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हे रेलवे के नीति – नियंताओं​! हमें मंजिल पर समय से पहुंचने वाली ट्रेनें ही दे दीजिए …!​!

चाचा , यह एलपी कितने बजे तक आएगी। 
पता नहीं बेटा, आने का राइट टेम तो 10 बजे का  है, लेकिन आए तब ना…। 
शादी – ब्याह के मौसम में बसों की कमी के चलते  अपने पैतृक गांव से शहर जाने के लिए मैने ट्रेन का विकल्प चुना तो स्टेशन मास्टर की यह दो टुक सुन कर मुझे गहरा झटका लगा।

दरअसल साल – दर साल रेलवे को पटरी पर लाने के तमाम दावों के बावजूद देश के आम रेल यात्री की कुछ एेसी ही हालत है। 

 नई सरकार में पदभार संभालने वाला हर मंत्री यही कहता है कि ट्रेनों को समय पर चलाना उनकी प्राथमिकता है। लेकिन वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत है। पैसेंजर ट्रेनों का तो आलम यह कि इनके न छूटने का कोई समय है न पहुंचने का।  हर साल रेल बजट से पहले चैनलों पर राजनेताओं व विशेषज्ञों को बहस करते देखता हूं। … रेलवे की हालत अच्छी नहीं है। आधारभूत ढांचा मजबूत करने की जरूरत है… आप जानते हैं रेलवे यातायात का सबसे सस्ता माध्यम है…।  … आपको पता है रेलवे की एक रुपए की कमाई का इतना फीसद खर्च हो जाता है…।  लेकिन इसके लिए आप फंड कहां से लाइएगा… वगैरह – वगैरह। 
फिर बजट पेश होता है। इतनी नई ट्रेनें चली, इतने के फेरे बढ़े। संसद में कुछ सत्तापक्ष के माननीय बजट को संतुलित बताते हैं तो विरोधी खेमे के क्षेत्र विशेष की उपेक्षा का आरोप लगाते हैं। शोर – शराबे के बीच बजट पारित। फिर कुछ दिनों तक  बजट में उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कुछ खास क्षेत्रों में रेलवे ट्रैक पर प्रदर्शन और धीर – धीरे सब कुछ सामान्य हो जाता है। 

अब तक देखने में यही आया है कि जैसा रेलमंत्री का मिजाज वैसा निर्णय। 
 कई साल पहले एक इंजीनियर साहब रेल मंत्री बने, तो उन्होंने एेलान किया कि ट्रेनों में एेसा डिवाइस लगा देंगे कि टक्कर हो भी गई तो कैजुअलटी ज्यादा नहीं होगी। लेकिन अब तक सरकार इस पर विचार ही कर रही है। 
एक संवेदनशील कला प्रेमी नेत्री ने रेलमंत्रालय का कमान संभाला तो उन्होंने एेलान कर दिया कि  ट्रेनों में आपको संगीत सुनाएंगे। लेकिन मामला अब भी जहां का तहां…। 

एक ठेठ देहाती किस्म के जमीन से जुड़े राजनेता को रेल मंत्री का पद मिला तो उन्होंने घोषणा कर दी कि ट्रेनों में प्लास्टिक के लिए कोई जगह नहीं , अब सब कुछ कुल्लहड़ में मिलेगा। अरसे से कुम्हारों के मुर्झाए चेहरे कुछ दिनों के लिए खिले जरूर , लेकिन जल्द ही हालत फिर बेताल डाल पर वाली…। 
मुंबई के 26-11 हमले के बाद तय हुआ कि सभी स्टेशनों को किले में तब्दील कर देंगे। स्टेशनों पर सीसीटीवी कैमरे लगेंगे और जवानों को अत्याधुनिक हथियार भी दिए जाएंगे। लेकिन कुछ समय बाद ही स्टेशनों का फिर वही चिर-परिचित चेहरा। ज्यादातर अत्याधुनिक मशीनें खराब। जबकि कुर्सियों पर बैठे जवान या तो ऊंघते हुए नजर आते हैं या फिर आपस में हंसी – मजाक करते हुए। 

हाल में एेलान हुआ कि अब टिकट के लिए यात्रियों को मगजमारी नहीं करनी पड़ेगी। स्टेशनों पर टिकट वेंडिंग मशीनें लगेंगी। मशीन के सामने खड़े होइए और जहां की चाहिए , टिकट लेकर चलते बनिए। 

लेकिन कुछ दिनों बाद ही मशीनें पता नहीं कहां चली गई  और टिकट काउंटरों पर वहीं धक्का –  मुक्की और दांतपिसाई की मजबूरी। 
कितनी बार सुना कि अब आरक्षण के मामले में अब दलालों की खैर नहीं। लेकिन महानगरों की तो  छोड़िए गांव – कस्बों तक में रेल टिकट दलालों के दफ्तर हाइटेक होते जा रहे हैं। 

न जाने कितनी बार सुना कि ट्रेनों की आरक्षण प्रणाली पारदर्शी होगी। एक सीमा से अधिक वेटिंग लिस्ट हुए तो अतिरिक्त कोच लगा कर सब को एडजस्ट किया जाएगा।  लेकिन खास परिस्थितयों में देखा जाता है कि नंबर एक की वेटिंग लिस्ट भी अंत तक कन्फर्म नहीं हो पाती। 
बीच – बीच में सुनते रहे कि अब रेल व यात्री सुरक्षा की पूर्ण जिम्मेदारी आरपीएफ या जीअारपी में किसी एक दो दी जाएगी। लेकिन महकमे में अब भी दोनों के जवान पूर्ववत नजर आते हैं।

इसलिए हे रेलवे  के नीति – नियंताओं…। हमें नहीं चाहिए हाइ स्पीड बुलेट ट्रेनें। हमारी रेल जैसी है वैसी ही ठीक है। हमें बस , इंसानों की तरह अपनी मंजिल तक समय पर पहुंचने लायक ट्रेनें ही दे दीजिए। 
Image result for tragedy of indian railways passengers
tarkeshkumarojha.blogspot.com से साभार
तारकेश कुमार ओझा, भगवानपुर, जनता विद्यालय के पास वार्ड नंबरः09 (नया) खड़गपुर ( पश्चिम बंगाल) पिन ः721301 जिला पश्चिमम मेदिनीपुर संपर्कः 09434453934 

