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राष्ट्रीय स्वच्छता अभियान में भी हिंदी के प्राध्यापकों और विद्यार्थियों का योगदान

राजनांदगांव। शासकीय दिग्विजय महाविद्यालय के हिंदी विभाग ने प्राचार्य डॉ.आर.एन.सिंह के मार्गदर्शन में स्वच्छता पखवाड़े के अंतर्गत जिमेदारी का परिचय देते हुए अभियान में अपनी सहभागिता की। विगत सोमवार को विभाग के प्राध्यापकों और विद्यार्थियों ने सम्पूर्ण विभाग सहित अध्ययन स्थल व अपनी कक्षाओं की मिल जुलकर सफाई की। स्वच्छता जैसे राष्ट्रीय अभियान में समवेत भागीदारी करते हुए हिंदी विभाग के राष्ट्रपति सम्मानित प्राध्यापक डॉ. चन्द्रकुमार जैन ने स्वयं विभाग के दरोदीवारों की सफाई में हाथ बँटाकर एक उदाहरण प्रस्तुत किया। अभिप्रेरणा का परिणाम सभी प्राध्यापकों और छात्र-छात्राओं की शानदार स्वच्छता सेवा के रूप में सामने आया।

उल्लेखनीय है कि हिंदी सप्ताह के दौरान स्वच्छता पखवाड़े का साथ-साथ आरम्भ एक नया सन्देश लेकर आया। पहले ही राष्ट्रभाषा को समर्पित बहुआयामी कार्यक्रमों में जुटे डॉ. चंद्रकुमार जैन के साथ हिंदी की प्राध्यापक डॉ. बी. एन.जागृत, डॉ. नीलम तिवारी, डॉ. स्वाति दुबे, डॉ. गायत्री साहू और सोमेश राठौर ने भी राष्ट्रीय स्वच्छता अभियान को नियमित गतिविधि का हिस्सा बनाने की प्रभावी प्रेरणा दी।

अपनी सुपरिचित वक्तृत्व शैली में डॉ. चन्द्रकुमार जैन ने इससे पूर्व नियमित कक्षाओं में विद्यार्थियों को प्रत्येक पर स्वच्छता के महत्त्व और उससे जुड़ी राष्ट्र के नव निर्माण की अवधारणा पर प्रेरणास्पद उदगार भी व्यक्त किए। डॉ. जैन ने स्वच्छता के प्रभावी नारों के साथ यह भी कहा कि स्वच्छता और रचनात्मकता एक ही सिक्के के पहलू हैं। जो स्वच्छ है वह रचनात्मक होगा और जो रचनात्मक है वह स्वच्छता से कभी दूर नहीं रह सकता। स्वच्छ परिवेश से ही समर्थ देश और स्वच्छ सोच से ही सक्षम मानव का आविर्भाव संभव है। इस महान कार्य में वास्तव में स्वच्छता मित्रों की अविस्मरणीय भूमिका रहती है। यह हमें कभी भूलना नहीं चाहिए। जैन ने बताया कि हिंदी के स्नातकोत्तर कक्षाओं के विद्यार्थियों ने पूरी लगन और अनुशासन के साथ स्वच्छता अभियान में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करने का संकल्प दोहराया है। प्राचार्य सहित सभी प्राध्यापकों ने इसकी सराहना की है।

मिली प्रेरणा – बढ़ा उत्साह
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स्वच्छता अभियान के दौरान हिंदी के विद्यार्थियों में तब सहज उत्साह का संचार हो उठा जब कलम और वक्तृत्व कलाके नाम से अपनी अलग पहचान बनाने वाले विभाग के प्राध्यापक डॉ. चंद्रकुमार जैन ने खुद झाड़ू थाम लिया। सफाई की व्यावहारिक और साफ इबारत लिखने की कोशिश की। इस क्रम में सब ने भागीदारी की और अभियान एक यादगार बन गया। हिंदी के सभी विद्यार्थियों के सार्थक सहयोग के साथ ख़ास तौर पर नागेश पठारी ने कक्ष के बाहरी परिसर की सफाई का जटिल काम कर दिखाया। इससे नया जोश पैदा होना स्वाभाविक था। सबने नागेश की शाबासी दी।

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