सदस्य नियुक्त किए जा रहे हैं। मेघा खानवलकर ने बताया कि खबर प्रकाशित होने के बाद समाज के सदस्य ज्यादा संजीदगी से 'माई" की गरिमा बचाने के राजनीतिक, सामाजिक प्रयास कर रहे हैं।

 

सांसद ने कहा- 'हल करो मसला'

 

सांसद और लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन के पुत्र मिलिंद महाजन ने कहा कि मुद्दे को लेकर मराठी समाज के लोग कुछ दिनों पहले ताई से मिले थे। दिल्ली में व्यस्तता के चलते उन्होंने मुझसे मसला जल्द से जल्द हल करने के लिए कहा है।

 

हमें लगता है कि इस मसले को कोर्ट में पहले सही तरीके से उठाया नहीं गया। इसलिए हमने बैंक एक्सपर्ट्स की सलाह लेकर फिर से अपील की है। ये अपील मंजूर हो गई तो बकाया राशि में से करीब 20 लाख की राशि कम हो जाएगी। इसके अलावा हम हॉल में एक्टिविटीज कर केंद्र और राज्य सरकारों से भी ग्रांट की कोशिश कर रहे हैं।

 

 

सचिव चंद्रकांत पराडकर ने बताया कि इंदौर परस्पर बैंक कर्मचारी संघ के सदस्य भी मदद के लिए आगे आए हैं। मराठी उद्योगपतियो ने भी दो दिनों में संस्था के लिए सफिशिएंट अमाउंट देने की पेशकश की है। रिटायर बैंक ऑफिसर उदय इंगळे ने बताया कि माई मंगेशकर के लिए सोमवार को ही उनके पास लोगों ने 80 हजार से अधिक की राशि जमा करा दी।

 

25 मार्च तक दो लाख रुपए से अधिक की राशि एकत्र करने का लक्ष्य है। खबर प्रकाशित के बाद लोग खुले दिल से सहयोग कर रहे हैं। पहले लोगों को लगता था कि उनकी छोटी सहायता राशि शायद स्वीकार ही नहीं की जाएगी मगर अब सभी लोग अपनी सामर्थ्य के मुताबिक मदद कर रहे हैं।

 

शहर के जाने-माने कलाकार संतोष अग्निहोत्री ने बताया कि 'माई" के लिए सहयोग राशि एकत्र करने के लिए वे नि:शुल्क कार्यक्रम पेश करेंगे। इसके अलावा अप्रैल के फर्स्ट वीक में सुरेश वाडकर या उनके समकक्ष किसी अन्य कलाकार का कंसर्ट भी कराया जाएगा।

 

गायक गौतम काले भी अपने ग्रुप के साथ सहायतार्थ कार्यक्रम पेश करेंगे। 22 मार्च को जाल सभागार में होने वाले म्यूजिकल प्रोग्राम में भी सपना केकरे और सुधीर वासवानी माई की चैरिटी के लिए नि:शुल्क प्रोग्राम करेंगे। सपना ने बताया कि इसके बाद अप्रैल के पहले सप्ताह में भी संस्था 'स्वरदा" के कलाकार एक और चैरिटी प्रोग्राम करेंगे।

 

खबर का ये हुआ असर

 

– विदेशों से बढ़े मदद के लिए हाथ

 

– मुंबई के व्यापारी भी करेंगे मदद

 

– सांसद ने मामले की अपडेट ली

 

– कार्यकारिणी के सदस्य देंगे एक-एक लाख रु.

