प्रेषकः
(ललित गर्ग)
लेखक, पत्रकार, स्तंभकार
ई-253, सरस्वती कंुज अपार्टमेंट
25 आई. पी. एक्सटेंशन, पटपड़गंज, दिल्ली-92
फोनः 22727486, 9811051133
एसआईआर का विरोधः चिन्ता लोकतंत्र की या वोट बैंक की?
संकल्प लें कि हम कम से कम देश के 25 ऐसे स्थानों का दर्शन करेंगे, जो हमारी विरासत से जुड़े हैंः श्री मोदी
उडुपी, कर्नाटक में श्री कृष्ण मठ में लक्ष कंठ गीता पारायण कार्यक्रम में प्रधानमंत्री
उडुपी। भगवान श्री कृष्ण के दिव्य दर्शनों की संतुष्टि, श्रीमद् भगवद्गीता के मंत्रों की ये आध्यात्मिक अनुभूति, और इतने सारे पूज्य संतों, गुरुओं की ये उपस्थिति, मेरे लिए परम सौभाग्य है। मेरे लिए ये असंख्य पुण्यों को प्राप्त करने जैसा है। और जो मुझे सम्मान दिया गया, मेरे लिए जो भाव प्रकट किए गये, शायद मुझे इतने आशीर्वाद मिले कि मेरे लिए जो कहा जाता है, मैं उससे योग्य बनूं, और ज्यादा काम करूं, और मुझसे जो अपेक्षाएं हैं, उसे मैं पूर्ण करूं।
अभी तीन दिन पहले ही मैं गीता की धरती कुरुक्षेत्र में था। अब आज भगवान श्री कृष्ण के आशीर्वाद और जगदगुरु श्री मध्वाचार्य जी के यश की इस भूमि पर आना, मेरे लिए परम संतोष का अवसर है। आज के इस अवसर पर जब एक लाख लोगों ने, एक साथ भगवद्गीता के श्लोक पढ़े, तो पूरे विश्व के लोगों ने भारत की सहस्त्र वर्षों की दिव्यता का साक्षात दर्शन भी किया है। इस कार्यक्रम में हमें आशीर्वाद देने के लिए पधारे हुए श्री श्री सुगुणेंद्र तीर्थ स्वामी जी, श्री श्री सुश्रीन्द्र तीर्थ स्वामी जी, कर्नाटका के गवर्नर थावरचंद गहलोत जी, केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे सहयोगीगण, राज्य सरकार के मंत्री, सांसद, विधायक, उडुपी के अष्ट मठों के सभी अनुयायी, उपस्थित अन्य संतगण, देवियों और सज्जनों !
कर्नाटका की इस भूमि पर, यहां के स्नेही जनों के बीच आना मेरे लिए सदा ही एक अलग अनुभूति होती है। और उडुपी की धरती पर आना तो हमेशा अद्भुत होता है। मेरा जन्म गुजरात में हुआ, और गुजरात और उडुपी के बीच एक गहरा और विशेष संबंध रहा है। मान्यता है कि यहां स्थापित भगवान श्री कृष्ण के विग्रह की पूजा पहले द्वारका में माता रुक्मिणी करती थीं। बाद में जगदगुरु श्री मध्वाचार्य जी ने इस प्रतिमा को यहां प्रतिष्ठापित किया। और आप तो जानते हैं, अभी पिछले ही वर्ष मैं समुद्र के भीतर श्री द्वारका जी का दर्शन करने गया था, वहां से भी आशीर्वाद ले आया। आप खुद समझ सकते हैं कि मुझे इस प्रतिमा के दर्शन करके क्या अनुभूति हुई होगी। इस दर्शन ने मुझे एक आत्मीय आध्यात्मिक आनंद दिया है।
उडुपी आना मेरे लिए एक और वजह से विशेष होता है। उडुपी जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी के सुशासन की, मॉडल की कर्मभूमि रही है। 1968 में, उडुपी के लोगों ने जनसंघ के हमारे वीएस आचार्या जी को, यहां की नगर पालिका परिषद में विजयी बनाया था। और इसके साथ ही उडुपी ने एक नए गवर्नेंस मॉडल की नींव भी रखी थी। आज हम स्वच्छता के जिस अभियान को राष्ट्रीय रूप देख रहे हैं, उसे उडुपी ने 5 दशक पहले अपनाया था। जल आपूर्ति और ड्रेनेज सिस्टम का एक नया मॉडल देना हो, उडुपी ने ही 70 के दशक में इन कार्यक्रमों की शुरुआत की थी। आज ये अभियान देश के राष्ट्रीय विकास का, राष्ट्रीय प्राथमिकता का हिस्सा बनकर हमारा मार्गदर्शन कर रहा है।
