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भारतीय रेल को पटरी पर लाएंगे श्री सुरेश प्रभु

पेशे से चार्टर्ड एकाउंटेंट (सीए) रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने अपने पहले रेल बजट में बेहतरीन वित्तीय प्रबंधन का कौशल दिखाया है।  रेलवे के लिए नया आईटी विजन का प्रस्ताव रेल मंत्री ने रखा है। इसके लिए रेल में तकनीकी विकास के लिए नए विचारों के लिए कायाकल्प नाम से एक इनोवेशन परिषद बनाने की तैयारी है। चलती गाड़ियों में बर्थ की उपलब्धता की आनलाइन सूचना के लिए एक वेब पोर्टल शुरू किया जा रहा है। माल डिब्बों में पार्सल कहां है। इसके लिए नई तकनीक शुरू होगी। वेबसाइट पर घर बैठे इसकी जानकारी मिलेगी।
उन्होंने बजट में केंद्र सरकार के दूसरे मंत्रालयों, सरकारी उपक्रमों और राज्यों से वित्तीय सहायता हासिल का फार्मूला सुझाया है। प्रभु ने पहली बार एलआईसी व पेंशन फंड से कर्ज लेने का रास्ता तैयार किया है। रेल मंत्री के रोडमैप से रेलवे के विकास की पटरी पर सरपट दौड़ने आस जगी है। सुरेश प्रभु ने रेल बजट 2015-16 योजना बजट का आकार एक लाख करोड़ से अधिक रखा है। जो कि गत वर्ष की बजट की अपेक्षा 52 फीसदी अधिक है। रेल मंत्री केंद्र सरकार से 40,000 करोड़ रुपये बजटीय सहायता प्राप्त करने में सफल रहे है।
 
पिछले रेल बजट में रेलवे को महज 31,000 करोड़ रुपये मिले थे। प्रभु रेलवे के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए पहली बार भारतीय जीवन बीमा निगम, पेंशन फंड, वित्तीय संस्थानों से 34,791 करोड़ रुपये का कर्ज लेने की योजना बनाई है। यह कर्ज 30 सालों के लिए होगा। जबकि डीजल पर सेस के जरिए प्रभु 1645 करोड़ रुपये जुटाएंगे। पीपीपी के जरिए रेलवे के खाते में 5781 करोड़ रुपये आएंगे। इतना ही नहीं नई रेलवे लाइन बिछाने, लाइनों का अमान परिवर्तन, विद्युतीकरण, दोहरी, तिहारी और चौथी लाइनों को बिछाने के लिए राज्यों के साथ स्पेशल परपज व्हीकल (कंपनी) बनाया जाएगा। कई राज्यों ने रेल मंत्री को आश्वासन दिया है कि वह रेल परियोजनाओं के लिए भूमि व 50 फीसदी धन देने को तैयार हैं। सुरेश प्रभु ने कोयला, ऊर्जा, खनन, इस्पात, वाणिज्य मंत्रालयों को नई लाइनें बिछाने में निवेश के लिए तैयार कर लिया है।
 
प्रभु के फार्मूले के तहत उक्त मंत्रालय की ओर से किए गए निवेश को रेलवे ब्याज सहित तय समय पर वापस करेगी। इससे मंत्रालयों व रेलवे दोनों को फायदा होगा और रेलवे की आय में भारी बढ़ोत्तरी होगी। ध्यान देने की बात यह है कि रेल मंत्री रेलवे के लेखाकंन प्रणाली (एकाउंट सिस्टम) में सुधार कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर की लेखाकंन व्यवस्था लागू होने पर विश्व बैंक, एडीबी, जायका आदि से रेलवे को कर्ज मिलने का रास्ता साफ होगा। पैसे का जुगाड़ हासिल करने के बाद सुरेश प्रभु रेल संरक्षा, रेल ट्रैक की क्षमता, नई रेल लाइनें आदि परियोजनाओं पर तेजी से अमल किया जा सकेगा।  कोच-इंजन-वैगन का उत्पादन बढ़ेगा। इसके अलावा पीपीपी मोड में 50 स्टेशनों का नवीनीकरण करने की योजना है।
 

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बजट 2015: अन्य देशों से भारत की तुलना

सन् 2014 में नई सरकार के चुनाव के साथ ही, भारत के विकास पर विश्व की पैनी नज़र है। इस सरकार से बहुत अधिक अपेक्षाएँ हैं। देखा जा रहा है की अब भारत की तुलना विश्व के अन्य बड़े देशों जैसे; अमेरिका, चीन, यूरोपीय संघ, कनाडा आदि से की जा रही है। ये भी देखा जा रहा है की लोगों ने बेहतर रणनीति बनाने के लिए विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्थाओं की तुलना भारत की अर्थव्यवस्था से करना प्रारंभ कर दिया है। यहाँ कुछ ऐसे मुख्य बिंदु प्रस्तुत किए जा रहे हैं जिनका ध्यान आप इस तरह की तुलना करने के दौरान रख सकते हैं।

