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कश्मीरः इतिहास में अटकी सूईयां

 

 
  कश्मीर में भाजपा ने जिस तरह लंबे विमर्श के बाद पीडीपी के साथ गठबंधन की सरकार बनाई, उसकी आलोचना के लिए तमाम तर्क गढ़े जा सकते हैं। किसी भी अन्य राजनीतिक दल ने ऐसा किया होता तो उसकी आलोचना या निंदा का सवाल ही नहीं उठता, किंतु भाजपा ने ऐसा किया तो महापाप हो गया। यहां तक कि कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को भी लग रहा है कि भाजपा के इस कदम से डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की आत्मा को ठेस लगी होगी।

   यह समझना बहुत मुश्किल है कि भाजपा जब एक जिम्मेदार राजनीतिक दल की तरह व्यवहार करते हुए विवादित सवालों से किनारा करते हुए काम करती है तब भी वह तथाकथित सेकुलर दलों की निंदा की पात्र बनती है। इसके साथ ही जब वह अपने एजेंडे पर काम कर रही होती है, तब भी उसकी निंदा होती है। यह गजब का द्वंद है, जो हमें देखने को मिलता है। अगर डा. श्यामाप्रसाद मुखर्जी के सम्मान और 370 की चिंता भाजपा को नहीं है तो उमर या फारूख क्या इस सम्मान की रक्षा के लिए आगे आएंगें? जाहिर तौर पर यह भाजपा को घेरने और उसकी आलोचना करने का कोई मौका न छोड़ने की अवसरवादी राजनीति है। क्यों बार-बार एक ऐसे राज्य में जहां भाजपा को अभी एक बड़े इलाके की स्वीकृति मिलना शेष है कि राजनीति में उससे यह अपेक्षा की जा रही है कि वह इतिहास को पल भर में बदल देगी।

साहसिक और ऐतिहासिक फैसलाः
    भाजपा का कश्मीर में पीडीपी के साथ जाना वास्तव में एक साहसिक और ऐतिहासिक फैसला है। यह संवाद के उस तल पर खड़े होना है, जहां से नई राहें बनाई जा सकती हैं। भाजपा के लिए कश्मीर सिर्फ जमीन का टुकड़ा नहीं, एक भावनात्मक विषय है। भाजपा के पहले अध्यक्ष(तब जनसंघ) ने वहां अपने संघर्ष और शहादत से जो कुछ किया वह इतिहास का एक स्वर्णिम पृष्ठ है। भाजपा के लिए यह साधारण क्षण नहीं था, किंतु उसका फैसला असाधारण है। सरकार न बनाना कोई निर्णय नहीं होता। वह तो इतिहास के एक खास क्षण में अटकी सूइयों से ज्यादा कुछ नहीं है। किंतु साहस के साथ भाजपा ने जो निर्णय किया है, वह एक ऐतिहासिक अवसर में बदल सकता है। आखिर कश्मीर जैसे क्षेत्र के लिए कोई भी दल सिर्फ नारों और हुंकारों के सहारे नहीं रह सकता। इसीलिए संवाद बनाने के लिए एक कोशिश भाजपा ने चुनाव में की और अभूतपूर्व बाढ़ आपदा के समय भी की। यह सच है कि उसे घाटी में वोट नहीं मिले, किंतु जम्मू में उसे अभूतपूर्व समर्थन मिला। यह क्षण जब राज्य की राजनीति दो भागों में बंटी है, अगर भाजपा सत्ता से भागती तो वहां व्याप्त निराशा और बंटवारा और गहरा हो जाता। भाजपा ने अपने पूर्वाग्रहों से परे हटकर संवाद की खिड़कियां खोलीं हैं। अलगाववादी नेता स्व.अब्दुल गनी लोन के बेटे सज्जाद लोन को अपने कोटे से मंत्री बनवाया है। यह बात बताती है कि अलगाववादी नेता भी लोकतंत्र का हमसफर बनकर इस देश की सेवा कर सकते हैं।

