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मेलों और प्रदर्शनियों में फालुन दाफा अभ्यास का परिचय

सर्दी के मौसम में मेलों और प्रदर्शनियों की भरमार रहती है। लोग अपने दोस्तों और परिवारों के साथ पुस्तक मेलों, पुष्प प्रदर्शनी और अन्य प्रदर्शनियों को देखने जाना पसंद करते हैं। इस अवसर पर भारत के फालुन दाफा अभ्यासियों ने विभिन्न स्थानो पर मेलों व प्रदर्शनियों में भाग लिया और इस उच्च स्तरीय अभ्यास के बारे में जानकारी साझा की।

फालुन दाफा (जिसे फालुन गोंग भी कहा जाता है) मन और शरीर की एक प्राचीन साधना पद्धति है जिसमें पांच सौम्य और प्रभावी व्यायाम और ध्यान सम्मिलित हैं, लेकिन जोर नैतिक चरित्र के उत्थान पर दिया जाता है। फालुन दाफा को 1992 में चीन में श्री ली होंगज़ी द्वारा सार्वजनिक किया गया था। आज यह दुनिया भर के 114 से अधिक देशों में प्रचलित है। दुर्भाग्य से, चीन में फालुन दाफा अभ्यासियों का 20 जुलाई 1999 से चीनी कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा क्रूर दमन किया जा रहा है।

कोलकाता अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेला
कोलकाता अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेला एशिया का सबसे बड़ा पुस्तक मेला और दुनिया में सबसे अधिक भाग लेने वाले पुस्तक मेले के रूप में जाना जाता है। इस साल फरवरी में आयोजित मेले के एक प्रमुख स्थान पर फालुन दाफा स्टाल लगाया गया। बड़ी संख्या में लोगों ने फालुन दाफा स्टाल का दौरा किया और अभ्यास सीखा।

यह प्रसन्नता का विषय था कि अनेक प्रवासी भारतीयों ने बताया कि वे फालुन दाफा के बारे में जानते थे। ब्रिटेन के बर्मिंघम में रहने वाले एक युवा भारतीय ने कहा कि वह फालुन गोंग का अभ्यासी तो नहीं है लेकिन उसे इसके बारे में पता है और चीन में जारी दमन की वह भर्त्सना करता है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले एक अन्य युवा भारतीय ने, जो अपने माता-पिता से मिलने आया था, कहा कि उसने फालुन दाफा के स्वास्थ्य लाभों के बारे में सुना है और वह चाहता है कि उनकी माँ अभ्यास करे। पुस्तक मेले में अर्जेंटीना का एक व्यक्ति फालुन दाफा बूथ को देख कर बहुत उत्साहित हुआ और उसने कहा कि वह नहीं जानता था कि फालुन दाफा भारत में भी लोकप्रिय है।

दिसंबर में आयोजित पांडिचेरी पुस्तक मेले में बड़ी संख्या में लोगों ने फालुन दाफा स्टॉल का दौरा किया। अनेक लोगों ने फालुन दाफा के अभ्यास सीखे और पुस्तकें खरीदीं। अभ्यासियों ने लोगों को कागज के कमल पुष्प भी वितरित किए। एक व्यक्ति ने साझा किया कि वह लंबे समय से एक सच्ची आध्यात्मिक प्रणाली की खोज कर रहा था और फालुन दाफा के बारे में जानने के बाद उसकी खोज पूरी हुई। पांडिचेरी के स्थानीय विधायक ने फालुन दाफा स्टाल का दौरा किया। चीन में फालुन दाफा अभ्यासियों पर हो रहे दमन के बारे में सुनकर वह हैरान रह गए।

इस साल फरवरी में लालबाग, बैंगलोर में आयोजित पुष्प प्रदर्शनी को लाखों लोगों ने देखा। फालुन दाफा अभ्यासियों ने एक सुंदर स्टाल का आयोजन किया जिसमे पुस्तकों का प्रदर्शन और अभ्यास सीखने का भी प्रावधान किया गया। स्टाल की प्रमुख विशेषता एक बड़ा कमल का फूल था जिसमें शीर्ष भाग पर “ज़ुआन फालुन” पुस्तक को विराजमान किया गया, जो फालुन दाफा की मुख्य पुस्तक है। कमल का फूल बहुत ही सुंदर लग रहा था और अनेक लोगों ने उसकी सराहना की। कई स्कूली बच्चों ने स्टाल पर जाकर अभ्यास सीखा। 100 से अधिक पुलिस कर्मियों ने अभ्यास सीखा और अभ्यासियों के प्रयासों की सराहना की।

उपरोक्त प्रदर्शनियों के अलावा, फालुन दाफा अभ्यासियों ने हैदराबाद अखिल भारतीय औद्योगिक प्रदर्शनी, सूरत पुस्तक मेला, नागपुर दीक्षा भूमि, आदि में भाग लिया। भारतीय फालुन दाफा अभ्यासियों ने नि:स्वार्थ रूप से देश भर में इस अनूठी साधना पद्धति का परिचय दिया है। फालुन दाफा का अभ्यास लोगों को अच्छा स्वास्थ्य, मानसिक शांति और संतुष्ट जीवन प्राप्त करने में मदद कर रहा है। फालुन दाफा अभ्यास पूरी तरह नि:शुल्क सिखाया जाता है।

अधिक जानकारी के लिए, कृपया www.falundafa.org या www.falundafaindia.org देखें।

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