Home Blog Page 1953

शोकसभा बदली सहायता सभा में, मृतकों के परिवार को दिए 25 लाख

इंदौर। मध्य प्रदेश हादसा केवल किसी व्यक्ति की जान नहीं लेता है बल्कि वह उसके परिवार को भी तोड़ देता है। एक ऐसा ही हादसा इंदौर में भी हुआ जहां जैन समाज के चार सदस्यों की सड़क हादसे में मौत हो गई। यह सभी अपने परिवार की आय का मुख्य जरिया थे। इस मुश्किल की घड़ी में जैन समाज ने एक मिसाल कायम की है। जैन समाज ने इस परिवार के बेटे और बेटियों की मदद के लिए हाथ बढ़ाते हुए 25 लाख रुपये की सहायता राशि जुटाई है। इस राशि के जरिए इन परिवार के बच्चों की शिक्षा, उनके स्वास्थ्य और नौकरी की जिम्मेदारियां पूरी की जाएगी।

 
अंतिम संस्‍कार के बाद होने वाली शोकसभा में परिवार से जुड़े सुदीप्त जैन ने समाज के समक्ष प्रस्ताव रखा की शोकाकुल परिवारों की आर्थिक मदद की जाए, ताकि बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य खर्चो में सहयोग हो सके। उनकी इस पहल के बाद शोकसभा में एक के बाद एक मदद का ऐलान होता गया।
जैन समाज में पंच कल्याणक, निर्वाण लाडू, मुनियों के पाद पूजन और मंदिर के कलश के लिए बोलियां लगती रही है। यह पहली बार है कि इस तरह किसी परिवार की आर्थिक मदद के लिए इस तरह शोकसभा में बोली लगाकर मदद इकठ्ठा की गई।

जैन समाज के यह चारों सदस्य समाज की मदद के लिए हर समय तैयार रहते थे। सामाजिक , धार्मिक आयोजन हो या फिर किसी को मदद की जरूरत हो यह चारों सबसे आगे रहते थे। समाज में यदि इनके जिम्मे कोई काम सौप दिया जाता था तो सब बेफ्रिक हो जाते थे। समाज के लिए आर्थिक मदद जुटाने में इन चारों की जोड़ी पहल और मदद करती रहती थी। ऐसे में जब इस परिवार पर यह आपदा आई तो समाज खुलकर मदद के लिए आगे आया।

यह सभी मक्सी स्थित भगवान पारसनाथ मंदिर के सालाना रंगपंचमी मेले में शामिल होने इंदौर से जा रहे थे। हादसा मक्सी से 3 किमी पहले प्रवेश द्वार पर हुआ। एक बाइक सवार को बचाने में संतुलन बिगड़ा और उनकी कार इंट्री गेट से टकरा गई। इस हादसे में इंदौर के वीरेंद्र कुमार राजेंद्र कुमार जैन (55) निवासी मोती महल इतवारिया बाजार, संजय घासीलाल जैन सुदामा नगर, जंबूकुमार मांगीलाल जैन (45) निवासी खजूरी बाजार और दिनेश कुमार राजकुमार जैन (55) निवासी जनता कॉलोनी है।

फोटो: शोक सभा की फोटो

साभार- http://hindi.news18.com/ से 

.

मोदीजी की मेरी सरकार अंग्रेजी वालों के लिए

प्रति,

सचिव महोदया  / संयुक्त सचिव महोदया एवं निदेशक (शिकायत)
राजभाषा विभाग 
नई दिल्ली 

विषय: राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र द्वारा 'मेरी सरकार' पोर्टल पर  हिन्दी की उपेक्षा की शिकायत

महोदय,
 
माननीय प्रधानमंत्री जी ने आम जनता से प्रशासन एवं शासन के लिए सुझाव लेने के लिए मेरी सरकार पोर्टल शुरू किया है पर इस पर हिन्दी का अपमान भी किया जा रहा है एवं नागरिकों पर जबरन अंग्रेजी थोपी जा रही है. ये लोग इस तरह प्रधानमंत्री जी की पहल का भी मखौल उड़ा रहे हैं, अंग्रेजी को प्राथमिकता देने से इस अभियान से आम नागरिक नहीं जुड़ पा रहे हैं. पिछले कई सप्ताह से अनेक लोगों ने राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र को लिखा पर कोई सुधार नहीं किया जा रहा है, मैं भी कई बार लिख चुकी हूँ, आम जनता की परेशानियों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है इसलिए हारकर सीधे आपको लिख रही हूँ.

आम जनता के सुझाव चाहिए तो उनकी भाषा को प्राथमिकता देनी ही होगी. हम हिन्दी की उपेक्षा स्वीकार नहीं करेंगे, राजभाषा विभाग संविधान में निर्देशित अनुसार हिन्दी को उसका स्थान दिलाने के लिए ठोस कदम उठाए, केवल "डाकिये'की तरह चिट्ठी को आगे भेजने का काम अब बंद कीजिए. हम लोग भी चिट्ठी लिख-लिख कर थक चुके हैं, और आप लोग कुछ नहीं कर सकते तो इस विभाग को बंद करवा दीजिए.अपनी भाषा के लिए लड़ने के लिए मुझे कहीं से पगार नहीं मिल रही है.

शिकायत के मुख्य बिंदु:

