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क्या गजब लोकतंत्र है हमारा!

दवा और डॉक्टर  पेशे के क्या मानक हों –यह खुद भारतीय चिकित्सा परिषद् करती  है  जिसके सदस्य डॉक्टर  हैं | और सरकारी डॉक्टरों के पास छोटे से ऑपरेशन के लिए जाएँ तो कहते हैं अनेस्थेसिया विशेषज्ञ  नहीं होने के कारण वे ऑपरेशन नहीं कर सकते किन्तु टारगेट प्राप्त करने के दबाव में वे परिवार नियोजन के ऑपरेशन बिना अनेस्थेसिया विशेषज्ञ के कर देते हैं|   वकीलों के पेशेवर मानक क्या हों , यह  बार कौंसिल तय करती है किसके सदस्य खुद  वकील होते हैं | कानून में क्या सुधार हों  यह  भारतीय विधि आयोग तय करता है  जिसके अधिसंख्य सदस्य वकील और न्यायाधीश होते हैं | मानवाधिकारों के उल्लंघन में न्यायाधीशों और पुलिस का स्थान  सर्वोपरि है किन्तु मानवाधिकार आयोगों में मानवाधिकारों के उल्लंघन की  जांच करने वाले अधिसंख्य सदस्य न्यायाधीश और  पुलिस वाले ही होते हैं|  कैसी फ़िल्में जनता को दिखाई जाएँ यह सेंसर बोर्ड तय करता है जिसके सदस्य फिल्म वाले होते हैं |  मीडिया के मानक क्या हो यह  प्रेस परिषद् तय करती है जिसके सदस्य भी मीडिया जगत के लोग होते हैं |

इस लोकतंत्र में जनता का भाग्य  उनके नुमायंदे नहीं बल्कि उस पेशे के लोग तय करते हैं जिनके अत्याचारों की  शिकार जनता होती है  | यानी तुम्ही मुंसिफ , तुम्हारा ही कानून और तुम्ही गवाह , निश्चित है गुनाहगार हम ही निकलेंगे | क्या यह दिखावटी लोकतंत्र नहीं जोकि औपनिवेशिक  परम्पराओं  का अनुसरण करता है ?
 
सही अर्थों में लोकतंत्र वही है जहां जनता के नुमायंदे मिलकर तय करें कि जनता की अपेक्षाएं क्या हों | आवश्यक हो तो अधिकतम एक तिहाई पेशेवर विशेषज्ञों की  सेवाएं ली जा सकती हैं |

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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   विनय ना मानत जलधि जड़, गए तीन दिन बीती, बोले राम सकोप तब, भय बिन होई ना प्रीती. 

"I have never understood how people who want to pay peanuts; expect work from anyone other than monkeys". 
 इतने बदनाम हुए हम तो इस ज़माने में| तुमको लग जाएँगी सदियाँ हमें भुलाने में|| – गोपाल दास नीरज

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मयंक गाँधी ने केरजड़ीवाल पर फोड़ा ब्लॉग बम

आम आदमी पार्टी (आप) में पिछले दस दिनों से जारी आपसी कलह खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। बुधवार को पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण को सबसे ताकतवर पॉलिटिकल अफेयर्स कमिटी (पीएसी) से निकाले जाने के बाद आप के नेता मयंक गांधी ने भी बागी तेवर दिखाए हैं। दोनों नेताओं को कमिटी से निकाले जाने के फैसले पर मयंक गांधी ने कई सवाल उठाए हैं। गुरुवार को मयंक ने ब्लॉग लिख कर न केवल बैठक की बातों को सार्वजनिक किया बल्कि केजरीवाल पर खुलकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि केजरीवाल ने ही योगेंद्र-प्रशांत को पीएसी से निकलवाया। उन्होंने दावा कि पिछले दिनों एक बैठक के दौरान केजरीवाल ने स्पष्ट कर दिया था कि वह प्रशांत और योगेंद्र के साथ काम नहीं कर सकते। इस बीच मयंक गांधी के खुलासे पर पीएसी से हटाए गए योगेंद्र यादव ने कहा, ''मैं ज्यादा कुछ नहीं कहना चाहूंगा लेकिन सच को छिपाया नहीं जा सकता।''
 
'मैं पार्टी कार्यकर्ताओं को सच बताना चाहता हूं'
गुरुवार को लिखे अपने ब्लॉग में मयंक ने कहा, ''मैं इसके लिए पहले से ही माफी मांगता हूं कि मैं बुधवार को हुई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बातों के बारे में सार्वजनिक रूप से बात कर रहा हूं। क्योंकि मैं हमेशा से ही एक अनुशासित कार्यकर्ता रहा हूं।'' मयंक ने कहा, ''2011 में जब लोकपाल ड्रॉफ्ट कमिटी की बैठकें होती थीं तो केजरीवाल बैठक से आने के बाद कहते थे कि कपिल सिब्बल ने बैठक की बातों को दुनिया के सामने नहीं लाने को कहा है। उस वक्त अरविंद कहते थे कि उनकी ड्यूटी है कि इस प्रक्रिया की जानकारी देश को दी जाए, क्योंकि हम जनता के प्रतिनिधि के रूप में जा रहे हैं। उसी तरह राष्ट्रीय कार्यकारिणी में मैं केवल वॉलंटियर्स के प्रतिनिधि के रूप में था। और मैं इस हालत में गैग ऑर्डर स्वीकार कर नहीं कर सकता। वॉलेंटियर्स को इससे दूर नहीं रखा जा सकता वे ही मुख्य स्त्रोत है। उन्हें किसी से लीक हुई जानकारी मिले उससे अच्छा है कि मैं उन्हें फैक्चुअल जानकारी दूं। इसलिए मैं ब्लॉग लिख रहा हूं।''
 
मेरे खिलाफ कार्रवाई करें, मुझे चिंता नहीं
मयंक गांधी ने कहा कि पिछली रात किसी ने मुझसे कहा कि बैठक की बातें सार्वजनिक करने पर मेरे खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। लेकिन मुझे इसकी चिंता नहीं है। मुंबई में पार्टी का चेहरा माने जाने वाले मयंक गांधी ने यह भी मांग की है कि बुधवार को हुई राष्ट्रीय कार्यकारिणी (एनई) की बैठक की पल-पल की जानकारियां सार्वजनिक की जानी चाहिए।

