Thursday, April 25, 2024
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आम आदमी के सपनों को साकार करता मोदी का सुशासन

प्रधानमंत्री के रूप में श्री नरेंद्र मोदी के शासनकाल के दस वर्ष पूर्ण होने वाले हैं। उन्होंने 26 मई, 2014 को प्रथम बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के पश्चात घोषणा की थी कि उनकी सरकार जनहित के लिए तथा अन्तयोदय के लिए कार्य करेगी। उन्होंने अपनी घोषणा में जो शब्द कहे, उस पर वह शत-प्रतिशत खरे सिद्ध हुए। उनके अब तक के संपूर्ण कार्यकाल पर दृष्टि डालें तो यह सेवा एवं सुशासन पर ही केन्द्रित रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कहना है कि सुशासन राष्ट्र की प्रगति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। हमारा मंत्र, उद्देश्य व सिद्धांत नागरिकों को प्राथमिकता देने का है। मेरा सपना सरकार को लोगों के समीप लाने का है, ताकि वे प्रशासनिक प्रक्रिया के सक्रिय भागीदार बन सकें। सरकारी कामकाज की प्रक्रिया को आसान कर आसानी से सुशासन सुनिश्चित किया जा सकता है। उनका कहना है कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और यहां के नागरिक शासन का हिस्सा बनने के लिए अत्यधिक उत्साहित हैं। एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में, निर्णय लेने की प्रक्रिया में नागरिकों की भागीदारी होना बहुत महत्वपूर्ण घटक है।

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश के शासन में किए गए विभिन्न पहलों और सुधारों के बारे में लिखते रहते हैं। उनके शब्दों में- “130 करोड़ भारतीयों ने फैसला किया है कि वे भारत को आत्मानिर्भर बनाएंगे। आत्मनिर्भरता पर हमारा जोर, वैश्विक समृद्धि में योगदान करने की दृष्टि से प्रेरित है। हमारी सरकार एक ऐसी सरकार है, जो प्रत्येक भारतीय का ध्यान रखती है और उसके लिए चिंतित रहती है। हम लोक-केंद्रित और मानवीय दृष्टिकोण से प्रेरित हैं। ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मंत्र से प्रेरित होकर हमारी सरकार ने लोक-समर्थक शासन को बढ़ावा देने के लिए कई प्रयास किए हैं, जो गरीबों, युवाओं, किसानों, महिलाओं और वंचित समुदाय की मदद करते हैं।”

वास्तव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अन्तयोदय के मूल तत्वों के साथ आगे बढ़ रहे हैं। इस समयावधि में उन्होंने विश्वभर के अनेक देशों में यात्राएं करके उनसे संबंध प्रगाढ़ बनाने का प्रयास किया है। इससे विश्व के अनेक देशों के साथ भारत के संबंध बेहतर हुए तथा उनके साथ अनेक रक्षा एवं व्यापारिक समझौते भी हुए। उन्होंने देश में लोगों के सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षिक विकास के लिए अनेक जनकल्याण की योजनाएं प्रारम्भ की हैं। मोदी सरकार ने विकास का नारा दिया तथा विकास को ही प्राथमिकता दी। विगत लगभग दो दशकों में जिस प्रकार प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने देश के सभी वर्गों के लिए बिना किसी पक्षपात के कार्य किया है, उससे जनता के मध्य एक सकारात्मक संदेश गया है।

विपक्षी दल आरंभ से ही भारतीय जनता पार्टी के प्रति लोगों के मन में विष घोलने का कार्य करते आए हैं। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान भी कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के शीर्ष नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी विशेषकर नरेंद्र मोदी पर गंभीर आरोप लगाए। किन्तु जनता ने भारतीय जनता पार्टी को अपना अपार जनसमर्थन दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जनसाधारण का विश्वास, समर्थन एवं आशीर्वाद प्राप्त हुआ। परिणामस्वरूप जनता ने केंद्र की कांग्रेस सरकार को सत्ता विहीन करके भारतीय जनता पार्टी को केंद्र की बागडौर सौंप दी। नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने तथा उन्होंने जनकल्याण के कार्यों की गंगा प्रवाहित कर दी। इसका परिणाम भी उत्साहजनक रहा। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में जनता ने भारतीय जनता पार्टी को सराहनीय बहुमत दिलाया। इस बार भी नरेंद्र मोदी ही देश के प्रधानमंत्री बने। उन्होंने अपने जनकल्याण के कार्यों की गति को और अधिक तीव्र कर दिया। उनके कार्यों की देश ही नहीं, अपितु विश्वभर में सराहना होने लगी।

