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श्री प्रभु ने देश को बताया कि रेल मंत्री पूरे देश का होता है

मुंबई मे हर दिन कई तरह के आयोजन होते रहते हैं, जिसमें कॉर्पोरेट जगत से लेकर सांस्कृतिक, साहित्यिक, राजनीतिक और मनोरंजन सभी तरह के कार्यक्रम शामिल होते हैं, इन आयोजनों में कॉर्पोरेट से लेकर फिल्मी दुनिया और राजनीतिक जगत की हस्तियाँ शामिल होती रहती है। लेकिन कुछ ही ऐसे कार्यक्रम होते हैं जो मंच पर मौजूद लोगों के अलावा श्रोताओं के लिए भी यादगार हो पाते हैं। नहीं तो होता ये है कि मंच पर बैठे लोग एक दूसरे की तारीफों के पुल बाँधते रहते हैं और श्रोता अपने मोबाईल से खेलते रहते हैं। मुंबई के राजस्थान वसति गृह के पूर्व छात्रों के सम्मेलन में एक अलग ही नजारा देखने को मिला।

इस कार्यक्रम में केंद्रीय रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभाकर प्रभु मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित थे। मुंबई के सामाजिक जगत में अपनी खास पहचान बना चुके जाने माने उद्योगपति एवँ व्यवसाई श्री रामस्वरुप गाड़िया ने आज से 55 साल पहले मुंबई में चार्टर्ड एकाउंटेट की पढ़ाई करने आने वाले छात्रों के लिए इस छात्रावास की शुरुआत की थी।

श्री सुरेश प्रभु ने अपने खास अंदाज़ में जिस तरह से संबोधित किया, वह हर एक श्रोता के लिए एक यादगार अनुभव था। श्री प्रभु ने कहा कि राजस्थान वसति गृह मेरे राजनीतिक जीवन की पहली पाठशाला था। हालांकि मैं इसमें नहीं रहता था, मगर यही मेरा ठिकाना होता था। तब मैने 1975 में डब्ल्यूसीएएसए का चुनाव लड़ा था और मात्र 50 रु. डिपाजिट किए थे। इस चुनाव में दो ग्रुप थे मेरा किसी ग्रुप से कोई लेना-देना नहीं था मगर मैं चुनाव जीत गया। इसके बाद मैं अपने सभी साथियों को इंडस्ट्रियल टूर पर पुणे लेकर गया, जिसका शुरु-शुरु में तो बहुत विरोध हुआ लेकिन बाद में सबने इस आईडिये को बहुत पसंद किया। श्री प्रभु ने कहा कि ये मेरा दुर्भाग्य था कि मैं राजस्थान वसति गृह में नहीं रह सका, लेकिन हर रविवार को वहाँ का बढ़िया खाना खाने मैं जरुर जाता था। किसी होस्टल में इतना बढ़िया खाना शायद ही मिले, जितना बढ़िया खाना राजस्थान वसति गृह में मिलता है।

श्री प्रभु ने इस होस्टल की कल्पना को साकार करने वाले मंच पर उपस्थित उद्योगपति श्री रामस्वरूप गाड़िया को लेकर कहा, इस बात की कल्पना करना ही रोमांचक है कि कोई व्यक्ति आज से 55 साल पहले चार्टर्ड एकाउंटेट बनने आने वाले छात्राओं के लिए मुंबई जैसे शहर में होस्टल बनाने की कल्पना करे, जिस व्यक्ति ने ये कल्पना कर उसे साकार करके पूरे समाज के सामने अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया है। इनके नाता-पिता ने इनका जो नाम रखा है वह इनके व्यक्तित्व को साकार करता है –ये वास्तव में राम स्वरूप ही हैं।

श्री प्रभु ने का, आज देश भर में 7 हजार चार्टर्ड एकाउंटेट ऐसे हैं जो इस संस्थान में छात्र के रूप में रहे है। सरकार ने तो सीएसआर की योजना अब शुरु की है मगर श्री गाड़िया ने तो बगैर किसी कानून या नियम के बने देने के भाव के साथ सीएसआर की कल्पना को जन्म दिया।

