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शशि थरुर ने कहा, रामायण और महाभारत पढ़ाई जाए स्कूलों में

जयपुर। कांग्रेस नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने महाभारत और रामायण को स्कूली शिक्षा में शामिल करने की हिमायत की है ताकि आने वाली पीढ़ी अपने इतिहास को बेहतर तरह से समझ पाए। जयपुर साहित्य उत्सव में रविवार को बोलते हुए शशि थरूर ने कहा कि भारतीय महाकाव्यों को शिक्षा का अंग बनाना चाहिए। ‘रिमेम्बरिंग दी राज’ नाम के सेशन में बोलते हुए उन्होंने कहा कि, ” भारत के स्कूलों और कॉलिजों में शेक्सपीयर तो पढ़ाए जा रहे हैं लेकिन हम कालिदास को नहीं पढ़ा रहे।” स्कूलों में भारतीय महाकाव्यों को पढ़ाने की मांग के साथ ही उन्होंने ग्रीग महाकाव्य इलिय़ड और ओदिसी को भी स्कूली शिक्षा में शामिल करने की बात कही। साथ ही उन्होंने कहा कि धर्मनिर्पेक्ष विचार के तहत सम्प्रदायवाद पर आधारित राजनीति थमनी चाहिए।उन्होंने स्कूली शिक्षा को किसी भी राजनीतिक विचारधारा से दूर रखने की बात कही।

इस मौके पर थरूर प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना लगाने से भी नहीं चूके। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी पर महात्मा गांधी के लिए सिर्फ ‘लिप सर्विस’ करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि शासन कर रही पार्टी के बड़े बुद्धिजीवी नेता राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के खिलाफ नफरत का भाव रखते है पर अब वो उन्हें एक हीरो की तरह पेश कर रहे हैं। उन्होंने बीजेपी सांसद साक्षी महाराज का उदाहरण दिया जिन्होंने नाथू राम गोडसे की प्रतिमा बनाने की मांग की थी। उन्होंने इसके बाद अपनी बात रखते हुए कहा कि जब अंग्रेज आए तब भारत सबसे अमीरों देशों में से एक था लेकिन 200 सालों के अंग्रेजी शासन में ये देश दुनिया के सबसे गरीब देशों में शामिल हो गया। ब्रिटिश शासन पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने अपना शासन यहां के लोगों की भलाई के लिए नहीं बल्कि ब्रिटिश हितों के बढ़ाने के लिए चलाया। ब्रिटेन के साथ अभी के संबंधों पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि दोनों देशों की अर्थव्यवस्था समान रूप से आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि जितना जरूरी ये ना भूलना है कि हमारा देश किस स्थिति से गुजरा है उतना ही आवश्यक माफ करना है।



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