Tuesday, April 23, 2024
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ब्रिटेन के लोग क्या खाना पसंद करते हैं?

वैसे तो लंदन एक बहु-जातीय और बहु-राष्ट्रीय तहज़ीब की मिसाल बन चुका है लेकिन इसके ख़ान पान की एक डिश का सीधा संबंध भारतीय उप महाद्वीप से है जिसकी शोहरत यहाँ के राज घराने से लेकर आम परिवार तक फैली हुई है। इस डिश का नाम है चिकन टिक्का मसाला। अगर आज की बात करें तो पनीर टिक्का मसाला ब्रिटेन की राष्ट्रीय डिश ही बन चुका है।

वर्ष 2001 में ब्रिटेन के विदेश सचिव रोबिन कुक ने अपने सार्वजनिक संबोधन में चिकन टिक्का मसाला को आधुनिक बहु-सांस्कृतिक ब्रिटेन का प्रतीक घोषित कर दिया था। जब लोगों ने उनसे सवाल किया कि यह आख़िरकार ब्रिटेन की सबसे महत्वपूर्ण डिश कैसे बन गई तो कुक ने बड़े सरल शब्दों में उत्तर दिया था,” चिकन टिक्का भारतीय डिश है, इसमें मसाला सॉस मिला दिया जाता है तो यह ब्रिटिश लोगों की  पसंदीदा डिश बन जाती है।”

फिश एंड चिप्स और यार्कशायर पुडिंग परंपरागत रूप से बेहतरीन ब्रिटिश डिश मानी जाती रही थीं, धीरे धीरे चिकन टिक्का मसाला ने बाक़ी सभी को पीछे छोड़ दिया है। चिकन टिक्का भारतीय उपमहाद्वीप में एक जमाने एस लोकप्रिय डिश रही है, लेकिन चिकन टिक्का मसाला तो ख़ालिस ब्रिटिश है जिसे प्रवासी भारतीय, पाकिस्तानी या फिर बांग्लादेशी शेफ ने ब्रिटिश भूमि पर विकसित किया है। इसमें  चिकन को दही के साथ मेरीनेट किया जाता है फिर इसे कढ़ाई या पैन में फ्राई करके टमाटर की मध्यम तीखे मसाले वाली क्रीमी करी के साथ पका लिया जाता है। इसका शाकाहारी वर्जन पनीर टिक्का मसाला और वेगान के लिए टोफू टिक्का मसाला भी मिलने लगा है।

इस डिश के जनक का पता लगाने की हमारी कोशिश हमें ग्लासगो के जाने माने करी हाउस शीश महल तक ले गई। वहाँ जा कर पता लगा कि यह वहाँ के शेफ अली अहमद असलम की खोजबीन है। हुआ यूँ कि वे पेट के अल्सर से परेशान थे इसलिए बहुत तीखी डिश खाने की मनाही थी। इसलिए उन्होंने चिकन टिक्का को क्रीम और टमाटर के सूप में डाल कर एक प्रयोग किया। अपने साथ ही साथ उन्होंने करी हाउस में नियमित रूप से आने वाले के मित्र को भी इस का स्वाद चखाया। उन्हें यह डिश इतनी पसंद आयी कि अगले  दिन इसे चखाने के लिए अपने कई और दोस्तों को ले कर आ गये। एक थ्योरी यह है पंजाब में जन्मी बलबीर कौर की 1961 में प्रकाशित कुक बुक इण्डियन कुकरी में दी हुई शाही चिकन मसाला रेसीपी से इसका विकास हुआ है।

कुछ लोग यह भी मानते हैं कि करी विक्टोरियन ब्रिटेन के  व्यंजनों में अठारहवीं शताब्दी के मध्य में ही शामिल हो गई थी क्योंकि भारत आने जाने वाले ब्रिटिश लोगों के ज़रिए यह वहाँ पहुँच गई थी। ब्रिटेन में 1852 में एक कुक बुक प्रकाशित हुई थी उसके लेखक ने पुस्तक में घोषित किया था कि जब तक टेबिल पर करी न परोसी जाए डिनर पूरा नहीं होगा। उस समय ब्रिटेन में करी का आगमन ईस्ट इंडिया कंपनी के अधिकारियों के भारत में ख़ानसामों और कंपनी के जहाज़ों में कार्यरत रसोइयों के माध्यम से हुआ था।

जब ये अधिकारी ब्रिटेन आते तो भारतीय डिश को अपनी किचन में ज़रूर आज़माते थे। लेकिन वे कोशिश करते थे कि भारत की तुलना में ब्रिटेन की किसी रसोई में करी  बने तो उसमें मिर्च मसाले कम तीखे हों। पता नहीं ऐसा क्या हुआ कि 1930 के आस पास लंदन के रेस्टोरेंट में भारतीय डिश के ब्रिटिश अवतारों की लोकप्रियता कम हो गई और ऐसे कई आइटम मेनू से ग़ायब होने लगे।

ईस्ट लंदन में 1971 के आसपास बांगलादेशी प्रवासियों की संख्या बढ़ने के बाद एक बार फिर से करी  हाउस का पुनर्जन्म हो गया, आज की तारीख़ में ब्रिटेन में 12000 से भी अधिक करी हाउस हैं। इनकी सफलता का सीक्रेट यही है कि ये करी हाउस ख़्याल रखने लगे  थे कि उनकी करी कम मिर्च मसाले वाली हों।  इन्हीं करी हाउस में ब्रिटिश चिकन टिक्का मसाला का जन्म हुआ है।आज स्थिति यह है कि हर साल ब्रिटिश करी अवार्ड भी दिया जाता है। पिछले साल करी अवार्ड बनारस रेस्टोरेंट को मिला था लेकिन बाद में इसके दाम ज़्यादा ही होने के कारण अवार्ड वापस ले लिया गया!

सबसे अच्छा चिकन टिक्का मसाला या फिर उसका शाकाहारी या फिर वेगान  अवतार लंदन में कहाँ मिलता है इसको ले कर हर किसी के अलग अलग दावे हैं। लेकिन मेरे हिसाब से सितारा, इण्डियन रूम, टावर तंदूरी रेस्टोरेंट में से ही यह तय करना होगा कि आपके स्वाद से कौन बेहतर है। हां, अगर हमारे मित्रों की राय अलग है तो उनका स्वागत है।

(लेखक स्टेट बैंक के सेवा निवृत्त अधिकारी हैं और दुनिया भर में घूमते हुए वहाँ की सामाजिक व सांस्कृतिक जीवनशैली पर लिखते हैं) 

 

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