यहां पराजित हुआ है पाक का द्विराष्ट्रवादः
  कश्मीर की स्थितियां असाधारण हैं। पाकिस्तान का द्विराष्ट्रवाद का सिद्धांत कश्मीर में ही पराजित होता हुआ दिखता है। हमने सावधानी नहीं बरती तो कश्मीर का संकट और गहरा होगा। आज सेना के सहारे देश ने बहुत मुश्किलों से घाटी में शांति पाई है। कश्मीर का इलाज आज भी हमारे पास नहीं है। देश के कई इलाके इस प्रकार की अशांति से जूझ रहे हैं किंतु सीमावर्ती कश्मीर में पाक समर्थकों की उपस्थिति और पाकिस्तान के समर्थन से हालात बिगड़े हुए हैं। कश्मीर के लोगों से भावनात्मक रूप से जुड़े बिना यहां कोई पहल सफल नहीं हो सकती। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस बात को जानते हैं कि वहां के लोगों की स्वीकृति और समर्थन भारत सरकार के लिए कितनी जरूरी है। हमारे पहले प्रधानमंत्री की कुछ रणनीतिक चूकों की वजह से आज कश्मीर का संकट इस रूप में दिखता है। ऐसे में भाजपा का वहां सत्ता में होना कोई साधारण घटना और सूचना नहीं है। घाटी और जम्मू के बेहद विभाजित जनादेश के बाद दोनों दलों की यह नैतिक जिम्मेदारी थी कि वे अपने-अपने लोगों को न्याय दें। केंद्र की सत्ता में होने के नाते भाजपा की यह ज्यादा बड़ी जिम्मेदारी थी।

उन्हें क्यों है 370 पर दर्दः
जिन लोगों को 370 दर्द सता रहा है वे दल क्या भाजपा के साथ 370 को हटाने के लिए संसद में साथ आएंगें, जाहिर तौर पर नहीं। फिर इस तरह की बातों को उठाने का फायदा क्या है। इतिहास की इस घड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक ऐतिहासिक अवसर मिला है, जाहिर है वे इस अवसर का लाभ लेकर कश्मीर के संकट के वास्तविक समाधान की ओर बढ़ेंगें। संवाद से स्थितियां बदलें तो ठीक अन्यथा अन्य विकल्पों के लिए मार्ग हमेशा खुलें हैं। देश को एक बार कश्मीर के लोगों को यह अहसास तो कराना होगा कि श्रीनगर और दिल्ली में एक ऐसी सरकार है जो उनके दर्द को कम करना चाहती है। जिसके लिए ‘सबका साथ-सबका विकास’ सिर्फ नारा नहीं एक संकल्प है। यह अहसास अगर गहरा होता है, घाटी में आतंक को समर्थन कम होता है, वहां अमन के हालात लौटते हैं और सामान्य जन का भरोसा हमारी सरकारें जीत पाती हैं तो स्थितियां बदल सकती हैं। आज कश्मीर के लोग भी भारत में होने और पाकिस्तान के साथ होने के अंतर को समझते हैं।
    
कोई भी क्षेत्र अनंतकाल तक हिंसा की आग में जलता रहे तो उसकी चिंताएं अलग हो जाती हैं। भारत सरकार के पास कश्मीर को साथ रखना एकमात्र विकल्प है। इसलिए उसे समर्थ और खुशहाल भी बनाना उसकी ही जिम्मेदारी है। 370 से लेकर अन्य स्थानीय सवालों पर विमर्श खड़ा हो, उसके नाते होने वाले फायदों और नुकसान पर संवाद हो। फिर लोग जो चाहें वही फैसला हो, यही तो लोकतंत्र है। भाजपा अगर इस ओर बढ़ रही है तो यह रास्ता गलत कैसे है।

(लेखक राजनीतिक विश्लेषक हैं)

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24 लेखकों को साहित्य अकादेमी पुरस्कार

साहित्य अकादमी की हीरक जयंती के मौके पर  24 भाषाओं के लेखकों को साहित्य अकादमी पुरस्कार प्रदान किया गया। कमानी सभागार में हुए आयोजन में साहित्य अकादमी के अध्यक्ष विश्वनाथ त्रिपाठी ने अलग-अलग भाषाओं के लेखकों को सम्मानित किया।