वेबसाइट पर पंजीयन के लिए व्यक्ति का नाम -उपनाम देवनागरी में लिखने पर पाबंदी लगी है इसलिए देवनागरी अक्षरों को अनुमति दी जाए.
पंजीयन के एक बार पासवर्ड (ओटीपी) सम्बन्धी मोबाइल सन्देश/ईमेल केवल अंग्रेजी में भेजा जाता है जबकि गूगल/ट्विटर जैसी विदेशी सेवाओं ने ऐसी ही सुविधा हिन्दी में दी है तो एन आई सी पर तो कानून भी लागू है. मोबाइल सन्देश/ईमेलअनिवार्य रूप से देवनागरी (हिन्दी) में भी भेजने के लिए निर्देशित करें.
वेबसाइट पर पंजीयन के बाद लॉग इन करने पर स्वागत सन्देश एवं व्यक्ति-परिचय (प्रोफाइल) आदि का प्रारूप केवल अंग्रेजी में बनाया गया है, इसे अविलम्ब द्विभाषी बनाया जाए एवं उस प्रारूप में देशों/राज्यों/शहरों के नाम देवनागरी में प्रदर्शित हों, देवनागरी अक्षरों को स्वीकार किया जाए. स्वागत सन्देश हिन्दी में दिखे.
भाषा चुनने के बाद वेबसाइट में प्रयोक्ता द्वारा लॉग इन करने के बाद पृष्ठ स्वतः हिन्दी/द्विभाषीय रूप में खुले, उसमें सारी जानकारी, टेम्पलेट, प्रारूप अनिवार्य रूप से हिन्दी में खुलें. 
एन आई सी को अपने विभाग का मानक हिन्दी नाम भी नहीं पता है इसलिए लिखते हैं 'इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग' जबकि सही नाम में "इलेक्ट्रॉनिकी" शब्द आता है.
इस वेबसाइट पर हिन्दी पृष्ठों पर अंग्रेजी की भारत सरकार एवं एनआईसी वेबसाइटों को लिंक किया गया है जबकि इन वेबसाइटों के हिन्दी संस्करण लिंक किए जाने चाहिए थे.
वेबसाइट का मुख्यपृष्ठ अनिवार्य रूप से द्विभाषी बने जिसमें हिन्दी को उसका स्थान मिले ना कि 'बाई डिफाल्ट' अंग्रेजी वेबसाइट पहले खुले.
इन सभी के प्रमाण के लिए पृष्ठों के 5 चित्र संलग्न हैं, उन पर ध्यान दें. 
भवदीय 
विधि जैन
जी-12, हावरे फैंटेशिया, वाशी रेलवे स्थानक के पास, सेक्टर 30 ए, वाशी, नवी मुम्बई – 400703
प्रतिलिपि:
 राजभाषा विभाग
  केंद्रीय मंत्री महोदय, गृह मंत्रालय

.

राहुल गाँधी पर चलेगा मुकदमा

बंबई उच्च न्यायालय ने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज मानहानि की याचिका रद्द करने की अपील खारिज कर दी  है। इस याचिका में उन्होंने आरएसएस की ओर से अपने खिलाफ दायर मानहानि की याचिका को रद्द करने की मांग की थी। महात्मा गांधी की हत्या में आरएसएस पर कथित आरोप लगाए जाने पर राहुल के खिलाफ आरएसएस के एक कार्यकर्ता ने मानहानि का मामला दायर किया था। 

न्यायमूर्ति एमएल तहलियानी ने राहुल की याचिका खारिज कर दी, जिसमें आरएसएस कार्यकर्ता राजेश कुंटे द्वारा ठाणे जिले के भिवंडी में एक मजिस्ट्रेट अदालत में दायर शिकायत को खारिज करने का आग्रह किया गया था। 

पिछले साल लोकसभा चुनाव के दौरान एक रैली में राहुल ने कहा था कि आरएसएस के एक कार्यकर्ता ने महात्मा गांधी की हत्या कर दी थी। आरएसएस की भिवंडी इकाई के सचिव कुंटे ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि राहुल ने छह मार्च को सोनाले में एक चुनाव रैली में कहा था, 'आरएसएस के लोगों ने गांधी जी को मार दिया।' कुंटे ने कहा कि कांग्रेस उपाध्यक्ष ने अपने भाषण से संघ की प्रतिष्ठा खराब करने की कोशिश की है।

.

इस देश के मतदाता हो तो पहले अंग्रेजी सीखो, चुनाव आयोग की पेशकश

सेवा में,

मुख्य निर्वाचन आयुक्त  
भारत निर्वाचन आयोग
निर्वाचन सदन, 
अशोक रोड, नई दिल्ली -110001 

विषय:मतदाता महोत्सव सम्बन्धी ऑनलाइन प्रतियोगिताओं की जानकारी हिन्दी में दिए जाने हेतु अनुरोध

महोदय,

२५ जनवरी २०१५ से राष्ट्रीय मतदाता दिवस महोत्सव शुरू किया गया है और उसके अंतर्गत अनेक ऑनलाइन प्रतियोगिताएँ आयोजित की जा रही हैं परन्तु इसके लिए बनाया गया ऑनलाइन http://164.100.34.140/nvd/ पृष्ठ केवल अंग्रेजी में हैं जिससे देश के करोड़ों नागरिक इन प्रतियोगिताओं में भाग नहीं ले पा रहे हैं. सारे नियम व् शर्तें, प्रतियोगिता के शीर्षक एवं लॉग इन सुविधा केवल अंग्रेजी में होने से अंग्रेजी ना जानने वाले नागरिक इन ऑनलाइन प्रतियोगिताओं में भाग लेने से वंचित हैं कृपया ये सभी सुविधाएँ हिन्दी में उपलब्ध करवा दें.
 
कृपया मेरे पत्र का शीघ्र उत्तर दें। 

भवदीय, 
श्रीमती विधि जैन 
आदीश्वर सोसाइटी, 
जैन मंदिर के पीछे,
सेक्टर – 9 ए, वाशी, नवी मुंबई – 400 703

.

ऊफ… ये मासूम…

रेलवे स्टेशन और बस अड्डाइन दो स्थानों पर जाने की नौबत आने पर मैं समझ जाता हूं कि आज मेरा सामना अनेक अप्रिय परिस्थितयों से होना है। जो मुझे कई दिनों तक बेचैन किए रहेगी। अभी कुछ दिन पहले परिजनों को ट्रेन में बिठाने स्टेशन गया था। प्लेटफार्म पर ट्रेन की प्रतीक्षा के दौरान मैने बमुश्किल तीन साल की एक बेहद कमजोर बच्ची को जल्दी – जल्दी चलने की कोशिश करते पाया। भिखारिन सी नजर आने वाली वह महिला शायद उसकी मां थी, जो आगे – आगे चल रही थी। यह दृश्य मुझे विचलित कर गया। क्योंकि कुपोषण की शिकार वह बच्ची इतनी कमजोर थी कि उसके मुंह से रुलाई भी ठीक से नहीं निकल रही थी। ठंड के बावजूद उसके पैरों में जूते या चप्पल नहीं थे। आगे – आगे चल रही मां की ठिठाई का आलम यह कि कुछ दूर चल कर वह सिर्फ पीछे मुड़ कर देख लेती कि बच्ची चल रही है या नहीं। मैने एेतराज जताना चाहा। लेकिन कुछ नहीं कर सका, क्योंकि महिला के एक हाथ में दूसरा उससे छोटा बच्चा और दूसरे हाथ में थैला जैसा कुछ था। जिस प्लेटफार्म को पार करने में व्यस्क लोगों के ही पसीने छूट जाते हैं उसे यह मासूम कैसे पार कर पाएगी, यह सोच – सोच कर मैं परेशान हो रहा था। लेकिन तब तक वह महिला औऱ बच्ची प्लेटफार्म की भीड़ में गायब हो चुकी थी।