राम चरित मानस में लिखा है- कलिजुग केवल हरि गुन गाहा। गावत नर पावहिं भव थाहा।। अर्थात, कलियुग में केवल भगवद् नाम और लीला का कीर्तन ही परम साधन है। उसके गायन कीर्तन से, भवसागर से मुक्ति हो जाती है। हमारे समाज में मंत्रों का, गीता के श्लोकों का पाठ तो शताब्दियों से हो रहा है, पर जब एक लाख कंठ, एक स्वर में इन श्लोकों का ऐसा उच्चारण करते हैं, जब इतने सारे लोग, गीता जैसे पुण्य ग्रंथ का पाठ करते हैं, जब ऐसे दैवीय शब्द एक स्थान पर, एक साथ गूंजते हैं, तो एक ऐसी ऊर्जा निकलती है, जो हमारे मन को, हमारे मस्तिष्क को एक नया स्पंदन, एक नई शक्ति देती है। यही ऊर्जा, आध्यात्म की शक्ति की है, यही ऊर्जा, सामाजिक एकता की शक्ति है। इसलिए आज लक्ष कंठ गीता का ये अवसर एक विशाल ऊर्जा-पिंड को अनुभव करने का अवसर बन गया है। ये विश्व को सामूहिक चेतना, Collective Consciousness की शक्ति भी दिखा रहा है।
आज के दिन, विशेष रूप से मैं परमपूज्य श्री श्री सुगुणेंद्र तीर्थ स्वामी जी को प्रणाम करता हूं। उन्होंने लक्ष कंठ गीता के इस विचार को इतने दिव्य रूप में साकार किया है। पूरे विश्व में, लोगों को अपने हाथ से गीता लिखने का विचार देकर, उन्होंने जिस कोटि गीता लेखन यज्ञ की शुरुआत की है, वो अभियान सनातन परंपरा का एक वैश्विक जनांदोलन है। जिस तरह से हमारा युवा भगवद्गीता के भावों से, इसकी शिक्षाओं से जुड़ रहा है, वो अपने आप में बहुत बड़ी प्रेरणा है। सदियों से भारत में वेदों, उपनिषदों और शास्त्रों के ज्ञान को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने की परंपरा रही है। और ये कार्यक्रम भी इसी परंपरा का भगवद्गीता से अगली पीढ़ी को जोड़ने का एक सार्थक प्रयास बन गया है।
यहां आने से तीन दिन पहले मैं अयोध्या में भी था। 25 नवंबर को विवाह पंचमी के पावन दिन अयोध्या के राम जन्मभूमि मंदिर में धर्म ध्वजा की स्थापना हुई है। अयोध्या से उडुपी तक असंख्य रामभक्त इस दिव्यतम और भव्यतम उत्सव के साक्षी बने हैं। राम मंदिर आंदोलन में उडुपी की भूमिका कितनी बड़ी है, सारा देश इसे जानता है। परमपूज्य स्वर्गीय विश्वेश तीर्थ स्वामी जी ने दशकों पहले राम मंदिर के पूरे आंदोलन को जो दिशा दी, ध्वजारोहण समारोह उसी योगदान की सिद्धि का पर्व बना है। उडुपी के लिए राम मंदिर का निर्माण एक और कारण से विशेष है। नए मंदिर में जगदगुरु मध्वाचार्य जी के नाम पर एक विशाल द्वार भी बनाया गया है। भगवान राम के अनन्य भक्त, जगदगुरु मध्यावार्य जी ने लिखा था- रामाय शाश्वत सुविस्तृत षड्गुणाय, सर्वेश्वराय बल-वीर्य महार्णवाय, अर्थात, भगवान श्री राम—छः दिव्य गुणों से विभूषित, सर्वेश्वर, और अपार शक्ति-साहस के सागर हैं। और इसीलिए राम मंदिर परिसर का एक द्वार उनके नाम पर होना उडुपी, कर्नाटका और पूरे देश के लोगों के लिए बहुत गौरव की बात है।
