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छत्तीसगढ़ राज्योत्सव में लोक कलाकारों ने समाँ बांधा

रायपुर। छत्तसीगढ़ राज्योत्सव के प्रथम दिवस शुभारंभ के अवसर पर नया रायपुर में पंडित श्यामा प्रसाद मुखर्जी उद्योग एवं व्यापार परिसर में कार्यक्रम स्थल पर छत्तीसगढ़ सहित विभिन्न राज्य के कलाकारों ने मनभावन सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी। पार्श्व गायक सुखविंदर सिंह और उनकी टीम ने शानदार फिल्म नृत्य संगीत प्रस्तुत किया, जिससे दर्शकों को रोमांचित कर दिया। वहीं पर छत्तीसगढ़ के कलाकारों की परम्परागत लोकवाद्यों के साथ मनमोहक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। स्कूली और कॉलेज के विद्यार्थियों ने छत्तीसगढ़ का लोक प्रिय सुआ नृत्य और पंथी, नृत्य की प्रस्तुतियों को दर्शकों ने खूब सराहा। बस्तर बैंड के कलाकारों की बस्तर की संस्कृति पर आधारित सांस्कृति प्रस्तुतियां प्रस्तुत की। एक भारत श्रेष्ठ भारत योजना के तहत गुजरात राज्य से आये वहां के लोगों ने गुजरात की संस्कृति एवं ऐतिहासिक रंगारंग प्रस्तुतियों ने समां बांधा। इस अवसर पर गणमान्य नागरिक एवं भारी जनसमुदाय मौजूद रहा।

दूसरे दिन छत्तीसगढ़, गुजरात और उड़ीसा के कलाकारों, स्कूली और कॉलेज के छात्रों, बस्तर के लोक नृत्य, चिन्हारी लोकमंच, राक्कर बैड सहित अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति को दर्शकों ने सराहा।

राज्य के कालेज और स्कूली छात्रों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम में सुआ नृत्य, कर्मा, ददरिया सहित अन्य लोक नृत्य गायन कार्यक्रमों ने दर्शकों को आकर्षित किया। पदम श्री सम्मान से समानित छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध लोक कलाकार श्रीमती ममता चंद्राकर केे राज्य की संस्कृति और कला पर आधरित सुमधुर लोक गायन ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। गुजरात राज्य से आये श्री जी परफारमेंस आर्ट के कलाकारों ने गुजरात की संस्कृति के रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किए। द राक्कर बैंड के कलाकारों ने युवा दर्शकों को रोमांचित किया। बस्तर अंचल के कलाकारों ने गौरमाड़िया, अबूझमाड़िया और ककसार नृत्य किया। प्रिंस डांस म्यूजिकल ओडिशा की प्रस्तुति और छत्तीसगढ़ की विकास गाथा पर आधारित शानदार लाइट और साउण्ड कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया गया।

राज्योत्सव में गुजरात का मंडप वहां की समृद्ध लोक कला-लोक संस्कृति और वेश-भूषा की प्रदर्शनी आम लोगों को आकर्षित कर रही है। एक भारत-श्रेष्ठ भारत योजना के तहत इस बार राज्योत्सव में गुजरात का मंडप लगा है। गुजरात टूरिज्म बोर्ड के इस मंडप को पारम्परिक गुजराती थीम पर आकर्षक ढंग से सजाया गया है।

गुजरात के मंडप के प्रवेश द्वार पर शहनाई-ढोल, सिद्धी धमाल और कच्छी घोड़ी के नृत्य से आंगतुकों का स्वागत हो रहा है। मंडप के अंदर डांडिया रास, गरबा, गुड़ो एवं छड़ो नृत्य के कलाकारों की मनमोहन प्रस्तुति देखने को मिलती है। गुजरात के गांवों में घर के अंदर आंगन में चबूतरे तथा तुलसी कुंडा के चारों ओर गरबा नृत्य करने की कला का भी यहां जीवन प्रदर्शन हो रहा है। गुजरात के भुज इलाके में कच्छ भुजी ‘रावन हत्था’ लोक वाद्य यंत्र की मधुर धुन सुनाई पड़ती है। मंडप के अंदर बने छोटे-छोटे स्टॉलों में लेकर वर्क, टांगलिया वर्ग, एम्ब्रायडरी वर्क, वूलन वर्क, कलमकारी माता की पछड़ी, खरक कारपेंट बुनाई, जरी वर्क, हैंडप्रिंटेड, टेक्सटाइल वर्क, माशरू बुनाई, पेंच वर्क, पटोला बुनाई की हुई गुजराती वेशभूषा की प्रदर्शनी लगाई गई है।



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