 

इस घटना से मेरे जेहन में अतीत की कुछ एेसी ही दूसरी घटनाएं ताजा हो गई। एक बार कड़ाके की ठंड में रात की पैसेंजर ट्रेन से मैं अपने शहर लौट रहा था। मेरे सामने वाली सीट पर चार मासूम बच्चे बेसुध पड़े थे। साथ में वही महिला थी, जिसे मैं अपने शहर के रेलवे स्टेशन के पास अक्सर भीख मांगते देखता हूं। एक बार मैने उसे 12- 13 साल के एक बच्चे को उसे बेरहमी से पीटते देखा था। मेरे एेतराज करने पर उस महिला ने अपनी सफाई में कहा था कि इसके बाप ने हम लोगों को छोड़ दिया है। मैं भीख मांग कर जैसे – तैसे इन्हें पाल रही हूं। लेकिन बड़ा लड़का होकर भी यह लापरवाही करता है। एक अबोध शिशु को मैने इसकी निगरानी में छोड़ा था। लेकिन यह सड़क के दूसरी तरफ घूमने चला गया। वह दृश्य मुझे गहरे तक विचलित कर गया । �महिला को बच्चे को फिर न मारने की हिदायत देकर मैं आगे बढ़ गया था। इतने दिनों बाद वही महिला मेरे सामने वाली सीट पर बेसुध पड़ी थी। साथ में 2 से 13 साल की उम्र वाले चार मासूम बच्चे भी बेसुध होकर अपनी सीट पर सो रहे थे। उन्हें देख कर मैं मन ही मन सोचने लगा कि कड़ाके की ठंड में भी रात में घर पहुंच कर मुझे खाना मिल जाएगा और चैन की नींद भी। लेकिन ये बच्चे कहां जाएंगे। क्या इन्हें भोजन व ठंड से बचाव का उपाय मिलेगा।�

एक अन्य रेल यात्रा के दौरान मेरा सामना एक और एेसे ही अप्रिय घटना से हुआ। चलती ट्रेन में अचानक सटाक की आवाज से मेरे साथ ही दूसरे यात्री भी चौंक उठे। सामने फटे कपड़ों में भीख मांग रही एक बमुश्किल सात – आठ साल की बच्ची खड़ी थी। अचानक पड़े तमाचे से वह स्तब्ध होकर अपने गाल सहला रही थी। मेरे साथ ही दूसरे यात्रियों की निगाहें भी उस यात्री पर टिक गई, जिसने उस बच्ची को तमाचा मारा था। कुछ ने इसका कारण पूछा भी, लेकिन बदतमीच … कहते हुए वह यात्री लगातार अपने पैकेट से निकाल कर कुछ खाता जा रहा था। कुछ देर सुबकते हुए स्तब्ध खड़ी रहने के बाद वह बच्ची आगे बढ़ गई। कई यात्रियों को यह बात बेहद बुरी लगी। लेकिन रेल यात्रा के दौरान इस तरह की घटनाएं तो आम बात है। बल्कि इससे भी जघन्य घटनाएं रेलवे स्टेशनों , बस अड्डों व ट्रेनों में दिखाई पड़ती है। पाठक सोच सकते हैं कि मैं यह क्या भिखारी पुराण लेकर बैठ गया। ट्रैफिक सिग्नल जैसी फिल्म में तो इस विषय पर गहरे तक रोशनी पहले ही डाली जा चुकी है। फिर नए सिरे से इसे उठाने की क्या जरूरत। लेकिन इस प्रसंग का उल्लेख मुझे हाल की कुछ घटनाओं के चलते जरूरी लगा।

 

दरअसल मैं जिस पश्चिम बंगाल में रहता हूं वहां की राजधानी कोलकाता में हाल ही में एक एनजीओ ने भीख मांगने वाले असंख्य बच्चों को एक बड़े गिरोह के चंगुल से मुक्त कराया। बताया जाता है कि बच्चों से भीख मंगवा कर यह गिरोह हर महीने लाखों की कमाई करता था। यही नहीं राज्य के मालदह जिले में नवजात बच्चों की खरीद – फरोख्त और महिला के गर्भ को बच्चे पैदा करने की मशीन के तौर पर इस्तेमाल करने का सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। यह हाल यदि एक राज्य का है तो समूचे देश में मासूमों की कैसी दुर्गति होती होगी, समझना मुश्किल नहीं है। क्योंकि हर संवेदनशील नागरिक को भीख मांगते मासूम बच्चों की दुर्दशा कचोटती है। ट्रेन में यात्रा के दौरान अत्यंत कड़वे अनुभव झेलने पड़ते हैं। स्टेशन दर स्टेशन सामने आकर हाथ फैलाने वाले बच्चों को देख कर सहज ही मन में ख्याल आता है कि यह स्वाभाविक नहीं है। इतनी बड़ी संख्या में लोग अनाथ – असहाय नहीं हो सकते कि अपने बच्चों को भीख मांगने भेज दें। निश्चय ही इसके पीछे कोई बड़ा गिरोह सक्रिय है। जिसका खात्मा जरूरी है। क्योंकि यह समझना मुश्किल नहीं है कि अपनी मेहनत से दूसरों के एेश का इंतजाम करने वाले ये बच्चे किन – किन जिल्लतों से गुजरते होंगे, इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।

***

tarkeshkumarojha.blogspot.com से साभार

तारकेश कुमार ओझा, भगवानपुर, जनता विद्यालय के पास वार्ड नंबरः09 (नया) खड़गपुर ( पश्चिम बंगाल) पिन ः721301 जिला पश्चिम मेदिनीपुर संपर्कः 09434453934 

.

