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प्रधानमंत्री के मन की बात में साहित्य, कला, समाजसेवा और संस्कारों के प्रति समर्पित लोगों की चर्चा

मेरे प्यारे देशवासियो, नमस्कार।

‘मन की बात’ में आपका फिर से स्वागत है, अभिनंदन है। कुछ ही दिनों में साल 2026 दस्तक देने वाला है, और आज, जब मैं आपसे बात कर रहा हूँ, तो मन में पूरे एक साल की यादें घूम रही हैं – कई तस्वीरें, कई चर्चाएं, कई उपलब्धियां, जिन्होंने देश को एक साथ जोड़ दिया। 2025 ने हमें ऐसे कई पल दिए जिन पर  हर भारतीय को गर्व हुआ। देश की सुरक्षा से लेकर खेल के मैदान तक, विज्ञान की प्रयोगशालाओं से लेकर दुनिया के बड़े मंचों तक। भारत ने हर जगह अपनी मजबूत छाप छोड़ी। इस साल ‘ऑपरेशन सिंदूर’ हर भारतीय के लिए गर्व का प्रतीक बन गया। दुनिया ने साफ देखा आज का भारत अपनी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करता। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान देश के कोने-कोने से माँ भारती के प्रति प्रेम और समर्पण की तस्वीरें सामने आई। लोगों ने अपने-अपने तरीके से अपने भाव व्यक्त किये।

साथियो,

यही जज्बा तब भी देखने को मिला, जब ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे हुए। मैंने आपसे आग्रह किया था कि  ‘#VandeMataram150’ के साथ अपने संदेश और सुझाव भेजें। देशवासियों ने इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

साथियो,

2025 खेल के लिहाज़ से भी एक यादगार साल रहा। हमारी पुरुष Cricket team ने ICC Champions Trophy जीती। महिला Cricket team ने पहली बार विश्व कप अपने नाम किया। भारत की बेटियों ने Women’s Blind T20 World Cup जीतकर इतिहास रच दिया। एशिया कप T20 में भी तिरंगा शान से लहराया। पैरा एथलीटों ने विश्व Championship में कई पदक जीतकर ये साबित किया कि कोई बाधा हौंसलों को नहीं रोक सकती। विज्ञान और अंतरिक्ष के क्षेत्र में भी भारत ने बड़ी छलांग लगाई। शुभांशु शुक्ला पहले भारतीय बने, जो International Space Station तक पहुंचे। पर्यावरण संरक्षण और वन्य-जीवों की सुरक्षा से जुड़े कई प्रयास भी 2025 की पहचान बने। भारत में चीतों की संख्या भी अब 30 से ज्यादा हो गई है। 2025 में आस्था, संस्कृति और भारत की अद्वितीय विरासत सब एक साथ दिखाई दी। साल के शुरुआत में प्रयागराज महाकुंभ के आयोजन ने पूरी दुनिया को चकित किया। साल के अंत में अयोध्या में राम मंदिर पर ध्वजारोहण के कार्यक्रम ने हर भारतीय को गर्व से भर दिया। स्वदेशी को लेकर भी लोगों का उत्साह खूब दिखाई दिया। लोग वही सामान खरीद रहे हैं, जिसमें किसी भारतीय का पसीना लगा हो और जिसमें भारत की मिट्टी की सुगंध हो। आज हम गर्व से कह सकते हैं 2025 ने भारत को और अधिक आत्मविश्वास दिया है। ये बात भी सही है इस वर्ष प्राकृतिक आपदाएं हमें झेलनी पड़ी, अनेक क्षेत्रों में झेलनी पड़ी। अब देश 2026 में नई उम्मीदों, नए संकल्पों के साथ आगे बढ़ने को तैयार है।

मेरे प्यारे देशवासियो,

आज दुनिया भारत को बहुत आशा के साथ देख रही है। भारत से उम्मीद की सबसे बड़ी वजह है, हमारी युवा शक्ति। विज्ञान के क्षेत्र में हमारी उपलब्धियां, नए-नए innovation, technology का विस्तार इनसे दुनियाभर के देश बहुत प्रभावित हैं।

साथियो,

भारत के युवाओं में हमेशा कुछ नया करने का जुनून है और वो उतने ही जागरूक भी हैं। मेरे युवा साथी कई बार मुझसे यह पूछते हैं कि nation building में वो अपना योगदान और कैसे बढ़ाएं? वो कैसे अपने ideas share कर सकते हैं। कई साथी पूछते हैं कि मेरे सामने वो अपने ideas का presentation कैसे दे सकते हैं? हमारे युवा साथियों की इस जिज्ञासा का समाधान है ‘Viksit  Bharat Young Leaders Dialogue’। पिछले साल इसका पहला edition हुआ था, अब कुछ दिन बाद उसका दूसरा edition होने वाला है। अगले महीने की 12 तारीख को स्वामी विवेकानंद जी की जयंती के अवसर पर ‘राष्ट्रीय युवा दिवस’ मनाया जाएगा। इसी दिन ‘Young Leaders Dialogue’ का भी आयोजन होगा और मैं भी इसमें जरूर शामिल होऊंगा। इसमें हमारे युवा Innovation, Fitness, Startup और Agriculture जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपने ideas share करेंगे। मैं इस कार्यक्रम को लेकर बहुत ही उत्सुक हूँ।

साथियो,

मुझे ये देखकर अच्छा लगा कि इस कार्यक्रम में हमारे युवाओं की भागीदारी बढ़ रही है। कुछ दिनों पहले ही इससे जुड़ा एक quiz competition हुआ। इसमें 50 लाख से अधिक युवा शामिल हुए। एक निबंध प्रतियोगिता भी हुई, जिसमें students ने विभिन्न विषयों पर अपनी बातें रखीं। इस प्रतियोगिता में तमिलनाडु पहले और उत्तर प्रदेश दूसरे स्थान पर रहा।

साथियो,

आज देश के भीतर युवाओं को प्रतिभा दिखाने के नए- नए अवसर मिल रहे हैं। ऐसे बहुत से platforms विकसित हो रहे हैं, जहां युवा अपनी योग्यता और रुचि के अनुसार talent दिखा सकते हैं। ऐसा ही एक platform है- ‘Smart India Hackathon’ एक और ऐसा माध्यम जहां ideas, action में बदलते हैं।

साथियो,

‘Smart India Hackathon 2025’ का समापन इसी महीने हुआ है। इस Hackathon के दौरान 80 से अधिक सरकारी विभागों की 270 से ज्यादा समस्याओं पर students ने काम किया। Students ने ऐसे solution दिए, जो real life challenges से जुड़े थे। जैसे traffic की समस्या है। इसे लेकर युवाओं ने ‘Smart Traffic Management’ से जुड़े बहुत ही interesting perspective share किए। Financial Frauds और Digital Arrests जैसी चुनौतियों के समाधान पर भी युवाओं ने अपने ideas सामने रखे। गाँवों में digital banking के लिए Cyber Security Framework पर सुझाव दिया। कई युवा agriculture sector की चुनौतियों के समाधान में जुटे रहे। साथियो, पिछले 7-8 साल में ‘Smart India Hackathon’ में, 13 लाख से ज्यादा students और 6 हजार से ज्यादा Institutes हिस्सा ले चुके हैं। युवाओं ने सैंकड़ों problems के सटीक solutions भी दिए हैं। इस तरह के Hackathons का आयोजन समय-समय पर होता रहता है। मेरा अपने युवा साथियों से आग्रह है कि वे इन Hackathons का हिस्सा जरूर बनें।

साथियो,

आज का जीवन Tech-Driven होता जा रहा है और जो परिवर्तन सदियों में आते थे वो बदलाव हम कुछ बरसों में होते देख रहे हैं। कई बार तो कुछ लोग चिंता जताते हैं कि Robots कहीं मनुष्यों को ही न Replace कर दें। ऐसे बदलते समय में Human Development के लिए अपनी जड़ों से जुड़े रहना बहुत जरूरी है। मुझे ये देखकर बहुत खुशी होती है कि हमारी अगली पीढ़ी अपनी संस्कृति की जड़ों को अच्छी तरह थाम रही है – नई सोच के साथ नए तरीकों के साथ।

साथियो,

आपने Indian Institute of Science उसका नाम तो  जरूर सुना होगा। Research और Innovation इस संस्थान की पहचान है। कुछ साल पहले वहाँ के कुछ छात्रों ने महसूस किया कि पढ़ाई और Research के बीच संगीत के लिए भी जगह होनी चाहिए। बस यहीं से एक छोटी-सी Music Class शुरू हुई। ना बड़ा मंच, ना कोई बड़ा बजट। धीरे-धीरे ये पहल बढ़ती गई और आज इसे हम ‘Geetanjali IISc’ के नाम से जानते हैं। यह अब सिर्फ एक Class नहीं, Campus का सांस्कृतिक केंद्र है। यहाँ हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत है, लोक परंपराएँ हैं, शास्त्रीय विधाएं हैं, छात्र यहाँ साथ बैठकर रियाज़ करते हैं। Professor साथ बैठते हैं, उनके परिवार भी जुड़ते हैं। आज दो-सौ से ज्यादा लोग इससे जुड़े हैं। और खास बात ये कि जो विदेश चले गए, वो भी Online जुड़कर इस Group की डोर थामे हुए हैं।

साथियो,

अपनी जड़ों से जुड़े रहने के ये प्रयास सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। दुनिया के अलग-अलग कोनों और वहाँ बसे भारतीय भी अपनी भूमिका निभा रहे हैं। एक और उदाहरण जो हमें देश से बाहर ले जाता है – ये जगह है ‘दुबई’। वहाँ रहने वाले कन्नड़ा परिवारों ने खुद से एक जरूरी सवाल पूछा – हमारे बच्चे Tech-World में आगे तो बढ़ रहें हैं, लेकिन कहीं वो अपनी भाषा से दूर तो नहीं हो रहे हैं? यहीं से जन्म हुआ ‘कन्नड़ा पाठशाले’ का। एक ऐसा प्रयास, जहां बच्चों को ‘कन्नड़ा’ पढ़ाना, सीखना, लिखना और बोलना सिखाया जाता है। आज इससे एक हजार से ज्यादा बच्चे जुड़े हैं। वाकई, कन्नड़ा नाडु, नुडी नम्मा हेम्मे। कन्नड़ा की भूमि और भाषा, हमारा गर्व है।

साथियो,

एक पुरानी कहावत है ‘जहां चाह, वहाँ राह’। इस कहावत को फिर से सच कर दिखाया है मणिपुर के एक युवा मोइरांगथेम सेठ जी ने। उनकी उम्र 40 साल से भी कम है। श्रीमान् मोइरांगथेम जी मणिपुर के जिस दूर-सुदूर क्षेत्र में रहते थे वहाँ बिजली की बड़ी समस्या थी। इस चुनौती से निपटने के लिए उन्होंने Local Solution पर जोर दिया और उन्हें ये Solution मिला Solar Power में। हमारे मणिपुर में वैसे भी Solar Energy पैदा करना आसान है। तो मोइरांगथेम जी ने Solar Panel लगाने का अभियान चलाया और इस अभियान की वजह से आज उनके क्षेत्र के सैकड़ों घरों में Solar Power पहुंच गई है। खास बात ये है कि उन्होंने Solar Power का उपयोग Health-Care और आजीविका को बेहतर बनाने के लिए किया है। आज उनके प्रयासों से मणिपुर में कई Health Centers को भी Solar Power मिल रही है। उनके इस काम से मणिपुर की नारी-शक्ति को भी बहुत लाभ मिला है। स्थानीय मछुआरों और कलाकारों को भी इससे मदद मिली है।

साथियो,

आज सरकार ‘PM सूर्य घर मुफ़्त बिजली योजना’ के तहत हर लाभार्थी परिवार को Solar Panel लगाने के लिए करीब-करीब 75 से 80 हजार रुपए दे रही है। मोइरांगथेम जी के ये प्रयास यूं तो व्यक्तिगत प्रयास हैं, लेकिन Solar Power से जुड़े हर अभियान को नई गति दे रहे हैं। मैं ‘मन की बात’ के माध्यम से उन्हें अपनी शुभकामनाएँ देता हूँ।

मेरे प्यारे देशवासियो,

आइए अब जरा हम जम्मू-कश्मीर की तरफ चलते हैं। जम्मू-कश्मीर की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत, उसकी एक ऐसी गाथा साझा करना चाहता हूँ, जो आपको गर्व से भर देगी। जम्मू-कश्मीर के बारामूला में, जेहनपोरा नाम की एक जगह है। वहां लोग बरसों से कुछ ऊंचे-ऊंचे टीले देखते आ रहे थे। साधारण से टीले किसी को नहीं पता था कि ये क्या है? फिर एक दिन Archaeologist की नज़र इन पर पड़ी। जब उन्होंने इस इलाके को ध्यान से देखना शुरू किया, तो ये टीले कुछ अलग लगे। इसके बाद इन टीलों का वैज्ञानिक अध्ययन शुरू किया गया। ड्रोन के ज़रिए ऊपर से तस्वीरें ली गईं, ज़मीन की Mapping की गई। और फिर कुछ हैरान करने वाली बातें सामने आने लगी। पता चला ये टीले प्राकृतिक नहीं हैं। ये इंसान द्वारा बनाई गई किसी बड़ी इमारत के अवशेष हैं। इसी दौरान एक और दिलचस्प कड़ी जुड़ी। कश्मीर से हजारों किलोमीटर दूर, फ़्रांस के एक Museum के Archives में एक पुराना, धुंधला सा चित्र मिला। बारामूला के उस चित्र में तीन बौद्ध स्तूप नजर आ रहे थे। यहीं से समय ने करवट ली और कश्मीर का एक गौरवशाली अतीत हमारे सामने आया। ये करीब दो हजार साल पुराना इतिहास है। कश्मीर के जेहनपोरा का ये बौद्ध परिसर हमें याद दिलाता है, कश्मीर का अतीत क्या था, उसकी पहचान कितनी समृद्ध थी।

मेरे प्यारे देशवासियो,

अब मैं आपसे भारत से हजारों किलोमीटर दूर, एक ऐसे प्रयास की बात करना चाहता हूँ, जो दिल को छू लेने वाला है। Fiji में भारतीय भाषा और संस्कृति के प्रसार के लिए एक सराहनीय पहल हो रही है। वहाँ की नई पीढ़ी को तमिल भाषा से जोड़ने के लिए कई स्तरों पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। पिछले महीने Fiji के राकी-राकी इलाके में वहाँ के एक स्कूल में पहली बार तमिल दिवस मनाया गया। उस दिन बच्चों को एक ऐसा मंच मिला, जहां उन्होंने अपनी भाषा पर खुले दिल से गौरव व्यक्त किया। बच्चों ने तमिल में कविताएँ सुनाई, भाषण दिए और अपनी संस्कृति को पूरे आत्मविश्वास के साथ मंच पर उतारा।

साथियो,

देश के भीतर भी तमिल भाषा के प्रचार के लिए लगातार काम हो रहा है। कुछ दिन पहले ही मेरे संसदीय क्षेत्र काशी में चौथा ‘काशी तमिल संगमम’ हुआ। अब मैं आपको एक audio clip सुनाने जा रहा हूँ। आप सुनिए और अंदाज़ा लगाइए तमिल बोलने की कोशिश कर रहे ये बच्चे कहां के हैं?