दिल्ली चुनाव के दौरान प्रशांत भूषण ने दी थी प्रेस कॉन्फ्रेस की चेतावनी
मयंक गांधी ने अपने ब्लॉग में विस्तार से लिखा कि आखिर पार्टी में विवाद कब से और कैसे शुरू हुआ। उन्होंने लिखा है, ''दिल्ली चुनाव प्रचार के दौरान प्रशांत भूषण ने कई बार धमकी दी थी कि वह पार्टी के खिलाफ प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे। उन्हें उम्मीदवारों की चयन प्रक्रिया पर कई बार सवाल उठाया था। हालांकि चुनाव खत्म होने तक मामला शांत रखा गया था। यह भी आरोप लगे कि योगेंद्र यादव ने केजरीवाल को पार्टी संयोजक पद से हटाने की साजिश की। पार्टी के संचालन को लेकर भी केजरीवाल, प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव के बीच मतभेद और विश्वास की कमी थी। ''
मयंक ने आगे लिखा, ''26 फरवरी की रात जब एनई की मुलाकात हुई थी तो अरविंद ने कहा था कि यदि ये दो (योगेंद्र-प्रशांत) कमिटी में रहेंगे तो वे संयोजक के तौर पर काम करने में असमर्थ होंगे। चार मार्च को एनई की बैठक रूप से इसी बैकग्राउंड पर हुई।''

क्या हुआ राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में
मयंक गांधी ने आगे लिखा है कि योगेंद्र यह समझते थे कि अरविंद नहीं चाहते कि वे दोनों पीएसी की बैठक में रहें, क्योंकि वे उनके साथ काम नहीं करना चाहते थे। वे दोनों पीएसी से बाहर रह कर खुश हैं लेकिन उन्हें कॉर्नर नहीं किया जाना चाहिए। इस दौरान दो प्रस्ताव लाए गए।
पहला प्रस्तावः एनई की बैठक में पहला प्रस्ताव यह लाया गया कि पीएसी का फिर से गठन किया जाए। वोटिंग के जरिए नए पीएसी सदस्यों को शामिल किया जाए। इस दौरान योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण अपने उम्मीदवार नहीं खड़ा कर सकेंगे।
दूसरा प्रस्तावः पीएसी मौजूदा तरीके से ही आगे भी चलती रहेगी और योगेंद्र-प्रशांत इसकी बैठकों में हिस्सा नहीं लेंगे।
बैठक के दौरान कुछ देर के लिए मनीष और दिल्ली टीम के सदस्य (आशीष खेतान, आशुतोष, दिलीप पांडे और अन्य) चर्चा के लिए एक किनारे गए थे। फिर से बैठक शुरू होने के बाद मनीष ने प्रस्ताव रखा कि प्रशांत और योगेंद्र को पीएसी से बाहर हटाया जाए और इसका संजय सिंह ने समर्थन किया।

वोट न देने पर दी सफाई
मयंक ने ट्वीट के जरिए अफवाहों को खारिज किया कि उन्होंने किसी वोट दिया और किसे वोट नहीं दिया। मयंक ने कहा, मैं कुछ कारणों के चलते खुद को वोटिंग प्रक्रिया से दूर रखा। पहले कारण के रूप में उन्होंने कहा, '' चूंकि अरविंद पीएसी का कामकाज बिना विवाद के चलाने के पक्ष में थे। और मैं इससे सहमत था कि प्रशांत और योगेंद्र को कोई अन्य महत्वपूर्ण काम दिया जाए।'' दूसरा कारण यह था कि मैं सार्वजनिक रूप से इस तरह प्रस्ताव लाकर दोनों को हटाए जाने से स्तब्ध था। क्योंकि दोनों को इस तरह हटाए जाना दुनिया भर के कार्यकर्ताओं की भावनाओं के खिलाफ है।

मयंक ने अपने ब्लॉग के अंत में यह स्पष्ट करने की कोशिश की है कि बैठक की बातों को सामने लाकर उन्होंने कोई विद्रोह नहीं किया। उन्होंने कहा, ''मैं प्रेस में जाने की बजाए इसे अपने सभी कार्यकर्ताओं के लिए लिख है। इस पर मेरे खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती है, अगर ऐसा होता है तो फिर होने दीजिए।''

पार्टी का आइडिया किसी व्यक्ति से बड़ा- योगेंद्र यादव
पीएसी कमिटी से निकाले गए योगेंद्र यादव ने कहा, ''पार्टी ने इस बात का फैसला लिया है कि कल की मीटिंग में क्या हुआ इसके बारे में मीडिया से कोई भी बात नहीं की जाएगी। मैंने मयंक गांधी का ब्लॉग पढ़ा है जिसे पढ़ने के बाद मैं कह सकता हूं कि इसमें काफी बातें सही लिखी हुई हैं। मैं पार्टी के फैसले से आहत नहीं हूं बल्कि इससे यह संदेश गया है कि पार्टी ने पारदर्शिता का रास्ता नहीं छोड़ा है। यह किसी एक आदमी की पार्टी नहीं बल्कि वालंटियर की खड़ी की हुई पार्टी है और वे लोग ही इसे चलाते हैं। पार्टी के गठन का आइडिया किसी भी व्यक्ति से बड़ा है। मैं और प्रशांत भूषण पार्टी की पार्लियामेंट्री कमिटी से बाहर हुए हैं और यह फैसला पार्टी में बहुमत से लिया गया है। इससे एक बार फिर आप में वालंटियर की भूमिका मजबूत हुई है।''

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ढींगरा फ़ाउण्डेशन-हिन्दी चेतना अंतर्राष्ट्रीय साहित्य सम्मानों की घोषणा

उषा प्रियंवदा (अमेरिका), चित्रा मुद्गल (नई दिल्‍ली) एवं पद्मश्री डॉ. ज्ञान चतुर्वेदी (भोपाल) को मोर्रिस्विल, अमेरिका में प्रदान किया जाएगा सम्मान 
संयुक्त राज्य अमेरिका / सीहोर । उत्तरी अमेरिका की प्रमुख त्रैमासिक साहित्यिक पत्रिका ‘हिन्दी चेतना’ के भारत समन्यवक तथा पत्रिका के सह सम्पादक पंकज सुबीर ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर जानकारी दी है कि  ‘ढींगरा फ़ाउण्डेशन-अमेरिका’  तथा ‘हिन्दी चेतना-कैनेडा’ द्वारा प्रारंभ किये गये सम्मानों के नाम चयन के लिए प्रबुद्ध विद्वानों की जो निर्णायक समिति बनाई गई थी, उस समिति के समन्‍वयक लेखक नीरज गोस्‍वामी द्वारा प्रस्‍तुत निर्णय के अनुसार समिति ने 2014 में प्रकाशित हिन्‍दी के उपन्यासों और कहानी संग्रहों पर विचार-विमर्श करके जिन साहित्यकारों को सम्मान हेतु चयनित किया है, वे हैं -‘ढींगरा फ़ाउण्डेशन-हिन्दी चेतना अंतर्राष्ट्रीय साहित्य सम्मान’ : (समग्र साहित्यिक अवदान हेतु) उषा प्रियंवदा (अमेरिका),  ‘ढींगरा फ़ाउण्डेशन-हिन्दी चेतना अंतर्राष्ट्रीय कथा सम्मान’ : कहानी संग्रह- ‘पेंटिंग अकेली है’-चित्रा मुद्गल (सामयिक प्रकाशन) भारत, उपन्यास-‘हम न मरब’-डॉ. ज्ञान चतुर्वेदी (राजकमल प्रकाशन) भारत। सम्मान समारोह 30 अगस्त 2015 रविवार को मोर्रिस्विल, नार्थ कैरोलाइना, अमेरिका में आयोजित किया जाएगा। पुरस्कार के अंतर्गत तीनों रचनाकारों को ‘ढींगरा फ़ाउण्डेशन-अमेरिका’ की ओर से शॉल, श्रीफल, सम्मान पत्र, स्मृति चिह्न, प्रत्येक को पाँच सौ डॉलर (लगभग 31 हज़ार रुपये) की सम्मान राशि, अमेरिका आने-जाने का हवाई टिकिट, वीसा शुल्क, एयरपोर्ट टैक्स प्रदान किया जाएगा एवं अमेरिका के कुछ प्रमुख पर्यटन स्थलों का भ्रमण भी करवाया जाएगा।  