फिक्की की महिलाओं ने मनाया महिला दिवस

नई दिल्ली।  यंग फिक्की लेडीज़ आॅर्गनाईजेशन की चेयरपर्सन श्रीमति अवर्णा जैन ने स्लीपवैल फाउण्डेशन के सहयोग से अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में पहली बार ‘वूमेन वेलनेस काॅनक्लेव’ का आयोजन किया। दिल्ली के पंचतारा होटल में आयोजित किये गये इस समारोह में लगभग केन्द्रीय मंत्री श्री राजीव प्रताप रूडी बतौर मुख्यातिथि उपस्थित थे। उनके अतिरिक्त लगभग 100 महिला उद्यमी, किरण बेदी आदि सहित विभिन्न गणमान्य भी इस कानक्लेव में उपस्थित रहे।

वूमेन वेलनेस काॅनक्लेव के अन्तर्गत में अपने क्षेत्रों में राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों ने शारीरिक, भावनात्मक, बौद्धिक एवम् आध्यात्मिक वेलनेस अवधारणा पर गंभीर जानकारी व विचार-विमर्श साझा किये गये।

मौके पर वाई.एफ.एल.ओ. की चेयरपर्सन श्रीमति अवर्णा जैन ने कहा यह काॅनक्लेव योगा, काउंस्लिंग, न्यूट्रीशन आदि की बुनियादी जानकारी उपलब्ध कराते हुए स्किलिंग इंडिया के राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में योगदान देगा। वेलनस उद्योग में शहरी व ग्रामीण क्षेत्र की युवा महिलाओं हेतु लगभग 45 फीसदी उद्यमशीलता व नौकरियों के माध्यम से रोजगार के लाखों अवसर हैं। हमें उम्मीद है कि यह मेक इन इंडिया अभियान में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।

अवर्णा जैन ने कहा, विश्व स्वास्थय संगठन द्वारा वेलनेस को ‘स्वस्थ व खुशहाल जीवन की जागरूकता प्राप्त करने व इसके लिए सूझबूझ पूर्ण चयन की एक सक्रिय प्रक्रिया के रूप में परिभाषित किया है। हमें उम्मीद है कि इस काॅनक्लेव के माध्यम से अपनी वेलनेस की तरफ एक कदम बढ़ाया है।

उन्होंने बताया कि वाई.एफ.एल.ओ. स्किलिंग क्षेत्र में अच्छा काम कर रहा है। वाई.एफ.एल.ओ. आई.टी.आई. के साथ काम करते हुए स्किलिंग विकास के लक्ष्य को प्राप्त करते हुए महिलाओं को रोजगार कौशल भी प्रदान करना चाहता है। रोजगार प्राप्त करने के लिए तीन पहलू; एक्पोज़र, इन्टर्नशिप और कौशल विकास, जिसके बाद रोजगार के अवसर अधिक सशक्त रहते हैं परन्तु इण्डस्ट्री में ऐसे रूझान कम देखने को मिलते हैं। ऐसे में 300 सदस्य की इकाई के साथ वाई.एफ.एल.ओ. हर कदम पर अच्छा एक्सपोजर प्रदान करने में मदद करेगा जिससे कि तीन पहलुओं के पर्याप्त अनुभव के बाद महिलाओं को अच्छा रोजगार कौशल के चलते अपने पैरों पर खड़ी हो सकें और हमें उम्मीद है कि वाई.एफ.एल.ओ. व स्लीपवेल फाउंडेशन के इन लक्ष्यों को प्राप्त करने में मंत्रालय का भरपूर सहयोग मिलेगा।

मौके पर उपस्थित सभी ने सूफी संगीत, कीर्तन व योगा तकनीक सत्रों में भी भाग लिया और अपनी तरह की इस गतिविधि का भरपूर लुत्फ उठाया। 

.

‘पधारो रोशन भारत मे’ – पर्यटको को न्योता

अंतराष्ट्रीय जगत में भारत की नई रोशन होती छवि की पृष्ठभूमि में सरकार  ने चर्चित "मेक इन इंडिया" के अपने कार्यक्रम की तरह देश विदेश के पर्यटकों को "वेलकम टु इन्क्रेडिबल इंडिया" यानि "पधारो इस रोशन भारत में" का न्यौता दिया है। "स्वच्छ भारत, स्वच्छ स्मारक और स्वच्छ पर्यटन" की इस मुहिम के तहत  ताजमहल, कुतुब मीनार, खजुराहो, सारनाथ, कोणार्क सूर्य मंदिर जैसे देश के जाने माने 25स्मारकों व पर्यटन स्थलों को "स्वच्छ भारत अभियान" से जोड़ कर उन्हें "आदर्श स्मारक" बनाने के साथ ,वहाँ सैलानियो के लिये विशेष सुविधायें उपलब्ध कराई जा रही है ताकि भारत के पर्यटन स्थलों से सैलानी सुखद अनुभव व  अमिट यादों के साथ साथ,   ऐसे ही  और पर्यटन स्थलो को देखने की चाहत के साथ  दोबारा वापस लौटे.
 