सम्मानित किए जाने वाले साहित्यकारों में उर्दू के लिए लोकप्रिय शायर मुनव्वर राणा, हिन्दी के उपन्यासकार रमेशचंद्र शाह, कश्मीर के कवि शाद रमजान, संस्कृत के लिए प्रभुनाथ द्विवेदी, मैथिली के लिए आशा मिश्रा, पंजाबी के लिए जसविंदर, मराठी के लिए जयंत विष्णु नार्लीकर और अंग्रेजी के आदिल जसावाला प्रमुख थे।

समारोह के मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार केदारनाथ सिंह थे। साल 2014 के लिए दिए गए इन पुरस्कारों की घोषणा दिसंबर में की गई थी। 
इस पुरस्कार के तहत एक ताम्र पत्र, एक शॉल और एक लाख रुपये का चेक दिया जाता है। इसके साथ ही रविंद्र भवन में 14 मार्च तक चलने वाले साहित्योत्सव का शुभारंभ हो गया। इस दौरान अलग-अलग भाषाओं के जाने में माने लेखक, कवि पाठकों से रूबरू होंगे। कार्यक्रम के कई सत्र में युवा लेखक और कवि अपनी रचनाओं का पाठ भी करेंगे। अंतिम दिन बच्चों के लिए ‘आओ कहानी बुनें’ का भी आयोजन किया जाएगा।

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अरविंद केजड़ीवाल अब संघम शरण गच्छामि

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के अज्ञातवास के बारे में अभी तक किसी को साफ तौर पर जानकारी नहीं मिल पाई है, लेकिन आम आदमी पार्टी में मचे सियासी घमासान के बीच दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अगले कुछ दिनों तक बेंगलुरु में गार्डेन सिटी में अपनी सेहत का ख्याल रखते नजर आएंगे। केजरीवाल इलाज के सिलसिले में 5 मार्च को बेंगलुरु आ रहे हैं। आम आदमी पार्टी के भीतर चल रही उठापटक के बीच 4 मार्च को दिल्ली में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक होने जा रही है और इसके बाद केजरीवाल बेंगलुरु के लिए रवाना हो जाएंगे।

केजरीवाल कफ, अस्थमा और डायबिटीज की समस्या से परेशान हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर वह बेंगलुरु के स्वामी विवेकानंद योग अनुसंधानम संस्था (एसव्यासा) में इलाज के लिए जा रहे हैं। दिल्ली पुलिस के एक समारोह में पिछली बार हुई मुलाकात में मोदी ने उन्हें यहां इलाज कराने की सलाह दी थी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेता एच वी शेषाद्रि के रिश्तेदार और नासा के पूर्व साइंटिस्ट डॉ एच आर नागेंद्र एसव्यासा के हेड हैं।

यह संस्था इससे पहले गुजरात सरकार के लिए नियमित तौर पर योग शिविर का आयोजन करती रही है। नागेंद्र ने बताया, 'प्रधानमंत्री मोदी की सलाह के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल से मेरी बातचीत हुई थी। उन्होंने संभावित ट्रीटमेंट को लेकर कई सवाल पूछे। इलाज के दौरान उन्हें योग, क्रिया के अभ्यास के अलावा डॉक्टरों की सलाह पर कुछ दवाओं का सेवन करना होगा।'
नागेंद्र ने कहा, 'सामान्य तौर पर हमारा ट्रीटमेंट कुछ हफ्तों तक चलता है। इस दौरान संबंधित व्यक्ति को सुबह जल्दी उठने के साथ सात्विक जीवनशैली को अपनाना होता है। दिल्ली के मुख्यमंत्री के पास समय की कमी है, इसलिए उन्हें उपचार के बीच काम करने की अनुमति होगी।'