 

– इंदौर के 100 धनाढ्यों से मदद की अपील

 

– फेमस आर्टिस्ट्स के चैरिटी प्रोग्राम

 

– स्थानीय कलाकार करेंगे नि:शुल्क कार्यक्रम

 

– केंद्र और राज्य सरकारों से ग्रांट की कवायद

 

साभार- दैनिक नईदुनिया से

 

फोटो साभार -इंडियन एक्सप्रेस से

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ह्रदय की गहराई और ध्येय की सच्चाई का दर्पण

लौट कर आना नहीं होगा,‘जो कहूँगा सच कहूँगा,और अब तो बात फ़ैल गयी के रूप में रोचक, चित्‍ताकर्षक और ज़र्रा-ज़र्रा पठनीय संस्मरणों की त्रयी लिखने वाले प्राध्यापक कान्‍ति‍ कुमार जैन एक बार फिर अपनी उसी धार और उसी तेवर के साथ बैकुंठपुर में बचपन के जरिये उपस्थित हुए हैं। चित्रात्मक वर्णन शैली के मर्मस्पर्शी कलाकार की लेखनी का यह मनोहारी उदाहरण है। क्रांतिकुमार जी की लेखनी आपको उनके देखे हुए को देखने और जिए हुए को जीने के मुहाने तक पहुँचाने में समर्थ मालूम पड़ती है, तो कोई आश्चर्य की बात नहीं है। दरअसल यह उनकी शैली की अनिवार्य विशेषता है। 

फर्क है तो बस इतना कि जहाँ अब तक वह हमें रामेश्‍वर शुक्ल अंचल, आचार्य रजनीश, शिव मंगल सिंह सुमन, हरिशंकर परसाई, शरद जोशी जैसे नामवरों के बहुविध आयामों से परिचित कराते रहे हैं, इस बार उन्होंने अपने संस्मरणों के केन्‍द्र में समाज के उस तबके को रखा है, जिसकी समाज में उपस्थिति तो है, लेकिन पूरी खामोशी के साथ। यह वह वर्ग है जहाँ केवल हारी-बिमारी में ही फल खाये जाते हैं, जहाँ केवल त्योहार के दिन ही जुआ खेला जाता हैं, जहाँ शादी-ब्याह में कपडे़ खराब होने की परवाह किये बगैर पीठ पर हल्दी के छापे मारे जाते हैं और जहाँ मेहमान के लिये घर में लाई गई मिठाई का पैकेट मेहमान के रवाना होने से पहले कूडे़दान के हवाले कर दिया जाता है। ये वे  लोग हैं, जिनमें न तो किसी बडी़ आकांक्षा की घोडी़ कुलाँचे मार रही है, न किसी बडे़ आक्रोश की चिंगारी खदबदा रही है। 

चालीस और पचास के दशक के भारतीय कस्बाई मध्यवर्ग और निम्न मध्यवर्ग के जीवन की छोटी-छोटी घटनाओं को सूक्ष्मता से बयाँ करते इन संस्‍मरणों में तत्कालीन समय और समाज पूरी सघनता से मौजूद है। इन्हें रचते हुए कान्‍ति‍जी ने कभी तालाब के किनारे खडे़ होकर ढेला मारा है तो कभी कमीज उतार कर खुद तालाब में उतरे हैं। इन्हें पढ़ते हुए आम आदमी के जीवन की स्वाभाविक उठापठक को देख कभी पाठक के मुँह से ‘अरे, ये तो अपने जैसे ही हैं’ निकलता है तो कभी किसी का पतन देख यह बात निकलती है-

ऐसे तो न देखो के बहक जाएं कहीं हम,
आखिर तो इक इंसान हैं फ़रिश्ते तो नहीं हम।

कान्‍ति‍ कुमार के संस्मरणों में जिस प्रकार बचपन की शैतानियाँ हैं, मस्तियाँ हैं, अलसाई दुपहरी में किये जाने वाले प्रयोग और रात के सन्नाटे के रोमांच हैं, साँप को सीता की लट मानकर उनसे छेड़छाड़ की हिम्मत है और चूहों को बिल से खेंच निकालने की निरपेक्षता है, उन्हें वही किशोर हासिल कर सकता है, जो ‘राजा बेटा’ की तरह नहा-धोकर स्कूल पहुँचकर फिर वहाँ से सीधे घर वापस न आए और घर पहुँचकर तुरन्त पट्टेदार पायजामा पहनकर पहले ‘होम वर्क’ और फिर ‘होम के वर्क’ (मसलन बडे़ भाई साहब के कपड़ों की इस्त्री करना या पिताजी के हुक्के में तम्‍बाकू भरना या माँ के चूल्हे के लिये लकडियों की दो फाँक करना जैसे काम) में न जुट जाये। जीवन के तिलस्मी खजाने को कोई ‘रामपुर का लक्ष्मण’ नहीं खोज सकता। इसके लिये तो एक घुमंतू, मनमौजी, अपने परिवेश के प्रति कुछ ज्यादा ही उत्सुक किशोर का जिगर चाहिये।