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उपभोक्ता को है नुकसान की भरपाई का अधिकार – डॉ.जैन

सही दाम,सही काम और सही सेवा का संकल्प लें 

राजनांदगांव। "उपभोक्ता अधिकारों का संरक्षण समय की बड़ी मांग है। आज उन्मुक्त व्यापार प्रणाली के दौर में उपभोक्ता कदम-कदम पर ठगा जा रहा है।कुछ स्वार्थी व्यवसायी,समय की बदलती धड़कनों के साथ उपभोक्ताओं की जेब काटने के रास्ते निकाल लेते हैं। वे खुलकर ऐलान कर देते हैं कि फैशन के दौर में गारंटी की उम्मीद न करें। इसके प्रति उपभोक्ताओं को जगाने के लिए उपभोक्ता शिक्षा और सतत जागरूकता अभियान चलाया जाना होगा।" 

आरटीआई केस स्टडी पेनल के रिसोर्स पर्सन,प्रोफ़ेसर डॉ.चन्द्रकुमार जैन ने उक्त विचार उपभोक्ता जागरूकता मंच द्वारा रायगढ़ में आयोजित संगोष्ठी में व्यक्त किये। इस संगोष्ठी में डॉ.जैन ने मुख्य अतिथि वक्ता के रूप में प्रभावी सहभागिता की। डॉ.जैन ने कहा कि किसी भी वस्तु या सेवा के खरीददार को उपभोक्ता कहते हैं और संरक्षण का अर्थ है उपभोक्ता अधिकारों का संरक्षण। उपभोक्ता संरक्षण का मामला शुरूआती दौर में यूरोप में उठा था किन्तु अब वैश्वीकरण के प्रभाव से इसकी ज़रुरत भी विश्व्यापी हो गई है। यूरोपीय देशो में नागरिकों के त्रस्त और शोषित वर्ग को जैसी सुरक्षा प्राप्त है वैसी सुरक्षा की आवश्यकता भारत जैसे देशों में कहीं ज्यादा है। 

डॉ.जैन ने कहा कि उपभोक्ताओं को समझना चाहिए कि उन्हें अपनी बात कहने, अपनी पसंद की वस्तु या सेवा चुनने, कीमत जानने, गुणवत्ता औए गारंटी या वारंटी की जानकारी हासिल करने, किसी सक्षम अधिकारी के सामने शिकायत दर्ज़ कराने और वस्तु या सेवा में किसी कमी या नुकसान की भरपाई का हक़ है। लेकिन,डॉ.जैन ने कहा कि अफ़सोस इस बात का है कि हमारे यहाँ उपभोक्ता इन अधिकारों के प्रति अक्सर उदासीन दीखते हैं। इस प्रवृत्ति पर लगाम जरूरी है।  वहीं उत्पादकों और विक्रेताओं को भी सही दाम और सही काम की नीति पर चलना होगा अन्यथा उपभोक्ताओं के बहाने वे राष्ट्र की नींव कमजोर करते रहेंगे। 

डॉ.जैन ने कहा कि शासकीय स्तर पर उपभोक्ता संरक्षण के लिए कई कारगर कदम उठाये जा रहे हैं.उपभोक्ता संरक्षण सेल से लेकर उपभोक्ता फोरम तक कई ऐसे ठिकाने हैं जहां जाकर उपभोक्ता अपनी शिकायतें और समस्याएं रख सकता है.इन सुविधाओं का लाभ उठाना स्वयं उपभोक्ता की जिम्मेदारी है.वहीं,संरक्षण के लिए बनांये गए कानूनों को अमल में लाने के लिए सुविधा दाता तंत्र को भी सक्रिय हस्तक्षेप के लिए ज्यादा चुस्त होना पड़ेगा।

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सूचना आयोग में अर्थदंड की कार्यवाहियां

माननीय श्री बसंत सेठ  ,
सूचना आयुक्त,  
केन्द्रीय सूचना आयोग,
नई दिल्ली
 
मान्यवर,

आपको ज्ञात  ही  है कि  आयोग की  स्थापना नागरिकों के सूचना के अधिकार की  रक्षा के लिए की गयी है और आयोग की  कार्यवाहियां कोई विस्तृत न्यायिक परीक्षण  न होकर  संक्षिप्त प्रकृति की हैं जिनमें  नागरिकों को सूचना प्रदान करने और कानून का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों पर अर्थदंड  लगाने सम्बंधित विषयों का निस्तारण किया जाता है |  माननीय कलकत्ता उच्च  न्यायालय ने एक मामले में दिनांक  7 जुलाई 2010  को धारित किया है  कि  सूचना के अधिकार के अंतर्गत द्वितीय अपील पर निर्णय 45 दिन में दिया जाना चाहिए |

आयोग एक  ट्रिब्यूनल है और ट्रिब्यूनल  का गठन जनता को त्वरित और सस्ता न्याय  दिए जाने हेतु किया जाता है किन्तु दुखद है कि आयोग में कार्यवाहियां असाधारण और अनावश्यक  रूप से लम्बे समय तक चलती हैं तथा  अर्थदंड के प्रकरणों में अलग से नोटिस जारी किया जता है और अत्यधिक लंबा समय लगता है जिससे नागरिकों में हताशा और अविश्वास  पनपता है तथा जनता  के बहुमूल्य  समय और धन का अपव्यय होता है  