जगद्गुरु श्री मध्वाचार्य जी भारत के द्वैत दर्शन के प्रणेता और वेदांत के प्रकाश-स्तंभ हैं। उनके द्वारा बनाई गई उडुपी के अष्ट मठों की व्यवस्था, संस्थाओं और नव परंपराओं के निर्माण का मूर्त उदाहरण है। यहां भगवान श्री कृष्ण की भक्ति है, वेदांत का ज्ञान है, और हजारों लोगों की अन्न सेवा का संकल्प है। एक तरह से ये स्थान ज्ञान, भक्ति और सेवा का संगम तीर्थ है।
जिस काल में जगदगुरु मध्वाचार्य जी का जन्म हुआ, उस काल में भारत बहुत सी आंतरिक और बाहर की चुनौतियों से जूझ रहा था। उस काल में उन्होंने भक्ति का वो मार्ग दिखाया, जिससे समाज का हर वर्ग, हर मान्यता जुड़ सकते थे। और इसी मार्गदर्शन के कारण आज कई शताब्दियों के बाद भी उनके द्वारा स्थापित मठ प्रतिदिन लाखों लोगों की सेवा का कार्य कर रहे हैं। उनकी प्रेरणा के कारण द्वैत परंपरा में ऐसी कई विभूतियां जन्मी हैं, जिन्होंने सदा धर्म, सेवा और समाज निर्माण का काम आगे बढ़ाया है। और जनसेवा की ये शाश्वत परंपरा ही, उडुपी की सबसे बड़ी धरोहर है।
जगद्गुरु मध्वाचार्य की परंपरा ने ही, हरिदास परंपरा को ऊर्जा दी। पुरंदर दास, कनक दास जैसे महापुरुषों ने भक्ति को सरल, सरस और सुगम कन्नड़ा भाषा में जन-जन तक पहुंचाया। उनकी ये रचनाएं, हर मन तक, गरीब से गरीब वर्ग तक पहुंचीं, और उन्हें धर्म से, सनातन विचारों से जोड़ा। ये रचनाएं आज की पीढ़ी में भी वैसी की वैसी ही हैं। आज भी हमारे नौजवान सोशल मीडिया की रील्स में, श्री पुरंदरदास द्वारा रचित चंद्रचूड़ शिव शंकर पार्वती सुनकर एक अलग भाव में पहुंच जाते हैं। आज भी, जब उडुपी में मेरे जैसा कोई भक्त एक छोटी सी खिड़की से भगवान श्री कृष्ण का दर्शन करता है, तो उसे कनक दास जी की भक्ति से जुड़ने का अवसर मिलता है। और मैं तो बहुत सौभाग्यशाली हूं, मुझे इसके पहले भी, ये सौभाग्य प्राप्त होता रहा है। कनकदास जी को नमन करने का सौभाग्य मिला है।
भगवान श्री कृष्ण के उपदेश, उनकी शिक्षा, हर युग में व्यवहारिक हैं। गीता के शब्द सिर्फ व्यक्ति ही नहीं, राष्ट्र की नीति को भी दिशा देते हैं। भगवदगीता में, श्री कृष्ण ने सर्वभूतहिते रता: ये बात कही है। गीता में ही कहा गया है- लोक संग्रहम् एवापि, सम् पश्यन् कर्तुम् अर्हसि ! इन दोनों ही श्लोकों का अर्थ यही है कि हम लोक कल्याण के लिए काम करें। अपने पूरे जीवन में, जगदगुरु मध्वाचार्य जी ने इन्हीं भावों को लेकर भारत की एकता को सशक्त किया।