विगत मई में अपने कार्यकाल के नौ वर्ष पूर्ण होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक पुस्तिका भी जारी की थी, जिसमें सरकार द्वारा करवाए गये जनकल्याणकारी कार्यों का लेखा- जोखा था। इसके अनुसार सरकार ने देश के  80 करोड़ लोगों के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करवाई। जनधन योजना के अंतर्गत लोगों के 48.27 करोड़ खाते खोलकर उन्हें वित्तीय सेवाओं से जोड़ा गया। सुखद बात है कि इनमें से लगभग 26.54 करोड़ खाते महिलाओं के खोले गए। इस प्रकार महिलाओं को वित्तीय अधिकार प्रदान किए गए। इसके अतिरिक्त 133 करोड़ लोगों के आधार को प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण से जोड़ा गया था तथा उन्हें लगभग 25 लाख करोड़ रुपये की धनराशि वितरित की गई।

बेघर लोगों के लिए ग्रामीण आवास योजना के अंतर्गत 2.5 करोड़ आवासों का निर्माण करवाया गया। विशेष बात यह है कि इन आवासों में से लगभग 70 प्रतिशत में महिलाओं का नाम है अर्थात किसी में वे स्वयं स्वामी हैं तथा किसी में उनकी भागीदारी संयुक्त रूप से सम्मिलित है। इससे महिलाओं को सम्मान मिला तथा उनके आत्मविश्वास में वृद्धि हुई है। अब वे केवल घर की लक्ष्मी ही नहीं हैं, अपितु स्वामी भी हैं। महिलाओं की सुविधा एवं सुरक्षा के लिए 11.72 करोड़ शौचालयों का निर्माण करवाया गया। इसके अतिरिक्त 6.5 करोड़ सामुदायिक शौचालयों का निर्माण करवाया गया। इस प्रकार देशभर के 4335 कस्बों एवं ग्रामों को खुले में शौच से मुक्ति दिलाई गई।

महिलाओं के स्वास्थ्य के दृष्टिगत उन्हें चूल्हे के धुंए से छुटकारा दिलाने के लिए उज्ज्वला योजना के अंतर्गत 9.6 करोड़ एलपीजी सिलेंडर वितरित किए गए। विगत मार्च में सरकार ने सिलेंडर पर 200 रुपये का अनुदान एक वर्ष के लिए बढ़ा दिया है। पूर्व में महिलाओं को दूर से जल लाना पड़ता था, इसलिए जल जीवन मिशन के अंतर्गत 8.67 करोड़ घरों में जल आपूर्ति सुनिश्चित करवाई गई। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के अंतर्गत 69 प्रतिशत महिलाओं को लाभान्वित किया गया। इस योजना के अंतर्गत विनिर्माण, प्रसंस्करण, व्यापार या सेवा क्षेत्र में गैर-कृषि क्षेत्र में लगे आय सृजित करने वाले सूक्ष्म उद्यमों को दस लाख रुपये तक के सूक्ष्म ऋण की सुविधा प्रदान की जाती है।

मोदी सरकार ने कृषकों के कल्याण के लिए भी उल्लेखनीय कार्य किए हैं। देशभर के 11.39 करोड़ छोटे कृषकों को प्रधानमंत्री किसान निधि के माध्यम से प्रत्येक वर्ष छह हजार रुपये प्रदान किए जाते हैं। इसके साथ ही 37.59 करोड़ किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत पंजीकृत किया गया। इसमें प्राकृतिक आपदा के कारण फसल नष्ट होने पर सरकार द्वारा किसानों को क्षतिपूर्ति प्रदान की जाती है।