कानून की  अनुपालना सुनिश्चित करने के लिए भयावह दंड नहीं बल्कि तुरंत दिया जानेवाला दंड अधिक प्रभावशाली होता है | राजस्थान सूचना आयोग  में, जहां अधिनियम का उल्लंघन हुआ हो सूचना प्रदानगी और अर्थदंड के विषय दोनों को एक ही सुनवाई( नोटिस  प्रति संलग्न ) में निपटाया जाता है जबकि केन्द्रीय सूचना आयोग में अर्थदंड के विषय को अनुचित रूप से लंबा खेंचा जा रहा है  | अत: आयोग को शीघ्र ही इस अस्वस्थ और जन विरोधी परिपाटी का त्याग कर एक ही सुनवाई में मामले को निपटाया जाना चाहिए  तथा  जहां अधिनियम का उल्लंघन हुआ हो वहां  प्रथम नोटिस में ही अर्थदंड लगाए जाने के विषय पर विपक्षी से स्पष्टीकरण मांग लेना चाहिए |

आशा है आप इस प्रार्थना पर मानवीय निर्णय लेंगे  |
सादर,
मनीराम शर्मा                                       
नकुल निवास , रोडवेज डिपो के पीछे
सरदारशहर -331403
जिला चुरू ( राज)       

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श्री प्रभु के रेल बजट में हवाई आश्वासन नहीं, मगर ठोस योजनाएँ

रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने लोक सभा में गुरुवार को रेल बजट 2015-16 पेश करते हुए यात्रियों की परेशानी में कुछ अंकुश लगाने की कोशिश जरूर की है। इसके तहत दलालों को रोकने के लिए चार महीने पहले रिजर्वेशन की सुविधा मुहैया कराई जाएगी। सुरक्षा के लिए 182 टोल फ्री नंबर का प्रावधान। कुछ सवारी गाड़ियों में 24 पैसेंजर कोच की जगह 26 सवारी कोच जोड़े जाएंगे।

पांच मिनट में अनारक्षित टिकट

एक नया मिशन ऑपरेशन 5 मिनट शुरू किया जाएगा, जिसमें अनारक्षित टिकट खरीदने के लिए पांच मिनट से ज्यादा वक्‍त नहीं लगेगा। 138 यात्रियों की समस्या का हेल्पलाइन नंबर, उत्तर रेलवे में पहली मार्चे से हेल्पलाइन शुरू हो जाएगी सेवा। कई भाषाओं में ई-टिकट पोर्टल की शुरुआत होगी। स्मार्टफोन पर अनारक्षित टिकट जारी करने का प्रावधान किया जाएगा। डेबिट कार्ड से चलने वाली मशीनें, ऑटोमेटिक टिकट मशीनों के प्रावधान को और आगे बढ़ाया जाएगा।

अक्षम यात्रियों के लिए होगा ऐसा

नेत्रहीन मुसाफिरों के लिए भविष्य में बनने वाले सवारी डिब्बों में ब्रेल लिपि की सुविधा होगी। ऊपरी बर्थ पर चढ़ने के लिए सुविधाजनक डिजाइन बनाया जा रहा है। वरिष्ठों के लिए नीचे की बर्थ हो, ऐसा प्रयास किया जा रहा है। शारीरिक रूप से अक्षम यात्रियों के लिए व्‍हील चेयर की सुविधा भी होगी।

 

रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने आज लोकसभा में पेश 2015-16 के रेल बजट में ट्रेनों की गति बढ़ाने के साथ ही यात्री सुविधा और सुरक्षा पर भी जोर दिया।

मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड बुलेट ट्रेन पर व्यवहार्यता अध्ययन रिपोर्ट साल के मध्य में आएगी। रेलों की गति बढ़ाने पर ध्यान दिया जाएगा। मालगाड़ियों की स्पीड भी बढ़ाई जाएगी। 9 रेल गलियारों में गति सीमा 130 किलोमीटर प्रति घंटे से बढ़ाकर 200 किलोमीटर करने का प्रस्ताव किया गया है।

स्टेशनों पर 180 करोड़ रु. की लागत से लिफ्ट और एस्केलेटर लगाए जाएंगे। ऊपरी बर्थ पर चढ़ने के लिए बेहतर सुविधाएं बनाई जाएंगी। उन्होंने कहा, गाड़ी सुरक्षा चेतावनी प्रणाली को बेहतर बनाया जाएगा। आधुनिक रेल संरचना का भी प्रावधान है।

6581 करोड़ की लागत से रेल ओवर और अंडर ब्रिज बना कर बिना गार्ड के रेलवे क्रॉसिंग को बेहतर बनाया जाएगा। बिना फाटक के रेलवे ट्रैक पर ऑडियो सुविधाओं से सूचनाएं दी जाएंगी। अगले पांच साल के लिए योजना इस जून में बनेगी और हर तरह की दुर्घटना से बचने का ब्यौरा देंगे। बिना गार्ड के रेल फाटक, आग, एक्सिडेेंट आदि दुर्घटनाओं से बचने के लिए एक्शन प्लान बनाया जा रहा है।

अब चार माह पहले आरक्षण

रेलमंत्री ने ऐलान किया कि 2 माह की जगह 4 माह पहले होगा सीट आरक्षण। किसानों को लाभ देने के लिए कार्गो सेंटर बनाए जाएंगे। माल ढ़ुलाई की क्षमता बढ़ाने के लिए एक प्रयास किए जाएंगे। रेलवे में ऊर्जा के खर्च को विद्युतीकरण पर फोकस करेंगे ताकि डीजल का खर्च कम हो। 6608 किमी मार्ग का विद्युतीकरण किया जाएगा।

400 स्‍टेशनों पर वाई-फाई

अरुणाचल और मेघालय से दिल्ली को जोड़ा गया है अन्य पूर्वोत्तर राज्यों को भी जोड़ेंगे। यातायात सुविधाओं के लिए निर्माण सुविधाओं पर ध्यान देंगे। 400 स्‍टेशनों पर वाई-फाई की सुविधा मुहैया कराई जाएगी। 96182 करोड़ जुटाने के लिए कई स्रोतों से बात चल रही है। दोहरीकरण जल्द से जल्द करने के लिए 8886 करोड़ रुपए के व्यय का प्रस्ताव। ज्यादा ट्रैफिक वाले नेटवर्क पर क्षमता बढ़ाई जाएगी। सैटेलाइट रेलवे टर्मिनल बनाए जाएंगे।