यह जानकारी देते हुए श्री पंकज सुबीर ने बताया कि प्रेमचंद सम्मान तथा डॉ. मोटूरि सत्यनारायण पुरस्कार से सम्मानित प्रतिष्ठित कहानीकार, उपन्यासकार उषा प्रियंवदा प्रवासी हिंदी साहित्यकार हैं। उनकी प्रमुख कृतियों में कहानी संग्रह -फिर वसंत आया, जिन्दग़ी और गुलाब के फूल, एक कोई दूसरा, कितना बड़ा झूठ, शून्य, मेरी प्रिय कहानियाँ, संपूर्ण कहानियाँ, वनवास तथा उपन्यास -पचपन खंभे लाल दीवार, रुकोगी नहीं राधिका, शेष यात्रा,  अंतर्वंशी, भया कबीर उदास, नदी आदि हैं। समग्र साहित्यिक अवदान हेतु उन्हें सम्मान प्रदान किया जा रहा है। व्यास सम्मान, इंदु शर्मा कथा सम्मान, साहित्य भूषण, वीर सिंह देव सम्मान से सम्मानित हिन्दी की महत्त्वपूर्ण कहानीकार चित्रा मुद्गल के अभी तक तीन उपन्यास -एक जमीन अपनी, आवां, गिलिगडु, बारह कहानी संग्रह- भूख, जहर ठहरा हुआ, लाक्षागृह, अपनी वापसी, इस हमाम में, ग्यारह लंबी कहानियाँ, जिनावर, लपटें, जगदंबा बाबू गाँव आ रहे हैं, मामला आगे बढ़ेगा अभी, केंचुल, आदि-अनादि आ चुके हैं। सम्मानित कथा संग्रह ‘पेंटिंग अकेली है’ उनका नया कहानी संग्रह है जो सामयिक प्रकाशन से प्रकाशित हुआ है। पद्मश्री, राष्ट्रीय शरद जोशी सम्मान, कथा यूके सम्मान, यश भारती सम्मान, सहित अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कार एवं सम्मान से सम्मानित- पद्मश्री डॉ. ज्ञान चतुर्वेदी भोपाल में ह्रदय विशेषज्ञ के रूप में कार्यरत हैं। अब तक प्रकाशित कृतियों में कहानी संग्रह -रामबाबू जी का बसंत, मूर्खता में ही होशियारी है, उपन्यास -नरक यात्रा, बारामासी, मरीचिका, हम न मरब, व्यंग्य संग्रह -जो घर फूँके, हिंदी में मनहूस रहने की परंपरा प्रकाशित हो चुके हैं। उन्हें उनके राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित उपन्यास ‘हम न मरब’ के लिये यह सम्मान प्रदान किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि 2014 से प्रारंभ किये गए ढींगरा फ़ाउण्डेशन-हिन्दी चेतना अंतर्राष्ट्रीय साहित्य सम्मान पिछले वर्ष साहित्यकारों सर्वश्री महेश कटारे, सुदर्शन प्रियदर्शिनी तथा हरिशंकर आदेश को कैनेडा के टोरेण्टो में प्रदान किये गए थे।

 ‘ढींगरा फ़ाउण्डेशन-अमेरिका’ की स्थापना भाषा, शिक्षा, साहित्य और स्वास्थ के लिए प्रतिबद्ध संस्थाओं के साथ मिलकर कार्य करने हेतु की गई है ताकि इनके द्वारा युवा पीढ़ी और बच्चों को प्रोत्साहित कर सही मार्गदर्शन दिया जा सके। देश-विदेश की उत्तम हिन्दी साहित्यिक कृतियों एवं साहित्यकारों के साहित्यिक योगदान को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित करना भी इसका उद्देश्य है। उत्तरी अमेरिका की त्रैमासिक साहित्यिक पत्रिका ‘हिन्दी चेतना’  को गत 16 वर्षों से हिन्दी प्रचारिणी सभा प्रकाशित कर रही है। हिन्दी प्रचारिणी सभा की स्थापना 1998 में हुई थी। हिन्दी प्रचारिणी सभा गत 16 वर्षों से विदेशों में हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार में एक विशेष भूमिका निभा रही है । ‘हिन्दी चेतना’ के सम्पादकीय मंडल में श्याम त्रिपाठी संरक्षक, मुख्य संपादक तथा हिन्दी प्रचारिणी सभा के अध्यक्ष, डॉ. सुधा ओम ढींगरा सम्पादक एवं रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’, पंकज सुबीर और अभिनव शुक्ल सह सम्पादक हैं। 

संपर्क
पंकज सुबीर 
सह सम्पादक एवं भारत समन्यवक  हिन्दी चेतना
मोबाइल 09977855399
फोन 07562-405545
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सूचना देने में साफगोई और समझदारी दोनों जरूरी – मुख्य सूचना आयुक्त सरजियस मिंज

दिग्विजय कालेज में संपन्न राज्य स्तरीय आरटीआई कायर्शाला में प्रभावी मार्गदर्शन

राजनांदगांव। "जनता को सूचना तक पहुँच का अधिकार है। यह मौलिक और मानवाधिकार की तरह आधुनिक लोकतंत्र का एक बड़ा अधिकार है। सुशासन के स्वप्न को साकार करने और पारदर्शिता के साथ प्रशासन की जवाबदेही सुनिश्चित करने में सूचना का अधिकार क़ानून एक प्रकाश स्तम्भ के समान है। जरूरत इस बात की है कि सूचना मांगने और देने दोनों में साफगोई और समझदारी के लिए जगह बने। वास्तव में आरटीआई इक्कीसवीं सदी की एक बड़ी क्रान्तिदर्शी पहल है।"