ठहाकों के बीच श्री प्रभु ने कहा कि राजस्थान के जोधपुर की मिट्टी की जाँच करवाई जाना चाहिए क्योंकि अधिकतर चार्टर्ड एकाउंटेट इसी शहर से बने हैं। उन्होंने कहा कि राजस्थान के लोगों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वे अपनी मिट्टी से जुड़े रहते हैं।

श्री प्रभु ने स्वच्छ भारत अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारे देश को पहली बार ऐसा प्रधान मंत्री मिला है जो स्वच्छता की बात कर रहा है, स्वच्छता अभियान कोई मामूली सोच नहीं है, अगर हमारे आसपास का वातावरण स्वच्छ रहता है तो हम कई बीमारियों से बच सकते हैं, हमारे देश के पर्यटन स्थलों का विकास हो सकता है।

उन्होंने कहा कि चीन और मोरक्को जैसे देशों में सफाई की बदौलत वहाँ पर्यटकों की संख्या में वृध्दि हुई है।

कार्यक्रम के बाद श्री प्रभु मंच से उतरकर अपने सभी पुराने साथियों के पास जाकर उनसे मिले। उनके साथ सुरक्षा का कोई तामझाम नहीं था ओर लोग खुलकर उनसे मिलते रहे।

इस अवसर पर राजस्थान वसति गृह के छात्र रहे और बॉयोजेनोमिक्स कंपनी के माध्यम से 10 हजार लोगों को रोजगार देने वाले श्री राजमल पारेख ने मुंबई में अपने संघर्ष और राजस्थान वसति गृह में बिताए दिनों की मर्मस्पर्शी, रोमांचित करने वाले अनुभव किसी हिन्दी फिल्म की कहानी जैसे लगे जिसमें गरीबी में पला-बड़ा बच्चा अपनी मेहनत और लगन से दुनिया के प्रमुख कारोबारियों में अपना नाम लिखा लेता है।
श्री राजमल पारेख ने कहा कि जब मैं राजस्थान के अपने गाँव से पहली बार मुंबई आया तो पहली बार इतना बड़ा शहर देखकर घबरा गया था। तब मैं एल्फिस्टन स्टेशन के पास एक होस्टल में रहता था। मेरे मित्र श्री पद्म मनोज ने मुझे यहाँ सफल होने के लिए एक ही रास्ता बताया कि जहाँ कहीं भी सीए का बोर्ड देखो उससे काम मांगो। उन्होंने कहा कि मैं अपने गाँव में हिन्दी माध्यम से पढ़ा था और मुझे अंग्रेजी बिल्रकुल नहीं आती थी। लिफ्ट भी पहली बार देखी थी, और मुझे तो लिफ्ट में चढ़ना भी नहीं आता था। पैसे नहीं होते थे तो भूख लगती थी तो खाना खाने होस्टल में आता था। मैं दिन भर मुंबई के फोर्ट क्षेत्र में सीए का बोर्ड देखता और वहाँ जाकर रिसेप्शन पर बैठी लडड़की से नौकरी की माँग करता था। मगर मुझे हर बार वापस कर दिया जाता। मेरे मित्र श्री पद्म मनोज ने मुझसे जब पूछा कि मैं काम कैसे माँग रहा हूँ तो उसने समझाया रिसेप्सनिस्ट से नहीं सीधे उस कंपनी के मालिक से मिलो।

इसके बाद मै 15 दिन में मुंबई के 400 कंपनियों में जाकर उनके मालिकों मिला। इन 15 दिनों में मैने कामचलाउ अंग्रेजी भी सीख ली। एक कंपनी में गया तो उन्होंने मेरी शैक्षणिक योग्यता देखकर कहा कि मैं तुम्हें अगले साल नौकरी दे सकता हूँ। इस तरह मेरा संघर्ष लगातार जारी रहा।

1971 में सीए बनने के बाद मेरे सामने ये समस्या आ गई कि अब कहाँ रहूँगा क्योंकि होस्टल की सुविधा मेरे चात्र रहने तक ही थी, सीए बनने के बाद मैं होस्टल में नहीं रह सकता था।