पर्यटन मंत्रालय- पर्यटन के क्षेत्र में विकास की संभावनाओं के नए द्वार खोल रहा है। केंद्र सरकार विदेशी मुद्रा के अर्जन के लिए पर्यटन को एक बेहद अहम सेक्टर मान रही है। चाहे घरेलू पर्यटक हों या सात समंदर पार कर भारत की धरती पर कदम रखने वाले विदेशी पर्यटक, उन्हें यहां घूमने-फिरने में कोई दिक्कत नहीं हो, इस पर केंद्र सरकार का विशेष ध्यान है। यही नहीं, इस मुहिम में राज्य सरकारों को भी शामिल करने की कोशिश की जा रही है, क्योंकि उनके सार्थक सहयोग के बिना पर्यटकों को लुभाने की योजना परवान नहीं चढ़ सकती। गत 25 दिसंम्बर को "सुशासन दिवस" के अवसर पर यह मुहिम शुरू की गयी। इस मुहिम से न केवल पर्यटक भारत में बेहतर रखरखाव वाले पर्यटन स्थलों को  देख कर सुखद अनुभूति कर सकेंगे और भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सराह सकंगे , बल्कि इससे देश विदेश के पर्यटकों की संख्या  भी बढ़ेगी, जिससे पर्यटन से अर्जित होने वाली विदेशी मुद्रा तो बढ़ेगी ही, भारत की छवि भी और निखरेगी। केन्द्रीय पर्यटन मंत्री डाॅ महेश शर्मा ने उम्मीद जताई है कि इन नये कदमों से देश में आने वाले विदेशी पर्यटकों की वर्तमान संख्या 72 लाख से बढ़ कर तीन वर्ष में लगभग दुगुनी हो सकेगी। उन्होंने कहा "इस अभियान का मंत्र है- स्वच्छता, सुरक्षा और आतिथ्य"। उन्होंने बताया भारत की अत्यंत समृद्ध सांस्कृतिक विरासत है, यहां पर्यटन को बढाने की अपार संभावनाये हैं। उन्हें उम्मीद है कि इन तमाम प्रयासों से सैलानी इस 'नये रोशन भारत' से बहुत प्रभावित होंगे और "स्वच्छ भारत, स्वच्छ स्मारक और स्वच्छ पर्यटन" की मुहिम अत्यंत सफल रहेगी तथा सैलानी अपने इस "भारत को जानेंगे और उसे मानेंगे"।
 
इसी मुहिम के तहत उठाये जा रहे कदमों के नतीजे दिखने लगे हैं। इस अंतर्गत भारतीय पुरातत्व विभाग ए.एस.आई ने अपने अधीनस्थ राष्ट्रीय महत्व के 3680 स्मारकों एवं पर्यटन स्थलों में से 25 स्मारकों की पहचान'आदर्श स्मारक' के रूप में की है और इनके रख रखाव को बेहतर बनाने के साथ यहाँ विशेष सुविधायें दिये जाने के लिये कदम उठाने शुरू कर दिये हैं। इनमें से कुछ स्थल हैं-लेह स्थित लेह पैलेस, नई दिल्ली स्थित हुमायुं का मकबरा, आगरा स्थित ताजमहल, नई दिल्ली स्थित कुतुब परिसर, दिल्ली स्थित लाल किला, मध्य प्रदेश स्थित खजुराहो और मांडू महल, उत्तर प्रदेश स्थित फतेहपुर सिकरी और सारनाथ, बिहार स्थित वैशाली,राजस्थान स्थित कुंभलगढ़ किला तथा गुजरात स्थित रानी की वाव सहित कुछ अन्य स्मारक। इन स्मारकों पर वाई-फाई सुविधा, सुरक्षा , अतिक्रमण मुक्त क्षेत्र  आदि सुनिश्चित किये जाने   जैसे कदम उठाये जा रहे है . पर्यटन मंत्रालय के इस कार्यक्रम के तहत इन स्थानों पर विकलांगों के लिए  भी विशेष सुविधाएं होंगी। साफ-सफाई को बढ़ावा देने के लिए इन स्मारकों पर "स्वच्छ भारत अभियान" के अंतर्गत सफाई की विशेष व्यवस्था की जा रही है । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गत 2 अक्टूबर को 'स्वच्छ भारत अभियान' की पहल की थी। इस अभियान का उद्देश्य स्वच्छ भारत के सपने को साकार करना है। इसके तहत राष्ट्रीय धरोहर माने जाने वाले स्मारकों पर भी स्वच्छता को लेकर एक व्यापक पहल की गई है। इसके अलावा वहाँ के शौचालयों की देख-रेख के लिए स्वैच्छिक संगठन सुलभ इंटरनेशनल के करार किया जा रहा है ताकि "स्वच्छ भारत, स्वच्छ स्मारक और स्वच्छ पर्यटन" सुनिश्चित किया जा सकें.
 
पर्यटन मंत्रालय के अनुसार इस नयी मुहिम में अनेक प्रभावी कदमों को समाविष्ट किया गया है। इसके अंतर्गत पर्यटकों की सुरक्षा के लिये, पर्यटन पुलिस का गठन, इंडिया हेल्प लाइन की स्थापना, विशेष तौर पर महिला सैलानियों के लिये प्रयाप्त सुरक्षा बंदोबस्त, पर्यटकों को सड़कों पर बने 'खोको 'को भारत के मशहूर लजीज व्यंजन यानि "स्ट्रीट फूड" स्वच्छता के साथ उपलब्ध कराने, वेब आधारित ई-टिकटिंग की शुरूआत, ब्रेल लिपि में पर्यटन पुस्तिकायें उपलब्ध करना इत्यादि ऐसी ही कुछ पहल है। पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा बंदोबस्त बेहतर किये जाने पर बल देते हुए सूत्रों का कहना है कि पर्यटकों, खासकर महिला पर्यटकों से जुड़ी आपराधिक घटनाओं के बारे में मीडिया में आने वाली खबरों को ध्यान में रखते हुए विदेशी टूर आॅपरेटर और भारत की संभावित यात्रा के इच्छुक लोग इस पर चिंता जताते रहे हैं। इस क्षेत्र के दलाल भी उनके लिए चिंता का विषय है। इसे ध्यान में रखते हुए पर्यटन मंत्रालय ने प्रायोगिक आधार पर ‘इन्क्रेडिबल इंडिया हेल्पलाइन’ की स्थापना की है, ताकि किसी भी तरह की आपातकालीन स्थिति में पर्यटको को  आवश्यक मदद मिल सके। इसमें चिकित्सा सहायता भी शामिल हैं। इसके लिए टोल फ्री नंबर 1800111363 है या संक्षिप्त कोड 1363 है। इसके अलावा पर्यटन मंत्रालय की वेबसाइट पर एक एडवाइजरी पोस्ट की गइ है जिसमें उन्हे भरोसा दिलाया गया है कि  महिलाओ एवं विदेशी पर्यटकों के लिए भारत की एक सुरक्षित गंतव्य स्थल है।
 