राष्ट्रीय कौशल विकास मिशन के अंतर्गत 1.37 करोड़ युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान किया गया। सरकार ने बेरोजगारी को कम करने के लिए विशेष पग उठाए, जिसके परिणामस्वरूप युवाओं को रोजगार प्राप्त हो सका। सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2017 से जनवरी 2023 तक 10 लाख सरकारी नौकरियां प्रदान करने अभियान चलाया। लगभग 4.78 करोड़ नए सदस्यों ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन की सदस्यता ली। स्टार्ट अप इंडिया के अंतर्गत 10.1 लाख नए रोजगार के अवसर पैदा किए गए। सरकार उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना के माध्यम से आगामी पांच वर्षों में 60 लाख रोजगार सृजन करने की योजना बना रही है।

शिक्षा के क्षेत्र में भी सरकार ने उल्लेखनीय कार्य किए हैं। इस समयावधि में आईटीआई की संख्या 11847 से बढ़ाकर 14955 की गई। देश में 390 नए विश्वविद्यालयों की स्थापना की गई। सरकार ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी जनकल्याणकारी कार्य किए हैं। इससे पूर्व देश में एम्स की संख्या केवल आठ थी, जबकि आज 23 एम्स हैं। चिकत्सीय महाविद्यालयों की संख्या भी बढ़ाई गई। पूर्व में 641 चिकित्सीय महाविद्यालय थे, जबकि अब इनकी संख्या 1341 है। इसके अतिरिक चिकित्सीय सीटों की संख्या 82466 से बढ़ाकर 152129 कर दी गई, जिससे कि अधिक छात्र प्रवेश ले सकें। इसके अतिरिक टीकारण अभियान चलाकर 220 करोड़ लोगों को कोविड के टीके लगाए गए। इसके साथ ही कोरोना काल के दौरान विदेशों से भारतीयों को स्वदेश लाया गया। इस दौरान लोगों को नि:शुल्क राशन वितरण भी सुनिश्चित किया गया।

परिवहन एवं यातायात के साधनों का भी विकास किया गया। सरकार द्वारा 13 वंदे भारत रेलें प्रारंभ की गई हैं। आगामी तीन वर्षों में 400 स्वदेश निर्मित ट्रेनें इसमें सम्मिलित करने का कार्य जारी है। मोदी के शासनकाल में देश ने लगभग सभी क्षेत्रों में उन्नति की है। इनमें प्रमुख रूप से अयोध्या में राम जन्मभूमि पर मंदिर का निर्माण, अनुच्छेद 370 की समाप्ति, तीन तलाक को अवैध घोषित करते हुए इस पर प्रतिबंध लगाना, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर बनाना आदि सम्मिलित हैं।

जब नरेंद्र मोदी पहली बार प्रधानमंत्री बने थे, उस समय उनके सामने अनेक चुनौतियां मुंह बाएं खड़ी थीं। ऐसी परिस्थिति में प्रधानमंत्री और उनके मंत्रिपरिषद के सहयोगियों के लिए चुनौतियों का सामना करते हुए विकास के पहिये को आगे बढ़ाना सरल कोई कार्य नहीं था। किन्तु उन्होंने चुनौतियों का धैर्यपूर्वक सामना किया। उनका परिश्रम रंग लाया तथा उन्हें सफलता मिली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्ययोजना का आधार सिद्ध करता है कि उनके पास दूरदृष्टि ही नहीं, अपितु स्पष्ट दृष्टि भी है, तभी तो देश प्रत्येक क्षेत्र में निरंतर उन्नति कर रहा है।

भारतीय जनता पार्टी का नेतृत्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शासनकाल में हुए कार्यों से अत्यधिक उत्साहित दिखाई दे रहा है। आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर पार्टी संगठन अपनी रणनीति पर गंभीरता से कार्य कर रहा है। पार्टी नेताओं को पूर्ण आशा है कि केंद्र में तीसरी बार भी भाजपा की सरकार बनेगी।सरकार जल कल्याण की अनेक योजनाओं को लागू करने पर बल दे रही है। नि:संदेह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सुशासन के माध्यम से देश को एक विकसित एवं शक्तिशाली देश के रूप में स्थापित कर रहे हैं।

(लेखक –  लखनऊ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर है। )

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