# (Audio Clip 1 पायल) #

 

साथियो,

आपको जानकार हैरानी होगी तमिल भाषा में इतनी सहजता से अपनी बात रखने वाले ये बच्चे काशी के हैं, वाराणसी के हैं। इनकी मातृभाषा हिन्दी है, लेकिन तमिल भाषा के प्रति लगाव ने इन्हें तमिल सीखने के लिए प्रेरित किया है। इस साल वाराणसी में ‘काशी तमिल संगमम’ के दौरान तमिल सीखने पर खास ज़ोर दिया गया था।

Learn Tamil – ‘तमिल कराकलम’ इस Theme के तहत वाराणसी के 50 से ज्यादा स्कूलों में विशेष अभियान भी चलाए गए। इसी का नतीजा हमें इस audio clip में सुनाई देता है।

# (Audio Clip 2 वैष्णवी) #

 

साथियो,

तमिल भाषा दुनिया की सबसे प्राचीन भाषा है। तमिल साहित्य भी अत्यंत समृद्ध है। मैंने ‘मन की बात’ में ‘काशी तमिल संगमम’ में भाग लेने का आग्रह किया था। मुझे खुशी है कि आज देश के दूसरे हिस्सों में भी बच्चों और युवाओं के बीच तमिल भाषा को लेकर नया आकर्षण दिख रहा है –  यही भाषा की ताकत है, यही भारत की एकता है।

साथियो,

अगले महीने हम देश का 77वाँ गणतंत्र दिवस मनाएंगे। जब भी ऐसे अवसर आते हैं, तो हमारा मन स्वतंत्रता सेनानियों और संविधान निर्माताओं के प्रति कृतज्ञता के भाव से भर जाता है। हमारे देश ने आजादी पाने के लिए लंबा संघर्ष किया है। आजादी के आंदोलन में देश के हर हिस्से के लोगों ने अपना योगदान दिया है। लेकिन, दुर्भाग्य से आजादी के अनेकों नायक-नायिकाओं को वो सम्मान नहीं मिला, जो उन्हें मिलना चाहिए था। ऐसी ही एक स्वतंत्रता सेनानी हैं – ओडिशा की पार्वती गिरि जी। जनवरी 2026 में उनकी जन्म-शताब्दी मनाई जाएगी। उन्होंने 16 वर्ष की आयु में ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ में हिस्सा लिया था। साथियो, आजादी के आंदोलन के बाद पार्वती गिरि जी ने अपना जीवन समाज सेवा और जनजातीय कल्याण को समर्पित कर दिया था। उन्होंने कई अनाथालयों की स्थापना की। उनका प्रेरक जीवन हर पीढ़ी का मार्गदर्शन करता रहेगा।

“मूँ पार्वती गिरि जिंकु श्रद्धांजलि अर्पण करुछी”

(मैं पार्वती गिरी जी को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ)

 

साथियो,

ये हमारा दायित्व है कि हम अपनी विरासत को ना भूलें| हम आजादी दिलाने वाले नायक-नायिकाओं की महान गाथा को अगली पीढ़ी तक पहुंचाएं। आपको याद होगा जब हमारी आजादी के 75 वर्ष हुए थे, तब सरकार ने एक विशेष website तैयार की थी। इसमें एक विभाग  ‘Unsung Heroes’ को समर्पित किया गया था। आज भी आप इस website पर visit करके उन महान विभूतियों के बारे में जान सकते हैं जिनकी देश को आजादी दिलाने में बहुत बड़ी भूमिका रही है।

मेरे प्यारे देशवासियो,

‘मन की बात’ के जरिए हमें समाज की भलाई से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा करने का एक बहुत अच्छा अवसर मिलता है। आज मैं एक ऐसे मुद्दे पर बात करना चाहता हूँ, जो हम सभी के लिए चिंता का विषय बन गया है। ICMR यानि Indian Council of Medical Research ने हाल ही में एक report जारी की है। इसमें बताया गया है कि निमोनिया और UTI जैसी कई बीमारियों के खिलाफ antibiotic दवाएं कमजोर साबित हो रही हैं। हम सभी के लिए यह बहुत ही चिंताजनक है। report के मुताबिक इसका एक बड़ा कारण लोगों द्वारा बिना सोचे-समझे antibiotic दवाओं का सेवन है। antibiotic ऐसी दवाएं नहीं हैं, जिन्हें यूं ही ले लिया जाए। इनका इस्तेमाल Doctor की सलाह से ही करना चाहिए। आजकल लोग ये मानने लगे हैं कि बस एक गोली ले लो, हर तकलीफ दूर हो जाएगी। यही वजह है कि बीमारियाँ और संक्रमण इन antibiotic दवाओं पर भारी पड़ रहे हैं। मैं आप सभी से आग्रह करता हूँ कि कृपया अपनी मनमर्जी से दवाओं का इस्तेमाल करने से बचें। Antibiotic दवाओं के मामले में तो इस बात का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। मैं तो यही कहूँगा – Medicines के लिए Guidance और Antibiotics के लिए Doctors की जरूरत है। यह आदत आपकी सेहत को बेहतर बनाने में बहुत मददगार साबित होने वाली है।

मेरे प्यारे देशवासियो,

हमारी पारंपरिक कलाएं समाज को सशक्त करने के साथ ही लोगों की आर्थिक प्रगति का भी बड़ा माध्यम बन रही हैं। आंध्र प्रदेश के नारसापुरम जिले की Lace Craft (लेस क्राफ्ट) की चर्चा अब पूरे देश में बढ़ रही है। ये Lace Craft (लेस क्राफ्ट) कई पीढ़ियों से महिलाओं के हाथों में रही है। बहुत धैर्य और बारीकी के साथ देश की नारी-शक्ति ने इसका संरक्षण किया है। आज इस परंपरा को एक नए रंग रूप के साथ आगे ले जाया जा रहा है। आंध्र प्रदेश सरकार और NABARD मिलकर कारीगरों को नए design सिखा रहे हैं, बेहतर skill training दे रहे हैं और नए बाजार से जोड़ रहे हैं । नारसापुरम Lace को GI Tag भी मिला है । आज इससे 500 से ज्यादा products बन रहे हैं और ढ़ाई-सौ से ज्यादा गांवों में करीब-करीब 1 लाख महिलाओं को इससे काम मिल रहा है।

साथियो,

‘मन की बात’ ऐसे लोगों को सामने लाने का भी मंच है जो अपने परिश्रम से ना सिर्फ पारंपरिक कलाओं को आगे बढ़ा रहे हैं बल्कि इससे स्थानीय लोगों को सशक्त भी कर रहे हैं। मणिपुर के चुराचांदपुर में Margaret Ramtharsiem जी उनके प्रयास ऐसे ही हैं। उन्होंने मणिपुर के पारंपरिक उत्पादों को, वहाँ के handicraft को, बांस और लकड़ी से बनी चीजों को, एक बड़े vision के साथ देखा और इसी vision के कारण, वो एक handicraft artist से लोगों के जीवन को बदलने का माध्यम बन गईं। आज Margaret जी की unit उसमें 50 से ज्यादा artist काम कर रहे हैं और उन्होंने अपनी मेहनत से दिल्ली समेत देश के कई राज्यों में, अपने products का एक market भी develop किया है।

साथियो,

मणिपुर से ही एक और उदाहरण सेनापति जिले की रहने वाली चोखोने क्रिचेना जी का है। उनका पूरा परिवार परंपरागत खेती से जुड़ा रहा है। क्रिचेना ने इस पारंपरिक अनुभव को एक और विस्तार दिया। उन्होंने फूलों की खेती को अपना passion बनाया। आज वो इस काम से अलग-अलग markets को जोड़ रहीं हैं और अपने इलाके की local communities को भी Empower कर रही हैं। साथियो, ये उदाहरण इस बात का पर्याय है कि अगर पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक vision के साथ आगे बढ़ाएं तो ये आर्थिक प्रगति का बड़ा माध्यम बन जाता है। आपके आसपास भी ऐसी success stories हों, तो मुझे जरूर share करिए।

साथियो,

हमारे देश की सबसे खूबसूरत बात ये है कि सालभर हर समय देश के किसी-ना-किसी हिस्से में उत्सव का माहौल रहता है। अलग-अलग पर्व-त्योहार तो हैं ही, साथ ही विभिन्न राज्यों के स्थानीय उत्सव भी आयोजित होते रहते हैं। यानि, अगर आप घूमने का मन बनाएं, तो हर समय, देश का कोई-ना-कोई कोना अपने unique उत्सव के साथ तैयार मिलेगा। ऐसा ही एक उत्सव इन दिनों कच्छ के रण में चल रहा है। इस साल कच्छ रणोत्सव का ये आयोजन 23 नवंबर से शुरू हुआ है, जो 20 फरवरी तक चलेगा। यहाँ कच्छ की लोक संस्कृति, लोक संगीत, नृत्य और हस्तशिल्प की विविधता दिखाई देती है। कच्छ के सफेद रण की भव्यता देखना अपने आप में एक सुखद अनुभव है। रात के समय जब सफेद रण के ऊपर चाँदनी फैलती है, वहाँ का दृश्य अपने आप में मंत्रमुग्ध कर देने वाला होता है। रण उत्सव का Tent City बहुत लोकप्रिय है। मुझे जानकारी मिली है कि पिछले एक महीने में अब तक 2 लाख से ज्यादा लोग रणोत्सव का हिस्सा बन चुके हैं और देश के कोने-कोने से आए हैं, विदेश से भी लोग आए हैं। आपको जब भी अवसर मिले, तो ऐसे उत्सवों में जरूर शामिल हों और भारत की विविधता का आनद उठाएं।

साथियो,

2025 में ‘मन की बात’ का ये आखिरी episode है, अब हम साल 2026 में ऐसे ही उमंग और उत्साह के साथ, अपनेपन के साथ अपने ‘मन की बातों’ को करने के लिए ‘मन की बात’ के कार्यक्रम में जरूर जुड़ेंगे। नई ऊर्जा, नए विषय और प्रेरणा से भर देने वाली देशवासियों की अनगिनित गाथाओं ‘मन की बात’ में हम सबको जोड़ती है। हर महीने मुझे ऐसे अनेक संदेश मिलते हैं, जिसमें ‘विकसित भारत’ को लेकर लोग अपना vision साझा करते हैं। लोगों से मिलने वाले सुझाव और इस दिशा में उनके प्रयासों को देखकर ये विश्वास और मजबूत होता है और जब ये सब बातें मेरे तक पहुँचती हैं, तो ‘विकसित भारत’ का संकल्प जरूर सिद्ध होगा। ये विश्वास दिनों दिन मजबूत होता जाता है। साल 2026 इस संकल्प सिद्धि की यात्रा में एक अहम पड़ाव साबित हो, आपका और आपके परिवार का जीवन खुशहाल हो, इसी कामना के साथ इस episode में विदाई लेने से पहले मैं जरूर कहूँगा, ‘Fit India Movement’ आप को भी fit रहना है। ठंडी का ये मौसम व्यायाम के लिए बहुत उपयुक्त होता है, व्यायाम जरूर करें। आप सभी को 2026 की बहुत-बहुत शुभकामनाएं। धन्यवाद। वंदे मातरम्।

क्षेत्रीय पुरा धरोहर पर राष्ट्रीय पुरातत्त्व सेमिनार अजमेर में 4 जनवरी को

हिन्द की सांस्कृतिक विरासत समूह झालावाड़ द्वारा “क्षेत्रीय पुरा धरोहर – एक परिचय” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय  सेमिनार का आयोजन 4 जनवरी 26 को अजमेर में श्री लोढ़ा धर्मशाला में किया जाएगा। आयोजन समिति के वरिष्ठ सदस्य इतिहासविद् झालावाड़ ललित शर्मा ने बताया कि सेमिनार में विद्वान इतिहासविदों द्वारा शोध पत्रों की प्रस्तुति दी जाएगी। इसमें आमंत्रित सदस्य भाग लेंगे। उन्होंने बताया कि सेमिनार में की अध्यक्षता श्रीमती धर्मजीत कौर अधीक्षक तकनीकी राजस्थान पुरातत्त्व एवं संग्रहालय विभाग, जयपुर करेंगी तथा मुख्य अतिथि प्रो० सत्यनारायण समदानी संस्थापक  संपादक मीरा स्मृति संस्थान, मीरायन, चित्तौड़गढ़ होंगे।
सेमिनार में विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रबन्ध निदेशक दी कोटा सेन्ट्रल को-आपरेटिव बैंक, कोटा डॉ. बलविन्दर सिंह गिल, डॉ. नारायण व्यास प्राच्य पुरातत्त्वविद्, भोपाल, डॉ. आर.सी. ठाकुर निदेशक अश्विनी मुद्रा शोध संस्थान, महिदपुर, उज्जैन एवं डॉ. ध्रुवेन्द्र सिंह जोधा शोध अधिकारी वाकणकर पुरातत्त्व शोध संस्थान, भोपाल भाग लेंगे। सेमिनार आयोजन में डॉ. वर्षा नालमे पुष्पा शर्मा,  डॉ.उर्मिला शर्मा नरेन्द्र सिंह ‘जसनगर’ एवं हंसराज नागर सक्रिय भागीदारी कर रहे हैं।

भारतीय रेल ने अगले पाँच वर्षों में प्रमुख शहरों में ट्रेनों की क्षमता दोगुनी करने की योजना बनाई

मुंबई, सूरत, वडोदरा, अहमदाबाद, उज्जैन एवं इंदौर में यात्रा सुविधाओं में होगा विस्तार

 

मुंबई। यात्रियों की यात्रा मांग में तीव्र एवं निरंतर वृद्धि को देखते हुए भारतीय रेल ने अगले पाँच वर्षों में प्रमुख शहरों से नई ट्रेनों के संचालन की क्षमता को दोगुना करने की योजना बनाई है। भविष्य की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए मौजूदा रेलवे अवसंरचना का व्यापकचरणबद्ध एवं समयबद्ध उन्नयन किया जाएगा।

वर्ष 2030 तक ट्रेनों की हैंडलिंग क्षमता दोगुनी करने के उद्देश्य से जिन कार्यों की योजना बनाई गई हैउनमें टर्मिनलों का विस्तार करते हुए अतिरिक्त प्लेटफॉर्मों का निर्माणनई पिट लाइनों की व्यवस्थाहोल्डिंग एवं स्टेबलिंग लाइनों का विकासशंटिंग व्यवस्थाओं में सुधारशहरी क्षेत्रों के भीतर एवं आसपास नए टर्मिनलों का निर्माणमेगा कोचिंग कॉम्प्लेक्स सहित रखरखाव अवसंरचना का विकास तथा सिग्नलिंग उन्नयनट्रैफिक सुविधा कार्यों एवं मल्टी-ट्रैकिंग के माध्यम से सेक्शन क्षमता में वृद्धि शामिल है। देश के 48 प्रमुख शहरों को कवर करने वाली एक समग्र योजना पर विचार किया जा रहा हैजिसके अंतर्गत अगले पाँच वर्षों में चरणबद्ध रूप से क्षमता बढ़ाई जाएगी ताकि यात्रियों को शीघ्र लाभ मिल सके।

पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी श्री विनीत अभिषेक द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसारइस राष्ट्रीय योजना के अंतर्गत पश्चिम रेलवे ने अपने क्षेत्राधिकार में क्षमता वृद्धि हेतु छह प्रमुख शहरोंमुंबईसूरतवडोदराअहमदाबादउज्जैन एवं इंदौर को चिन्हित किया है। इन शहरों में टर्मिनल विस्ताररखरखाव एवं स्टेबलिंग अवसंरचना के विकास तथा सेक्शन क्षमता में सुधार के माध्यम से चरणबद्ध रूप से क्षमता संवर्धन किया जाएगाजिससे भविष्य की यातायात आवश्यकताओं को प्रभावी रूप से पूरा किया जा सके।