तकनीक का इस्तेमाल
सुरेश प्रभु ने कहा, माल डिब्बों में रेडियो फ्रिक्वेंसी वाले आईडी टैग लगेंगे ताकि उन्हें ट्रैक किया जा सके। नए बनने वाले डिब्बों में ब्रेल लिपि से सूचनाएं दिए जाने की व्यवस्था की जाएगी। IIT-BHU में मालवीय जी के नाम से रेल तकनीक पर रिसर्च केंद्र बनाया जाएगा चुनिंदा विश्वविद्यालयों में चार रेलवे अनुसंधान केंद्र खोलने का प्रस्ताव। बिजनेस इंजीनियरिंग और नवाचार के लिए कायाकल्प योजना लागू की जाएगी।

यूं बढ़ेगा रोजगार

मेक इन इंडिया के तहत देश में इंजन, पहिये, डिब्बे बनाने पर जोर दिया जाएगा। इससे विदेशी मुद्रा की बचत के साथ ही रोजगार के नए अवसर बनेंगे। पेरिशेबल यानी खराब होने की आशंका वाली सब्जियों को बचाने के लिए दिल्ली आजादपुर में कार्गो सेंटर बनेगा। प्राइवेट फ्रेट टर्मिनलों में निजी निवेश का प्रस्ताव किया गया है।

 
 
रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने गुरुवार को रेल बजट 2015-16 पेश किया। इस बजट में कुछ खास बातें रहीं हैं। डालते हैं एक नजर क्‍या रहा बजट में खास-

यात्री किराए में किसी भी तरह की बढो़तरी नहीं की गई। पहली बार नई ट्रेनों की घोषणा की गई।
यात्रियों की समस्या के लिए 138 हेल्पलाइन नंबर। उत्तर रेलवे में पहली मार्चे से शुरू हो जाएगा।
सरकार ने रेलवे के लिए 4 लक्ष्य तय किए हैं। यात्री सुविधा, सुरक्षा, बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण और वित्तीय स्व संवहनीयता।
ऑपरेशन 5 मिनट नाम से एक नया मिशन शुरू किया जाएगा। इसके तहत अनारक्षित टिकट पांच मिनट के अंदर जारी किए जाएंगे। दलालों को रोकने के लिए चार महीने पहले रिजर्वेशन।
स्मार्टफोन पर अनारक्षित टिकट जारी करने का प्रावधान किया जाएगा। डेबिट कार्ड से चलने वाली मशीनें, ऑटोमेटिक टिकट मशीनों के प्रावधान को आगे बढ़ाया जाएगा।
डिजिटल इंडिया के तहत कई स्टेशनों पर वाई फाई की सुविधा। आदर्श स्टेशन के तहत इसे बढ़ाया जाएगा।
कई भाषाओं में ई-टिकट पोर्टल की शुरुआत होगी। पीने के पानी के लिए वाटर वेडिंग मशीन लगाई जाएगी।
चुनिंदा गाड़ियों और महानगरीय गाड़ियों में महिलाओं की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी का प्रावधान।
शताब्दी गाड़ियों में मनोरंजन सेवा का प्रावधान। जनरल डिब्बों में भी मोबाइल चार्ज करने की सुविधा होगी।
डिजिटल इंडिया के तहत कई स्टेशनों पर वाई-फाई की सुविधा। आदर्श स्टेशन के तहत इसे बढ़ाया जाएगा।
मुंबई में एसी लोकल। ऊपरी बर्थ पर चढ़ने के लिए सुविधाजनक डिजाइन बनाया जा रहा है। वरिष्ठों के लिए नीचे की बर्थ देने की कोशिश।
मुख्य स्टेशनों पर लिफ्ट और स्वचालित सीढ़ियों के लिए इस बजट में 180 करोड़ रुपए आवंटित किए जा रहे हैं।
नेत्रहीन मुसाफिरों के लिए भविष्य में बनने वाले सवारी डिब्बों में ब्रेल लिपि की सुविधा होगी।
9 रेल गलियारों की रफ्तार 110-130 किमी प्रति प्रति घंटा से बढ़ाकर 160-200 किमी प्रति घंटा करने का प्रस्ताव।
मुंबई-अहमदाबाद के बीच हाई-स्पीड रेल का प्रस्ताव। बुलेट ट्रेन पर रिपोर्ट साल के मध्य तक मिलने की संभावना।
मेक इन इंडिया के तहत रेलवे के इंजन, डिब्बे, पहिए देश में बनाने की कोशिश। इससे न सिर्फ विदेशी मुद्रा की बचत होगी बल्कि रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
इसी जून से अगले 5 साल के लिए रेल सुरक्षा की क्या योजना होगी, बताया जाएगा।
बिना गार्ड के रेलवे फाटक पर ऑडियो-विजुअल चेतावनी की व्यवस्था पर काम करने का प्रावधान।
अगले वित्तीय बजट में 970 रेलवे अंडर ब्रिज, रेलवे ओवर ब्रिज के निर्माण का प्रस्ताव।
आईआईटी-बीएचयू में मदन मोहन मालवीय के नाम से रेल तकनीक पर रिसर्च केंद्र बनाया जाएगा। चुनिंदा यूनिवर्सिटीज में ऐसे चार केंद्र खोले जाएंगे।
मानवरहित रेलवे क्रॉसिंग पर सुरक्षा को बढ़ाने के लिए इसरो, आईआईटी कानपुर की मदद ली जाएगी।
1,89,400 किलोमीटर रेल मार्गों के दोहरीकरण, तिहरीकरण और चौहरीकरण की योजना है। इस योजना पर 96,182 करोड़ रुपए खर्च होंगे।
गाडियों के आवागमन की सूचना एसएमएस एलर्ट से देने की तैयारी। वाई-फाई सुविधा अब सभी बी-श्रेणी के रेलवे स्टेशनों पर भी उपलब्ध कराई जाएगी।
रेल की दैनिक यात्री परिवहन क्षमता को 2.1 करोड़ से बढ़ाकर 3 करोड़ करने की योजना।
रेलवे नियुक्तियों में पारदर्शिता लाने के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रणाली शुरू की गई है।
टूरिजम को बढ़ाने के लिए 'इं‍क्रिडिबल रेल फॉर इंक्रिडिबल इंडिया' अभियान चलाया जाएगा।
 
