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देश भर में फर्जी शंकराचार्यों की बाढ़

आदि जगद्गुरु शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार पीठों में से केवल दक्षिण भारत की शृंगेरी पीठ को छोडकर अन्य तीनों में शंकराचार्य के पदों को लेकर विभिन्न साधु-संतों में जबरदस्त झगड़ा चल रहा है। इन तीनों पीठों के उत्तराधिकारी का मामला कोर्ट-कचहरी तक जा पहुंचा है। वैसे आदि जगद्गुरु शंकराचार्य की चार पीठों के अलावा सुमेरू पीठ, भानुपुरा पीठ, कांची काम कोठी पीठ समेत कई पीठ शंकराचार्य पीठ के नाम पर बनी हुई हैं। इन पीठों पर आसीन मठाधीश शंकराचार्य के पदनाम का उपयोग करते हैं। अखाड़ा परिषद का कहना है देशभर में 40 फर्जी शंकराचार्य हैं और वह इनके खिलाफ वह अभियान छेड़ेगी।

हरिद्वार, प्रयागराज इलाहाबाद, उज्जैन तथा नासिक के कुंभ मेलों में शंकराचार्य के पंडालों को लगाने को लेकर तक झगड़ा होता है। कुंभ मेलों में पहुंचे शंकराचार्य एक दूसरे पर फर्जी शंकराचार्य होने का आरोप लगाते हैं, जिससे श्रद्धालु भ्रमित हो जाते हैं। पिछले इलाहाबाद कुंभ में ज्योतिष पीठ बद्रीनाथ के शंकराचार्य के रूप में जब स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती को पंडाल लगाने की इजाजत मेला प्रशासन ने दी तो ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कुंभ मेले का बहिष्कार कर दिया था।

ताजा झगड़ा पूजा-अर्चना को लेकर
अब हाल ही में ज्योतिष पीठ बद्रीनाथ उत्तराखंड में इस पीठ की देवी पूर्णागिरि के मंदिर में पूजा-अर्चना को लेकर जबर्दस्त विवाद उपजा है। अभी जून के पहले हफ्ते में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती अपने शिष्य स्वामी अभिमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ बद्रीनाथ धाम प्रवास के लिए गए थे। वहां ज्योतिष पीठ का 25 सौवां महापर्व मनाया जा रहा था। शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के उत्तराधिकारी स्वामी अभिमुक्तेश्वरानंद ज्योतिषपीठ बद्रीनाथ धाम में स्थित पूर्णागिरि देवी की पूजा अर्चना करने गए। इस मंदिर में ताला लगा था। प्रशासन से स्वामी अभिमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने ताला खोलकर पूजा-अर्चना करने का अनुरोध किया। प्रशासन ने मना कर दिया और मामला न्यायालय में चलने का तर्क दिया। इस पर वे मंदिर के सामने बेमियादी अनशन पर बैठ गए।

राजनीतिक विचारधारा का टकराव
सूत्रों के मुताबिक पूर्णागिरि मंदिर ज्योतिष पीठ बद्रीनाथ का शंकराचार्य होने का दावा करने वाले स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती के आधिपत्य में है और वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ तथा विश्व हिन्दू परिषद के केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल से जुडेÞ हैं। इसलिए उत्तराखंड में भाजपा की सरकार होने के कारण प्रशासन का झुकाव स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती की तरफ दिखाई दिया और शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती तथा उनके शिष्य स्वामी अभिमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की एक नहीं चल पाई। इन्हें कांग्रेस से जुड़ा माना जाता है। भले ही शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती इस आरोप को खारिज करते हैं।

स्वरूपानंद सरस्वती 1973 से शंकराचार्य
ज्योतिषपीठ बद्रीनाथ उत्तराखंड की पीठ पर इस वक्त तीन शंकराचार्य विराजमान हैं। सन् 1973 में इस पीठ पर शंकराचार्य कृष्णवोधाश्रम की मृत्यु होने के बाद स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का अभिषेक शंकराचार्य के रूप में किया गया था। कुछ सालों बाद ज्योतिष पीठ बद्रीनाथ की पीठ का शंकराचार्य होने का दावा स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती तथा स्वामी माधवाश्रम ने भी किया।