मुंबई क्षेत्र में लंबी दूरी की ट्रेनों की क्षमता में वृद्धि

पश्चिम रेलवे मुंबई क्षेत्र में यात्रियों के लिए लंबी दूरी की ट्रेनों की हैंडलिंग क्षमता बढ़ाने हेतु अनेक महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। इनमें नए टर्मिनलों का निर्माणअतिरिक्त लाइनों का विकासनई रखरखाव सुविधाओं का सृजनप्लेटफॉर्म विस्तार सहित विभिन्न अवसंरचनात्मक कार्य शामिल हैं।

वर्तमान में पश्चिम रेलवे मुंबई क्षेत्र से 44 लंबी दूरी की ट्रेनों का संचालन करती है। इन अवसंरचनात्मक कार्यों के पूर्ण होने के पश्चात लगभग 65 अतिरिक्त लंबी दूरी की ट्रेनों के परिचालन की योजना है। इसके अतिरिक्तमौजूदा ट्रेनों में प्रतिदिन लगभग 70 कोचों की वृद्धि भी प्रस्तावित है।

भीड़भाड़ कम करने एवं यात्रा परिस्थितियों में सुधार लाने के उद्देश्य से मुंबई सेंट्रलदहानू रोड सेक्शन पर लगभग ₹6857 करोड़ की कुल लागत से लाइन क्षमता बढ़ाने के विभिन्न कार्य किए जा रहे हैं। MUTP-II के अंतर्गत 30 किलोमीटर लंबी मुंबई सेंट्रलबोरीवली छठी लाइन परियोजना ₹919 करोड़ की लागत से दो चरणों में क्रियान्वित की जा रही है। चरण-के अंतर्गत खारकांदिवली खंड का कमीशनिंग पूर्ण हो चुका हैजबकि कांदिवलीबोरीवली खंड का कार्य अंतिम चरण में है और इसके जनवरी 2026 तक पूर्ण होने की संभावना है। इस परियोजना के पूर्ण होने पर बांद्रा टर्मिनस से आने-जाने वाली ट्रेनों के लिए इस सेक्शन पर दो समर्पित लाइनें उपलब्ध होंगीजिससे उपनगरीय एवं मुख्य लाइन यातायात का बेहतर पृथक्करण संभव होगा तथा मुंबई क्षेत्र से अतिरिक्त लंबी दूरी की ट्रेनों के संचालन में सहायता मिलेगी। 

इसके अतिरिक्त, ₹2184 करोड़ की लागत से बोरीवलीविरार 5वीं एवं 6वीं लाइन परियोजना तथा ₹3578 करोड़ की लागत से विरारदहानू रोड 3री एवं 4थी लाइन परियोजना पर भी तीव्र गति से कार्य प्रगति पर है। इनके पूर्ण होने से संबंधित सेक्शनों पर अतिरिक्त लाइन क्षमता उपलब्ध होगीजिससे लंबी दूरी की ट्रेनों के संचालन के लिए अधिक क्षमता सृजित होगी। साथ ही, ₹176 करोड़ की लागत से निर्माणाधीन नायगांवजुईचंद्रा डबल कॉर्ड लाइन परियोजना वसई रोड पर लोको रिवर्सल की आवश्यकता को समाप्त करते हुए कोंकण रेलवे की ओर सीधी कनेक्टिविटी प्रदान करेगीजिससे पश्चिमी उपनगरों से कोंकणगोवा एवं उससे आगे के क्षेत्रों के लिए नई ट्रेन सेवाओं का मार्ग प्रशस्त होगा। सामूहिक रूप सेये सभी पहलें समयपालन में सुधारभीड़ में कमी तथा यात्रियों के लिए अधिक आरामदायक यात्रा अनुभव सुनिश्चित करेंगी।

लंबी दूरी की ट्रेनों के लिए जोगेश्वरी में तीन प्लेटफॉर्मों वाला एक नया टर्मिनस निर्माणाधीन हैजिसका कार्य तीव्र गति से प्रगति पर है और इसके अगले वर्ष के मध्य तक पूरा होने की संभावना है। इसी प्रकारवसई रोड स्टेशन पर भी लंबी दूरी की ट्रेनों के लिए एक नया टर्मिनस विकसित किया जा रहा हैजहां दो नए प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराए जा रहे हैं और इसका कार्य दिसंबर 2027 तक पूर्ण होने की संभावना है। नए टर्मिनलों के अतिरिक्तमौजूदा टर्मिनलोंमुंबई सेंट्रलबांद्रा टर्मिनस एवं दादरपर भी नए प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराए जा रहे हैं तथा रखरखाव सुविधाओं का उन्नयन किया जा रहा है। मुंबई सेंट्रल में मौजूदा सिक लाइन का विस्तार एकीकृत रखरखाव हेतु किया जा रहा हैजबकि दादर में एक नया प्लेटफॉर्म प्रदान किया जा रहा है। बांद्रा टर्मिनस पर तीन नई पिट लाइनों का कमीशनिंग किया जा चुका है। इसके अलावामुंबई सेंट्रल पर प्लेटफॉर्म संख्या 5 का 24-कोच लंबाई तक विस्तार एवं दो नई पिट लाइनों का निर्माण प्रस्तावित है। जोगेश्वरी में चरण-II के अंतर्गत दो अतिरिक्त प्लेटफॉर्म एवं दो पिट लाइनें तथा वसई रोड पर कोचिंग टर्मिनल का विकास एवं एक पिट लाइन का निर्माण भी प्रस्तावित है।

उपनगरीय सेवाओं में वृद्धि

वर्तमान में पश्चिम रेलवे तीन कार शेडों में अनुरक्षित 116 रेकों के माध्यम से प्रतिदिन 1406 उपनगरीय सेवाओं का संचालन करती है। मुंबई सेंट्रलबोरीवली छठी लाइनबोरीवलीविरार 5वीं एवं 6वीं लाइन तथा विरारदहानू रोड 3री एवं 4थी लाइन जैसे विभिन्न अवसंरचनात्मक कार्यों के पूर्ण होने पर उपनगरीय यातायात का मुख्य लाइन यातायात से पृथक्करण संभव होगाजिससे उपनगरीय परिचालन के लिए अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध होगी। इसके साथ-साथ गोरेगांव से बोरीवली तक हार्बर लाइन विस्तार का कार्य भी तीव्र गति से प्रगति पर है। इसके अतिरिक्तबांद्राअंधेरी सेक्शन पर प्लेटफॉर्म लंबाई को 15-कोच तक बढ़ाने की भी योजना है। इन सभी अवसंरचनात्मक उन्नयन कार्यों के पूर्ण होने पर 165 अतिरिक्त उपनगरीय सेवाएं चलाने की योजना है।

राष्ट्रीय योजना के अनुरूप पश्चिम रेलवे पर क्षमता वृद्धि कार्यक्रम को तात्कालिकअल्पकालिक एवं दीर्घकालिक कार्य योजनाओं के माध्यम से स्पष्ट समयसीमा एवं लक्ष्यों के साथ लागू किया जा रहा है। जहां वर्ष 2030 तक ट्रेनों की हैंडलिंग क्षमता दोगुनी करना इसका प्रमुख उद्देश्य हैवहीं अगले पाँच वर्षों में चरणबद्ध क्षमता वृद्धि के माध्यम से यात्रियों को शीघ्र लाभ तथा ट्रेनों के सुचारू एवं निर्बाध संचालन को सुनिश्चित किया जाएगा।

केंद्रीय रेल मंत्रीसूचना एवं प्रसारण मंत्री तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, “हम यात्रियों की बढ़ती मांग को पूरा करने और भीड़भाड़ को कम करने के लिए विभिन्न शहरों में कोचिंग टर्मिनलों का विस्तार कर रहे हैं तथा अनुभागीय एवं परिचालन क्षमताओं में वृद्धि कर रहे हैं। इस पहल से हमारे रेलवे नेटवर्क का उन्नयन होगा और राष्ट्रव्यापी संपर्क सुविधा को सुदृढ़ किया जा सकेगा।

वर्ष 2025 में पश्चिम रेल्वे की उपलब्धियाँ

मुंबई।  कैलेंडर वर्ष 2025 पश्चिम रेलवे के लिए एक ऐतिहासिक एवं परिवर्तनकारी वर्ष के रूप में उभरकर सामने आया। यह वर्ष राष्ट्रीय महत्व की उपलब्धियोंरिकॉर्ड अवसंरचना विकासउत्कृष्ट परिचालन प्रदर्शन तथा यात्री सुरक्षासेवा गुणवत्ताडिजिटल शासनराजस्व वृद्धि और सतत विकास पर निरंतर केंद्रित प्रयासों से परिपूर्ण रहा। वर्ष भर पश्चिम रेलवे ने व्यापक पैमाने के संचालन को सटीकता के साथविरासत को आधुनिकता के साथ तथा विकास को अनुशासन के साथ संतुलित करने की अपनी क्षमता का सशक्त प्रदर्शन किया।

राष्ट्रीय उपलब्धियाँ एवं ऐतिहासिक प्रथम

वर्ष की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक यह रही कि पश्चिम रेलवे ने अपने संपूर्ण ब्रॉड गेज नेटवर्क का 100% विद्युतीकरण प्राप्त किया। इससे पश्चिम रेलवे भारतीय रेल के पूर्णतः विद्युतीकृत रेल नेटवर्क वाले क्षेत्रों में मजबूती से स्थापित हुआ है तथा सतत एवं ऊर्जा-कुशल परिचालन के प्रति उसकी प्रतिबद्धता और अधिक सुदृढ़ हुई है।

एक अन्य प्रमुख उपलब्धि के रूप में रोलिंग स्टॉक वर्कशॉपदाहोद में लोको मैन्युफैक्चरिंग शॉप का निर्माण एवं लोकार्पण किया गयाजिसे ₹21,405 करोड़ की परियोजना लागत से विकसित किया गया है। इस अत्याधुनिक इकाई की आधारशिला माननीय प्रधानमंत्री द्वारा रखी गई थी तथा परियोजना का कार्य वर्ष 2025 में पूर्ण किया गया। यह अत्याधुनिक संयंत्र 9000 हॉर्स पावर की विद्युत मालगाड़ी इंजनों के निर्माण हेतु डिज़ाइन किया गया हैजिससे भारतीय रेल की माल वहन क्षमता में वृद्धि होगी और लॉजिस्टिक लागत में कमी आएगी। यह संयंत्र मेक इन इंडिया” और मेक फॉर द वर्ल्ड” पहल को सशक्त समर्थन प्रदान करता हैजिसके अंतर्गत भारतीय रेल के लिए ब्रॉड गेज विद्युत लोकोमोटिव तथा निर्यात हेतु स्टैंडर्ड गेज विद्युत लोकोमोटिव का निर्माण किया जाएगा। हरित विनिर्माण सिद्धांतों पर आधारित एवं हरित ऊर्जा से संचालित इस परियोजना ने प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित किया है तथा दाहोद क्षेत्र के आर्थिक विकास को भी मजबूत प्रोत्साहन प्रदान किया है।

वर्ष के दौरानपश्चिम रेलवे ने 234 किलोमीटर नई लाइनेंदोहरीकरण तथा गेज परिवर्तन कार्य पूर्ण किएजिससे नेटवर्क क्षमतापरिचालन लचीलापन और मजबूती में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। एक प्रमुख तकनीकी उपलब्धि के रूप मेंमिशन रफ्तार के अंतर्गत रतलाम मंडल के खाचरौदनागदा दोहरी लाइन खंड पर भारत की पहली 2×25 केवी ट्रैक्शन प्रणाली का सफलतापूर्वक कमीशनिंग किया गयाजिससे उच्च गति संचालनबेहतर ऊर्जा दक्षता तथा भविष्य के लिए तैयार ट्रैक्शन अवसंरचना सुनिश्चित हुई।

अवसंरचना विस्तार एवं संरक्षा कार्य – संपर्कलॉजिस्टिक्स और क्षेत्रीय विकास में परिवर्तनकारी भूमिका

वर्ष 2025 के दौरानपश्चिम रेलवे ने बड़े पैमाने पर अवसंरचना सुदृढ़ीकरण कार्य जारी रखते हुए संरक्षा और क्षमता वृद्धि की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल कीं। इस अवधि में कुल 138 रोड ओवर ब्रिज एवं अंडर ब्रिज का निर्माण किया गया, 114 मानवयुक्त समपार फाटकों का उन्मूलन किया गया तथा 660 किलोमीटर डब्ल्यू-बीम फेंसिंग स्थापित की गईजिससे यात्रियों की सुरक्षा और परिचालन दक्षता में उल्लेखनीय सुधार हुआ।

वर्ष 2025 के दौरानपश्चिम रेलवे ने डबलिंगगेज परिवर्तन एवं विद्युतीकरण से जुड़े अनेक उच्च प्रभाव वाले परियोजनाओं का सफलतापूर्वक क्रियान्वयन कियाजिससे गुजरात में यात्री आवागमनमाल ढुलाई क्षमता तथा क्षेत्रीय आर्थिक विकास को उल्लेखनीय मजबूती मिली। प्रमुख परियोजनाओं में आनंदगोधरा रेल खंड का दोहरीकरण (79 किमी, ₹693 करोड़) शामिल हैजो आनंदखेड़ा एवं पंचमहल जिलों को कवर करता है। इसी प्रकारमहेसाणापालनपुर रेल खंड का दोहरीकरण (65.10 किमी, ₹537 करोड़)जो बनासकांठापाटन एवं महेसाणा जिलों को कवर करता हैदिल्लीअहमदाबाद राजधानी मार्ग पर शेष अंतिम सिंगल लाइन अंतर को समाप्त करने वाला एक महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट रहा। राजकोटहदमटिया खंड का दोहरीकरण (39 किमी, ₹377 करोड़)जो राजकोटकानालूस दोहरीकरण परियोजना (111 किमी) का हिस्सा हैने राजकोट जिले में रेल अवसंरचना को सुदृढ़ किया। इसके अतिरिक्तकालोलकड़ीकतोसन रोड रेल खंड का गेज परिवर्तन सहित विद्युतीकरण (37 किमी, ₹347 करोड़)जो गांधीनगर एवं महेसाणा जिलों को कवर करता हैएक महत्वपूर्ण उपलब्धि रहा। 

बेचराजीरणुज रेल खंड का गेज परिवर्तन (40 किमी, ₹520 करोड़)जो महेसाणापाटन एवं अहमदाबाद के आकांक्षी जिलों को कवर करता हैराष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति तथा पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अनुरूप किया गया। साथ हीसाबरमतीबोटाद रेल खंड का विद्युतीकरण (106 किमी, ₹333 करोड़) पूरा होने के साथ ही गुजरात में रेल नेटवर्क का 100% विद्युतीकरण सुनिश्चित हुआ।

समग्र रूप सेइन परियोजनाओं ने रेल नेटवर्क में मौजूद बाधाओं को दूर किया हैभीड़भाड़ तथा ट्रेनों की अनावश्यक रोक को कम किया है और प्रमुख रेल गलियारों पर यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी लाई है। इससे परिचालन में अधिक लचीलापन आया है तथा अतिरिक्त यात्री एवं मालगाड़ियों के संचालन का मार्ग प्रशस्त हुआ है। इस अवसंरचना सुदृढ़ीकरण से मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स को मजबूती मिली हैपरिवहन लागत में कमी आई हैआपूर्ति श्रृंखला की दक्षता में सुधार हुआ है और ऑटोमोबाइलऔद्योगिककृषि एवं विनिर्माण क्षेत्रों को महत्वपूर्ण समर्थन प्राप्त हुआ है। साथ हीपर्यावरण-अनुकूल रेल परिचालन को बढ़ावा मिला है तथा क्षेत्रीय विकासरोजगार सृजन और अहमदाबादराजकोटजामनगरद्वारका एवं भावनगर जैसे प्रमुख शहरी केंद्रों तक बेहतर संपर्क सुनिश्चित हुआ है।