  • कर-निर्धारण: अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के आंकड़ों के अनुसार कर द्वारा भारत का राजस्व सकल घरेलू उत्पाद का 19.8%4 है। यह चीन जैसे अन्य विकासशील बाज़ारों से सकल घरेलू उत्पाद के औसत 27%4 से काफी कम है। विशेष रूप से कहा जाए तो, जब देश अधिक धनवान होते हैं तब कर से प्राप्त राजस्व में अत्यधिक वृद्धि होती है। अमेरिका के लिए यह 31.5%4 और ब्रिटेन में 37.6%4 है। रूस सकल घरेलू उत्पाद का 34%4 राजस्व कर से प्राप्त करता है जबकि ब्राज़ील लगभग 38%4 प्राप्त करता है। भारत अपना ध्यान अधिक से अधिक लोगों को कर के दायरे में लाने में केंद्रित कर रहा है। भारत का ध्यान वस्तु एवं सेवा कर (वसेक) या जीएसटी जैसे प्रभावी प्रक्रिया के कार्यान्वयन पर भी केंद्रित है।
  • रक्षा व्यय: रक्षा व्यय धन की वह राशि होती है जिसे सरकार एक वर्ष में अपनी सेना पर खर्च करती है। विश्व बैंक सांख्यिकी यह बताती है कि भारत ने सन् 2012-13 में सकल घरेलू उत्पाद का 2.4%1 रक्षा खर्चों के लिए आवंटित किया था। इसमें रक्षा मंत्रालय, अन्य सरकारी एजेंसियों, सभी रक्षा परियोजनाओं, और सैन्य तथा अंतरिक्ष गतिविधियों पर किए गए खर्च शामिल हैं। अध्ययनों से यह भी पता चलता है कि भारतीय प्रतिरक्षा व्यय विश्व में 9वें स्थान पर आता है। देश की रक्षा तैयारियों को बढ़ावा देने की बात ध्यान में रखते हुए, भारत ने मुख्य रक्षा परियोजनाओं पर महँगे खर्च किए हैं। अपने उन संघर्षों को ध्यान में रखते हुए अमेरिका सकल घरेलू उत्पाद का 3.8%1 प्रतिरक्षा पर खर्च करता, जिनमें वह शामिल है। चीन ने 2.1%1आवंटित किया जबकि रूस ने सैन्य खर्च के रूप में सकल घरेलू उत्पाद का 4.2%1 अलग रखा।
  • आधारभूत ढांचागत व्यय: आर्थिक विकास के लिए आधारभूत ढांचागत विकास एक मुख्य सहायक होता है। सड़क, जल और वायु मार्ग को समाविष्ट करने वाला लॉजिस्टिक आधारभूत ढाँचा रीढ़ की एक ऐसी हड्डी होता है जिसके सहारे देश आगे बढ़ता है। विश्व बैंक का एक तुलनात्मक डेटा यह बताता है कि भारत में कुल 40 लाख 60 हज़ार किलोमीटर लम्बी सड़कों का 53.8%1भाग की पक्का है। अमेरिका और चीन में यह आँकड़ा 60%1 से भी ऊपर है। यहाँ तक कि पाकिस्तान में भी 72.6%1 सड़कें पक्की हैं। 1हालाँकि, इस संख्या को बढ़ाने के लिए सरकार नीतियाँ बना रही है। इससे युवाओं में रोज़गार को भी बढ़ावा मिलेगा।
  • समाज कल्याण व्यय: भारत अधिकतर उद्योग और व्यापारों के लिए आर्थिक सहायता देने में सहज होता है। लेकिन विश्व की अन्य अर्थव्यवस्थाओं के साथ तुलना किए जाने पर यह पता चलता है कि समाज कल्याण व्यय में भारत बुरी तरह से पिछड़ा हुआ है। महा भुखमरी, बाल श्रम, अगम्य स्वास्थ्य सेवाओं पर व्यय आदि कुछ ऐसे कारक हैं जिनकी तुलना विश्व के शीर्ष देशों से किया जाना भारत नज़रअंदाज करता है। भारत सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 8%1 समाज कल्याण पर खर्च करता है। यह औद्योगीकृत देशों के औसत खर्च 14%1 की तुलना में बहुत कम है, जबकि दक्षिण आफ्रीका और ब्राज़ील दोनों भारत के खर्च का लगभग दुगुना खर्च करते हैं। विश्व बैंक के आँकड़ों के अनुसार, स्वास्थ्य सेवाओं के लिए प्रति व्यक्ति किया जाने वाला खर्च भारत के लिए केवल 61 डॉलर रहा। चीन में यह 335 डॉलर और अमेरिका तथा अन्य धनी देशों में यह 8,9001 डॉलर है।
  • वित्तीय घाटा: वित्तीय घाटा पैसे की उस कमी को कहते हैं जिसका सामना सरकार को आय के सभी साधनों को ध्यान में रखते हुए अपने सभी खर्चों के लेखांकन के बाद करना होता है। रिपोर्ट यह बताती हैं कि भारत का वित्तीय घाटा पूरे साल के बजट अनुमान को पार कर चुका है। सन् 2013 के अंत में 95.2%2 की तुलना में 2014 के अंत में वित्तीय घाटा 2014-15 के अनुमान का 100.2%2 था। हालाँकि, वर्तमान सरकार वित्तीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद के 4.1%2 तक सीमित रखने का अपना प्रयास जारी रख रही है। यह पिछल 7 सालों में सबसे निचले स्तर पर होगा। इसकी सहायता के लिए भी सरकार बहुत से कदम उठा रही है।
  • चालू खाते का घाटा : मूल रूप से समझें तो, जब किसी देश द्वारा आयात किए गए सामान और सेवाओं की मात्रा उसके द्वारा निर्यात किए गए सामान और सेवाओं से अधिक होती है तब, यह चालू खाते का घाटा कहलाता है। भारत में चालू खाते का घाटा अधिकाधिक रूप से कच्चे तेल की वैश्विक कीमत पर निर्भर होता है। मुख्य रूप से, अमेरिका द्वारा शेल गैस के भारी उत्पादन और इराक, इरान, सउदी अरब और रूस द्वारा आपूर्ति में की जाने वाली वृद्धि के कारण, विश्व में तेल की कीमतों में गिरावट देखी जा रही है। रिपोर्ट यह बताती हैं कि वित्तीय वर्ष 2015 में भारत के लिए चालू खाते का घाटा गिरकर 1.4%3 पर आ सकता है। यही रिपोर्ट यह भी बताती हैं कि आगामी तिमाही में, सात साल के बाद पहली बार भारत चालू खाते में अधिकता का स्वाद भी चख सकता है।

स्रोत — कोटक सिक्युरिटीज़
प्रेषक – प्रवीण कुमार Praveen <cs.praveenjain@gmail.com>

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जमीन छीन लीजिए पर संवाद तो कीजिए

भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने आते ही जिस तरह भूमि अधिग्रहण को लेकर एक अध्यादेश प्रस्तुत कर स्वयं को विवादों में डाल दिया है, वह बात चौंकाने वाली है। यहां तक कि भाजपा और संघ परिवार के तमाम संगठन भी इस बात को समझ पाने में असफल हैं कि जिस कानून को लम्बी चर्चा और विवादों के बाद सबकी सहमति से 2013 में पास किया गया, उस पर बिना किसी संवाद के एक नया अध्यादेश और फिर कानून लाने की जरूरत क्या थी? इस पूरे प्रसंग में साफ दिखता है कि केन्द्र सरकार के अलावा कोई भी पक्ष इस विधेयक के साथ नहीं है। हिन्दुस्तान के विकास के सपनों के साथ सत्ता में आई भारतीय जनता पार्टी की सरकार से इतनी तो उम्मीद की ही जाती है कि वह बहुमत के अंहकार के बजाय जनमत के सम्मान का रास्ता अख्तियार करे। प्रधानमंत्री और उनके मंत्री इस मामले में एक रणनीतिक चूक का शिकार हुए हैं। जिसके चलते पूरे देश में भ्रम, निराशा और आक्रोश का वातावरण बन गया है। शायद सरकार के आकलन में कुछ भूल थी जिसके चलते किसी स्तर पर भी संवाद किए बिना इस बने-बनाए कानून से छेड़खानी की गई।

खाली जमीनों का कीजिए उपयोगः
    केंद्र सरकार इस विषय में संवादहीनता के आरोप से नहीं बच सकती, भले ही वह सत्ता की ताकत और अपने मैनेजरों के कुशल प्रबंधन से विधेयक को पास भी करा ले जाए। जाहिर तौर पर इस विधेयक का विरोध करने वाले लोग विकास विरोधी ही कहे जाएंगे और सरकार उन्हें विकास के रास्ते में रोड़े अटकाने वाले पत्थरों के रूप में ही आरोपित करना चाहेगी। लेकिन जहां छह करोड़ परिवारों के पास आज भी इंच भर जमीन नहीं है, वहां ऐसी बातें चिंता में डालती हैं। हमें ध्यान रखना चाहिए कि इस देश में लड़ा गया सबसे बड़ा युद्ध महाभारत, दुर्योधन के द्वारा पांडवों को पांच गांव भी न देने की महाजिद के चलते शुरू हुआ था। दुर्योधन अपनी सत्ता की अकड़ में श्री कृष्ण से कहता है कि “हे केशव मैं युद्ध के बिना सूर्ई की नोंक के बराबर भी जमीन नहीं दूंगा। ” भारत की सरकार 1894 के अंग्रेजों के काले कानून को 2013 में बदल पाई और अब फिर वह इतिहास को पीछे ले जाने की तैयारी है। देश में आज भी तमाम उद्योगों के नाम पर आरक्षित 50 हजार एकड़ भूमि खाली पड़ी है। कुल कृषि योग्य भूमि का 20 प्रतिशत बंजर पड़ी है। इन जमीनों के बजाय नई सरकार बहुउपयोगी और सिंचित भूमि का अधिग्रहण करने को लालायित है। यहां यह सवाल भी उठता है कि क्या किसानों के हित और देश के हित अलग-अलग हैं? यह सच्चाई सबको पता है कि किस तरह सार्वजनिक कामों के लिए जमीनों का अधिग्रहण कर उनका लैंड यूज चेंज किया जाता है। 2010-11 में जो सवाल उठे थे, वे आज भी जिंदा हैं। सिंगूर, नंदीग्राम और भट्टापारसाल से लेकर मथुरा तक ये कहानियां बिखरी पड़ी हैं। सरकार ने हालात न सम्भाले तो टप्पल किसान आंदोलन जैसी स्थितियां दोबारा लौट सकती हैं।