इसके साथ ही "स्वच्छ भारत अभियान पकवान" मुहिम  भी शुरू की गयी है। इस के तहत "स्ट्रीट फूड" की क्वालिटी बेहतर बनाने के लिये स्वच्छ पकवान (हुनर जायका) का कार्यक्रम भी शुरू किया गया है। इसके जरिये खान पान वेंडर्स अपना कौशल बढ़ायेंगे और साफ-सफाई का भी ध्यान में रखेंगे। मंत्रालय इन स्ट्रीट वेंडर्स को प्रशिक्षण देने उनके उत्पादों की पड़ताल करने और प्रमाणीकरण के लिए नेशनल एसोसिएशन आॅफ स्ट्रीट वेंडर्स आॅफ इंडिया (एनएएसीआई) के साथ सहभागिता कर रहा है। चूंकि इस तरह के वेंडर्स का कोई अता-पता नहीं होता है, इसलिए एनएएसवीआई के साथ सहभागिता करने का निर्णय लिया गया है। कार्यक्रम के तहत प्रक्षिशण के बाद उनके कौशल को परखा जाएगा। प्रशिक्षण पर उन्हें कुछ भी खर्च नहीं करना पड़ैगा और हर प्रशिक्षु को अधिकतम छह दिनों के लिए हर रोज 200 रुपये दिए जाएंगे ताकि उनकी दैनिक कमाई की भरपाई हो सके।। इस कवायद का लाभ स्वच्छ भारत अभियान को सफल बनाने में भी होगा।
 
इस कार्यक्रम की एक  अन्य अनूठी पहल ‘हुनर से रोजगार तक’ का कार्यक्रम है। समावेशी विकास को बढ़ाने के लिए 12वीं योजना मं हुनर से रोजगार तक को एक महत्वपूर्ण माध्यम माना गया है। इस कार्यक्रम का लक्ष्य है कि 18 से 28 साल तक के आयु वर्ग के युवाओं में रोजगारपरक कौशल विकसित करना। इस योजना के अंतर्गत खाद्य एवं पेय सेवा, खाद्य उत्पादन, हाउसकीपिंग, बेकरी-उत्पाद, पैटीज आदि बनाना और वाहन चालान का प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण की अवधि 6 से 8 सप्ताह की है। इस कार्यक्रम को कौशल विकास के लिए महत्वपूर्ण प्रमुख पहल के रूप में स्वीकार किया गया है। मंत्रालय इसके सुलभ कार्यान्वयन के लिए लगातार प्रयास कर रहा है ताकि पूरे देश में अधिक से अधिक युवाओं तक पहुंचा जा सके। इसके लिए पारंपरिक और अभिनव उपायों को काम में लाया जा रहा है। इसके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी पर्यटन मंत्रालय द्वारा प्रायोजित अनेक संस्थानों को भी दी गई है। इसमें निजी क्षेत्र का सहयोग लेने का भी निर्णय लिया गया है,जिनमें औद्योगिक इकाइयां शामिल हैं। इसके तहत भारतीय सेना के साथ भी एक करार किया गया है। इसे'हुनर से रोजगार सेना के सहयोग' से कहा जाता है।
 
 हाल ही में पर्यटन मंत्री ने आगरा स्थित ताजमहल ओर नई दिल्ली स्थित हुमायुं के मकबरे पर वेब आधारित ई-टिकटिंग की सुविधा  भी पर्यटको के सुविधा के लिये शुरू की है। इसके तहत स्मारक देखने के इच्छुक पर्यटकों की सहूलियत के लिए ऐसे स्मारकों पर ई-टिकटिंग की सुविधा देने का निर्णय लिया गया है जहां बड़ी संख्या मंे सैलानी आते हैं। इसके लिए सुशासन दिवस यानी गत 25 दिसंबर को एक वेबसाइट लांच कर दी गई इसके साथ ही दिल्ली के स्मारकों पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने दिल्ली के स्मारकों पर एक ब्रेल बुक तैयार की है, ताकि नेत्रहीन व्यक्ति इन तमाम स्मारकों से वाकिफ हो सकें, और इस लिपि के माध्यम से इन विरासतो की खूबसुरती को सराह सके।
 
'इलेक्ट्रानिक ट्रेवल आॅथराइजेशन' के जरिये 'आगमन पर पर्यटक वीजा' पर्यटन उद्योग के लिए 2014 का साल इस लिहाज से ऐतिहासिक रहा कि सरकार ने इलेक्ट्रानिक ट्रेवल आॅथराइजेशन के जरिये आगमन पर पर्यटक वीजा के पहले चरण को क्रियान्वित किया। यह योजना 43 देशों के नागरिकों के लिए 27 नवम्बर 2014 को शुरू की गई। इस वीजा के तहत आने वाले यात्रियों का मकसद भारत भ्रमण दर्शनीय स्थलों के बारे में जानकारी एकत्र करना, अल्प कालिक चिकित्सा उपचार, आकस्मिक व्यवसायिक दौरे अथवा दोस्त एवं परिजनों से मिलने संबंधी आकस्मिक यात्रा है, साथ ही भारत में पर्यटन क्षेत्र के सतत विकास के लिए ढांचागत विकास बहुत महत्वपूर्ण है। इसके मददेनजर मंत्रालय पर्यटन स्थलों और सर्किटों में बेहतर पर्यटन संरचना के विकास के लिए प्रयास कर रहा है। 
 
इसके अलावा भी कुछ अहम कदम उठाए गए हैं। मसलन, मोदी सरकार ने होटलों के वर्गीकरण एवं पुनः वर्गीकरण की प्रक्रिया को सरल बनाने का निर्णय लिया है। 'अतुल्य भारत' अभियान को व्यापक रूप से बढ़ाने के लिए बार्सिलोना, बीजिंग, दुबई, जोहानिसबर्ग, कुवैत, न्यूयाॅर्क, पेरिस, सिंगापुर, स्टाॅकहोम, टोक्यो और टोरंटो सहित विश्व के महत्वपूर्ण शहरों में प्रमुख स्थानों पर अभियान शुरू किया गया है। पर्यटन के सुखद अनुभव देने के साथ ही पर्यटन क्षेत्र युवाओं एवं प्रवासी कर्मियों को नए रोजगार अवसर भी प्रदान करता है। यही नहीं,महिलाओं के सशक्तिकरण के साथ-साथ गरीबी कम करने में भी इस सेक्टर की अहम भूमिका मानी जाती है। पर्यटन को समावेशी विकास और रोजगार को प्रोत्साहन देने वाला प्रमुख सेक्टर माना जाता रहा है। उम्मीद की जानी चाहिए की रोशनी से नहाते भारत को सैलानी एक नयी नजर से ‘‘जानेंगे और मानेंगे भी’’।
 

***
*सुश्री शोभना जैन विज़न न्‍यूज़ ऑफ इंडिया की मुख्‍य संपादक है।

.

