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अक्षय कुमार की इस ‘लक्ष्मी’ को दर्शकों ने नकार दिया

रेटिंग 1 स्टार
नोट – फिल्म की निर्माता एक मुस्लिम है, दाऊद गैंग का पैसा लगा है, पूरी तरह अजेंडा फिल्म । अपनी भावनाएं आहत ना ही करवानी हो तो ना ही देखें।

फिल्म शुरू होती है एक गाँव मे एक हिन्दू बाबा के द्वारा एक महिला को सताया जा रहा है, वहाँ पर आसिफ यानी की देशभक्त कुमार आके महिला को बचाता है और बाबा की पोल खोलता है ( नरेटिव- हिन्दू बाबा लालची होते है, लोगो को डराकर सताकर पैसे ऐंठते है ) !

अगला दृश्य लव जिहाद के लिए हिन्दू लडकियो को प्रेरित करने वाला है, जहाँ मूल फिल्म (कंचना) मे हीरो हिन्दू होता है वहाँ पर इस फिल्म का हीरो आसिफ है जो एक हिन्दू लड़की को भगाकर शादी किया है और अब उसे बहुत खुश रखता है, लड़की का बाप बहुत नाराज है, लड़की की माँ का फोन आता है वो अपने बेटी और दमाद को घर बुलाती है !

अगला दृश्य लड़की के घर की डाइनिंग टेबल पर आसिफ द्वारा अपनी वाइफ के भाई का प्रोफेशन पूछे जाने पर माता के जगराते मे गाना बताया जाता है और भाई को बिल्कुल बुद्धू दिखाना साथ ही घर की वरिष्ठ महिला कियारा आडवाणी की माँ का दारू पीकर अपने पति से बदतमीजी करना ( नरेटिव – जिस घर मे माता का जगराता होता है उस घर की महिला शराब पीती है और अपने पति को गरीयाती है )!

घर मे आसिफ के द्वारा जब आत्मा का प्रवेश हो जाता है तब उसके confirmation के लिए मंदिर के पुजारी जी के द्वारा क्रियाएँ बताना किन्तु आत्मा को बाहर निकालने मे खुद को असमर्थ बताना बाहर निकल कर दोनो सास बहुओं द्वारा पंडित जी को गरियाना और मदद के लिए एक पीर बाबा को फोन लगाना ( नरेटिव – भूत प्रेत बाबा केवल पीर बाबा ही निकाल सकते है, हिन्दू पंडित नही )
बाद मे फिल्म मे पीर बाबा के द्वारा ही आत्मा को वश मे करना दिखाया गया है, पीर बाबा को बहुत शक्तिशाली दिखाया गया है )

अपने ससुर को आसिफ द्वारा इम्प्रेस करने के दौरान नमाज की महिमा बताना और बाद मे ससुर द्वारा अपनी पत्नी से ये कहते दिखाना की अगर मे खुद भी अपनी बेटी के लिए लड़का ढूंढ़ता तो भी लव जिहादी से अच्छा नही ढूंढ़ पाता!

लक्ष्मी को बचपन मे उसका बाप जो की हिन्दू है के द्वारा उसके ट्रांसजेंडर होने का पता लगने पर घर से मार पीटकर भगा देना और हमेशा की हिन्दी फिल्मो की तरह अब्दुल चाचा को नेक इंसान दिखाना जो की लक्ष्मी को पालता पोसता है और बाद मे उसके लिए जान भी दे देता है ( नरेटिव – हिन्दू बाप क्रूर होता है और अब्दुल चाचा बहुत नेक होते है )!

ऐसे कई दृश्यों मे इसी तरह बहुत कुछ दिखाया गया है और नरेटिव सेट किया गया है!

फिल्मांकन के बारे मे बात करे तो एक फूहड़ कॉमेडी है जो हंसाने और डराने दोनो मे नाकाम फिल्म है, घर की सास बहुओं को आपस मे थप्पड़ लगाते बदतमीजी करते दिखाया गया है, हिन्दू परिवार की महिलाए ऐसी होती है महसूस करवाया गया!

फ़िल्म मे कुछ भी नया नही है सामान्य है, फ़िल्म को देखना अपने डाटा और समय की बर्बादी है ( मैने कर लिया आप ना करे, imdb पर 1 स्टार भी दे आया हूँ आप लोग भी बिना देखे जाके 1 स्टार दे सकते है )!

अक्षय कुमार ने राष्ट्रवादियों से अभी तक जितनी इज्जत पायी थी इस फ़िल्म को करने के बाद सारी धूल मे मिल जानी है, जो की पहले से ही मिल भी रही है ।

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