छत्तीसगढ़ के मुख्य सूचना आयुक्त श्री सरजियस मिंज ने उक्त विचार यहां शासकीय दिग्विजय महाविद्यालय में सूचना का अधिकार अधिनियम के प्रावधान और क्रियान्वयन पर आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला में व्यक्त किया। वे मुख्य अतिथि की आसंदी से बोल रहे थे। कार्यशाला के उदघाटन सत्र में अतिथि वक्ता के रूप में रायपुर के प्रतिष्ठित अधिवक्ता और सिविल जज परीक्षा के मार्गदर्शक डॉ.अमिताभ मिश्रा ने प्रभावशाली ढंग से अनेक विशिष्ट जानकारियां दीं।

महाविद्यालयों के जन सूचना अधिकारियों, सहायक जन सूचना अधिकारियों और कार्यालयीन सहायकों के लिए आयोजित इस सफल व उपयोगी कार्यशाला में प्राचार्य डॉ.आर.एन.सिंह ने स्वागत उद्बोधन में कार्यशाला की आवश्यकता और महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आरटीआई के जुड़े कर्तव्यों के निर्वहन के लिए सही, सटीक और समयोचित मार्गदर्शन देना की इसका उद्देश्य है। महाविद्यालय के सूचना अधिकार प्रकोष्ठ के संयोजक प्रो एच.एस.भाटिया ने कायर्शाला की रूपरेखा बताई। कार्यशाला के दोनों सत्रों का प्रासंगिक और प्रभावी संयोजन सूचना के अधिकार के स्टेट रिसोर्स पर्सन डॉ.चन्द्रकुमार जैन ने किया। स्टेट रिसोर्स पर्सन श्री आर.बी.सिंह और स्टेट रिसोर्स पर्सन श्री कैलाश शर्मा ने दूसरे सत्र में सूचना का अधिकार क़ानून के प्रावधानों और व्यावहारिक जिज्ञासाओं पर केंद्रित प्रेरक चर्चा की। प्रारम्भ में अतिथियों ने माँ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन किया। महाविद्यालय की छात्राओं ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। पश्चात अतिथियों का स्वागत किया गया।

मुख्य अतिथि श्री सरजियस मिंज ने पावर पाइंट प्रस्तुतीकरण में सूचना की परिभाषा से लेकर उसके इतिहास और विकास के विभिन्न चरणों को भली भाँति समझाया। उन्होंने कहा कि उत्तरदायी प्रशासन समय की बड़ी मांग है। लोकतंत्र जनता की आशाओं को पूरा करने में तभी कामयाब हो सकता है जब उसे उसके हक़ और हिस्से की जानकारी सही ढंग से मिले। भष्टाचार मुक्त व्यवस्था के निर्माण में भी इस अधिनियम की अहम भूमिका है। व्यावहारिक शासन पद्धति के विकास और विरोधी हितोँ के बीच सामंजस्य के मद्देनज़र भी यह क़ानून मील के पत्थर के समान है। श्री मिंज ने आव्हान किया कि लोक प्राधिकारी अधिनियम को ठीक से पढ़ें, समझें और उसमें संशोधनों के प्रति जागरूक रहकर अपने संस्थान में सूचना की शक्ति को जनहित में पूरी दृढ़ता के साथ चरितार्थ कर दिखाएँ।

अतिथि वक्ता डॉ.अमिताभ मिश्रा ने सूचना की महता के साथ-साथ बताया कि जनता को संवैधानिक, विधिक, मानव अधिकारों के आलावा कई अधिकार प्राप्त हैं, किन्तु सूचना के अधिकार ने उसे अपने हक़ का एहसास कुछ अलग अंदाज़ में करवाया है। विचार और अभिव्यक्ति की आज़ादी इस क़ानून का मूल दर्शन है। सूचना को छुपाना, देने से मना करना, सूचना न देने का दबाव बनाना बिल्कुल गलत है। उन्होंने कहा कि सूचना देने को लेकर सकारात्मक रहना बेहद जरूरी है। आमंत्रित वक्ता श्री आर.बी.सिंह ने आरटीआई एक्ट की महत्वपूर्ण धाराओं को समझाते हुए उसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अत्यंत उपयोगी सुझाव दिए। श्री कैलाश शर्मा ने सूचना की ताकत का सुलझे हुए अंदाज़ में ज़िक्र करते हुए सूचना देने की समयावधि और उसके तौर तरीके कारगर सुझाव दिए। डॉ.चन्द्रकुमार जैन ने कहा कि सूचना एक शक्ति है, पहेली और समाधान भी है। यह रहस्य के विरुद्ध खुलेपन का शंखनाद भी है। यह मज़बूत लोकतंत्र से राष्ट्र निर्माण का उद्घोष भी है। इसे सफल बनाना हर नागरिक की पहली बड़ी जिम्मेदारी है। प्रत्येक सत्र में अभ्यागतों के सभी प्रश्नों के अतिथि वक्ताओं स्पष्ट उत्तर दिए गए। महाविद्यालय परिवार द्वारा समस्त अतिथियों का शाल,श्री फल भेंट कर सम्मान किया गया।
शोध ग्रन्थ भेंट
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कायर्शाला के मुख्य अतिथि मुख्य सूचना आयुक्त श्री सरजियस मिंज को, संयोजन कर रहे डॉ.चन्द्रकुमार जैन ने आचार्य विद्यासागर जी महाराज कृत मूकमाटी महाकाव्य पर केंद्रित अपना बहुचर्चित शोध ग्रन्थ भेंट किया। हार्दिक प्रसन्नता व्यक्त करते हुए श्री मिंज ने डॉ.जैन को शुभमनाएं दीं। महाविद्यालय परिवार द्वारा समस्त अतिथियों का शाल,श्री फल भेंट कर सम्मान किया गया।

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पूजा मिश्रा ने फराह खान और कलर्स को नोटिस भेजा

कलर्स चैनल पर आने वाले सलमान खान के रिअलिटी शो के पांचवें सीजन में हिस्सा लेने वालीं पूजा मिश्रा ने 'कलर्स' चैनल को एक कानूनी नोटिस भेजा है। दरअसल, पूजा मिश्रा का कहना है कि 'कलर्स' चैनल पर दिखाए जाने वाला कुकरी शो 'फराह की दावत' असल में उनका आइडिया था।

कुकरी शो 'फराह की दावत' को जानी-मानी निर्माता-निर्देशक फराह खान होस्ट कर रही हैं। पूजा मिश्रा ने चैनल पर उनका आइडिया चुराने का आरोप लगाया है और इसके लिए उन्होंने कानूनी नोटिस भेजकर इस चैनल को खूब खरी-खोटी भी सुनाई है।

