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आधुनिक बोध कथाः गांधी और नेहरू का स्वतंत्रता संग्राम में योगदान

मेरे दादाजी एक दिन एक कहानी बता रहे थे, कि एक गांव में एक किसान रहता था। उसके पास दो बैल और दो कुत्ते भी थे।

एक बार उसे किसी काम से गांव से बाहर जाना था, और उसकी समस्या यह थी कि खेत जोतने का भी समय हो गया था, और काम पूरा करने के लिए गांव से बाहर भी जाना जरूरी था।
फिर किसान ने उस समस्या का समाधान निकाला और उसने अपने बैलों और कुत्तों को बुलाकर कहा कि मैं कुछ दिनों के लिए गांव से बाहर जा रहा हूं, मेरे लौटने तक तुम लोग सारे खेत जोतकर रखना, ताकि लौटने पर मैं खेतों में बीज बो सकूं। बैलों और कुत्तों ने स्वीकृति में सिर हिलाया।

फिर किसान चला गया, और बैलों ने किसान के कहे अनुसार खेत जोतना शुरू कर दिया। और कुत्ते आवारागर्दी करते हुए सारा सारा दिन कुतियों के पीछे लगे रहे।
किसान के लौटने से पहले बैलों ने पूरा खेत जोत दिया, अब कुत्तों ने देखा कि खेतों की जुताई हो गई है और मालिक के लौटने का समय भी हो गया है, तब कुत्तों ने बैलों से कहा कि तुम लोग इतने दिनों से खेत जोत रहे हो, तुम लोग काफी थक गए होगे, अब तुम लोग घर पर जाकर आराम करो, और हम लोग खेतों की रखवाली करेंगे।

कुत्तों की बात मानकर बैल घर चले गए और खा पीकर आराम करने लगे। इधर कुत्तों ने सारे खेतों में दौड़-भाग करके अपने पैरों के निशान बना दिए, और खेत की मेंड़ पर बैठकर किसान का इंतजार करने लगे, थोड़ी देर में किसान गांव वापस आया और सीधा खेतों पर पहूंचा, देखा तो दोनों कुत्ते मेंड़ पर बैठे हुए हैं और खेतों की जुताई हो गई है। परंतु बैल कहीं नजर नहीं आ रहे थे।
किसान ने कुत्तों से पूछा कि बैल कहां हैं ?

कुत्तों ने कहा- मालिक आप जबसे गए थे तभी से हम लोग खेत जोत रहे हैं और अभी काम पूरा करके मेंड़ पर बैठकर आपका इंतजार कर रहे हैं, जबकि बैल घर से बाहर निकलकर खेतों की ओर झांकने भी नहीं आए, वह घर पर ही आराम से सो रहे हैं।

मालिक ने खेतों में जाकर देखा तो उसे हर तरफ कुत्तों के पैरों के निशान मिले, वह कुत्तों के उपर बहुत प्रसन्न हुआ, कुत्तों के साथ वह घर पर वापस लौटा तो देखा कि बैल घर के बाहर बैठे हुए आराम कर रहे थे, किसान बैलों के उपर बहुत क्रोधित हुआ और बैलों को रस्सी से बांध कर उनकी पिटाई कर दिया।

फिर कुत्तों को खाने के लिए दूध रोटी और मांस के टुकड़े दिए और बैलों को खाने के लिए सुखा हुआ भूसा दिया।

दादाजी कहते थे कि यह जो महात्मा गांधी रोड, नेहरू युनिवर्सिटी इंदिरा एयरपोर्ट और ऐसे अनेकों जगह नेहरू गांधी का नाम देखते हो वह उन कुत्तों के द्वारा बनाए पैरों के निशान हैं, आजादी के बाद से ही दूध मलाई खा रहे हैं,जबकि वीर सावरकर, रामप्रसाद बिस्मिल भगतसिंह चंद्रशेखर आजाद खुदीराम बोस जैसे असली सेनानियों के परिवार को रुखी-सूखी घास ही मिली।
तो यह है स्वाधीनता संग्राम में गांधी-नेहरू का योगदान।

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