इतनी हड़बड़ी में क्यों है सरकारः
            वर्ष 2013 में बने भूमि अधिग्रहण कानून के समय श्रीमती सुषमा स्वराज, श्री विनय कटियार और रविशंकर प्रसाद ने संसद में जो कुछ कहा था, वे भाषण फिर से सुने जाने चाहिए और भाजपा से पूछा जाना चाहिए कि उनके सत्ता में रहने के और विपक्ष में रहने के आचरण में इतना द्वंद्व क्यों है? जिस कानून को बने साल भर नहीं बीता उस पर अध्यादेश और उसके बाद एक नया कानून लाने की तैयारी सरकार की विश्वसनीयता और हड़बड़ी पर सवाल खड़े करती है। एक साल के भीतर ही नया कानून लाने की जरूरत पर सवाल उठ रहे हैं। सरकार के प्रबंधकों को इस व्यापक विरोध की आशंका जरूर रही होगी। बावजूद इसके किसानों को साथ लेने की कोशिश क्यों नहीं की गई? यह एक बड़ा सवाल है। सरकार का कहना है कि उसने कई गैर-भाजपा राज्यों के सुझावों पर बदलाव करते हुए यह अध्यादेश जारी किया है। सवाल यह उठता है कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार अपने विरोधी राजनीतिक दलों के मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों की सलाह पर इतनी मेहरबान क्यों है कि उसे अपनी छवि की भी चिंता नहीं है। दिल्ली का चुनाव इन्हीं अफवाहों और भ्रमों के बीच हारने के बावजूद बीजेपी खुद को कॉरपोरेट और उद्योगपतियों के समर्थक तथा किसानों और आम आदमियों के विरोधी के रूप में स्थापित क्यों करना चाहती है?  यह आश्चर्य ही है कि लोगों को भरोसे में लिए बिना कोई राजनीतिक दल अपनी छवि को भी दांव पर लगाकर विकास की राजनीति करना चाहे। ऐसे विकास के मायने क्या हैं, जिसका लोकमत विरोधी हो? जिन कांग्रेसी और अन्य दलों के मित्रों के सुझाव पर भाजपा सरकार यह अध्यादेश लाई है, वे सड़क पर सरकार के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं।

भूमि अधिग्रहण तो ठीक भूमि-वितरण पर भी सोचिएः
   किसी भी भूमि अधिग्रहण के पहले, जिस सार्वजनिक सर्वेक्षण की वकालत पुराना कानून करता है, उसे हटाना भी खतरनाक है। इस कानून की स्टैंडिंग कमेटी की चेयरमैन रहीं श्रीमती सुमित्रा महाजन आज लोकसभा की अध्यक्ष हैं। जाहिर तौर पर 2013 में बने कानून के प्रभावों का साल-दो साल अध्ययन करने के बाद सरकार किसी नये कानून की तरफ लोगों से व्यापक विमर्श के बाद आगे बढ़ती तो कितना अच्छा होता। इस देश में भूमि अधिग्रहण की घटनाएं अनेक बार हुई हैं, विकास के नाम पर लगभग छह करोड़ लोगों का विस्थापन आजादी के बाद हुआ है। लेकिन, आप देखें तो केवल 17 प्रतिशत लोगों का हमारी सरकारें पुनर्वास कर सकी हैं। भाखड़ा नांगल बांध से लेकर नर्मदा के विस्थापित आज भी अपने बुनियादी अधिकारों के लिए मोहताज हैं। आजादी के बाद ऐसी स्थितियां हमें बताती हैं कि आज भी आखिरी आदमी सत्ताधीशों की चिंताओं से बहुत दूर है। देश में भूमिहीनों की एक बड़ी संख्या के बाद भी भूमि सुधार की दिशा में सरकारों ने बहुत कम काम किया है। सरकारें भूमि अधिग्रहण पर बातें करती हैं लेकिन भूमिहीनों को भूमि वितरण के सवाल पर खामोशी ओढ़ लेती हैं। जनहित क्या सिर्फ अमीरों को जमीन देना है या गरीबों को जमीनों से महरूम रखना?  संसद में एक समय श्री विनय कटियार और श्री रविशंकर प्रसाद ने कहा था कि 70 या 80 नहीं बल्कि 100 प्रतिशत किसानों की सहमति होने पर ही भूमि का अधिग्रहण किया जाना चाहिए। क्या राजनीति सत्ता में होने की अलग है और विपक्ष में होने की अलग?

क्या सरकारें ही देशहित में सोचती हैः
 किसानों की आत्महत्याओं की निरंतर खबरों के बीच सरकार बता रही है कि कब, किसकी सरकार के समय कितने अध्यादेश आए थे। आखिर इस तरह के कुतर्कों का मतलब क्या है?  आप हजार अध्यादेश लाएं वह एक संवैधानिक व्यवस्था है, किंतु क्या ये अध्यादेश बहुत जरूरी था, क्या इसके पक्ष में जनमत है? इन प्रश्नों का विचार जरूर करना चाहिए। या फिर जनमत बनाने की ओर बढ़ना चाहिए। केंद्र के एक माननीय मंत्री कहते हैं कि “हमारा बहुमत है, हम कानून पास करेंगे।” सत्ता की ऐसी भाषा न तो लोकतांत्रिक है, न ही स्वीकार्य। इसी तरह की देहभाषा और वाचालता जब यूपीए के मंत्री दिखाते थे, तो देश ने उसे दर्ज किया और समय पर प्रतिक्रिया भी की। हमारे वर्तमान राष्ट्रपति स्वयं ही एक अनुभवी राजनेता हैं। वे केंद्र की बहुमत प्राप्त सरकार को यह आगाह कर चुके हैं कि वह अध्यादेशों से बचे और लोगों की सहमति से कानून बनाए। बेहतर होगा कि सरकार इस पूरे मामले पर लोगों से सुझाव मांगे क्योंकि इस सरकार ने वोट अच्छे दिनों के लिए मांगे थे। अगर सरकार के किसी कदम से समाज के किसी वर्ग में यह आशंकाएं भी पैदा हो रही हैं कि वह उनके खिलाफ कानून बना रही है तो प्रधानमंत्री की यह जिम्मेदारी है कि वे अपने ‘मन की बात’ लोगों से सीधे करें, न कि संसद के फ्लोर मैनेजर के भरोसे देश को छोड़ दें। यह कैसे माना जा सकता है कि सरकारें ही राष्ट्रहित में सोचती हैं? अगर ऐसा होता तो सरकारों के खिलाफ इतने बड़े-बड़े आंदोलन न खड़े होते और सरकारें न बदलतीं।

   आज देश में लगभग 350 जगहों पर भूमि को लेकर टकराव दिख रहे हैं। एक जमाने में भाजपा ने खुद स्पेशल एकॉनोमिक जोन का विरोध किया था। सेज के नाम पर लगभग सात राज्यों में 38 हजार 245 हेक्टेयर जमीन सरकार ने किसानों से ली, उनमें से ज्यादातर खाली पड़ी हैं। पुनर्वास और उजड़ते किसानों की चिंताओं के बावजूद सरकारें एक सरीखा चरित्र अख्तियार कर चुकी हैं। जिनमें अच्छे दिनों की उम्मीदें दम तोड़ रही हैं। 1947 में जहां 20 करोड़ लोग खेती पर निर्भर थे, वहीं आज 70 करोड़ लोग खेती पर निर्भर हैं। ऐसे में अगर शरद यादव राज्यसभा में यह कहते हैं कि “खेती से बड़ा कोई उद्योग नहीं है” तो हमें इस बात पर विवाद नहीं करना चाहिए। बेहतर होगा कि हमारे लोकप्रिय प्रधानमंत्री स्वयं आगे आकर देश के किसानों और आमजन की शंकाओं का समाधान करें। देश उनके मुंह से सुनना चाहता है कि आखिर यह कानून कैसे लोगों का उद्वार करेगा? वे कहेंगे तो लोग जमीनें छोड़ सकते हैं, लेकिन शर्त है कि सरकार संवाद तो करे।
(लेखक राजनीतिक विश्लेषक हैं)
 
-संजय द्विवेदी, 
अध्यक्षः जनसंचार विभाग,
 माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, 
प्रेस काम्पलेक्स, एमपी नगर, भोपाल-462011 (मप्र)
मोबाइलः 09893598888

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सविष्कार (आईफास्ट-2015) आज से, भोपाल में जुटेंगे देशभर के वैज्ञानिक, टेक्नोक्रेट और शोधार्थी

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान करेंगे तीन दिवसीय आयोजन का उद्घाटन

