आप यहाँ है :

स्व. किशोरी अमोणकर की यादों में लिपटी सुरमयी श्रध्दांजलि

मुंबई की चौपाल एक ऐसा अद्भुत मंच है जहाँ हर महीने सुधी श्रोता एक नए संस्कार से रससिक्त होते हैं। इस बार चौपाल में महान शास्त्रीय गायिका स्व. किशोरी अमोणकर को उनकी यादों के साथ संगीतमयी श्रध्दांजलि दी गई। स्व. किशोरी ताई की पटु शिष्या सुश्री देवकी पंडित ने ने जब किशोरी जी की बंदिशें प्रस्तुत की तो मौजूद श्रोता शास्त्रीय संगीत की स्वरलहरियों के हर आरोह अवरोह के साथ झूमते रहे। अपनी प्रस्तुति के साथ ही जब उन्होंने ताई से जुड़े खट्टे मीठे संस्मरण प्रस्तुत कर गुरू शिष्य के रिश्तों की एक नई व्याख्या प्रस्तुत की।

उन्होंने बताया कि मात्र 16 साल की उम्र में मैं ताई से शास्त्रीय गायन सीखने गई थी, लेकिन उन्होंने न तो मेरे साथ न किसी और शिष्य के साथ कभी कोई भेदभाव नहीं किया। उनका कड़ा अनुशासन हर शिष्य पर लागू होता था। यहाँ तक कि मैं हर रोज नए कपड़े पहनकर जाती थी तो ताई ने एक दिन टोंक ही दिया कि तू शास्त्रीय संगीत सीखने आती है और वो भी रोज नए नए कपड़े पहनकर। उनकी डॉँट फटकार में भी गहरी आत्मीयता होती थी। एक बार तो मुझे बुखार था और मैं नहीं चाहती थी कि रियाज करने जाउँ लेकिन उन्होंने उस दिन मुझे नया राग गाने और रियाज करने को दिया, और कहा कि अब तेरा बुखार चला जाएगा। और वाकई रियाज करते करते मेरा बुखार कब चला गया पता ही नहीं चला। उन्होंने कहा कि उनके साथ रहकर संगीत तो सीखा ही, इससे ज्यादा इंसान होना सीखा। एक दिन मुझे अपने दोस्तों के साथ फिल्म देखने जाने की इच्छा थी और ये बात मैने उनको बताई तो उन्होंने कहा पहले तू रियाज़ कर सिनेमा दिखाने मैं ले चलूँगी।
जाने माने शास्त्रीय गायक श्री शशि व्यास ने अपने संस्मरणों का पिटारा खोलते हुए कहा, किशोरी ताई मुझे अपना बेटा मानती थी और उन्होंने जीवन भर मेरे साथ ये रिश्ता निभाया। श्री व्यास ने कहा कि किशोरी ताई से हमारा पारिवारिक रिश्ता था, लेकिन शास्त्रीय संगीत में मेरी कोई रुचि नहीं थी, लेकिन मैने पहली बार उनका शास्त्रीय गायन सुना तो कुछ समझ में नहीं आया, लेकिन जब मैं कार्यक्रम खत्म होने के बाद घर जा रहा था तो मेरे कान में उनकी ही आवाज़ गूँज रही थी, बस उस दिन से मैने शास्त्रीय संगीत को सुनना और समझना शुरु किया। श्री व्यास ने बताया कि कैसे वो किशोरी ताई को अपने किसी कार्यक्रम के लिए मना लेते थे। उन्होंने बताया कि एक बार हम कार्यक्रम समाप्त कर घर लौट रहे थे, मै उन्हें उनके घर तक छोड़ने गया तो देर रात हो चुकी थी, उन्होंने कहा कि खाना खाकर ही घर जाओ, मैने कहा मैं तो घर जाकर खाना खा लूँगा। तो उन्होंने कहा, अब इतनी देर रात घर वालों को परेशान मत करो। फिर जब मैने उन्हें खाना बनाते देखा तो येधकर दंग रह गया कि वो खाना भी इतनी तल्लीनता से बना रही थी जैसे गा रही हो। सब्जी का एक एक टुकड़ा वो बराबरी के आकार में काट रही थी और जब रोटी बनाते देखा तो रोटी की गोलाई ऐसी कि कंपास की मदद से बनाने वाला भी ऐसी गोलाई नहीं ला पाए। देश की एक महान कलाकार खाना बनाने में इतनी डूब जाएगी ये देखना मेरे लिए एक अकल्पनीय अनुभव था।

इस अवसर पर श्रीमती अश्विनी भिड़े देशपांडे ने किशोरी जी का पसंदीदा राग राग भूपाली गाकर श्रोताओँ की दाद पाई। तबले पर आशीष और हार्मोनियम पर सिद्धेश ने सुरों की इस यात्रा से श्रोताओं का सीधा तादात्म्य जोड़ा। इसके बाद देवकी पंडित और अश्विनी जी ने जुगल बंदी कर म्हारो प्रणाम राग यमन प्रस्तुत किया तो ऐसा लगा मानो पूरे हाल किशोरी जी खुद इन दोनों कलाकारों की हौसला आफजाई कर रही है।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए श्री शेखर सेन ने कहा कि स्वर्गीय किशोरी ताई पद्मश्री, पद्म विभूषण या संगीत नाटक कला अकादेमी की मानद सदस्य जैसी कई विशिष्टताओं को अपने आप में समेटे हुए थी लेकिन उन्होंने अपनी पहचान शास्त्रीय संगीत से ही बनाई।

चौपाल जिन चार स्तंभों पर टिकी है उनमें श्री अतुल तिवारी, शेखर सेन, श्री अशोक बिंदल और श्री राजेंद्र गुप्ता हैं। मुंबई की ये चौपाल इनके संपर्क, शोध और सृजनात्मक कृतित्व का वो गुलदस्ता है जो हर महीने इसमें शामिल होने वाले मुंबई के सभी रसिक श्रोताओं को साहित्य, कला और संस्कृति की तमाम विधाओं की खुशबुओं से सराबोर कर देता है।

….और हर बार की तरह चौपाल को एक सर्वसुविधा युक्त मंच देने में मुंबई के अंधेरी स्थित भुवंस कल्चरल सेंटर और इसके संयोजक श्री ललित शाह और ललित वर्मा की सक्रियता का उल्लेख करना ज़रुरी है जिनके बगैर चौपाल का इतने शानदार ढंग से आयोजित होना संभव नहीं।



Leave a Reply
 

Your email address will not be published. Required fields are marked (*)

You may use these HTML tags and attributes: <a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <s> <strike> <strong>

सम्बंधित लेख
 

ईमेल सबस्क्रिप्शन

PHOTOS

VIDEOS

Back to Top