 
रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने अपने रेलबजट भाषण में बताया कि मुंबई में एसी लोकल चलाई जाएगी। 24 की जगह गाडि़यों में 26 सवारी डिब्बे जोड़े जाएंगे। व्हील चेयर की ऑनलाइन बुकिंग होगी। स्टेशनों पर लॉकर लगाए जाएंगे। उपनगरीय ट्रेनों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। इसमें महिलाओं की प्राइवेसी का ध्यान रखा जाएगा।

रेलमंत्री ने यह भी कहा, डिस्प्ले बोर्ड पर आगमन-प्रस्थान की जानकारी बेहतर बनाई जाएगी। डेबिट कार्ड से चलने वाली और ऑटोमेटिक मशीनें लगाई जाएंगी। सुरक्षा के लिए 128 हेल्पलाइन शुरू की जाएगी। 650 स्‍टेशनों पर नए शौचालय बनाए जाएंगे। रेलवे के डिब्‍बों में मोबाइल चार्जिंग पाइंट बढेंगे। स्‍थानीय व्‍यंजनों को भी रेलवे द्वारा परोसा जाएगा। एक ही पोर्टल पर मिलेंगी रेलवे की विभिन्‍न सुविधाएं मिलेंगी।
अन्य बढ़ी घोषणाएं
ऑपरेशन 5 मिनट के तहत बिना रिजर्वेशन का टिकट आप 5 मिनट में खरीद सकेंगे।
शारीरिक रूप से अक्षम यात्रियों को रियायती ई-टिकट देने का प्रस्ताव।
138 नंबर देश भर के यात्रियों के लिए लागू कर दिया जाएगा। उत्तर रेलवे यह सुविधा 1 मार्च से शुरू कर देगा।
चादर, तकिए, तौलिए के लिए एनआईएफटी से संपर्क किया गया है।
रेलवे में अच्छे लिनेन (बिस्तर, गादी, तकिए) के लिए एनआईएफडी से बात की है।
इस वर्ष हम 17 हजार बायो टॉयलेट लगाएंगे। वैक्यूम टॉयलेट भी बनाए जाएंगे। इसका डिजाइन मंजूर करने की तैयारी है।
वैक्यूम टॉयलेट लगाने का प्रस्ताव रखा गया इस बजट में।
स्वच्छ रेल अभियान को स्वच्छ भारत अभियान से जोड़ा जाएगा।
रेलवे में स्वच्छता अभियान पर खास जोर रहेगा।
रेलवे के काम में पारदर्शिता लाई जाएगी, निर्णय लेने की गति बढ़ा कर और बेहतर प्रबंधन के जरिए यात्रियों की सेवा की जाएगी।
रेलवे की आर्थिक हालत सुधर रही है। यात्री किराये में नहीं की जाएगी कोई बढोतरी।
रेलवे राष्ट्रीय संपर्क और संचार का साधन बनेगा। भारतीय रेलवे बनेगी मेक इन इंडिया का हिस्सा।
 
 
रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने भारतीय रेलवे के कायाकल्प हेतु अगले पांच वर्षों के लिए चार लक्ष्य निर्धारित किए हैं।
 
1.            ग्राहको के अनुभव में स्थायी और मापनयोग्य सुधार लाने के लिए भारतीय रेलवे द्वारा ऐसे कदम जाएंगे जिनसे स्वच्छता, सहूलियत, सुगमता, सेवा गुणवत्ता और गाड़ियों की गति से संबंधित ग्राहकों की समस्याएं व्यवस्थित ढंग से दूर हो जाएंगी।
 
2.            रेलवे को यात्रा का सुरक्षित साधन बनाना
 
3.            भारतीय रेलों की क्षमता में पर्याप्त विस्तार करना और इसकी अवसंरचना को आधुनिक बनाना। नागरिकों के लिए रेल यात्रा के महत्व को देखते हुए, भारतीय रेलवे यात्री वहन क्षमता 21 मिलियन यात्री प्रति दिन से बढ़ाकर 30 मिलियन तक करेगा। वह रेलपथ की लंबाई भी 20 प्रतिशत तक बढ़ाकर 1,14,000 कि.मी. से 1,38,000 कि.मी. तक करेंगे और हम अपनी वार्षिक माल वाहक क्षमता 1 बिलियन टन से बढ़ाकर 1.5 बिलियन टन करेंगे।
 
4.            वित्तीय दृष्टि से आत्मनिर्भर बनने के लिए भारतीय रेलवे परिचालन से अत्याधिक अधिशेष का सृजन करेगा, जो केवल क्षमता विस्तार के वित्तपोषण हेतु आवश्यक ऋण की अदायगी के लिए ही नहीं होगा, बल्कि उससे क्षतिग्रस्त परिसंपत्तियों को सतत आधार पर बदलने हेतु निवेश के लिए भी पर्याप्त होगा। इसके लिए परिचालन दक्षता, लागतों पर कड़ा नियंत्रण, परियोजना के चयन एवं निष्पादन में अधिक अनुशासवन और भारतीय रेलों की राजस्व सृजन करने की क्षमता में अभूतपूर्व बढ़ोत्तरी होगी।
 
आज संसद में वर्ष 2015-16 का रेल बजट पेश करते हुए श्री प्रभु ने कहा कि इन लक्ष्यों से यह भी सुनिश्चित होगा कि रेलवे उन सभी प्रमुख कार्यक्रमों का अभिन्न अंग है जिन्हें प्रधानमंत्री ने गरीबों के जीवन स्तर में सुधार लाने के लिए शुरू किए हैं, जिनमें स्वच्छ भारत से मेक इन इंडिया तक, डिजीटल इंडिया से स्किल इंडिया तक शामिल है।

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भारतीय रेल नेटवर्क की कई दिलचस्प बातें