भोपाल। मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, विद्यार्थी कल्याण न्यास और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के संयुक्त तत्वावधान में मौलाना आजाद नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (मैनिट) में 26 से 28 फरवरी तक सविष्कार (आईफास्ट-2015) का आयोजन किया जा रहा है। सविष्कार का उद्घाटन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान करेंगे। उद्घाटन समारोह का आयोजन 26 फरवरी को दोपहर 3:30 बजे मैनिट के विक्रम साराभाई हॉल किया जाएगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता विज्ञान और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री भूपेन्द्र सिंह करेंगे। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री उमाशंकर गुप्ता, छत्तीसगढ़ के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री प्रेम प्रकाश पाण्डेय, फेडरेशन ऑफ मध्यप्रदेश चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्री के अध्यक्ष रमेशचन्द्र अग्रवाल, मैनिट की अध्यक्ष डॉ. गीता बाली और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री श्रीहरि बोरिकर भी मौजूद रहेंगे। 

            अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय मंत्री आशीष चौहान ने बताया कि स्वदेशी प्रौद्योगिकी और वैज्ञानिक प्रवृत्तियों को बढ़ावा देने के लिए हो रहे सविष्कार में देशभर से वैज्ञानिक, औद्योगिक संस्थानों के प्रतिनिधि, युवा वैज्ञानिक और सरकार संस्थाएं भाग ले रही हैं। तीन दिन चलने वाले इस आयोजन में विभिन्न विषयों पर 15 सत्रों में 200 से अधिक रिसर्च पेपर प्रस्तुत किए जाएंगे। इसके साथ ही युवा वैज्ञानिक 11 थीम पर करीब 300 प्रोजेक्ट का प्रदर्शन करेंगे। प्रत्येक थीम में तीन श्रेष्ठ प्रोजेक्ट को औद्योगिक संस्थान पुरस्कार भी देंगे। वैज्ञानिक संस्थान इसरो और डीआरडीओ सहित मध्यप्रदेश का पर्यटन, कृषि और ऊर्जा विभाग भी अपनी उपलब्धियों के संबंध में प्रदर्शनी लगाएंगे। इस आयोजन में छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद भी सहभागी है।

            सविष्कार में ये रहेंगे शामिल : सविष्कार में भोपाल, गोवा, रायपुर, पटना, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर और अगरतला सहित देश के अन्य एनआईटी अपने प्रोजेक्ट और तकनीकी पेपर प्रस्तुत करेंगे। तीन दिवसीय इस आयोजन में नवाचार एवं गैर-परंपरागत ऊर्जा स्रोत, समकालीन/परंपरागत भारतीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का पुनरावलोकन, मैकेनिकल इंजीनियरिंग में नए रुझान, इलेक्ट्रीकल्स, इलेक्ट्रोनिकी, पर्यावरण, पर्यटन, वास्तुकला, कृषि और रसायन विज्ञान से संबंधित विषयों पर विशेषज्ञ अपने व्याख्यान प्रस्तुत करेंगे। इस दौरान विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का भी समाधान किया जाएगा। विशेषज्ञ के तौर पर एसटीपीआई के महानिदेशक डॉ. ओमकार राय, एनपीएल नईदिल्ली के वैज्ञानिक डॉ. आलोक मुखर्जी, मप्र पर्यटन के प्रबंध निदेशक अश्विनी लोहानी, ग्लोबल आईएनसी बैंगलूरू के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुहास गोपीनाथ, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय की प्रो. कुसुमलता केडिया, टेकपीडिया अहमदाबाद के सीईओ हिरण्यमय महंता, सैफिया टेक्नोलॉजी भोपाल के प्रबंध निदेशक धनंजय पाण्डेय, इंडियन रेवेन्यू सर्विस के डायरेक्टर सुश्री संगीता गोडबोले, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय भोपाल के कुलपति प्रो. बीके कुठियाला, भारतीय शिक्षण मण्डल नागपुर के अखिल भारतीय सह संगठन मंत्री मुकुल कानिटकर और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ विश्व विभाग के रवि अय्यर सहित अन्य विद्वान अपने विचार व्यक्त करेंगे।

            प्रदर्शनी में दिखेंगे नवाचार : देश का सर्वोच्च वैज्ञानिक संस्थान इसरो और डीआरडीओ भी अपने नए आविष्कार एवं उपलब्धियों की प्रदर्शनी सविष्कार में लगाएंगे। बीईई, एसटीपीआई सहित मध्यप्रदेश के पर्यटन, कृषि, आईटी और ऊर्जा विभाग भी अपनी उपलब्धियों की प्रदर्शनी लगाएंगे। इसके साथ ही देशभर से आ रहे विज्ञान और तकनीक के विद्यार्थी अपने प्रोजेक्ट को प्रदर्शित करेंगे।
 

 
                                                                                                            मीडिया समन्वयक
                                                                                                                 रितेश बिरथरे
                                                                                                     (मोबाइल : 9584491526)

संपर्क
लोकेन्द्र सिंह 
Contact :
Department Of Mass Communication
Makhanlal Chaturvedi National University Of 
Journalism And Communication
B-38, Press Complex, Zone-1, M.P. Nagar,
Bhopal-462011 (M.P.)
Mobile : 09893072930
www.apnapanchoo.blogspot.in

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हे रेलवे के नीति – नियंताओं​! हमें मंजिल पर समय से पहुंचने वाली ट्रेनें ही दे दीजिए …!​!

चाचा , यह एलपी कितने बजे तक आएगी। 
पता नहीं बेटा, आने का राइट टेम तो 10 बजे का  है, लेकिन आए तब ना…। 
शादी – ब्याह के मौसम में बसों की कमी के चलते  अपने पैतृक गांव से शहर जाने के लिए मैने ट्रेन का विकल्प चुना तो स्टेशन मास्टर की यह दो टुक सुन कर मुझे गहरा झटका लगा।

दरअसल साल – दर साल रेलवे को पटरी पर लाने के तमाम दावों के बावजूद देश के आम रेल यात्री की कुछ एेसी ही हालत है। 

 नई सरकार में पदभार संभालने वाला हर मंत्री यही कहता है कि ट्रेनों को समय पर चलाना उनकी प्राथमिकता है। लेकिन वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत है। पैसेंजर ट्रेनों का तो आलम यह कि इनके न छूटने का कोई समय है न पहुंचने का।  हर साल रेल बजट से पहले चैनलों पर राजनेताओं व विशेषज्ञों को बहस करते देखता हूं। … रेलवे की हालत अच्छी नहीं है। आधारभूत ढांचा मजबूत करने की जरूरत है… आप जानते हैं रेलवे यातायात का सबसे सस्ता माध्यम है…।  … आपको पता है रेलवे की एक रुपए की कमाई का इतना फीसद खर्च हो जाता है…।  लेकिन इसके लिए आप फंड कहां से लाइएगा… वगैरह – वगैरह। 
फिर बजट पेश होता है। इतनी नई ट्रेनें चली, इतने के फेरे बढ़े। संसद में कुछ सत्तापक्ष के माननीय बजट को संतुलित बताते हैं तो विरोधी खेमे के क्षेत्र विशेष की उपेक्षा का आरोप लगाते हैं। शोर – शराबे के बीच बजट पारित। फिर कुछ दिनों तक  बजट में उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कुछ खास क्षेत्रों में रेलवे ट्रैक पर प्रदर्शन और धीर – धीरे सब कुछ सामान्य हो जाता है। 

अब तक देखने में यही आया है कि जैसा रेलमंत्री का मिजाज वैसा निर्णय। 
 कई साल पहले एक इंजीनियर साहब रेल मंत्री बने, तो उन्होंने एेलान किया कि ट्रेनों में एेसा डिवाइस लगा देंगे कि टक्कर हो भी गई तो कैजुअलटी ज्यादा नहीं होगी। लेकिन अब तक सरकार इस पर विचार ही कर रही है। 
एक संवेदनशील कला प्रेमी नेत्री ने रेलमंत्रालय का कमान संभाला तो उन्होंने एेलान कर दिया कि  ट्रेनों में आपको संगीत सुनाएंगे। लेकिन मामला अब भी जहां का तहां…। 

