Tuesday, April 16, 2024
spot_img
Homeपुस्तक चर्चासिन्धी कहानी साहित्य विविधताओं का अनमोल खजाना है - किशन रत्नानी

सिन्धी कहानी साहित्य विविधताओं का अनमोल खजाना है – किशन रत्नानी

सिंधी साहित्य में सामाजिक आयाम एवम पर्यावरण विषय पर पत्र वाचन में किशन रत्नानी ने रेखांकित किया है कि सामाजिक आयाम में परिवार, परिवार में हो रहे परिवर्तन, महिला अधिकार, बच्चों के जीवन आदि पर्, पर्यावरण से जुड़े सभी पहलुओं पर,प्रदूषित होते माहौल पर और पर्यावरण के संवर्धन के प्रयासों पर सिन्धी कहानियों, उपन्यासों और बाल साहित्य में बहुत उल्लेख मिलते हैं। भारत सरकार के सूचना प्रसारण के वरिष्ठ अधिकारी किशन रत्नानी आज राजकीय सार्वजनिक मंडल पुस्तकालय में आयोजित संभाग स्तरीय पुस्तक प्रदर्शनी और साहित्यिक समारोह के चौथे दिन संबोधित कर रहे थे।

रत्नानी ने कहा कि किसी मसले को सामने रखती कहानी, किसी घटना का खुलासा करती कहानी, किसी बयान या बर्ताव को बताती कहानी, राजनीतिक, सामाजिक या आर्थिक समझौतों, सौदों, सुलह, संभावनाओं या समझ को सामने लाती कहानियां सिन्धी साहित्य का अनमोल खजाना हैं।

उन्होंने कहा कि इंसान की मनोदशा के एक-एक पल का अक्स पेश करना,हर एक पल में कमी,लघुता, हल्केपन, पल के साथ घटती बढ़ती कसमसाहट,बेबसी, समस्याओं के हल,उपाय ,कम लफ़्ज़ों में,प्रभावी तरीके और असरदार अंदाज में बयां करना, जीवन आदर्शों और आशावादी सोच के भाव को देश,समाज और व्यक्तिगत जीवन से जोड़कर देखने का नजरिया ये सभी सिन्धी कहानियों में नज़र आता है।

मांगरोल के लोक कवि एवं गीतकार जगदीश निराला ने मांगरोल की ढाई कड़ी की राम लीला और पात्र विषय पर विस्तार से जानकारी दी और ढाई कड़ी की रामलीला सुना कर मनोरंजन किया। साहित्यकार सी. एल. सांखला बाल साहित्य पर चर्चा करते हुए कहा कि तकनीकी विकास के समय में बाल साहित्य का रूपांतरण भी दूसरी तरह से करना होगा। विज्ञान कथाओं के साथ तकनीकी से जुड़ना भी जरूरी हो गया है। अब बाल साहित्यकार नए परिवेश की नई रचनाएं लिखें।

उन्होंने एक बाल कथा और बाल गीत से सभी को गुदगुदाया। साहित्यकार महेश पंचोली ने राजस्थानी हिंदी के आयाम विषय पर अपने विचार व्यक्त किए। साहित्यकार आनंद हजारी ने भी अपने विचार व्यक्त किए। महेश पंचोली ने राजस्थानी हिंदी के आयाम विषय से संबंधित कविताएं, दोहे मुक्तक प्रस्तुत किए। डॉ. गोपाल कृष्ण भट्ट की पुस्तक गीत संजीवनी (छंदबद्ध गीतों का संग्रह) का विमोचन भी किया गया।

संगोष्ठी सत्रों में पुस्तकालय अध्यक्ष डॉ. दीपक कुमार श्रीवास्तव ने सभी का स्वागत किया। मुख्य अतिथि पूर्व निदेशक फोरेंसिक लैब डॉ. विनोद जैन, साहित्यकार जितेंद्र निर्मोही, पूर्व संयुक्त निदेशक डॉ.प्रभात कुमार सिंघल उपस्थित थे। संचालन साहित्यकार राजेंद्र पंवार ने किया।

image_print

एक निवेदन

ये साईट भारतीय जीवन मूल्यों और संस्कृति को समर्पित है। हिंदी के विद्वान लेखक अपने शोधपूर्ण लेखों से इसे समृध्द करते हैं। जिन विषयों पर देश का मैन लाईन मीडिया मौन रहता है, हम उन मुद्दों को देश के सामने लाते हैं। इस साईट के संचालन में हमारा कोई आर्थिक व कारोबारी आधार नहीं है। ये साईट भारतीयता की सोच रखने वाले स्नेही जनों के सहयोग से चल रही है। यदि आप अपनी ओर से कोई सहयोग देना चाहें तो आपका स्वागत है। आपका छोटा सा सहयोग भी हमें इस साईट को और समृध्द करने और भारतीय जीवन मूल्यों को प्रचारित-प्रसारित करने के लिए प्रेरित करेगा।

RELATED ARTICLES
- Advertisment -spot_img

लोकप्रिय

उपभोक्ता मंच

- Advertisment -spot_img

वार त्यौहार