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पत्रकारिता विश्वविद्यालय में आयोजित युवा संसद में छाया रहा रूस-यूक्रेन युद्ध

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में युवा संसद प्रतियोगिता का आयोजन

भोपाल। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में आयोजित युवा संसद में रूस-यूक्रेन युद्ध के मामले पर स्थगन प्रस्ताव लाया गया। प्रतिपक्ष ने बहस के दौरान कहा कि यूक्रेन में फंसे भारतीय नागरिकों एवं विद्यार्थियों को सुरक्षित निकालकर भारत लाने की कोई योजना सरकार के पास नहीं है। प्रतिपक्ष के इन आरोपों का जवाब देते हुए सत्ता पक्ष की ओर से कहा गया कि यह पहली बार है, जब कैबिनेट मंत्रियों का दल स्वयं युद्ध क्षेत्र से अपने नागरिकों को वापस लेने गया है। सरकार भारतीय नागरिकों को सुरक्षित लाने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार ने बताया कि ऑपरेशन गंगा के अंतर्गत लगभग सभी नागरिकों की स्वदेश वापसी हो चुकी है। इसके साथ ही युवा संसद में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार के मुद्दों पर सार्थक चर्चा हुई।

पं. कुंजीलाल दुबे राष्ट्रीय संसदीय विद्यापीठ की ओर से आयोजित युवा संसद की शुरुआत राष्ट्रपति के अभिभाषण के साथ हुई। राष्ट्रपति ने अपने अभिभाषण में कोरोना योद्धाओं का आभार व्यक्त किया और कहा कि कोरोना महामारी के इन तीन वर्षों में हमने लोकतांत्रिक मूल्यों, अनुशासन एवं कर्तव्यनिष्ठा को और अधिक मजबूत होते देखा है। उन्होंने कहा कि कोविड-19 के विरुद्ध लड़ाई में दुनिया ने भारत के सामर्थ्य को देखा है। हमने एक वर्ष से भी कम समय में 150 करोड़ से अधिक लोगों के टीकाकरण का रिकॉर्ड बना दिया है। इसके साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का भी उल्लेख अपने अभिभाषण में किया। उल्लेखनीय है कि युवा संसद में नोक-झोंक तो हुई लेकिन संसदीय कार्य बाधित नहीं हुआ।

प्रश्नकाल में जमकर हुई बहस : प्रश्न काल के दौरान प्रतिपक्ष की ओर से युवा सांसदों ने जरूरी और तीखे प्रश्न पूछे, जिनमें शिक्षा, स्वास्थ्य एवं रोजगार के मुद्दे शामिल रहे। इसके साथ ही सत्ता पक्ष की ओर से मंत्री एवं सांसद बने विद्यार्थियों ने बहुत सधे हुए ढंग से और तथ्यों-तर्कों के आधार पर प्रश्नों का जवाब दिया। प्रश्नकाल में समान नागरिक संहिता का मुद्दा छाया रहा। प्रतिपक्ष ने प्रश्न उठाया कि सरकार चोरी-छिपे समान नागरिक संहिता कानून लाने की तैयारी कर रही है। इस कानून को लेकर अल्पसंख्यक समुदायों में असुरक्षा का वातावरण है। इसके उत्तर में सरकार की ओर से कहा गया कि विपक्ष की आशंका निराधार है। अभी ऐसा कोई कानून लाने की मंशा सरकार की नहीं है। किसी को भी असुरक्षित होने की जरूरत नहीं और जब कानून आएगा भी तो संविधान की मर्यादा में ही आएगा। इसके साथ ही शिक्षा नीति, शिक्षा व्यवस्था, रोजगार, एयर इंडिया, जीडीपी, जीएसटी सहित अन्य मुद्दों पर चर्चा हुई। वहीं, ध्यानाकर्षण सूचना के तहत आयुष्मान योजना को लेकर चर्चा हुई।

युवा संसद की प्रस्तुति के दौरान संसदीय विद्यापीठ की संचालक डॉ. प्रतिमा यादव, जनसंचार विभाग के अध्यक्ष एवं युवा संसद आयोजन के समन्वयक डॉ. आशीष जोशी, एडजंक्ट प्रोफेसर गिरीश उपाध्याय, सांस्कृतिक कार्यक्रम समन्वयक डॉ. आरती सारंग, सहायक प्राध्यापक श्री लोकेन्द्र सिंह, सुश्री गरिमा पटेल एवं सुश्री जया केसरवानी सहित अन्य उपस्थित रहे। निर्णायक मंडल में मध्यप्रदेश विधानसभा सचिवालय के अवरसचिव श्री मुकेश मिश्रा और संसदीय कार्यविभाग के अवरसचिव श्री बृजराजेश्वर शर्मा शामिल रहे। इस अवसर पर निर्णायक मंडल ने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन भी किया।

इन्होंने निभाई युवा संसद में भूमिका :

अंजली (राष्ट्रपति), श्रुति सुमन (लोकसभा अध्यक्ष), नीतेश गर्ग (प्रधानमंत्री), ईशा अहमद (नेता प्रतिपक्ष), विवेक कुमार सिंह (गृहमंत्री), जिया जय सिंह (वित्त मंत्री), नीतेश उचबगले (शिक्षा मंत्री ), पूजा सेन (स्वास्थ्य मंत्री), अनामिका पाठक (विदेश एवं नागरिक उड्डयन मंत्री), अमृत प्रकाश (श्रम एवं रोजगार मंत्री), साहिल कुमार (सहकारिता मंत्री), अनुष्का त्यागी (सामाजिक न्याय मंत्री), जितेन्द्र (संसदीय कार्यमंत्री), अमीषा कछावा (सांसद), शिवी कछावा (सांसद), तन्वी (सांसद), प्रतिपक्ष के सांसद राजन, निधि रावतिया, रुचि तिवारी, अंकिता मिश्रा, कपिल मिश्रा, आकांक्षा राज, आकाश कुमार, सजल कुमार, सुरभी विश्वकर्मा, स्नेहा श्रीवास्तव, कैलाश कुशवाह (मार्शल), मोहम्मद सोहेल (मार्शल), शिवी बाजपेयी (महासचिव), सुशील कुमार (रिपोर्टर) एवं अवनीश चौधरी (रिपोर्टर)।

कुलसचिव

(डॉ. अविनाश वाजपेयी)

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