कानूनी नोटिस में पूजा मिश्रा के कुकरी शो के बारे में कहा गया है कि कलर्स चैनल ने पूजा मिश्रा प्रोडक्शंस के पहले कुकरी शो की नकल कर और 'फराह की दावत' को ऑन एयर कर प्रोफेशनलिज्म की सारी सीमाएं लांघ दी है। इसमें यह भी बताया गया है कि पूजा मिश्रा के कुकरी शो की स्पॉन्सरशिप के लिए वीडियोकॉन ने उनसे संपर्क भी किया था, लेकिन कलर्स ने 'फराह की दावत' के लिए वीडियोकॉन को प्रस्ताव दे दिया। पूजा मिश्रा प्रोडक्शनंस का कुकरी शो जल्द ही न्यूयॉर्क के एक फूड चैनल पर ऑन एयर होने वाला है।

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व्यवहार कौशल ( सॉफ्ट स्किल ) से सँवारें अपना व्यक्तित्व

व्यावहारिक कौशल अक्सर एक व्यक्ति के अन्य लोगों के साथ संबंधों के तौर तरीके, व्यक्तित्व लक्षण, सामाजिक गौरव, संचार, भाषा, व्यक्तिगत आदतों, मित्रता और आशावाद के साथ जुड़ा शब्द है। साफ्ट स्किल एक नौकरी और कई अन्य गतिविधियों की व्यावसायिक जरूरत को पूरा करती हैं। व्यवहार कुशलता से आपकी तकनीकी दक्षता में चार चाँद लग जाते हैं। आप अधिक स्वीकार किये जाते हैं,अधिक सहयोग और सम्मान के अधिकारी बनते हैं और आपकी कार्यशैली अधिक परिणाम देने वाली सिद्ध होती है। अगर आप व्यवहार कुशल हैं,तो बेशक समझेंगे कि ज़रा सी बात से लोगों के अहम को चोट लग जाती है,जिसका सीधा असर आपसे जुड़े पूरे अमले पर पड़ता है। 

आज माना जा रहा है कि प्रशासक अपने साथियों एवं स्टाफ के साथ व्यवहार कुशल रहें तथा स्वयं के सद्भावी होने का परिचय दें ताकि संस्था में स्वस्थ माहौल का निर्माण किया जा सके। यह बात हाल ही में राजस्थान के अलवर के विधि कॉलेज प्राचार्य डॉ. बाबूलाल यादव ने अगर कही तो याद रहे कि आज का प्रबंध विज्ञान और प्रशासनिक कर्म कौशल भी व्यवहार की ज़मीन पर ही फल फूल रहा है। इसी तरह एक अवसर पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारी श्री राजीव मिश्रा ने अपने कार्यालय कक्ष में जिले के सभी पुलिस पदाधिकारी व थानाध्यक्षों को अपनी ड्यूटी के प्रति सजग व संवेदनशील रहने की हिदायत दी। विभिन्न थानों से मिल रही शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए कहा कि वे  कि जनता के साथ व्यवहार कुशल बनकर थानेदारी करें। इससे व्यवहार कौशल का महत्त्व समझा जा सकता है। 

बहरहाल,समय के साथ-साथ सॉफ्ट स्किल यानी व्यवहार कौशल करियर के निर्माण के रूप में उभरकर सामने आया है। कई दफ़े, करियर में एक निश्चित बिंदु के बाद ठहराव-सा आ जाता है और ऐसा इसलिए होता है क्योंकि सम्बंधित अधिकारी या कर्मचारी में नेतृत्व क्षमता, समूह में काम करना, सामाजिक सम्प्रेषण तथा संबंध निर्माण कौशलों का अभाव होता है। इन्हीं गुणों को सॉफ्ट स्किल में शामिल किया गया है।  इसका एक व्यापक क्षेत्र है जिसमें सम्प्रेषण कौशल, श्रवण कौशल,टीम कौशल, नेतृत्व के गुण, सृजनात्मकता और तर्कसंगति, समस्या निवारण कौशल तथा परिवर्तनशीलता आदि सम्मिलित हैं। 

यहां कुछ ऐसे व्यवहार कौशलों की चर्चा की जा रही है जो आपके रोजगार की संभावनाओं और व्यक्तित्व में सुधार कर सकते हैं। 
प्रभावी सम्प्रेषण कौशल
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प्रभावी सम्प्रेषण कौशलों में सार्वजनिक भाषणों,प्रस्तुतिकरण,बातचीत,संघर्ष समाधान, बैठकों में प्रभावी संचालन आदि के लिए रिपोर्ट तैयार करना, प्रस्ताव, मैनुअल तैयार करना, ज्ञापन, सूचनाएं लिखना,कार्यालयीन पत्र-व्यवहार आदि के लिए लेखन कौशल शामिल हैं। इनमें मौखिक और गैर-मौखिक दोनों रूप सम्मिलित है। इसमें कुछ हद तक दक्षता होना जरूरी है। हिन्दी के साथ अंग्रेजी और क्षेत्रीय भाषा का के ज्ञान का संगम हो तो समझिये बात कुछ और ही होगी।   
कार्य कौशल
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अंतर-वैयक्तिक और सामूहिक-कार्य कौशल उत्पादकता तथा बेहतर वातावरण के लिए योगदान करते हैं। सामान्यतः इन कौशलों को पढ़ाये जाने की आवश्यकता होती है अथवा प्रैक्टिस और जागरुकता से इन्हें सीखा जा सकता है। इस कौशल के चार आयाम होते हैं, जिनके नाम हैः सहयोग, सम्प्रेषण, कार्य, नीतिशास्त्र और नेतृत्व। इन आयामों का प्रशिक्षण प्राप्त करना चाहिए। 
व्यक्तिगत कौशल
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बहुत से लोग इस बात को लेकर अचम्भित होते हैं कि वे व्यवसाय में अपेक्षानुसार सफल क्यों नहीं होते हैं। व्यक्तिगत कौशल,वे कौशल होते हैं जो आपको न केवल समाज और कार्य क्षेत्र में स्वीकार्य तथा सम्मान योग्य बनाते हैं बल्कि एक अच्छा रोजगार प्राप्त करने और बेहतर करियर विकास में आपकी मदद करते हैं। इनमें निर्णय करने की योग्यता, सावधानी , निर्णय क्षमता, शांति, वचनबद्धता, सहयोग, भावनात्मक स्थिरता, परानुभूति, लचीलापन, उदारता, सहनशीलता, आत्म-विश्वास, आत्म-नियंत्रण, आत्म-निर्भरता, आत्म-सम्मान, ईमानदारी और अन्यों के बीच विनोदशीलता की अनुभूति आदि गुण सम्मिलित हैं। 
समस्या-निदान कौशल 
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क्या आपको ऐसी स्थितियों का अक्सर सामना करना पड़ता है जब आप सही फैसले करने में असमर्थ होते हैं ? आपके सामने ऐसी स्थितियां उत्पन्न होने की ज्यादा संभावनाएं उस वक्त होती हैं जब आप किसी संगठन में कार्य करते हैं। ऐसी दबावपूर्ण स्थितियों का मुकाबला करने के वास्ते आपको कुछेक ऐसे कौशल विकसित करने की आवश्यकता है जो आपको  समस्याओं के निदान और कार्य-नीतियां लागू करने में मददगार हो सकते हों। 
अनुकूलन और नीति कौशल 
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आधुनिक संगठन तीव्रता से बदलाव के दौर से गुज़र रहे हैं।  फलस्वरूप, किसी आधुनिक संगठन में कार्यरत कोई कर्मचारी न केवल कड़ी मेहनत करने के लिए तैयार होना चाहिए बल्कि उसमें लचीलेपन के साथ-साथ तेजी से हो रहे परिवर्तनों के अनुरुप ढालने की योग्यता भी होनी चाहिए। नियोक्ता को अनुकूलनशीलता विकसित करने के लिए विभिन्न कौशलों की आवश्यकता होती है। मिलजुलकर कार्य के लिए वातावरण तैयार करना, दूसरों के विश्वास और धारणा संबंधी पक्ष का सम्मान करना,कार्य स्थल को  जातीय/सांस्कृतिक भेदभाव से बचाना आदि अहम बातें हैं। 