आज सबका साथ, सबका विकास, सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय, ये हमारी नीतियों के पीछे भी भगवान श्री कृष्ण के इन्हीं श्लोकों की प्रेरणा है। भगवान श्री कृष्ण हमें गरीबों की सहायता का मंत्र देते हैं, और इसी मंत्र की प्रेरणा आयुष्मान भारत और पीएम आवास जैसी स्कीम का आधार बन जाती है। भगवान श्री कृष्ण हमें नारी सुरक्षा, नारी सशक्तिकरण का ज्ञान सिखाते हैं, और उसी ज्ञान की प्रेरणा से देश नारी शक्ति वंदन अधिनियम का ऐतिहासिक निर्णय करता है। श्रीकृष्ण हमें सबके कल्याण की बात सिखाते हैं, और यही बात वैक्सीन मैत्री, सोलर अलायंस और वसुधैव कुटुंबकम की हमारी नीतियों का आधार बनती है।
श्रीकृष्ण ने गीता का संदेश युद्ध की भूमि पर दिया था। और भगवद्गीता हमें ये सिखाती है कि शांति और सत्य की स्थापना के लिए अत्याचारियों का अंत भी आवश्यक है। राष्ट्र की सुरक्षा नीति का मूल भाव यही है, हम वसुधैव कुटुंबकम भी कहते हैं, और हम धर्मो रक्षति रक्षित: का मंत्र भी दोहराते हैं। हम लालकिले से श्री कृष्ण की करुणा का संदेश भी देते हैं, और उसी प्राचीर से मिशन सुदर्शन चक्र की उद्घोषणा भी करते हैं। मिशन सुदर्शन चक्र, यानि, देश के प्रमुख स्थानों की, देश के औद्योगिक और सार्वजनिक क्षेत्रों की सुरक्षा की ऐसी दीवार बनाना, जिसे दुश्मन भेद ना पाए, और अगर दुश्मन दुस्साहस दिखाए, तो फिर हमारा सुदर्शन चक्र उसे तबाह कर दे।
ऑपरेशन सिंदूर की कार्रवाई में भी देश ने हमारा ये संकल्प देखा है। पहलगाम के आतंकी हमले में कई देशवासियों ने अपना जीवन गंवाया। इन पीड़ितों में मेरे कर्नाटका के भाई-बहन भी थे। लेकिन पहले जब ऐसे आतंकी हमले होते थे, तो सरकारें हाथ पर हाथ रखकर बैठ जाती थीं। लेकिन ये नया भारत है, ये ना किसी के आगे झुकता है, और ना ही अपने नागरिकों की रक्षा के कर्तव्य से डिगता है। हम शांति की स्थापना भी जानते हैं, और शांति की रक्षा करना भी जानते हैं।
भगवद् गीता हमें कर्तव्यों का, हमारे जीवन संकल्पों का बोध कराती है। और इसी प्रेरणा से मैं आज आप सभी से कुछ संकल्पों का आग्रह भी करूंगा। ये आग्रह, 9 संकल्प की तरह हैं, जो हमारे वर्तमान और भविष्य के लिए बहुत आवश्यक है। संत समाज जब इन आग्रहों पर अपना आशीर्वाद दे देगा, तो इन्हें जन-जन तक पहुंचने से कोई रोक नहीं पाएगा।
हमारा पहला संकल्प होना चाहिए, कि हमें जल संरक्षण करना है, पानी बचाना है, नदियों को बचाना है। हमारा दूसरा संकल्प होना चाहिए, कि हम पेड़ लगाएंगे, देशभर में एक पेड़ मां के नाम अभियान को गति मिल रही है। इस अभियान के साथ अगर सभी मठों का सामर्थ्य जुड़ जाएगा, तो इसका प्रभाव और व्यापक होगा। तीसरा संकल्प कि हम देश के कम से कम एक ग़रीब का जीवन सुधारने का प्रयास करें, मैं ज्यादा नहीं कह रहा हूं। चौथा संकल्प स्वदेशी का विचार होना चाहिए। एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में हम सब स्वदेशी को अपनाएं। आज भारत आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी के मंत्र पर आगे बढ़ रहा है। हमारी अर्थव्यवस्था, हमारे उद्योग, हमारी टेक्नोलॉजी, सब अपने पैरों पर मजबूती से खड़े हो रहे हैं। इसलिए हमें जोर-शोर से कहना है- Vocal for Local. Vocal for Local. Vocal for Local. Vocal for Local.
