आप यहाँ है :

भारत गौरव
 

  • अटल के जन्म दिवस 25 दिसंबर पर विशेषः सहृदय कवि : अटलजी

    अटल के जन्म दिवस 25 दिसंबर पर विशेषः सहृदय कवि : अटलजी

    पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी को एक राजनीतिज्ञ के रूप में जाना जाता है. राजनीतिज्ञ होने के अलावा वह साहित्यकार भी हैं. उन्हें साहित्य विरासत में मिला था. वह कहते हैं, ‘रामचरितमानस’ तो मेरी प्रेरणा का स्रोत रहा है. जीवन की समग्रता का जो वर्णन गोस्वामी तुलसीदास ने किया है, वैसा विश्व-साहित्य में नहीं हुआ है. बचपन से ही उन्होंने कविताएं लिखनी शुरू कर दी थीं. स्वदेश-प्रेम, जीवन-दर्शन, प्रकृति तथा मधुर भाव की कविताएं उन्हें बाल्यावस्था से ही आकर्षित करती रही हैं. उनकी कविताओं में प्रेम है, करुणा है, वेदना है. एक पत्रकार के रूप में वे बहत गंभीर दिखाई देते हैं. वे कहते हैं, मेरे भाषणों में मेरा लेखक ही बोलता है, पर ऐसा नहीं कि राजनेता मौन रहता है. मेरे लेखक और राजनेता का परस्पर समन्वय ही मेरे भाषणों में उतरता है. यह

  • पूरे भारत को एक  सूत्र में बाँधा आदि शंकराचार्य ने

    पूरे भारत को एक सूत्र में बाँधा आदि शंकराचार्य ने

    आदि शंकराचार्य का भारत भूमि पर अवतरण उस समय हुआ जब उत्तर भारत में सम्राट हर्षवर्धन और दक्षिण में पुलकेशी का निधन हो चुका था। सन् 650 ईसवी के बाद भारत में विशाल और स्थिर साम्राज्यों का युग समाप्त हो चला था। यह ऐसा समय था जब साम्राज्य की इच्छा रखने वाले राज्यों में निरन्तर संघर्ष और उत्थान-पतन की लीला ने भारत की राजनीतिक एकता और स्थिरता को हिलाकर रख दिया। कश्मीर, कन्नौज और गौंड के संघर्ष ने और फिर पाल, प्रतिहार और राष्ट्रकूट नरेशों की खींचातानी ने उत्तरापथ को आंदोलित कर डाला था। ठीक वैसे ही दक्षिण में चालुक्य,पल्लव और पाण्डय शासकों की लड़ाइयों ने भारत को विचलित कर रखा था। पश्चिम से अरब सेनाओं और व्यापारियों के प्रवेश ने इस परिस्थिति में नया आयाम जोड़ दिया। बढ़ती अराजकता और असुरक्षा के वातावरण में स्थानीय अधिकारियों और शासकों का प्रभाव बढ़ने लगा। साम्राज्य की जगह सामन्ती व्यवस्था आकार लेने लगी। किसानों और ग्राम पंचायतों के अधिकार अभी बरकरार थे पर यह सही है कि इस समय राजसत्ता बिखर चुकी थी। अराजकता के बीच राजपुत्रों और सामन्तों का बोलबाला था। आदि शंकराचार्य की कृतियों में इस तरह की राजनीतिक अवस्था प्रतिबिम्बित होती है।

  • भारत के वैज्ञानिक ने किया कमाल- पहली बार मनचाही शक्ल का मोती बनाया

    भारत के वैज्ञानिक ने किया कमाल- पहली बार मनचाही शक्ल का मोती बनाया

    भारत के चर्चित मोती वैज्ञानिक डा. अजय कुमार सोनकर ने काला मोती बनाने की क्षमता रखने वाली सीप की नस्ल ‘पिंक टाडा मार्गेरेटिफेरा’ सीप में पहली बार मनचाही शक्ल का मोती बनाने में कामयाबी हासिल की है। इस मोती को भगवान गणेश की शक्ल दी गई है। पर्ल एक्वाकल्चर के क्षेत्र में भारत का नाम विश्व पटल पर लाने वाले इस युवा वैज्ञानिक ने बताया कि अंडमान के समुद्री क्षेत्र में ‘ब्लैक लिप आयस्टर’ यानी काला मोती बनाने की क्षमता वाले सीप पाए जाते हैं और मेरा प्रयोग था कि कैसे मोती को मनचाही शक्ल दी जा सकती है। ऐसा पहला मोती गणेश की शक्ल में है। हमने अभी तक ‘पिंक टाडा मार्गेरेटिफेरा’ सीप में पारंपरिक काला गोलाकार मोती तो बनाया था लेकिन एक आकृति की शक्ल देने के लिहाज से मुझे सीपों की यह नस्ल बेहद उपयुक्तलगी क्योंकि इसका आकार बड़ा होता है और इसमें गोलाकार ‘न्युक्लियस’ के स्थान पर ‘न्युक्लियस’ के रूप में किसी आकृति को सीपों की सर्जरी करके उनके बदन में रखना आसान था।

  • आईएनएस कलवरी क्यों खास है भारतीय नौसेना के लिए

    आईएनएस कलवरी क्यों खास है भारतीय नौसेना के लिए

    गुरुवार को भारतीय नौसेना में डीजल से चलने वाली पनडुब्बी आईएनएस कलवरी को शामिल कर लिया गया। पिछले 17 सालों में ये पहली भारतीय सबमरीन है, जिसे नौसेना में शामिल किया गया है।