उन्होंने कहा, 'हमने उन्हें इस बात का भरोसा दिया है कि डॉक्टरों की टीम उनका ख्याल रखेगी और इलाज के दौरान उन्हें थोड़ा काम करने की अनुमति होगी।' नागेंद्र ने कहा, 'हम उनका इंतजार कर रहे हैं।' दिल्ली में केजरीवाल को राजनीतिक घमासान से जूझना पड़ रहा है और ऐसे में उन्हें बेंगलुरु में थोड़े दिनों के लिए सही, इससे दूर रहने का मौका मिलेगा और वह अपनी सेहत पर ध्यान दे पाएंगे।

साभार-इकॉनामिक टाईम्स से. 
कौन हैं डॉ. नगेंद्र पढ़िये ये रिपोर्ट 

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दंग रह गई अमृता फडणवीस, जब दादी-नानी का रैंप वॉक देखा

मुंबई। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी श्रीमती अमृता देवेंद्र फडणवीस ने जब अपनी दादी और नानी की उम्र की महिलाओं को रैंप वॉक करते देखा तो वे भी उम्रदराज महिलाओं के उत्साह को हैरत भरी नजरों से देख दंग रह गईं। बीजेपी एवं लोढ़ा फाउंडेशन द्वारा महिलाओं की उद्यमवृत्ति को विकसित करने के प्रयास स्वरूप दो दिवसीय कार्यक्रम का उदघाटन करने आईं श्रीमती अमृता फडणवीस ने कहा कि नारी शक्ति को आगे लाने के लिए अपनी तरह का यह सबसे अलग आयोजन है। इस अवसर पर ‘बेटी बचाओ – बेटी पढ़ाओ’ मिशन के लिए मुख्यमंत्री सहायता कोष में एक लाख रुपए के सहयोग का चैक उन्हें सौपा गया। ऑपेरा हाउस स्थित डायमंड मार्केट लेन में आयोजित इस आयोजन में करीब दस हजार से भी ज्यादा महिलाओं ने हिस्सा लिया। महिला दिवस पर मुंबई में सबसे ज्यादा महिलाओं की सहभागिता का यह सबसे बड़ा आयोजन रहा।

एक तरफ उम्रदराज महिलाएं जोश और जज्बे के साथ रैंप पर चलते हुए वक्त के साथ कदमताल करने के हौसले का प्रदर्शन कर रही थीं, तो दूसरी ओर आयोजन स्थल पर युवतियों द्वारा राष्ट्रभक्ति के परंपरागत गीतों की ताल पर बज रहे ढोल की गूंज लोगों के पांवों को थिरकने को मजबूर कर रही थी। बीजेपी की ओर से जिलाध्यक्ष सिद्धार्थ गमरे एवं लोढ़ा फाउंडेशन की ओर से श्रीमती शीतल लोढ़ा सहित ताड़देव की नगरसेवक श्रीमती सरिता पाटिल एवं वालकेश्वर की नगरसेवक श्रीमती ज्योत्सनाबेन मेहता ने श्रीमती अमृता फडणवीस का अभिनंदन किया। मलबार हिल के विधायक मंगल प्रभात लोढ़ा के मुताबिक महिला व्यापार पेठ की सारी आय मुख्यमंत्री सहायता कोष में प्रदान की जाएगी। 

विधायक लोढ़ा ने इस आयोजन की सफलता में सहभागी सभी संस्थाओं एवं महिलाओं का आभार जताया है। महिला सशक्तिकरण के लिए आयोजित इस कार्यक्रम में महिला व्यापार पेठ के में 50 से भी ज्यादा महिला संस्थाओं द्वारा गृह उद्योग निर्मित व अन्य वस्तुओं की दो दिवसीय सेल व प्रदर्शनी भी आयोजित की गई। मुंबई में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर आयोजित इस सबसे विशाल आयोजन में करीब 6500 से भी ज्यादा महिलाओं ने होम मिनिस्टर, बेस्ट ड्रेस एवं कुकिंग कॉम्पीटिशन आदि प्रतियोगिताओं में भीग लेकर एक रिकॉर्ड कायम किया। करीब 1500 से भी ज्यादा दादी – नानी की ऊम्र की महिलाओं का रैंप वॉक इस आयोजन का सबसे बड़ा आकर्षण रहा। इस दो दिवसीय आयोजन में दस हजार से भी ज्यादा महिलाएं शामिल हुईं।