एक ठेठ देहाती किस्म के जमीन से जुड़े राजनेता को रेल मंत्री का पद मिला तो उन्होंने घोषणा कर दी कि ट्रेनों में प्लास्टिक के लिए कोई जगह नहीं , अब सब कुछ कुल्लहड़ में मिलेगा। अरसे से कुम्हारों के मुर्झाए चेहरे कुछ दिनों के लिए खिले जरूर , लेकिन जल्द ही हालत फिर बेताल डाल पर वाली…। 
मुंबई के 26-11 हमले के बाद तय हुआ कि सभी स्टेशनों को किले में तब्दील कर देंगे। स्टेशनों पर सीसीटीवी कैमरे लगेंगे और जवानों को अत्याधुनिक हथियार भी दिए जाएंगे। लेकिन कुछ समय बाद ही स्टेशनों का फिर वही चिर-परिचित चेहरा। ज्यादातर अत्याधुनिक मशीनें खराब। जबकि कुर्सियों पर बैठे जवान या तो ऊंघते हुए नजर आते हैं या फिर आपस में हंसी – मजाक करते हुए। 

हाल में एेलान हुआ कि अब टिकट के लिए यात्रियों को मगजमारी नहीं करनी पड़ेगी। स्टेशनों पर टिकट वेंडिंग मशीनें लगेंगी। मशीन के सामने खड़े होइए और जहां की चाहिए , टिकट लेकर चलते बनिए। 

लेकिन कुछ दिनों बाद ही मशीनें पता नहीं कहां चली गई  और टिकट काउंटरों पर वहीं धक्का –  मुक्की और दांतपिसाई की मजबूरी। 
कितनी बार सुना कि अब आरक्षण के मामले में अब दलालों की खैर नहीं। लेकिन महानगरों की तो  छोड़िए गांव – कस्बों तक में रेल टिकट दलालों के दफ्तर हाइटेक होते जा रहे हैं। 

न जाने कितनी बार सुना कि ट्रेनों की आरक्षण प्रणाली पारदर्शी होगी। एक सीमा से अधिक वेटिंग लिस्ट हुए तो अतिरिक्त कोच लगा कर सब को एडजस्ट किया जाएगा।  लेकिन खास परिस्थितयों में देखा जाता है कि नंबर एक की वेटिंग लिस्ट भी अंत तक कन्फर्म नहीं हो पाती। 
बीच – बीच में सुनते रहे कि अब रेल व यात्री सुरक्षा की पूर्ण जिम्मेदारी आरपीएफ या जीअारपी में किसी एक दो दी जाएगी। लेकिन महकमे में अब भी दोनों के जवान पूर्ववत नजर आते हैं।

इसलिए हे रेलवे  के नीति – नियंताओं…। हमें नहीं चाहिए हाइ स्पीड बुलेट ट्रेनें। हमारी रेल जैसी है वैसी ही ठीक है। हमें बस , इंसानों की तरह अपनी मंजिल तक समय पर पहुंचने लायक ट्रेनें ही दे दीजिए। 
Image result for tragedy of indian railways passengers
tarkeshkumarojha.blogspot.com से साभार
तारकेश कुमार ओझा, भगवानपुर, जनता विद्यालय के पास वार्ड नंबरः09 (नया) खड़गपुर ( पश्चिम बंगाल) पिन ः721301 जिला पश्चिमम मेदिनीपुर संपर्कः 09434453934 

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उपभोक्ता को है नुकसान की भरपाई का अधिकार – डॉ.जैन

सही दाम,सही काम और सही सेवा का संकल्प लें 

राजनांदगांव। "उपभोक्ता अधिकारों का संरक्षण समय की बड़ी मांग है। आज उन्मुक्त व्यापार प्रणाली के दौर में उपभोक्ता कदम-कदम पर ठगा जा रहा है।कुछ स्वार्थी व्यवसायी,समय की बदलती धड़कनों के साथ उपभोक्ताओं की जेब काटने के रास्ते निकाल लेते हैं। वे खुलकर ऐलान कर देते हैं कि फैशन के दौर में गारंटी की उम्मीद न करें। इसके प्रति उपभोक्ताओं को जगाने के लिए उपभोक्ता शिक्षा और सतत जागरूकता अभियान चलाया जाना होगा।" 

आरटीआई केस स्टडी पेनल के रिसोर्स पर्सन,प्रोफ़ेसर डॉ.चन्द्रकुमार जैन ने उक्त विचार उपभोक्ता जागरूकता मंच द्वारा रायगढ़ में आयोजित संगोष्ठी में व्यक्त किये। इस संगोष्ठी में डॉ.जैन ने मुख्य अतिथि वक्ता के रूप में प्रभावी सहभागिता की। डॉ.जैन ने कहा कि किसी भी वस्तु या सेवा के खरीददार को उपभोक्ता कहते हैं और संरक्षण का अर्थ है उपभोक्ता अधिकारों का संरक्षण। उपभोक्ता संरक्षण का मामला शुरूआती दौर में यूरोप में उठा था किन्तु अब वैश्वीकरण के प्रभाव से इसकी ज़रुरत भी विश्व्यापी हो गई है। यूरोपीय देशो में नागरिकों के त्रस्त और शोषित वर्ग को जैसी सुरक्षा प्राप्त है वैसी सुरक्षा की आवश्यकता भारत जैसे देशों में कहीं ज्यादा है। 

डॉ.जैन ने कहा कि उपभोक्ताओं को समझना चाहिए कि उन्हें अपनी बात कहने, अपनी पसंद की वस्तु या सेवा चुनने, कीमत जानने, गुणवत्ता औए गारंटी या वारंटी की जानकारी हासिल करने, किसी सक्षम अधिकारी के सामने शिकायत दर्ज़ कराने और वस्तु या सेवा में किसी कमी या नुकसान की भरपाई का हक़ है। लेकिन,डॉ.जैन ने कहा कि अफ़सोस इस बात का है कि हमारे यहाँ उपभोक्ता इन अधिकारों के प्रति अक्सर उदासीन दीखते हैं। इस प्रवृत्ति पर लगाम जरूरी है।  वहीं उत्पादकों और विक्रेताओं को भी सही दाम और सही काम की नीति पर चलना होगा अन्यथा उपभोक्ताओं के बहाने वे राष्ट्र की नींव कमजोर करते रहेंगे। 

डॉ.जैन ने कहा कि शासकीय स्तर पर उपभोक्ता संरक्षण के लिए कई कारगर कदम उठाये जा रहे हैं.उपभोक्ता संरक्षण सेल से लेकर उपभोक्ता फोरम तक कई ऐसे ठिकाने हैं जहां जाकर उपभोक्ता अपनी शिकायतें और समस्याएं रख सकता है.इन सुविधाओं का लाभ उठाना स्वयं उपभोक्ता की जिम्मेदारी है.वहीं,संरक्षण के लिए बनांये गए कानूनों को अमल में लाने के लिए सुविधा दाता तंत्र को भी सक्रिय हस्तक्षेप के लिए ज्यादा चुस्त होना पड़ेगा।

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सूचना आयोग में अर्थदंड की कार्यवाहियां

माननीय श्री बसंत सेठ  ,
सूचना आयुक्त,  
केन्द्रीय सूचना आयोग,
नई दिल्ली
 
मान्यवर,

आपको ज्ञात  ही  है कि  आयोग की  स्थापना नागरिकों के सूचना के अधिकार की  रक्षा के लिए की गयी है और आयोग की  कार्यवाहियां कोई विस्तृत न्यायिक परीक्षण  न होकर  संक्षिप्त प्रकृति की हैं जिनमें  नागरिकों को सूचना प्रदान करने और कानून का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों पर अर्थदंड  लगाने सम्बंधित विषयों का निस्तारण किया जाता है |  माननीय कलकत्ता उच्च  न्यायालय ने एक मामले में दिनांक  7 जुलाई 2010  को धारित किया है  कि  सूचना के अधिकार के अंतर्गत द्वितीय अपील पर निर्णय 45 दिन में दिया जाना चाहिए |

आयोग एक  ट्रिब्यूनल है और ट्रिब्यूनल  का गठन जनता को त्वरित और सस्ता न्याय  दिए जाने हेतु किया जाता है किन्तु दुखद है कि आयोग में कार्यवाहियां असाधारण और अनावश्यक  रूप से लम्बे समय तक चलती हैं तथा  अर्थदंड के प्रकरणों में अलग से नोटिस जारी किया जता है और अत्यधिक लंबा समय लगता है जिससे नागरिकों में हताशा और अविश्वास  पनपता है तथा जनता  के बहुमूल्य  समय और धन का अपव्यय होता है  