परिचालन उत्कृष्टता एवं समयपालन में नेतृत्व

वर्ष 2025 के दौरान पश्चिम रेलवे ने समयपालन के क्षेत्र में असाधारण प्रदर्शन दर्ज किया और भारतीय रेल की सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली ज़ोनल रेलों में अपना स्थान बनाए रखा। मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों की समयपालनता पूरे सिस्टम में उच्चतम स्तर पर रहीजिसमें नवंबर 2025 में लगभग 97% समयपालनता तथा नवंबर तक की संचयी अवधि में लगभग 96% समयपालनता दर्ज की गईजो सभी ज़ोनल रेलों में सर्वश्रेष्ठ रही।

यह उल्लेखनीय उपलब्धि भारी मानसूनी परिस्थितियोंअत्यंत सघन उपनगरीय रेल परिचालनबड़े पैमाने पर त्योहार विशेष ट्रेनों के संचालन तथा निरंतर चल रहे अवसंरचना कार्यों के बावजूद हासिल की गई। यह प्रदर्शन पश्चिम रेलवे की सुदृढ़ परिचालन योजनावास्तविक समय में प्रभावी निगरानी तथा अनुशासित नियंत्रण तंत्र की सशक्तता को दर्शाता है।

मुंबई उपनगरीय रेल नेटवर्क – भारत की जीवनरेखा

पश्चिम रेलवे का मुंबई उपनगरीय रेल नेटवर्क एक बार फिर अपनी सुदृढ़ता एवं विश्वसनीयता का प्रमाण देता हुआ मुंबई की जीवनरेखा के रूप में सेवा करता रहाजो प्रतिदिन 30 लाख से अधिक यात्रियों की आवश्यकताओं को पूरा करता है। मानसून के दौरान तीव्र वर्षा की घटनाओं के बावजूदसघन पूर्व-मानसूनी योजनापरिसंपत्तियों की बेहतर तैयारी तथा त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली के चलते उपनगरीय सेवाएं अधिकांशतः निर्बाध रूप से संचालित होती रहीं।

प्रमुख यात्री सेवा विस्तार एवं बढ़ती मांग का प्रभावी प्रबंधन

वर्ष 2025 के दौरान नई नियमित रेल सेवाओं की शुरुआत तथा बढ़ती और मौसमी यात्रा मांग को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर स्‍पेशल ट्रेनों के परिचालन के माध्यम से यात्री संपर्क में उल्लेखनीय वृद्धि की गई। इससे यात्रियों को बेहतर सुविधाअधिक विकल्प और सुगम आवागमन सुनिश्चित हो सका।

एक प्रमुख उपलब्धि के रूप में उधना जंक्शन (गुजरात) और ब्रह्मपुर (ओडिशा) के बीच अमृत भारत एक्सप्रेस का उद्घाटन किया गया। यह पश्चिम रेलवे एवं गुजरात की पहली अमृत भारत एक्सप्रेस हैजिसने पश्चिमी भारत और पूर्वी तट के बीच किफायती लंबी दूरी की रेल संपर्क व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया है।

इसके अतिरिक्तक्षेत्रीय आवागमन को सुदृढ़ करने के लिए नई मेमू (MEMU) सेवाओं की शुरुआत की गई। वहीं भावनगरअयोध्या के बीच नई रेल सेवा को माननीय रेल मंत्रीइलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी तथा सूचना एवं प्रसारण मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव द्वारा हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गयाजिससे तीर्थयात्रियों एवं यात्रियों के लिए लंबी दूरी की रेल संपर्क सुविधा का और विस्तार हुआ।

यात्रा की बढ़ती मांग का प्रभावी प्रबंधन करने तथा नियमित सेवाओं को पूरक सहयोग देने के लिए पश्चिम रेलवे ने वर्ष 2025 के दौरान लगभग 7000 फेरे हॉलिडे स्पेशल ट्रेनों के रूप में परिचालित किए। ये ट्रेनें ग्रीष्मकालीन अवकाशगणपतिदीवालीछठ तथा क्रिसमस/नववर्ष आदि के दौरान विभिन्न चरणों में चलाई गईं। इसके साथ हीअस्थायी एवं स्थायी आधार पर ट्रेनों में अतिरिक्त कोच भी जोड़े गए। इन विशेष ट्रेन सेवाओं ने पूरे रेल नेटवर्क में यात्रियों की सुगमसुरक्षित एवं सुविधाजनक आवाजाही सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

पश्चिम रेलवे ने उपनगरीय और लंबी दूरी की सेवाओं में असाधारण रूप से अधिक यात्री आवागमन के दौरान गहन और सुविचारित भीड़ प्रबंधन उपाय किए। उत्सवोंविशेष ट्रैफिक अवधि और पीक आवर्स के दौरान अभूतपूर्व यात्री संख्या के बावजूदयात्री आवागमन सुचारूव्यवस्थित और सुरक्षित रहा। यह संभव हुआ सक्रिय योजनाअतिरिक्त कर्मियों की तैनातीवास्तविक समय निगरानीयात्री प्रवाह का नियमनबेहतर घोषणाओं की व्यवस्था और विभिन्न रेलवे विभागों के बीच घनिष्ठ समन्वय के माध्यम से। इन व्यापक व्यवस्थाओं ने भीड़ के सुरक्षित विघटनजाम की रोकथाम और ट्रेन परिचालन में अविरलता सुनिश्चित कीजिससे पश्चिम रेलवे की उच्च घनत्व वाले यात्री ट्रैफिक को कुशलता और सटीकता के साथ संभालने की क्षमता और मजबूत हुई।

डिजिटल परिवर्तन और स्मार्ट गवर्नेंस

वर्ष 2025 ने पश्चिम रेलवे के लिए डिजिटल शासन में निर्णायक छलांग का प्रतीक बनाया। इस वर्षजोन ने SUGAMRAIL लॉन्च कियाजो वास्तविक समय में लिफ्टएस्केलेटर और अर्थिंग पिट की निगरानी के लिए पहला सॉफ्टवेयर-आधारित प्लेटफ़ॉर्म है। लिफ्ट और एस्केलेटर के प्रदर्शन का डिजिटल ट्रैकिंग होने से टूट-फूट की स्थिति में तेजी से कार्रवाई संभव हुई।

यात्री अनुभव को डिजिटल नवाचार के माध्यम से और बेहतर बनाने के लिएपश्चिम रेलवे ने मुंबई सेंट्रल पर डिजिटल लाउंज और को-वर्किंग स्पेस स्थापित कियाजिससे यात्रियों को आधुनिकआरामदायक और उत्पादक यात्रा वातावरण उपलब्ध हो सकेजो बदलती यात्रियों की अपेक्षाओं के अनुरूप है।

इसके अलावापश्चिम रेलवे ने 2,270 हैंड-हेल्ड टर्मिनल (HHTs) की तैनाती के साथ 100% डिजिटल टिकट जांच हासिल की। पश्चिम रेलवे ने रेल मदद शिकायत निवारण में लगातार पांचवें वर्ष के लिए अपनी स्थिति नंबर वन बनाए रखी।

फ्रेट सेक्टर

पश्चिम रेलवे ने फ्रेट सेक्टर में कई प्रमुख उपलब्धियाँ हासिल कींजिनमें पहला समर्पित रेफ्रिजरेटेड (रीफर) कंटेनर रेक MHPL–साणंद से पीपावाव पोर्ट तक और पहली बार दो डिम्ड VP रेक का लिंक  से सांकरेल गुड्स टर्मिनल तक लोडिंग शामिल हैजो लॉजिस्टिक सेवाओं में विविधीकरण को दर्शाता है।

हमारी सुरक्षा उपायों को मजबूत करना

पश्चिम रेलवे आरपीएफ कर्मियों की सतर्कतात्वरित प्रतिक्रिया और साहसिक प्रयासों के चलते ऑपरेशन जीवन रक्षा के तहत 37 बहुमूल्य जीवन बचाए गए।

बाल सुरक्षा के प्रति सहानुभूति और प्रतिबद्धता दिखाते हुएऑपरेशन नन्हे फरिश्ते के अंतर्गत 769 भगोड़े/लापता बच्चों को बचाकर उनके परिवारों के साथ सुरक्षित रूप से मिलवाया गया।

ऑपरेशन अमानत के तहतपश्चिम रेलवे आरपीएफ ने यात्रियों की छोड़ी हुई संपत्तियों को उचित सत्यापन के बाद 5000 से अधिक यात्रियों को लौटायाजिनकी कुल कीमत ₹11.66 करोड़ से अधिक थी।

स्वास्थ्य सेवा में उत्कृष्टता और कर्मचारी कल्याण

पश्चिम रेलवे ने वर्ष के दौरान स्वास्थ्य सेवा में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल कीं। डिवीज़नल रेलवे अस्पतालराजकोट भारतीय रेल का पहला अस्पताल बन गयाजिसे मेडिकल एंट्री-लेवल टेस्टिंग (MELT) के लिए NABL मान्यता प्राप्त हुईइसके बाद राजकोटबादश्वर पार्कसाबरमती और वलसाड के पैथोलॉजी प्रयोगशालाओं को भी NABL मान्यता दी गई।

एक ऐतिहासिक चिकित्सा उपलब्धि के रूप मेंभारतीय रेलवे का पहला अवे क्रैनियोटोमी (Awake Craniotomy) सफलतापूर्वक जगजीवन राम अस्पतालमुंबई सेंट्रल में किया गया। साथ हीएक अत्याधुनिक CT और MRI स्कैन सेंटर 3-टेस्ला MRI के साथ स्थापित किया गयाजिससे चिकित्सा सेवाओं में महत्वपूर्ण सुधार हुआ।

सततता और हरित पहल

पर्यावरणीय सततता पश्चिम रेलवे की प्रमुख प्राथमिकताओं में से एक बनी हुई है। 100% विद्युतीकरणओपन-एक्सेस ग्रीन पावर का अपनानासौर ऊर्जा पहल और वॉटर रीसाइक्लिंग प्‍लांट के माध्यम से पश्चिम रेलवे ने अपने कार्बन फूटप्रिंट को महत्वपूर्ण रूप से कम किया। राजकोट स्टेशन को अपने पर्यावरण प्रबंधन प्रणाली के लिए ISO 14001:2015 प्रमाणन से सम्मानित किया गयाजो सतत स्टेशन प्रबंधन के प्रति पश्चिम रेलवे की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

पश्चिम रेलवे ने 98 “ईट राइट” प्रमाणन हासिल किएजो भारतीय रेल में सबसे अधिक हैंऔर यह स्टेशनोंअस्पतालोंस्टाफ कैंटीन और रनिंग रूम को कवर करते हैं।

विरासतसमावेशिता और जनसंपर्क

वर्ष 2025 मेंपश्चिम रेलवे ने विरासत संरक्षणसमावेशिता और जनसंपर्क पर अपने फोकस को मजबूत किया और कई महत्वपूर्ण पहलों के माध्यम से इसे प्रदर्शित किया। बांद्रा स्टेशन महोत्सव बड़े उत्साह के साथ मनाया गयाजिसमें प्रतिष्ठित बांद्रा उपनगरीय रेलवे स्टेशन की समृद्ध विरासतस्थापत्य धरोहर और जनसंपर्क को उजागर किया गया। यह स्टेशन एक ग्रेड-विरासत संरचना है और मुंबई के प्रमुख रेलवे स्थलों में से एक है।

1888 में बने इस विरासत स्टेशन को सांस्कृतिक कार्यक्रमोंविरासत प्रदर्शनीरचनात्मक प्रतियोगिताओं और समुदाय-केंद्रित गतिविधियों के माध्यम से प्रस्तुत किया गयाजिससे पश्चिम रेलवे की रेलवे विरासत को संरक्षित करने और यात्रियों व समुदाय की भागीदारी को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को बल मिला।

वर्ष के दौरानरतलाम स्टेशन भवन ने अपना शताब्दी वर्ष मनाया, 100 वर्षों की सेवा पूरी कीजिसे विरासत-केंद्रित और जनसंपर्क पहलों के माध्यम से मनाया गयाजिसमें भारतीय रेलवे के विकास में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका को सम्मानित किया गया।

पश्चिम रेलवे ने महिलाओं के सशक्तिकरण और समावेशिता को भी बढ़ावा दियाजिसमें पहली संपूर्ण महिला TRD मेंटेनेंस टीम की तैनाती और आरपीएफ पहलों जैसे मेरी सहेली शामिल हैं। रेल की धड़कन” जैसे जनसंपर्क कार्यक्रम और पश्चिम रेलवे द्वारा भारतीय रेल का पहला पॉडकास्ट चैनल लॉन्च करना यात्रियों के साथ जुड़ाव और सार्वजनिक सहभागिता को मजबूत करने में सहायक रहे।

पश्चिम रेलवे ने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए अति विशिष्ट रेल सेवा पुरस्कार’ के तहत कुल सात शील्ड जीतकर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की।

खेलों को बढ़ावा

पश्चिम रेलवे के एथलीटों ने वर्ष 2025 में अपनी उत्कृष्ट अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों के माध्यम से देश और संगठन का गौरव बढ़ाया। सुश्री अंतिम पंघल ने मंगोलिया में आयोजित अंतरराष्ट्रीय महिला कुश्ती टूर्नामेंट 2025 और बुडापेस्ट टूर्नामेंट में स्वर्ण पदक जीते। इसके अतिरिक्तभारत ने ढाकाबांग्लादेश में आयोजित द्वितीय महिला कबड्डी विश्व कप का खिताब अपने नाम कियाजिसमें पश्चिम रेलवे की सुश्री सोनाली शिंगटे ने टीम की राइट रेडर के रूप में प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए भारत की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

100% विद्युतीकरणसमयपालनता में नेतृत्वरिकॉर्ड इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माणमजबूत वित्तीय प्रदर्शनडिजिटल परिवर्तन और लोगों को प्राथमिकता देने वाले दृष्टिकोण के साथ, 2025 पश्चिम रेलवे की यात्रा में एक मील का पत्थर साबित हुआ। इस वर्ष की उपलब्धियाँ पश्चिम रेलवे की रेलवे संचालन में राष्ट्रीय मानक के रूप में स्थिति को पुनः पुष्टि करती हैं और भविष्य में विकास और नवाचार के लिए एक मजबूतलचीला आधार तैयार करती हैं।

वीर बाल दिवस पर हिन्दू कालेज में श्रद्धांजलि सभा

दिल्ली।  देश से बढ़कर और कुछ नहीं होता। देश के लिए मनुष्य अपना सर्वोच्च बलिदान कर सकता है जिसकी अद्भुत उदाहरण साहिबजादों जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह ने अपने प्राणो का उत्सर्ग कर दर्शाया था। यह बलिदान आने वाली पीढ़ियां भी कभी भुला नहीं सकतीं। हिन्दू कालेज में वीर बाल दिवस पर आयोजित श्रद्धा सुमन कार्यक्रम में कार्यवाहक प्राचार्या प्रो रीना जैन ने कहा कि युवा पीढ़ी को इन वीर बलिदानियों को अपना आदर्श बनाना चाहिए जिन्होंने आयु और अनुभव के सारे पुराने उदाहरण पीछे छोड़ दिए।