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सतीश कौशिक अब आलसी महाराजा

 फिल्‍म निर्माता, निर्देशक और अभिनेता सतीश कौशिक के सितारे इन दिनों काफी अच्‍छे चल रहे हैं। सतीश कौशिक का कहना है कि यह साल उनके लिए काफी अच्‍छा जा रहा है। कौशिक ने फिल्‍म निर्माण के व्‍यस्‍त शेड्यूल में से समय निकालकर कई अन्‍य प्रोजेक्‍ट साइन किए हैं। सतीश कौशिक 16 साल बाद छोटे पर्दे पर वापसी कर रहे हैं। इसके तहत उनका शो  Sab TV पर सप्‍ताहांत में दिखाई देगा जिसमें नवाबों की दिनचर्या को हंसी मजाक के रूप में दिखाया जाएगा।

इसमें बताया जाएगा कि नवाब जंग बहादुर काल्‍पनिक दुनिया में खोये रहते हैं। अपने खराब स्‍वास्‍थ्‍य के कारण वह कोई काम नहीं करते हैं और वैभव में जीना जारी रखते हैं। ऐसे में धारावाहिक में छोटे-छोटे ऐसे कई सीन आते हैं जिसमें दर्शक खुद को मुस्‍कराने से नहीं रोक सकते हैं। ऐसे में यह धारावाहिक निश्चित रूप से लोगों को हंसने व गुदगुदाने में कोई कमी नहीं छोड़ेगा। टीवी पर अपनी वापसी को लेकर सतीश कौशिक काफी उत्‍साहित और आशान्वित हैं। सतीश कौशिक ने कहा, ‘मैंने कई कॉमेडी रोल किए हैं लेकिन अब मैं ऐसे रोल चुन रहा हूं जो वास्‍तविकता के करीब हों।

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भारतीय खाने का कोई मुकाबला नहीं

दुनिया में सबसे स्वादिष्ट भारतीय खाना है। आईआईटी जोधपुर की ओर से किए गए इस अध्ययन में दुनिया भर के ढाई हजार से ज्यादा व्यंजनों को परखा गया। अध्ययन में व्यंजनों में डाले जा रहे पदार्थ और उनके स्वाद की जांच की गई।
 
शोधकर्ताओं ने पाया कि पश्चिमी देशों के शेफ हर व्यंजन में व्हिस्की, सेब के रस, संतरे का रस और कच्चा मीट डाल देते हैं। हर व्यंजन का 50 फीसदी स्वाद तो इन्हीं में समाया होता है। इससे पश्चिमी लोगों के ज्यादातर खाने का स्वाद एक जैसा होता है।
 
इसके विपरीत हर भारतीय व्यंजन को बनाने का अलग तरीका और अलग मसाले होते हैं। इससे यहां हर व्यंजन का स्वाद बेमिसाल हो जाता है। भारत में हर व्यंजन बनाने का एक नियम होता है। इसके अलावा यहां इलाइची, लाल मिर्च, इमली और हल्दी जैसे मसालों का सबसे शानदार इस्तेमाल होता है। शोधकर्ताओं के मुताबिक पश्चिमी व्यंजनों में डाले जाने वाले पदार्थो के स्वाद एक-दूसरे पर हावी हो जाते हैं जबकि भारतीय मसालों के साथ ऐसा कभी नहीं होता।

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इ्न्दौर के अग्रवाल समाज की अनुकरणीय पहल

मध्‍यप्रदेश के इंदौर में अग्रवाल महासभा द्वारा आयोजित तीन दिनी परिचय सम्मेलन में स्वस्थ व स्वच्छ शहर के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। आयोजन में डिस्पोजल ग्लास और प्लेटों का इस्तेमाल नहीं किया गया। आयोजकों के मुताबिक आयोजन में 15 हजार लोग शामिल होते हैं, जो करीब 60 हजार डिस्पोजल ग्लास व प्लेटों का प्रयोग करते हैं। इस बार इनका उपयोग नहीं किया गया। पानी के लिए समाजजनों ने तांबे के लोटे का उपयोग किया।