कानून की  अनुपालना सुनिश्चित करने के लिए भयावह दंड नहीं बल्कि तुरंत दिया जानेवाला दंड अधिक प्रभावशाली होता है | राजस्थान सूचना आयोग  में, जहां अधिनियम का उल्लंघन हुआ हो सूचना प्रदानगी और अर्थदंड के विषय दोनों को एक ही सुनवाई( नोटिस  प्रति संलग्न ) में निपटाया जाता है जबकि केन्द्रीय सूचना आयोग में अर्थदंड के विषय को अनुचित रूप से लंबा खेंचा जा रहा है  | अत: आयोग को शीघ्र ही इस अस्वस्थ और जन विरोधी परिपाटी का त्याग कर एक ही सुनवाई में मामले को निपटाया जाना चाहिए  तथा  जहां अधिनियम का उल्लंघन हुआ हो वहां  प्रथम नोटिस में ही अर्थदंड लगाए जाने के विषय पर विपक्षी से स्पष्टीकरण मांग लेना चाहिए |

आशा है आप इस प्रार्थना पर मानवीय निर्णय लेंगे  |
सादर,
मनीराम शर्मा                                       
नकुल निवास , रोडवेज डिपो के पीछे
सरदारशहर -331403
जिला चुरू ( राज)       

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श्री प्रभु के रेल बजट में हवाई आश्वासन नहीं, मगर ठोस योजनाएँ

रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने लोक सभा में गुरुवार को रेल बजट 2015-16 पेश करते हुए यात्रियों की परेशानी में कुछ अंकुश लगाने की कोशिश जरूर की है। इसके तहत दलालों को रोकने के लिए चार महीने पहले रिजर्वेशन की सुविधा मुहैया कराई जाएगी। सुरक्षा के लिए 182 टोल फ्री नंबर का प्रावधान। कुछ सवारी गाड़ियों में 24 पैसेंजर कोच की जगह 26 सवारी कोच जोड़े जाएंगे।

पांच मिनट में अनारक्षित टिकट

एक नया मिशन ऑपरेशन 5 मिनट शुरू किया जाएगा, जिसमें अनारक्षित टिकट खरीदने के लिए पांच मिनट से ज्यादा वक्‍त नहीं लगेगा। 138 यात्रियों की समस्या का हेल्पलाइन नंबर, उत्तर रेलवे में पहली मार्चे से हेल्पलाइन शुरू हो जाएगी सेवा। कई भाषाओं में ई-टिकट पोर्टल की शुरुआत होगी। स्मार्टफोन पर अनारक्षित टिकट जारी करने का प्रावधान किया जाएगा। डेबिट कार्ड से चलने वाली मशीनें, ऑटोमेटिक टिकट मशीनों के प्रावधान को और आगे बढ़ाया जाएगा।

अक्षम यात्रियों के लिए होगा ऐसा

नेत्रहीन मुसाफिरों के लिए भविष्य में बनने वाले सवारी डिब्बों में ब्रेल लिपि की सुविधा होगी। ऊपरी बर्थ पर चढ़ने के लिए सुविधाजनक डिजाइन बनाया जा रहा है। वरिष्ठों के लिए नीचे की बर्थ हो, ऐसा प्रयास किया जा रहा है। शारीरिक रूप से अक्षम यात्रियों के लिए व्‍हील चेयर की सुविधा भी होगी।

 

रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने आज लोकसभा में पेश 2015-16 के रेल बजट में ट्रेनों की गति बढ़ाने के साथ ही यात्री सुविधा और सुरक्षा पर भी जोर दिया।

मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड बुलेट ट्रेन पर व्यवहार्यता अध्ययन रिपोर्ट साल के मध्य में आएगी। रेलों की गति बढ़ाने पर ध्यान दिया जाएगा। मालगाड़ियों की स्पीड भी बढ़ाई जाएगी। 9 रेल गलियारों में गति सीमा 130 किलोमीटर प्रति घंटे से बढ़ाकर 200 किलोमीटर करने का प्रस्ताव किया गया है।

स्टेशनों पर 180 करोड़ रु. की लागत से लिफ्ट और एस्केलेटर लगाए जाएंगे। ऊपरी बर्थ पर चढ़ने के लिए बेहतर सुविधाएं बनाई जाएंगी। उन्होंने कहा, गाड़ी सुरक्षा चेतावनी प्रणाली को बेहतर बनाया जाएगा। आधुनिक रेल संरचना का भी प्रावधान है।

6581 करोड़ की लागत से रेल ओवर और अंडर ब्रिज बना कर बिना गार्ड के रेलवे क्रॉसिंग को बेहतर बनाया जाएगा। बिना फाटक के रेलवे ट्रैक पर ऑडियो सुविधाओं से सूचनाएं दी जाएंगी। अगले पांच साल के लिए योजना इस जून में बनेगी और हर तरह की दुर्घटना से बचने का ब्यौरा देंगे। बिना गार्ड के रेल फाटक, आग, एक्सिडेेंट आदि दुर्घटनाओं से बचने के लिए एक्शन प्लान बनाया जा रहा है।

अब चार माह पहले आरक्षण

रेलमंत्री ने ऐलान किया कि 2 माह की जगह 4 माह पहले होगा सीट आरक्षण। किसानों को लाभ देने के लिए कार्गो सेंटर बनाए जाएंगे। माल ढ़ुलाई की क्षमता बढ़ाने के लिए एक प्रयास किए जाएंगे। रेलवे में ऊर्जा के खर्च को विद्युतीकरण पर फोकस करेंगे ताकि डीजल का खर्च कम हो। 6608 किमी मार्ग का विद्युतीकरण किया जाएगा।

400 स्‍टेशनों पर वाई-फाई

अरुणाचल और मेघालय से दिल्ली को जोड़ा गया है अन्य पूर्वोत्तर राज्यों को भी जोड़ेंगे। यातायात सुविधाओं के लिए निर्माण सुविधाओं पर ध्यान देंगे। 400 स्‍टेशनों पर वाई-फाई की सुविधा मुहैया कराई जाएगी। 96182 करोड़ जुटाने के लिए कई स्रोतों से बात चल रही है। दोहरीकरण जल्द से जल्द करने के लिए 8886 करोड़ रुपए के व्यय का प्रस्ताव। ज्यादा ट्रैफिक वाले नेटवर्क पर क्षमता बढ़ाई जाएगी। सैटेलाइट रेलवे टर्मिनल बनाए जाएंगे।

तकनीक का इस्तेमाल
सुरेश प्रभु ने कहा, माल डिब्बों में रेडियो फ्रिक्वेंसी वाले आईडी टैग लगेंगे ताकि उन्हें ट्रैक किया जा सके। नए बनने वाले डिब्बों में ब्रेल लिपि से सूचनाएं दिए जाने की व्यवस्था की जाएगी। IIT-BHU में मालवीय जी के नाम से रेल तकनीक पर रिसर्च केंद्र बनाया जाएगा चुनिंदा विश्वविद्यालयों में चार रेलवे अनुसंधान केंद्र खोलने का प्रस्ताव। बिजनेस इंजीनियरिंग और नवाचार के लिए कायाकल्प योजना लागू की जाएगी।

यूं बढ़ेगा रोजगार

मेक इन इंडिया के तहत देश में इंजन, पहिये, डिब्बे बनाने पर जोर दिया जाएगा। इससे विदेशी मुद्रा की बचत के साथ ही रोजगार के नए अवसर बनेंगे। पेरिशेबल यानी खराब होने की आशंका वाली सब्जियों को बचाने के लिए दिल्ली आजादपुर में कार्गो सेंटर बनेगा। प्राइवेट फ्रेट टर्मिनलों में निजी निवेश का प्रस्ताव किया गया है।

 
 
रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने गुरुवार को रेल बजट 2015-16 पेश किया। इस बजट में कुछ खास बातें रहीं हैं। डालते हैं एक नजर क्‍या रहा बजट में खास-