कार्य नीतिशास्त्र नैतिक सदगुणों पर आधारित मूल्यों का एक समूह है, जिसमें विश्वसनीय बनना, सामाजिक कौशलों के लिए काम करना और उन्हें बरकरार रखने की कला को शामिल किया जा सकता है। इनके अलावा जिम्मेदारी की अनुभूति, ईमानदारी और वचनबद्धता को भी इनमें शामिल किया जा सकता है। 

व्यवहार कौशल अर्जित करने के लिए आपको जागरूक रहकर  सदैव यह याद रखना होगा कि इन कौशलों को पूरे समर्पण के साथ व्यवहार में लाएं। अभ्यास और अमल से आपके कार्य में सुधार होता है और आपको अपनी त्रुटियों और कमियों को जानने तथा उन्हें दूर करने में मदद मिलती है जिससे आप में आत्म-विश्वास की भावना बलवती होती है। 
व्यक्तित्व विकास
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बदलते समय के साथ अब एक सामान्य व्यक्ति से सुशिक्षित और परिपक्व व्यक्तित्व होने की अहमियत बढ़ गई है। विभिन्न संगठनों, खासकर कम्पनियों को ऐसे व्यक्तियों की तलाश रहती है जो कुशाग्र और सुशिक्षित होते हैं। जिनका व्यक्तित्व प्रभावी होता है। जिनमें ऐसा सम्प्रेषण कौशल हो जो उन्हें स्वयं और दूसरों को भी आगे रख सकें। जिनमें अपने कर्मचारियों को भर्ती के उपरांत सही ढंग से प्रशिक्षण देने और उन्हें अपने संसथान में बनाये रखने की योग्यता हो। स्मरण रहे कि ज्यादातर लोग प्रतिभाओं के साथ जन्म लेते हैं, परंतु उन्हें परिष्कृत और शिक्षित करने की आवश्यकता होती है। उन्हें प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए बाजार में बहुत से संस्थान संचालित किए जा रहे हैं। ये संस्थान काफी धन अर्जन कर रहे हैं और इस तरह सॉफ्ट स्किल प्रशिक्षकों को आकर्षक रोजगार का विकल्प प्रदान कर रहे हैं। 
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प्राध्यापक,दिग्विजय पीजी कालेज,
राजनांदगांव। मो.9301054300 

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देश का पहला परमवीर स्मारक मुंबई में बनाएगी महाराष्ट्र सरकार

मुंबई। राष्ट्र के सर्वोच्च वीरता सम्मान ‘परमवीर चक्र’ विजेताओं की स्मृतियों को स्थायी रखने एवं उनके शौर्य का सम्मान के उद्देश्य से महाराष्ट्र सरकार मुंबई में परमवीर स्मारक का निर्माण करेगी। वित्त मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने महाराष्ट्र भाजपा के वरिष्ठ विधायक मंगल प्रभात लोढ़ा को यह आश्वासन देते हुए कहा कि इस बारे में अगले कुछ ही दिनों में प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। देश का यह प्रथम परमवीर स्मारक होगा।

मुंबई की विभिन्न समाजसेवी संस्थाओं के एक प्रतिनिधि मंडल के साथ वित्त मंत्री सुधीर मुनगंटीवार से मिले विधायक लोढ़ा ने सरकार से मांग की कि परमवीर स्मारक के लिए गिरगांव चौपाटी स्थित बैंड स्टेंड या फिर हैंगिंग गार्डन में स्थान चिन्हित किया जाए। जहां उनकी शौर्य गाथा एवं जीवन परिचय के साथ उनकी प्रतिमा की स्थापना की जाए, जिससे आनेवाली पीढ़ियों को राष्ट्र के रक्षकों के बलिदान से प्रेरणा मिल सके।

वित्त मंत्री मुनगंटीवार ने कहा कि सरकार इस मामले को लेकर गंभीर है। उन्होंने आश्वस्त किया कि आनेवाले कुछ ही समय में परमवीर स्मारक की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। विधायक लोढ़ा को वित्त मंत्री ने विसवास दिलाते हुए कहा कि जिन योद्धाओं ने अपनी जान की परवाह न करते हुए देश के लिए अपने प्राणों की परवाह नहीं की, मुंबई का यह स्मारक उन्हें एक श्रेष्ठ श्रद्धांजलि के स्वरूप में विकसित किया जाएगा। मुंबई में बननेवाला देश का यह पहला परमवीर स्मारक होगा, जहां अब तक के सभी 21 परमवीरों के बारे में एक साथ जानकारी उपलब्ध होगी।  

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राजकमल प्रकाशन ने मनाया अपना 66वां स्थापना दिवस

इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में राजकमल प्रकाशन के 66वें स्थापना दिवस के मौके पर मराठी के वरिष्ठ साहित्यकार भालचंद्र नेमाड़े ने ‘भारतीयता और हिन्दुत्व’ विषयक व्याख्यान में कहा कि, ‘भारतीयता कभी भी एकवचनात्मक नहीं थी. भारत बहुवचन वाला सांस्कृतिक देश है। इसकी विविधता इसकी पहचान है। जब अंग्रेज आएं तो उन्होंने एकवचन वाले सांस्कृतिक धारा को आगे बढाया और आज हम भी कुछ हद तक उसी धारा में बह रहे हैं, इससे विकास नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि हमें अपनी विविधताओं के साथ ही आगे बढ़ना होगा, तभी जाकर विकास संभव है।
राजकमल प्रकाशन के स्थापना दिवस के अवसर पर उसके गौरवमयी इतिहास का उल्लेख करते हुए अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रसिध्द आलोचक नामवर सिंह ने कहा कि, ‘राजकमल ने प्रकाशन के जगत में एक इतिहास बनाया है। हमें हिन्दी को आगे बढाना है तो उसकी बोलियों को भी समृद्ध करना होगा।’ उन्होंने आशा जताई कि भविष्य में राजकमल बोलियों पर भी कुछ पुस्तक प्रकाशित करेगा।
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राजकमल प्रकाशन के चार नए उपक्रमों की घोषणा
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66वें स्थापना दिवस पर राजकमल प्रकाशन की ओर से संपादकीय निदेशक सत्यानंद निरूपम ने राजकमल की योजनाओं के विषय में विस्तार से चर्चा करते हुए सार्थक (राजकमल प्रकाशन का नया उपक्रम) के विषय में बताया। सार्थक, के अंतर्गत पाठकप्रिय गैर-अकादमीक किताबों का प्रकाशन किया जाएगा। आने वाले उपक्रमों के विषय में बताते हुए उन्होंने कहा, 'राजकमल प्रकाशन जल्द ही 'फंडा', 'चहक' और 'कोरक' नाम से तीन नए उपक्रम लेकर आने वाला है। चहक के अंदर बच्चों के लिए मनोरंजन और ज्ञानपरक सामग्री होगी। वहीं फंडा हल्की फुलकी कहानियों और लेखों से भरपूर होगा। कोरक ‘प्रिंट इन डिमांड’ पर आधारित होगा।
अपने पावर प्वाइंट प्रेसेंटेशन को पेश करते हुए संपादकीय निदेशक सत्यानंद निरूपम ने कहा कि, राजकमल प्रकाशन समूह खास व आम पाठकों से जुड़ने के लिए नए सिरे से काम कर रहा है। फिलहाल नए और पुराने का संक्रमण काल चल रहा है। राजकमल का यह पुनर्नवा काल है।
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मालचंद तिवाड़ी व रवीश कुमार हुए चौथे राजकमल प्रकाशन सृजनात्मक गद्य पुरस्कार (वर्ष 2014-15) से सम्मानित
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राजकमल प्रकाशन के 66वें स्थापना दिवस के अवसर पर राजकमल प्रकाशन सृजनात्मक गद्य सम्मान (वर्ष 2014-15) मालचन्द तिवाड़ी की कथेतर कृति ‘बोरूंदा डायरीः अप्रतिम बिज्जी का विदा-गीत’ व रवीश कुमार के लघु प्रेम कथा ‘इश्क़ में शहर होना’ को दिया गया। राजकमल प्रकाशन में यह पहला साल है जब यह सम्मान दो कृतियों को संयुक्त रूप से दिया जा रहा है। डॉ. नामवर सिंह की अध्यक्षता में गठित निर्णायक मंडल ने दो कृतियों को इस पुरस्कार के लिए चयन किया। निर्णायक मंडल के सम्मानित सदस्य थे- वरिष्ठ कथाकार विश्वनाथ त्रिपाठी एवं मैत्रेयी पुष्पा। इससे पहले यह पुरस्कार क्रमशः ‘चूड़ी बाजार में लड़की’(कृष्ण कुमार), ‘ गांधीः एक असंभव संभावना’ (सुधीर चन्द्र), ’व्योमकेश दरवेश’ (विश्वनाथ त्रिपाठी) को दिया जा चुका है। पुरस्कार स्वरूप पुरस्कृत लेखक को श्रीमती शांति कुमारी बाजपेयी की स्मृति में उनके परिवार द्वारा 1 लाख रुपये की पुरस्कार राशि और राजकमल प्रकाशन द्वारा सम्मान पत्र भेंट किया जाता है।

पुरस्कार मिलने के शुभ अवसर पर खुशी जाहिर करते हुए मालचंद तिवाड़ी ने कहा कि, ‘यह सम्मान हिन्दी की दूर दराज सृजनात्मकता का सम्मान है। मेरे लिए यह सुखद संयोग है। मैंने इस किताब की भूमिका में लिखा है कि यह अप्रतिम बिज्जी की कथा है। इसी कारण इसमें विचित्र आकर्षण बन पड़ा है। इसका श्रेय मेरे वृतांत को उतना नहीं है जितना विजयदान देथा उर्फ बिज्जी की महान सृजनात्मक प्रतिभा का है। मैं राजकमल प्रकाशन और जूरी के सम्मानीय सदस्यों के प्रति अपनी हार्दिक कृतज्ञता ज्ञापित करना अपना कर्तव्य समझता हूं।‘

इस मौके पर रवीश कुमार ने कहा कि, 'यह किसी फार्मेट की कहानी नहीं है, लेकिन यह उन लमहों की कहानी है जो सदियों की दिल्ली में रोज घटती रहती है। इस शहर में मिलने के लिए या पहुंचने के लिए बहुत मेहनत करना पड़ा है। ये कहानियां यथार्थपरक हैं।'
धन्यवाद ज्ञापन राजकमल प्रकाशन समूह के निदेशक (सेल्स) आमोद महेश्वरी ने किया। कार्यक्रम की शुरूआत में राजकमल प्रकाशन समूह के प्रबंध निदेशक अशोक महेश्वरी ने सबका औपचारिक स्वागत किया। इस अवसर पर विश्वनाथ त्रिपाठी, लीलाधर मंडलोई, सुमन केशरी, सांसद सदस्य हुसैन दलवाई सहित सैकड़ों वरिष्ठ जन उपस्थिति थे।

सादर
आशुतोष कुमार सिंह
साहित्य प्रचार अधिकारी
राजकमल प्रकाशन समूह

9891 22 8151

 

 

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कूची प्ले द्वारा ‘सेफ एंड हेल्दी आउटडोर स्पेसेस इन मॉडर्न डिजाइन’ पर कॉनक्लेव का आयोजन

नई दिल्ली – कूची प्ले सिस्टम्स प्रा. लि., आउटडोर प्लेग्राउंड सिस्टम की डिजाइन और निर्माण करने वाली एक अग्रणी कंपनी है। इसने अपनी नई क्रांतिकारी प्रोडक्ट लाइन ‘कूफीट’ पेश की है, यह एक ऐसा आउटडोर जिम उपकरण है जो दिल्ली एनसीआर निवासियों को प्रकृति के करीब रखते हुए खुद को फिट रखने में मददगार होगा। इस उपकरण का प्रदर्शन इंडिया हैबिटेट सेंटर में आयोजित ‘सेफ एंड हेल्दी आउटडोर स्पेसेस इन मॉडर्न डिजाइन’ नामक कॉनक्लेव में किया गया, जहां प्रमुख नीति निर्माता, आर्किटेक्ट, लैंड स्केप प्लानर, डॉक्टर और अग्रणी बिल्डर मौजूद थे। 