‘बैकुंठपुर में बचपन’ पढ़ते वक्‍त ऐसा कोई भय नहीं सताता। सस्वर रचना पाठ करते समय कहीं भी आवाज मंद करने की, कुछ शब्द या पंक्‍ति‍याँ काटने की जेहमत उठाने की कोई जरूरत नहीं। हो भी कैसे ? आखिर आम आदमी के ये संस्मरण आम आदमी की भाषा में आम आदमी के लिये ही तो लिखे गये हैं। इसलिये इन्हें खुलकर पढा़ जा सकता है। सिर्फ पढा़ ही नहीं, गुना भी जा सकता है और आने वाले कल के लिये सहेज कर भी रखा जा सकता है, क्योंकि ये संस्मरण हमें समाज के अमिताभ बच्चन या सचिन तेंदुलकर जैसे ‘सुपर हीरोज’ की स्थूलताओं से नहीं, बल्कि बैंडमास्टर और मुश्किल खाँ जैसे ‘अनसंग हीरोज’ की सूक्ष्मताओं से परिचित कराते हैं। 

कांतिकुमार जी का लेखन ह्रदय की गहराई और ध्येय की सच्चाई का दर्पण है। उनके संस्मरण पढ़कर एक जीवन में कई जीवन का वास्तविक रस प्राप्त किया जा सकता है. बैकुंठपुर में बचपन भी उसी श्रृंखला की अभिन्न कड़ी है। 
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हिन्दी विभाग, शासकीय दिग्विजय 
पीजी कालेज, राजनांदगांव 
मो.9301054300 

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रेल इंजिनों में लगेंगे दुर्घटना रोधी उपकरण

रेलवे सिग्नलों में खराबी के कारण होने वाले हादसों में कमी लाने के लिए अब रेलवे ट्रेन के इंजन में कम्प्यूटराइज्ड डिवाइस लगाएगा। यह सिस्टम 200 से 300 मीटर पहले ही ड्राइवर को अलर्ट कर देगा। इसके अलावा आपातकालीन स्थिति में ड्राइवर के द्वारा यदि निर्धारित समय तक ट्रेन संचालन में कोई प्रतिक्रिया नहीं होगी तो एक निश्चित समय बाद ट्रेन अपने आप रुक जाएगी।

डिवाइस ट्रायल इसी महीने के अंत से उत्तर रेलवे में शुरू किया जाएगा। यहां सफल होने के बाद इसे पश्चिम रेलवे की ट्रेनों में भी लगाया जाएगा। रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड आर्गेनाइजेशन के अधिकारी के अनुसार डिवाइस का ट्रायल कर लिया है। पहले कुछ ट्रेनों में इसका ट्रायल किया जाएगा। रेलवे ने ड्राइवर, गार्ड सहित अन्य रेल कर्मचारियों से ही सिग्नल और आपातकाल में आने वाली समस्या के निराकरण के संबंध में सुझाव मांगे थे। इसी कड़ी में यह ऑटोमेटिक डिवाइस लगाने का सुझाव रेलकर्मियों ने दिया था। सिस्टम को रेल इंजन में लगने के बाद ड्राइवर को आने वाले सिग्नलों की जानकारी मिलेगी। डिवाइस को ड्राइवर गार्ड के वॉकी-टॉकी से भी जोड़ा जाएगा।

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अंग्रेजों ने भारतीय अनपढ़ों से सीखी थी इंजिनीयरिंग