  • जल योध्दा राजेन्द्र सिंह के नेतृत्व में सूखे पर सरस और सार्थक संवाद

    जल योध्दा राजेन्द्र सिंह के नेतृत्व में सूखे पर सरस और सार्थक संवाद

    सूखा मुक्त राष्ट्रीय जल सम्मेलन का आयोजन विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी खजुराहो में किया गया। खजुराहो न केवल मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है बल्कि चंदेलकालीन जल संरचनाओं के लिए भी जाना जाता है।

  • न्यू ज़ी लैंड में हिंदी का जलवा, चौथी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा बनी

    न्यू ज़ी लैंड में हिंदी का जलवा, चौथी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा बनी

    सांस्कृतिक आदान-प्रदान और भारत व न्यूजीलैंड के लोगों के बीच संपर्क पर जोर देते हुए न्यू जीलैंड की दूत जोना केंपर्स ने कहा कि उनके देश में हिन्दी अब चौथी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है। उन्होंने एक कार्यक्रम में कहा कि हम दोनों सामान्य मूल्य साझा करते हैं जैसे राष्ट्रमंडल विरासत और लोकतंत्र। साथ में एक भाषा भी जैसे अंग्रेजी और अब हिन्दी भी। जोना ने कहा कि दरअसल, हिन्दी अब चौथी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है।

  • एक मुठ्ठ चावल से बनी साढ़े तीन करोड़ की पूँजी

    एक मुठ्ठ चावल से बनी साढ़े तीन करोड़ की पूँजी

    सूझ-बूझ और संगठित प्रयास से गरीबी को मात देने वाली इन महिलाओं ने एक प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया है। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर क्षेत्र का यह बैंक नारी सशक्तीकरण को समर्पित एक शानदार प्रयास है। मेहनत-मजदूरी कर पेट पालने वाली कुछ महिलाओं ने छोटी बचत का जो सपना देखा था, वह तीन दशक बाद इस बैंक के रूप में सामने है। साढ़े तीन करोड़ की कुल पूंजी वाला बैंक। महिलाओं द्वारा संचालित, महिलाओं का बैंक। करीब दस हजार महिला खाताधारियों का बैंक। जो अब वंचित वर्ग की हजारों महिलाओं को स्वरोजगार मुहैया करा रहा है। सखी बैंक की शुरुआत एक मुट्ठी चावल से हुई थी।

  • राम लला के कपड़े सीते हैं सादिक अली और महबूब

    राम लला के कपड़े सीते हैं सादिक अली और महबूब

    राम जन्मभूमि से जुड़े विवाद के बारे में सब जानते हैं, लेकिन शायद ही कोई इस बात से वाकिफ हो कि पिछले दो दशकों से भी ज्यादा समय से राम लला का वस्त्र तैयार करने से लेकर रोशनी और सुरक्षा की जिम्मेदारी तीन मुस्लिम निभा रहे हैं।

  • डॉ. सुभाष चन्द्रा के जन्म दिन पर जानिये उनके बहुआयामी व्यक्तित्व को

    डॉ. सुभाष चन्द्रा के जन्म दिन पर जानिये उनके बहुआयामी व्यक्तित्व को

    डॉ. सुभाष चंद्रा आज किसी परिचय को मोहताज नहीं है। डॉ. चंद्रा एक ऐसी शख्स़ियत हैं जिन्होंने इस देश में सबसे पहले निजी क्षेत्र सैटेलाईट चैनल लाकर देश में मनोरंजन से लेकर मीडिया जगत तक में क्रांति कर दी। आज से दस साल पहले किसी ने सोचा भी नहीं था कि देश में सैकड़ों सैटैलाईट चैनल हो जाएंगे जो घर घर में हर भाषा और हर समुदाय की रुचि के अनुसार मनोरंजक और शैक्षणिक कार्यक्रमों का प्रसारण करेंगे। देश में इस सैटेलाईट क्रांति के जनक डॉ. सुभाष चंद्रा हैं जिन्होंने देश के लोगों को घर बैठे मनोरंजक कार्यक्रम दिखाने का एक सपना देखा और उसे हक़ीकत में बदल कर भी दिखा दिया।

  • ये युवा बताते हैं कि वैज्ञानिक प्रतिभा के मामले में भारत की भूमि आज भी कितनी उर्वर है

    ये युवा बताते हैं कि वैज्ञानिक प्रतिभा के मामले में भारत की भूमि आज भी कितनी उर्वर है

    जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण प्रदूषण को लेकर आजकल सारी दुनिया में कुहराम मचा हुआ है. दोनों के बीच एक अंतर्निहित संबंध भी है. पृथ्वी पर जलवायु परिवर्तन तो तब भी होता था, जब मनुष्य का अस्तित्व हीं नहीं था. किंतु पर्यावरण प्रदूषण तो हमारी आधुनिक जीवनशैली और आर्थिक विकास कहलाने वाली औद्योगिक प्रगति की ही देन है. हम देख रहे हैं कि पर्यावरण प्रदूषण से जलवायु परिवर्तन की गति और विकरालता निरंतर बढ़ती ही जा रही है. उसे यदि रोकना और नियंत्रण में रखना है, तो सबसे पहले पर्यावरण प्रदूषण को विश्व स्तर पर घटाने की चिंता करनी होगी.

Back to Top