Thursday, April 25, 2024
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सिन्धी कहानी साहित्य की विविधताओं का अनमोल खजाना है – किशन रतनानी

डॉ. डीके श्रीवास्तव कोटा से
राजकीय सार्वजनिक पुस्तकालय में पांच दिवसीय पुस्तक मेला एवं कोटा साहित्यिक महोत्सव में चौथे दिन सिन्धी साहित्य के विभिन्न आयाम, आध्यात्मिक काव्य मंचन और हाड़ौती अंचल के राजस्थानी साहित्य एवं थीएटर पर हुई चर्चा।

कोटा। राजकीय सार्वजनिक मण्डल पुस्तकालय कोटा के द्वारा आयोजित किए जा रहे पंच दिवसीय संभाग स्तरीय पुस्तक मेले में चौथे दिन के प्रथम सत्र का द्वीप प्रज्ज्वलन मुख्य अतिथि किशन रतन पूर्व निदेशक प्रधानमन्त्री कार्यालय, डॉ विनोद जैन भूतपूर्व निदेशक राज्य विधि विज्ञान प्रयोगशाला राजस्थान जयपुर के द्वारा किया ग।

प्रथम सत्र मे भारत सरकार के सूचना प्रसारण के वरिष्ठ अधिकारी किशन रत्नानी ने सिंधी साहित्य में सामाजिक आयाम एवम पर्यावरण विषय पर पत्र वाचन में किशन रत्नानी ने रेखांकित किया है कि सामाजिक आयाम में परिवार, परिवार में हो रहे परिवर्तन, महिला अधिकार, बच्चों के जीवन आदि पर्, पर्यावरण से जुड़े सभी पहलुओं पर, प्रदूषित होते माहौल पर और पर्यावरण के संवर्धन के प्रयासों पर सिन्धी कहानियों, उपन्यासों और बाल साहित्य में बहुत उल्लेख मिलते हैं। रतनानी ने कहा कि किसी मसले को सामने रखती कहानी, किसी घटना का खुलासा करती कहानी, किसी बयान या बर्ताव को बताती कहानी, राजनीतिक, सामाजिक या आर्थिक समझौतों, सौदों,सुलह, संभावनाओं या समझ को सामने लाती कहानियां सिन्धी साहित्य का अनमोल खजाना हैं।

उन्होंने कहा कि इंसान की मनोदशा के एक-एक पल का अक्स पेश करना,हर एक पल में कमी,लघुता, हल्केपन, पल के साथ घटती बढ़ती कसमसाहट, बेबसी, समस्याओं के हल, उपाय, कम लफ़्ज़ों में, प्रभावी तरीके और असरदार अंदाज में बयां करना, जीवन आदर्शों और आशावादी सोच के भाव को देश, समाज और व्यक्तिगत जीवन से जोड़कर देखने का नजरिया ये सभी सिन्धी कहानियों में नज़र आता है।

द्वितीय सत्र मे मांगरोल के लोक कवि एवं गीतकार जगदीश निराला ने मांगरोल की ढाई कड़ी की राम लीला और पात्र विषय पर विस्तार से जानकारी दी और ढाई कड़ी की रामलीला सुना कर मनोरंजन किया। साहित्यकार सी. एल. सांखला बाल साहित्य पर चर्चा करते हुए कहा कि तकनीकी विकास के समय में बाल साहित्य का रूपांतरण भी दूसरी तरह से करना होगा।

विज्ञान कथाओं के साथ तकनीकी से जुड़ना भी जरूरी हो गया है। अब बाल साहित्यकार नए परिवेश की नई रचनाएं लिखें। उन्होंने एक बाल कथा और बाल गीत से सभी को गुदगुदाया। साहित्यकार महेश पंचोली ने राजस्थानी हिंदी के आयाम विषय पर अपने विचार व्यक्त किए। साहित्यकार आनंद हजारी ने भी अपने विचार व्यक्त किए। महेश पंचोली ने राजस्थानी हिंदी के आयाम विषय से संबंधित कविताएं, दोहे मुक्तक प्रस्तुत किए। डॉ.गोपाल कृष्ण भट्ट की पुस्तक गीत संजीवनी (छंदबद्ध गीतों का संग्रह) का विमोचन भी किया गया।

तीसरे सत्र में राजस्थानी गीतों के आयाम पर कवि राजस्थानी हिन्दी के गीतों से महेश पंचोली कवि ने सभी श्रोताओं का मन मोहा खूब दाद पाई दोहे मुक्तक हिन्दी की कविताऐं गीत व राजस्थानी गीत पढ़े किसानों की समस्या नारी की समस्या पर गीतों के माध्यम से बताया पुस्तक पर एक कविता प्रस्तुत की जो सभी को पसन्द आई कवि ने आखिरी में। भाई मुझे कवि रहने दो, कल कल करते झरनों की तरह बहने दो सुनाई श्रोताओं नें दाद दी। पांचवे सत्र में वरिष्ठ एवं बाल साहित्यकार सी. एल. सांखला ने बाल साहित्य की कविता कहानी पर विशेष जानकारी प्रदान की करेले की सब्जी की कहानी सुनाकर यह समझाया की बाल साहित्य मनोरंजन के साथ शिक्षा भी प्रदान करती है साहित्यकारों से निवेदन किया की आप बाल साहित्य लिखते रहें समाज में अपनी बात रखें।

श्री शरद गुप्ता थियेटर आर्टिस्ट ने कहा कि “साहित्य ने मुझे चलना सिखाया, कोरोना पर लिखा गया वह गीत जिसने मुझे प्रसिद्धि दिलाई है, मत निकल, मत निकल, मत निकल, मैंने दो सो से ज्यादा कविता लिखी है, दूसरी कविता की बानगी देखिए।

सप्तम सत्र मे विराट कवि सम्मेलन का आयोजन ख्यातनाम कवि राजेन्द्र पँवार की अध्यक्षता मे युवा कवि डॉ आदित्य जैन, लोकेश मृदुल, अखिलेश, मन्जू रश्मि ने काव्य पाठ किया। अगले सत्र में हिन्दी बाल साहित्य: दशा एवं दिशा पर भगवती प्रसाद गौतम ने अपने विचार रखें, “जब जब भी बस्ती में आता है नया साल”। कृष्णा कमसिन ने बताया कि ” राजस्थान में बाल साहित्यकार सम्मान पहला पुरस्कार भी भगवती प्रसाद गौतम को मिला है।इसका साक्षात्कार डॉ कृष्णा कुमारी ने किया| नवम सत्र में हाड़ौती अंचल का राजस्थानी साहित्य पर युवा कवि नहुष व्यास ने बताया कि, “वर्तमान में हाड़ौती अंचल का राजस्थानी साहित्य समृद्ध है, राजस्थानी भाषा की पुस्तकों की संख्या दो सो पार कर चुकीं है, इसमें गद्य और पद्य दोनों शामिल है, यह हमारे लिए अत्यन्त हर्ष का विषय है।

एकादश सत्र में डाक्टर गोपाल कृष्ण भट्ट “आकुल” की पुस्तक “बाल काव्य मंजूषा” का लोकार्पण किया गया जिसमे कृतित्व पर भगवती प्रसाद गौत्तम ने दिया वही लेखक परिचय डॉ शशि जैन ने दिया | द्वादश सत्र में एक शाम आपके नाम में प्रसिद्ध शायर चांद शेरी ने ‘तू न अमृत का पियारा दे हमें, सिर्फ रोटी का निवाला दे हमें, सिख पाये जहाँ हम इन्सानियत, हमें वह पाठशाला चाहिए’ गजलों से नवाजा।

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