रायपुर। 25 नवंबर 1847 में छह- सात सौ की आबादी वाले एक गांव में यूरोप और एशिया का पहला सिविल इंजीनियरिंग कॉलेज खोला गया। यह कॉलेज अंग्रेज इंजीनियर थॉमसन ने ईस्ट इंडिया कंपनी को यह बोलकर खुलवाया कि इससे उसका एंपायर बढ़ेगा।

इस समय तक ब्रिटेन में भी सिविल इंजीनियरिंग कॉलेज नहीं था। संभवतः जर्मनी में कोई कॉलेज खुला था। यह कॉलेज गंगा नहर बनने के बाद खोला गया। जल संवाद में अपने व्याख्यान के दौरान गांधीवादी पर्यावरणविद, लेखक, संपादक अनुपम मिश्र ने बताया कि नहर बनाने वाले कोई और नहीं, रुढ़की गांव के अनपढ़ लोग थे, जिन्होंने करीब 200 किमी लंबी नहर बनाई, जो हिमालय से निकलकर मेरठ होते हुए यहां आती है।

मिस्टर थॉमसन ने यहां के लोगों की प्रतिभा को पहचाना। अनपढ़ लोगों से इंजीनियरिंग पढ़ाने उस समय इंग्लैंड से लोग यहां आए थे। 1854 में थॉमसन कॉलेज नाम दिया गया। 1959 में इसे यूनिवर्सिटी का दर्जा मिला और फिर 2000 में आईआईटी का दर्जा मिला। पानी के संरक्षण के पारंपरिक, लेकिन पूरी तरह वैज्ञानिक तरीकों की जानकारी श्री मिश्र ने प्रेजन्टेशन के माध्यम से दी।

3 करोड़ लीटर पानी का टैंक

3 करोड़ लीटर पानी इकट्ठा करने वाली 400 साल पुरानी टंकी की जानकारी उन्होंने दी, जिसमें पास की पहाड़ियों का पानी बहकर एक जगह इकठ्ठा होता है। इससे साल भर आसपास की आबादी की प्यास बुझती है। उन्होंने इस सिस्टम की खासियत बताई कि सब जगह पानी छानकर लाने के बाद टंकी में पानी पहुंचाने से पहले थोड़ा से उलटा ढाल दिया गया, जिससे पानी में रेत का एक कण भी हो तो ऊपर से बहकर न निकल पाए।

वाटर हार्वेस्टिंग का नमूना 800 साल पुराना जैसलमेर शहर

जैसलमेर को 800 साल पहले बसाया गया। यह सिल्क रूट का टर्मिनल पॉइंट है। हर घर की छत पर बारिश के पानी को इकठ्ठा करने की व्यवस्था की गई। 52 तालाब बनाए गए। राजा प्रजा और समाज का हर हिस्से ने काम किया। कहीं भी तकनीकी रूप से गड़बड़ी नहीं मिलेगी। यहां पानी का अध्ययन करना बंद हो गया। यह वॉटर हार्वेस्टिंग का बहुत अच्छा नमूना है।

साल भर लबालब रहता है तालाब

जसेरी तालाब पिता ने अपने बेटे की याद में बनाया था। इस तालाब की खासियत है कि यह हमेशा भरा रहता है। चारों ओर हरियाली ने घेर रखा है। तालाब में जिप्सम का तल है, जो पानी को रिसने नहीं देता। पूरा इतिहास ताम्र पत्र में लिखकर 42 फीट नीचे दबा दिया गया है।

लोगों के डीएनए में इंजीनियरिंग

मिश्र ने अलग-अलग उदाहरणों के जरिए बताया कि राजस्थान के अनपढ़ लोगों में सिविल इंजीनियरिंग खून में डीएनए में घुला हुआ है। अब ऐसे लोगों के बीच हम अपना ज्ञान ले जा रहे हैं, जिनके निर्माण पांच से 10 साल भी नहीं टिकते जबकि इनके स्ट्रक्चर में 400 से अधिक साल बाद भी एक दरार तक नजर नहीं आती। इस दौरान पोखरण तालाब की उपेक्षा, 900 साल की बावड़ी, कुएं के साथ 200 लोगों के ठहरने की व्यवस्था, 10 हजार पशुओं को पानी पिलाने वाली व्यवस्था आदि के बारे में उन्होंने बताया।