मैं लोन लेने के लिए एपएसबीसी बैंक गया तो बैंक ने मेरा प्लान तो पसंद किया मगर कहा कि मेरे पास बैलेंस शीट नहीं है। मैं निराश हो गया तो वहाँ एक गुजराती भाई ने मुझे सलाह दी कि एक सीए फर्म में कुछ पैसे देकर चाहे जैसी बैलेंसशीट बना सकते हो। लेकिन मैं अपने मूल्यों से समझौता करके गलत तरीके से काम करना नहीं चाहता था, मैं दूसरे दिन फिर एचएसबीसी बैंक के मैनेजर के पास गया और कहा, अगर मैं फर्जी बैलेंसशीट बनाकर लाऊँ तो आप मुझे लोन दे देंगे….यह सुनकर बैंक का मैनेजर जो स्कॉटिश था, हैरान रह गया उसने मुझसे कहा ये कैसं संभव है तब मैने उनके यहाँ कार्यरत उस गुजराती भाई को आगे किया, उस गुजराती भाई ने बताया कि कोई भी पैसे देकर फर्जी बैलेंसशीट बनवा सकता है। मेरी बात सुनकर बैंक मैनेजर मुझे लोन देने को राजी हो गया।

श्री पारेख ने कहा कि मुंबई की इस भीड़भरी दुनिया में सच्चाई और ईमानदारी से काम करने की ये मेरी पहली जीत थी और इसी जीत के दम पर आज मेरी कंपनी इस मुकाम पर पहुँची है कि इसमें 10 हजार लोग काम कर रहे हैं जिसमें 40 लोग आईआईएम के हैं, 65 सीए हैं, 400 इंजीनियर हैं, और 200 आईआईटी के हैं।

श्री पारेख ने अपने संघर्ष की दास्तान जिस सहजता और सरलता से प्रस्तुत की उसने इस्कॉन सभागृह में बैठे श्रोताओं को रोमांच और अचरज से भर दिया। यह यकीन करना मुश्किल था कि श्री पारेख की कहानी कोई फिल्मी कहानी है कि उसका नायक उनके सामने खड़ा है।

इस अवसर पर यूनियन बैंक के प्रबंध संचालक एवँ अध्यक्ष श्री अरुण तिवारी ने कहा कि सुरेश प्रभु ऐसे रेल मंत्री है जिनके बजट के बाद ये पता लगाना मुश्किल है कि वे किस प्रदेश के हैं। मैने पहली बार ऐसा राजनीतिक व्यक्तित्व देखा है तो जज्बे के साथ व्यावहारिक बात करता है। उन्होंने कहा कि किसी होस्टल को बनाना किसी मंदिर बनाने से भी बड़ा काम है। 

दिन भर चले इस समारोह में कई कार्यक्रम आयोजित किए गए थे। सेवा इंटरनेशनल के श्री संजय हेगड़े ने सीए4सोसायटी के माध्यम से इस बात को रेखांकित किया कि हम समाज सेवा की छोटी से छोटी सोच के माध्यम से समाज को किस तरह लाभ पहुँचा सकते हैं।

वनबंधु परिषद् (फ्रैंडस ऑफ ट्रायबल सोसायटी) की ओर से जाने मे उद्योगपति श्री प्रदीप गोयल ने अपने प्रंजेटेशन के माध्यम से बताया कि उनकी संस्था देश भर के सुदूर आदिवासी अंचलों में किस तरह एकल विद्यालयों के संचालन के साथ ही ग्रा ग्राम स्वराज की अवधारणा पर सफलतापूर्वक कार्य कर रही है। एकल विद्यालय अभियान की सफलता देख सभी लोग हैरत में थे।
इस अवसर पर आयोजन समिति के अश्र्यक्ष श्री मनोज संथेलिया और अनेय पदाधिकारियों ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन श्री सुनील गोयल ने किया और मौजूँ शेरो शायरी से श्रोताओँ और वक्ताओं के बीच सहजता बनाए रखी।

कार्यक्रम में कई जाने माने उद्योगपति, व्यवसाई जो किसी जमाने में इस होस्टल के छात्र रह चुके थे मौजूद थे।

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