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विश्व पुस्तक मेले में जलसाघर का अंतिम दिन

· क्लासिकल पुस्तकों में रागदरबारी , मैला आँचल ,तमस ,जूठन ,चित्रलेखा ,काशी का अस्सी आदि किताबों की रही मागं

· नई पुस्तकों में में बेशरम , अपार ख़ुशी का घराना ,सहेला रे ,जल थल मल , जनता स्टोर, ग्यारहवी A के लड़के ,पाजी नज्में ,मंटो आदि का बोलबाला

· मेले में 94 वर्ष की कृष्णा सोबती का उपन्यास आया तो एकदम युवा अनग शर्मा का पहला कहानी संग्रह भी : अशोक महेश्वरी

नई दिल्ली : दिल्ली के प्रगति मैदान में 9 दिन से चल रहे विश्व पुस्तक मेला आज सम्पन हो गया. अंतिम दिन रविवार छुट्टी का दिन होने की वजह से राजकमल प्रकाशन के स्टाल जलसाघर में सुबह से ही पुस्तकप्रेमी अपने पसंद के पुस्तकों एवं लेखकों से मिलने भारी मात्रा में उपस्थित थे. इसबार मेले में जिस तरह छुट्टियो के दिन के अलावा कार्य के दिनों में भी पुस्तकप्रेमी भारी मात्र में उमड़े कह सकते हैं की डिजिटल ज़माने में भी किताबों के प्रति आज भी पाठकों की दीवानगी कम नहीं हुई है .

इस बार के पुस्तक मेले में राजकमल प्रकाशन ,राधाकृष्ण प्रकाशन ,लोकभारती प्रकाशन एवं शार्थक उपक्रम से विभिन्न –विभिन्न विधाओं के पुस्तकों की जबरदस्त मांग रही .क्लासिकल पुस्तकों में रागदरबारी , मैला आँचल ,तमस ,जूठन ,चित्रलेखा ,काशी का अस्सी आदि किताबों की मागं रही ,वहीँ नई किताबों में बेशरम , अपार ख़ुशी का घराना ,सहेला रे ,जल थल मल , जनता स्टोर, ग्यारहवी A के लड़के ,पाजी नज्में ,मंटो ,शेखर : एक जीवनी , कुछ इश्क किया कुछ काम किया , इश्क कोई न्यूज़ नही आदि किताबों के लिये पाठकों का खास आकर्षण रहा . कुछ और किताबें जैसे ‘धुप की मुंडेर , अस्थि का फूल ,पानी को सब याद था ,कौन देश क वासी ,साये में धुप ,उर्वशी ,तुम मेरी जान हो रजिया बी , भारत और उसके विरोधाभास ,संस्कृति के चार अध्याय आदि के प्रति भी पाठकों की रूचि दिखी .

लेखक से मिलिए सत्र में राजकमल प्रकाशन के जलसाघर में लेखिका अरुंधती रॉय , तसलीमा नसरीन , अनुराधा बेनीवाल , अल्पना मिश्र ,शाजी जमां ,नवीन चौधरी , हिमांशु बाजपेयी ,गीतांजली श्री आदि सरीखे लेखक पुस्तक प्रेमियों से रूबरू हुए .

राजकमल प्रकाशन के प्रबन्ध निदेशक अशोक महेश्वरी ने 47 विश्व पुस्तक मेले पर अपने विचार रखते हुए कहा ‘किताब तो किताब है और किताब ही रहेगी, ई-बुक चलती किताब, ऑडियो बुक बोलती किताब, सिनेमा बुक दिखती किताब, सब किताब फूल की पंखुरिया है, किताब इनका केंद्रीय तत्व है. मेरी हमेशा से यह सोच इस विश्व पुस्तक मेले में भी ठीक साबित हुई. छोटे बड़े सब किताब के ही इर्द गिर्द दिखे. युवा पाठक, पढ़े लिखे, सजक, चमकीले, युवक, युवतियां इसका मुख्य आकर्षण रहे. मेले में 94 वर्ष की कृष्णा सोबती का उपन्यास आया तो, एकदम युवा अनघ शर्मा का पहला कहानी संग्रह और सुजाता का पहला उपन्यास आया. हाल ही में प्रकाशित ‘सहेला रे’ और ‘रेत समाधि’ को सराहते लोग मिले. अरुंधती रॉय और तसलीमा नसरीन की नई किताबों के लिए उमरती भीड़ का सैलाब भी हमने देखा. यूँ भी मेला उत्साह और स्पूर्ति का ही होता है. हमारे युवा पाठको ने इसे साबित भी किया. बुज़ुर्ग कम दिखे, कहीं बैठे थकान उतारते नज़र आए तो युवा चारो ओर छाए रहे, दोड़ते , किताबें ढूढ़ते दोस्तों से मिलते, एक दुसरे को किताबों के बारे में सलाह देते, नई किताबों की सुंदर प्रस्तुति और आकर्षक कवर डिजाईन को एक दुसरे को दिखाते प्रफुल्लित पाठक. मेला इसी का नाम है.’

आज के बाकी सत्रों में ‘ राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित लेखिका सुजाता का कहानी संग्रह ‘एक बटा दो’ , ‘आलोचना त्रेमासिक’ , संजीव कुमार की ‘हिंदी कहानी की इक्कीसवी सदी’ एवं लोकभारती प्रकाशन से प्रकाशित रेनू अंशुल की कहानी संग्रह ‘कहना है कुछ’का लोकार्पण हुआ

संपर्क

संतोष कुमार

M -9990937676

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