आयोजन में हिन्दू विभाग के प्रभारी प्रो बिमलेन्दु तीर्थंकर ने कहा कि वीर बाल दिवसबार बार याद दिलाता है कि साहस आयु का मोहताज नहीं होता, छोटी उम्र भी बड़े और असम्भव कार्य किये जा सकते हैं। महाविद्यालय के कोषाधिकारी डॉ वरुणेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह जी के साहिबजादों ने यह दिखा दिया कि सच्चाई और आत्मसम्मान के लिए खड़े होना सबसे बड़ा धर्म है।

राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी डॉ पल्लव ने कहा कि यह दिन पूरे देश के लिए प्रेरणा का प्रतीक है जब हम इस बलिदान से ईमानदारी, निडरता और बलिदान का महत्व समझते हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयं सेवक ऐसे वीरों से प्रेरणा लेते हैं।

इससे पहले राष्ट्रीय सेवा योजना के विद्यार्थी अध्यक्ष निशांत सिंह ने सभी का स्वागत किया और आयोजन की रूपरेखा प्रस्तुत की। आयोजन में महाविद्यालय के शिक्षकों, सह शैक्षणिक कर्मचारियों और विद्यार्थियों ने साहिबजादों को पुष्पांजलि अर्पित कर सम्मान प्रदर्शित किया।

अंत में राष्ट्रीय सेवा योजना की विद्यार्थी उपाध्यक्ष नेहा यादव ने सभी का आभार व्यक्त किया।

अर्चिता द्विवेदी
जन संपर्क प्रमुख
राष्ट्रीय सेवा योजना
हिन्दू महाविद्यालय, दिल्ली
मो -9452536877

देववाणी संस्कृत उच्चारण से रोगनाशक सिद्धान्तों की वैज्ञानिकता

संस्कृत भाषा संसार की समस्त भाषाओं में अपना विशेष एवं गौरवपूर्ण स्थान रखती है। स्वरों की रचना हमारे ऋषियों ने ऐसी दूरदर्शिता के साथ की है कि इस भाषा को बोलने से एक प्रकार का सूक्ष्म यौगिक व्यायाम होता है जिसके कारण बोलने वाले के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर बड़ा उत्तम प्रभाव पड़ता है। इन्हीं विशेषताओं के कारण संस्कृत को देववाणी कहा जाता है।
‘स्वर’ – ‘अ’ का उच्चारण कंठ द्वारा होने से हृदय पर प्रभाव पड़ता है अतएव जितनी बार ‘अ’ का उच्चरण किया जायेगा, उतनी ही बार हृदय का संचालन शीघ्रता के साथ होगा। इससे शरीर में रुधिर प्रवाहित होने की क्रिया हृदय से ही होती है और किसी विकृत अंग के लिये जो रुधिर जाता है उसको भेजने वाला हृदय ही है। यदि यह रुधिर इस विकृत अंग में कम मात्रा में पहुँचाता है तो उसका प्रभाव यह होगा कि रोग दूर हो जायेगा इसके विपरीत यदि रुधिर कम मात्रा में जाता है तो अंग अच्छा होने के बजाय और अधिक रोगी हो जायेगा।
 “अ” स्वर प्रत्येक अंग में शुद्ध रक्त का संचार करता है। मंत्र शास्त्र में (अ) स्वर रचनात्मक शक्ति माना गया है।
‘‘आ’’ स्वर के उच्चारण से फेफड़े के ऊपरी भाग तथा सीने पर प्रभाव पड़ता है। यह उपरी तीन पसलियों को बलवान बनाता है, भोजन ले जाने वाली नली को शुद्ध तथा फेफड़ों को उत्तेजित करके उनके ऊपरी भाग को शुद्ध करता है इसके अभ्यास से दमा और खाँसी के रोग अच्छे होते हैं। इस स्वर का अभ्यास उन लोगों को तो अवश्य करना चाहिये जिन्हें क्षय रोग होने की संभावना हो और जो झुककर अँधेरे में काम करते हैं। गायक लोग जो प्राचीन भजनों में ‘‘आ’’ का उच्चारण अनेक बार करते हुए लय मिलाते हैं। इसीलिए, देखा गया है कि संगीताचार्य कम बीमार पड़ते हैं तथा शीघ्र ही स्वस्थ हो जाते हैं। (‘‘इ ई’’) के लम्बे उच्चारण का प्रभाव गले तथा मस्तिष्क पर पड़ता है। इसके उच्चारण से गले, नाक, तालु, दिल के ऊपरी भाग की क्रिया विशेष रूप से उत्तेजित होती है। कफ, बलगम एवं आंतों में जमा हुआ मल निकल जाता है जिससे श्वासेन्द्रिय की भी सफाई होती है। इसका प्रभाव शरीर पर भी पड़ता है। इसका उच्चारण सिर दर्द तथा दिल के रोगों में भी लाभदायक है। जो व्यक्ति क्रोधी तथा उदासवृत्ति के होते हैं, उन पर इसका अच्छा प्रभाव पड़ता है।
(उ-ऊ) का प्रभाव जिगर पेट और अंतड़ियों पर पड़ता है और जो स्त्रियाँ पेडू के भार के रोग से पीड़ित रहती हैं उन्हें (उ-ऊ) के उच्चारण से बड़ा लाभ होता है कितने ही दिनों का कठिन कब्ज क्यों न हो इसके द्वारा दूर किया जा सकता है। यह स्त्रियों के गर्भ के लिये भी लाभदायक होता है।
‘‘ए-ऐ’’ के उच्चारण का प्रभाव गले और श्वांस नलिका के उद्गम स्थान पर पड़ता है और गुर्दे को उत्तेजित करता है। इसका बार-बार उच्चारण मूत्र संबंधी रोगों को दूर करता तथा पेशाब उतारने में औषधि का काम करता है। इस स्वर के प्रयोग का लाभ अध्यापकों तथा देर तक बोलने वालों को होता है तथा नलियों के अंदर की लुआवदार झिल्ली को स्वस्थ  बनाता है।
(‘‘ओ-औ’’) का प्रभाव उपस्थेन्द्रिय और जननेन्द्रिय पर होता है और वह उसको स्वभाविक रूप से काम करने में सहायता देता है। जब इसके उच्चारण का अच्छा अभ्यास हो जायेगा तब यह अनुभव होगा कि जो आंतें तथा नसें सुस्त थी वह खुलकर स्वाभाविक कार्य करने लगी हैं। यह सीने के मध्य भाग को उत्तेजित करता है और निमोनियाँ तथा प्लुरेसी के लिये बहुत लाभदायक है।
(अं) के उच्चारण से नासिका द्वारा ली गयी सांस के साथ जो ऑक्सीजन या प्राणवायु शरीर के भीतर जाती है वह दूषित, रुधिर को शुद्ध तथा लाल बनाती है। नासिका द्वारा सांस लेने में नासिका तथा श्वास नलिका प्रयुक्त होती है, इसलिये इन अंगों का विकार रहित एवं निरोग होना अत्यावश्यक है और इसी अभिप्राय से हमारे महर्षियों ने प्रत्येक बीज मंत्र के अंत में ‘‘म्’’ अथवा अनुस्वार को रखा है तथा उसका देर तक लम्बा उच्चारण करने का संदेश दिया है। स्वरों के उच्चारण करने में मुख खुलता है और अनुस्वार या ‘‘म’’ के उच्चारण से ओष्ठ बंद हो जाते हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि मानो प्रथम स्वरों के उच्चारण द्वारा शरीर के समस्त विकारों को दूर कर ‘‘म्’’ द्वारा ओष्ट रूपी किवाड़ बंद कर लिये जाते हैं जिससे यह विकार पुन: प्रविष्ट न हो सकें।
‘‘शंख’’ – हिन्दुओं के मंदिरों में दोनों समय शंख बजाया जाता है किन्तु बजाने और सुनने वाले दोनों ही यह नहीं जानते कि इसके बजाने से ध्वनि के अलावा और भी कोई फायदा है या नहीं, फिर भी धर्म समझकर बजाते हैं।
प्रोफेसर जगदीश चन्द्र जी बोस जो एक प्रसिद्ध विज्ञानाचार्यों में से एक थे, अपने प्रयोगों द्वारा वह सिद्ध कर दिखाया कि जहाँ तक शंख ध्वनि पहुँचती है वहाँ तक रोगों के अनेक कीटाणु स्वयं नष्ट हो जाते हैं और वायु शुद्ध हो जाती है। शंख बजाना आरोग्य के लिए बहुत ही अच्छा है, छुआछूत की बीमारी के समय इसे विशेष रूप से काम में लाना चाहिए। अर्थात् संक्रामक रोगों में शंख बजाना लाभदायक है। मालवा प्रान्त के ग्रामीण अंचल में एक प्रसिद्ध कहावत प्रचलित है कि-
 ‘‘शंख बाजे और सरला उड़े’’ अर्थात् शंख की ध्वनि से कीटाणु नष्ट हो जाते हैं। भारतीय संस्कृति में यह निर्विवाद रूप से कहा गया है कि सुबह और शाम को संधियों में शंख बजाने से राक्षसगण दूर होते हैं। राक्षस शब्द का अर्थ यह है कि जिससे रक्षा की जानी चाहिये वह राक्षस है। इस अर्थ के अनुसार रोगों के कीटाणु भी राक्षस हो सकते हैं। संध्या के समय रोगों के कीटाणु पैदा होते हैं और बढ़कर पैâलते हैं। अत: उस समय शंख बजाना आरोग्य के लिये बहुत अच्छा है। अब तो पाश्चात्य वैज्ञानिकों ने भी शोधों के द्वारा ‘शंख ध्वनि’ की महत्ता सिद्ध कर दी है।
वेदों में कहा गया है कि ‘‘अन्ताय मूक शब्दाय’’ इसलिए, यदि किसी गूँगे व्यक्ति को ३-४ घण्टे श्ांख बजवाया जाये, शंख में २४ घण्टे तक रखा रहने वाला पानी पिलाया जाये और शंख भस्म भी खिलाया जाये, साथ-साथ छोटे शंखों की माला बनाकर गले में पहना दी जाये। तो कुछ वर्षों में ईश्वर कृपा से गूँगा मनुष्य अवश्य बोलने लगेगा। ऐसा कई प्रयोगों में प्रमाणित भी हो चुका है।
हमारे देश में बच्चों के गले में छोटे-छोटे शंख छेदकर पहनाने की परम्परा रही है। इससे बच्चे शीघ्र बोलने लग जाते थे और उन्हें नजर भी नहीं लगती थी किन्तु आजकल आधुनिकता की आँधी में यह प्रथा समाप्त होती जा रही है।
हिन्दू शास्त्रों में शंख की महिमा अपार है, समुद्र मंथन के समय  १४ रत्न उत्पन्न हुए थे उसमें एक शंख भी था जो ‘ॐ’ आकार का था जिससे ‘‘ॐ’’ की ध्वनि प्रगट हुयी देव मंदिरों में मठों में भजन मंडलियों में संतों की कुटीर में सभी आनन्द मंगलों के उत्सव में शंख का पवित्र नाद आर्यावर्त के घर-घर में होता रहा है। कुरुक्षेत्र के युद्ध में भगवान् श्रीकृष्ण ने पांचजन्य नामक शंख को बजाकर युद्ध का उद्घोष किया था।
यूरोपीय विज्ञान वेत्ताओं ने भी अनेक शोधों द्वारा शंख की ध्वनि में मनुष्य के लिए हितकर विद्युत ऊर्जा उत्पादन करने की क्षमता को प्रमाणित किया है।
आयुर्वेद के ग्रंथों में भी शंख की शक्ति का अपूर्व वर्णन है। शंखद्राव के सेवन से गुल्म, ताप, तिल्ली मूत्रकृच्छ्र आदि रोग दूर होते हैं। शंख में पानी या गंगाजल शोधित करके पिलाया  जाय तो कीटाणु जनित सब रोग दूर हो जाते हैं।
(साभार – चिकित्सा पल्लव : मई 2020)  https://www.facebook.com/share/p/1JyS5dP3ET/

कुशल भारतीय युवाओं को देशों में भी उपलब्ध हो रहे हैं रोजगार के अवसर

हाल ही के समय में भारतीय युवाओं ने भारतीय संस्कृति के नियमों का अनुपालन करने की ओर अपने पग बढ़ा दिए हैं। “वसुधैव कुटुम्बकम” के भाव को आत्मसात करते हुए अन्य कई देशों में उच्च शिक्षा ग्रहण करने के उद्देश्य से एवं अपनी उच्च शिक्षा समाप्त करने के पश्चात आज भारतीय युवा रोजगार प्राप्त करते हुए इन देशों में आसानी से रच बस रहे हैं। आज कई विकसित देशों में तकनीकी, स्वास्थ्य एवं रीसर्च जैसे क्षेत्रों में भारतीय मूल के नागरिकों का दबदबा बन गया है। इन देशों की अर्थव्यवस्था को गति देने में भारतीय मूल के नागरिकों के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है। कई अन्य देशों में रचे बसे भारतीयों ने अपनी हिंदू सनातन संस्कृति का पालन करते हुए अपनी छाप छोड़ी है। इसके चलते ही आज कई देश – रूस, जापान, इजराईल, वियतनाम, जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम, कनाडा, फ्रान्स एवं अन्य कई देश – भारतीय युवाओं की खुले रूप से मांग करने लगे हैं। विशेष रूप से विकसित देशों में आज श्रमबल की भारी कमी महसूस की जा रही है क्योंकि इन देशों में बुजुर्गों की संख्या बहुत तेज गति से बढ़ रही है और इन देशों में युवाओं द्वारा बच्चे पैदा नहीं करने अथवा कम बच्चे पैदा करने के चलते युवाओं की बहुत कमी हो गई है। इसीलिए भी विश्व के कई देश आज भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते को शीघ्रता के साथ अंतिम रूप देना चाहते हैं ताकि वे भारत से श्रमबल को अपने देशों में विशेष सुविधाएं देकर आकर्षित कर सकें।

इस समय रूस लगभग 20 लाख कामगारों की कमी से जूझ रहा है। 4 एवं 5 दिसम्बर 2025 को रूस के राष्ट्रपति श्री व्लादिमीर पुतिन, 23वें भारत रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेने हेतु, भारत में आए थे। रूस के राष्ट्रपति की भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी से द्विपक्षीय चर्चा में अन्य मुद्दों के साथ साथ भारतीय युवाओं के लिए रूस द्वारा अपने दरवाजे खोलने पर भी गम्भीर चर्चा हुई थी। इसके अतिरिक्त, वर्ष 2017 में प्रारम्भ हुए यूरेशियाई आर्थिक संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौते को आगे बढ़ाते हुए उक्त 23वें भारत रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में भारत एवं रूस के बीच द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से रूस में भारत द्वारा निर्यात की जाने वाली 90 प्रतिशत वस्तुओं पर वर्ष 2028 तक शून्य टैरिफ सम्बंधी शर्तों को अंतिम रूप दिया गया। इससे भारतीय फार्मा और वस्त्र उद्योग के लिए तीन करोड़ उपभोक्ताओं का बाजार खुल जाएगा, जिससे प्रति वर्ष लगभग 1500 से 2000 करोड़ अमेरिकी डॉलर के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। यूरेशियाई आर्थिक संघ में रूस, बेलारूस, कजाकिस्तान, आर्मेनिया और किर्गिस्तान शामिल हैं। इस महत्वपूर्ण समझौते के अंतर्गत भारत वर्ष 2030 तक सूचना प्रौद्योगिकी, निर्माण और नर्सिंग के क्षेत्रों में रूस को लगभग 5 लाख भारतीय श्रमबल उपलब्ध कराएगा। इससे भारत को अपने रोजगार सृजन के लक्ष्य को पूरा करने और अपनी जनसांख्यिकी बढ़त का लाभ उठाने का अवसर मिलेगा। रूस के उद्योगपतियों एवं उद्यमियों के संघ के उपाध्यक्ष ने तो बताया है कि रूस को 50 लाख कुशल श्रमिकों की आवश्यकता है और भारत रूस की इस कमी को पूरा करने में अपनी अहम भूमिका निभा सकता है।

