Friday, May 24, 2024
spot_img
Homeमीडिया की दुनिया सेलर्नऐप की मदद से युवाओं को मिल रही पैसे की सीख

लर्नऐप की मदद से युवाओं को मिल रही पैसे की सीख

जैसे-जैसे शेयर बाजार हैरान करने वाली ऊंचाइयों पर पहुंचा, लर्नऐप पर ग्राहकों की संख्या भी बढ़ती गई। जीरोधा द्वारा वित्त पोषित वित्तीय शिक्षा प्रदान करने वाली इस ऐप ने अपने ग्राहकों की संख्या वर्ष 2020 के 70,000 से करीब तीन गुना बढ़ाकर आज 2,00,000 तक कर ली है।

उद्योग के अग्रणी व्यक्तियों द्वारा शेयर और क्रिप्टो निवेश के संबंध में मुफ्त सबक पर एक नजर डालते हुए 10 लाख अन्य लोग भी इस प्लेटफार्म का दौरा कर चुके हैं और इस साल कंपनी का लक्ष्य 50 लाख लोगों तक पहुंचना है।

इसके संस्थापक और मुख्य कार्याधिकारी प्रतीक सिंह कहते हैं ‘कैलेंडर 2020 के बाद से हम राजस्व में 300 प्रतिशत का इजाफा कर चुके हैं और वर्ष 2021 के लिए अनुमानित कारोबार पिछले साल की तुलना में 350 प्रतिशत होने का पूर्वानुमान है।’

लोगों को नीरस वित्त की अवधारणा के बारे में सिखाने की तलाश पिछले साल निर्णायक मोड़ ले चुकी है। पावरपॉइंट के थकाऊ प्रजेंटेशनों से यह डिजिटल जानकारियों, डॉक्यूमेंटरी वाली शैली के वीडियो और पॉप क्विज में आ चुकी है, जो इसके पाठों को और अधिक आकर्षक बना रहे हैं तथा वित्तीय कौशल सीखने में रुचि पैदा कर रहे हैं।

शहरी महिलाओं के लिए वित्तीय विषय सीखने वाली ऐप बेसिस पर उत्सुक निवेशकों द्वारा बाजार की गतिविधियों और रुझानों को समझाने के संबंध में अपने विचार साझा करने से क्रिप्टो और निवेश वाले समुदाय कभी-कभी आधी रात को सक्रिय हो जाते हैं।

बेसिस की शुरुआत 2019 में हुई थी और इसके प्लेटफॉर्म पर 1,00,000 से अधिक महिलाएं हैं, जिनमें से ज्यादातर प्रौढ़ और युवा वर्ग की हैं। इसकी कुछ सदस्य कॉलेज की ऐसी छात्राएं हैं, जो अपने पैसे को बेहतर तरीके से प्रबंधित करने के बारे में जानना चाहती हैं ताकि 30 साल की उम्र में पहुंचने तक वे अपने वित्त को व्यवस्थित कर सकें। और कुछ ऐसी सदस्य हैं, जो पैसिव आय अर्जित करने के लिए बजट या योजनाओं के बारे में सीखना चाहती हैं। अपने खर्च की समस्या पर भी इसकी मदद ली जा सकती है।

इसकी सह-संस्थापक और मुख्य परिचालन अधिकारी दीपिका जयकिशन कहती हैं ‘इस प्लेटफॉर्म से जुडऩे के बाद हमारी सदस्य अपनी कमाई का औसतन 40 प्रतिशत बचाने में सक्षम रहती हैं।’ ऐसा ज्यादातर उन विशेषज्ञों की मदद से अपने खर्च और निवेश के फैसले को सुव्यवस्थित करते हुए जाता है, जो खुद में महिलाएं हैं। ऐप का एक सदस्यता प्रारूप है-वार्षिक सदस्यता के लिए 9,000 रुपये। हालांकि इसमें अनियमित सदस्यों के लिए भी सीखने के लिए बहुत काफी कुछ है। इनमें ऐसे लेख भी शामिल रहते हैं, जिन्हें सोच-समझकर सरल रखा जाता है।