अमेरिका, चीन और रूस के बाद भारतीय रेलवे विश्व का चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है। आइए इससे जुड़े कुछ दिलचस्प आंकड़ों और तथ्यों पर नजर डालें-
 
– 2.5 करोड़ यात्री रोजाना भारतीय ट्रेनों से करते हैं सफर, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और तस्मानिया की कुल आबादी के बराबर है यह आंकड़ा।
 
– 1.15 लाख किलोमीटर लंबी रेल पटरियां बिछाई जा चुकी हैं भारत में अब तक, पृथ्वी की परिधि का डेढ़ गुना हिस्सा है यह लंबाई।
 
– 13.5 लाख किलोमीटर लंबा सफर तय करती हैं भारतीय ट्रेनें रोजाना, पृथ्वी से चंद्रमा की दूरी का 3.5 गुना है यह सफर।
 
– 9वां सबसे बड़ा रोजगार प्रदाता है भारतीय रेलवे दुनिया में, 16 लाख अनुमानित कर्मचारी जुड़े हुए हैं इससे।
 
– 55 साल बिना शौचालय के दौड़ीं भारतीय ट्रेनें, आम यात्री ओखिल चंद्रा की ओर से रेलवे को भेजे शिकायती पत्र के बाद 1909 में शुरू हुई व्यवस्था।
 
– 11,000 ट्रेनों का संचालन रोजाना करता है भारतीय रेलवे, इनमें से लगभग 7,000 पैसेंजर ट्रेनें हैं।
 
– 10 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलती है सबसे धीमी ट्रेन मेतुपलायम ऊटी नीलगिरि पैसेंजर ट्रेन।
 
– 150 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ती है सबसे तेज ट्रेन भोपाल शताब्दी एक्सप्रेस, दिल्ली से आगरा के बीच 160 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलने वाली सेमी-हाईस्पीड ट्रेन का ट्रायल भी हो चुका है पूरा।
 
– सबसे लंबे (श्रीवेंकटनरसिम्हाराजुवरीपेता-तमिलनाडु) और सबसे छोटे (ईब-ओडिशा) नाम वाले रेलवे स्टेशन भारत में हैं।
 
– नवापुर रेलवे स्टेशन दो राज्यों में बसा है, इसका आधा हिस्सा महाराष्ट्र और आधा गुजरात में पड़ता है।
 
– महाराष्ट्र के अहमदनगर में एक ही स्थान पर आमने-सामने हैं श्रीरामपुर और बेलापुर रेलवे स्टेशन।
 
– 24 मार्च 1994 को पहली बार टीवी पर रेल बजट का किया गया था लाइव प्रसारण।
 
– हर पांच में से एक इंटरनेट उपभोक्ता औसतन दिन में एक बार भारतीय रेलवे की वेबसाइट का करता है इस्तेमाल।
 
– 11.57 लाख सीटें और बर्थ रोजाना बुक की जाती हैं भारतीय ट्रेनों में, इनमें 1.71 लाख तत्काल कोटा के तहत।
 
– चेनाब नदी के ऊपर बन रहा दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे पुल, पेरिस का एफिल टावर भी इसके सामने हो जाएगा बौना।

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कायाकल्प होगा भारतीय रेल का

रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने घोषणा की कि माननीय प्रधानमंत्री जी के अभिनव प्रौद्योगिकी विकास और विनिर्माण संबंधी विज़न का अनुसरण करते हुए भारतीय रेल बिज़नेस रि-इंजीनियरी तथा नवीनता की भावना जगाने के उद्देश्‍य से ‘कायाकल्‍प ’ नाम से इनोवेशन काउंसिल स्‍थापित करेगा। 

संसद में आज रेल बजट 2015-16 पेश करते हुए उन्‍होंने कहा कि किसी भी गतिशील और विकासशील संगठन को अपनी कार्य पद्धतियों को नूतन और पुनर्परिभाषित करने की जरूरत होती है। रेल मंत्री ने कहा कि भारत सरकार ने पंडित मदन मोहन मालवीय जी को भारत रत्‍न प्रदान किया है । बनारस हिन्‍दू विश्‍व विद्यालय के शताब्‍दी महोत्‍सव के उपलक्ष्‍य में आईआईट (बीएचयू ), वाराणसी में रेलवे प्रौद्योगिकी के लिए ‘मालवीय पीठ’ स्‍थापित करने का प्रस्‍ताव है। रेलवे की सभी परिसम्‍पत्तियों में उपयोग की जाने वाली नई सामग्रियों के विकास में यह पीठ सहायक होगी। 

मंत्रालय ने आरडीएसओ को बेहतर अनुप्रयुक्‍त अनुसंधान संगठन के रूप में मजबूती प्रदान करने का फैसला किया है। आरडीएसओ प्रसिद्ध संस्‍थानों के साथ मिलकर कार्य करेगा। 2015-16 में बुनियादी अनुसंधान के लिए चयनित विश्‍व विद्यालयों में चार रेलवे अनुसंधान केन्‍द्र स्‍थापित किये जाएगे। मंत्री महोदय ने रेल से जुड़े हुए विशिष्‍ट मामलों के समाधान के लिए हमें बुनियादी एवं अनुप्रयुक्‍त अनुसंधान में निवेश करने की आवश्‍यकता पर जोर दिया। मंत्रालय अभिनव तकनीकी समाधान आमंत्रित के लिए प्रौद्योगिकी पोर्टल बनाएगा।

श्री प्रभु ने संसद को बताया कि अनुसंधान के लिए पहचानी गई रेल परियोजनाओं को शुरू करने के लिए भारतीय रेल के प्रौद्योगिकी मिशन के रूप में भागीदारी के आधार पर रेल मंत्रालय, मानव संसाधन विकास मंत्रालय,विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय और उद्योगों का एक संघ बनाया जाएगा। 

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पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए गांधी सर्किट को बढ़ावा दिया जाएगा

रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने रेल बजट 2015-16 पेश करते हुए कहा भारतीय रेल अतुल्य भारत के लिए इस अतुल्य रेल प्रयास में अपना सहयोग प्रदान करेगी। ऑटोरिक्शा तथा टैक्सी चालकों को पर्यटन गाइडों के रूप में प्रशिक्षित करके कोंकण रेलवे में पर्यटन को प्रोत्साहन देने का एक सफल प्रयोग किया गया है क्योंकि सबसे पहले यही लोग यात्रियों के संपर्क में आते हैं। 

राजस्व की भागीदारी मॉडल के आधार पर ट्रैवल एजेंसियों को प्रमुक स्थलों को जोड़ने वाली चुनिंदा गाड़ियों में कुछ सवारी डिब्बे देने की संभावना तलाशने का प्रस्ताव है। 

इस वर्ष जब दक्षिण अफ्रीका से महात्मा गांधी की भारत वापसी की 100वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है। आईआरसीटीसी पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए गांधी संर्किट को बढ़ावा देने का कार्य करेगी। नई खेली और विपणन तकनीक के बारे में किसानों की सहायता के लिए आईआरसीटीसी एक विशेष यात्रा योजना –किसान यात्रा पर कार्य करेगी। 

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नई सदी की हिंदी कविता पर द्वि-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न

विजयपुर (कर्नाटक) ।बी.एल.डी.इ संस्था के एस.बी.कला एवं के.सी.पी. विज्ञान महाविद्यालय, विजयपुर(कर्नाटक) तथा रानी चन्नम्मा विश्वविद्यालय कॉलेज हिंदी प्राध्यापक संघ के तत्वावधान में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यू.जी.सी.) के सहयोग से ‘नई सदी की हिंदी कविता : दशा और दिशा’ विषयक द्वि-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया. यरनाल विरक्त मठ के संगनबसव महास्वामी जी ने दीप प्रज्वलित कर संगोष्ठी का उदघाटन किया. उन्होंने अपने उद्घाटन भाषण में कहा कि भाषाएँ मनुष्य से मनुष्य को जोड़ने का कार्य करती हैं, परंतु आज भाषाएँ राजनीति का शिकार हो रही हैं. राजनेता भाषा को अस्त्र बनाकर समाज को बाँट रहे हैं. भाषा-भेद भुलाकर सारे समाज को देश की उन्नति में योगदान देना चाहिए. इसी सत्र में दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा, हैदराबाद के उच्च शिक्षा और शोध संस्थान के विभागाध्यक्ष प्रो. ऋषभदेव शर्मा ने अपने बीज वक्तव्य में कहा कि “भूमंडलीकरण के बाद बाजारवाद ने साहित्य को प्रभावित किया है. शब्द पर ‘अर्थ’(वित्त) हावी हुआ है. समाज में असहिष्णुता इतनी बढ़ गई है कि स्वतंत्र साहित्यकार को अपनी मृत्यु की घोषणा करनी पड़ रही है.” प्राचार्य डॉ.के.जी. पुजारी ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की. संगोष्ठी के संयोजक डॉ. एस.टी. मेरवाडे ने अतिथियों का स्वागत किया तथा प्रो.एस.जे. जहागीरदार ने सूत्रसंचालन किया.

संगोष्ठी के प्रथम सत्र में हैदराबाद की कवयित्री डॉ. पूर्णिमा शर्मा ने नई सदी की कविता की प्रवृत्तियों पर प्रकाश डालते हुए विशेष रूप से अनामिका के काव्य के संदर्भ अपने विचार प्रस्तुत किए. ‘स्रवंति’ मासिक पत्रिका की सहसंपादक डॉ. गुर्रमकोंडा नीरजा ने ‘नई सदी के काव्य में दलित विमर्श’ पर प्रवर्तन व्याख्यान प्रस्तुत किया. प्रो. अमित चिंगले ने नई सदी की कविता में नीलेश रघुवंशी के योगदान को स्पष्ट किया. सत्र की अध्यक्षता प्रो. ॠषभदेव शर्मा ने की. द्वितीय सत्र मुक्त चिंतन का रहा, जिसमें वक्ता एवं श्रोताओं के बीच रोचक और विचारोत्तेजक संवाद हुआ. श्रोताओं के साहित्य और भाषा विषयक प्रश्नों का समाधान मंचासीन विद्वज्जनों ने किया.
 
तृतीय सत्र में विभिन्न महाविद्यालयों से आए अध्यापकों तथा शोध छात्रों ने प्रपत्र-प्रस्तुत किए. इस सत्र की अध्यक्षता कर्नाटक विश्वविद्यालय, धारवाड़ के हिंदी विभाग के प्रोफेसर डॉ. एस.के. पवार ने की. चतुर्थ सत्र में गुलबर्गा विश्वविद्यालय के पूर्व अध्यक्ष डॉ. काशीनाथ अंबलगे ने ‘हिंदी काव्य:सृजनशीलता और संभावनाएँ’ विषय पर अपना प्रपत्र प्रस्तुत किया. इसी सत्र में मुंबई विश्वविद्यालय के डॉ.दत्तात्रेय मुरुमकर ने नई सदी के हिंदी काव्य पर प्रकाश डालते हुए दलित विमर्श पर चर्चा की.
 
समारोप समारंभ की मुख्य अतिथि हिंदी की चर्चित कथाकार मधु कांकरिया ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आज की कविता संवेदनहीन होती जा रही है, इसके कई उदाहरणों को उन्होंने प्रस्तुत किया. कविता अपनी पहचान खोती जा रही है, इसपर उन्होंने चिंता जताई. अध्यक्षता बी.एल.डी.इ संस्था के प्रशासन अधिकारी प्रो.एस.एच.लगळी ने की. मंच पर बी.एल.डी.इ विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ.बी.जी. मूलिमनी, प्राचार्य डॉ. के.जी. पुजारी उपस्थित थे. रानी-चन्नम्मा विश्वविद्यालय कालेज हिंदी प्राध्यापक संघ के सचिव डॉ.एस.जे. पवार ने धन्यवाद ज्ञापित किया. संगोष्ठी में तीन सौ से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया. 