शारदा द्वारिका पीठ का विवाद
स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती पश्चिम में स्थित शारदा द्वारिका पीठ के शंकराचार्य पद पर 1982 से आसीन हैं। उनसे पहले इस पीठ पर कृष्णवोधाश्रम शंकराचार्य के पद पर विराजमान थे। वहीं हरिद्वार के भूमानंद आश्रम के स्वामी अच्युतानंद तीर्थ का पिछले दिनों उनके हरिद्वार स्थित अद्भुत मंदिर आश्रम में सुमेरूपीठ के शंकराचार्य होने का दावा करने वाले स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती और काशी विद्वत परिषद के एक सदस्य ने उन्हें द्वारिका शारदा पीठ का शंकराचार्य मनोनीत कर दिया। इस पर साधु समाज में भारी हंगामा मचा। शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने स्वामी अच्युतानंद तीर्थ को फर्जी शंकराचार्य घोषित कर दिया और स्वामी अच्युतानंद तीर्थ के खिलाफ कोर्ट में मुकदमा दर्ज कर दिया। दूसरी ओर स्वामी अच्युतानंद तीर्थ ने स्वयं को शारदा द्वारिका पीठ का असली शंकराचार्य बताया है।

गोवर्धन पीठ पर भी दो दावेदार गोवर्धन पीठ पुरी की पीठ पर भी दो साधु शंकराचार्य होने का दावा कर रहे हैं। गोवर्धन पीठ पुरी के शंकराचार्य पद पर इस वक्त स्वामी निश्चलानंद सरस्वती मौजूद हैं। वहीं स्वामी अधोक्षानंद भी खुद को इस पीठ का शंकराचार्य बताते हैं।

चालीस से ज्यादा फर्जी शंकराचार्य
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने कहा कि आदि जगद्गुरु शंकराचार्य द्वारा स्थापित केवल चार पीठें ज्योतिष पीठ बद्रीनाथ, शृंगेरी पीठ, गोवर्धन पीठ और द्वारिका शारदा पीठ हैं। उनका कहना है कि ज्योतिष पीठ बद्रीनाथ व शारदा द्वारिका पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती, शृंगेरी पीठ के शंकराचार्य स्वामी भारती तीर्थ तथा गोवर्धन पीठ पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती हैं। इन शंकराचार्यों के अलावा अन्य सभी शंकराचार्य फर्जी हैं। उन्होंने बताया कि इस वक्त देश में 40 से ज्यादा फर्जी शंकराचार्य मौजूद हैं। अखाड़ा परिषद पूरे देश में फर्जी शंकराचार्यों के खिलाफ अभियान चलाएगी और इलाहाबाद व हरिद्वार के कुंभ मेलों में फर्जी शंकराचार्यों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाएगी।

इलाहाबाद की एक अदालत ने अपने फैसले में मुझे ही ज्योतिष पीठ बदरीनाथ का शंकराचार्य माना है। साथ ही राजस्व बोर्ड ने भी ज्योतिष पीठ बदरीनाथ धाम तथा पूर्णागिरि मंदिर को एक ट्रस्ट माना है। और इस ट्रस्ट में शंकराचार्य के रूप में उनका नाम है। इसलिए पूर्णागिरि मंदिर में पूजा करने का हमारा अधिकार है।
-शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती

मैं ही असली शंकराचार्य हूं। शंकराचार्य का पद आस्था से जुडा है। कोर्ट ने मुझे शंकराचार्य पीठ से नहीं हटाया है। कोर्ट का कोई अधिकार नहीं है कि वह शंकराचार्य बनाए। शंकराचार्य गुरु बनाते हैं। हमें हमारे गुरु ने शंकराचार्य बनाया है।
-स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती
ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य होने का दावा करने वाले
साभार- जनसत्ता से



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