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साहित्य और समाज में आई संवेदनहीनता और संवादहीनता के चलते मूल्यों का ह्रास

मुंबई की भागदौड़ और रोजमर्रा की आवश्यकताओं को पूरा करने की होड़ में क्या कहीं हमारी संवेदनाएं मर रही हैं?क्या स्वयं को आगे देखने के नाहक अभिमान में हम अपने साथियों और बुजुर्गों को पीछे छोड़ने का पाप तो नही कर रहे हैं? संघर्ष की इस अर्थनगरी में मानवीय मूल्य कहीं खो तो नहीं जा रहे ? ऐसे ही अनगिन प्रश्नों पर चर्चा हुयी शुक्रवार को सांताक्रुज के नजमा हेपतुल्ला सभागृह में। हिंदी साहित्य के शलाका पुरुष स्व. प्रो. भगीरथ दीक्षित को श्रद्धांजलि देने जुटे साहित्यकारों,पत्रकारों, समाजसेवियों और सामान्यजनों ने लंबे अरसे से बीमार चल रहे प्रो दीक्षित की मृत्यु की खबर तक न चलने पर आश्चर्य व्यक्त किया।मुंबई की आपाधापी व खुद में व्यस्त रहने की आवश्यकता और भारी बरसात के बहाने सभा में कम लोगों की उपस्थिति मन को कचोटती तो है,पर उसी सभा में फ्रैक्चर हुए बांयें पैर में लगे प्लास्टर के साथ पहुंचे कवि शायर व हिंदी अकादमी के सदस्य हस्तीमल हस्ती की उपस्थिति राहत भी दे रही थी।

महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी एवं सामाजिक सांस्कृतिक संस्था अभियान की ओर से दिवंगत वरिष्ठ साहित्यकार भगीरथ दीक्षित की श्रद्धांजलि सभा की अध्यक्षता करते हुए डॉ.सत्यदेव त्रिपाठी ने दीक्षित जी को सच्चे प्राध्यापक के रूप में याद करते हुए उनसे जुड़े अनेक प्रसंगों का उल्लेख किया.उन्होंने कहा कि स्वर्गीय दीक्षितजी असंगतियों के बीच रहते हुए उनसे निर्लिप्त रहते थे.

अभियान के संस्थापक अध्यक्ष अमरजीत मिश्र ने भावुक हृदय से उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए सलाह दी कि हिंदी समाज को असंवेदनशील होने से बचने की आवश्कता है.ऐसे साहित्यकारों के सानिध्य में बैठकर हमें बहुत कुछ सीखना है,लेकिन उनकी मृत्यु की खबर तक हमें नहीं होती. उन्होंने इस संवेदनहीनता और संवादहीनता को दूर करने के लिए निरंतर संपर्क बनाये रखने की आवश्यकता बताई।

अकादमी के सदस्य डॉ. शीतला प्रसाद दुबे ने कहा कि हिंदी अकादमी और अभियान जीवित वरिष्ठ साहित्यकारों से मिलकर उनका अभिवादन करने के प्रति सन्नद्ध है. वरिष्ठ कवि गीतकार पं.किरण मिश्र ने दीक्षित जी को आध्यात्मिक रुचिसम्पन्न साहित्यकार के रूप में याद किया. मुम्बई विश्वविद्यालय के डॉ.करुणाशंकर उपाध्याय ने दीक्षित जी के साहित्य को पुनर्प्रकाशित कर उनके विचारों को समाज के बीच लाने पर जोर दिया.स्तंभकार राजेश विक्रांत ने दिवंगत साहित्यकारों के नाम पर पुरस्कार,सम्मान स्थापित कर उन्हें सर्वदा याद किए जाने की बात की. समाजसेवी अमर त्रिपाठी ने दीक्षित जी को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि किसी भी साहित्यकार की स्मृति में कार्यक्रम कर हम अपनी संवेदना तो व्यक्त करते हैं परन्तु कम संख्या में उपस्थिति से दुखी होना लाजमी है. पत्रकार शत्रुघ्न प्रसाद ने भी दीक्षित जी को श्रद्धांजलि दी.

कार्यक्रम के आरंभ में उपस्थित सभी लोंगों ने दिवंगत भगीरथ दीक्षित जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की.अंत में दो मिनट मौन रह कर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की गई.कार्यक्रम में अभियान के अध्यक्ष रामसजीवन दुबे, डॉ शैलेश दुबे, बीजेपी नेता रामचन्द्र उपाध्याय व राकेश सिंह, उत्तरभारतीय मोर्चा के सचिव धीरेन्द्र पांडेय, लक्ष्मीकांत शुक्ला समेत मुंबई के हिंदी सेवी,पत्रकार,प्राध्यापक और समाजसेवी उपस्थित थे.

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