जयकिशन कहती हैं, ‘हम महिलाओं के लिए वित्त के बारे में सीखने के वास्ते इस ढंग से एक सुरक्षित जगह बनाना चाहते थे, जो उनके लिए सुविधाजनक हो और उनकी खास जरूरतों के अनुरूप हो।’

विशेषज्ञों को शामिल करते हुए और सामग्री की गुणवत्ता सुनिश्चित करते हुए बेसिस तथा लर्नऐप जैसी ऐप एक ऐसे स्थान पर ऑर्डर ला रही हैं, जहां फिलहाल मुफ्त ऑनलाइन वीडियो का बोलबाला है। उदाहरण के लिए लर्नऐप पर ज्यादातर पाठ्यक्रम मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशियल सर्विसेज लिमिटेड के चेयरमैन रामदेव अग्रवाल, बीएसई के मुख्य कार्यधिकारी आशीष चौहान, एडलवाइस ऐसेट मैनेजमेंट लिमिटेड की मुख्य कार्याधिकारी राधिका गुप्ता और राकेश झुनझुनवाला के रेयर ग्रुप के मुख्य कार्याधिकारी उत्पल सेठ जैसे उद्योग जगत के अग्रणी व्यक्तियों द्वारा पेश किए जाते हैं। सिंह कहते हैं कि जब उद्योग का कोई अग्रणी व्यक्ति पढ़ाता है, तो उनकी एकमात्र प्रेरणा समाज को अपना अनुभव देना होता है। वे उपयोगकर्ताओं से पैसा कमाने की नहीं सोचते हैं।

इन पाठ्यक्रमों को व्याख्यान वाले ढंग से तैयार नहीं किया जाता है।

लर्नऐप अधिक गुणवत्ता वाली वीडियो के जरिये कहानी सुनाने पर ध्यान केंद्रित करती है, जिसमें अच्छी तरह से बनाई गई डॉक्यूमेंट्री वाला आकर्षण होता है। कोई वीडियो को किसी दृश्य (बिग शॉट्स) से खुल सकता है और फिर एक के बाद एक विविध सामग्री। इसमें सीखने वालों को ध्यान केंद्रित रखने के लिए बहुत कठिन प्रयास भी नहीं करना पड़ता। लर्नऐप हर दिन 45 मिनट की कार्यशाला का आयोजन करती है और उसके बाद प्रश्नोत्तर सत्र होता है। सिंह के अनुसार इसका परिणाम यह हुआ है कि पाठ्यक्रम के लिए नामांकन करने वालों में से 51 प्रतिशत इसे पूरा कर रहे हैं, उद्योग में सबसे अधिक है। वह कहते हैं कि हम व्यावहारिक परिणाम भी प्रदान करते हैं। यह ऐसा कुछ नहीं है जिसे आप आज सीखें और अपने पैसे में इजाफे के लिए 20 साल तक प्रतीक्षा करें।

साभार-https://hindi.business-standard.com/ से

image_print

एक निवेदन

ये साईट भारतीय जीवन मूल्यों और संस्कृति को समर्पित है। हिंदी के विद्वान लेखक अपने शोधपूर्ण लेखों से इसे समृध्द करते हैं। जिन विषयों पर देश का मैन लाईन मीडिया मौन रहता है, हम उन मुद्दों को देश के सामने लाते हैं। इस साईट के संचालन में हमारा कोई आर्थिक व कारोबारी आधार नहीं है। ये साईट भारतीयता की सोच रखने वाले स्नेही जनों के सहयोग से चल रही है। यदि आप अपनी ओर से कोई सहयोग देना चाहें तो आपका स्वागत है। आपका छोटा सा सहयोग भी हमें इस साईट को और समृध्द करने और भारतीय जीवन मूल्यों को प्रचारित-प्रसारित करने के लिए प्रेरित करेगा।

RELATED ARTICLES
- Advertisment -spot_img

लोकप्रिय

उपभोक्ता मंच

- Advertisment -spot_img

वार त्यौहार