Sunday, June 16, 2024
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वेटफ़ोर्ड कृष्ण मंदिर का द बीटल्स के मुख्य गायक जार्ज हैरिसन का रिश्ता

भारत भूमि से आठ हज़ार किलोमीटर की दूरी पर लन्दन शहर के केंद्र बिन्दु से केवल दस मिल की दूरी पर वेटफोर्ट उपनगर है जहां सत्तर एकड़ से भी अधिक बड़े विशाल परिसर में राधा कृष्ण का सुंदर मंदिर है , परिसर में विशाल गौशाला है , तुलसी वन है साथ ही गुरुकुल पद्धति का स्कूल भी संचालित किया जाता है . यह सब बिना किसी प्रचार के सन् 73 से इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्ण कॉन्शियसनेस (इस्कॉन) द्वारा संचालित किया जा रहा है . पिछली जन्माष्टमी पर ब्रिटेन के निवर्तमान प्रधान मंत्री ऋषि सौनक भी दर्शन हेतु आये थे. यही नहीं हाल ही में राजा चार्ल्स के राज्याभिषेक के अनुष्ठान में इस मंदिर के पुरोहितों ने भी भाग लिया था .

लेकिन इस मंदिर की स्थापना की कहानी मशहूर ब्रिटिश पॉप ग्रुप द बीटल्स से शुरू होती है . छठे और सातवें दशक के अंतर राष्ट्रीय संगीत परिदृश्य को जितना द बीटल्स ने प्रभावित किया उतना किसी अन्य गायक या ग्रुप ने नहीं किया. इसी के साथ रोचक तथ्य यह भी है कि यह ग्रुप भारतीय संस्कृति से काफ़ी प्रभावित था , ग्रुप के सदस्य छठे दशक में काफ़ी समय ऋषिकेश में आ कर रहे थे , उनके कई सुपर हिट गीत ऋषिकेश में ही कम्पोज हुए थे.

ग्रुप के लीड सिंगर जॉर्ज हैरिसन उस दौर के गायकों में काफ़ी संपन्न थे, उनके ऊपर योग, मैडिटेशन , भारतीय सांस्कृतिक परंपरा की गहरी छाप पड़ी थी , शायद इसका कारण सुप्रसिद्ध सितारवादक पंडित रवि शंकर भी थे जो उनके करीबी मित्र थे . पंडित जी ने ग्रुप के हिट नॉर्वेजियन वुड्स में बेहतरीन सितार बजाया था . बाद में जॉर्ज हैरिसन इस्कॉन से जुड़े लोगों विशेषकर प्रभुपाद भक्ति वेदान्त जी के संपर्क में आये और उनसे प्रभावित भी हुए . उसी दौरान जॉर्ज हैरिसन ने ‘My Sweet Lord’ लन्दन के कृष्णा मंदिर के लिये विशेष रूप से रिकार्ड किया था.

जॉर्ज हैरिसन ने वेटफ़ोर्ड उपनगर से सटे आल्डनहैम में स्थित पिटकाक मैनर एस्टेट को एक अमेरिकी एक्ट्रेस से ख़रीदा था . और फिर इस 77 एकड़ की विशाल संपत्ति को इस्कॉन को दान कर दिया और कृष्ण मंदिर के निर्माण का रास्ता प्रशस्त कर दिया.

मैनर का मुख्य भवन पुरानी जोर्जियन शैली में निर्मित है जिसकी संरचना के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है . कृष्ण भगवान और राधा रानी इसी भवन के निचले तल में विराजमान हैं यहीं मुख्य पूजा अर्चना की जाती है.

धीरे धीरे करके परिसर में काफ़ी नई चीजें जुड़ गई हैं , मुख्य पिटकाक भवन के प्रवेश से पहले कासा शैली में एक विशाल हवेली बनाई गई है जिसमें उत्सव , भोजन, प्रसाद के लिए बड़े बड़े हाल हैं . जो इन दिनों यहाँ विवाह के आयोजनों के लिए भी दिये जाते हैं. परिसर में बड़ी गौशाला भी है जहां गायों को हरि घास और अन्य पौष्टिक ख़ाना दिया जाता है. एक बड़ी कंज़र्वेटरी में तापमान तुलसी वृक्षों के अनुकूल रखा गया है इसमें मिनी तुलसी वन बनाया गया है . परिसर में एक तालाब, उपवन भी है.

इस मंदिर की लन्दन में मौजूदगी यह बताने के लिए काफ़ी है कि एक व्यक्ति की उदारता सांस्कृतिक जन जागरण के अभियान में बदल सकती है.

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