वर्ष 2014 तक, दुनियाभर में लगभग 230 करोड़ व्यस्कों का वजन सामान्य से अधिक होगा और 70 करोड़ लोग मोटापे के शिकार होंगे। यह आंकड़े विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट में सामने आए हैं जिसमें इस महामारी को ‘ग्लोबेसिटी’ का नाम दिया गया है। शीशे के आधुनिक कार्यालयों में बंद रहने वाली शहरी जीवनशैली ने स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाला है और कई बीमारियों को न्यौता दिया है। इसलिए पुराने दौर में लौटते हुए खुले माहौल में एक्सरसाइज करना अब एक महत्वपूर्ण वास्तविकता बन गई है। ऐसे में इस कंपनी का मानना है कि कूफीट स्वास्थ्य से जुड़ी इन तकलीफों का श्रेष्ठ समाधान है।  

वैज्ञानिक नीतियों के आधार पर डिजाइन किए गए खुले स्थान हर उम्र के लोगों के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होते हैं और इस अहम जरूरत को कूची प्ले के नए उत्पाद ‘कूफीट’ के रूप में समर्थन हासिल हुआ है। इस फिटनेस उपकरण का उपयोग करने वालों को महंगी जिम मेंबरशिप के बारे में नहीं सोचना पड़ेगा और ना ही उन्हें निजी जिम ट्रेनर बुलाने होंगे। शारीरिक व्यायामों से निश्चित रूप से स्वास्थ्यवर्धक जीवनशैली को बढ़ावा मिलेगा और साथ में समाज में एकजुटता के अवसर आएंगे। कूफीट जैसा उत्पाद पब्लिक पार्क, रेसिडेंशियल कॉम्पलेक्स, रिसॉर्ट, शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों, समुद्री किनारों और अन्य सार्वजनिक स्थलों के लिए पूरी तरह उपयुक्त है। 
कॉनक्लेव में उपस्थित कूची प्ले सिस्टम्स के सीएमडी श्री रॉबेन दास, इंटेग्रल डिजाइन स्टूडियो प्रा. लि. के हेड प्रोफेसर समीर माथुर, एनएमपी डिजाइन की श्रीमती नंदिता पारिख और ईएनटी सर्जन डॉ. अनिल सफाया ने शहरी इलाकों में खुले वातावरण की गतिविधियों पर जोर देते हुए इन्हें समय की जरूरत बताया। 

कूची प्ले सिस्टम्स प्रा लि. के सीएमडी श्री रॉबेन दास ने कहा कि “युवा भारतीय पीढ़ी के लिए सुरक्षित एवं स्वास्थ्यवर्धक संपूर्ण शारीरिक विकास के लिए हमें खेल मैदानों के उपकरणों की स्थापना, विकास और निर्माण में हर छोटी-बड़ी बातों का ध्यान रखना होगा। दूसरे विकसित देशों में उनके भूमि संबंधित अधिकतर संसाधन विकसित होते हैं लेकिन हमारे देश में ऐसा नहीं है। इसलिए भारतीय युवाओं के लिए हमारे सभी आउटडोर स्पोर्ट्स उपकरणों को प्रचलित करने की बेहद अहम जरूरत को मद्देनजर रखते हुए उन वर्गों की समस्या पर ध्यान देना होगा जिनके पास घरों के आसपास खुले स्थानों की कमी है।”

एक विस्तृत दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए श्री दास ने यह भी कहा कि भारत को निकट भविष्य में पार्क और मैदानों का आवंटन करने और इनकी निगरानी के लिए नियमों में सुधार करना चाहिए। यह देश के युवाओं की मूल जरूरत है जो सुरक्षित और स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद आधुनिक डिजाइन वाले खुले स्थानों की मांग करते है। 

कूफीट ने दिल्ली एनसीआर के नागरिकों की कल्पना को पूरा करते हुए एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में द्वारका के सेक्टर 10 स्थित डीडीए पार्क में कूफीट उपकरण स्थापित किये हैं और यह पार्क अब अचानक से सभी निवासियों के आकर्षण का केंद्र बन चुका है। रियल एस्टेट उद्योग से भी इस पायलट प्रोजेक्ट को उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया मिली है और नोएडा, गुड़गांव, फरीदाबाद व दिल्ली के कई आवासीय कॉम्पलेक्स में इन आधुनिक जिम्स को स्थापित करने के आग्रह मिले हैं। 

कॉनक्लेव में इन उपकरणों की पूरी श्रेणी प्रदर्शित की गई जैसे एलिप्टिकल ट्रेनर, चेस्ट प्रेस, लैट पुल डाउन, पैरेलल बार और एक्सर-साइकल जिन्हें लगभग सभी दर्शकों द्वारा खूब पसंद किया गया। 

अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें – 
शैलेश के. नेवटिया – 9716549754, 
अमूल्या नागराज – 09972875644 

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कुछ ऐसी रेलगाड़ियाँ भी चलेगी सेलीब्रिटीज़ के नाम पर!

 देश के रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभु द्वारा ब्रांड्स के नाम पर ट्रेन दौड़ाने की घोषणा के साथ सेलिब्रिटीज के नाम ट्रेनों का सोसल मीडिया पर ट्रेंड चल गया है।
मोदी एक्सप्रेस : सुरेश प्रभु ने रेल बजट में एक मोदी एक्सप्रेस नाम की ट्रेन चलाने की घोषणा की है। ट्रेन चलेगी नहीं, सिर्फ तेज हॉर्न बजाएगी।
बप्पी लाहिरी एक्सप्रेस : आपने चेन खींची तो आपको इसके पीछे एक और चेन नजर आएगी।
एकता कपूर एक्सप्रेस : एक प्लेटफार्म पर तीन बार आएगी।
आमिर खान एक्सप्रेस : साल में एक बार दौड़ेगी और यात्रियों का चुनाव भी खुद ही करेगी।
सलमान खान एक्सप्रेस : फुटपाथ पर भी चल सकती है।
मनमोहन ट्रेन : एकमात्र साइलेंट ट्रेन।
रजनीकांत एक्सप्रेस : ट्रेन खड़ी रहेगी, स्टेशन आते-जाते रहेंगे।
धौनी एक्सप्रेस : 95 प्रतिशत सफर में 10 किमी प्रति घंटे की रफ्तार, शेष 5 फीसद सफर में 400 किमी प्रतिघंटा की गति।
राहुल गांधी एक्सप्रेस : बार-बार पटरी से उतरेगी।
कांग्रेस एक्सप्रेस : हर बोगी में एक अनुभवी ड्राइवर है, लेकिन इंजन का ड्राइवर छुट्टी पर है।
केजरीवाल एक्सप्रेस : आपको चादर के बदले मफलर मिलेंगे।
अमित शाह ट्रेन : दिल्ली को छोड़कर पूरे देश को कवर करेगी।
अन्ना हजारे ट्रेन : पैंट्री कार नहीं रहेगी।

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