अभिनव कला समाज प्रांगण गांधी हॉल में स्वास्थ्य के मद्देनजर कोल्ड्रिंक की बजाए देसी शीतल पेय पदार्थों का इंतजाम किया गया था। महासभा के समन्वयक संतोष गोयल के अनुसार आयोजन के 22वें वर्ष में परिचय सम्मेलन स्वच्छ व स्वस्थ शहर की थीम पर आयोजित किया गया है। विवाह समारोह में सुधार की दिशा में उठाए जा रहे कदमों को भी समाजजनों के बीच प्रचारित किया जा रहा है।

विवाह समारोह में 21 से कम व्यंजनों के प्रयोग के लिए समाजजनों को प्रेरित किया गया। सम्मेलन के दूसरे दिन भी बड़ी संख्या में समाजजनों का तांता लगा। मंच से करीब 400 प्रत्याशियों ने जीवनसाथी की तलाश की। परिचय देने वालों में अहमदाबाद, बड़ौदा, दाहोद, नागपुर, अकोला, जलगांव, जयपुर, उदयपुर, कोटा के प्रत्याशी शामिल थे। कई युवक-युवतियों ने कुंडली मिलान भी कराया।

विचार-विमर्श के लिए भी अभिभावक प्रत्याशियों का तांता लगा हुआ था। मंगलवार को अंतिम दिन सम्मेलन की शुरुआत सुबह 10.30 बजे होगी। अध्यक्ष मुरारीलाल गोयल, महामंत्री अजय बंसल, संयोजक रमेश तायल, एलबी अग्रवाल आदि मौजूद थे।

साभार: http://naidunia.jagran.com/ से 

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महिला दिवस पर मुंबई में रैंप वॉक करेंगी दादी और नानी

मुंबई। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर मुंबई में महिला व्यापार पेठ का एक सबसे अलग आयोजन होने जा रहा है। ऐसा पहली बार होगा कि महिला दिवस पर दादी और नानी बनी महिलाएं रैंप वॉक करेंगी। महिलाओं में उद्यमवृत्ति को बढ़ावा देने के लिए लोढ़ा फाउंडेशन की ओर से आयोजित इस दो दिवसीय मेले का उदघाटन मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी श्रीमती अमृता देवेंद्र फडणवीस करेंगी।
ऑपेरा हाउस स्थित डायमंड मार्केट लेन में शनिवार की शाम 5 बजे यह कार्यक्रम शुरू होगा। मलबार हिल के विधायक मंगल प्रभात लोढ़ा की उपस्थिति में होनेवाले महिला सशक्तिकरण के इस आयोजन के उदघाटन समारोह के जरिए श्रीमती अमृता फडणवीस पहली बार किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में शिरकत करेंगी। महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक सार्थक कदम के तौर पर आयोजित इस कार्यक्रम में 50 से भी ज्यादा विभिन्न महिला समूहों द्वारा गृह उद्योग निर्मित वस्तुओं की दो दिवसीय सेल व एग्जीबिशन भी आयोजित की गई है। महिला व्यापार पेठ से होनेवाली सारी आय ‘बेटी बचाओ – बेटी पढ़ाओ’ मिशन के लिए मुख्यमंत्री सहायता कोष में दी जाएगी।

इस दो दिवसीय आयोजन में हजारों महिलाएं भाग लेंगी। शनिवार और रविवार को शाम 4 बजे से शुरू होकर रात 10 बजे तक यह आयोजन चलेगा। इस दौरान हर घंटे एक लकी ड्रॉ खिलेगा। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर हो रहे इस आयोजन में महिलाओं के लिए होम मिनिस्टर, बेस्ट ड्रेस एवं कुकिंग कॉम्पीटिशन के आयोजन भी होंगे। महिला व्यापार पेठ में गिरगांव, ऑपेरा हाउस, खेतवाड़ी, प्रार्थना समाज, मलबार हिल, वालकेश्वर, ताड़देव, महालक्ष्मी आदि के विभिन्न महिला संगठनों की भी इस आयोजन में सहभागिता है। दादी – नानी रैंप वॉक इस आयोजन का सबसे बड़ा आकर्षण होगा। �

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रामधारी सिंह दिवाकर का कहानी पाठ ‘बनास जन’ द्वारा कार्यक्रम आयोजित

दिल्ली।  'बाबूजी प्रसन्न मुद्रा में बोल रहे थे। और मुझे लग रहा था ,अपने ही भीतर के किसी दलदल में मैं आकंठ धंसता जा रहा हूँ। कोई अंश धीरे धीरे कटा जा रहा था अंदर का। लेकिन बाबूजी के मन में गजब का उत्साह था।' सुपरिचित कथाकार-उपन्यासकार रामधारी सिंह दिवाकर ने अपनी चर्चित कहानी 'सरहद के पार' में सामाजिक संबंधों में आ रहे ठहराव को लक्षित करते हुए कथा रचना में यह प्रसंग सुनाया। मिथिला विश्वविद्यालय में अध्यापन कर चुके प्रो दिवाकर ने हिन्दी साहित्य की पत्रिका 'बनास जन' द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में कहानी पाठ किया। उन्होंने इस अवसर पर कहा कि छोटे शहर और ग्रामीण परिवेश से आ रहे रचनाकारों के लिए पाठकों तक पहुँचना अब भी चुनौती है। उन्होंने अपनी रचना यात्रा से सम्बंधित संस्मरण सुनाते हुए सामूहिक जीवन के विलोपित हो जाने का त्रास उन्हें आज भी सालता है।

आयोजन के मुख्य अतिथि दिल्ली विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के सह आचार्य डॉ संजय कुमार ने कहा कि हिन्दी में प्रो रामधारी सिंह दिवाकर के पाठक लम्बे समय से हैं और सारिका, धर्मयुग के दौर से उनकी कहानियां चाव से पढ़ी जाती रही हैं। उन्होंने सामाजिक संबंधों की दृष्टि से उनकी रचनाशीलता को उल्लेखनीय बताया। जीवन पर्यन्त शिक्षण संस्थान में हिन्दी अध्येता डॉ मुन्ना कुमार पाण्डेय ने देश में आंतरिक विस्थापन की स्थितियों को रेखांकित करते हुए कहा कि यह समस्या बहु आयामी है तथा इसकी जटिलताओं को समझने में दिवाकर जी की रचनाएँ मददगार हो सकती हैं। समीक्षक मनोज मोहन ने प्रो रामधारी सिंह दिवाकर की कथा रचनाओं को बिहार के ग्रामीण अंचल का वास्तविक वर्तमान बताते हुए कहा कि हिन्दी आलोचना को अपना दायरा बढ़ाना होगा। 

भारती कालेज में हिन्दी अध्यापक नीरज कुमार ने प्रो दिवाकर की कथा भाषा को माटी की गंध से सुवासित बताया। आयोजन में युवा आलोचक प्रणव कुमार ठाकुर, डॉ प्रेम कुमार, कुमारी अंतिमा सहित कुछ पाठक भी उपस्थित थे। इससे पहले बनास जन के संपादक पल्लव ने प्रो दिवाकर की रचनाशीलता का परिचय दिया। डॉ पल्लव ने कहा कि उनकी कहानियां समकालीन कथा चर्चा से बाहर हों लेकिन उनमें अपने समय की विडम्बनाओं को देखा जा सकता है।     

आयोजन की अध्यक्षता कर रहे दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ परमजीत ने कहा कि साहित्य को समाज का दर्पण बताया गया है किन्तु इस दर्पण की पहुँच जन जन तक सुलभ करने के लिए अनेक स्तरों पर एक साथ सक्रिय होना पड़ेगा। डॉ परमजीत ने बनास जन के इस आयोजन को सार्थक प्रयास बताते हुए कहा कि कला के क्षेत्र में छोटे छोटे कदम भी मानीखेज बन जाते हैं। अंत में बनास जन के सहयोगी भंवरलाल मीणा ने आभार प्रदर्शित किया। 