आज इजराईल भी, विशेष रूप से हम्मास के साथ हुए संघर्ष के बाद से, निर्माण के क्षेत्र में कुशल श्रमिकों की कमी से जूझ रहा है और भारत की ओर बहुत आशाभारी नजरों से देख रहा है। इजराईल ने भारत से एक लाख श्रमिकों को उपलब्ध कराने हेतु आग्रह किया है। इजराईल ने भारत के साथ इस सम्बंध में एक द्विपक्षीय रूपरेखा करार भी किया है। भारतीय संसद में उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, इस करार के अंतर्गत, 1 जुलाई 2025 तक 6,774 भारतीय कामगारों को इजराईल भेजा जा चुका है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा इजराईल भेजे जाने वाले श्रमिकों को प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है ताकि उत्तर प्रदेश से अधिकतम युवाओं को इजराईल भेजकर उन्हें वहां पर आसानी से रोजगार उपलब्ध कराया जा सके।

भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं जापान के प्रधानमंत्री श्री शिगेरू इशिबा के बीच 29-30 अगस्त, 2025 को जापान में हुई बैठक में भारत और जापान के बीच रणनीतिक सहयोग की दिशा में एक दूरदर्शी मार्ग प्रशस्त किया है और दोनों देशों के बीच अगले दशक के लिए एक व्यापक संयुक्त विजन की नींव रखी गई है। जापान ने आगामी दस वर्षों में भारत में अपने निवेश को 2024 के स्तर, लगभग 4,300 करोड़ अमेरिकी डॉलर, से बढ़ाकर, 6,800 करोड़ अमेरिकी डॉलर (10 लाख करोड़ जापानी येन) करने की प्रतिबद्धत्ता दिखाई है। पूंजी के प्रवाह के साथ ही, जापान एवं भारत ने एक “पीपल टू पीपल” आदान प्रदान कार्यक्रम को भी आगे बढ़ाने की बात कही है। इस कार्यक्रम का लक्ष्य है कि जापान की प्रौढ़ हो रही आबादी के चलते वहां के संरचनात्मक श्रमबल के क्षेत्र में कमी को कम करने और भारत के डेमोग्राफिक डिवीडेंड का लाभ उठाने के लिए आने वाले 5 वर्षों में जापान में 5 लाख भारतीय छात्रों और श्रमिकों को भेजने के लक्ष्य को लेकर दोनों देश काम करेंगे। जापान, भारतीय नर्सों के लिए भी अवसर गढ़ने का प्रयास कर रहा है क्योंकि वहां चिकित्सा के क्षेत्र में चिकित्सकों एवं नर्सों की भारी कमी है, जबकि जापान में बुजुर्गों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है।

इन्वेस्टमेंट बैंकर श्री सार्थक आहूजा की एक रिपोर्ट के अनुसार, जर्मनी, जापान, फिनलैंड एवं ताईवान भारतीय श्रमिकों की सक्रिय रूप से तलाश कर रहे हैं। जर्मनी में स्वास्थ्य सेवा, आईटी, इंजीनीयरिंग और निर्माण जैसे  क्षेत्रों में पेशेवर श्रमिकों की भारी कमी है। जर्मनी प्रतिवर्ष लगभग 90,000 भारतीय कुशल श्रमिकों को वीजा जारी करने की योजना बना रहा है। जर्मनी में महत्वपूर्ण क्षेत्रों में 7 लाख से अधिक नौकरियां उपलब्ध हैं। फिनलैंड भारतीयों को आकर्षित करने के उद्देश्य से उन्हें स्थायी निवास प्रदान करने की पेशकश कर रहा है। ताईवान विनिर्माण के क्षेत्र में भारतीय श्रमिकों की तलाश में है।

भारतीय संसद में उपलब्ध कराई गई एक जानकारी के अनुसार पिछले 5 वर्षों के दौरान (जनवरी 2020 से 30 जून 2025 तक) कुल 16,06,964 भारतीय श्रमिकों को विभिन्न देशों में रोजगार के लिए मंजूरी प्रदान की गई है। भारत सरकार ने भारतीय श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए विभिन्न देशों से इस संबंध में विभिन्न प्रकार के समझौते भी सम्पन्न किये हैं। आस्ट्रिया, औस्ट्रेलिया, फ्रान्स, जर्मनी, इटली, डेनमार्क और यूनाइटेड किंगडम के साथ प्रवासन और आवाजाही भागीदारी समझौता सम्पन्न किया गया है। जापान, पुर्तगाल, ताईवान, मारीशस, मलेशिया और इजराईल के साथ श्रम आवाजाही समझौता सम्पन्न किया गया है। बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, साऊदी अरब, यूनाइटेड अरब अमीरात और जॉर्डन जैसे खाड़ी सहयोग देशों (जी सी सी) के साथ श्रम और जन शक्ति सहयोग समझौता सम्पन्न किया गया है जो श्रम और जनशक्ति मुद्दों पर सहयोग के लिए व्यापक रूपरेखा प्रदान करते हैं। साऊदी अरब, यूनाइटेड अरब अमीरात और कुवैत के साथ अलग अलग समझौता ज्ञापन (एम ओ यू) और समझौता घरेलू श्रमिकों के लिए सुरक्षा उपायों की रूपरेखा तैयार करता हैं। इन समझौता ज्ञापनों और करारों में एक संयुक्त कार्य समूह के माध्यम से कार्यान्वयन का प्रावधान है, जहां सम्बंधित देशों के साथ संयुक्त कार्य समूहों की नियमित बैठकों के दौरान श्रमिकों के कल्याण और सुरक्षा से सम्बंधित मामलों पर विचार किया जाता है।

विकसित देशों यथा यूरोपीय महाद्वीप के कई देश – यूनान, इटली, ब्रिटेन, फ्रांन्स आदि एवं इजराईल में भारतीय श्रमिकों की मांग बढ़ रही है। भारत ने श्रमिक उपलब्ध कराने के लिए वर्ष 2023 तक 17 देशों के साथ समझौते सम्पन्न किए हैं। विदेशों में काम करने वाले भारतीयों की संख्या वर्ष 1990 में 66 लाख से बढ़कर वर्ष 2024 में 185 लाख हो गई है, जो तीन गुना वृद्धि है। इसी अवधि में वैश्विक प्रवासियों में भारतीयों की हिस्सेदारी 4.3 प्रतिशत से बढ़कर 6 प्रतिशत से अधिक हो गई है। खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासी भारतीय विश्व के कुल प्रवासी भारतीयों का लगभग आधा हिस्सा है। यूरोप, जापान, रोमानिया, फिनलैंड, रूस, जर्मनी, साऊदी अरब और पश्चिम एशिया में भारतीय श्रमिकों की मांग को पूरा करने के लिए नेशनल स्किल डेवलपमेंट कारपोरेशन (NSDC) भारतीय युवाओं को प्रशिक्षण भी प्रदान कर रहा है।

 NSDC अभी तक लगभग 60,000 भारतीय युवाओं को जापान, जर्मनी, इजराईल, ब्रिटेन, बहरीन एवं साऊदी अरब जैसे देशों में रोजगार दिला चुका है। विश्व के कई देशों में कुशल श्रमिकों के रूप में भारतीय युवाओं की मांग तेजी से बढ़ रही है। इसीलिए केंद्र सरकार द्वारा कौशल विकास योजना चलाई जा रही है जिसका उद्देश्य देश में कुशल श्रमिकों की मांग को पूरा करना है तथा भारत को ग्लोबल मैनपावर सप्लायर के रूप में स्थापित करना भी लक्ष्य है। यह रणनीति भारत के युवा आबादी को देखते हुए विशेष तौर पर बहुत महत्वपूर्ण है। यूरोप, जापान और अन्य देशों में आबादी बूढ़ी हो रही है, ऐसे समय में यह भारत के पास एक बड़ा अवसर है। केंद्र सरकार की यह कोशिश है कि अधिक से अधिक युवाओं को रोजगार मिल सके। इसके लिए कौशल विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है एवं अन्य देशों में भी भारतीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर तलाशे जा रहे हैं।

प्रहलाद सबनानी
सेवानिवृत्त उपमहाप्रबंधक,
भारतीय स्टेट बैंक
के-8, चेतकपुरी कालोनी,
झांसी रोड, लश्कर,
ग्वालियर – 474 009
मोबाइल क्रमांक – 9987949940
ई-मेल – prahlad.sabnani@gmail.com

भोजपुरी के महान कवि पं.चन्द्रशेखर मिश्र

भारत भाषाई विविधताओं का देश है जहां सैकड़ों भाषाएं तथा उनके अन्तर्गत हजारों बोलियां व उपबोलियां प्रचलित हैं। हिन्दी की ऐसी ही एक बोली भोजपुरी है, जो पूर्वी उत्तर प्रदेश,बिहार तथा फिजी सूरीनाम मॉरीशस आदि देश के बड़े भाग में बोली जाती है। अपने व्यापक प्रभाव के कारण अनेक साहित्यकार तथा राजनेता इसे अलग भाषा मानने का आग्रह भी करते हैं। सरकार इसके विकास के लिए पर्याप्त ध्यान नहीं दे पा रही है।

भोजपुरी के श्रेष्ठ साहित्यकार श्री चंद्रशेखर मिश्र का जन्म 30 जुलाई, 1930 को ग्राम मिश्रधाम (जिला मिर्जापुर, उ.प्र.) में हुआ था। उनका पालन-पोषण उनके ननिहाल बनारस के जरी परसीपुर गांव में हुआ था। उन्होंने उस युग में पढ़ाई लिखाई के लिए क्रांतिकारी सन्यासी बाबा गोविन्ददास के द्वारा स्थापित विद्यालय में कक्षा 5 तक की शिक्षा ग्रहण की थी। इस विद्यालय का प्रभाव मिश्र जी पर खूब पड़ा। वन्दे मातरम का पाठ और मामा सत्य नारायण दुबे के क्रांतिकारी स्वभाव मिश्र जी पर खूब पड़ा। गांव में अपने माता-पिता तथा अन्य लोगों से भोजपुरी लोकगीत व लोककथाएं सुनकर उनके मन में भी साहित्य के बीज अंकुरित हो गये थे । कुछ समय बाद उन्होंने कविता लेखन को अपनी अभिव्यक्ति का माध्यम बना लिया ।

भोजपुरी काव्य मुख्यतः श्रृंगार प्रधान होते है। इस चक्कर में कभी-कभी तो यह अश्लीलता की सीमाओं को भी पार कर जाता है। होली के अवसर पर बजने वाले गीत इसके प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। इसके कारण भोजपुरी लोककाव्य को कई बार हीन दृष्टि से भी देखा जाता है। चंद्रशेखर मिश्र इससे व्यथित हुए थे। उन्होंने दूसरों से कहने की बजाय स्वयं ही इस धारा को बदलने का निश्चय किया।

1942 के आंदोलन में गोविंद प्रसाद जी और मामा सत्य नरायण दुबे जी के गिरफ्तारी के बाद मिश्र जी अपने  साथियों के संग परसीपुर स्टेशन को आग लगा दिया था। उस जगह से वे इलाहाबाद फरार हो गए थे, जहाँ उनकी गिरफ्तारी हुई और उन्हें जेल जाना पड़ा था।

आजादी के लड़ाई में शामिल होने और जेल भी जाने के कारण उनकी लेखनी पर भी इसका प्रभाव पड़ा। इस कारण शुरुवाती दिनों में वीर रस के रचना को उन्होंने अपनाया। धीरे धीरे वहां से वह वाराणसी आए फिर राष्ट्रीय स्तर पर वे सक्रिय हो गए। मिश्र जी ने स्वाधीनता के समर में भाग लेकर कारावास का गौरव बढ़ाया था। अतः सर्वप्रथम उन्होंने वीर रस की कविताएं लिखीं। गांव की चौपाल से आगे बढ़ते हुए जब ये वाराणसी और फिर राष्ट्रीय कवि सम्मेलनों में पहुंचीं, तो इनका व्यापक स्वागत हुआ। राष्ट्रीयता के उभार के साथ ही भाई और बहिन के प्रेम को भी उन्होंने अपने काव्य में प्रमुखता से स्थान दिया।

17 अप्रैल, 2008 को 78 वर्ष की आयु में भोजपुरी साहित्याकाश के इस तेजस्वी नक्षत्र का अवसान हो गया। उनकी इच्छा थी कि उनके दाहसंस्कार के समय भी लोग भोजपुरी कविताएं बोलें। लोगों ने इसका सम्मान करते हुए वाराणसी के शमशान घाट पर उन्हें सदा के लिए विदा किया।

साहित्यिक कृतियां :-

‘दउरी हंकवा’

आजाद भारत में मिश्र जी के लेखनी से वीररस को नई ऊंचाई दी। पं. चंद्रशेखर मिसीर जी की पहिला रचना ‘दउरी हंकवा’ थी। इसमें गांव के दलित समाज पर सामंती वर्ग की ओर से होने वाला अत्याचार को दर्शाया गया है ।  समाचार ‘आज’ में यह रचना विशेष नोट के साथ प्रकाशित हुआ था।बाद में आज, उत्तरप्रदेश, सन्मार्ग में इनकी  रचनायें प्रकाशित होने लगी।

नागरी प्रचारिणी सभा’ में संपादक

कुछ समय के बाद बनारस के ‘ नागरी प्रचारिणी सभा’ में इन्हें ‘संपादक के रूप में नियुक्त हो गए थे। जहां वे लंबे समय तक जुड़े रहे। वे आकाशवाणी से भी बहुत लम्बे समय तक जुड़े रहे।

अन्य रचनाएं

इसके बाद अनेक ग्रंथों की रचना मिश्र जी ने की है – लोरिकचंद्र,गाते रूपक, देश के सच्चे सपूत, पहला सिपाही, आल्हा ऊदल, जाग्रत भारत,धीर, पुंडरीक, रोशनआरा आदि। साहित्य की इस सेवा के लिए उन्हें राज्य सरकार तथा साहित्यिक संस्थाओं ने अनेक सम्मान एवं पुरस्कार दिये। उनके काव्य की विशेषता यह थी कि उसे आम लोगों के साथ ही प्रबुद्ध लोगों से भी भरपूर प्रशंसा मिली। इस कारण उनकी अनेक रचनाएं विश्व विद्यालय स्तर पर पढ़ाई जाती हैं। कवि सम्मेलन के मंचों से एक समय भोजपुरी लगभग समाप्त हो चली थी। ऐसे में चंद्रशेखर मिश्र ने उसकी रचनात्मक शक्ति को जीवित कर उसे फिर से जनमानस तक पहुंचाया।

पृष्ठभूमि सहित प्रमुख रचनाएं

राष्ट्र जागरण के लिए “कुंवर सिंह” उनके लेखन का उद्देश्य था कि हर व्यक्ति अपनी तथा अपने राष्ट्र की शक्ति को पहचाकर उसे जगाने के लिए परिश्रम करे। राष्ट्र और व्यक्ति का उत्थान एक-दूसरे पर आश्रित है। उन्होंने 1857 के प्रसिद्ध क्रांतिवीर कुंवर सिंह पर एक खंड काव्य लिखा। यह चंद्रशेखर मिश्र जी के प्रसिद्ध दिलाने वाला महाकाव्य बना। ‘कुँअर सिंह’ की भूमिका सम्पूर्णानंद जी लिखी इस प्रकार लिखी है –