हाफुुर पत्थर

एक गांव में पानी साफ करने वाला पत्थर, जो जमीन में दो से तीन फीट में निकल जाता है। हाफुर पत्थर पानी साफ करता है। पानी का हार्डनेस कम करता है। इस पत्थर से बना कुआं ऐसे गांव में है, जहां 7 एमएम पानी गिरता है।

साभार http://naidunia.jagran.com/ से 

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साइबर क्राइम से बचने के सटीक उपाय

साइबर क्राइम को कम्प्यूटर क्राइम या इंटरनेट क्राइम के नाम से भी जाना जाता है. कम्प्यूटर्स और इंटरनेट के द्वारा की गई किसी भी तरह की आपराधिक गतिविधियां साइबर क्राइम की श्रेणी में आती है. साइबर क्राइम के माध्यम से कही दूर बैठा हैकर आपके सरकारी या महत्वपूर्ण कारोबारी दस्तावेजों या आपकी निजी महत्वपूर्ण जानकारी को इंटरनेट और कम्प्यूटर के माध्यम से चुरा सकता है. साइबर क्राइम में गैर धन अपराध भी शामिल है जैसे की ई-मेल के माध्यम से स्पैम करना, किसी वस्तु विशेष की प्रचार के लिए मेल करना, किसी कंपनी के गोपनीय दस्तावेजों को सार्वजनिक करना, वायरस को मेल के माध्यम से फैलाना, प्रोर्नोग्राफी को बढ़ावा देना, आई. आर. सी (इंटरनेट रीले चैट)के माध्यम से गलत कार्यों को अंजाम देने के लिए ग्रुप चैट करना, सॉफ्टवेयर प्राइवेसी को बढ़ावा देना और सामान्य नागरिकों को परेशान करने के लिए कम्प्यूटर और इंटरनेट के माध्यम से कोई भी गलत कदम उठाना उसके अर्न्तगत आता है.

अपने इंटरनेट की बैंकिंग और बैंकिंग लेन-देन का इस्तेमाल कभी भी सार्वजनिक स्थान जैसे कि साइबर कैफे, ऑफिस, पार्क, सार्वजनिक मीटिंग और किसी भीड़-भाड़ी वाले स्थान पर न करें. किसी भी प्रकार के बैंकिंग लेन-देन के लिए आप अपने पर्सनल कम्प्यूटर या लैपटॉप का ही इस्तेमाल करें. जब कभी भी आप अपने इंटरनेट बैंकिंग या किसी भी जरुरी अकाउंट में लॉगिन करें, तो काम खत्म कर अपने अकाउंट को लॉगआउट करना न भूलें और जब आप लॉगिन कर रहें, हो तब इस बात पर जरूर धयान दें कि पासवर्ड टाइप करने के बाद कम्प्यूटर द्वारा पूछे जा रहे ऑप्शन रिमेब्बर पासवर्ड या कीप लॉगिन में क्लिक न करें.

लोगों को धोखा देने के लिए और अपनी चंगुल में फसाने के लिए अधिकतर स्कैमर्स(घोटाले बाज) फेक साइट को प्रयोग मे ला रहे हैं, जिससे की लोगों को पता भी न चले और उनका काम भी आसानी से हो जाए, आइये जानते हैं आखिर फेक साइट होती क्या है? फेक साइट के नाम से ही प्रतीत हो जाता है कि यह एक झूठी वेबसाइट है, जो हु ब हु आपके बैंक के वेबसाइट, खरीदारी करने वाली साइट या पेमेंट गेटवे के जैसा इंटरफेस होता है. ऑनलाइन ख़रीदारी या कोई भी ऑनलाइन लेन-देन करने के लिए जैसे ही आप यहां अपने क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, इंटरनेट बैंकिंग का यूजर नेम, लॉगिन पासवर्ड ट्रांजिक्सन पासवर्ड या ओ.टी.पी इंटर करते हैं, तो वो इस डिटेल्स को कॉपी कर लेता है और बाद में इसका प्रयोग कोई भी गलत तरीके से गलत कार्यों के लिए कर सकता है, जिसको आप और हम समझ नहीं पाते हैं कि यह गलत ट्रांज्किशन कैसे हो गया? फेक वेबसाइट का संचालन एक संगठित ग्रुप के क्रिमिनल्स के द्वारा किया जाता है.