पाँचवे संकल्प के रूप में हमें नैचुरल फार्मिंग को बढ़ावा देना है। हमारा छठा संकल्प होना चाहिए, कि हम हेल्दी लाइफ स्टाइल को अपनाएंगे, मिलेट्स अपनाएंगे, और खाने में तेल की मात्रा कम करेंगे। हमारा सातवां संकल्प ये हो कि हम योग को अपनाएं, इसे जीवन का हिस्सा बनाए। आठवां संकल्प- मैन्युस्क्रिप्ट, पांडुलिपियों के संरक्षण में सहयोग करें। हमारे देश का बहुत सा पुरातन ज्ञान पांडुलीपियों में छिपा हुआ है। इस ज्ञान को संरक्षित करने के लिए केंद्र सरकार ज्ञान भारतम मिशन पर काम कर रही है। आपका सहयोग इस अमूल्य धरोहर को बचाने में मदद करेगा।
आप नौवां संकल्प लें कि हम कम से कम देश के 25 ऐसे स्थानों का दर्शन करेंगे, जो हमारी विरासत से जुड़े हैं। जैसे मैं आपको कुछ सुझाव देता हूं। 3-4 दिन पहले, कुरुक्षेत्र में महाभारत अनुभव केंद्र की शुरुआत हुई है। मेरा आग्रह है कि आप इस केंद्र में जाकर भगवान श्रीकृष्ण का जीवन दर्शन देखें। गुजरात में हर साल भगवान श्रीकृष्ण और मां रुक्मिणी के विवाह को समर्पित माधवपुर मेला भी लगता है। देश के कोने-कोने से और खासकर के नॉर्थ ईस्ट से बहुत से लोग इस मेले में खासतौर पर पहुंचते हैं। आप भी अगले साल इसमें जाने का प्रयास जरूर करिएगा।
भगवान श्री कृष्ण का पूरा जीवन, गीता का हर अध्याय, कर्म, कर्तव्य और कल्याण का संदेश देता है। हम भारतीयों के लिए 2047 का काल सिर्फ अमृत काल ही नहीं, विकसित भारत के निर्माण का एक कर्तव्य काल भी है। देश के हर नागरिक की, हर भारतवासी की अपनी एक जिम्मेदारी है। हर व्यक्ति का, हर संस्थान का अपना एक कर्तव्य है। और इन कर्तव्यों की पूर्णता में कर्नाटका के परिश्रमी लोगों की भूमिका बहुत बड़ी है। हमारा हर प्रयास देश के लिए होना चाहिए। कर्तव्य की इसी भावना पर चलते हुए विकसित कर्नाटका, विकसित भारत का स्वप्न भी साकार होगा। इसी कामना के साथ उडुपी की धरती से निकली ये ऊर्जा, विकसित भारत के इस संकल्प में हमारा मार्गदर्शन करती रहे। एक बार फिर इस पवित्र आयोजन से जुड़े हर सहभागी को मेरी ढेर सारी शुभकामनाएं। और सबको- जय श्री कृष्णा ! जय श्री कृष्णा ! जय श्री कृष्णा !