संपर्क
भंवरलाल मीणा 
सहयोगी संपादक 
बनास जन 
393, कनिष्क अपार्टमेन्ट, सी एंड डी ब्लाक
शालीमार बाग, दिल्ली- 110088
011-27498876

 

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Banaas Jan
393, Kanishka Appartment C & D Block
Shalimar Bagh
Delhi- 110088
Phone- 011-27498876
Mo – 08130072004

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गैरबराबरी और बाज़ारवाद की भी शिकार बन गई है नारी शक्ति – डॉ.चन्द्रकुमार जैन

राजनांदगांव। "पुरुषों की तुलना में स्त्रियों का घट रहा अनुपात एक बेहद खतरनाक भविष्य की ओर संकेत करने लगा है। जन्म से लेकर मृत्यु तक आचार-संहिताओं की हथकड़ियों-बेड़ियों में जकड़ी हुई स्त्री पर अब जन्म से पूर्व ही अस्तित्व का खतरा मंडराने लगा है। कन्या भ्रूण ह्त्या का खौफनाक मंज़र हमारी सभ्यता पर लगातार सवालिया निशान लगा रहा है। आज स्त्री पुरुषवादी सत्ता के साथ-साथ पूंजीवादी बाजारवाद की भी शिकार है।इस पर गौर करना समय की एक बड़ी मांग है।" 

लायंस क्लब के डिस्ट्रिक्ट एजुकेशन चेयरमैन,ख्यातिप्राप्त वक्ता और दिग्विजय कालेज के हिन्दी विभाग के प्राध्यापक डॉ.चन्द्रकुमार जैन ने उक्त उदगार व्यक्त किया। अंतर राष्ट्रीय महिला दिवस पर दुर्ग-भिलाई ट्विन सिटी क्लब में मुख्य वक्ता के रूप में अपने प्रभावी सम्बोधन में डॉ.जैन ने कहा कि आज विज्ञान और तकनीक भी समाज में व्याप्त पुरुष वर्चस्ववादी मूल्यों के चलते स्त्रियों के, और इस तरह पूरे समाज के, विनाश के साधन बन गए हैं। लेकिन, डॉ.जैन ने आगाह किया कि इस प्रवृत्ति के खिलाफ कोई भी संघर्ष तब तक कामयाब नहीं होगा जब तक कि उन मूल्यों और सोच को निशाना न बनाया जाए जो स्त्री के प्रति किसी भी तरह की बराबरी के भाव को अस्वीकार करते हैं।

डॉ.जैन ने स्पष्ट किया कि जाति व्यवस्था की तरह ही पितृसत्तात्मक मूल्य भी हमारे समाज के जेहन और आदतों तक में काफी गहराई तक धंसे हुए हैं। यहां स्त्री आर्थिक ही नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक शोषण की भी शिकार है। उसे दोयम दर्ज़े के काम सौपने से हम बाज़ नहीं आते हैं। लेकिन इन्हीं कामों में से जो काम समाज में आर्थिक तौर पर लाभकारी हो जाते हैं, जैसे खाना पकाना, तो वहां पुरुष स्त्री को विस्थापित करके स्वयं विराजमान हो जाता है। 

डॉ.जैन ने कहा कि विनय, कोमलता, शील, सौंदर्य, क्षमा आदि स्त्री के लिए घोषित आभूषण उसकी हथकड़ियां-बेड़ियां बनकर न रह जाएँ,इस पर चिंतन जरूरी है। ये सभी मिलकर एक जटिल जाल बुनते हैं जिसमें फंसी स्त्री को बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिलता। इस दिशा में हीला हवाला अब ठीक नहीं। डॉ.जैन ने कहा कि सही कदम उठाने में ही महिला दिवस मानाने की सार्थकता होगी।

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