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केयर रेटिंग्‍स ने दी थी घोटाले की चेतावनी, मगर बैंक सोती रही

पंजाब नैशनल बैंक (पीएनबी) के नेतृत्व में भारतीय ऋणदाताओं ने रेटिंग एजेंसी केयर द्वारा दो साल पहले फरवरी 2016 में जारी उस अहम चेतावनी को नजरअंदाज किया था कि नीरव मोदी की प्रमुख कंपनी फायरस्टार इंटरनैशनल प्राइवेट लिमिटेड (एफआईपीएल) भारी कर्ज, गड़बड़ शीट और सीमित ग्राहक और भौगोलिक पहुंच से जूझ रही थी। लेकिन घटनाक्रम में बदलाव तब आया जब 7 जून 2016 को केयर ने कहा कि उसने बैंकों से ‘अनापत्ति प्रमाण पत्र’ (एनओसी) मिलने के बाद एफआईपीएल को जारी रेटिंग तुरंत प्रभाव से वापस ले ली है। रेटिंग फर्म के एक अधिकारी ने नाम नहीं बताने के अनुरोध के साथ कहा, ‘इन बैंकों ने ऐसे समय में रेटिंग वापस लेने के लिए एनओसी क्यों जारी की थी जब कंपनी से जुड़ी जांच और गंभीर हो रही थी।’

इस शुरुआती चेतावनी के बावजूद मोदी की कंपनी ने पंजाब नैशनल बैंक के साथ लगातार कई समझौते किए। एफआईपीएल द्वारा नियामकों को भेजे आंकड़ों के अनुसार कंपनी ने मार्च 2015 में समाप्त वित्त वर्ष में 4100 करोड़ रुपये की परिचालन आय और 1900 करोड़ रुपये का कर-बाद लाभ (पीएटी) दर्ज किया।

वित्त वर्ष 2016 की पहली छमाही के लिए मोदी की कंपनी ने 14.58 अरब रुपये की परिचालन आय और 26 करोड़ रुपये का पीएटी दर्ज किया। इसके बाद से इसने वित्तीय जानकारी देनी बंद कर दी। 1 फरवरी 2016 को एक बयान में केयर ने स्पष्ट रूप से यह चेतावनी दी कि एफआईपीएल मार्च 2015 तक दबावग्रस्त परिचालन स्थिति में परिचालन कर रही थी जिससे बैंक इकाइयों को ऐसे समय में कार्यशील पूंजी का पूरा इस्तेमाल करने को बढ़ावा मिला जब इसका परिचालन प्रदर्शन लगातार दबाव से जूझ रहा था। इसलिए केयर ने 24.6 अरब रुपये के कंपनी की कर्ज योजनाओं की रेटिंग में कमी कर दी।

केयर ने हॉन्गकॉन्ग में स्थित सहायक इकाई फायरस्टार डायमंड्स लिमिटेड के बारे में भी चेतावनी देते हुए कहा कि कंपनी तब तक अपना ऋण चुकाने में सक्षम नहीं हो सकती जब तक कि उसकी मूल कंपनी गारंटर के तौर पर आगे नहीं आती। उसने मोदी द्वारा भारत में स्थापित की गई अन्य कंपनी फायरस्टार डायमंड्स इंटरनैशनल प्राइवेट लिमिटेड (एफडीआईपीएल) पर भी समान बयान जारी किया। दिलचस्प बात यह है कि मोदी और फायरस्टार समूह की अन्य कंपनियां एक-दूसरे की इकाइयों के लिए गारंटर थीं। एफआईपीएल ने इसी तरह की गारंटी एफडीआईपीएल के बैंकरों को मुहैया कराई थी।

वर्ष 2016 में मोदी ने समूह के आभूषण निर्यात व्यवसाय पर ध्यान केंद्रित करने के लिए फायरस्टार डायमंड्स इंटरनैशनल प्राइवेट लिमिटेड (एफडीआईपीएल) की स्थापना की थी और सूरत के सेज और मुंबई के एमआईडीसी में निर्माण इकाइयां स्थापित कीं। वर्ष 2014 में, उसने ‘ऑक्शंस’ और ‘नीरव मोदी ज्वैलरी’ जैसे आभूषण ब्रांडों की बिक्री के लिए मुंबई और दिल्ली में दो रिटेल आउटलेट भी स्थापित किए थे। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2015 तक एफडीआईपीएल ने महज 3.91 प्रतिशत के पीएटी मार्जिन के साथ 1,561 करोड़ रुपये की बिक्री दर्ज की थी। 2016 की पहली छमाही में एफडीआईपीएल ने 7.40 अरब रुपये का राजस्व दर्ज किया।

इन घटनाक्रम के बीच आभूषण उद्योग के सूत्रों का कहना है कि इसका स्पष्ट संकेत मिल गया था कि कंपनी वित्तीय दबाव में थी और हरसंभव तरीके से प्रत्येक स्रोत से पूंजी जुटा रही थी। कंपनी ने 2017 के बीच में आईपीओ के जरिये पूंजी जुटाने की भी योजना पर विचार किया था, पर यह योजना विफल रही, क्योंकि उसकी वित्तीय स्थिति और अधिक खराब होती चली गई। मोदी द्वारा 1997 में होल्डिंग कंपनी फायरस्टोन इंटरनैशनल प्राइवेट लिमिटेड बनाई गई और 28 सितंबर 2011 को इसका नाम बदलकर एफआईपीएल कर दिया गया। एफआईपीएल में दो वर्टिकल शामिल थे – जड़े हुए आभूषण, जिनका वित्त वर्ष 2015 में उसके राजस्व में 80 प्रतिशत योगदान था और शेष योगदान कटे हुए और तराशे हुए हीरे का था।

साभार-http://hindi.business-standard.com/ से



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