आज पूरी दुनिया इंटरनेट और कम्प्यूटर के माध्यम से एकदूसरे से जूड़ी हुई है, जिसके बहुत सारे लाभ है और उसके साथ ही बहुत सारे खतरे भी हैं. जैसे इंटरनेट के माध्यम से चोरी, फ्रॉड और वायरस इत्यादि, नीचे दिए गए कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं को ध्यान में रख कर काम किया जाए, तो साइबर क्राइम के शिकार होने का खतरा कम हो जाता है.

आप अपने कम्प्यूटर में अगर इंटरनेट का प्रयोग करते हैं, तो सबसे पहले आप अपने पर्सनल कम्प्यूटर को पासवर्ड से सुरक्षित कीजिए, जिससे कोई दूसरा व्यक्ति बिना आपके जानकारी के आपका कम्प्यूटर प्रयोग न कर सकें. अगर आपका कम्प्यूटर सुरक्षित नहीं होगा, तो क्रिमिनल या कोई व्यक्ति आपके कम्प्यूटर से जरूरी जानकारियां चुरा सकता है और गलत कार्यों के लिए आपके कम्प्यूटर का इस्तेमाल भी कर सकता है. इसके साथ आप यह भी चेक करें की आपके कम्प्यूटर में लेटेस्ट सिक्योरिटी अपडेटेड इन्सटाल्ड है या नहीं. साथ ही यह भी चेक करें की आपका एंटी वायरस और एंटी स्पाई वेयर सॉफ्टवेयर ठीक से काम कर रहा है या नहीं और उसके वेंडर से जरुरी अपडेट्स आ रहा है या नहीं. 

हमेशा बहुत स्ट्रांग पासवर्ड का प्रयोग करें, जिससे आसानी से किसी को पता न चले, क्योंकि साइबर क्रिमिनल प्रोग्रामर ऐसे सॉफ्टवेयर प्रोग्राम का निर्माण करते हैं जो की आपके साधारण से पासवर्ड को आसानी से गेस कर सकता है. ऐसे में अपने आप को बचाने के लिए आप ऐसा पासवर्ड सेट करें, जिसका कोई दूसरा अनुमान न लगा सके और आपआसानी से याद भी रख सकें. आपका पासवर्ड कम से कम आठ कैरेक्टर का हो जो की लोअर केस लेटर्स, अपर केस लेटर्स, नंबर्स और स्पेशल कैरेक्टर्स का मिश्रण हो. अगर आप एक से अधिक अकाउंट्स का प्रयोग करते हैं, तो सभी के लिए अलग- अलग पासवर्ड का प्रयोग करें, अपना पासवर्ड कभी भी अपने नाम, पता, गली नंबर, जन्म तिथि, परिवार के सदस्यों के नाम, विद्यालय के नाम या अपने वाहनो के नंबर पर न बनाएं, जिसका दूसरों के द्वारा आसानी से अनुमान न लगाया जा सके.