 चित्र परिचय :
दीप प्रज्वलन के अवसर पर. गुरु संगनबसव महास्वामी जी, डॉ. ऋषभदेव शर्मा, डॉ.के.जी. पुजारी, डॉ. एस. जी. गणी, डॉ. एस. जे. पवार, डॉ. एस. टी. मेरवाडे, डॉ. साहिबहुसैन जहागीरदार एवं अन्य. 

संपर्क : 
डॉ. गुर्रमकोंडा नीरजा
सह-संपादक ‘स्रवंति’, प्राध्यापक
उच्च शिक्षा औ शोध संस्थान,
दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा
खैरताबाद, हैदराबाद – 500 004
ईमेल – neerajagkonda@gmail.com  

saagarika.blogspot.in

srawanti.blogspot.in

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लो भाई प्रधान मंत्री भी जवाव के लिए 6 महीने से इंतजार कर रहे हैं

नई दिल्ली ।

आम आदमी को भूल जाइए, कई बार इस देश के पीएम को ही कुछ सवालों के जवाब के लिए 6 महीने से ज्यादा का इंतजार करना पड़ता है । 11 अगस्त 2014 को पीएम नरेंद्र मोदी ने कानून और न्याय मंत्रालय से एक सवाल पूछा था, जिसका जवाब उन्हें अब तक नहीं मिला है। 

लोकसभा में पूछे गए पीएम के इस सवाल को 6 महीने और 13 दिन हो गए हैं और उन्हें अभी तक इसका उत्तर नहीं मिला है। लोकसभा की वेबसाइट के मुताबिक सवाल नंबर- 4604, सरकारी कागजात में परिजनों का नाम लिखने को लेकर था। यह सवाल छह हिस्सों में पूछा गया था। 

उस समय, रविशंकर प्रसाद के पास सूचना और संचार मंत्रालय के साथ ही कानून और न्याय मंत्रालय भी था। प्रसाद ने प्रोटोकॉल के तहत इसका जवाब दिया था, 'इस बारे में जानकारी एकत्रित की जा रही है और जल्द ही सदन के पटल पर रखी जाएगी।' इसके बाद से अब तक पीएम के सवाल का जवाब नहीं मिला है। 

संयोग से पीएम नरेंद्र मोदी के अलावा यही प्रश्न टीएमसी के सांसद सौमित्र खान ने भी पूछा था। 

पीएम मोदी का सवाल- 

1- क्या सरकारी कागजात में पूरा नाम लिखने के दौरान किसी के लिए उसके पिता के नाम का उल्लेख जरूरी है? 2- अगर हां तो, इसकी जानकारी और संबंधित कानून के प्रावधान बताए जाएं। 3- क्या सरकारी कागजात में कोई पिता के नाम की जगह मां के नाम का उल्लेख कर सकता/सकती है? 4- अगर हां तो, इसकी जानकारी और अगर ऐसा नहीं है तो कानूनी प्रावधान के साथ इसका कारण बताया जाए। 5- क्या सरकार मौजूदा कानून में ऐसा कोई प्रावधान/संशोधन करने जा रही है, जिसके तहत सरकारी कागजात में कोई नागरिक अपनी मर्जी से अपने मां या बाप का नाम दे सके? 6- अगर हां तो, इसकी जानकारी और इसके होने की संभावित समयसीमा की जानकारी। 

साभार-टाईम्स ऑफ इंडिया से 

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विहिप को मंजूर नहीं मंदिर फार्मूला

अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद के विवादास्पद मामले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब ‘अपनों’ के ही निशाने पर आ खड़े हुए हैं। विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने पीएम को आयोध्‍या में राममंदिर निर्माण पर फैसले के लिए इस वर्ष मई माह तक की 'डेडलाइन' दे डाली है। संगठन ने साफ कह दिया है कि अगर मई तक यह मामला नहीं सुलझा, तो अयोध्या में रामलला के मंदिर निर्माण को लेकर देश भर में बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
 
इसके साथ ही हिंदू संगठन ने कहा है कि सभी संत मई 2015 में पीएम के साथ मिलकर एक बैठक करेंगे और मांग करेंगे कि उक्त स्थान पर ही राम मंदिर का निर्माण करने को लेकर वे संसद में कानून प‍ारित करें।
 
वीएचपी के अयोध्या मामले के प्रवक्ता शरद शर्मा ने एक अंग्रेजी अखबार से बातचीत में कहा है कि वीएचपी इस मुद्दे को महत्वहीन नहीं मानता। हम 70 एकड़ की पूरी भूमि चाहते हैं, जिसे मुस्लिम समुदाय द्वारा वाद दायर कर विवादित बना दिया गया है।
 
शर्मा ने आगे कहा, भाजपा ने राष्ट्रीय विकास के एजेंडे के चलते मोदी सत्ता में आए। हम शुरुआत में सरकार को परेशान नहीं करना चाहते थे। यह वीएचपी नेताओं और महत्वपूर्ण संतों की बैठक में ही तय किया गया था कि देश को विकास के रास्ते पर ले जाने के लिए केंद्र को एक साल का वक्त दिया जाए, क्योंकि चुनावों में उन्होंने जनता से यह वादा किया था।
 
वीएचपी नेता ने आरोप लगाया कि 'कुछ लोग जो कोई भूमिका नहीं रखते, वह इस इस मामले में रूचि दिखा रहे हैं। हम बाबरी मस्जिद की ओर से सबसे पुराने वादी हाशिम अंसारी की उत्सुकता को समझते हैं। वह हताशा बाहर लाने के लिए तुच्छ मुद्दों को उठाते रहते हैं। अब वह अखाड़ा परिषद् के प्रमुख महंत ज्ञानदास की मदद लेकर समझौते की एक अनोखी योजना बना रहे हैं। अकसर समाजवादी पार्टी के प्रमुख मुलायम सिंह यादव और उनके प्रतिनिधि हाशिम अंसारी से मिलते रहते हैं, लेकिन हम उनकी चालबाजियों की परवाह नहीं करते।'

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