झूमत बा इतिहास जहां

तहँ कईसे भूगोल रही ख़तरे में।

छुरी कटारी बिकय सगरों,

चूड़हारिन गांव में आवत नाहीं।

  यह महाकव्य 1966 में प्रकाशित हुआ है ।1958 में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के शताब्दी वर्ष मनाया जा रहा था। उस समय बाबू रघुबंश नारायण सिंह जी के सम्पादन में प्रकाशित होने वाली भोजपुरी मासिक पत्रिका में बाबू कुंअर सिंह पर एक बड़ा लेख ‘बिहार केशरी बाबू कुंअर सिंह’ पर आया । इस लेख का असर पं चंद्रशेखर मिश्र जी पर इतना पड़ा कि इस महाकाव्य का  सृजन हुआ। इससे उनकी लोक प्रियता में चार चांद लग गये। कवि सम्मेलनों में लोग आग्रह पूर्वक इसके अंश सुनते थे। इसे सुनकर लोगों का देश प्रेम हिलोरें लेने लगता था। युवक तो इसके दीवाने ही हो गये। इस ग्रन्थ के कुछ पंक्तियां इस प्रकार है –

नेवता बलि बेदी क छोड़िके,

औरन कs कबहूँ यह आवत नाहीं ।

मारू, जुझारू बजई बजना,

केहु दोसर राग बजावत नाहीं ॥

छोड़ि के बीर भरी कविता,

रस दूसर में केहू गावत नाहीं ।

छूरी-कटारी बिकइ सगरउँ ,

चुरिहारिन गाउँ में आवत नाहीं ॥

पूतन से बुढवा कहले,

रन कइसे चली रहली न जवानी ।

पेड़ किनारे क जानs हमईँ,

बस चार दिना क बची जिनगानी ॥

वेद के मंत्र से पिंड ना लेबइ,

बोलs तबउ जय देस क बानी ।

पानी बचाई के ना रखबs ,

तब ना हम लेबइ सराध में पानी ॥

छाँटली बाँह गिरि छप से,

किछु दूरी बनी तब लाल निसानी ।

भोजपुरी भुइयाँ हुलसी,

कोखिया जनमा बेटवा बलिदानी ॥

भागीरथी से कहै धरती ,

जब लेइ लहरा नदिया इतरानी ।

बोलs ई नीर तोहार हु या,

हमरे बेटवा के कटार के पानी ॥

‘द्रौपदी’ खण्डकाव्य भोजपुरी में

कुंवर सिंह की सफलता के बाद उन्होंने अनेक भोजपुरी और हिन्दी पुस्तकों की रचना की। जहाँ ‘कुँअर सिंह’ महाकाव्य वीर रस प्रधान महाकाव्य रहा उसी युग में ‘द्रौपदी’ खण्डकाव्य भोजपुरी में करुण रस के अप्रतीम उदाहरण है। द्रौपदी काव्य की कुछ पंक्तियां इसप्रकार है –

मोछि मुरेरत आंखि घुरेरत

पापी के केहू निरेखत नाहीं ।

ताकत बा हमही के सबै,

ओकरे ओरिया केहू ताकत नाहीं ।

सासु जेठानी खड़ी देवरानी,

दुसासन के केहू छेकत नाहीं ।

हे बिरना हमरे उपरा फटहिउ

धोतिया केहू फेकत नाहीं ।।

जीयत बा जबले भयवा,

एहसान ना आन के माथे चढइबै।

गाढे में भारी भरोस हमार

ओन्है  तजि के के भला गोहरइबै।

पांच पति पर ऐसी गती

एहि देस में साझहिं आग लगइबै ।

सासुर में सब कायर बा

अब नइहर से बिरना बोलवइबै  ।।

टारत भीड़ बढी द्रौपदी

जस हंसिनि पौरंत फाटत काई ।

ठाढि छछात लगै दुरगा,

केसिया कन्हिया रहलें छितराई ।

बोललिं धाइ धधाइ के बोललिं

एड़ी ऊँचाई के हाथ उठाईं ।

बाटै खड़ा बिरना अब देखब

बाघ बियानी बा केकरि माई ॥

तू दुर्गा बनके अइलू

तोहरे बल वीर चलावत भाला ।

माई सरस्वती तू बनलु

तोहरी किरिपा कविता बनी जाला ।

आठ भुजा नभचुंबी धुजा

नहीं मैहर में सीढ़िया चढी जाला

राउर उंचि अदालत बा,

बदरा जहां से रचिकै रहि जाला।।

नाहीं ढोवात अन्हार क भार

बा ताकत बाटे ढोवाइ न देते।

झंखत बानी अँजोर बदे

दियरी, दियरी से छुवाई न देते।

भोर समय पछितैबे अकेलइ

राह अन्हारे देखाइ न देते

बाती अकेलि कहाँ ले जरइ?

तनिका भरि नेह चुवाई न देते।।

देखले कबउँ ना बाटी

पढ़ले जरूर बाटीं

सुनी ले कि रिखि मुनि

झूठ नाहीं बोललें

बरम्हा, बिसुन औ महेस

तीनिउँ मोहि गइले,

माई तोर बीन कौन-

कौन सुर खोललें?

द्रौपदी बेचारी बाटे

खाली एक सारी बाटै,

उहो ना बचत बाटै

बैरि मिलि छोरले,

अस गाढ़ी समय में

देखब तोहार हंस

हाली हाली उड़ेलें

कि धीरे धीरे डोलेले।।

ना लूटिहई द्रौपदी कतहू

मतवा भेजबू जौउ धोती एहां से।

रोज तू सुरुज बोवलू खेत मे

रोजई भेजलू जोती एहीं से।

माई रे तोरे असिसन के बल

पाउब छंद के मोती एहीं से।

बाटई हमे बिस्वास बड़ा निह्चाई

निकले रस सोती एहीं से ॥

ढोग कविताई क रचाई गैल बाटै तब छोड़ी के दूआरी तोर बोल कहाँ जाईरे।

भाव नाही भाषा नाही छंद रस बोध नाही ।

कलम न बाटै नाही बाटै रोसनाई रे।

कौरव सभा मे आज द्रौपदी क लाज बाटै गाढे में परली बाटै मोर कविताई रे।

हियरा लगाई तनी अचंरा ओढाई लेते लडिका रोवत बा उठाई लेते माई रे ॥

ओहि दिन पुरहर राष्ट्र धृतराष्ट भैल भागि मे बिधाता जाने काउ रचि गईलें।

नाऊ त धरमराज नाहि बा सरम लाज हाइ राम लाज क जहाज पचि गईलें।

ठाट बाट हारि गईलें राजपाट हारि गईलें

आगे अब काउ हारे काउ बची गईलें।

अंत जब द्रौपदी के दाँउ पर धई देले

अनरथ देखि हहकार मची गईलें॥

नाहि ढेर बड़ि बाटै नही ढेर छोटी बाटै नाहि ढेर मोटि बाटै नाहि ढेर पतरी।

छोट छोट दांत बाटै मोती जोति माथ बाटै तनी मनि गोरी बाटै ढेर ढेर सवंरी।

बड़ बड़ बाल बाटै गोल गोल गाल बाटै गोड लाल लाल बाटै लाल लालअगुँरी।

बड़े बड़े नैन वाली मीठे मीठे बैन वाली द्रौपदी जुआरिन के दाँउ पर बा धरी॥

द्रौपदी की करुण पुकार-

गाढ़े (बिपत्ति) में जो बिसरईबs

हरी,त जा तोहसे हम बोलब नाहीं।

तू बहिना बहिना कहबs,

पर नाता कब्बो हम जोड़ब नाहीं।

सावन में तोहें बांधे बदे,

जरई कब्बो ताल में बोरब नाहीं।

आ पूष में जो खिचड़ी लेके अईबs,

भले सड़ी जाई, मो खोलब नाही।।

दौड़े चले हैं मोहन पुकार पर-

आगे से चीर बढ़े नभ में,

ओकरे पीछवाँ, दउरेले मुरारी।

आज कन्हैया भगें एतना,

उनका के ना छू पऊंले ऊरगारी ।

तीन विमान उड़े नभ में,

अगवां के बढ़े, ईहे होड़ लगा री।

आई सभा में, आकाश से कान्हा,

बढ़ावन लागे हैं, छोर से सारी।।

सारी सभा और कौरव अचंभित हैं-

साड़ी घटे ना त, बोला दुर्योधन,

‘खींच दु:शासन, जोर लगा दे।’

ई सुन, द्रौपदी हंस बोली,

‘तुहूँ अब जोर लगा शहजादे।

बाती दयादी के आई गई बा त,

बाती पे बाती, हमें भी कहे दे।

‘चीर घटी न दु:शासन से,

अपने अन्हरा बपवा के पठा दे।।’

कृष्ण द्रौपदी से कहते हैं-

आ के कन्हैया कहें बहिना,

‘काहें बोलत नईखे, कोहांईल बाड़ी।

‘राही में ना पनियो पियनी,

तनी देख हमें, कि घमाईल बाड़ीं।

‘वाहन बा अबहीं मोर पाछे,

मो पैदल धावल, आवत बानी।

‘अद्वारिकाधीश के तें बहिना,

लुगरी बदे काहें कोहांईल बाड़ी।।

कृष्ण का बहन को आश्वासन..

‘खींचे दे साड़ी, मो देखत बानी,

ईहां पर के बलवान बड़ा बा।

कि बहिना के गोहार पे भाई भी,

आ के सभा बीचवा में खड़ा बा।

फारी के तें बन्हली सड़िया,

अबहीं अंगुरी में निशान पड़ा बा।

आ सूद में ढांकब लाज तोहार,

मूल तोहार, पड़ा के पड़ा बा।।

द्रौपदी की चेतावनी

खींच दु:शासन, जोर लगाई के

टेर हमार जो ऊ सुनी पईहें।

बा विश्वास, बिपत्ती पड़े पर,

मोहन ना हमके बिसरईहें।

देर लगी, ना अबेर लगी,

बिरना, हिरना अस धावल अईहैं।

भउजी के गोदी में होइहें तबो,

मोर टेर सुनी, थीर ना रह पईहें।।

खड़ी बोली में “सीता” खण्ड काव्य

इनकी खड़ी बोली में सीता बेहतरीन खण्डकाव्य है जो देवी सीता के जीवन पर आधारित है। यथा –

ऐसा ना दण्ड विधान बना

निर्दोष रहे, नृप तो भी सजा दे ।

देवो को सारवी बनायेगा कौन

सुरेश से जाके कोई समझा दे ।

शोभा न देता है राम के राज्य में

सत्य को आ के असत्य दबा दे ।

अग्नि में भी नही साहस था ,

जो सिया तन में एक दाग लगा दे ।।

सूरज के नाम पर वंश के गुमान वाले

समय कहेगा कौन खोटा,कौन है खरा।

सारी राजनीति एक दासी थी पलट गयी

खानदान खूब पहचानती थी मंथरा ।

बाप ने तो पूत को दिया था बनवास पर,

पूत ने तो एक पग और आगे है धरा ।

राम ने कलंक हीन नारी को निकालने की,

रवि-वंश में चलायी है नई परम्परा ।।

राम हो कि रावन हो, बलि चाहे बावन हो

यश-अपयश शेष दुनिया में रहेंगे ।

जब-जब चर्चा चलेगी रघुनाथ जी की,

सीय तेरी ! महिमा में तृण सम बहेंगे ।

आगे आगे राम सदा, पीछे पीछे सीय चली

किन्तु अब सीय आगे, राम पीछे रहेंगे ।

राम-सीता, राम-सीता , कोइ न कहेगा,

लोग सीताराम ! सीताराम ! सीताराम ! कहेंगे ।।

भीष्म खण्ड काव्य

कुँअर सिंह, द्रौपदी, सीता जैसे महान काव्यों की रचना के बाद भोजपुरी में तीसरा और हिन्दी भोजपुरी के चौथा  बेहतरीन खण्डकाव्य इन्होंने ‘भीषम’ खण्डकाव्य लिखा है। जो महाभारत के भीष्म के जीवन पर आधारित खण्ड काव्य  है । इसमें वीर रस और करुण रस का अदभुत समन्वय है। यथा –

छतिया उतान कइले भीषम तड़पि बोले,

रण बीच फैसला हमार बा तोहार बा ।

भाग्यमान जसुदा के कौन बा अभाव नाथ,

घीउ-दुध माखन कs लागल पहाड़बा ।

मोरे गंगा माई के त पास खाली पानी बाटै,

पनिया में का बा इहै मछरी सेवार बा ।

तबौ कुरुखेत बीच फैसला ई होइ जाई

दूध धार-दार बा कि पानी पानीदारबा ।

के रण जीतल हारल के,

कहइँ भीषम, केसव तू ही बतावs ।

जौन करइ के ना उ कइलs अब,

मारै बदै मति कष्ट उठावs ।

चूवत लोहू तरातर बा थकि-

जइबs न भूमि कठोर पै धावs ।

मैं रखि देब गला खुद चक्र पै,

मोहन माधव केसव आवs ।।

हिंदूस्तान, किसान और देस के लिए-

आओ लगाव की बात करें ,

इस देस को तो अलगाव ने मारा ।

नीचे को जाता कभी न कोइ,

इनका उनका सबका चढा पारा ।

एक मंदिर दूजे को मस्जिद,

चहिये तीसरे को गुरुद्वारा ।

जो कुछ चाहिए दे दो उन्हे ,

हमे चाहिए हिंदुस्तान प्यारा ।।

फूल लिखो कहीं पान लिखे,

कहीं गेहूँ कहीं धान लिखो रे ।

खेत लिखो खलिहान लिखो , खलिहान के पास किसान लिखो रे ।

एक निवेदन है तुमसे,

तुम ओ मेरे बेटे जवान लिखो रे ।

देश के देखें जहाँ टुकड़े ,

उन्हे जोड़ के हिन्दूस्तान लिखो रे।।

“गांव का बरखा” की कुछ पंक्तियां-

 

हमरे गाँव क बरखा लागै बड़ी सुहावन रे।

 

सावन-भादौ दूनौ भैया राम-लखन की नाईं।

पतवन पर जेठरु फुलवन पर लहुरु कै परछाईं।

बनै बयार कदाँर कान्ह पर बाहर के खड़खड़िया।

बिजुरी सीता दुलही, बदरी गावै गावन रे। हमर।।

 

बड़ी लजाधुर बिरई अंगुरी छुवले सकुचि उठेली,

ओहू लकोअॅरी कोहड़ा क बतिया, देखतै मुरझेली।

बहल बयरिया उड़ै चुनरिया फलकै लागै गगरिया,

नियरे रहै पनिघरा, लगै रोज नहावन रे। हमर ।।

 

मकई जब रेसमी केस में मोती लर लटकावै,

तब सुगना रसिया धीर से घुँघट आय हटावै।

फूट जरतुहा बड़ा तिरेसिहा लखैत बिहरै छतिया,

प्रेमी बड़ी मोरिनियाँ लागै मोर नचावन रे। हमर.।।

 

“देखऽ अब का होला” की पंक्तियां

 

जवन कब्‍बो ना करे के

तवनो कइलीं

जहँवा गइले पाप परेला

तहँवो गइलीं

जनलस अरोस-परोस

जानि गयल टोला

देखऽ अब का होला !