अपने इंटरनेट बैंकिंग और बैंकिग ट्रांजिक्शन का इस्तेमाल कभी भी सार्वजनिक स्थान जैसे कि साइबर कैफे, ऑफिस, पार्क, सार्वजनिक मीटिंग और किसी भीड़-भाड़ी वाले स्थान पर न करें. किसी भी प्रकार के बैंकिंग लेन-देन के लिए आप अपने पर्सनल कम्प्यूटर या लैपटॉप का ही इस्तेमाल करें. जब कभी भी आप अपने इंटरनेट बैंकिंग या किसी भी जरुरी अकाउंट में लॉगिन करें, तो काम खत्म कर अपने अकाउंट को लॉगआउट करना न भूलें और जब आप लॉगिन कर रहें, हो तब इस बात पर जरूर धयान दें कि पासवर्ड टाइप करने के बाद कम्प्यूटर द्वारा पूछे जा रहे ऑप्शन रिमेब्बर पासवर्ड या कीप लॉगिन में क्लिक न करें.कभी भी आप अपने बैंकिंग यूजर नेम, लॉगिन पासवर्ड, ट्रांजिक्शन पासवर्ड , ओ. टी.पी, गोपनीय प्रश्‍नों या गोपनीय उत्तर को अपने मोबाइल, नोटबुक, डायरी, लैपटॉप या किसी कागज पर न लिखें, हमेशा आप ऐसा पासवर्ड सेट करें, जो की आपको आसानी से याद रहे और आपको इसे कहीं लिखने की आवश्यकता न पड़े.

अपने सोशल मीडिया के अकाउंट को देखते रहें, अगर कभी आप अपने सोशल साइट्स के अकाउंट को डिलीट कर रहे हैं, तो उससे पहले आप अपनी सारी पर्सनल जानकारी को डिलीट कर दें और फिर उसके बाद आप अपना अकाउंट डीएक्टिवेट करें या डिलीट करें. आप किसी भी स्पैम ई-मेल का उत्तर न दे, अंजान ई-मेल में आए अटैचमेंट्स को कभी खोल कर न देखें या उस पर मौजूद लिंक पर क्लिक न करें. इसमें वायरस या ऐसा प्रोग्राम हो सकता है, जिसको क्लिक करते ही आपका कम्प्यूटर उनके कंट्रोल में जा सकता है या आपके कम्प्यूटर में वायरस के प्रभाव से कोई जरूरी फाइल डिलीट हो जाए और आपका ऑपरेटिंग सिस्टम करप्ट हो जाए.

अगर किसी वेबसाइट पर कोई पॉपअप खुले और आपको कुछ आकर्षक गिफ्ट या इनाम ऑफर करे तब आप अपनी पर्सनल जानकारी या बैंक अकाउंट नंबर या बैंक से संबंधित कोई भी जानकारी न भरें. अगर आप किसी ऑफर का लाभ लेना चाहते हैं, तो आप सीधे रिटेलर के वेबसाइट, रीटेल आउटलेट या अन्य जायज साइट से संपर्क करें. आज के दौर मे इंटरनेट हमारे लिए काफी महत्वपूर्ण है, लेकिन इंटरनेट पर जरा सी ना समझी स्कैमर्स को साइबर क्राइम के लिए खुला निमंत्रण देता है. आशा है कि अगर आप इन सभी बिंदुओं पर गौर करते हैं, तो आप साइबर क्राइम के शिकार होने से बच सकते हैं। 

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प्राध्यापक, शासकीय दिग्विजय पीजी 
स्नातकोत्तर कालेज, राजनांदगांव 

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मूल्य जानते सब हैं, पालन करने की जरूरत : सच्चिदानंद जोशी

मध्यप्रदेश सरकार और माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय की ओर से 'संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी में मूल्यनिष्ठताविषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संविमर्श सम्पन्न

भोपाल प्रत्येक व्यक्ति मूल्यों की जानकारी रखता है। जरूरत बस मूल्यों को सदैव याद रखने और उनका पालन करने है। ये विचार कुशाभाऊ ठाकरे विश्वविद्यालय रायपुर के कुलपति डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने व्यक्त किए। वे 'संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी में मूल्यनिष्ठता' विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संविमर्श के समापन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित थे। मध्यप्रदेश सरकार और माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय की ओर से महाकुम्भ सिंहस्थ-2016 के परिप्रेक्ष्य में आयोजित संविमर्श में देशभर से विद्वान शामिल हुए और मीडिया से जुड़े विभिन्न वृत्तिज्ञों (प्रोफेशनल्स) के मूल्यों पर विमर्श किया। समापन सत्र की अध्यक्षता कुलपति प्रो. बृजकिशोर कुठियाला ने की। इस मौके पर जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी के कुलपति श्री अनूप स्वरूप, मध्यप्रदेश शासन के जनसंपर्क विभाग के संचालक श्री लाजपत आहूजा और प्रज्ञा प्रवाह संस्था के श्री दीपक शर्मा ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