वंदेमातरम् राष्ट्रीय गीत प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता:13 हजार से अधिक बच्चे इतिहास, संस्कृति, साहित्य से जुड़े
हिंदू कॉलेज में संविधान दिवस पर आयोजन
दिल्ली। उपनिवेशवाद से लड़ते हुए हमने अपना संविधान बनाया। हमारे देश और समाज के विभिन्न द्वंद्वों को इसमें जगह मिली है। संविधान बताता है कि हमने केवल अंग्रेजों से आजादी नहीं ली बल्कि देश के भीतर की गैर बराबरी से भी संघर्ष किया है। दिल्ली के बाबा साहब आंबेडकर विश्वविद्यालय में शिक्षा संकाय के आचार्य डॉ मनीष जैन ने संविधान के विभिन्न पक्षों पर विस्तार से चर्चा में कहा कि संविधान एक सपना भी है और हमारी बेहतरी का ताना बाना भी है। डॉ जैन ने हिंदू कालेज में राष्ट्रीय सेवा योजना द्वारा आयोजित कार्यक्रम में कहा कि वंचित समुदायों को अधिकार संपन्न बनाना और उन्हें बेहतर जीवन के लिए सशक्त बनाना भी हमारे संविधान को उदात्त और विशिष्ट बनाता है। उन्होंने कहा कि हमारा संविधान गरिमा और बंधुत्व के साथ सभी नागरिकों को अधिकारों से सम्पन्न करता है।
डॉ जैन ने अपने व्याख्यान के बाद संवाद सत्र में भी विद्यार्थियों और स्वयं सेवकों के सवालों के जवाब भी दिए। उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना के सेवा कार्य भारतीय संविधान की भावना के साथ युवाओं को विनम्र बनाते हैं और देशवासियों से जोड़ते हैं।
इससे पहले राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी डॉ पल्लव ने स्वागत किया। उन्होंने कहा कि हमारे देश ने लंबे संघर्ष के बाद स्वतंत्रता और लोकतंत्र का स्वाद चखा। डॉ पल्लव ने कहा कि युवा पीढ़ी के लिए यह चुनौती है कि स्वतंत्रता और लोकतंत्र को कायम रखें।
कार्यक्रम का संयोजन अर्चिता द्विवेदी और ईशान ने किया। कार्यक्रम में संविधान के निर्माण पर एक लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया गया। अंत में डॉ मनीष जैन को राष्ट्रीय सेवा योजना के छात्र अध्यक्ष निशांत सिंह ने शॉल ओढ़ाकर अभिनंदन किया।
अर्चिता द्विवेदी
जन संपर्क प्रमुख
राष्ट्रीय सेवा योजना
हिन्दू महाविद्यालय, दिल्ली
मो -9452536877
श्रीराम मन्दिर ध्वजारोहण पर पाकिस्तान की बौखलाहट
(ललित गर्ग)
लेखक, पत्रकार, स्तंभकार
ई-253, सरस्वती कंुज अपार्टमेंट
25 आई. पी. एक्सटेंशन, पटपड़गंज, दिल्ली-92
फोनः 22727486, 9811051133
संस्कृति और शृंगार बोध को जीवंत कर देते हैं पारंपरिक परिधान

भारत-कनाडा के रिश्तों में नई गर्माहट बड़े बदलाव का संकेत
अंततः यह कहा जा सकता है कि भारत और कनाडा के रिश्तों में शुरू हुई यह नई गर्माहट एक बड़े बदलाव का संकेत है। यह बदलाव न केवल आर्थिक समृद्धि को बढ़ावा देगा बल्कि वैश्विक शांति, नई तकनीक, हरित विकास और सामाजिक सौहार्द की दिशा में भी नई संभावनाएँ खोलेगा। दोनों देश यदि इसी सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ते रहे तो यह केवल द्विपक्षीय संबंधों को नई मजबूती नहीं देगा, बल्कि एक नई विश्व संरचना के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