यात्री किराए में किसी भी तरह की बढो़तरी नहीं की गई। पहली बार नई ट्रेनों की घोषणा की गई।
यात्रियों की समस्या के लिए 138 हेल्पलाइन नंबर। उत्तर रेलवे में पहली मार्चे से शुरू हो जाएगा।
सरकार ने रेलवे के लिए 4 लक्ष्य तय किए हैं। यात्री सुविधा, सुरक्षा, बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण और वित्तीय स्व संवहनीयता।
ऑपरेशन 5 मिनट नाम से एक नया मिशन शुरू किया जाएगा। इसके तहत अनारक्षित टिकट पांच मिनट के अंदर जारी किए जाएंगे। दलालों को रोकने के लिए चार महीने पहले रिजर्वेशन।
स्मार्टफोन पर अनारक्षित टिकट जारी करने का प्रावधान किया जाएगा। डेबिट कार्ड से चलने वाली मशीनें, ऑटोमेटिक टिकट मशीनों के प्रावधान को आगे बढ़ाया जाएगा।
डिजिटल इंडिया के तहत कई स्टेशनों पर वाई फाई की सुविधा। आदर्श स्टेशन के तहत इसे बढ़ाया जाएगा।
कई भाषाओं में ई-टिकट पोर्टल की शुरुआत होगी। पीने के पानी के लिए वाटर वेडिंग मशीन लगाई जाएगी।
चुनिंदा गाड़ियों और महानगरीय गाड़ियों में महिलाओं की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी का प्रावधान।
शताब्दी गाड़ियों में मनोरंजन सेवा का प्रावधान। जनरल डिब्बों में भी मोबाइल चार्ज करने की सुविधा होगी।
डिजिटल इंडिया के तहत कई स्टेशनों पर वाई-फाई की सुविधा। आदर्श स्टेशन के तहत इसे बढ़ाया जाएगा।
मुंबई में एसी लोकल। ऊपरी बर्थ पर चढ़ने के लिए सुविधाजनक डिजाइन बनाया जा रहा है। वरिष्ठों के लिए नीचे की बर्थ देने की कोशिश।
मुख्य स्टेशनों पर लिफ्ट और स्वचालित सीढ़ियों के लिए इस बजट में 180 करोड़ रुपए आवंटित किए जा रहे हैं।
नेत्रहीन मुसाफिरों के लिए भविष्य में बनने वाले सवारी डिब्बों में ब्रेल लिपि की सुविधा होगी।
9 रेल गलियारों की रफ्तार 110-130 किमी प्रति प्रति घंटा से बढ़ाकर 160-200 किमी प्रति घंटा करने का प्रस्ताव।
मुंबई-अहमदाबाद के बीच हाई-स्पीड रेल का प्रस्ताव। बुलेट ट्रेन पर रिपोर्ट साल के मध्य तक मिलने की संभावना।
मेक इन इंडिया के तहत रेलवे के इंजन, डिब्बे, पहिए देश में बनाने की कोशिश। इससे न सिर्फ विदेशी मुद्रा की बचत होगी बल्कि रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
इसी जून से अगले 5 साल के लिए रेल सुरक्षा की क्या योजना होगी, बताया जाएगा।
बिना गार्ड के रेलवे फाटक पर ऑडियो-विजुअल चेतावनी की व्यवस्था पर काम करने का प्रावधान।
अगले वित्तीय बजट में 970 रेलवे अंडर ब्रिज, रेलवे ओवर ब्रिज के निर्माण का प्रस्ताव।
आईआईटी-बीएचयू में मदन मोहन मालवीय के नाम से रेल तकनीक पर रिसर्च केंद्र बनाया जाएगा। चुनिंदा यूनिवर्सिटीज में ऐसे चार केंद्र खोले जाएंगे।
मानवरहित रेलवे क्रॉसिंग पर सुरक्षा को बढ़ाने के लिए इसरो, आईआईटी कानपुर की मदद ली जाएगी।
1,89,400 किलोमीटर रेल मार्गों के दोहरीकरण, तिहरीकरण और चौहरीकरण की योजना है। इस योजना पर 96,182 करोड़ रुपए खर्च होंगे।
गाडियों के आवागमन की सूचना एसएमएस एलर्ट से देने की तैयारी। वाई-फाई सुविधा अब सभी बी-श्रेणी के रेलवे स्टेशनों पर भी उपलब्ध कराई जाएगी।
रेल की दैनिक यात्री परिवहन क्षमता को 2.1 करोड़ से बढ़ाकर 3 करोड़ करने की योजना।
रेलवे नियुक्तियों में पारदर्शिता लाने के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रणाली शुरू की गई है।
टूरिजम को बढ़ाने के लिए 'इं‍क्रिडिबल रेल फॉर इंक्रिडिबल इंडिया' अभियान चलाया जाएगा।
 
 
रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने अपने रेलबजट भाषण में बताया कि मुंबई में एसी लोकल चलाई जाएगी। 24 की जगह गाडि़यों में 26 सवारी डिब्बे जोड़े जाएंगे। व्हील चेयर की ऑनलाइन बुकिंग होगी। स्टेशनों पर लॉकर लगाए जाएंगे। उपनगरीय ट्रेनों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। इसमें महिलाओं की प्राइवेसी का ध्यान रखा जाएगा।

रेलमंत्री ने यह भी कहा, डिस्प्ले बोर्ड पर आगमन-प्रस्थान की जानकारी बेहतर बनाई जाएगी। डेबिट कार्ड से चलने वाली और ऑटोमेटिक मशीनें लगाई जाएंगी। सुरक्षा के लिए 128 हेल्पलाइन शुरू की जाएगी। 650 स्‍टेशनों पर नए शौचालय बनाए जाएंगे। रेलवे के डिब्‍बों में मोबाइल चार्जिंग पाइंट बढेंगे। स्‍थानीय व्‍यंजनों को भी रेलवे द्वारा परोसा जाएगा। एक ही पोर्टल पर मिलेंगी रेलवे की विभिन्‍न सुविधाएं मिलेंगी।
अन्य बढ़ी घोषणाएं
ऑपरेशन 5 मिनट के तहत बिना रिजर्वेशन का टिकट आप 5 मिनट में खरीद सकेंगे।
शारीरिक रूप से अक्षम यात्रियों को रियायती ई-टिकट देने का प्रस्ताव।
138 नंबर देश भर के यात्रियों के लिए लागू कर दिया जाएगा। उत्तर रेलवे यह सुविधा 1 मार्च से शुरू कर देगा।
चादर, तकिए, तौलिए के लिए एनआईएफटी से संपर्क किया गया है।
रेलवे में अच्छे लिनेन (बिस्तर, गादी, तकिए) के लिए एनआईएफडी से बात की है।
इस वर्ष हम 17 हजार बायो टॉयलेट लगाएंगे। वैक्यूम टॉयलेट भी बनाए जाएंगे। इसका डिजाइन मंजूर करने की तैयारी है।
वैक्यूम टॉयलेट लगाने का प्रस्ताव रखा गया इस बजट में।
स्वच्छ रेल अभियान को स्वच्छ भारत अभियान से जोड़ा जाएगा।
रेलवे में स्वच्छता अभियान पर खास जोर रहेगा।
रेलवे के काम में पारदर्शिता लाई जाएगी, निर्णय लेने की गति बढ़ा कर और बेहतर प्रबंधन के जरिए यात्रियों की सेवा की जाएगी।
रेलवे की आर्थिक हालत सुधर रही है। यात्री किराये में नहीं की जाएगी कोई बढोतरी।
रेलवे राष्ट्रीय संपर्क और संचार का साधन बनेगा। भारतीय रेलवे बनेगी मेक इन इंडिया का हिस्सा।
 
 
रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने भारतीय रेलवे के कायाकल्प हेतु अगले पांच वर्षों के लिए चार लक्ष्य निर्धारित किए हैं।
 
1.            ग्राहको के अनुभव में स्थायी और मापनयोग्य सुधार लाने के लिए भारतीय रेलवे द्वारा ऐसे कदम जाएंगे जिनसे स्वच्छता, सहूलियत, सुगमता, सेवा गुणवत्ता और गाड़ियों की गति से संबंधित ग्राहकों की समस्याएं व्यवस्थित ढंग से दूर हो जाएंगी।
 