 

            कुलपति प्रो. जोशी ने मीडिया शिक्षकों के मूल्यों को प्रमुखता से रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि सम्प्रेषणनीयता, रचनात्मकता, गतिकता, ग्रहणशीलता,सतर्कता, दक्षता, सत्यपरकता और संवेदनशीलता सहित प्रमुख मूल्यों का मीडिया शिक्षक को स्वयं के व्यवहार में पालन करना चाहिए। जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी के कुलपति श्री अनूप स्वरूप ने कहा कि समाज के जो मूल्य हैं, उनका प्रभाव मीडिया पर पड़ता है। इसलिए हमें समाज के मूल्यों की भी चिंता करनी चाहिए। सामाजिक कार्यकर्ता श्री दीपक शर्मा ने सोशल मीडिया और तकनीक के अधिक उपयोग से सामने आ रहे दुष्परिणामों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि फेसबुक, ट्विटर जैसे सोशल माध्यम का एक घंटे से अधिक उपयोग करने पर सोचने की क्षमता पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। तकनीक के मूल्य नहीं होते, मूल्य तो मनुष्य के होते हैं। वहीं, जनसंपर्क संचालक श्री लाजपत आहूजा ने उज्जैन में होने वाले महाकुम्भ सिंहस्थ को उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम को जोडऩे का आयोजन बताया। मीडिया के संबंध में आज की परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि तीसरे प्रेस आयोग की जरूरत अब महसूस हो रही है।

 

            

भारत का मीडिया दुनिया में बेहतर : माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बृजकिशोर कुठियाला ने कहा कि दुनिया में मार्केटिंग के मूल्यों की चिंता पहले होती है जबकि हमारे देश में लोकहित के मूल्य सबसे पहले होते हैं। दुनिया के कई देशों के मीडिया की तुलना में भारत का मीडिया बहुत बेहतर है। भारतीय मीडिया में मूल्य आज भी जीवित हैं। वह समाज के हित में अच्छा काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि सबसे जरूरी बात यह है कि हम अच्छे मूल्यों को पहचानें, उन्हें अपने जीवन में उतारें और उनको विकसित करने का प्रयास करें। प्रो. कुठियाला ने कहा कि धारणाओं के आधार पर मूल्यों का विकास होता है। समापन सत्र का संचालन डॉ. अनुराग सीठा ने किया। आभार प्रदर्शन जनसंचार विभाग के अध्यक्ष श्री संजय द्विवेदी ने किया। इससे पूर्व संपादक,उपसंपादक, रिपोर्टर, लेखक, मीडिया प्रबंधक और संचारक के मूल्यों पर विचार-विमर्श किया गया। इस सत्र की अध्यक्षता लखनऊ से आए मीडिया शिक्षक एवं लेखक श्री रमेशचन्द्र त्रिपाठी ने की। मुख्य वक्ता दिल्ली से आए वरिष्ठ पत्रकार डॉ. रामजी त्रिपाठी थे। इस दौरान माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के प्रोडक्शन निदेशक श्री आशीष जोशी ने प्रोड्यूसर, वरिष्ठ पत्रकार विजय मनोहर तिवारी ने रिपोर्टर, प्रबंधन विभाग के अध्यक्ष डॉ. अविनाश वाजपेयी ने मीडिया प्रबंधक, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सौरभ मालवीय ने संचारक, असिस्टेंट प्रोफेसर श्री सुरेन्द्र पाल ने फोटो जर्नलिस्ट और उत्तरप्रदेश शासन के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. मनोज कुमार ने प्रशासन के मूल्यों पर विस्तार से अपनी बात कही।

 

संपर्क  

पवित्र श्रीवास्तव

(निदेशक जनसंपर्क)

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