आकांक्षा यादव को ब्लॉगिंग के लिए श्रीलंका में मिलेगा ”परिकल्पना सार्क शिखर सम्मान”

मई माह में आयोजित सम्मेलन में 21000/- रूपये  की धनराशि के साथ मिलेगा शीर्ष सम्मान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी ब्लॉगिंग हेतु कर चुके हैं आकांक्षा यादव को सम्मानित 

 इलाहाबाद की चर्चित ब्लॉगर-लेखिका आकांक्षा यादव को वर्ष 2015 के लिए सार्क देशों में दिए जाने वाले शीर्ष सम्मान "परिकल्पना सार्क शिखर सम्मान'' के लिए चयनित किया गया है। उन्हें  आगामी 23 से 27 मई 2015 को श्री लंका में आयोजित पंचम अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन में इसके तहत सम्मान पत्र के साथ  इक्कीस हजार (21000/-) रूपये  की धनराशि प्रदान की जाएगी। उक्त जानकारी अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर्स कांफ्रेंस के संयोजक  रवीन्द्र प्रभात ने दी।

संयोजक  रवीन्द्र प्रभात ने बताया कि आकांक्षा यादव  ने वर्ष 2008 में ब्लाॅग जगत में कदम रखा और विभिन्न विषयों पर आधारित दसियों ब्लाॅग का संचालन-सम्पादन करके कई लोगों को ब्लाॅगिंग की तरफ प्रवृत्त किया और अपनी साहित्यिक रचनाधर्मिता के साथ-साथ ब्लाॅगिंग को भी नये आयाम दिये। 'शब्द-शिखर'' (http://shabdshikhar.blogspot.in/) इनका प्रमुख ब्लॉग है, जो कि हिंदी के लोकप्रिय ब्लॉगों में गिना जाता है।  नारी विमर्श, बाल विमर्श एवं सामाजिक सरोकारों सम्बन्धी विमर्श में विशेष रुचि रखने वाली आकांक्षा यादव अग्रणी महिला ब्लॉगर हैं और इनकी रचनाओं में नारी-सशक्तीकरण बखूबी झलकता है। इनके ब्लॉग को अब तक लाखों लोगों ने पढा है और करीब सौ ज्यादा देशों में इन्हें देखा-पढा जाता है। आकांक्षा यादव निदेशक डाक सेवाएं  कृष्ण कुमार यादव की पत्नी हैं, जो कि चर्चित हिंदी ब्लॉगर और साहित्यकार हैं।  

गौरतलब है कि आकांक्षा यादव को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इससे पूर्व भी ब्लॉगिंग हेतु तमाम प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। इनमें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा  “अवध सम्मान“, हिंदी ब्लॉगिंग के दशक वर्ष में  “दशक के श्रेष्ठ ब्लॉगर दम्पति“ का सम्मान, नेपाल में आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय ब्लाॅगर सम्मेलन में “परिकल्पना  ब्लॉग विभूषण सम्मान“ से सम्मानित किया जा चुका है।  इसके अलावा विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ, भागलपुर, बिहार द्वारा डाॅक्टरेट (विद्यावाचस्पति) की मानद उपाधि, भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा ‘डाॅ. अम्बेडकर फेलोशिप राष्ट्रीय सम्मान‘ व ‘‘वीरांगना सावित्रीबाई फुले फेलोशिप सम्मान‘, राष्ट्रीय राजभाषा पीठ इलाहाबाद द्वारा ’भारती ज्योति’, साहित्य मंडल, श्रीनाथद्वारा, राजस्थान द्वारा ”हिंदी भाषा भूषण”, निराला स्मृति संस्थान, रायबरेली द्वारा मनोहरा देवी स्मृति सम्मान सहित विभिन्न प्रतिष्ठित सामाजिक-साहित्यिक संस्थाओं द्वारा विशिष्ट कृतित्व, रचनाधर्मिता और सतत् साहित्य सृजनशीलता हेतु दर्जनाधिक सम्मान और मानद उपाधियाँ प्राप्त हैं ।

-रत्नेश कुमार मौर्य 
संयोजक -'शब्द-साहित्य''
इलाहाबाद 

.

प्रथम विश्‍व युद्ध में बलिदान होने वाले 74 हजार सिपाहियों का स्मरण

भारतीय सेना प्रथम विश्‍व युद्ध में भाग लेने वाले 15 लाख भारतीय सिपाहियों और अपनी जान न्‍यौछावर करने वाले 74 हजार से भी अधिक सिपाहियों की स्‍मृ‍ति में 10 से 14 मार्च 2015 तक नई दिल्‍ली में शताब्‍दी समारोह का आयोजन कर रही है। 10 मार्च को न्‍यूवे चैवल के युद्ध के रूप में याद रखा जाता है जिसमें फ्रांस के आटोइस क्षेत्र में ब्रिटिश हमले की शुरूआत हुई थी जिसमें भारतीय सेना की भी गढ़वाल बिग्रेड और मेरठ डिविजन ने भाग लिया था। वर्ष 2014 से वर्ष 2018 तक की अवधि को प्रथम विश्‍व युद्ध के शताब्‍दी समारोह के रूप में मनाया जा रहा है। 

शताब्‍दी समारोहों के रूप में प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज इंडिया गेट स्थित अमर जवान ज्‍योति पर माल्‍यार्पण किया। रक्षा मंत्री, रक्षा राज्‍यमंत्री, तीनों सेनाओं के प्रमुख, रक्षा सचिव और इस युद्ध में भाग लेने वाली रेजिमेंट के वरिष्‍ठ अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित थे। 