2.            रेलवे को यात्रा का सुरक्षित साधन बनाना
 
3.            भारतीय रेलों की क्षमता में पर्याप्त विस्तार करना और इसकी अवसंरचना को आधुनिक बनाना। नागरिकों के लिए रेल यात्रा के महत्व को देखते हुए, भारतीय रेलवे यात्री वहन क्षमता 21 मिलियन यात्री प्रति दिन से बढ़ाकर 30 मिलियन तक करेगा। वह रेलपथ की लंबाई भी 20 प्रतिशत तक बढ़ाकर 1,14,000 कि.मी. से 1,38,000 कि.मी. तक करेंगे और हम अपनी वार्षिक माल वाहक क्षमता 1 बिलियन टन से बढ़ाकर 1.5 बिलियन टन करेंगे।
 
4.            वित्तीय दृष्टि से आत्मनिर्भर बनने के लिए भारतीय रेलवे परिचालन से अत्याधिक अधिशेष का सृजन करेगा, जो केवल क्षमता विस्तार के वित्तपोषण हेतु आवश्यक ऋण की अदायगी के लिए ही नहीं होगा, बल्कि उससे क्षतिग्रस्त परिसंपत्तियों को सतत आधार पर बदलने हेतु निवेश के लिए भी पर्याप्त होगा। इसके लिए परिचालन दक्षता, लागतों पर कड़ा नियंत्रण, परियोजना के चयन एवं निष्पादन में अधिक अनुशासवन और भारतीय रेलों की राजस्व सृजन करने की क्षमता में अभूतपूर्व बढ़ोत्तरी होगी।
 
आज संसद में वर्ष 2015-16 का रेल बजट पेश करते हुए श्री प्रभु ने कहा कि इन लक्ष्यों से यह भी सुनिश्चित होगा कि रेलवे उन सभी प्रमुख कार्यक्रमों का अभिन्न अंग है जिन्हें प्रधानमंत्री ने गरीबों के जीवन स्तर में सुधार लाने के लिए शुरू किए हैं, जिनमें स्वच्छ भारत से मेक इन इंडिया तक, डिजीटल इंडिया से स्किल इंडिया तक शामिल है।

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भारतीय रेल नेटवर्क की कई दिलचस्प बातें

अमेरिका, चीन और रूस के बाद भारतीय रेलवे विश्व का चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है। आइए इससे जुड़े कुछ दिलचस्प आंकड़ों और तथ्यों पर नजर डालें-
 
– 2.5 करोड़ यात्री रोजाना भारतीय ट्रेनों से करते हैं सफर, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और तस्मानिया की कुल आबादी के बराबर है यह आंकड़ा।
 
– 1.15 लाख किलोमीटर लंबी रेल पटरियां बिछाई जा चुकी हैं भारत में अब तक, पृथ्वी की परिधि का डेढ़ गुना हिस्सा है यह लंबाई।
 
– 13.5 लाख किलोमीटर लंबा सफर तय करती हैं भारतीय ट्रेनें रोजाना, पृथ्वी से चंद्रमा की दूरी का 3.5 गुना है यह सफर।
 
– 9वां सबसे बड़ा रोजगार प्रदाता है भारतीय रेलवे दुनिया में, 16 लाख अनुमानित कर्मचारी जुड़े हुए हैं इससे।
 
– 55 साल बिना शौचालय के दौड़ीं भारतीय ट्रेनें, आम यात्री ओखिल चंद्रा की ओर से रेलवे को भेजे शिकायती पत्र के बाद 1909 में शुरू हुई व्यवस्था।
 
– 11,000 ट्रेनों का संचालन रोजाना करता है भारतीय रेलवे, इनमें से लगभग 7,000 पैसेंजर ट्रेनें हैं।
 
– 10 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलती है सबसे धीमी ट्रेन मेतुपलायम ऊटी नीलगिरि पैसेंजर ट्रेन।
 
– 150 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ती है सबसे तेज ट्रेन भोपाल शताब्दी एक्सप्रेस, दिल्ली से आगरा के बीच 160 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलने वाली सेमी-हाईस्पीड ट्रेन का ट्रायल भी हो चुका है पूरा।
 
– सबसे लंबे (श्रीवेंकटनरसिम्हाराजुवरीपेता-तमिलनाडु) और सबसे छोटे (ईब-ओडिशा) नाम वाले रेलवे स्टेशन भारत में हैं।
 
– नवापुर रेलवे स्टेशन दो राज्यों में बसा है, इसका आधा हिस्सा महाराष्ट्र और आधा गुजरात में पड़ता है।
 
– महाराष्ट्र के अहमदनगर में एक ही स्थान पर आमने-सामने हैं श्रीरामपुर और बेलापुर रेलवे स्टेशन।
 
– 24 मार्च 1994 को पहली बार टीवी पर रेल बजट का किया गया था लाइव प्रसारण।
 
– हर पांच में से एक इंटरनेट उपभोक्ता औसतन दिन में एक बार भारतीय रेलवे की वेबसाइट का करता है इस्तेमाल।
 
– 11.57 लाख सीटें और बर्थ रोजाना बुक की जाती हैं भारतीय ट्रेनों में, इनमें 1.71 लाख तत्काल कोटा के तहत।
 
– चेनाब नदी के ऊपर बन रहा दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे पुल, पेरिस का एफिल टावर भी इसके सामने हो जाएगा बौना।

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कायाकल्प होगा भारतीय रेल का

रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने घोषणा की कि माननीय प्रधानमंत्री जी के अभिनव प्रौद्योगिकी विकास और विनिर्माण संबंधी विज़न का अनुसरण करते हुए भारतीय रेल बिज़नेस रि-इंजीनियरी तथा नवीनता की भावना जगाने के उद्देश्‍य से ‘कायाकल्‍प ’ नाम से इनोवेशन काउंसिल स्‍थापित करेगा। 

संसद में आज रेल बजट 2015-16 पेश करते हुए उन्‍होंने कहा कि किसी भी गतिशील और विकासशील संगठन को अपनी कार्य पद्धतियों को नूतन और पुनर्परिभाषित करने की जरूरत होती है। रेल मंत्री ने कहा कि भारत सरकार ने पंडित मदन मोहन मालवीय जी को भारत रत्‍न प्रदान किया है । बनारस हिन्‍दू विश्‍व विद्यालय के शताब्‍दी महोत्‍सव के उपलक्ष्‍य में आईआईट (बीएचयू ), वाराणसी में रेलवे प्रौद्योगिकी के लिए ‘मालवीय पीठ’ स्‍थापित करने का प्रस्‍ताव है। रेलवे की सभी परिसम्‍पत्तियों में उपयोग की जाने वाली नई सामग्रियों के विकास में यह पीठ सहायक होगी। 

मंत्रालय ने आरडीएसओ को बेहतर अनुप्रयुक्‍त अनुसंधान संगठन के रूप में मजबूती प्रदान करने का फैसला किया है। आरडीएसओ प्रसिद्ध संस्‍थानों के साथ मिलकर कार्य करेगा। 2015-16 में बुनियादी अनुसंधान के लिए चयनित विश्‍व विद्यालयों में चार रेलवे अनुसंधान केन्‍द्र स्‍थापित किये जाएगे। मंत्री महोदय ने रेल से जुड़े हुए विशिष्‍ट मामलों के समाधान के लिए हमें बुनियादी एवं अनुप्रयुक्‍त अनुसंधान में निवेश करने की आवश्‍यकता पर जोर दिया। मंत्रालय अभिनव तकनीकी समाधान आमंत्रित के लिए प्रौद्योगिकी पोर्टल बनाएगा।

श्री प्रभु ने संसद को बताया कि अनुसंधान के लिए पहचानी गई रेल परियोजनाओं को शुरू करने के लिए भारतीय रेल के प्रौद्योगिकी मिशन के रूप में भागीदारी के आधार पर रेल मंत्रालय, मानव संसाधन विकास मंत्रालय,विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय और उद्योगों का एक संघ बनाया जाएगा। 

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