(ललित गर्ग)
लेखक, पत्रकार, स्तंभकार
ई-253, सरस्वती कंुज अपार्टमेंट
25 आई. पी. एक्सटेंशन, पटपड़गंज, दिल्ली-92
फोनः 22727486, 9811051133
शीत ऋतु की शुरुआत में डॉ. अच्युत सामंता ने 40 हजार आदिवासी छात्र-छात्रों को प्रदान किए ऊनी वस्त्र
भुवनेश्वर। शीत ऋतु की शुरुआत में ही विश्व के सबसे बड़े आदिवासी आवासीय विद्यालय कीस ने अपने 40,000 आदिवासी छात्र-छात्रों को गर्म वस्त्र बांटे।कीस के संस्थापक महान् शिक्षाविद् प्रोफेसर अच्युत सामंत ने स्वयं बच्चों को अपने हाथों से गर्म कपड़े बड़ी ही आत्मीयता के साथ बांटे।उन्होंने बालिकाओं को शॉल और बालकों को स्वेटर प्रदान किए जिसे उन्होंने स्वयं खरीदकर पंजाब के लुधियाना से मंगवाया था। 2025 की ठंड से बचने हेतु अपने पिता तुल्य संस्थापक प्रोफेसर अच्युत सामंत के हाथों से गर्म वस्त्र पाकर छात्र-छात्राओं में अत्यंत उत्साह और खुशी देखी गई।

उल्लेखनीय है कि ओड़िशा की राजधानी भुवनेश्वर में स्थित है कीस-कीट जिसके संस्थापक हैं महान् शिक्षाविद् प्रोफेसर अच्युत सामंत जिन्होंने 1992-93 में अपनी कुल जमा पूंजी पांच हजार रुपये से कीट-कीस का आरंभ किया था। वही कीट-कीस आज दो डीम्ड विश्वविद्यालय बन चुके हैःकीट डीम्ड विश्वविद्यालय,भुवनेश्वर तथा कीस डीम्ड विश्वविद्यालय,भुवनेश्वर। दोनों शैक्षिक संस्थाओं में चालीस-चालीस हजार बच्चे पढ़ते हैं।
आयोजित भव्य कार्यक्रम में कीट डीम्ड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सरनजीत सिंह, कीस के कुलसचिव डॉ. प्रशांत कुमार राउतरे तथा अतिरिक्त कुलसचिव प्रमोद पात्र आदि उपस्थित थे।
स्वतंत्रता आंदोलन, संस्कृति और साहित्य की जानकारी से एक हजार बच्चों का ज्ञान बढ़ाया
आत्मनिर्भर भारत व नारी सशक्तीकरण की दिशा में एक और चरण – चार श्रम संहिताएं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार श्रम सुधारों की दिशा में निरंतर प्रयासरत है। नयी श्रम संहिताएँ इन्हीं सुधारों का अगला चरण हैं जिनका श्रमिक संगठनों की ओर से व्यापक स्वागत किया जा रहा है। यह चार नए श्रम सुधार व्यापक और सर्वहितकारी हैं। श्रमेव जयते की भावना से कार्य करने वाली नरेंद्र मोदी सरकार आने के बाद से श्रमिक वर्ग का सम्मान और उनके लिए सुविधाएं दोनों ही लगातार बढ़ रहे हैं। प्रधानमंत्री स्वयं हर महत्वपूर्ण समारोह में श्रमिकों का सम्मान करते हैं फिर चाहे वो अयोध्या में दिव्य – भव्य राम मंदिर का उद्घाटन हो या नए संसद भवन या फिर दिल्ली स्थित भारत मंडपम का उद्घाटन।
मोदी सरकार द्वारा लागू चार नई श्रम संहिताओें के माध्यम से श्रमिक वर्ग के लिए सामाजिक सुरक्षा , समय पर वेतन और सुरक्षित कार्यस्थल की व्यवस्था सुनिश्चित होगी। यह नई संहिताएं श्रमिक वर्ग के लिए बेहतर और लाभकारी अवसरो के लिए एक सशक्त नींव बनाएंगी। श्रमिकों के लिए पहली बार वेतन संहिता 2019,औद्योगिक संबंध संहिता 2020 व व्यावसायिक सुरक्षा स्वास्थ्य और कार्य स्थितियां संहिता 2020 लागू करने की महती घोषणा की गई है।