 

कहलीं, त कहलन –

ई का कइलऽ?

गंगा के घरे जनमलऽ

गड़ही में नहइलऽ? !

का ऊ ना जनतन जे कमल –

गड़हिए में होला ?

देखऽ अब का होला !

 

सरग हमैं ना चाहीं

हम त पा गइलीं

केहू जरो

हम त जुड़ा गइलीं

तोहार नाँव लेके

पी गइलीं जहर

रच्‍छा करिहऽ भोला

देखऽ अब का होला !

 

उँह…!

जवन होए के होई

तवन होई

एह डरन मनई

कब ले रोई।

हमके ?

‘हरि प्रेरित लछिमन मन डोला’

देखऽ अब का होला !।।

 

” झुलनी का रंग सांचा हमार पिया”

अवधी के  निर्गुण लोकगीत भौतिक अवलंबों पर आधारित आध्यात्मिक रचनाएँ है। एसा ही एक मनोहारी युगल  गीत पंडित चन्द्र शेखर मिश्र जी ने इस प्रकार व्यक्त किया है –

 

झुलनी में गोरी लागा हमार जिया ,  झुलनी का रंग साँचा हमार पिया

कवन सोनरवा बनायो रे झुलनिया ,

रंग पड़े नहीं कांचा हमार जिया

सुघड़ सोनरवा रचि रचि के बनवै ,

दै अगनी  का  आँचा हमार पिया।

छिति जल पावक गगन समीरा ,

तत्व मिलाइ दियो पाँचा हमार पिया।

रतन से बनी रे झुलनिया ,

जोइ पहिरा सोइ नाचा हमार पिया।

जतन से रखियो गोरी झुलनिया ,

गूँजे चहूँ दिसि साँचा हमार पिया।

टूटी  झुलनिया बहुरि नहिं बनिहैं ,

फिर न मिलै अइसा साँचा हमार पिया।

सुर मुनि रिसी देखि रीझैं झुलनिया ,

केहु न जग में रे बाँचा हमार जिया।

एहि झुलनी का सकल जग मोहे ,

इतना सांई मोहे राचा हमार पिया।

 

(स्पष्टीकरण : सोनार ईश्वर, झुलनी मानव शरीर तथा रतन इंद्रियों के रूपक के तौर पर प्रयुक्त किया गया है।)

 

पुरस्कार एवं सम्मान –

उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान लखनऊ के ओर से इनको  2002 में ‘अवन्तिबाई सम्मान’ से सम्मानित किया गया। मारीशस में भोजपुरी बोलने वालों की संख्या बहुत है।वहां के साहित्यकारों ने भी उन्हें ‘विश्व सेतु सम्मान’ से अलंकृत किया है। श्री चंद्रशेखर मिश्र जी के द्वारा लिखी कुछ किताब  भोजपुरी साहित्यांगन पर पढ़ी जा सकती है।

 

लेखक परिचय:-

(लेखक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, में सहायक पुस्तकालय एवं सूचनाधिकारी पद से सेवामुक्त हुए हैं। वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश के बस्ती नगर में निवास करते हुए सम सामयिक विषयों,साहित्य, इतिहास, पुरातत्व, संस्कृति और अध्यात्म पर अपना विचार व्यक्त करते रहते हैं। वॉट्सप नं.+919412300183)

बाल साहित्यकारों का त्रिदिवसीय महाकुंभ 5 जनवरी 2026 से नाथद्वारा में

11 राज्यों के 107 बाल साहित्यकार  सम्मानित होंगे
नाथद्वारा / साहित्य मंडल श्रीनाथद्वारा द्वारा आगामी 5 से 7 जनवरी 26 को नाथद्वारा में  ” श्री भगवती प्रसाद देवपुरा स्मृति एवं राष्ट्रीय बाल साहित्य – सांस्कृतिक कार्यक्रम” का आयोजन भगवती प्रसाद देवपुरा प्रेक्षागृह में किया जाएगा। कार्यक्रम में स्व. भगवती प्रसाद देवपुरा के व्यक्तित्व, कृतित्व और साहित्यिक योगदान पर संगोष्ठी, बाल साहित्य  विषयों पर आलेख वाचन, पुस्तकों का विमोचन, कवि सम्मेलन, पुस्तक प्रदर्शनी, बाल साहित्यकारों के सम्मान के साथ -साथ बृज रत्न वंदनाश्री द्वारा नानी बाई का मायरा की संगीतमय दृश्यात्मक प्रस्तुति  मुख्य आकर्षण होगा।
साहित्य मंडल श्रीनाथद्वारा के प्रधानमंत्री श्याम प्रकाश देवपुरा ने उक्त जानकारी देते हुए बताया कि  स्व.भगवती प्रसाद देवपुरा की बारहवीं पुण्यतिथि के अवसर पर तीन दिवसीय कार्यक्रम में देश के 11 राज्यों बिहार, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, हरियाणा, गुजरात, महाराष्ट्र, दिल्ली, पंजाब, कर्नाटक एवं छत्तीसगढ़ से 107 बाल साहित्यकारों को सम्मानित किया जाएगा। इनमें से 58 बाल साहित्यकारों को उनकी साहित्यिक उपलब्धियों के लिए नकद पुरस्कार और मानद अलंकरण से सम्मानित किया जाएगा। साथ ही 49 बाल साहित्यकार ऐसे हैं जिन्होंने भारतीय त्यौहार विषय पर साहित्य मंडल द्वारा आयोजित राष्ट्रीय बाल कहानी , कविता प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं प्रोत्साहन पुरस्कार प्राप्त किया है। राष्ट्रीय प्रतियोगिता में 22 बच्चों ने भी सफलता प्राप्त की है।
बाल साहित्य आलेख वाचन:
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डा. पशुपतिनाथ उपाध्याय, अलीगढ़ द्वारा बाल साहित्य का समसामायिक परिप्रेक्ष्य,
डॉ. रामेश्वरप्रसाद सारस्वत, सहारनपुर द्वारा बाल कहानियों के मूल में आत्म विश्वास और आत्म विकास, डॉ.सत्यनारायण ‘सत्य’, रायपुर-द्वारा बाल कहानियों में आधुनिक युग की चुनौतियाँ और संभावनाएँ, नरेन्द्र ‘निर्मल’, भरतपुर द्वारा बाल कहानियाँः संस्कृति के संदर्भ में, श्रीमती विमला नागला, केकड़ी द्वारा वर्तमान काल में बाल कहानियाँ और जीवन मूल्य तथा  श्रीमती संतोष ‘ ऋचा’, राया द्वारा बाल कहानियों में नैतिक मूल्य विषय पर बाल साहित्य आलेख प्रस्तुत किए जाएंगे। कार्यक्रम में 18 लेखकों की कृतियों का विमोचन भी किया जाएगा।
समारोह में 3100 रुपये की राशि एवं साहित्य मर्मज्ञ मानद उपाधि के अलंकरण से डॉ. अशोक कुमार मंगलेश, चरखीवावरी,  डॉ.अजय शर्मा, जलन्धर, शंकर सिंह मुरादाबाद, पवन तिवारी, मुम्बई को सम्मानित किया जाएगा।
समारोह में 2100 रुपए स्मृति सम्मान से सम्मानित होने वालों में  डॉ.अतुल भाई पी. सी. पाढक, सूरत,  शरद अरविन्द जोशी, अहमदाबाद,श्रीमती रत्ना ओझा ‘रत्न’, जबलपुर , डॉ.अशोक व्यास, भोपाल एवं श्री रंजन पाण्डेय, प्रयागराज को साहित्य सुधाकर मानद उपाधि से अलंकृत कर सम्मानित किया जाएगा। डॉ. ऋषिपाल धीमान ‘ऋषि’, अहमदाबाद, रवीन्द्र कुमार पाण्डेय, मिर्जापुर एवं  डॉ.वर्षा सिंह, ठाणे-मुम्बई को काव्य कलाधर मानद उपाधि से अलंकृत कर सम्मानित किया जाएगा।
समारोह में 2100 रुपए राशि एवं बाल साहित्य विभूषण अलंकरण से डॉ.भैरूलाल गर्ग, भीलवाड़ा, डॉ.पशुपतिनाथ उपाध्याय, अलीगढ़,श्रीमती वंदना यादव, दिल्ली, अजय कुमार अनुरागी, जयपुर, डॉ. दिनेश प्रसाद साह, दरभंगा, डॉ. गीता गीत, जबलपुर, डॉ. विमला भण्डारी, सलूम्बर, डॉ. अलका पाण्डेय,मुंबई, पवन कुमार पहाड़िया, डेह, नागौर, प्रकाश तातेड़, उदयपुर,  घनश्याम मैथिल ‘अमृत’, भोपाल, डॉ. रामेश्वर प्रसाद सारस्वत, सहारनपुर, डॉ. सत्यनारायण ‘सत्य’, रायपुर, डॉ. मंजु गुप्ता, नवी मुम्बई, राजेन्द्र मोहन शर्मा,जयपुर को सम्मानित किया जाएगा।
समारोह में 1100 रुपए स्मृति सम्मान से पुरस्कृत होने वालों में नरेन्द्र कुमार शर्मा, जयपुर, अशोक आनन, शाजापुर, श्रीमती आरती वर्मा, कानपुर एवं श्रीमती सरोज शर्मा, जयपुर को साहित्य कुसुमाकर मानद उपाधि से अलंकृत कर  सम्मानित किया जाएगा। नरेन्द्र कुमार लाटा, जयपुर ,डॉ.नंदकिशोर महावर, कोटा एवं गोपालप्रसाद पाठक ‘राज’, बलदेव -उत्तरप्रदेश को साहित्य सौरभ मानद उपाधि से अलंकृत कर सम्मानित किया जाएगा। डॉ.फारुक आफरीदी, जयपुर, राजेश भारती, कैथल-हरियाणा और श्रीमती ममता महक, कोटा को काव्य कौस्तुभ मानद उपाधि से अलंकृत कर सम्मानित किया जाएगा। डॉ.सुमन कादयान, हिसार, डॉ.उमा विश्वकर्मा, कानपुर एवं  हेमराज सिंह ‘हेम’, कोटा को काव्य कुसुम मानद उपाधि से अलंकृत कर सम्मानित किया जाएगा। संदीप कुमार पुरोहित, जोधपुर एवं भगवत दयाल सिंह, ब्यावर को पत्रकार श्री मानद उपाधि से अलंकृत कर सम्मानित किया जाएगा।
समारोह में 1100 रूपये  एवं बाल साहित्य भूषण मानद उपाधि अलंकरण से डॉ.बंदना पांचाल, अहमदाबाद श्रीमती उषा शर्मा ‘प्रिया’, मयुरा, श्रीमती सुमन पाठक, मथुरा डॉ.ओम प्रकाश कादयान, हिसार, डॉ. नीरु मित्तल नीर, पंचकूला, जय भगवान सैनी, हिसार, श्रीमती इन्दिरा त्रिवेदी, भोपाल,श्रीमती नीता सोलंकी, भोपाल,डॉ. मनीषा गिरी, ग्वालियर, देवकी दर्पण, कोटा सत्येन्द्र छिब्बर, जोधपुर, डॉ. सुशीला जोशी, कोटा, श्रीमती योगिता जोशी,जयपुर  ,श्रीमतीसंतोषचौधरी,जोधपुर,श्रीमती शकुंतला पालीवाल, उदयपुर को सम्मानित किया जाएगा।
 साहित्य मंडल की ओर से नाथद्वारा में साहित्यकारों के आवास और भोजन आदि की व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई है।

एजेंडाधारी हिंदू विरोधी फिल्मों का कच्चा चिठ्ठा

अभी एक फ़िल्म आई है धुरंधर। इसमें पाकिस्तान के अपराध के संगठित प्रयास को दिखाया है। स्वयं को सेक्युलर कहने वाले बहुत अधिक परेशान हो रहें है।
इससे पहले क्या दिखाया जाता था –
टुकड़े टुकड़े का समर्थन करने वाली दीपिका पादुकोण हो या पीके का आमिर खान। शोले के सलीम जावेद हों आज के नेटफ्लिक्स के सीरियल निर्माता। सभी का एक ही एजेंडा है। फिल्म गोल्ड हाकी ओलम्पिक की भारतीय टीम के इतिहास पर आधारित थी। इसमे कोच आदि सब को सच विपरीत दिखाया गया।
फिल्म जोधा अकबर मे ऋतिक रोशन ने अकबर को महान बताया। वही अकबर जिसके कारण चीतौड़ के किले मे हजारों महिलाएं जीवित आग मे कूद गई। शोले का रहीम चाचा ( ए के हंगल) हो या जंजीर का पठान ( प्राण) सभी के सभी अल्लाह के नेक बंदे परन्तु शोले का हीरो (धर्मेन्द्र ) मन्दिर मे शिवजी की मूर्ति के पीछे खड़ा होकर  हीरोइन को उल्लू बनाता है।
कुछ उदाहरण देखिए –
1
लक्ष्मी फ़िल्म का संदेश
भूत सच में होते हैं। भूत भगाने वाले हिंदू ओझा-तांत्रिक ठग होते हैं। कुछ पंडित भूत को पहचान तो पाते हैं, लेकिन भगाने की ताकत नहीं रखते। भूत को केवल पीर बाबा ही वश में कर सकते हैं। जमजम के पानी से बड़े से बड़ा भूत भी डरता है।
और भी-
अब्दुल नाम वाले चाचा बहुत अच्छे इंसान होते हैं। कोई माँ-बाप अपनी बेटी के लिए आसिफ से अच्छा लड़का नहीं खोज सकते। (इसलिए उन्हें अब लड़का खोजने की चिंता छोड़ देनी चाहिए, क्योंकि अब गली-गली में आसिफ उनकी बेटियों को खोज रहे हैं।
2
चक दे इंडिया फ़िल्म का संदेश
एक मुस्लिम कोच “तीजा तेरा रंग था मैं तो” करकर वर्ल्ड कप ले आता है। फ़िल्म में गंगा जमुनी भाईचारे को बताया गया था।
3
रंग दे बसंती फ़िल्म का संदेश
एक हिन्दू वादी कार्यकर्ता की पार्टी विमान घोटाला करती है जिससे पायलट मर जाता है। यह भी एक दृष्टिकोण बनाने का तरीका है। जिससे लगे कि केवल हिन्दू की बात करने वाला नेता ही घोटाले करता है।
4
राजी फ़िल्म का संदेश
एक मासूम लड़की को रॉ (भारतीय गुप्तचर एजेंसी) पाकिस्तान भेज देती है जहां निर्दोष ISI और आर्मी वाले अपने पति को वो मार देती है। असल मे वही पाकिस्तान की सेना उस समय 30 लाख बंगाली मार रही थी और 20 लाख महिलाओं का बलात्कारी थी।
नेटफ्लिक्स की निर्भया देखी?
पांच में से 1 आरोपी मुस्लिम अफरोज नाबालिग जिसे केजरीवाल सिलाई मशीन और 10000 दे रहा था उसे भी हिन्दू दिखा दिया गया।
नेटफ्लिक्स की ही लीला देखी?
जिसको एक काल्पनिक नगर “आर्यवर्त”(भारत का एक समय का नाम) दिखाया गया जहां एक ऐसी संस्था है जो गैर आर्य की नस्ल को मार डालती है। वही आर्य-द्रविड़ वाली थ्योरी स्थापित करने की कोशिश।
क्वांटिको
जहां प्रियंका चोपड़ा “रुद्राक्ष” देखकर आतंकी पहचानती है।
सेक्रेड गेम्स
जहां एक हिन्दू सन्त आतंकी होता है।