10 से 14 मार्च 2015 तक मानिकशॉ सेंटर में एक प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है जिसमें इस युद्ध में भारत की भूमिका को दर्शाया गया है। यह प्रदर्शनी आम जनता, स्‍कूलों और कालिजों के लिए 11 से 13 मार्च 2015 तक खुली रहेगी। 

बलिदान के बारे में जानकारी देने के लिए आज शाम एक समारोह में थल सेना अध्‍यक्ष प्रथम विश्‍व युद्ध के दौरान भारतीय सैनिकों की भूमिका और योगदान पर गणमान्‍य अतिथियों को संबोधित करेंगे। इसके बाद राष्‍ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी प्रथम दिवस कवर स्‍मारिका जारी करेंगे। राष्‍ट्रपति इसके साथ ही प्रदर्शनी का अवलोकन भी करेंगे जिसमें गैलन्‍ट्री हॉल भी सम्मिलित है जिसमें यह महान युद्ध कैसे लड़ा गया और जीता गया के साथ-साथ भारतीय सैनिकों के युद्ध क्षेत्र और घर के जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव को भी दर्शाया गया है। इसमें 13 अभियानों, युद्ध के हथियारों और उपकरणों, स्‍मरणीय वस्‍तुओं और विभिन्‍न शिल्‍पकृतियों को दर्शाया गया है। 

.

बराबरी के भाव के अभाव को दूर करने से गुरेज़ आखिर कब तक ?

पुरुषों की तुलना में स्त्रियों का घट रहा अनुपात पहले से ही चेतावनी दे रहा था लेकिन 2011 की जनगणना के अनुसार यह सूचना, कि 0 से 6 वर्ष समूह के लड़कों की तुलना में लड़कियों की संख्या 71 लाख कम है, एक बेहद खतरनाक भविष्य की ओर संकेत करने लगी है। 2001 की जनगणना में यह कमी 60 लाख की, तथा 1991 की जनगणना में 42 लाख की थी। जन्म से लेकर मृत्यु तक आचार-संहिताओं की हथकड़ियों-बेड़ियों में जकड़ी हुई स्त्री पर अब जन्म से पूर्व ही अस्तित्व का खतरा मंडराने लगा है। 

विज्ञान और तकनीक, जो मनुष्यता की मुक्ति का साधन बन सकते थे, समाज में व्याप्त पितृसत्तात्मक मूल्यों के चलते स्त्रियों के, और इस तरह पूरे समाज के, विनाश का साधन बना दिए जा रहे हैं। लेकिन इस प्रवृत्ति के खिलाफ कोई भी संघर्ष तब तक कामयाब नहीं होगा जब तक कि उन मूल्यों और सोच को निशाना न बनाया जाए जो स्त्री के प्रति किसी भी तरह की बराबरी के भाव को अस्वीकार करते हैं।

जाति व्यवस्था की तरह ही पितृसत्तात्मक मूल्य भी हमारे समाज के जेहन और आदतों तक में काफी गहराई तक धंसे हुए हैं। यहां स्त्री आर्थिक ही नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक शोषण की भी शिकार है। घर के दायरे में कामों के बंटवारे का स्वरूप सामाजिक स्तर पर जातियों के बीच कामों के बंटवारे से मेल खाता है। यहां पुरुष सवर्ण तथा स्त्री दलित या शूद्र की भूमिका में होती है। जो काम तुच्छ और गंदे माने जाते हैं वे स्त्री के जिम्मे होते हैं। लेकिन इन्हीं कामों में से जो काम समाज में आर्थिक तौर पर लाभकारी हो जाते हैं, जैसे खाना पकाना, तो वहां पुरुष स्त्री को विस्थापित करके स्वयं विराजमान हो जाता है। 

स्त्री के लिए सदियों से ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते’ से लेकर ‘ताड़न के अधिकारी’ तक सभी उद्धरण जरूरत के हिसाब से इस्तेमाल किए जाते रहे हैं, जो हमारे समाज के अवसरवादी और पाखण्डी स्वरूप को उजागर करता है। और कहना न होगा कि ऐसे मुद्दों की एक लंबी फेहरिस्त है जिसमें समाज का यह पाखण्ड बार-बार उजागर होता है।

शैशव से ही एक धार्मिक-सांस्कृतिक संरचना स्त्री का एक अलग व्यक्तित्व बनाने के, बल्कि उसके स्वाभाविक मानवीय व्यक्तित्व के हरण के, काम में लग जाती है। मूल्यों, आदर्शों और आचरण-व्यवहार के अलग मानदंड उसके व्यक्तित्व को रूपाकार देने लगते हैं और पल-प्रतिपल उसका पीछा करते रहते हैं, ताकि उसमें जीवन और उत्साह-उमंग का नामोनिशान भी मिटा दें। 

विनय, कोमलता, शील, सौंदर्य, क्षमा आदि उसके लिए घोषित आभूषण उसकी हथकड़ियां-बेड़ियां बनकर उसके यत्किंचित प्रतिरोध को भी तोड़ देने की जुगत में लगे रहते हैं, ताकि वह कमजोर, निस्सहाय, निरुपाय लता बनकर हमेशा किसी पुरुष के आश्रय के लिए अभिशप्त हो। वह पुरुष पिता, भाई, पति या पुत्र कोई भी हो सकता है। इसके बावजूद अगर प्रतिरोध की कोई चिनगारी बच जाती है तो सभी शोषित-उत्पीड़ित समूहों की तरह स्त्री पर भी बलप्रयोग निर्णायक हथियार का काम करता है।

स्त्री पुरुषवादी सत्ता के साथ-साथ जातिवाद और पूंजीवादी बाजारवाद की भी शिकार है। ये सभी मिलकर एक जटिल जाल बुनते हैं जिसमें फंसी स्त्री को बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिलता। जातिवाद भारतीय स्त्री की समस्या को एक ऐसा जटिल आयाम देता है जो दुनिया के अन्य हिस्सों से अलग दृष्टिकोण और संघर्ष की रणनीति तय करने की मांग करता है। इस दिशा में हीला हवाला अब ठीक नहीं। सही कदम उठाने में ही महिला दिवस मानाने की सार्थकता होगी।

***
प्राध्यापक,दिग्विजय पीजी कालेज,
राजनांदगांव। मो.9301054300 

.