महिला कर्मचारियो के लिए पहली बार व्यापक संहिता – चार नई श्रम संहिताओं में पहली बार महिलाओ के हितों का विशेष ध्यान रखा गया है।भारत के श्रम इतिहास में पहली बार महिला कर्मचारियों के लिए सुरक्षा के साथ सभी क्षेत्रों में रात्रि पाली में काम की छूट तथा परिवार की परिभाषा में उन्हें अपने सास -ससुर को भी जोड़ने का अवसर दिया गया है। नई श्रम संहिता के अनुसार महिलाएं खनन सहित सभी उद्योगो में काम कर सकेंगी। इस कदम से महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर उत्पन्न होंगे यद्यपि ऐसे कार्यों में उनकी नियुक्ति उनकी इच्छा से ही कि जाएगी। नए कानून में महिला श्रमिको को बराबरी का दर्जा दिया जा रहा है। सहमति से और अनिवार्यतः सुरक्षा के साथ वह रात की पाली में भी काम कर सकेगी।पहली बार समान काम समान वेतन सहित 26 सप्ताह का वेतन सहित मातृत्व लाभ तथा शिशु पालन संहिता के अंतर्गत घर से काम करने की सुविधा भी दी जा रही है
गिग वर्कर्स के लिए पहल – नई श्रम संहिता में गिग और प्लेटफार्म यानी रैपिडो, जोमैटो, स्विगी, ओला, उबर से जुड़े कामगारो को भी पारिभाषित किया गया है। चार श्रम संहिताओे में वर्तमान 29 कानून को भी समाहित कर लिया गया है।
नए श्रम कानूनों में पहली बार युवा श्रमिकों को अवकाश के दिनों का भी वेतन मिलेगा तथा सभी श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी की गारंटी दी जा रही है। नियुक्त पत्र अनिवार्य करने से सामाजिक सुरक्षा रोजगार विवरण को बढ़ावा मिलेगा। नए श्रम कानूनों से अब नियोक्ता मजदूरों का शोषण नहीं कर सकेंगे। नए श्रम कानूनों में निश्चित अवधि वाले कर्मचारियों को स्थायी जैसे लाभ जिसमें सामाजिक सुरक्षा कवर, चिकित्सा सवेतन अवकाश सहित समस्त लाभ मिलेंगे। इलेक्ट्रानिक मीडिया, डिजिटल कामगारों को भी इन कानूनों का लाभ मिलेगा। नई श्रम संहिताएं 45 दिनों के अंदर ही लागू हो जाएंगी।
नयी श्रम संहिता, श्रम कानूनों के इतिहास का सबसे बड़ा सुधार होने के साथ साथ बदलती श्रम आवश्यकता को भी संबोधित करती है। श्रमिकों को न्यूनतम वेतन, समाजिक सुरक्षा, महिला श्रमिकों के लिए समान अवसर और गिग व संगठित कामगारों के लिए कानूनी पहचान सुनिश्चित करने वाली ये चारो संहिताएं उनके जीवन स्तर में सुधार लाएंगी। यह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्चपूर्ण कदम है । विशेषज्ञों का मत है कि यह कानून 2047 तक विकसित भारत के नए लक्ष्य को गति प्रदान करेंगे।
श्रम सुधारों का उद्योग जगत ने व्यापक स्वागत किया है। इन सुधारों से श्रमिकों की दशा बदलेगी और उनके जीवन में भी व्यापक बदलाव आएगा। महिलाओं को रात की पाली मे काम करने की अनुमति मिलना सरकार का कानून व्यवस्था पर आत्मविश्वास दर्शाता है।नए सुधारों से अब औद्योगिक क्षेत्रों के साथ ही लघु उद्योगों में भी वृद्धि होगी। नए श्रम कानूनों के कारण अब पुराने के साथ ही नए उद्योगों का भी विकास होगा। नई श्रम संहिताएं श्रमिकों के जीवन में नया सूर्योदय लेकर आने वाली हैं।
प्रेषक – मृत्युंजय दीक्षित
फोन नं. – 9198571540