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‘अंकित ग्राम’, सेवाधाम आश्रम में लावारिस को अपनाया

‘अंकित ग्राम’ सेवाधाम आश्रम में कृष्ण जन्माष्टमी पर्व बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है क्योंकि मानव सेवा तीर्थ के संस्थापक सुधीर भाई गोयल ‘‘भाईजी’’ का जन्म दिवस होता है। इस दिन प्रतिवर्षानुसार का क्रम है कि कृष्ण जी किसी ना किसी पीड़ित को सेवा हेतु सेवाधाम भेज ही देते है। आज भी ऐसा ही हुआ, दोपहर में सुधीर भाई के पास उज्जैन के अजय भार्गव का फोन आया कि कृष्ण जन्माष्टमी पर देवास रोड़ इॅस्कान मंदिर के पास सड़क पर निराश्रित, बिस्तरग्रस्त, मलमूत्र में सना एक पीड़ित पड़ा है क्या आप स्वीकार करेंगे, सुधीर भाई ने हरे कृष्णा हरे कृष्णा कहते हुए आश्रम की एम्बूलैंस भेजी। पीड़ित की स्वयं सुधीर भाई ने अपने हाथों से सेवा की, उसके मलमूत्र में सने कपड़ों को हटाकर, स्नान, केश कर्तन, नाखून कांटे एवं नवीन वस्त्र पहनाये।

सुधीर भाई से कहा कि वह जिन्दगी से निराश हो गया था एवं उसने अपने जीवन में किसी भी प्रकार का नशा, गलत सोहबत, शराब या गलत आचरण नही किया किन्तु फिर उसकी ऐसी दुर्गति क्यों, भगवान कहां है। तब सुधीर भाई ने उसकी मुस्कान देखकर कहा कि भगवान तो तुम्हारी मुस्कान में है। प्रभु ने तुम्हारी परीक्षा ली एवं आज श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर्व पर तुम्हारी सेवा के लिए सेवाधाम भेजा है। इस प्रकार 11 राज्यों से आए अतिथियों के समक्ष आश्रम की परम्परानुसार मंगल तिलक, माला एवं मिष्ठान्न खिलाकर प्रवेश दिया।

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